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सारे बच्चे मुस्लिम, इसलिए रविवार को भी पढ़ाई: यूपी के भी एक स्कूल में ‘जुमे वाली छुट्टी’, संचालक ने कहा- अभी शिक्षा विभाग की मान्यता नहीं

संचालक हामिद अंसारी खुद कहते हैं स्कूल अभी मान्यता प्राप्त नहीं है और केवल सोसायटी रजिस्टर्ड है। मान्यता दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास आवेदन दिया गया है। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी कहती हैं कि उन्हें इस स्कूल की कोई जानकारी नहीं है।

झारखंड के कुछ इलाकों से बीते दिनों ऐसे स्कूलों का पता चला था जो इस्लामी स्कूल न होने के बावजूद इस्लामी नियमों से चल रहे थे। अब ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित सैंड़भर गाँव से सामने आया है। पता चला है कि वहाँ भी स्कूल में रविवार को नहीं बल्कि जुमे के दिन पर छुट्टी होती है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित प्रवीण वशिष्ठ की रिपोर्ट के अनुसार, गाँव का सैंडभर पब्लिक स्कूल अभी मान्यता प्राप्त भी नहीं हैं। लेकिन वहाँ मुस्लिम छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे में उन्हें साप्ताहिक अवकाश रविवार को नहीं बल्कि जुमे के दिन दिया जाता है।

रिपोर्ट बताती है कि ये गैर मान्यता प्राप्त स्कूल 2021 से संचालित हो रहा है। इसे किराए के भवन में चलाया जाता है। इसके संचालक हामिद अंसारी खुद कहते हैं स्कूल अभी मान्यता प्राप्त नहीं है और केवल सोसायटी रजिस्टर्ड है। मान्यता दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के पास आवेदन दिया गया है। लेकिन तब तक, यहाँ शुक्रवार के दिन छुट्टी इसलिए रखते हैं क्योंकि यहाँ आने वाले सारे बच्चे मुस्लिम हैं।

गौरतलब हो कि एक ओर स्कूल संचालक हामिद अंसारी कह रहे हैं कि मान्यता दिलाने के लिए आवेदन दे दिया गया है। वहीं दूसरी ओर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि उन्हें ऐसे स्कूल की जानकारी नहीं है। शुक्रवार को छुट्टी और रविवार को स्कूल चलाना तो नियम के खिलाफ है। इसकी मामले में जाँच करवाकर आवश्यक कार्रवाई होगी।

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की कि वह बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में भेजें। गाँव के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाएँ। किसी भी ऐसे स्कूल में न भेजें जो मान्यता प्राप्त ही नहीं है। अधिकारी ने कहा कि राज्य में ऐसे स्कूलों को नहीं चलने दिया जाएगा जिन्हें मान्यता न प्राप्त हो।

बता दें कि इससे पहले खबर झारखंड से खबर आई थी कि वहाँ पर सरकारी स्कूलों को उर्दू स्कूल बनाने का प्रयास चल रहा है। छानबीन के दौरान मात्र 5 जिलों में 70 ऐसे स्कूल मिले थे जो सामान्य से उर्दू स्कूल बनाए गए और वहाँ बच्चों की छुट्टी का दिन, प्रार्थना का तरीका सब बदलता गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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