Homeराजनीतिराहुल गाँधी का विलाप और प्रलाप दोनों शुरू हो चुका है, चिदु ने भी...

राहुल गाँधी का विलाप और प्रलाप दोनों शुरू हो चुका है, चिदु ने भी कोरस में दिया साथ

श्री गाँधी की इस प्रतिक्रिया से आम लोग यही मान रहे हैं कि कॉन्ग्रेस अपनी हार के कारण बनाने में व्यस्त है। ये इनका पैटर्न है कि इनको ज्योंहि भीतर से खबर आनी शुरू होती है कि कॉन्ग्रेस की हालत ख़राब है, ये तमाम अजीबोगरीब कारण, बिना पूछे ही बताने लगते हैं। श्री चिदंबरम ने भी मालिक की बातों का मान रखते हुए, कोरस में पार्श्व गायन किया है।

एग्जिट पोल्स आने शुरू ही हुए हैं, और जैसा कि लोगों को अपेक्षा थी, कॉन्ग्रेस के चिराग और लिबरल गिरोह के चहेते ‘कॉनज़ूमेट पॉलिटिशियन’ (पूर्ण राजनेता) श्री राहुल गाँधी ने अपने ट्विटर से प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है।

राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए कहा है, “इलेक्टोरल बॉन्ड्स से लेकर, EVM और चुनाव की तारीखों से छेड़छाड़, NaMo टीवी, ‘मोदी की सेना’, केदारनाथ में हुई नौटंकी, चुनाव आयोग का मोदी और उनके गैंग के सामने घुटने टेकने की बात सबके सामने है। एक समय में चुनाव आयोग एक सम्मानित संस्था हुआ करती थी, अब नहीं!”

श्री चिदंबरम ने भी मालिक की बातों का मान रखते हुए, कोरस में पार्श्व गायन किया है। उन्होंने भी ट्वीट करते हुए लिखा है, “हमारा आरोप यही रहा है कि चुनाव आयोग नींद में था। अब हम आगे बढ़ कर कह सकते हैं कि चुनाव आयोग नेअपनी स्वतंत्रता और अधिकारों को सरेंडर कर दिया है। ये शर्म की बात है।”

श्री गाँधी की इस प्रतिक्रिया से आम लोग यही मान रहे हैं कि कॉन्ग्रेस अपनी हार के कारण बनाने में व्यस्त है। ये इनका पैटर्न है कि इनको ज्योंहि भीतर से खबर आनी शुरू होती है कि कॉन्ग्रेस की हालत ख़राब है, ये तमाम अजीबोगरीब कारण, बिना पूछे ही बताने लगते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -