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5 साल में करें 5 यूनिकॉर्न तैयार, ताकि हर साल हों 50 रॉकेट लॉन्च: ‘नेशनल स्पेस डे’ पर PM मोदी ने की स्टार्टअप्स से अपील, कहा- अब चाँद और मंगल तक नहीं रहेंगे सीमित, गहरे अंतरिक्ष में पहुँचेगा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (23 अगस्त 2025) नेशनल स्पेस डे के मौके पर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इस बार की थीम ‘आर्यभट्ट से गगनयान तक’ है, जिसमें अतीत का आत्मविश्वास और भविष्य का संकल्प दोनों झलकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “स्पेस सेक्टर से जुड़े वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि भारत लगातार अंतरिक्ष विज्ञान में नए माइलस्टोन बना रहा है और यह देश के लिए गर्व की बात है।”

उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि भारत अब ‘Astronaut Pool’ तैयार करने जा रहा है और इसमें युवाओं को जुड़ने के लिए आमंत्रित किया। हाल ही में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर तिरंगा फहराने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उस पल ने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत सेमी क्राइअजेनिक इंजन (semi-cryogenic engine) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (electric propulsion) जैसी नई तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। जल्द ही गगनयान मिशन लॉन्च होगा और आने वाले वर्षों में भारत अपना स्पेस स्टेशन भी बनाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “अभी हम चाँद और मंगल तक पहुँचे हैं। अब हमें गहरे अंतरिक्ष में उन हिस्सों में भी झाँकना है, जहाँ मानवता के भविष्य के लिए कई जरूरी रहस्य छिपे हैं।” प्रधानमंत्री ने स्पेस सेक्टर में हुए सुधारों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि पहले इस क्षेत्र को कई पाबंदियों में बांधा गया था लेकिन अब प्राइवेट सेक्टर के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। आज देश में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स स्पेस-टेक में काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स से अपील की कि वे अगले 5 सालों में कम से कम 5 यूनिकॉर्न तैयार करें और भारत को उस स्थिति तक ले जाएँ कि हर साल 50 रॉकेट लॉन्च कर सके।

क्यों मनाया जाता है नेशनल स्पेस डे?

भारत ने इतिहास रचते हुए 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफलतापूर्वक उतारा था। इसी मिशन में प्रज्ञान रोवर भी सफलतापूर्वक तैनात किया गया।

इस सफलता के बाद भारत चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा और साउथ पोल पर लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए सरकार ने 23 अगस्त को ‘नेशनल स्पेस डे’ घोषित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक अब सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह Ease of Living का भी साधन बन गई है।

टैरिफ विवाद पर जिस अमेरिकी अधिकारी ने दिया PM मोदी का साथ, उसके घर पड़ी FBI की रेड: ट्रंप को खरी-खोटी सुनाते हुए जॉन बोल्टन ने कहा था- इससे रूस व चीन के करीब आएगा भारत

अमेरिका में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को एफबीआई (FBI) की टीम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के घर पर छापा मारा। यह छापा ऐसे समय में पड़ा है जब बोल्टन लगातार ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते आ रहे हैं और ट्रैरिफ को लेकर भारत के पक्ष में बोल रहे है। FBI प्रमुख काश पटेल के आदेश पर यह कार्रवाई की गई, जिन्होंने छापे के तुरंत बाद ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है…”

क्या है पूरा मामला?

यह कार्रवाई सिक्ररेट डॉक्यूमेंट्स की एक पुरानी जाँच से जुड़ी है। बाइडेन प्रशासन ने इस जाँच को बंद कर दिया था, लेकिन अब इसे फिर से शुरू किया गया है। ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए बोल्टन ने अपनी किताब ‘द रूम वेयर इट हैपन्ड’ में कई सिक्ररेट बातें उजागर करने का आरोप लगाया था।

ट्रंप ने यह कहते हुए किताब छपने से रोकने की कोशिश भी की थी कि बोल्टन ने गोपनीयता समझौते का उल्लंघन किया है। हालाँकि, बाइडेन प्रशासन ने उस समय इस मामले को बंद कर दिया था।

वहीं, FBI के मौजूदा चीफ काश पटेल ने इस मामले को फिर से खोला है। उन्होंने छापे से एक दिन पहले पूर्व एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी पर भी गोपनीय जानकारियाँ लीक करने का आरोप लगाया था।

बोल्टन और ट्रंप के बीच मतभेद

जॉन बोल्टन लगातार ट्रंप की विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर शुल्क लगाने के ट्रंप के फैसले को गलत बताया।

बोल्टन ने कहा कि रूस से तेल खरीदने के लिए केवल भारत पर शुल्क लगाना एक ‘गलती‘ है। उन्होंने कहा कि चीन भी रूस से तेल खरीदता है, लेकिन उस पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया। बोल्टन के अनुसार, ट्रंप के इस कदम से अमेरिका ने भारत को छोड़ दिया है और इससे भारत रूस और चीन के करीब जा सकता है।

बोल्टन का मानना है कि ट्रंप की नीतियों में ‘रणनीतिक सोच की कमी’ है, जिससे भारत रूस के करीब जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के रूस पर लगे प्रतिबंधों से भारत को रूसी तेल खरीदने से कानूनी तौर पर कोई रोक नहीं है।

यह छापा ऐसे समय में पड़ा है जब भारत रूस और चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भारत आने का न्योता दिया है। इसके अलावा, वह चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होने वाले हैं।

कर्नाटक के धर्मस्थल से बेटी के लापता होने का दावा करने वाली महिला अपने बयान से पलटी: कहा- पूरी कहानी फर्जी थी, दो लोगों ने जबरन दिलवाया था बयान

कर्नाटक के एक धर्मस्थल में सामूहिक दफन मामले के बाद अपनी बेटी के गायब होने का दावा करने वाली महिला ने अपनी कहानी को झूठा बताया है। सुजाता भट्ट नामक महिला ने दावा किया था कि उनकी बेटी अनन्या भट्ट 2003 में धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए सुजाता ने कहा कि उसे यह झूठा दावा करने के लिए गिरीश मत्तणावर और टी जयन्ती ने उकसाया था। उन्होंने बताया, “यह सच नहीं है। कभी कोई अनन्या भट्ट नाम की बेटी थी ही नहीं। तस्वीरें भी नकली थीं। सबकुछ पूरी तरह से फर्जी था।”

जब पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो सुजाता ने कहा, “कुछ लोगों ने मुझे ऐसा कहने को कहा। यह सब जमीन के विवाद की वजह से हुआ। यही एक कारण था।”

सुजाता के मुताबिक, यह विवाद उनके नाना की जमीन को लेकर था, जो कथित रूप से धर्मस्थल मंदिर प्रशासन ने ले ली थी। उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ यह पूछा था कि मेरे नाना की जमीन मेरी मंजूरी के बिना कैसे दे दी गई।” उन्होंने यह भी साफ किया कि इस पूरे मामले में किसी ने उनसे पैसे नहीं माँगे और न ही उन्होंने किसी से पैसे लिए।

यह बयान पहले के दावे से बिल्कुल उलटा है। इससे पहले पुलिस को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा था कि उनकी 18 साल की बेटी अनन्या मेडिकल की छात्रा थी, वह मई 2003 में धर्मस्थल गई थी और वहीं से गायब हो गई।

उन्होंने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने बेटी की खोज शुरू की तो उन्हें अगवा कर लिया गया और धर्मस्थल न लौटने या सार्वजनिक रूप से घटना के बारे में कुछ न कहने की चेतावनी दी गई। उनका कहना था कि अगवा करने के बाद उन्हें बेरहमी से पीटा गया, जिससे वह कोमा में चली गई थी। बाद में उन्हें बेंगलुरु के एक अस्पताल में इलाज के बाद होश आया।

अब वह इन सभी बातों से पीछे हट गई हैं और जनता से माफी माँग रही हैं। उनका कहना है, “मैं कर्नाटक की जनता से, धर्मस्थल के भक्तों और पूरे देश से माफी माँगती हूँ।” मामले की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम (SIT) ने उन्हें शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को बेल्थंगडी कार्यालय में पेश होने का नोटिस भेजा था।

बता दें कि यह मामला तब सामने आया था जब एक सफाईकर्मी ने चौंकाने वाला दावा किया कि उसे 1998 से 2014 के बीच धर्मस्थल में कई जगहों पर सैकड़ों शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। यह सफाईकर्मी भगवान मंजूनाथ मंदिर में काम करता था और उसने 3 जून 2025 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

सफाईकर्मी ने अपनी शिकायत में बताया था कि जिन शवों को वह दफनाता था, उनमें कई महिलाएँ और नाबालिग लड़कियाँ थीं, जिनका यौन शोषण किया गया था। हालाँकि, इसके बाद कई जगहों पर खुदाई की गई लेकिन ज्यादातर जगहों से कोई मानव अवशेष नहीं मिले थे। सिर्फ नेत्रवती नदी के पास एक जगह से कुछ हड्डियाँ मिलीं थीं जो पुरुषों की बताया गई थीं।

इसी के बाद सुजाता भट्ट का भी बयान आया था कि उनकी बेटी भी धर्मस्थल से ही लापता हुई है। हालाँकि, उनके हालिया बयान ने पूरे केस को ही उलट-पलट दिया है।

पत्रकार शिव अरूर के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने दर्ज कराई FIR: राहुल गाँधी के वोट चोरी के आरोपों का किया था पर्दाफाश, करण थापर के लिए रोने वाला एडिटर्स गिल्ड हुआ ‘खामोश’

भारत में पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। NDTV के पत्रकार शिव अरूर ने राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ वाले आरोपों का पर्दाफाश किया था। ये बदनामी कॉन्ग्रेस को हजम नहीं हुई और उन्होंने पत्रकार पर पार्टी को बदनाम करने के लिए पत्रकार शिव पर आपराधिक केस दर्ज करा दिया। सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि इस मामले पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने चुप्पी साध रखी है। ये ही एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया उस समय तुरंत सामने आया था, जब करन थापर और सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ असम में गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ था।

शिव अरूर पर क्या है आरोप?

हाल ही में, NDTV पर प्रसारित होने वाले शो ‘इंडिया मैटर्स’ में पत्रकार शिव अरूर ने 19 अगस्त 2025 को एक रिपोर्ट दिखाई थी। इस रिपोर्ट में कथित तौर पर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का पर्दाफाश किया गया था। शिव अरूर ने शो में जिस डेटा का जिक्र किया था वो डेटा एक सर्वे कंपनी CSDS के संजय कुमार ने दिया था। संजय कुमार ने कहा था कि महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है। राहुल गाँधी ने इस डेटा का इस्तेमाल किया और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप मड़ दिया।

लेकिन बाद में, संजय कुमार ने माना कि उनसे गलती हुई है और उन्होंने अपना पुराना पोस्ट हटाकर सोशल मीडिया पर माफी माँगी। NDTV के पत्रकार शिव अरूर ने भी अपने शो में यही बताया कि राहुल गाँधी का ‘वोट चोरी’ वाला आरोप गलत था और उन्होंने अपनी बात साबित नहीं की।

लेकिन इस बेज्जती को कॉन्ग्रेसी नेता सहन कर पाए और इसे राहुल गाँधी की छवि खराब करने की बात कह दी। पवन खेड़ा ने तो यहाँ तक कह दिया कि इस मामले में शिव अरूर के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। कॉन्ग्रेस की वकील ईशा बख्शी ने भी कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।

आनंद रंगनाथन ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि कॉन्ग्रेस ने पत्रकार शिव अरूर के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत उनके उस कार्यक्रम के लिए है, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के दावे का पर्दाफाश किया था।

रंगनाथन ने इस कार्रवाई को गलत बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में ऐसे और मामले दर्ज हो सकते हैं। उन्होंने पूछा कि इस पर एडिटर्स गिल्ड (EGI) और अभिव्यक्ति की आजादी के तथाकथित योद्धा चुप क्यों हैं। अंत में, उन्होंने कहा कि वह शिव अरूर के साथ खड़े हैं।

करण थापर के मामले में EGI का रुख

दूसरी तरफ, पत्रकार करण थापर और सिद्धार्थ वरदराजन पर भी कानूनी शिकंजा कसा था। असम पुलिस ने उन पर एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 लगाई गई थी। यह धारा पुराने राजद्रोह कानून का ही नया रूप है। यह एफआईआर ‘द वायर’ पर छपी एक रिपोर्ट को लेकर थी, जिसमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी जानकारी थी।

जब ये पत्रकार मुश्किल में आए तो एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) तुरंत उनके समर्थन में सामने आया। गिल्ड ने एक बयान जारी कर असम पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने भी करण थापर और सिद्धार्थ वरदराजन को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी।

ये दोनों मामले एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। जब करण थापर जैसे पत्रकार पर केस होता है तो एडिटर्स गिल्ड (EGI) तुरंत उनके साथ खड़ा हो जाता है। लेकिन शिव अरूर के मामले में गिल्ड पूरी तरह से चुप रहता है। क्या इसका मतलब यह है कि पत्रकारों के लिए न्याय के नियम अलग-अलग हैं? या फिर यह दिखाता है कि पत्रकारिता की संस्थाएँ भी राजनीतिक विचारधारा के हिसाब से काम करती हैं?

एलन मस्क ने जिसे कहा था साँप, ट्रंप ने उसे ‘शानदार दोस्त’ कहकर बनाया भारत में अमेरिका का नया राजदूत; जानें कौन हैं सर्जियो गोर जिन पर रूसी जासूस होने के लगे आरोप

टैरिफ को लेकर जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने करीबी राजनीतिक सहयोगी सर्जियो गोर को शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को भारत में अगला अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया है। गोर को ट्रंप ने दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत की भी जिम्मेदारी दी है। भारत और अमेरिका के संबंधों में आई खटास के बीच यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है।

गोर मौजूदा वक्त में व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के डायरेक्टर है। वह भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे। लंबे समय से ट्रंप के करीबी रहे गोर का विवादों से भी गहरा नाता है। टेस्ला के CEO एलन मस्क गोर को साँप तक बता चुके हैं।

ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए सर्जियो गोर के नाम का ऐलान किया है। ट्रंप ने लिखा, “सर्जियो गोर के नाम का ऐलान करने में मुझे खुशी हो रही है। वह शानदार दोस्त हैं जो कई वर्षों से मेरे साथ हैं।”

उन्होंने लिखा, “राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक के रूप में, सर्जियो और उनकी टीम ने रिकॉर्ड समय में सरकार में लगभग 4,000 देशभक्तों को नियुक्त किया है। सर्जियो अपनी नियुक्ति की पुष्टि होने तक व्हाइट हाउस में अपनी वर्तमान भूमिका में बने रहेंगे।”

उन्होंने लिखा, “गोर ने मेरे ऐतिहासिक राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में काम किया, मेरी बेस्टसेलिंग किताबें प्रकाशित कीं हैं। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र के लिए, यह जरूरी है कि मेरे पास कोई ऐसा व्यक्ति हो जिस पर मैं अपने एजेंडे को पूरा करने और ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ में हमारी मदद करने के लिए पूरी तरह भरोसा कर सकूँ। सर्जियो एक शानदार राजदूत साबित होंगे।”

कौन हैं सर्जियो गोर?

39 वर्षीय सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के सबसे युवा राजदूत होंगे। सर्जियो गोर का जन्म उज्बेकिस्तान की ताशकंद में हुआ था, जो उस समय सोवियत संघ के उज्बेक सोवियत समाजवादी गणराज्य का हिस्सा था। 1999 में 12 वर्ष की आयु में वह अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आ गए थे।

गोर की स्कूली पढ़ाई लॉस एंजेलिस से हुई और उन्होंने जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था। ग्रेजुएशन के दौरान ही राजनीति में उनकी दिलचस्पी शुरू हो गई थी। वे रिपब्लिकन पॉलिटिक्स में शामिल हुए और कई अमेरिकी सांसदों के साथ काम भी किया। 2020 में जब ट्रंप ने कैंपेन शुरू किया तो वो उनके संपर्क में आए और कैंपेन का चेहरा बन गए। गोर के पिता सोवियत आर्मी के लिए मिलिट्री एयरक्राफ्ट डिजाइन करने का काम करते थे।

गोर ने ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ मिलकर एक पब्लिशिंग कंपनी की भी स्थापना की थी। गोर ने वेडिंग DJ के तौर पर भी काम किया था। 2024 में ट्रंप की जीत के बाद उन्हें व्हाइट हाउस में डायरेक्टर ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल के पद पर नियुक्त किया गया।

विवादों से रहा है गहरा नाता

गोर का विवादों से भी गहरा नाता रहा है। द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में उनके बैंकग्राउंड को लेकर सवाल उठाए थे कि कैसे ट्रंप के राजनीतिक क्षेत्र में उनकी प्रसिद्धि इतनी कैसे बढ़ गई। गोर पर रूसी जासूस होने के भी आरोप लगाए थे। हालाँकि, इन आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया गया था। मस्क के साथ गोर के गंभीर मतभेद की भी कई खबरें सामने आई हैं।

मस्क ने कह दिया था ‘साँप’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोर की ट्रंप और मस्क के बीच विवाद में अहम भूमिका थी। DOGE में अमेरिकी सरकार की भूमिका से इस्तीफा देने से पहले मस्क और गोर के बीच महीनों तक टकराव हुआ था। कैबिनेट बैठकों के दौरान भी दोनों के बीच टकराव की खबरें सामने आई थीं।

गोर ने NASA के प्रमुख पद के लिए जेरेड इसाकमैन के नामांकन को रोक दिया था, जिसे मस्क का समर्थन था। इस फैसले से मस्क नाराज हो गए थे। इसके अलावा, मस्क ने X पर ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की एक खबर पर जवाब देते हुए गोर को ‘साँप’ कह दिया था।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गोर ने अपनी पृष्ठभूमि से संबंधित जाँच के लिए आधिकारिक दस्तावेज जमा नहीं किए थे। हालाँकि, व्हाइट हाउस ने इस दावे को खारिज कर दिया था।

नियुक्ति पर गोर ने ट्रंप को दिया धन्यवाद

सर्जियो गोर ने नई जिम्मेदारी मिलने के बाद ट्रंप का आभार जताया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी हूं जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया है। मेरे लिए अमेरिकी लोगों की सेवा करने से ज्यादा गर्व की बात कुछ भी नहीं है।” अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी गोर की नियुक्ति का स्वागत किया है।

‘TMC जाएगी, बदलाव आएगा…बंगाल को नई रोशनी की जरूरत’: PM मोदी ने ममता सरकार पर जमकर साधा निशाना, कहा- सत्ता के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रहे इंडी गठबंधन वाले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 5,200 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को जमकर घेरा है। पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल को नई रोशनी की जरूरत है और TMC जाएगी तभी असली बदलाव आएगा।

केंद्र के पैसे को लूट रही TMC सरकार: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कोलकाता में एक सभा को संबोधित करते हुए ममता सरकार पर तीखे वार किए। पीएम मोदी ने कहा, “जब तक पश्चिम बंगाल का सामर्थ्य नहीं बढ़ेगा तब तक विकसित भारत की यात्रा सफल नहीं हो पाएगी। बीते 11 वर्षों में केंद्र की बीजेपी सरकार ने बंगाल के विकास के लिए लगातार हर प्रकार की मदद की है। बंगाल में नैशनल हाईवे के निर्माण के लिए UPA ने 10 वर्षों में दिया था, उससे तीन गुना अधिक मौजूदा सरकार ने दिया है।”

उन्होंने कहा, “बंगाल में विकास कार्यों के सामने एक बड़ी चुनौती है। बंगाल के लिए जो पैसा केंद्र सरकार, राज्य सरकार को भेजती है, उसका ज्यादातर हिस्सा यहाँ लूट लिया जाता है। जो पैसा भारत सरकार सीधे भेजती है वो पैसा आप लोगों पर खर्च नहीं होता, वो पैसा TMC काडर पर खर्च होता है। इसलिए गरीब कल्याण की योजनाओं में बंगाल पिछड़ा हुआ है।”

बंगाल को नई रोशनी की जरूरत है: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, “आज बंगाल को नई रोशनी और सच्चे परिवर्तन की जरूरत है। यहां आजादी के बाद पहले कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के शासन का लंबा दौरा देखा है। 15 साल पहले आप लोगों ने परिवर्तन का फैसला लिया था। आप लोगों ने माँ, माटी, मानुष के नारे पर भरोसा किया था लेकिन हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो गए।”

उन्होंने आगे कहा, “भर्ती घोटालों से नौजवानों का भविष्य खराब हुआ, बहनों-बेटियों पर अत्याचार बढ़ा, आज क्राइम-करप्शन TMC सरकार की पहचान बन गए हैं। जब तक बंगाल में TMC की सरकार रहेगी, तब तक बंगाल का विकास रुका रहेगा। आज बंगाल का जन-जन कह रहा है TMC जाएगी, तभी असली बदलाव आएगा।”

पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले साल बंगाल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बंगाल को अब परिवर्तन चाहिए। ऐसा परिवर्तन जो काम में दिखे, परिवर्तन जिससे उद्योग लगें और बेटे-बेटियों को नौकरी मिले। ऐसा परिवर्तन जहां सुशासन होगा। ये परिवर्तन सिर्फ भाजपा ला सकती है।”

INDI गठबंधन के दलों ने घुसपैठियों की शरण ली: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में घुसपैठ को लेकर भी चर्चा की और INDI गठबंधन के दलों पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मैंने लाल किले से देश में घुसपैठ के बढ़ते खतरे की चिंता व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल के लोग समय से आगे की सोचते हैं, आपके बीच में इस चुनौती की चर्चा करता रहा हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा, “आजकल जिन देशों को विकसित कहा जाता है, जिनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। वहाँ घुसपैठियों के खिलाफ मुहिम चल रही है। भारत भी अब घुसपैठियों को ज्यादा नहीं सह सकता है। घुसपैठियों को बंगाल से आपका एक वोट मुक्त करा सकता है।”

उन्होंने कहा, “भारत के पास संसाधन सीमित हैं, हमें अपने युवाओं को रोजगार देना है, अपने नागरिकों को सुविधाएँ देनी हैं। जो घुसपैठिए हमारे युवाओं का रोजगार छीन रहे हैं, हमारे इन्फ्रास्ट्रक्चर पर दबाव डाल रहे हैं। जो हमारी बहनों-बेटियों के साथ अत्याचार कर रहे हैं, ऐसे घुसपैठियों को हम भारत में रहने नहीं देंगे। भारत सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ इतना बड़ा अभियान चलाया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मुझे हैरानी है कि TMC, कॉन्ग्रेस समेत INDI गठबंधन के दल तुष्टिकरण के आगे घुटने टेक चुके हैं। ये राजनीतिक दल सत्ता की भूख के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दे रहे हैं। कुछ जगहों पर तो उन्होंने घुसपैठियों की शरण ले ली है। पश्चिम बंगाल सीमावर्ती राज्य है, जिस तरह बॉर्डर के इलाके में डेमोग्राफी बदली जा रही है, यह पश्चिम बंगाल में सामाजिक संकट पैदा कर रहा है। खासतौर पर किसानों से धोखाधड़ी करके उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। जनजातीय लोगों को गुमराह करके उनकी जमीन हड़पी जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “देश यह सहन नहीं कर सकता है, इसे रोकना ही होगा। जो लोग सिर्फ हमारे लोगों को रोजी-रोटी छीनने आए हैं, जो फर्जी तरीके से कागज बनाकर रुक गए हैं। उनके यहाँ से जाना ही होगा, यह काम ईमानदारी से पूरा हो सके इसके लिए TMC सरकार को यहाँ से जाना ही होगा।”

ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में पाकिस्तानी आतंकियों के ठिकानों पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सेना ने सीमा पार आतंकियों और आतंक के आकाओं के अड्डो को खंडहर में बदल दिया। उन्होंने कहा कि सेना ने आतंकियों को ऐसा सबक सिखाया कि पाकिस्तान की आज भी नींद उड़ी हुई है।

उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता की शक्ति मेड इन इंडिया हथियारों की रही है। भारतीय सेना को ताकत देने में बंगाल की भूमि का बहुत बड़ा योगदान है। इच्छापुर में गुलामी के दौर में डिफेंस मेन्युफैक्चरिंग का काम शुरू हुआ लेकिन कांग्रेस सरकार ने डिफेंस इंडस्ट्री को बर्बाद कर दिया। हमारी सेना को विदेश पर निर्भर कर दिया।”

आप BJP सरकार बनाइए, हम डॉ मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएँगे: PM

पीएम मोदी ने कहा, “भाजपा सरकार ने डिफेंस सरकार को नई ऊर्जा दी है और इसका लाभ यहाँ की फैक्ट्री को भी मिला है। आज ये फैक्ट्री आधुनिक रायफल और अन्य हथियार बना रही है। इससे यहाँ छोटे-छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर बने हैं। इन कारखानों के कारण दमदम, बैरकपुर क्षेत्र में हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।”

उन्होंने कहा, “आप 2026 में भाजपा की सरकार बनाइए, हम बंगाल को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाएँगे। नया निवेश, नए कारखाने लगेंगे, दमदम फिर से इंडस्ट्रियल हब बनेगा, ये भाजपा का संकल्प है।”

TMC विकास की दुश्मन है: PM मोदी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, “भाजपा के पास बंगाल के विकास का रोडमैप है लेकिन TMC विकास की दुश्मन है। TMC का मिशन भाजपा को रोकना है। केंद्र की योजनाओं को रोकना है। क्या इस राजनीति से बंगाल का भला होगा?”

उन्होंने कहा, “आप यहाँ भी एक बार भाजपा को अवसर देकर देखिए। भाजपा आएगी तो बंगाल में रेल और मेट्रो का तेजी से विकास होगा। यहाँ बहुत बड़ी मात्रा में निवेश आए, युवाओं को रोजगार मिले। ये तभी होगा जब यहाँ कानून का राज आएगा, जब भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और जब बंगाल में डबल इंजन की सरकार होगी।”

एंटी करप्शन बिल को लेकर पीएम ने साधा निशाना

पीएम मोदी ने एंटी करप्शन बिल को लेकर भी TMC पर निशाना साधा है। पीएम मोदी ने कहा, “जेल से भी सरकार चलाने की कोशिश कर रहे हैं। TMC का मंत्री शिक्षक भर्ती में आज तक जेल में है, तब भी वो कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे। TMC के एक और मंत्री पर गरीबों के राशन लूटने का आरोप है। ये भी जेल जाने के बाद कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे।”

पीएम मोदी ने कोलकाता में कई मेट्रो रेल परियोजनाओं का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले कोलकाता में कई मेट्रो रेल परियोजनाओं का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने जेसोर रोड मेट्रो स्टेशन से नोआपाड़ा-जय हिंद बिमान बंदर मेट्रो सेवा को हरी झंडी दिखाई है।

इसे साथ ही पीएम मोदी ने सियालदह-एस्प्लेनेड मेट्रो सेवा और बेलेघाटा-हेमंत मुखोपाध्याय मेट्रो सेवा को भी हरी झंडी दिखाई है। 13.61 किलोमीटर लंबे ये मेट्रो नेटवर्क कोलकाता के व्यस्त इलाकों को जोड़कर यात्रा के समय को काफी कम कर देंगे और इन सेवाओं का लाभ हर दिन लाखों यात्रियों को होगा। पीएम मोदी ने सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए 7.2 किलोमीटर लंबे छह-लेन एलिवेटेड कोना एक्सप्रेसवे की आधारशिला भी रखी।

विवाह- भारतीय संस्कृति की आत्मा… लिव-इन रिश्ते सिर्फ ‘आकर्षण’ पर टिके : युवा दोनों के बीच समझें अंतर, दूर रहें अकेलेपन और डिप्रेशन से

आज का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप वास्तव में आधुनिकता का प्रतीक है या फिर यह हमारे समाज और संस्कृति को खोखला करने वाली एक सोच है? अनिरुद्धाचार्य जी ने जब इसे ‘कुत्ता संस्कृति’ कहा तो बेशक भाषा पर सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन उनके कहने का असली मतलब बेहद गहरा और गंभीर है।

विवाह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह केवल दो लोगों का मिलन नहीं बल्कि दो परिवारों, दो परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का वचन है। विवाह रिश्तों में स्थिरता, जिम्मेदारी और भरोसा देता है। इसके विपरीत लिव-इन रिश्ते अक्सर सिर्फ आकर्षण और सुविधा पर टिके होते हैं, जिनमें ना कोई सामाजिक जिम्मेदारी होती है और ना भविष्य की गारंटी।

यह सच है कि भारतीय न्यायपालिका ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता दी है। अदालतों ने इसे दो वयस्कों का व्यक्तिगत निर्णय माना है और कहा है कि इसमें अपराध जैसा कुछ नहीं लेकिन कानूनी मान्यता और सामाजिक स्वीकार्यता में फर्क होता है। कोर्ट का निर्णय कानून की दृष्टि से है जबकि समाज का आधार संस्कार और मूल्य हैं।

युवाओं को यह समझना होगा कि लिव-इन रिलेशन का सबसे बड़ा शिकार बच्चे बनते हैं। जब रिश्ते बिना बँधन के टूटते हैं तो उनका मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य सबसे पहले प्रभावित होता है। यही वजह है कि पश्चिमी देशों में जहाँ लिव-इन संस्कृति फैली वहाँ अकेलापन, डिप्रेशन और पारिवार टूटने की घटनाएँ तेजी से बढ़ीं।

भारत जैसे देश में जहाँ परिवार हमारी सबसे बड़ी ताकत है वहाँ इस तरह की सोच समाज की जड़ों को खोखला कर सकती है। कुछ लोग इसे पर्सनल फ्रीडम का नाम देते हैं लेकिन असली आजादी जिम्मेदारी के साथ होती है। जिस रिश्ते में न कल का भरोसा हो, न समाज और परिवार की स्वीकृति वह रिश्ता सिर्फ क्षणिक सुख है, स्थायी समाधान नहीं।

लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी सुरक्षा मिल चुकी है लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विवाह ही समाज की रीढ़ है और इसे मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है।

बिहार SIR पर राहुल गाँधी का एक और प्रोपेगेंडा हुआ ध्वस्त: जिस अमन ने की थी ‘गरीबों’ के नाम हटाने की शिकायत, उसने वीडियो जारी कर माँग ली माफी

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने जोर शोर से बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली, SIR पर जमकर लोगों को भड़काया। अनर्गल बातें फैलाईं। अब उनके एक-एक झूठ की कलई खुल करल सामने आती जा रही है।

ताजा मामला एक वायरल वीडियो का है। वीडियो में रफीगंज निवासी अमन कुमार से नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव ने पूछा कि वह SIR के बारे में क्या जानते हैं। इस पर अमन ने कहा कि इसका मतलब है कि गरीबों का नाम वोटर्स लिस्ट से हटा दिया जाएगा।

असल में उसकी शिकायत थी कि उसके पिता रजाक का नाम लिस्ट से हटा दिया गया। अमन ने तो राहुल गाँधी के सामने ये तक कह दिया कि आग चलकर गरीबों से मतदान करने का अधिकार छीन लिया जाएगा।

अमन के बयान के बाद राहुल गाँधी ये कहा, “बिल्कुल, यही हो रहा है।”

खुल गई पोल

वीडियो वायरल हुआ तो स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग ने अमन की शिकायत की जाँच की। इसमें पता चला कि रजाक के साथ अमन का भी का नाम वास्तव में वोटर लिस्ट में मौजूद था। प्रशासन ने अमन से इस पर सवाल पूछे तो उसने कहा कि लिस्ट उसने चेक ही नहीं की थी।

इसके बाद अमन कुमार ने वीडियो बनाकर ही सार्वजनिक रूप से माफी माँगी और कहा कि उसे गलत जानकारी मिली थी।

अमन ही नहीं, राहुल ने अलग अलग क्षेत्रों से कई लोगों से ये कहलवाया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब है। नहाटा के चकला गाँव की एक महिला को भी ये कहकर वोट अधिकार यात्रा में शामिल किया गया कि उसके घरवालों के नाम सूची में नहीं हैं। उसे वह राहुल गाँधी से मिल कर जुड़वा सकती हैं। बाद में पता चला कि उसके घरल के सभी लोगों का नाम लिस्ट में शामिल है।

प्रशासन के पूछे जाने पर महिला ने बताया कि उसे जबरन बुलाया गया था। उसे सही जानकारी नहीं थी।

जबरन मुद्दा बनाने की कोशिश

असल में राहुल गाँधी इस यात्रा के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की बात उठाना चाह रहे थे, जो असल में हुई नहीं। राहुल गाँधी ने इस मुद्दे को ‘वोट चोरी’ की साजिश बताया था और दावा किया था कि देशभर में गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग ने भी इस पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और स्पष्ट रूप से कहा कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया का उद्देश्य मृत या फर्जी नामों को हटाना है, न कि गरीबों या अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना। सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही ठहराया और कहा कि आधार कार्ड को वोटर सत्यापन के लिए अनिवार्य नहीं माना गया है।

चुनाव आयोग ने कहा ता कि वोटर लिस्ट से 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। इन्हीं 65 लाख कटे नामों के सहारे राहुल गाँधी राजनीतिक संजीवनी खोजने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि उनका असर लोगों पर नहीं दिख पा रहा है क्योंकि लगभग सभी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में मौजूद हैं।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलीभगत करके, लाखों फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए हैं। इश पर भी चुनाव आय़ोग ने उनके एक एक आरोपों का तथ्य सहित जवाब पेश कर दिया।

नाम हटाने को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पटना से दिल्ली तक एसआईआर के खिलाफ बवाल खड़ा करने की कोशिश की। गले फाड़-फाड़ कर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आयोग के बार बार पूछे जाने के बावजूद ये नहीं बता पा रहे कि उन्हें आखिर आपत्ति किस बात पर है?

सासाराम में भी यात्रा के दौरान उन्होंने वोट चोरी और मतदाता के हक की बात दोहराते रहे लेकिन यहाँ पर भी लोगों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। ऐसे में झूठी शिकायतों के सहारे वे लोगों का बरगलाने का प्रयास तो कर सकते हैं पर सफल नहीं हो सकते।

वोटिंग लिस्ट में हेर-फेर करने वाले 4 कर्मचारियों को बचा नहीं पाई ममता सरकार, EC के आदेश के बाद आखिरकार करना पड़ा सस्पेंड: फर्जी तरीके से जोड़े गए थे मतदाता

ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार (20 अगस्त 2025) को वोटर आईडी कार्ड के रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी के आरोप में 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इससे पहले चुनाव आयोग (ECI) ने इन दागी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बीते 13 अगस्त को राज्य सरकार को 7 दिनों की समय सीमा दी थी।

‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य सचिव मनोज पंत ने चुनाव आयोग को इस संबंध में रिपोर्ट भेज दी है। हालाँकि, अब तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है लेकिन अधिकारियों ने विभागीय कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है। चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के भी निर्देश दिए थे।

गौर करने वाली बात यह है कि मनोज पंत ने इससे पहले इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को रोकने की कोशिश थी। उनका तर्क था कि ऐसी कार्रवाई न केवल दोषी व्यक्तियों पर बल्कि चुनावी जिम्मेदारियों और अन्य प्रशासनिक कामकाज में लगे अधिकारियों की पूरी टीम के मनोबल पर भी असर डाल सकती है।

फर्जी मतदाता मामले में कार्रवाई का आदेश

इस महीने की शुरुआत में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चार चुनाव अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इन पर आरोप था कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर फर्जी मतदाता आवेदनों को पंजीकृत करने की अनुमति दी।

पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के अपडेट के लिए फॉर्म-6 की सैंपल जाँच के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई उनमें दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) देबोत्तम दत्ता चौधरी और बिप्लब सरकार और दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) तथागत मंडल और सुदीप्त दास शामिल हैं। इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था।

इसके अलावा, चुनाव आयोग ने अस्थाई डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलधर के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि इन अधिकारियों की हरकतें आपराधिक कदाचार के बराबर हैं।

ECI ने बिना देरी किए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए और प्राथमिकी दर्ज करने को भी कहा। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि फर्जी मतदाताओं को सूची में जोड़ने के मामले में दोषी अधिकारियों पर 7 दिन के भीतर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


पीएम मोदी बोले- सरकारी कर्मी 50 घंटों तक हिरासत के बाद हो जाता है सस्पेंड, CM जेल से भोगते हैं सत्ता का सुख: जाने वो नियम जिसके तहत हिरासत में लिए जाने पर सस्पेंड होते हैं केंद्रीय कर्मी

केंद्र सरकार ने नेताओं के भ्रष्टाचार पर कार्रवाई के लिए संसद में 130वां संविधान संशोधन बिल पेश किया है। इस बिल के तहत अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर 5 वर्ष या उससे अधिक सजा वाली धाराओं में मुकदमा दर्ज होता है तो 30 दिन जेल में रहने के बाद उनका पद चला जाएगा। फिलहाल, यह बिल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया है।

इस बिल के प्रावधानों के खिलाफ लगातार विपक्ष विरोध प्रदर्शन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को बिहार के गयाजी में कहा कि सरकारी कर्मचारी 50 घंटों तक हिरासत में रहे तो वह सस्पेंड हो जाता है लेकिन PM और CM जेल से भी सत्ता का सुख भोगते रहते हैं।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा, “मेरा साफ मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को अगर अंजाम तक पहुँचाना है तो कोई भी कार्रवाई के दायरे से बाहर नहीं होना चाहिए। आज कानून है कि अगर किसी छोटे सरकारी कर्मचारी को 50 घंटे तक हिरासत में रखा जाए तो वह अपने-आप सस्पेंड हो जाता है, ड्राइवर हो, क्लर्क हो, चपरासी हो उनकी जिंदगी तबाह हो जाती है। अगर कोई मुख्यमंत्री है, मंत्री है या प्रधानमंत्री है, तो वह जेल में रहकर भी सत्ता का सुख पा सकता है।”

उन्होंने कहा, “हमने कुछ समय पहले ही देखा है कि कैसे जेल से ही फाइलों पर साइन किए जा रहे थे, जेल से ही सरकारी आदेश निकाले जा रहे थे। नेताओं का अगर यही रवैया रहेगा, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कैसे लड़ी जा सकती है? संविधान हर जनप्रतिनिधि से ईमानदारी और पारदर्शिता की उम्मीद करता है।”

केंद्रीय कर्मियों के निलंबन के लिए नियम

भारत में केंद्रीय कर्मियों के वर्गीकरण, उन पर नियंत्रण और कदाचार के मामले में कार्रवाई के लिए दिशानिर्देश ‘केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965’ में दिए गए हैं। ये नियम 1 दिसंबर 1965 से लागू किए थे। इसके भाग 4 में केंद्रीय कर्मियों के निलंबन के नियम दिए गए हैं।

इसमें नियम 10 के उपनियम 2 के खंड (क) में कहा गया है, “किसी सरकारी कर्मचारी को नियुक्ति करने वाली प्राधिकरण (appointing authority) के आदेश से निलंबित माना जाएगा अगर वह किसी आपराधिक आरोप या अन्य वजह से 48 घंटे से अधिक की अवधि के लिए कस्टडी में रखा जाता है। यह निलंबन उसके हिरासत में लिए जाने की तारीख से ही प्रभवी माना जाता है।”E

वहीं, उपनियम 2 के खंड (ख) में कहा गया है, “अदालत अगर किसी कर्मी को किसी अपराध में दोषी ठहराकर 48 घंटे से ज्यादा की कैद की सजा सुनाती है। ऐसे में अगर उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त, हटाया या अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं किया गया हो तो दोषसिद्धि की तारीख से उसे निलंबित माना जाता है।”

इसमें खंड (ख) को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया है, “इसमें दिए गए 48 घंटों को सजा शुरू होने के समय से गिना जाएगा। अगर सजा बीच-बीच में रुक-रुक कर (जैसे अलग-अलग बार जेल जाना पड़े) पूरी की गई हो, तो उन सब अवधियों को जोड़कर देखा जाएगा।”

केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 का भाग

इन नियमों में गृह मंत्रालय द्वारा 25 फरवरी 1955 को जारी एक पत्र भी शामिल किया गया है। इस पत्र में कहा गया है, “यह उस सरकारी सेवक की ड्यूटी होगी जिसे किसी कारण से गिरफ्तार किया गया है कि वह अपनी गिरफ्तारी से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों को अपने सरकारी वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल सूचित करे चाहे उसे बाद में जमानत पर रिहा ही क्यों न कर दिया गया हो।”

इसमें आगे कहा गया है, “संबंधित व्यक्ति या किसी अन्य स्रोत से सूचना मिलने पर विभागीय प्राधिकारी इस बात का निर्णय लेंगे कि क्या उस व्यक्ति की गिरफ्तारी से संबंधित तथ्य और परिस्थितियों के कारण उसे निलंबित करने की आवश्यकता है कि नहीं?”

IAS, IPS और IFS अधिकारियों का निलंबन

अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के निलंबन किए जाने की शर्तें अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 में दी गई हैं। ये नियम IAS, IPS और IFS अधिकारियों पर लागू होते हैं।

इसके भाग 2 के नियम 3 में निलंबन संबंधी शर्तें हैं और इसके उपनियम 2 में कहा गया है, “इन सर्विसेज का कोई कर्मी अगर किसी आपराधिक आरोप के कारण या किसी अन्य वजह से 48 घंटे से अधिक अवधि के लिए आधिकारिक हिरासत में रखा जाता है तो इस नियम के अंतर्गत संबंधित सरकार द्वारा निलंबित माना जाएगा।”

वहीं, इसके उपनियम 4 में कहा गया है, “अदालत अगर किसी कर्मी को किसी अपराध में दोषी ठहराकर 48 घंटे से ज्यादा की कैद की सजा सुनाती है। ऐसे में अगर उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त, हटाया या अनिवार्य सेवानिवृत्त नहीं किया गया हो तो दोषसिद्धि की तारीख से उसे निलंबित माना जाता है।”

अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 का भाग

निलंबन का रिव्यू

इन सेवा शर्तों में अधिकारियों के निलंबन को रिव्यू किए जाने को लेकर भी नियम दिए गए हैं। अखिल भारतीय सेवाएँ (अनुशासन एवं अपील) नियम में कहा गया है कि प्रत्येक मामले में निलंबन आदेश की तिथि से 90 दिनों के भीतर समीक्षा की जाएगी। इसमें कहा गया है कि जिन मामलों में निलंबन की अवधि बढ़ा दी जाती है तो उनमें रिव्यू विस्तार की अंतिम तारीख से 180 दिनों के भीतर किया जाएगा।

वहीं, केंद्रीय सिविल सेवा नियम में कहा गया है, “अगर किसी को निलंबित किया गया है, तो वह आदेश सिर्फ 90 दिन तक ही मान्य रहेगा। अगर इसे 90 दिन के बाद भी जारी रखना है, तो 90 दिन पूरे होने से पहले समीक्षा करके ही इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।”

इसमें आगे कहा गया है, “किसी कर्मचारी को निलंबित करने के आदेश दिए जाने के बाद, 90 दिन पूरे होने से पहले उस अधिकारी को उसकी समीक्षा करनी होगा, जिसके पास निलंबन को बदलने या खत्म करने की शक्ति है। यह समीक्षा एक रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर होगी। इस समीक्षा के बाद अधिकारी को तय करना होगा कि निलंबन को जारी रखना है या खत्म करना है। निलंबन को एक बार में 180 दिनों से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता।”

निलंबित कर्मी को कितना मिलता है निर्वाह भत्ता?

निलंबन की अवधि के दौरान सरकारी कर्मचारी को जीविका चलाने हेतु निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) दिया जाता है। निलंबन के पहले 90 दिनों तक कर्मचारी को उसके आखिरी वेतन का 50% जीविका भत्ते के रूप में दिया जाता है। यदि विभागीय कार्रवाई में देरी कर्मचारी की गलती से नहीं होती है, तो यह भत्ता बढ़ाकर 75% तक किया जा सकता है लेकिन यदि देरी कर्मचारी की वजह से होती है, तो यह घटाकर 25% कर दिया जाता है।

इस भत्ते में मकान किराया भत्ता (HRA), महंगाई भत्ता (DA) या अन्य कोई विशेष भत्ता शामिल नहीं होता। साथ ही, यह भत्ता कर्मचारी के मूल वेतन से अधिक नहीं हो सकता है।