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सच्चे भारतीय होते तो नहीं करते ऐसी बात… सेना पर राहुल गाँधी ने दिया अपमानजनक बयान तो सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा: गलवान की लड़ाई के दौरान भी आर्मी का मनोबल गिरा रहे थे कॉन्ग्रेस नेता

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी से पूछा, "आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है? क्या आप वहाँ थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है?"

भारतीय सेना पर आपतिजनक बयान देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर राहुल गाँधी सच्चे भारतीय होते तो वह सेना पर ऐसा बयान नहीं देते। राहुल गाँधी से सुप्रीम कोर्ट ने उनके बयान का आधार भी पूछा है।

यह टिप्पणियाँ सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (4 अगस्त, 2025) को की हैं। सुप्रीम कोर्ट लोकसभा में अब नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। राहुल गाँधी ने इन बयानों पर दर्ज मामले रद्द करने की माँग की थी। इसको लेकर वह सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस याचिका की सुनवाई करते हुए कहा, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है? क्या आप वहाँ थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं… अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब नहीं कहते।” सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी का पक्ष रख रहे वकील अभिषेक मनु सिंघवी से यह बातें कहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी से कहा कि उन्हें अगर यह सब बयान देने हैं तो संसद में जाकर यह सब कह सकते हैं। शीर्ष अदालत ने प्रश्न उठाया कि उन्हें यह सब बातें सोशल मीडिया पोस्ट में क्यों कहनी होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सैनिकों के नुकसान को लेकर भी राहुल गाँधी पर प्रश्न उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई लड़ाई होती है तो दोनों तरफ के सैनिक मारे जाते हैं या नुकसान होता है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि इसमें अजीब सा क्या है।

सुप्रीम कोर्ट ने हालाँकि राहुल गाँधी को राहत दे दी। राहुल गाँधी के खिलाफ दर्ज मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। उनकी केस खत्म करने की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने नहीं स्वीकार की। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

क्या था मामला?

राहुल गाँधी पर यह मामला सीमा सड़क संगठन के एक अधिकारी ने दर्ज करवाया था। उन्होंने कहा था कि 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने सेना का अपमान किया है। उनके बयान में भारतीय सैनिकों के चीनी सैनिकों से ‘पीटे जाने’ की बात कही गई थी।

राहुल गाँधी ने कहा था, “लोग भारत जोड़ो यात्रा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट वगैरह के बारे में तो पूछेंगे ही। लेकिन चीन द्वारा 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा करने, 20 भारतीय सैनिकों को पीटने और अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछेंगे। लेकिन भारतीय प्रेस उनसे इस बारे में एक भी सवाल नहीं पूछता। क्या यह सच नहीं है?”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस बयान पर दर्ज मामले को रद्द करने से मई, 2025 में मना कर दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि बोलने की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई सेना का अपमान करेगा। इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गाँधी को समन भी किया था।

गलवान की लड़ाई के दौरान चीन के पक्ष में दिखे थे राहुल गाँधी

राहुल गाँधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही नहीं बल्कि जून, 2020 में गलवान लड़ाई के दौरान भी सेना और सरकार का साथ नहीं दिया था। कहीं उन्होंने हजारों वर्ग किलोमीटर चीन के हाथ चले जाने की बात कही थी तो कहीं सैनिकों की सुविधाओं को लेकर बात कर रहे थे। वह कह रहे थे कि सरकार सो रही है और चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है। यह सारे बयान एस समय में दिए जा रहे थे जब चीन के खिलाफ पूरा देश चीन के साथ खड़ा था।

गलवान की लड़ाई के बाद जारी हुए चीन से तनाव के बीच राहुल गाँधी के दिल्ली में चीनी राजदूत से मिलने की खबर भी सामने आई थी। राहुल गाँधी इस पर कुछ स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए थे। इसके अलावा कॉन्ग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के भी आपस में समझौता करने की रिपोर्ट्स आ चुकी हैं। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया है कि राजीव गाँधी फाउंडेशन ₹1 करोड़ से अधिक का चन्दा चीन से ले चुका है। राजीव गाँधी फाउंडेशन का FCRA लाइसेंस भी कैंसिल हो गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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