सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ का कहना है कि आवारा कुत्तों वाले मामले ने उन्हें दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। उन्होंने कहा, “अब तक मैं सिर्फ अपनी थोड़ी-बहुत कानूनी सेवाओं के लिए ही जाना जाता था लेकिन अब आवारा कुत्तों वाले मामले की वजह से ना सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में लोग मुझे जानने लगे हैं।”
यह बातें जस्टिस विक्रम नाथ ने केरल में आयोजित नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) और केरल स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (KeLSA) ने तिरुवनंतपुरम की ओर से आयोजित ‘ह्यूमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्रेंस’ में कहीं। इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज भी शामिल हुए थे।
जस्टिस नाथ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने यह मामला उन्हें सौंपा। उन्होंने बताया कि हाल ही में जब वह ‘Law Asia POLA Summit’ में शामिल हुए तो वहाँ विदेशों से आए वकील संघों के अध्यक्षों ने उनसे आवारा कुत्तों के केस के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझे बहुत खुशी हुई कि अब विदेशों में भी लोग मुझे जानने लगे हैं।”
जस्टिस नाथ ने यह भी कहा कि उन्हें लोगों के साथ-साथ कुत्तों से भी आशीर्वाद मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों के संदेश आए हैं कि सिर्फ कुत्ता प्रेमी ही नहीं बल्कि खुद कुत्ते भी मुझे शुभकामनाएँ भेज रहे हैं।”
गौरतलब है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने 11 अगस्त 2025 को एक आदेश दिया था। इसमें कहा गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें शेल्टर होम बनाकर शिफ्ट किया जाए।
इस आदेश के बाद एनिमल राइट ऐक्टिविस्ट्स और तमाम डॉग लवर्स ने इसका खूब विरोध किया। CJI ने यह केस जस्टिस नाथ की अध्यक्षता में बनाई गई तीन जजों वाली बेंच को सौंपा था।
इसके बाद 22 अगस्त 2025 को जस्टिस नाथ की बेंच ने 11 अगस्त वाले आदेश पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद उसी जगह वापस छोड़ा जाए जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।


