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नेपाल तक भागा, सिम बदली, दाढ़ी कटवाई… फिर भी पकड़ा गया अनवर कादरी: लव जिहाद फंडिंग केस में फरहाना-आयशा की मदद से छिपने तक के कई खुलासे, दूसरी बीवी के गहने बेचकर कर रहा था गुजारा

इंदौर में लव जिहाद फंडिंग मामले के मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी ने 75 दिन की फरारी के बाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर 3 सितंबर 2025 तक रिमांड पर लिया है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। नेपाल भागने, इंटरनेशनल सिम इस्तेमाल करने, दूसरी बीवी और बेटी की मदद से छिपने जैसे कई हथकंडे अपनाए गए। अब पुलिस उसकी फंडिंग नेटवर्क, संपत्ति और रिश्तेदारों की भूमिका की भी जाँच कर रही है।

फरारी और गिरफ्तारी की कहानी

एफआईआर दर्ज होने के बाद अनवर कादरी पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। वह इंदौर से भोपाल और फिर दक्षिण भारत होते हुए नेपाल के काठमांडू पहुँचा। वहाँ वह एक होटल में रुका था, जिसका बिल उसकी बेटी आयशा ने दिल्ली से चुकाया। आयशा लगातार अपने अब्बू की मदद कर रही थी।

आयशा ने सुप्रीम कोर्ट में अनवर कादरी की अग्रिम जमानत के लिए भी कोशिश की थी, लेकिन आयशा की गिरफ्तारी के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि अनवर कादरी की दूसरी बीवी फरहाना भी नेपाल में उसके साथ थी। वह इंदौर की गतिविधियों की जानकारी उसे देती थी।

पैसों की तंगी और नेपाल से वापसी

पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान अनवर कादरी को पैसों की दिक्कत होने लगी थी। उसने अपनी दूसरी बीवी फरहाना के सोने के कंगन बेचकर गुजारा किया। वह नेपाल में खुद को एक व्यापारी बताता था और इंटरनेट कॉल के जरिए परिवार और दोस्तों से संपर्क में रहता था, ताकि पुलिस उसकी लोकेशन का पता न लगा सके।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त बयानों के बाद अनवर कादरी को अपनी संपत्ति जब्त होने या एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसी डर से उसने इंदौर लौटकर कोर्ट में सरेंडर करने का फैसला किया। सरेंडर से ठीक एक दिन पहले पुलिस उसकी संपत्ति जब्त करने वाली थी।

कानूनी मामले और आरोप

अनवर कादरी पर कई गंभीर आरोप हैं। वह हिंदू लड़कियों को लव जिहाद के लिए फँसाने वाले मुस्लिम युवकों को पैसे देता था। गिरफ्तार किए गए आरोपित साहिल खान और अल्ताफ खान ने पूछताछ में बताया था कि अनवर कादरी ने उन्हें लव जिहाद के लिए ₹3 लाख दिए थे।

वह लड़कियों से दोस्ती करने के लिए ‘अर्जुन’ और ‘राज’ जैसे नाम भी इस्तेमाल करता था। अनवर कादरी के खिलाफ इंदौर के अलग-अलग थानों में 20 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें जानलेवा हमला, डकैती और अवैध हथियार रखना जैसे आरोप शामिल हैं। इंदौर कलेक्टर ने उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई का आदेश भी दिया था।

मामला क्या है?

यह मामला जून 2025 में सामने आया, जब दो पीड़ित लड़कियों ने साहिल खान और अल्ताफ खान के खिलाफ लव जिहाद और धर्मांतरण का आरोप लगाया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अनवर कादरी का नाम लिया और बताया कि वह हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम युवकों को ₹1 लाख देता था और निकाह कराने पर ₹2 लाख देता था।

इस खुलासे के बाद से ही कादरी फरार चल रहा था। पुलिस ने उस पर ₹40 हजार का इनाम भी रखा था और उसकी बेटी आयशा को भी गिरफ्तार किया था। अब कादरी के पकड़े जाने से इस मामले की और भी परतें खुल सकती हैं।

इजरायल से बदला लेने की कर रहा था तैयारी, तभी आसमान से बरसीं मिसाइलें: यमन पर कब्जा जमाए हूतियों का प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी मंत्रियों समेत ढेर

यमन की राजधानी सना में बीते 28 अगस्त को हुए इजरायली हवाई हमले ने मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला दिया। इस हमले में हूती विद्रोहियों की सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत हो गई है, जिसकी पुष्टि खुद हूतियों ने दो दिन बाद की है।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि इजरायल के लिए एक बड़ी जीत थी, जिसने सबसे वरिष्ठ हूती नेता को निशाना बनाया। अल-रहावी को पिछले साल ही प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था और अल-रहावी की मौत इजरायल-हूती संघर्ष की दिशा को बदल सकती है।

हमले के वक्त अल-रहावी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सना के बाहरी इलाके में सरकारी सेमिनार में मौजूद थे। उसी दौरान टीवी पर उनके नेता अब्दुल-मलिक अल-हौती का पहले से रिकॉर्ड किया गया भाषण चलाया जा रहा था, जिसमें वे गाजा संघर्ष पर इजरायल से बदला लेने की धमकी दे रहे थे।

हवाई हमले ने हूती नेतृत्व की कमजोरियों को उजागर किया और यह स्पष्ट कर दिया कि इजराइल अब केवल बुनियादी ढाँचे पर नहीं बल्कि नेतृत्व पर सीधे वार करने की रणनीति अपना रहा है। अहमद अल-रहावी कभी यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के करीबी रहे थे और 2014 में हूतियों के साथ जुड़े।

हाल ही में उन्होंने इजराइल पर हमलों का समर्थन करते हुए कहा था कि यमन फिलिस्तीनी संघर्ष के लिए बहुत कुछ सहने को तैयार है। उनकी हत्या के बाद हूती नेतृत्व में गहरा आघात है। सर्वोच्च राजनीतिक परिषद के प्रमुख महदी अल-मशात ने बदला लेने की घोषणा की और विदेशी कंपनियों को इजरायल छोड़ने की धमकी दी।

इजराइली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे हूतियों पर ‘करारा झटका’ बताया और कहा कि यह तो बस शुरुआत है। विश्लेषकों के अनुसार, यह हमला इजरायल की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अब हमास और हिज़्बुल्लाह की तरह हूतियों के नेतृत्व को भी सीधे निशाना बना रहा है।

क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी ने कहा कि यह बदलाव हूतियों के कमांड ढाँचे को भारी खतरे में डालता है। हूती अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही सक्रिय हैं। उन्होंने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिप्स को निशाना बनाया और इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुआ।

हाल ही में उन्होंने इजरायल की ओर क्लस्टर हथियारों से लैस बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जो 2023 के बाद अपनी तरह का पहला हमला था लेकिन अल-रहावी पर हुआ ताजा हमला दिखाता है कि इजरायल अब केवल हमास या लेबनान के हिज़्बुल्लाह तक सीमित नहीं है।

सीरिया में असद सरकार के ठिकाने, ईरान समर्थक मिलिशिया और अब यमन के हूती सब इजरायली निशाने पर हैं। मानो इजरायल अपने आखिरी बड़े दुश्मनों तक का सफाया करने की ओर बढ़ रहा हो। गाजा से लेकर बेरूत, दमिश्क से लेकर सना तक, इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहा है और धीरे-धीरे हर दुश्मन की रीढ़ तोड़ने की कोशिश में है।

‘खुद कुत्ते भी मुझे शुभकामनाएँ भेज रहे हैं’: जस्टिस विक्रम नाथ ने मशहूर होने का दिया श्रेय, आवारा कुत्तों के समर्थन में दिया था फैसला, CJI का भी जताया आभार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ का कहना है कि आवारा कुत्तों वाले मामले ने उन्हें दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। उन्होंने कहा, “अब तक मैं सिर्फ अपनी थोड़ी-बहुत कानूनी सेवाओं के लिए ही जाना जाता था लेकिन अब आवारा कुत्तों वाले मामले की वजह से ना सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में लोग मुझे जानने लगे हैं।”

यह बातें जस्टिस विक्रम नाथ ने केरल में आयोजित नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) और केरल स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (KeLSA) ने तिरुवनंतपुरम की ओर से आयोजित ‘ह्यूमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्रेंस’ में कहीं। इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज भी शामिल हुए थे।

जस्टिस नाथ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने यह मामला उन्हें सौंपा। उन्होंने बताया कि हाल ही में जब वह ‘Law Asia POLA Summit’ में शामिल हुए तो वहाँ विदेशों से आए वकील संघों के अध्यक्षों ने उनसे आवारा कुत्तों के केस के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझे बहुत खुशी हुई कि अब विदेशों में भी लोग मुझे जानने लगे हैं।”

जस्टिस नाथ ने यह भी कहा कि उन्हें लोगों के साथ-साथ कुत्तों से भी आशीर्वाद मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों के संदेश आए हैं कि सिर्फ कुत्ता प्रेमी ही नहीं बल्कि खुद कुत्ते भी मुझे शुभकामनाएँ भेज रहे हैं।”

गौरतलब है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने 11 अगस्त 2025 को एक आदेश दिया था। इसमें कहा गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें शेल्टर होम बनाकर शिफ्ट किया जाए।

इस आदेश के बाद एनिमल राइट ऐक्टिविस्ट्स और तमाम डॉग लवर्स ने इसका खूब विरोध किया। CJI ने यह केस जस्टिस नाथ की अध्यक्षता में बनाई गई तीन जजों वाली बेंच को सौंपा था।

इसके बाद 22 अगस्त 2025 को जस्टिस नाथ की बेंच ने 11 अगस्त वाले आदेश पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद उसी जगह वापस छोड़ा जाए जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।

यूनिवर्सिटी के नाम 135 एकड़ जमीन लेकर नहीं किया किया काम, लद्दाख प्रशासन ने रद्द की डील तो विक्टिम कार्ड खेलने पर उतरे ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक: ‘विचहंट’ के नाम पर बने पाकिस्तानियों का प्रोपेगेंडा टूल

लद्दाख प्रशासन द्वारा जमीन का आवंटन रद्द करने के कुछ ही दिनों बाद ही पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक का समर्थन करना शुरू कर दिया है।

वांगचुक फरवरी 2025 में एक ‘क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस’ में हिस्सा लेने पाकिस्तान गए थे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के हालिया फैसले को ‘लद्दाख पर हमला‘ करार दिया था।

इस बीच, पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स झूठी कहानियाँ फैलाकर ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सोनम वांगचुक को भारत सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है।

वांगचुक के समर्थक में पाकिस्तानी ट्वीट्स

ये अकाउंट्स जानबूझकर भारत के आंतरिक मामले में दखल देकर यह प्रचार कर रहे हैं कि लद्दाख प्रशासन का फैसला एक ‘राजनीतिक चाल’ है, जिससे राज्य का दर्जा मांगने वाली आवाजों को दबाया जा सके।

क्या है पूरा विवाद?

साल 2018 में स्थानीय प्रशासन ने लेह के फियांग गाँव में करीब 135 एकड़ जमीन ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक और उनके हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) को आवंटित की थी।

यह जमीन 40 साल की लीज पर दी गई थी लेकिन इस साल 21 अगस्त को लेह के डिप्टी कमिश्नर ने पूरा आवंटन रद्द कर दिया।

प्रशासन को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि आवंटित की गई जमीन का इस्तेमाल उस काम के लिए नहीं हो रहा था, जिस पर दोनों पक्षों ने सहमति बनाई थी।

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक आज तक उस 135 एकड़ जमीन पर मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी नहीं बना पाए हैं। साथ ही, उन्होंने न तो लीज एग्रीमेंट पर अमल किया और न ही जमीन को औपचारिक तौर पर तहसीलदार को सौंपा।

अपने आदेश में लेह के डिप्टी कमिश्नर रोमिल सिंह डोंक ने लिखा, “आवंटन आदेश 5-5-2019 को खत्म हो चुका है और आवंटन आदेश की शर्त संख्या IV के तहत इसे रद्द माना जाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह जमीन अब ‘राज्य को सौंप’ दी गई है और तहसीलदार को निर्देश दिया गया कि वह जमीन को खाली कराए और राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट करे।

‘विचहंट’ के झूठे दावे

लद्दाख प्रशासन के आदेश के बाद से ही ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक खुद को सरकारी दबाव का शिकार दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

उन्होंने दावा किया है, “HIAL का जमीन आवंटन रद्द करने का फैसला उस वक्त लिया गया है जब लद्दाख के लोग अपने अधिकार, सुरक्षा और लोकतंत्र की माँग कर रहे हैं। यह एक तरह से विचहंटिंग लगती है।”

इसी तरह के ‘विचहंट’ वाले दावे लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे राजनीतिक समूहों ने भी किए हैं। हालाँकि, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

सच, जो सोनम वांगचुक नहीं बताना चाहते

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने कई सालों से 135 एकड़ जमीन का किराया तक नहीं चुकाया है, जिसकी मौजूदा कीमत 27 से 30 करोड़ रुपए के बीच है। जबकि डिप्टी कमिश्नर ने क्लॉज 4(b) के तहत नोटिस भी जारी किए थे।

साथ ही, लीज एग्रीमेंट के एक साल के भीतर यूनिवर्सिटी भी नहीं शुरू की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि HIAL ने ‘यूनिवर्सिटी का दर्जा’ पाने के लिए आवेदन भी 2022 में किया, यानी आवंटन के 4 साल बाद।

इससे साफ झलकता है कि सोनम वांगचुक ने लीज एग्रीमेंट का पालन नहीं किया लेकिन फिर भी वे झूठे बहाने बनाकर प्रशासनिक अड़चनों का रोना रो रहे हैं।

इतना ही नहीं, HIAL ने 3 साल तक लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) से संपर्क नहीं किया। बल्कि सीधे लेह के डिप्टी कमिश्नर से बात करने की कोशिश की।

इसके अलावा, सोनम वांगचुक ने दावा किया कि HIAL को 14 करोड़ रुपए के प्रीमियम से छूट मिली थी। लेकिन LAHDC ने ऐसा कोई अनुरोध कभी मंजूर ही नहीं किया। इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी तरह की छूट मौजूद नहीं है।

असल में, HIAL के खिलाफ जमीन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें दर्ज हुईं। फरवरी 2020 में फियांग गाँव के सरपंच और नम्बदार ने LAHDC को इस बारे में पत्र भी भेजा था।

इन हालात और लीज एग्रीमेंट के कई उल्लंघनों को देखते हुए लद्दाख प्रशासन को मजबूरन HIAL का आवंटन रद्द करना पड़ा।

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने न तो लीज की शर्तों का पालन किया और न ही LAHDC की शिकायतों को सुलझाया। कई सालों तक भुगतान न करने के बावजूद अब वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनने का नाटक कर रहे हैं।

HIAL और सोनम वांगचुक की ये सारी गड़बड़ियाँ अब प्रशासनिक रिकॉर्ड, नोटिस और लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के एग्जीक्यूटिव काउंसलर द्वारा दर्ज हो चुकी हैं।

पाकिस्तान से मिल रहा वांगचुक को समर्थन

यह साफ है कि ‘एक्टिविस्ट’ भले ही बौखलाए हुए हैं लेकिन असल चिंता की बात यह है कि सोनम वांगचुक को सीमा पार से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।

यह एक गंभीर मसला है क्योंकि पाकिस्तान आधे-अधूरे सच और साजिश की थ्योरी फैलाकर भारत में मतभेद पैदा करना चाहता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी हाल के दिनों में कई झूठ फैलाए गए हैं जिनका PIB ने खुलासा किया है।

‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक सच्चाई न बताकर सार्वजनिक संसाधनों के गलत इस्तेमाल को छिपाकर पाकिस्तान को भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने में मदद कर रहे हैं।

रूस और कनाडा में श्रीराम की भक्ति, पुलवामा-श्रीनगर में ‘खेलो इंडिया’ को बढ़ावा: ‘मन की बात’ में PM मोदी ने की बिहार की ‘सोलर दीदी’ की तारीफ, UPSC की परीक्षा में चूकने वाले युवाओं के लिए प्रतिभा सेतु पोर्टल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 125वां एपिसोड में भारत के लोगों को चीन से संबोधित किया। पीएम ने संबोधन में स्वदेशी का मंत्र दिया। उन्होंने रूस के व्‍लाडिवोस्‍टक में रामायण की थीम पर लगी पेंटिंग्‍स प्रदर्शनी का भी उल्‍लेख किया। पीएम ने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे देशभर के कई शहरों पर भी चिंता जताई।

प्राकृतिक आपदा से लोगों का जीवन संकट में फँसा: PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा, “मॉनसून के इस मौसम में प्राकृतिक आपदाएँ देश की कसौटी कर रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हमने बाढ़ और भूस्खलन का कहर देखा है। कहीं घर उजड़ गए, कहीं खेत डूब गए। परिवार के परिवार उजड़ गए, पानी के तेज बहाव में कहीं पुल बह गए, सड़के बह गईं और लोगों का जीवन संकट में फँस गया।”

उन्होंने आपदा की घड़ी में रेस्कयू ऑपरेशन की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा, “आपदा की घड़ी में सेना मददगार बनकर सामने आई। स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर, प्रशासन, संकट की इस घड़ी में सभी ने हर संभव प्रयास किया। मैं ऐसे हर नागरिक को हृदय से धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इस कठिन समय में मानवीयता को सबसे ऊपर रखा हुआ है।”

पुलवामा और श्रीनगर को खेलों में उपलब्धियाँ

पीएम मोदी ने कहा, “जम्मू कश्मीर ने दो बड़ी उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। पुलवामा के स्टेडियम में रिकॉर्ड संख्या में लोग इकट्ठा हुए और यहाँ डे-नाइट क्रिकेट मैच खेला गया। पहले यह होना असंभव था लेकिन अब मेरा देश बदल रहा है। यह मैच रॉयल प्रीमियर लीग का हिस्सा था।”

जम्मू कश्मीर की दूसरी उपलब्धि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देश में पहला खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर की डल झील में हुआ। इसमें पूरे भारत से 800 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया।” पीएम मोदी ने इसमें हिस्सा लेने वाले दो खिलाड़ियों, ओडिशा की रस्मिता साहू और श्रीनगर के मोहसिन अली का भी नाम लिया।

पीएम मोदी ने कहा, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना और देश की एकता, देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है। खेल इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि जो खेलता है वो खिलता है।”

रूस और कनाडा में प्रभु राम की भक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि रामायण और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम अब दुनिया के हर कोने में पहुँच रहा है। अगस्त 2025 में रूस के व्लाडिवोस्टक (Vladivostok) शहर में अनूठी प्रदर्शनी लगाई गई थी। पीएम ने बताया कि इसमें रूसी बच्चों ने रामायण पर बनी अलग-अलग थीम की पेंटिग्स को प्रदर्शित किया।

ऐसा ही कुछ कनाडा के मिसीसागा में भी हुआ। पीएम मोदी ने बताया कि मिसीगागा में प्रभु श्रीराम की 51 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया गया। सोशल मीडिया पर भी इस भव्य प्रतिमा के वीडियो खूब शेयर किए गए।

बलिदान सैनिकों की जानकारी जुटा रहे जितेंद्र सिंह राठौर

पीएम मोदी ने गुजरात के सूरत में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले जितेंद्र सिंह के बारे में बताते हुए कहा, “जितेंद्र सिंह राठौर ने एक ऐसी पहल की है जो देशभक्त के लिए बेहद अच्छी प्रेरणा है। पिछले कुछ सालों से वह उन सभी जवानों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, जिन्होंने भारत माता की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए।”

उन्होंने आगे कहा, “आज उनके पास प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अबतक शहीद हुए हजारों वीर जवानों के बारे में जानकारियँ मौजूद हैं। उनके पास शहीदों की हजारों तस्वीरें भी हैं।”

बिहार की देवकी अब ‘सोलर दीदी’

बिहार के मुजफ्फरपुर के रतनपुरा गाँव की देवकी पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “उन्होंने सोलर पंप से गाँव की किस्मत बदल दी है। अब लोग उन्हें प्यार से सोलर दीदी कहते हैं। उनका जीवन आसान नहीं था लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। वो सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी, जहाँ उन्हें सोलर पंप की जानकारी मिली।”

मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की जर्मनी में फुटबॉल ट्रेनिंग

मध्य प्रदेश के शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों की जर्मनी में ट्रेनिंग का भी पीएम मोदी ने जिक्र किया। पीएम ने कहा, “शहडोल स्थित एक गाँव में फुटबॉल क्रांति का जिक्र किया था, जिसे जर्मनी के एक बड़े कोच ने देखा और अब वो शहडोल के खिलाड़ियों को जर्मनी में फुटबॉल की ट्रेनिंग देना चाहते हैं।”

सिविल सेवा परीक्षा में असफल होने वाले छात्रों को भी मिलेगी नौकरी

पीएम मोदी ने कहा, “कोई सिविल सेवा की तैयारी कर रहा था, कोई इंजीनियरिंग में जाना चाहता था, कोई मेडिकल परीक्षा के हर पड़ाव पार कर चुका था लेकिन अंत में उसका चयन नहीं हुआ। ऐसे सभी उम्मीदवारों की जानकारी अब ‘प्रतिभा सेतु’ पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है।”

उन्होंने बताया कि इस पोर्टल से प्राइवेट कंपनियाँ इन होनहार छात्रों की जानकारी लेकर उन्हें अपनी कंपनी में नियुक्ति दे सकती हैं। पीएम ने कहा, “इस प्रयास के नतीजे आने लगे हैं। सैकड़ों उम्मीदवारों को इस पोर्टी की मदद से तुरंत नौकरी भी मिली है।”

‘लकड़ी की माला पहनकर खैरात लेने वाले’…महुआ मोइत्रा ने फिर किया हिंदुओं का अपमान: SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय को बताया ‘चुनावी सनातनी’

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदुओं को लेकर अपमानजनक बातें की हैं। उन्होंने जातियों को निशाना बनाया और हिंदू प्रतीकों तक का मजाक उड़ाने से भी वह नहीं चूकीं। वो भी जानती हैं कि हिंदू धर्म और इसको मानने वाले सहिष्णु हैं तो वो कुछ भी कहकर बचकर निकल जाएँगी।

महुआ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। गुरुवार (28 अगस्त 2025) के बताए जा रहे इस वीडियो को बीजेपी की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी X पर शेयर किया है।

महुआ इस वीडियो में वह हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए बंगाली में कह रही है, “पूरे साल आप तृणमूली रहते हैं और चुनाव के दौरान सनातनी?” जाहिर है कि वह बताना चाहती हैं कि कोई एक साथ हिंदू (सनातनी) और TMC का समर्थक नहीं हो सकता है।

अपने बयान में आगे उन्होंने SC (अनुसूचित जाति), नामशूद्र, मतुआ समुदायों को भी अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया और वैष्णव समुदाय की पवित्र कंठी माला का मजाक उड़ाया है। उन्होंने उसे ‘लकड़ी की माला पहनने और खैरात लेने वालों की निशानी’ के रूप में पेश किया।

तृणमूल सांसद ने कहा कि SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय के लोग ममता बनर्जी सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठाते हैं लेकिन चुनावों के दौरान वे बीजेपी के पक्ष में वोट देते हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका वीडियो शेयर करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि भाजपा इस भाषण की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने मोइत्रा पर हिंदू-विरोधी नफरत फैलाने का आरोप लगाया और माँग की कि उन्हें इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से हिंदू-विरोधी, जातिवादी नफरत भरा भाषण है। इस तरह के सांप्रदायिक जहर के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा, “भाजपा हमेशा नामशूद्र, SC और मतुआ समुदायों के साथ मजबूती से खड़ी रही है। अब समय आ गया है कि ये समुदाय महुआ मोइत्रा के तत्काल इस्तीफे की माँग करें और एक बड़ा आंदोलन शुरू करें। SC-ST और हिंदू समुदायों का अपमान करने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

बता दें कि इससे पहले गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सांसद महुआ मोइत्रा ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह का सिर काट दिया जाना चाहिए और कटे हुए सिर को मेज पर रख कर लोगों को दिखाना चाहिए। महुआ ने ये बयान अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बोलते हुए दिया था।

महुआ ने कहा था, “मैं पूछती हूँ कि क्या हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाला कोई नहीं है? और अन्य देशों के लाखों और करोड़ों की संख्या में लोग भारत में घुस रहे हैं, अगर वे हमारी माताओं और बहनों पर नजर रख रहे हैं, अगर वे हमारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, तो सबसे पहले अमित शाह का सिर काटकर मेज पर रख देना चाहिए।”

url – TMC Mahua Moitra said You remain Trinamool throughout the year and Sanatani during elections? Amit Malviya demanded resignation

नोबेल की चाहत में बौराए ट्रंप, PM मोदी ने नहीं किया नामित तो क्वॉड बैठक से बनाने लगे दूरी: मीडिया रिपोर्ट में दावा, भारत की झिड़क से परेशान हैं अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत नहीं आ रहे हैं। भारत-अमेरिका के रिश्तों में आई दरार को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। इस साल के अंत में क्वाड शिखर सम्मेलन दिल्ली में होने वाला है। अखबार के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप की भारत आने की कोई योजना नहीं है।

राष्ट्रपति ट्रंप के भारत दौरे के रद्द होने को लेकर फिलहाल अमेरिका और भारत ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने को लेकर सहमति दी थी। लेकिन, अब प्लान कैंसिल कर दिया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीजफायर को लेकर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से प्रधानमंत्री मोदी का धैर्य खत्म हो रहा था। ट्रंप सार्वजनिक रूप से लगातार कह रहे थे कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को खत्म करवाया।

फोन पर पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत का दावा

अखबार के मुताबिक, 17 जून को ट्रंप से पीएम मोदी की बातचीत हुई थी। ये बातचीत जी7 शिखर सम्मेलन से वापस लौटने के बाद हुई थी। दरअसल शिखर सम्मेलन में कनानास्किस में ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बैठक का कार्यक्रम था, लेकिन जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन तुरंत बाद ट्रंप वापस लौट गए थे। इसलिए आमने-सामने की बातचीत नहीं हो पाई थी। इसके बाद दोनों नेताओं की फोन पर बातचीत हुई।

बातचीत के दौरान ट्रंप ने बताया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने वाला है। इससे साफ था कि ट्रंप चाहते थे कि भारत भी ऐसा करे। लेकिन पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है। ये भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे बातचीत में तय हुआ।

हालाँकि ट्रंप ने पीएम मोदी की बातों का जवाब नहीं दिया, लेकिन असहमति साफ तौर पर सामने आ गई। भारत ने नोबेल पुरस्कार को लेकर कोई बातचीत नहीं की। ये रिश्तों में कड़वाहट की वजह बनी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाइट हाउस ने इस कॉल की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की। लेकिन ट्रंप का भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने का दावा लगातार जारी रहा। वे अब तक 40 से ज्यादा बार कह चुके हैं कि उन्होंने ही सीजफायर करवाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये अमेरिकी राष्ट्रपति की कहानी है जो नोबेल पुरस्कार पाने की इतनी चाहत रखता है, लेकिन उसकी इच्छा भारत की राजनीति की संवेदनशील और हकीकत से टकरा गई।

‘कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी शुरू’: SCO शिखर सम्मेलन से पहले PM मोदी और Xi जिनपिंग के बीच सीधी बात, भारत-चीन के रिश्तों में सुधार पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने SCO शिखर सम्मेलन से पहले द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपसी रिश्तों को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों का सहयोग 280 करोड़ की आबादी और मानवता के लिए जरूरी है।

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले साल कज़ान में हमारी बहुत ही अच्छी बातचीत हुई थी जिससे हमारे रिश्तों में सुधार आया। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है। सीमा प्रबंधन को लेकर हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ है।”

भारत-चीन के बीच सीधी उड़ाने भी शुरू

पीएम नरेंद्र मोदी ने बैठक में यह भी कहा, “कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं। दोनों देशों के 280 करोड़ लोगों के हित हमारे सहयोग से जुड़े हैं। इससे पूरी मानवता के कल्याण का रास्ता भी खुलेगा।”

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी पीएम मोदी की बात पर सहमति जताते हुए कहा कि दोनों देशों का साथ आना जरूरी है।

पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को दी बधाई

पीएम मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की चीन की सफल अध्यक्षता के लिए राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग को बधाई भी दी। साथ ही पीएम मोदी ने चीन आने के निमंत्रण और मुलाकात के लिए जिनपिंग को धन्‍यवाद भी दिया।  

पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले से वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मची हुई है।

50 सुरंगें… 150 पुल के साथ रेल नेटवर्क से पहली बार जुड़ने जा रहा मिजोरम: 13 सितंबर को पूर्वोत्तर को पीएम मोदी देंगे सौगात, करेंगे बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन

मिजोरम को पहली बार एयरपोर्ट से सीधी रेलवे कनेक्टिविटी मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर 2025 को मिजोरम में बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन करेंगे। यह 51.38 किलोमीटर लंबी लाइन बांग्लादेश-म्यांमार सीमा से जुड़ी है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट से मात्र 25 किलोमीटर दूर बना रेलवे स्टेशन लोगों को बड़ी सहूलियत देगा। अभी तक पर्यटकों और यात्रियों के पास मिजोरम से असम जाने के लिए दो ही विकल्प थे, या तो सड़क से सीधे सिलचर जाना, या फिर बैराबी रेलवे स्टेशन तक सड़क से पहुँचकर वहाँ से ट्रेन लेना। अब यह परेशानी खत्म हो रही है, क्योंकि एयरपोर्ट और नया रेलवे स्टेशन एक ही रूट पर हैं और यह दूरी कुछ ही समय में तय की जा सकेगी।

51.38 किलोमीटर लंबी इस नई रेलवे लाइन पर सैरांग, मुआलखांग, कानपुई और हार्तकी चार नए स्टेशन बनाए गए हैं। राजधानी आइजोल से सबसे नजदीक सैरांग स्टेशन है, जो एयरपोर्ट से भी सबसे पास है। यहीं से ट्रेनें चलेंगी। मुआलखांग स्टेशन पर 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे। यह स्टेशन पूरी तरह तैयार है और यहाँ दो हेलीपैड भी बनाए जा रहे हैं।

कानपुई स्टेशन पर काम अभी चल रहा है लेकिन यात्री सुविधाएँ पूरी रहेंगी, वहीं हार्तकी स्टेशन छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत है क्योंकि यह चारों तरफ पहाड़ों से घिरा है। इन चारों स्टेशनों के अलावा पहले से ही बैराबी स्टेशन मौजूद है, जो मिजोरम और असम की सीमा पर है। पहले यात्रियों को यहीं तक ट्रेन मिलती थी, अब वे सीधे सैरांग तक ट्रेन में सफर कर सकेंगे।

यह रेलवे ट्रैक तकनीकी और प्राकृतिक दोनों रूप से बेहद खास है। इसमें कुल 48 सुरंगें और 150 से ज्यादा पुल हैं। इस लाइन पर बना सबसे ऊँचा पुल 196 नंबर है, जिसकी ऊँचाई 104 मीटर है यानी यह कुतुबमीनार से भी 42 मीटर ऊँचा है।

बादलों से लिपटी घाटियाँ और हरे-भरे जंगलों के अद्भुत दृश्य देख पाएँगे यात्री

पूरी रेल लाइन में से 12.8 किलोमीटर की दूरी सुरंगों से होकर गुजरेगी। इन सुरंगों की दीवारों पर मिजोरम की संस्कृति, इतिहास, महिला सशक्तिकरण और पर्यटन स्थलों को खूबसूरत पेंटिंग्स के जरिए दर्शाया गया है।

विस्टाडोम कोच से सफर के दौरान यात्री बाँस, केले और सुपारी के पेड़ों से भरे पहाड़, बादलों से लिपटी घाटियाँ और हरे-भरे जंगलों के अद्भुत दृश्य देख पाएँगे। लंबी सुरंगों में शानदार लाइटिंग की गई है, जिससे यात्रा और भी रोमांचक हो जाती है।

इस रेल प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा समय और खर्च की बचत है। अभी तक बैराबी से आइजोल तक सड़क मार्ग से पहुँचने में 5 से 6 घंटे का समय और 1000 रुपए से ज्यादा खर्च होता था, लेकिन अब ट्रेन से यह सफर सिर्फ 1 से 1.5 घंटे में और लगभग 100 रुपये में पूरा होगा। यानी करीब 4 घंटे और 900 रुपये की सीधी बचत होगी।

इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि छोटे-बड़े व्यापार, टूरिज्म और लोकल इकोनॉमी को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। बैराबी से सैरांग तक इस 51.38 किलोमीटर की रेललाइन पर ट्रेन की स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इसमें 55 बड़े और 87 छोटे पुल, 5 रोड ओवरब्रिज और 6 अंडरब्रिज शामिल हैं। इसकी कुल लागत 8071 करोड़ रुपए है।

इस प्रोजेक्ट के साथ अब पूर्वोत्तर भारत के चार राज्यों, असम (दिसपुर), त्रिपुरा (अगरतला), अरुणाचल प्रदेश (ईटानगर) और मिजोरम (आइजोल) की राजधानियाँ सीधे इंडियन रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई हैं। इससे इन राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा, व्यापार तेज होगा और आर्थिक ढाँचा मजबूत होगा। इससे लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। यह मिजोरम के लिए ऐतिहासिक कदम है जो राज्य को देश के बाकी हिस्सों से और ज्यादा मजबूती से जोड़ेगा।

राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात से पहले पीएम मोदी ने की जेलेंस्की से बात: रूस- यूक्रेन संघर्ष को खत्म करवाने का भारत करेगा पूरा प्रयास, जल्द शांति बहाली का दिया आश्वासन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुँचे हैं। जहाँ वे कई देशों के नेताओं के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात से पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पीएम मोदी से रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर फोन पर बात की।

दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत हर कदम पर यूक्रेन के साथ है। साथ ही पीएम ने जल्द शांति बहाली का आश्वासन भी दिया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत इस दिशा में सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति से बातचीत के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट किया। पीएम मोदी ने लिखा, “राष्ट्रपति जेलेंस्की के आज आए फोन कॉल के लिए धन्यवाद। हमने मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष, उसके मानवीय पहलुओं और शांति और स्थिरता लाने के प्रयासों पर चर्चा की। भारत इस दिशा में सभी प्रयासों का पूरा समर्थन करता है।”

वहीं, जेलेंस्की ने अपने बयान में बातचीत की अधिक जानकारी साझा की। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत और रूस के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के यूक्रेन के हाल ही की प्रयासों का जिक्र किया। साथ ही रूस के ताबड़तोड़ हमले के बावजूद रूसी राष्ट्रपति से मिलने के लिए यूक्रेन की रजामंदी के बारे में बताया।

जेलेंस्की ने आगे कहा, “अलास्का वार्ता को लगभग दो हफ्ते बीत चुके हैं और इस दौरान जब रूस को कूटनीति की तैयारी करनी चाहिए थी, मॉस्को ने कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है- केवल नागरिक ठिकानों पर निंदनीय हमले किए हैं और हमारे दर्जनों लोगों को मार डाला है। मैं प्रधानमंत्री को पीड़ितों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति व्यक्त की गई उनकी संवेदनाओं के लिए धन्यवाद देता हूँ।”

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, “शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से पहले हमने अपनी स्थिति पर सहमति बना ली थी। इस युद्ध का अंत तुरंत युद्धविराम और शांति से होना चाहिए। सभी लोग इस बात को समझते हैं और समर्थन करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जब हमारे शहर और समुदाय लगातार गोलाबारी में हों, तो शांति की बात करना मुश्किल है। भारत इस दिशा में जरूरी कदम उठाने और शिखर सम्मेलन के अलावा होने वाली बैठकों में रूस और अन्य नेताओं को सही संकेत देने के लिए तैयार है। धन्यवाद”

इसके अलावा जेलेंस्की और पीएम मोदी के बीच दोनों देशों के रिश्तों, यात्रा की तैयारियों और संयुक्त आयोग की बैठक के आयोजन पर बात हुई। जेलेंस्की ने जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा भी जताई है।

बता दें कि यह अगस्त 2025 में दूसरी बार है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन पर बातचीत की है।

उधर पीएम नरेंद्र मोदी रविवार (31 अगस्त 2025) को चीन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। इस दौरान पीएम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात होने की उम्मीद है।