Homeविविध विषयमनोरंजन'रॉकेट्री' को मिला नेशनल अवॉर्ड तो AR रहमान ने भी दी बधाई, बताया 'ओपनहाइमर'...

‘रॉकेट्री’ को मिला नेशनल अवॉर्ड तो AR रहमान ने भी दी बधाई, बताया ‘ओपनहाइमर’ से बेहतर: R माधवन बोले – निःशब्द हूँ

बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड पाने वाली फिल्म 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' नंबी नारायणन नामक वैज्ञानिक के जीवन पर आधारित है। उन पर जासूसी का झूठा आरोप लगा था। यह फिल्म 1 जुलाई 2022 को सिनेमाघरों में आई थी। आर माधवन ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लिखा, इसे डायरेक्ट किया और इसमें लीड रोल निभाया।

आर माधवन के एक्शन, डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को 69वें नेशनल अवॉर्ड्स में बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला है। इस पर दो ऑस्कर और दो ग्रैमी अवॉर्ड पाने वाले गायक और संगीतकार एआर रहमान ने माधवन को बधाई दी है। साथ ही उनकी फिल्म को ‘ओपेनहाइमर’ से बेहतर बताया है।

‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर एआर रहमान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान किए अपने पुराने पोस्ट को रीपोस्ट किया। साथ ही लिखा, “बधाई हो माधवन। मुझे आज भी कान्स में आपकी फिल्म देखने का प्रभाव याद है। अब कबूल करना होगा कि मुझे आपकी फिल्म ओपेनहाइमर से ज्यादा पसंद आई।”

एआर रहमान के इस पोस्ट पर जवाब देते हुए आर माधवन ने उन्हें धन्यवाद दिया। साथ ही लिखा, “सर आप हमेशा से मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं, लेकिन आज मैं नि:शब्द हूँ। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मैंने जितना सोचा था कि मैं कर सकता हूँ, उससे कहीं अधिक मोटिवेटेड फील कर रहा हूँ। आप हर मायने में अद्भुत हैं और टीम रॉकेट्री आपको बता नहीं सकती कि इसका हमारे लिए क्या अर्थ है। भगवान का आशीर्वाद आप पर बना रहे।”

बता दें कि इससे पहले साउथ के सुपर स्टार रजनीकांत ने भी आर माधवन की तारीफ की थी। यही नहीं, उन्होंने नंबी नारायण की मौजूदगी में माधवन को सम्मानित भी किया था। वहीं अनुपम खेर ने फिल्म की तारीफ करते हुए कहा था कि इसे देखते-देखते वह रो पड़े थे।

गौरतलब है कि 69वाँ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार साल 2021 की फिल्मों के लिए दिया गया है। बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड पाने वाली फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ नंबी नारायणन नामक वैज्ञानिक के जीवन पर आधारित है। उन पर जासूसी का झूठा आरोप लगा था। यह फिल्म 1 जुलाई 2022 को सिनेमाघरों में आई थी। आर माधवन ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लिखा, इसे डायरेक्ट किया और इसमें लीड रोल निभाया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -