Homeबड़ी ख़बरराम मंदिर: 0.3 एकड़ विवादित भूमि को छोड़ 67 एकड़ पर मोदी सरकार ने...

राम मंदिर: 0.3 एकड़ विवादित भूमि को छोड़ 67 एकड़ पर मोदी सरकार ने SC में चल दिया बड़ा दाँव

कोर्ट ने अगर केंद्र सरकार के पक्ष में फ़ैसला दिया तो 67 एकड़ में से 42 एकड़ ज़मीन राम जन्मभूमि न्यास को लौटाई जाएगी। हिन्दू संगठनों में सरकार के इस क़दम के बाद नई आस जगी है।

राम मंदिर मामले में केंद्र सरकार ने एक बड़ा क़दम उठाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से विवादित ज़मीन को छोड़ कर बाकी की ज़मीन से यथास्थिति हटाने की माँग की है। बता दें कि 1993 में केंद्र सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण एक्ट के तहत मंदिर और उसके आसपास की ज़मीन का अधिग्रहण कर लिया था। इसके बाद उस ज़मीन को लेकर दायर की गई सारी याचिकाओं को भी ख़त्म कर दिया गया था। इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

याचिका की PDF का स्क्रीशॉट

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की है, उसके अनुसार 0.3 एकड़ के ‘विवादित’ क्षेत्र के अलावा बाकी के 67 एकड़ की भूमि को उनके मालिकों को लौटाया जा सकता है। इसी 67 एकड़ के लिए केंद्र सरकार ने कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल की है। अगर कोर्ट ने केंद्र सरकार के पक्ष में फ़ैसला दिया तो यह ज़मीन राम जन्मभूमि न्यास सहित सभी संबंधित पक्षों को लौटाई जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन 67 एकड़ में से लगभग 42 एकड़ भूमि राम जन्मभूमि न्यास की है। अदालत ने 1994 में कहा था कि जिसके पक्ष में निर्णय आएगा, उसे ही जमीन दी जाएगी। अदालत ने केंद्र सरकार को इस ज़मीन को ‘कस्टोडियन’ की तरह रखने को कहा था।

याचिका की PDF का स्क्रीशॉट

हाल ही में समाचार एजेंसी एएनआई की सम्पादक स्मिता प्रकाश को दिए साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा था कि अदालती प्रक्रिया ख़त्म होने के बाद सरकार की जो भी जवाबदेही होगी, उस दिशा में कार्य किया जाएगा। उन्होंने अदालती प्रक्रिया ख़त्म होने का इंतज़ार करने की भी सलाह दी थी। तभी से यह क़यास लगाए जा रहे थे कि सरकार इस दिशा में कोई न कोई क़दम उठा सकती है।

याचिका की PDF का स्क्रीशॉट

राम मंदिर मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी भाजपा को घेरा था। कुछ दिनों पहले संघ के सहकार्यवाहक भैय्याजी जोशी ने कुंभ मेले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि 2025 तक राम मंदिर का निर्माण हो जाना चाहिए।

याचिका की PDF का स्क्रीशॉट

केंद्र सरकार के ताज़ा कदम का विश्व हिन्दू परिषद (VHP) व अन्य हिन्दू संगठनों ने स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट में बार-बार राम मंदिर मसले की सुनवाई टालने से नाराज़ चल रहे हिन्दू संगठनों में सरकार के इस क़दम के बाद नई आस जगी है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -