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‘शरिया और कुरान के खिलाफ है ये’: Pak में बलात्कारियों को नपुंसक बनाने वाला कानून हुआ रद्द, बताया गया गैर-इस्लामी

पाकिस्तान सरकार ने कहा कि CII ने बलात्कारियों के लिए केमिकल कास्ट्रेशन की सजा का विरोध करते हुए इसे इस्लाम के खिलाफ बताया था। बता दें कि CII एक ऐसा विभाग है जो मजहबी मामलों में सरकार और संसद दोनों को परामर्श दे सकती है।

पाकिस्तान सरकार ने आदतन रेप के अपराधियों को रासायनिक प्रक्रिया के जरिए नपुंसक बनाने के लिए लाए गए आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक 2021 को रद्द कर दिया है। इस कानून का ‘काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (CII)’ ने विरोध करते हुए इसे गैर इस्लामिक बताया था। इस कानून को रद्द किए जाने की जानकारी पाकिस्तान की कानून और व्यवस्था के लिए संसदीय सचिव मलीहा बोखारी ने दी है।

पाकिस्तान के कानून मंत्री फारोग नसीम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोखारी ने कहा कि सीआईआई ने बलात्कारियों के लिए केमिकल कास्ट्रेशन की सजा का विरोध करते हुए इसे इस्लाम के खिलाफ बताया था। बता दें कि सीआईआई एक ऐसा विभाग है जो मजहबी मामलों में सरकार और संसद दोनों को परामर्श दे सकती है।

बुधवार (17 नवंबर 2021) को संसद के संयुक्त सत्र में पारित होने से पहले इस विधेयक से हटा दिया गया था। बोखारी ने कहा, “संविधान का अनुच्छेद 227 यह भी गारंटी देता है कि सभी कानून शरिया और पवित्र कुरान के तहत होने चाहिए, इसलिए हम कोई ऐसे कानून पारित नहीं कर सकते हैं जो इन मूल्यों के खिलाफ हो।”

इसके साथ ही बोखारी ने पिछले कानून को घटिया बताया। मलीहा ने कहा, “पिछले कानून में काफी खामियाँ थीं, जो कि पीड़ितों को न्याय दिलाने में बाधक बन रही थी। इसलिए त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक नया कानून पेश किया गया है।

गौरतलब है कि पिछले साल 2020 में ही प्रधानमंत्री इमरान खान ने सैद्धान्तिक मंजूरी दे दी थी, लेकिन इसे इसी साल नवंबर में ही पाकिस्तान की संसद में पारित किया गया था। हालाँकि, इसका शुरू से ही विरोध किया जा रहा है। कई इस्लामिक संगठन इसे शरिया कानून के खिलाफ बता रहे हैं। इसमें लिखा है, “केमिकल कास्ट्रेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे प्रधानमंत्री द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विधिवत अधिसूचित किया जाता है। इससे एक व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी संभोग करने में असमर्थ हो जाता है। इसे अदालत द्वारा दवाओं के माध्यम से निर्धारित किया जाता है। ये मेडिकल बोर्ड द्वारा संचालित होता है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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