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PM मोदी और सरकार की कोशिशें ला रही रंग, दुनिया में आठवें नंबर पर पहुँचा भारत का टूरिज्म: फ्रांस-जर्मनी को छोड़ा पीछे, ₹19+ लाख करोड़ हुई कमाई

भारत ने विश्व पर्यटन की दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद (डब्ल्यूटीटीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में भारत दुनिया की आठवीं सबसे बड़ी पर्यटन अर्थव्यवस्था बन गया है। देश की पर्यटन से होने वाली कमाई 231.6 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 19.4 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँच गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल भारत 10वें स्थान पर था, लेकिन इस बार दो पायदान की छलांग लगाकर जापान और फ्रांस जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया। अमेरिका पहले स्थान पर है 2,360 अरब डॉलर के साथ, उसके बाद चीन, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और मैक्सिको हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की दूरदर्शी नीतियों, मेहनत और लगातार प्रयासों का बड़ा हाथ है।

पिछले एक दशक से पहले भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी। 2013 में डब्ल्यूटीटीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पर्यटन की विकास दर 6-7 प्रतिशत के आसपास थी, लेकिन वैश्विक रैंकिंग में भारत 24वें स्थान या उससे नीचे था। विदेशी पर्यटकों की संख्या 2013 में लगभग 6.97 मिलियन थी, जो 2019 तक बढ़कर 10.93 मिलियन हो गई। जीडीपी में योगदान 5-6 प्रतिशत था।

इन सबके पीछे कई समस्याएँ भी थीं, जैसे – एयरपोर्ट कम थे (2014 में सिर्फ 74), सड़कें खराब, होटल की कमी और जटिल वीजा प्रक्रिया।

इन सबके बीच 2020 में कोविड-19 महामारी ने पर्यटन उद्योग को और बड़ा झटका दिया। विदेशी पर्यटकों की संख्या घटकर 2.74 मिलियन रह गई, और जीडीपी में योगदान 4 प्रतिशत तक गिर गया। होटल, टूर ऑपरेटर, गाइड्स, और छोटे-मोटे दुकानदार सब परेशान थे। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह भारत की मेहनत और जज्बे की मिसाल है।

कोविड के बाद तेज रिकवरी हुई। 2023 में विदेशी पर्यटक 9.52 मिलियन पहुँच गए, जो 2019 के 87 प्रतिशत के बराबर था। घरेलू पर्यटन भी बढ़ा – 2023 में 2.5 अरब से ज्यादा घरेलू यात्राएँ हुईं। यह सब सरकार की नीतियों से हुआ।

दरअसल, यह सफलता सालों की मेहनत का परिणाम है। 2014 से पर्यटन को प्राथमिकता दी गई। बजट आवंटन 2014 में 500 करोड़ रुपये था, जो अब 2,400 करोड़ से ज्यादा हो गया है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा साल 2002 में चलाए गए ‘अतुल्य भारत’ अभियान को और मजबूत किया गया। सोशल मीडिया, फिल्मों और व्लॉग्स के जरिए प्रमोशन बढ़ा। ट्रैवल कंटेंट ने भारत को वैश्विक स्तर पर चमकाया।

इसके अलावा स्वदेश दर्शन योजना 2014-15 में शुरू हुई, जिसमें थीम-आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए, जैसे बौद्ध सर्किट, रामायण सर्किट, वन्यजीव सर्किट। लेकिन शुरुआत में यह कई राज्यों में फैली हुई थी, इसलिए प्रभाव कम पड़ा। 2022 में स्वदेश दर्शन 2.0 लॉन्च हुई, जो एक-एक जगह पर केंद्रित है। इसमें सतत पर्यटन पर जोर – पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो। पायलट प्रोजेक्ट में ओरछा (मध्य प्रदेश), गाँडीकोटा (आंध्र प्रदेश), बोधगया (बिहार) जैसी सात जगहें शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण योजना है प्रसाद (तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान)। यह धार्मिक स्थलों को सुधारने के लिए है। जैसे – काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, अयोध्या का विकास, केदारनाथ का पुनर्निर्माण। इनसे धार्मिक पर्यटन बढ़ा और रोजगार मिला। 2024 तक प्रसाद के तहत 73 परियोजनाओं पर काम हुआ, जिसमें 1,400 करोड़ रुपये खर्च हुए। बुनियादी ढाँचे में बदलाव जबरदस्त है।

साल 2014 से 2025 तक राष्ट्रीय राजमार्ग 91,000 किलोमीटर से बढ़कर 1.46 लाख किलोमीटर हो गए। रेल विद्युतीकरण 98 प्रतिशत पहुँच गया। बंदरगाह क्षमता दोगुनी हुई। उड़ान योजना से 88 एयरपोर्ट चालू हुए, छोटे शहरों में उड़ानें बढ़ीं। वंदे भारत ट्रेनों से आरामदायक और तेज यात्रा संभव हुई। होटलों में निवेश बढ़ा – 2024 में 3,295 करोड़ रुपये के 40 प्रोजेक्ट मंजूर हुए, 23 राज्यों में प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्र बनाने के लिए।

वीजा नीति आसान हुई। ई-वीजा अब 167 देशों के लिए उपलब्ध है, ऑनलाइन आवेदन से विदेशी पर्यटक बढ़े। चिकित्सा पर्यटन को प्रोत्साहन – भारत की सस्ती और गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएँ, जैसे आयुर्वेद और योग, ने लाखों विदेशी रोगियों को आकर्षित किया। 2024 में विदेशी पर्यटकों ने 3.10 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो 2019 से ज्यादा है। सौंदर्यीकरण प्रयास भी बड़े हैं। स्वच्छ भारत अभियान से जगहें साफ हुईं – ताजमहल के आसपास सफाई, गंगा घाटों का सुधार। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 43 हो गई, दुनिया में छठा स्थान। प्राकृतिक, सांस्कृतिक और एडवेंचर पर्यटन पर फोकस – हिमालय, समुद्र तट, वन्यजीव।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से कई जगहों को बढ़ावा दिया। उनका मानना है कि पर्यटन से रोजगार बढ़ता है और संस्कृति फैलती है। 2024 में लक्षद्वीप का दौरा किया और सोशल मीडिया पर तस्वीरें-वीडियो साझा किए। कहा, “लक्षद्वीप की सुंदरता देखिए, यह मालदीव से कम नहीं।”

इसका प्रभाव? लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई – 2023 में एक लाख से कम, 2024 में दो लाख से ज्यादा। उड़ानें 88 प्रतिशत बढ़ीं। एक्स पर उनके पोस्ट ने लाखों को आकर्षित किया।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन भी पीएम मोदी ने किया। इसका प्रभाव ये हुआ कि वाराणसी में पर्यटक 2014 के पाँच करोड़ से बढ़कर 2022 में 7.2 करोड़ हो गए। कॉरिडोर में 10 करोड़ विजिटर्स आए, दैनिक 1.5-2 लाख भक्त। होटल बुकिंग दोगुनी हुई।

गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बताकर प्रमोट किया। अब वहाँ सालाना 50 लाख पर्यटक आते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

कश्मीर का प्रचार करते हुए पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद कहा, “कश्मीर स्वर्ग है, घूमिए।” इसके बाद फिल्मों की शूटिंग बढ़ी, पर्यटक बढ़े। 2024 में कश्मीर में दो करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए। मणिपुर, पूर्वोत्तर की जगहों को भी बढ़ावा दिया, जैसे लोकटक झील। अकेले पूर्वोत्तर में पर्यटन 30 प्रतिशत बढ़ गया।

पीएम मोदी और भारत सरकार ने विदेश यात्राओं में भी भारत को प्रमोट किया। जी20 शिखर सम्मेलन में दिल्ली और वाराणसी दिखाए। योग दिवस को वैश्विक बनाया, जो स्वास्थ्य पर्यटन बढ़ाता है। एक्स पर पोस्ट्स, जैसे क्रोएशिया, साइप्रस, कुवैत के दौरे भारत की जगहों से जोड़ते हैं।

चिकित्सा और सांस्कृतिक पर्यटन: भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ विदेशी पर्यटकों को खींच रही हैं। आयुर्वेद, योग, और मॉडर्न मेडिसिन ने भारत को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाया। 2024 में लाखों विदेशी मरीज भारत आए। इसके अलावा, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 43 हो गई, जो दुनिया में छठा स्थान है। प्राकृतिक सुंदरता (हिमालय, गोवा के समुद्र तट), सांस्कृतिक धरोहर (अजंता-एलोरा, ताजमहल), और एडवेंचर टूरिज्म (राफ्टिंग, ट्रेकिंग) ने भी पर्यटकों को आकर्षित किया।

कुल मिलाकर पीएम मोदी के प्रचार से घरेलू पर्यटन 95 प्रतिशत बढ़ा, जीडीपी में योगदान 6.6 प्रतिशत पहुँच गया, यानी 21 लाख करोड़ रुपये। 2024 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का खर्च रिकॉर्ड 3.1 ट्रिलियन रुपये (36.8 अरब डॉलर) रहा, 2019 से नौ प्रतिशत ज्यादा। घरेलू खर्च 15.5 लाख करोड़ रुपये, 2019 से 22 प्रतिशत अधिक। डब्ल्यूटीटीसी का अनुमान है कि 2025 में यह 3.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचेगा।

यह रिपोर्ट कोई आकस्मिक परिणाम नहीं है। 2014 से नीतिगत बदलाव – निजी निवेश को प्रोत्साहन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल। कोविड में टीकाकरण तेज किया, रिकवरी में मदद मिली। डब्ल्यूटीटीसी कहता है कि 2034 तक भारत दुनिया में चौथे नंबर पर पहुँच जाएगा। अर्थव्यवस्था में 42 लाख करोड़ रुपये का योगदान होगा और करीब 6.4 करोड़ नौकरियाँ सृजित होंगी।

भारत में पर्यटन के क्षेत्र में अब भी काफी चुनौतियाँ

डब्ल्यूटीटीसी की सीईओ जूलिया सिम्पसन कहती हैं, “भारत में सब कुछ है, लेकिन बेहतर प्रचार चाहिए।” ओवरटूरिज्म से बचना भी जरूरी है, जैसे गोवा में अक्सर ओवर-टूरिज्म की वजह से कई तरह की दिक्कतें सामने आने लगी हैं।

भविष्य में सरकार 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की पर्यटन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखती है। डिजिटल पर्यटन – ऐप्स, वर्चुअल टूर्स। ग्रामीण पर्यटन से गाँवों में रोजगार बढ़ेगा। इसके लिए सरकार ने अभी से तैयारियाँ शुरू कर दी है। इसके लिए सरकार ने बजट 2025 में 20,000 करोड़ रुपये पर्यटन विकास के लिए आवंटित किया। वहीं, 23 राज्यों में 3,300 करोड़ की परियोजनाएँ चल रही हैं, जिसमें सड़कें, एयरपोर्ट, डिजिटल एकीकरण शामिल हैं।

भारत का टॉप 10 में पहुँचना कोई छोटी बात नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता, सरकार की नीतियों और स्थानीय लोगों की मेहनत का नतीजा है। पर्यटन सिर्फ पैसे की बात नहीं है; यह देश की संस्कृति, इतिहास, और विविधता को दुनिया तक ले जाने का जरिया है।

काशी के घाटों से लेकर लक्षद्वीप के समुद्र तटों तक भारत हर कोने में खूबसूरत है। अगर हम इसे सही तरीके से प्रमोट करें, पर्यावरण का ध्यान रखें और बुनियादी ढाँचे को और मजबूत करें, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया की टॉप 5 पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होगा। यह क्षण हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। आइए, अपने देश की इस खूबसूरती को और चमकाएँ और दुनिया को बुलाएँ – ‘आइए, भारत देखिए!’

पक्षी-घंटी-छिपकली की तस्वीरें, लियानपुई गाँव में पत्थरों पर छपी हैं मिजो परंपराएँ: मिजोरम के मेनहिर को घोषित किया गया ऐतिहासिक स्थल, ASI ने दिया राष्ट्रीय महत्व का दर्जा

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मिजोरम के लिआनपुई गाँव स्थित लुंगफुन रोपुई में प्राचीन मेनहिरों को ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारक’ के तौर पर घोषित किया है। अब इस स्थल की सुरक्षा और देखरेख केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी।

केंद्र सरकार ने 9 फरवरी को दो महीने की सार्वजनिक अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद ASI ने 14 जुलाई को इसकी आधिकारिक घोषणा की। केंद्र सरकार की अधिसूचना अवधि प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत आवश्यक होती है ताकि किसी स्थल को राष्ट्रीय संरक्षण में लेने से पहले कई भी आपत्ति हों तो उन्हें सामने लाया जा सके।

इस मान्यता की प्रक्रिया 2021 में भारत के राजपत्र में प्रारंभिक अधिसूचना के साथ शुरू हुई थी। 7 जुलाई 2025 को ASI के निदेशक (स्मारक) ने अंतिम अधिसूचना जारी होने से पहले गाँव में स्थित स्थल का दौरा किया था।

लिआनपुई नाम का एक छोटा सा पहाड़ी गाँव चम्फाई शहर से लगभग 54 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में बसा है। इसकी स्थापना 18वीं शताब्दी में लुसेई प्रमुख लिआनपुइया ने की थी। उन्हीं के नाम पर इसका नाम रखा गया है। यह गाँव शुरुआत में मुआलबॉक में स्थापित किया गया था। बाद में वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित किया गया।

लिआनपुई के मेनहिर मिजोरम में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा ‘राष्ट्रीय महत्व का स्मारक’ घोषित किए गए दूसरे स्थल हैं। इससे पहले वांगछिया गाँव के कावछुआह रोपुई को यह दर्जा मिला था।

ये मेनहिर प्राचीन मिजो के प्रतीक की नक्काशी के साथ, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से काफी अहम हैं। इन विशिष्ट रूप से तराशे गए पत्थरों के माध्यम से प्रारंभिक मिजो के लोगों के जीवन, वहाँ होने वाले कार्यक्रमों, रीति-रिवाजों और उस समय के लोगों के विश्वासों की झलक मिलती है।

क्या हैं मेनहिर

मेनहिर (Menhir) शब्द असल में शब्द ब्रिटोनिक भाषा के दो शब्दों से बना है- Maen मतलब पत्थर और Hir अर्थात लंबा। ये एक प्रकार की प्रागैतिहासिक पत्थर की संरचना होती है, जिसे आमतौर पर ऊर्ध्वाधर (खड़ा) रूप में स्थापित किया जाता है। ये इंसानों द्वारा बनाए गए हैं और ऐतिहासिक, धार्मिक या खगोलीय उद्देश्यों से जुड़े होते हैं।

मिजोरम के कला और संस्कृति विभाग के पुरातत्वविद वानलालहुमा ने बताया, “इन पत्थरों पर मानव आकृतियाँ, पक्षी, जानवर, मिथुन के सिर, घंटियाँ और छिपकलियाँ उकेरी गई हैं। ये ईसाई धर्म के आने से पहले मिजो लोगों की सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी देती हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “ये मेनहिर आठ पंक्तियों में व्यवस्थित किए गए हैं। इनमें से 4 उत्तर-दक्षिण दिशा में और 4 पूर्व-पश्चिम दिशा में हैं। ये एक तरह से सुनियोजित और धार्मिक उद्देश्य से की गई व्यवस्था का संकेत देती हैं।”

मेनहिर के पत्थर यूरोप, एशिया और अफ्रीका जैसे विभिन्न महाद्वीपों में पाए जाते हैं। पश्चिमी यूरोप में इनकी संख्या सबसे अधिक है। भारत में भी मेनहिर कई राज्यों में पाए जाते हैं। इनमें कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं।

विश्व के प्रसिद्ध मेनहिर स्थलों में यूके के स्टोनहेंज और एवबरी, यूके का कार्नवॉल में मेन-एन-टोल, पुर्तगाल में अलमेंद्रेस क्रोमलेक, नीदरलैंड्स में ड्रेंथे और फ्रांस में कार्नाक स्टोन्स आदि हैं।

मिट्टी के बर्तन से लेकर प्राचीन शिलालेख तक… कर्नाटक के मस्की में मिले 4000 साल पुरानी मानव बस्ती के प्रमाण, 271 पौराणिक स्थलों की हुई पहचान

कर्नाटक के रायचूर जिले के मस्की कस्बे में एक बड़ी पुरातात्विक खोज हुई। वहाँ से लगभग 4,000 साल पहले इंसानों के रहने के प्रमाण मिले हैं। भारत, अमेरिका और कनाडा के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस क्षेत्र में खुदाई की है। इस दौरान वहाँ कई प्राचीन वस्तुएँ खोजी हैं, जो यहाँ पुरानी मानव बस्ती के सबूत देती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार यह खोज मस्की कस्बे के पास मल्लिकार्जुन मंदिर और अंजनेय स्वामी मंदिर के पास स्थित मल्लिकार्जुन पहाड़ी पर की गई। खुदाई में वैज्ञानिकों को मिट्टी के बर्तन, खाना पकाने संबंधी उपकरण और अन्य कई चीजें मिलीं हैं। ये इस बात का संकेत देती हैं कि यहाँ एक समृद्ध और जीवंत बस्ती थी।

यह टीम पिछले तीन महीनों से मस्की में काम कर रही है। शोधकर्ताओं को यह भी पता चला कि इस इलाके में 11वीं से 14वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक लोग निवास करते थे। इसका मतलब है कि मस्की में 4,000 साल पुरानी सभ्यता के निशान मिले हैं।

इस खोज में शामिल वैज्ञानिकों में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के डॉ एंड्रयू एम बाउर, मैकगिल यूनिवर्सिटी (कनाडा) के डॉ पीटर जी जोहान्सन और भारत के शिव नादर यूनिवर्सिटी के हेमंत कदंबी प्रमुख हैं।

उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से अनुमति लेने के बाद मस्की क्षेत्र की खोज शुरू की और अब तक यहाँ 271 संभावित प्राचीन स्थलों की पहचान की है। यह खोज भारत के इतिहास और प्राचीन सभ्यताओं को समझने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

मस्की शिलालेख

ब्रिटिश स्वर्ण खदान इंजीनियर सी बीडन  ने 1915 में कर्नाटक के मस्की में एक महत्वपूर्ण शिलालेख मिला, जिसने इस क्षेत्र को पुरातात्विक मानचित्र पर ला खड़ा किया। यह शिलालेख मौर्य सम्राट अशोक के काल का है और एक गुफा के भीतर चट्टान पर उकेरा गया था।

यह मौर्य काल के सबसे पुराने शिलालेखों में से एक माना जाता है। इसमें सम्राट अशोक का नाम और उनकी प्रसिद्ध उपाधि ‘देवानामप्रिय’ (अर्थात देवताओं का प्रिय) स्पष्ट रूप से अंकित है।

इस खोज से यह लंबे समय से चली आ रही बहस समाप्त हो गई कि क्या अशोक को वास्तव में इस उपाधि से पहचाना जाता था। यह शिलालेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में लिखा गया है और यह अशोक के अहिंसा और नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

इस खोज ने न केवल मस्की की ऐतिहासिक महत्ता को उजागर किया, बल्कि मौर्य साम्राज्य के शिलालेखों की समझ में भी एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पीएम मोदी ने दी ₹7200+ करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात, ‘समृद्ध बिहार हर युवा को रोजगार’ का दिया नारा: कहा – कॉन्ग्रेस के शोषण से मुक्त हुआ बिहार, रेल-हाइवे से जुड़े कामों की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (18 जुलाई 2025) को बिहार को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने 7200 करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। ये परियोजनाएँ रेल, सड़क, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, आईटी और स्टार्टअप से जुड़ी हैं।

प्रधानमंत्री ने चार नई ‘अमृत भारत’ ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो राजेंद्र नगर-नई दिल्ली, बापूधाम मोतिहारी-दिल्ली, दरभंगा-लखनऊ और मालदा टाउन-लखनऊ के बीच चलेंगी। इसके साथ ही दरभंगा में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STPI) और पटना में IT/ITES/ESDM स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया, जिससे राज्य में डिजिटल विकास और रोजगार को नया बल मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि जैसे दुनिया में पूर्वी देश तेजी से विकास कर रहे हैं, वैसे ही भारत में पूर्वी राज्यों की भूमिका भी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस और RJD की सरकारों के समय बिहार के साथ भेदभाव होता था, लेकिन 2014 के बाद NDA सरकार ने इस राजनीति को खत्म किया और बिहार को रिकॉर्ड राशि दी।

पीएम मोदी ने कहा, “भाजपा और NDA का विजन है, जब बिहार आगे बढ़ेगा, तभी देश आगे बढ़ेगा और बिहार तब आगे बढ़ेगा जब यहाँ का युवा आगे बढ़ेगा। हमारा संकल्प है – समृद्ध बिहार, हर युवा को रोजगार! बिहार के नौजवानों को बिहार में ही रोजगार के ज्यादा से ज्यादा मौके मिलें, इसके लिए बीते वर्षों में यहाँ तेजी से काम हुआ है। नीतीश जी की सरकार ने यहाँ लाखों युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ सरकार में नियुक्ति भी दी है और नीतीश जी ने अभी बिहार के नौजवानों के रोजगार के लिए नए निश्चय भी लिए हैं। केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दे रही है।”

पीएम मोदी ने कहा की मोतीहारी को मुंबई, गयाजी को गुरुग्राम, पटना को पुणे जैसे विकसित और समृद्ध बनाना है। साथ ही उन्होंने समृद्ध बिहार हर युवा को रोजगर का नरा भी दिया।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि बिहार को माओवाद और पिछड़ेपन से मुक्त कर अब विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मखाना उत्पादकों के लिए मखाना बोर्ड के गठन की भी घोषणा की और कहा कि अब बिहार के संसाधन बिहार की ताकत बन रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि राम-जानकी पथ और अयोध्या तक जाने वाली नई रेलवे लाइन से चंपारण का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ेगा। अंत में उन्होंने कहा कि बिहार अब असंभव को संभव बनाने वाली धरती है और यहाँ की माताएँ-बहनें और युवा नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी भाषण दे रहे थे, कि तभी उनकी नजर भीड़ में खड़े लड़के पर पड़ गई। उन्होंने संबोधन के बीच में ही कहा कि “यहाँ एक नौजवान पूरा राम मंदिर बनाकर ले आया है। क्या भव्य काम किया है। मुझे लगता है वो मुझे भेंट करना चाहते हैं। मैं मेरे एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के लोगों को भेजता हूँ।”

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 40,000 लाभार्थियों को 160 करोड़ रुपए की राशि जारी की और 12,000 परिवारों को गृह प्रवेश की चाबियाँ सौंपी। साथ ही उन्होंने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत लगभग 61,500 स्वयं सहायता समूहों को 400 करोड़ रुपए की सहायता दी। इससे राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

रेल क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिनमें समस्तीपुर-बछवाड़ा रेल खंड पर स्वचालित सिग्नलिंग, दरभंगा-थलवारा और समस्तीपुर-रामभद्रपुर रेल लाइन के दोहरीकरण, तथा दरभंगा-नरकटियागंज रेल खंड के दोहरीकरण की परियोजना शामिल है, जिसकी लागत लगभग 4,080 करोड़ रुपए है।

भटनी-छपरा ग्रामीण लाइन पर सिग्नलिंग और कर्षण प्रणाली के उन्नयन की भी आधारशिला रखी गई। साथ ही पाटलिपुत्र में वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव हेतु बुनियादी ढाँचे का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया।

सड़क क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने NH-319 के आरा बाईपास के 4-लेन निर्माण की आधारशिला रखी और पररिया से मोहनिया तक NH-319 के 4-लेन खंड का उद्घाटन किया, जिसकी लागत 820 करोड़ रुपए से अधिक है। इसके अलावा NH-333C पर सारवां से चकाई तक दो-लेन सड़क का निर्माण भी बिहार-झारखंड के बीच संपर्क को और मजबूत करेगा।

मत्स्य पालन और जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत बिहार के विभिन्न जिलों में आधुनिक मत्स्य इकाइयों का उद्घाटन किया। इनमें हैचरी, बायोफ्लोक यूनिट, सजावटी मछली पालन, मछली चारा मिलें और एकीकृत जलीय कृषि इकाइयाँ शामिल हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण रोजगार, मछली उत्पादन और स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच से कहा कि बिहार में जो भी विकास हो रहा है, उसमें केंद्र सरकार का सहयोग बहुत अहम है और हम मिलकर बिहार को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज जिन योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन हुआ है, उनसे गाँव, गरीब और युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा और बिहार की तस्वीर बदलेगी।

‘मेरे जीजा को 10 साल से कर रखा है परेशान’: मनी लॉन्ड्रिंग केस में फँसे रॉबर्ट वाड्रा को मिला ‘साले’ राहुल गाँधी का साथ; अब तक 43 संपत्तियाँ हो चुकी हैं कुर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (18 जुलाई 2025) रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसे लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने अपने बहनोई वाड्रा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि अंत में सच्चाई की जीत होगी।

जानकारी के अनुसार, ED ने रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में चार्जशीट दायर की है। इसे लेकर राहुल गाँधी ने एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा, “मेरे जीजाजी को पिछले दस सालों से यह सरकार परेशान कर रही है। यह ताजा आरोप पत्र उसी षडयंत्र का एक और हिस्सा है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ हूँ क्योंकि उन्हें दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक रूप से प्रेरित बदनामी और उत्पीड़न का एक और हमला झेलना पड़ रहा है।”

ED का क्या है आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, ED ने रॉबर्ट वाड्रा और 10 अन्य लोगों और कंपनियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की थी। इनके नाम पर 43 संपत्तियों को अटैच किया गया था। इसकी कीमत करीब 37.64 करोड़ रुपये बताई गई है।

ED की शिकायत के अनुसार, यह मामला गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी के जरिए 2008 में गुरुग्राम के शिकोहपुर में 3.53 एकड़ जमीन खरीदी थी। ED का आरोप है कि इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था। ED ने वाड्रा और उनकी कंपनियों की कुल 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, जिनकी कीमत लगभग 37.64 करोड़ रुपए बताई गई है।

हालिया चार्जशीट शुक्रवार (18 जुलाई) को राउस एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की गई है। मामले में कोर्ट की विशेष जज सुषांत चंगोत्रा ने चार्जशीट को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट के रिकॉर्ड कीपर को दस्तावेजों की जाँच करने के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

‘अब सिर्फ कैश, नो UPI’: कर्नाटक में व्यापारियों ने बंद किया डिजिटल लेन-देन, कॉन्ग्रेस सरकार पर लगाया गलत तरीके से ‘वसूली’ का इल्जाम

बेंगलुरु के व्यापारियों ने 25 जुलाई को बंद का आह्वान किया है। हजारों छोटे-छोटे दुकानदार और व्यापारी कर्नाटक व्यावसायिक टैक्स विभाग के जीएसटी नोटिस का विरोध कर रहे हैं। ये नोटिस उन व्यापारियों को दिया गया है जिन्होंने 40 लाख रुपए से अधिक की कमाई डिजिटल माध्यम से की है। इसको देखते हुए अब डिजिटल पेमेंट को व्यापारी ‘नो’ कह रहे हैं।

बेंगलुरु यूपीआई को तेजी से अपनाने वाले शुरुआती शहरों में से एक रहा है, लेकिन अब इसमें भारी उलटफेर देखने को मिल रहा है। शहर भर के छोटे विक्रेता यूपीआई लेनदेन छोड़कर नकदी की ओर लौट रहे हैं।

14000 व्यापारियों पर गिरी गाज

वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई लेन-देन के आधार पर विभाग ने 14,000 ऐसे व्यापारियों की पहचान की है जिनका डिजिटल ट्रांसेक्शन ₹40 लाख (वस्तुओं के लिए) या ₹20 लाख (सेवाओं के लिए) से ज्यादा थे। फिर भी उन्होंने जीएसटी के नियम के मुताबिक पंजीकरण नहीं कराया। 5,500 से ज्यादा व्यापारियों को टैक्स देने के लिए नोटिस भी भेजे गए। कुछ व्यापारियों ने तो एक ही पैन कार्ड पर ₹2 करोड़ से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजेक्शन किए।

सड़क किनारे छोटे-छोटे स्टॉल लगाने वालों और दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट को शुरुआत में ही अपनाया था। उन्हें लगता है कि अब उन्हें इसका दंड मिल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि 3 हजार रुपए प्रतिदिन बेचने वाले व्यापारियों को भी नोटिस भेजा गया है। जबकि उसका वास्तविक टर्नओवर कम है. व्यापारियों का कहना है कि और व्यक्तिगत या पारिवारिक लेन-देन को व्यावसायिक आय में शामिल करने की गलती की जा रही है।

व्यापारियों का कहना है कि उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें उत्पीड़न, सामान ज़ब्त होने और यहाँ तक कि सार्वजनिक स्थानों से बेदखल किए जाने का डर है। फेडरेशन ऑफ बेंगलुरु स्ट्रीट वेंडर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव, एडवोकेट विनय के. श्रीनिवास कहते हैं, “कई व्यापारियों को जीएसटी अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और नगर निगम अधिकारियों द्वारा बेदखल किए जाने का डर है।”

व्यापारियों ने तीन दिन तक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। 23 जुलाई को दूध की बिक्री बंद रहेगी। 24 जुलाई को गुटखा और सिगरेट की बिक्री बंद रहेगी और 25 जून को बेकरी, मसालों की दुकानें और छोटी दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।

डिजिटल पेमेंट बंद किया

दुकान के बाहर लगे क्यूआर कोड हटाए जा रहे हैं। केआर मार्केट, शिवाजीनगर, होरमावु और कई अन्य इलाकों में “नो यूपीआई, ओनली कैश” के पोस्टर लगे हैं। व्यापारी जाँच से बचने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल बंद कर रहे हैं। इससे भारत के डिजिटल पेंमेंट का लक्ष्य कमजोर पड़ रहा है। होरमावु के एक दुकानदार शंकर ने बताया, “मैंने यूपीआई स्वीकार करना पूरी तरह से बंद कर दिया है।”

सरकार का रवैया

नोटिस केवल तय सीमा के उल्लंघन करने वालों को ही भेजे जाने चाहिए। उन्हें जीएसटी या कंपोजिशन स्कीम के तहत पंजीकरण कराने का आग्रह करना चाहिए। पूर्व इनकम टैक्स अधिकारी एच.डी. अरुण कुमार जोर देकर कह रहे हैं कि अधिकारियों को “जुर्माना लगाने से पहले डेटा की पुष्टि करनी चाहिए”।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बेंगलुरु की तरह मुंबई जैसे दूसरे शहरों ने अगर राजकोषीय घाटा भरने के लिए ऐसा रवैया अपनाया तो व्यापारी वर्ग के लिए काफी दिक्कत होगी। राज्यों को अपने राजकोषीय घाटा भरने के लिए दूसरा तरीका अपनाना चाहिए । दरअसल कल्याणकारी योजनाओं के दबाव के बीच कर्नाटक का लक्ष्य 2025-26 में ₹1.20 लाख करोड़ एकत्र करना है।

छोटे व्यापरियों का डिजिटल ट्रांजेक्शन से विमुख होना शुभ लक्षण नहीं है। नीति निर्माताओं ने बिजनेस में पारदर्शिता लाने और न्यायसंगत प्रवर्तन के बीच संतुलन बनाने के मकसद से डिजिटल ट्रांजेक्शन शुरू किया था। 25 जुलाई के बंद से इसे धक्का लगेगा। वहीं राज्यों के लिए भी ये सबक है।

ED ने छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को किया गिरफ्तार: ₹2161 करोड़ के शराब घोटाले मामले में हुई कार्रवाई, लेकिन कॉन्ग्रेस नेता ने सारा ठीकरा अडानी पर फोड़ा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार (18 जुलाई 2025) को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई ₹2161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी धन शोधन जाँच के तहत हुई। इस केस में ईडी कॉन्ग्रेस भवन समेत तमाम संपत्तियों को भी जब्त कर चुकी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने सुबह-सुबह भिलाई, दुर्ग जिले में बघेल के आवास पर छापेमारी की, जहाँ चैतन्य अपने पिता के साथ रहते हैं। नए सबूत मिलने के बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत यह कदम उठाया। सूत्रों के मुताबिक, चैतन्य ने तलाशी के दौरान सहयोग नहीं किया, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। चैतन्य को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 5 दिन की हिरासत में भेज दिया गया।

ईडी का कहना है कि 2019 से 2022 के बीच जब भूपेश बघेल की कॉन्ग्रेस सरकार सत्ता में थी, एक संगठित शराब सिंडिकेट ने राज्य में ₹2161 करोड़ की अवैध कमाई की। इस घोटाले में सरकारी अधिकारियों, नेताओं और शराब कारोबारियों ने मिलकर शराब की बिक्री से गैर-कानूनी कमीशन वसूला।

जाँच में पाया गया कि तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को हर महीने मोटी रकम दी जाती थी। साथ ही नकली होलोग्राम लगाकर कच्ची शराब बेची गई, जिसका पैसा सरकारी खजाने में न जाकर सिंडिकेट के पास गया। विदेशी शराब के कारोबार में भी FL-10A लाइसेंस धारकों से रिश्वत ली गई। अब तक ईडी ने इस मामले में ₹205 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।

छापेमारी के दौरान भिलाई में भूपेश बघेल के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था। कुछ कॉन्ग्रेस समर्थकों ने ईडी की गाड़ियों को रोकने की कोशिश की।

भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने लिखा, “ED आ गई, आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है। अडानी के लिए तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा आज उठना था। भिलाई निवास में ‘साहेब’ ने ED भेज दी है।” बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक ईडी की छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले की जाँच में बड़े खुलासे हो चुके हैं।

यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने चैतन्य को निशाना बनाया। मार्च 2025 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी हुई थी, जिसमें कुछ दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जब्त किए गए थे। इस मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, पूर्व IAS अनिल टुटेजा और अन्य की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।

जिस मौलाना को ‘हीरो’ बनाने में जुटा वामपंथी मीडिया, उसका ‘निमिषा प्रिया’ की फाँसी टालने में कोई हाथ नहीं: MEA ने किया साफ; ग्राउंड वर्कर ने भी रिपोर्ट्स को बताया फर्जी

यमन की जेल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया का मामला चर्चा में है। फाँसी की सजा पाने वाली निमिषा प्रिया की सजा फाँसी से 1 दिन पहले आगे के लिए टाल दी गई। इस बीच, लोगों को एक नाम तेजी से सुनाई देने लगा – मौलाना कंथापुरम एपी अबु बक्र मुसलियार का। दावा किया जाने लगा कि मुसलियार ने निमिषा प्रिया की फाँसी रुकवाई है।

ये प्रोपेगेंडा वामपंथी और इस्लामी मीडिया आउटलेट्स ने तेजी से फैलाया। क्योंकि उन्हें लगा कि यही सही मौका है कि लोगों को ये बता जाए कि मुसलियार ने निमिषा प्रिया की फाँसी रुकवाई। इस पूरे मामले को इस्लाम के सॉफ्ट नजरिए से जोड़ते हुए लोगों के जेहन में इस्लाम के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर बनाया जाए। हालाँकि जब सच्चाई सामने आई, तो वामपंथियों और इस्लामी मीडिया आउटलेट्स का भांडा फूटता नजर आ रहा है।

दरअसल, निमिषा प्रिया की फाँसी की सजा टलने और उसकी रिहाई के लिए किए जा रहे प्रयासों में मौलाना कंथापुरम एपी अबूबक्र मुसलियार की कथित भूमिका को विदेश मंत्रालय ने नकार दिया है।

निमिषा प्रिया केस में मौलाना के रोल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है, “इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, हमें इसकी जानकारी नहीं है।”

दरअसल कई मीडिया रिपोर्ट में निमिषा प्रिया की फाँसी की सजा टालने का श्रेय मौलाना कंथापुरम एपी अबूबक्र मुसलियार को दिया जा रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि भारत की यमन की हूती प्रशासन से कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं है इसलिए मौलाना की मदद ली गई।

यमन से लेकर मित्र देशों तक निमिषा को बचानें में जुटा MEA

लेकिन विदेश मंत्रालय ने उन सभी प्रयासों का उल्लेख किया जो निमिषा प्रिया की फाँसी को टालने और उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त करने के लिए लगातार किए जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ये संवेदनशील मामला है। भारत सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। हम कानूनी सहायता भी दे रहे हैं। हमनें एक वकील को नियुक्त किया है जो परिवार की सहायता कर रहा है। हमने एक काउंसलर को नियुक्त किया है जो नियमित रूप से घर जाकर फैमिली से बातचीत कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “यमन के लोकल अथॉरिटी और प्रिया के परिवार के सदस्यों के साथ भारत सरकार लगातार संपर्क में है।” विदेश मंत्रालय के मुताबिक, “पिछले कुछ दिनों से समाधान तक पहुँचने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है। पूरे मामले पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। इस मुद्दे पर उस परिवार से भी बातचीत कर रहे हैं जिसने आरोप लगाया है।”

विदेश मंत्रालय ने कहा, “इस मामले पर कुछ मित्र देशों से भी बातचीत चल रही है। यमन सरकार के कुछ लोगों से भी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि लोकल अथॉरिटी ने 16 जून को होने वाले फाँसी की सजा को टाल दिया है।”

सरकार ने जितने प्रयास किए हैं इस पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बार भी मौलाना की चर्चा नहीं की। यहाँ तक कि इस मामले पर सवाल पूछने पर भी उन्होंने ये कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

मौलाना को क्रेडिट देने की जल्दबाजी

वहीं दूसरी ओर केरल मीडिया समेत देशभर की कई मीडिया संस्थान ने अपनी रिपोर्टिंग में भारत सरकार के प्रयास के बजाए मौलाना मुसलियार की भूमिका की बात की।

केरल बेस्ड न्यूज नेटवर्क एशियानेट ने भी ये प्रोपेगेंडा फैलाया।

केरल के नंबर वन चैनल होने का दावा करने वाले – रिपोर्टर टीवी नाम के मीडिया आउटलेट ने तो मौलाना मुसलियार की गाथा में लंबी-चौड़ी तकरीरें कर दी। वामपंथियों से जुड़े इस मीडिया आउटलेट ने भारत सरकार को नहीं, बल्कि मुसलियार को ही निमिषा प्रिया का रक्षक बता दिया।

मनोरमा ऑनलाइन ने भी यही झूठ परोसा।

हेट डिटेक्टर नाम से इस्लामी प्रोपेगेंडा चलाने वाले एक्स हैंडल ने तो मुसलियार को ही असली रक्षक बता दिया और बताया कि मुसलियार ने ही फाँसी रुकवा दी।

खुद मौलाना मुसलियार तक ने इस प्रोपेगेंडा को रोकने की कोशिश नहीं की। बल्कि मौलाना ने समाचार एजेंसी एएनआई से दावा कर दिया कि उन्होंने यमन के सूफी इस्लामी विद्वानों से संपर्क साधा और निमिषा के मामले में दखल देने की अपील की। इस्लामिक शरिया कानून को सामने रखते हुए सजा की जगह रहम को तरजीह देने की वकालत की। केरल से ही यमन के जिम्मेदार स्कॉलर्स से संपर्क किया और उन्हें हालात समझाए।

क्या है मामला?

निमिषा प्रिया केरल की नर्स हैं जो 2008 में यमन चली गई। 2017 में कथित तौर पर उसने यमन नागरिक बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो मेहदी की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि निमिषा प्रिया की ट्रैवल दस्तावेज उसने जब्त कर लिए थे और लगातार प्रताड़ित कर रहा था। निमिषा ने बेहोश करके मेहदी से अपने कागजात लेने की कोशिश की, लेकिन ड्रग ओवरडोज की वजह से उसकी मौत हो गई। उन पर हत्या का ही मुकदमा चला और मेहदी के परिजनों ने ब्लड मनी के बदले निमिषा को माफ करने से इनकार कर दिया है।

ऐसे में यमन में उन्हें फाँसी की जो सजा मिली है, जिसे टलवाने में भारत सरकार जुटी हुई है। हालाँकि सरकारों के भी दखल की एक सीमा होती है, क्योंकि यमन के बड़े हिस्से पर विद्रोही गुटों का कब्जा है, जिनकी सरकार को भारत सरकार मान्यता नहीं देती, ऐसे में यमन के साथ भारत का कोई सीधा राजनयिक संबंध नहीं है। भारत सरकार यमन के पड़ोसी देशों या फिर ईरानी चैनल के माध्यम से निमिषा को बचाने के प्रयत्न कर रही है।

चूँकि यमन की राजधानी सना पर एक इस्लामी संगठन का कब्जा है। ऐसे में वामपंथियों और इस्लामी प्रोपेगेंडा ग्रुप्स ने निमिषा को बचाने का क्रेडिट मौलाना को देना शुरू कर दिया, जबकि ऐसी मौलवी को लेकर फैलाई जा रही ऐसी मीडिया खबरों को सेव ‘निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ भी खारिज कर चुकी है।

हालाँकि मौलाना मुसलियार की बात को सच भी मान लें, तो अपील करने और सजा रुकने में फर्क होता है। अब तक मेहदी के परिवार ने कोई माफी नहीं दी है। सच सिर्फ इतना है कि अभी तक कानूनी तौर पर निमिषा की फाँसी टली है, जिसके लिए भारत सरकार अपने डिप्लोमेटिक चैनल्स, मित्र देशों की मदद ले रही है। न कि किसी मौलाना की बात भर से, क्योंकि अगर मौलाना की बात से यमन की ‘हूती’ सरकार को मानना होता, तो वो निमिषा को रिहा कर चुकी होती। वहीं, अब विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान सामने आ चुका है। ऐसे में मौलाना से जुड़े वामपंथी और इस्लामी मीडिया आउटलेट्स के सारे दावों की पोल खुद ब खुद खुलती नजर आ रही है।

वोटर्स के बदले BLO ने नहीं किए सूची पर साइन, वो लिस्ट मृत मतदाताओं की थी: यूट्यूबर अजीत अंजुम का पटना DM ने किया फैक्ट चेक, पहले ECI बता चुका है सच्चाई

पिछले दिनों प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम अपनी सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में सरकारी कामकाजों में बाधा डालते दिखे। इसके बाद अजीत अंजुम पर BLO की तरफ से FIR भी होती है। अजीत अंजुम ने जिस रिपोर्टिंग के दम पर झूठी और भ्रामक खबरें फैलाई थी उसका फैक्ट चैक चुनाव आयोग ने किया था। लेकिन अजीत अंजुम अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे। अब इस पर पटना DM का भी बयान आया है।

प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम के बूथ लेवल ऑफिसर पर आरोप लगाने वाले बयान को पटना के जिलाधिकारी ने भी खारिज किया। पटना के DM ने बताया कि वीडियो में BLO मतदाता सूची पुनरीक्षण के फॉर्म नहीं भर रहे थे, बल्कि वे निर्वाचन क्षेत्र में मृत या एक जगह से दूसरी जगह चले गए मतदाताओं की सूची को तैयार कर रहे थे।

पटना के DM ने यह भी बताया कि वीडियो में जिन शांति देवी और चंद्रप्रकाश शाह के फॉर्म पर हस्ताक्षर किए जाने की बात अजीत अंजुम अपनी रिपोर्टिंग में बता रहे थे, वे दोनों मतदाता मृत पाए गए हैं। BLO दोनों मृत मतदाताओं के फॉर्म पर मृत का निशान लगाकर सत्यापन के तौर पर अपने हस्ताक्षर कर रहे थे।

सरकारी काम में दखलअंदाजी

दिल्ली से बिहार पहुँचे प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम बिना किसी इजाजत के कैमरा और माइक लेकर सीधे BLO के ऑफिस में घुसकर सरकारी काम में दखलअंदाजी करते हैं। बलिया के एक मतदान केंद्र पर अजीत अंजुम और उनके सहयोगी जबरन सभागार में घुस जाते है, जहाँ BLO मोहम्मद अंसारुल हक मतदाता सूची के फॉर्म अपलोड कर रहे थे।

प्रोपेगेंडा पत्रकार अजीत अंजुम ने BLO से बूथ में मतदाताओं की संख्या, फॉर्म वितरण और अन्य संवेदनशील जानकारी माँगने की कोशिश की। BLO ने अपनी FIR शिकायत में यह भी कहा कि अंजुम ने मुस्लिम मतदाताओं की गिनती और उनके फॉर्म जमा करने की जानकारी भी माँगी, जो सांप्रदायिक तनाव भड़काने की साजिश लगती है।

अजीत अंजुम के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये और सरकारी काम में बाधा डालने के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। उन पर BNS 2023 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

गैर-जिम्मेदाराना और मनगढ़ंत सारी बात…एअर इंडिया प्लेन क्रैश पर विदेशी मीडिया को AAIB ने लगाई लताड़: ‘पायलट पर आरोप’ वाली खबरों को नकारा, कहा- जाँच नहीं हुई पूरी, अंतिम रिपोर्ट बाकी

भारत के विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो यानी एएआईबी ने गुरुवार (16 जुलाई 2025) को अहमदाबाद विमान हादसे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के रवैये की कड़ी आलोचना की है और ऐसी रिपोर्टिंग को ‘गैर जिम्मेदाराना’ बताया है। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत कई विदेशी मीडिया ने दुर्घटना में ‘पायलट की भूमिका’ की बात की थी।

एएआईबी ने क्या कहा?

विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो ने कहा, “यात्रियों, विमान के चालक दल और क्रू मैंबर्स के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लोगों की मौत हुई थी। हमें मृतकों के परिजनों की संवेदनशीलता का सम्मान करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के कुछ लोग बार-बार चुनिंदा और मनगढ़ंत रिपोर्टिंग के जरिए निष्कर्ष निकालने की कोशिश कर रहे हैं। अभी जाँच जारी है। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई गैर-जिम्मेदाराना है।”

एएआईबी ने कहा कि एअर इंडिया दुर्घटना के संबंध में उसके शुरुआती जाँच रिपोर्ट केवल यह जानकारी देने के लिए थे कि ‘क्या’ हुआ था। प्रारंभिक रिपोर्ट को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। इस समय किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। एएआईबी की जाँच अभी पूरी नहीं हुई है। अंतिम जाँच रिपोर्ट मूल कारणों और सुझावों के साथ आएगी।

एएआईबी ने आगे कहा, “हम जनता और मीडिया दोनों से आग्रह करते हैं कि वे समय से पहले ऐसी बातें फैलाने से बचें, जिनसे जाँच प्रक्रिया बाधित होती हो।”

एएआईबी ने यह भी कहा कि जाँच ‘नियमों और अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार सख्त और प्रोफेशनल तरीके से’ की जा रही है।

विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो ने ये भी कहा है कि 2012 से उनकी संस्था काम कर रही है और भारत सरकार के प्रति पूरी तरह जवाबदेह है। अब तक 93 दुर्घटनाओं और 111 गंभीर मामलों की जाँच कर चुका है। इसमें गड़बड़ियाँ नहीं मिली है। अहमदाबाद विमान हादसे की जाँच के अलावा दूसरे कई दुर्घटनाओं की भी जाँच अभी कर रहा है।

वॉल स्ट्रीट जरनल ने क्या कहा था?

अमेरिकी अखबार WSJ ने गुरुवार (16 जुलाई, 2025) को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि अब एअर इंडिया हादसे की जाँच सीधे तौर पर AI-171 के मुख्य पायलट सुमीत सभरवाल पर केन्द्रित हो गई है। इस रिपोर्ट में 3 दशक से विमान उड़ा रहे पायलट सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी ठहरा दिया गया है, जिसकी वजह से हादसा हुआ।

WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि हादसे के बाद बरामद हुए विमान के ब्लैक बॉक्स में सेव हुई आवाज की रिकॉर्डिंग इशारा करती है कि कैप्टन सुमीत सभरवाल ने ही फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किए। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अहमदाबाद एयरपोर्ट से विमान को लेकर फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर उड़े थे और फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने के बाद संभवतः उन्होंने ही कैप्टन सुमीत सभरवाल से पूछा था, “तुमने ये स्विच क्यों बंद किया?”

WSJ की रिपोर्ट में पायलटों को दोषी ठहराने के साथ यह नहीं स्पष्ट बताया गया है कि इसी आवाज की रिकॉर्डिंग में सुमीत सभरवाल ने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने से इनकार किया था। WSJ की रिपोर्ट के बाद विदेशी मीडिया के बाकी संस्थान भी इसी सुर में गाने लगे हैं। रायटर्स, ब्लूमबर्ग, CNN और न्यू यॉर्क पोस्ट समेत बाक़ी अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने सीधे तौर पर अपनी हेडलाइंस और खबर में कैप्टन सुमीत सभरवाल को फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद करने का दोषी मान लिया है।

ऐसा नहीं है कि भारतीय पायलट के नाम दोष डालने का काम सिर्फ अमेरिकी या बाकी विदेशी मीडिया ही कर रहा हो। इस काम में भारतीय मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। बिजनेस स्टैण्डर्ड से लेकर ऑनमनोरमा तक ने WSJ की रिपोर्ट के हवाले से पायलटों की कथित गलती की बात को हेडलाइन्स में चलाया है। इन संस्थानों ने भी वह महत्वपूर्ण तथ्य नजरअंदाज कर दिया, जिसमें पायलट ने फ्यूल कंट्रोल स्विच को बंद करने से इनकार किया था।

12 जून को एयर इंडिया फ्लाइट का हादसा

अहमदाबाद विमान हादसा 12 जून को उस वक्त हुआ था, जब एअर इंडिया विमान AI-171 अहमदाबाद से लंदन जा रहा था। इस हादसे में 260 लोगों क जान गई थी जबकि सिर्फ 1 व्यक्ति जिंदा विमान से निकल पाया था। मरने वालों में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक, 7 पुर्तगाली और 1 नेपाली, 1 कनाडाई नागरिक शामिल थे।