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2000+ हिरासत में, 8 आतंकियों के घर जमींदोज, ब्लास्ट से उड़ाए गए ‘जिहादी ठिकाने’: पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन, आतंक समर्थकों-OGW से हो रही पूछताछ

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सेना का एक्शन जारी है। सेना लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक-एक आतंकवादी का घर उड़ा रही है। इसी के साथ ही बड़ी संख्या में कश्मीर से लोग भी हिरासत में लिए जा रहे हैं। हिरासत में लिए जाने वालों में ओवरग्राउंड वर्कर और पूर्व आतंकवादीभी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना की कार्रवाई में शनिवार (26 अप्रैल, 2025) को 4 और आतंकियों के घर जमींदोज किए गए। यह कार्रवाई शोपियां, कुलगाम और कुपवाड़ा में की गई। शोपियां में लश्कर आतंकवादी शाहिद अहमद कुट्टे का घर का गिराया गया। कुट्टे 2023 से ही गायब है और लश्कर में शामिल हो चुका है।

कुलगाम में एक और आतंकवादी जाकिर का घर गिराया गया। जाकिर भी 2023 से गायब और उसके भी लश्कर या TRF से जुड़े होने की बात सामने आई है। उसके घर भी धमाके के चलते उड़ा है। इन दोनों के साथ ही एक और हार्डकोर आतंकवादी फारूक तीव्ड़ा का भी घर सुरक्षाबलों ने गिरा दिया है।

फारूक के 1990 में ही पाकिस्तान जाने की बात कही जाती है। वह तब से वहीं रह रहा है और भारत के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाइयों को अंजाम दे रहा है। उसका घर कुपवाड़ा में था, जिसे सुरक्षाबलों ने उड़ाया है। अधिकांश घर पूरी तरह तहस-नहस हो गए हैं। बांदीपोरा में भी एक आंतकी जमील अहमद का घर गिराए जाने की सूचना है।

अहसान उल शेख नाम के एक आतंकवादी का भी घर सुरक्षाबलों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद गिराया है। इन सबके साथ ही पुलवामा के आतंकवादी अहसान उल शेख का भी घर धमाके से उड़ा दिया गया है। अदनान शफी नाम के एक आतंकी का घर भी जमींदोज किया गया है।

इससे पहले पहलगाम हमले में शामिल 2 आतंकियों के घर धमाके से उड़ा दिए गए थे। अब तक 8-9 आतंकियों के घरों पर यह कार्रवाई हो चुकी है। सुरक्षाबलों का कहना है कि उन्हें आतंकियों के घरों में पहले से लगे IED मिल रहे हैं, जिन्हें डिफ्यूज करने के लिए धमाका करना पड़ रहा है। इसी के चलते यह घर गिराए गए हैं।

आतंकियों के घर गिराने के साथ ही सुरक्षाबलों ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर भी कार्रवाई तेज कर दी है। कश्मीर से लगभग 2000 लोग हिरासत में लिए गए हैं। इनमे आतंकियों से हमदर्दी रखने वाले, पूर्व आतंकी और ओवरग्राउंड वर्कर्स शामिल हैं। उनसे पूछताछ चल रही है।

पुलिस ने 2 आतंकवादी समर्थकों को हथियारों के साथ भी गिरफ्तार किया है। इससे पहले आतंकियों के फोटो और स्केच जारी किए जा चुके हैं। पहलगाम हमले के विषय में बताने पर ₹20 लाख के इनाम की घोषणा भी की गई है। आतंकियों की तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन हो रहे हैं।

गौरतलब है कि 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में एक टूरिस्ट स्पॉट पर इस्लामी आतंकियों ने 26 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी थी। आतंकियों ने हत्या से पहले यह कन्फर्म किया था कि मरने वाले हिन्दू हैं या नहीं। इस हमले में एक दर्जन से अधिक से लोग घायल भी हुए थे।

‘भारत सरकार को हमारा पूर्ण समर्थन’: FBI के मुखिया काश पटेल ने पहलगाम की घटना को खुलकर बताया आतंकी हमला, NYT ने आतंकियों को कहा था ‘लड़ाका’

अमेरिका की मुख्य जाँच एजेंसी FBI (फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन) के मुखिया कश्यप प्रमोद पटेल ने न केवल जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की है, बल्कि भारत को इस मुद्दे पर पूर्ण सहयोग का भी आश्वासन दिया है। मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए इस हमले में 28 निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। पैंट खोलकर देखा गया कि खतना हुआ है या नहीं, कलमा पढ़ने को कहा गया और ID कार्ड देखे गए – आतंकियों ने पीड़ितों के हिन्दू पहचान की पुष्टि के बाद हत्याएँ कीं।

मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए काश पटेल ने कहा कि भारत सरकार का हम पूरी तरह सहयोग करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि ये घटना एक बार फिर से हमें याद दिलाती है कि दुनिया आतंकवाद की बुराइयों से लगातार किस तरह के ख़तरे का सामना कर रही है। उन्होंने पीड़ितों के लिए प्रार्थना करते उन क़ानूनी एजेंसियों व उनसे पुरुषों-महिलाओं को धन्यवाद दिया, जो ऐसे क्षणों में तुरंत काम पर लग जाते हैं। काश पटेल भारतीय मूल के हैं और डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया है।

बड़ी बात ये है कि काश पटेल ने इसे खुलकर आतंकी हमला कहा है, जबकि अमेरिका के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में से एक NYT (न्यूयॉर्क टाइम्स) ने अपने प्रपंच का प्रदर्शन करते हुए आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ कहकर संबोधित किया था। इस हमले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। अमेरिका की ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी’ ने NYT द्वारा आतंकियों के लिए ‘लड़ाका’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने को ग़लत बताते हुए मीडिया संस्थान को इसे दुरुस्त करने के लिए कहा।

कमिटी ने यहाँ तक कहा कि चाहे भारत हो या इजरायल, आतंकवाद को लेकर NYT वास्तविकता से अलग चलता है। बता दें कि ये अमेरिका की ‘हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स’ की एक कमिटी है जो विदेश मामलों से जुड़े अधिनियमों पर फ़ैसले लेती है। पाकिस्तान पहलगाम आतंकी हमले की अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग कर चुका है, वो कश्मीर मुद्दे को अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाना चाहता है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद कड़ी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया और यहाँ रह रहे सभी पाकिस्तानियों को मुल्क़ वापस जाने का आदेश दिया।

पहलगाम हमले के बाद युनूस सरकार के कानूनी सलाहकार ने लश्कर के कर्ताधर्ता हारुन इजहार से की मुलाकात, कई आतंकी हमलों में वांछित आतंकी का डेविड हेडली से भी संबंध

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा और उसके मुखौटा संगठन द रेसिस्टेंट फ्रंट का नाम सामने आया है। इस बीच, एक चौंकाने वाली रिपोर्ट बांग्लादेश से सामने आ रही है, जिसमें बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार डॉ. आसिफ नजरूल ने पहलगाम हमले के ठीक एक दिन बाद 23 अप्रैल 2025 को ढाका में लश्कर के बड़े आतंकी हारुन इजहार से मुलाकात की है। यह मुलाकात ढाका के कानून मंत्रालय के दफ्तर में हुई थी। इस खबर के सामने आने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

बांग्लादेश के सैन्य खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात रिकॉर्ड की गई है, लेकिन इसका ब्योरा अभी सामने नहीं आया। सूत्रों का कहना है कि एक आतंकी का सरकारी दफ्तर में आना और मुलाकात करना अपने आप में बड़ा खतरा है। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है? क्या बांग्लादेश अब पाकिस्तान की राह पर चलकर भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देगा?

बांग्लादेश के पूर्व मंत्री ने जताई चिंता

इस मुलाकात को लेकर बांग्लादेश के पूर्व सूचना मंत्री मोहम्मद अराफात ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कई कट्टरपंथी समर्थकों को सरकारी पदों पर बिठा दिया है। इससे बांग्लादेश में कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा है। लश्कर-ए-तैयबा ने बांग्लादेश में अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं और कट्टरपंथी युवाओं को जिहाद के नाम पर जोड़ रही है। यह भारत के लिए बड़ा खतरा है, क्योंकि बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर भारत में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं।

लश्कर आतंकी हारुन इजहार कौन है?

हारुन इजहार लश्कर-ए-तैयबा का बांग्लादेश में बड़ा चेहरा है। वह लंबे समय से आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है। 2009 में उसने ढाका में भारतीय उच्चायोग और अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश रची थी, जो नाकाम हो गई। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने 26/11 मुंबई हमले के सह-षड्यंत्रकारी डेविड कोलमैन हेडली से पूछताछ के बाद इजहार का नाम उजागर किया था। इसके बाद बांग्लादेशी अधिकारियों ने उसे गिरफ्तार किया था।

इजहार का हिफाजत-ए-इस्लाम से भी गहरा रिश्ता है, जो बांग्लादेश में 2010 में बना एक देवबंदी इस्लामी समूह है। 2013 में उसकी मदरसे में एक ग्रेनेड विस्फोट हुआ, जिसमें तीन लोग मारे गए और वहाँ से विस्फोटक सामग्री मिली। इजहार पर बांग्लादेश में 25 से ज्यादा आतंकवाद के मामले दर्ज हैं। वह 2009 से बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियों की नजर में है।

पाकिस्तान में पढ़ाई के दौरान इजहार ने लश्कर के नेताओं से रिश्ते बनाए और हिफाजत-ए-इस्लाम को कट्टरपंथ की राह पर ले गया। उसने 2021 में पीएम मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान बड़े प्रदर्शन भी करवाए। 2024 में उसका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह छात्रों को जिहाद की शपथ दिला रहा था। उसने कई छद्म संगठनों के जरिए आतंकियों को जेल से छुड़ाने की साजिश भी रची।

हालाँकि बांग्लादेश के कानून मंत्रालय ने इजहार से मुलाकात के आरोपों को खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने कहा कि यह खबर झूठी और बेबुनियाद है।

कौन कहता है आतंकियों का नहीं होता मजहब, एक-एक कर पढ़िए ये 14 नाम: सारे कश्मीर के, सारे मुस्लिम

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले की जाँच के बीच 14 स्थानीय आतंकियों की सूची जारी की गई है, जो पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे हैं। ये आतंकी हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं। इनकी उम्र 20 से 40 साल के बीच है और ये पाकिस्तानी आतंकियों को लॉजिस्टिक और जमीनी मदद दे रहे हैं।

जिन आतंकियों की लिस्ट जारी की गई है, उनमें आदिल रहमान डेंटू (21), आसिफ अहमद शेख (28), अहसन अहमद शेख (23), हैरिस नजीर (20), आमिर नजीर वानी (20), यावर अहमद भट, आसिफ अहमद खांडे (24), नसीर अहमद वानी (21), शाहिद अहमद कुताय (27), आमिर अहमद दार, अदनान सफी दार, जुबैर अहमद वानी (39), हारून रशीद गनाई (32), और जाकिर अहमद गनी (29) के नाम हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहलगाम हमले में शामिल पाँच आतंकियों की पहचान पहले ही हो चुकी है, जिनमें तीन पाकिस्तानी आतंकी आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा और दो स्थानीय आतंकी आदिल गुरी और अहसन शामिल हैं। इनके स्केच भी जारी किए गए हैं और प्रत्येक पर 20 लाख रुपये का इनाम रखा गया है। जाँच में सामने आया कि लश्कर-ए-तैयबा की छद्म शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। हालाँकि बाद में उसने खुद को इस हमले से अलग कर लिया।

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, सूची में शामिल आतंकी जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग जिलों में सक्रिय हैं। आदिल रहमान डेंटू (21) लश्कर का सोपोर जिला कमांडर है, जबकि आसिफ अहमद शेख (28) जैश का अवंतीपुरा कमांडर है। अहसन अहमद शेख और हैरिस नजीर पुलवामा में लश्कर के लिए काम करते हैं। शोपियाँ का आसिफ अहमद खांडे हिजबुल से 2015 से जुड़ा है। अनंतनाग का जुबैर अहमद वानी हिजबुल का मुख्य ऑपरेशनल कमांडर है और कई हमलों में शामिल रहा है। कुलगाम का जाकिर अहमद गनी लश्कर से जुड़ा है और सुरक्षाबलों पर हमले करता रहा है।

बता दें कि पहलगाम के बैसारन घास के मैदान में हुए इस हमले के बाद दक्षिण कश्मीर, खासकर अनंतनाग और पुलवामा में सुरक्षाबलों ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किए हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर जाँच कर रही है। एनआईए की टीम हमले की जगह का दौरा कर फॉरेंसिक सबूत जुटा रही है। खुफिया एजेंसियां इन 14 आतंकियों और पहलगाम हमले के पाँच आतंकियों के बीच संबंध तलाश रही हैं।

सुरक्षाबल इन आतंकियों की तलाश में दिन-रात छापेमारी कर रहे हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, कुछ आतंकी दक्षिण कश्मीर के जंगलों में छिपे हो सकते हैं। स्थानीय लोगों से भी सुराग देने की अपील की गई है।

धनबाद से ATS ने महिला सहित 5 आतंकियों को दबोचा, पहलगाम हमले से जुड़ सकते हैं तार: वासेपुर से युसुफ और कौसर को पकड़ा, आसपास के इलाकों से गुलफाम, अयान, शहजाद, शबनम गिरफ्तार

झारखंड के धनबाद में शनिवार (26 अप्रैल 2025) की सुबह एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुई, जिसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी। ATS को खुफिया जानकारी मिली थी कि धनबाद के वासेपुर और आसपास के इलाकों में आतंकी संगठनों से जुड़े लोग सक्रिय हैं। इसके बाद ATS ने वासेपुर, भूली और गोविंदपुर समेत 15 जगहों पर एक साथ छापेमारी की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छापेमारी के दौरान हथियार, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, और प्रतिबंधित साहित्य बरामद हुआ। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में गुलफाम हसन, अयान जावेद, मो. शहजाद आलम, शबनम परवीन, यूसुफ और कौसर शामिल हैं। ATS के मुताबिक, ये लोग हिज्ब-उत-तहरीर, अलकायदा और ISIS जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े थे और डार्क वेब के जरिए संपर्क में थे।

बताया जा रहा है कि छापेमारी में दो पिस्तौल, 12 कारतूस, लैपटॉप, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और भड़काऊ मजहबी किताबें मिलीं। वासेपुर के नूरी मस्जिद और शमशेर नगर में सबसे ज्यादा सामान बरामद हुआ। ATS ने भूली के हारून राशिद के घर भी तलाशी ली, जहाँ दुबई में रहने वाले उसके 2 बेटों के बारे में जानकारी जुटाई गई। ATS के एसपी ऋषभ झा खुद इस ऑपरेशन को लीड कर रहे हैं। धनबाद पुलिस भी इस कार्रवाई में सहयोग कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्धों के तार 2019 के पुलवामा हमले से भी जुड़ सकते हैं।

बता दें कि हिज्ब-उत-तहरीर को भारत सरकार ने 10 अक्टूबर 2024 को UAPA के तहत प्रतिबंधित किया था। यह संगठन धार्मिक कट्टरता फैलाने और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल था। ATS की यह कार्रवाई पहलगाम हमले के बाद देश में बढ़ी सतर्कता का हिस्सा है। जाँच में पता चला कि ये लोग अवैध हथियारों का कारोबार और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काने का काम कर रहे थे। धनबाद के डीएसपी नौशाद आलम भी भूली में कैंप कर रहे हैं, ताकि ऑपरेशन सुचारू रूप से चले।

पहलगाम हमले के बाद पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। झारखंड में पहले भी आतंकी गतिविधियों के तार सामने आ चुके हैं। इस कार्रवाई से आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। ATS अब इन संदिग्धों से पूछताछ कर रही है, ताकि उनके नेटवर्क और योजनाओं का खुलासा हो सके।

कारगिल हो या 26/11… बरखा दत्त जैसों ने खतरे में डाल दी थीं जिंदगियाँ, मीडिया को सैन्य मूवमेंट के लाइव कवरेज से रोकने का फैसला यूँ ही नहीं

पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के चार दिन बाद शनिवार (26 अप्रैल 2025) को भारत सरकार के सूचना एवँ प्रसारण मंत्रालय ने एक सख्त चेतावनी जारी की है। मंत्रालय ने सभी मीडिया चैनलों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी सैन्य अभियान या सुरक्षा बलों की गतिविधियों की लाइव कवरेज न करें। इस चेतावनी का मकसद देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और शत्रुओं को किसी भी तरह का फायदा न पहुँचने देना है। मंत्रालय ने साफ कहा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े अभियानों की रिपोर्टिंग में मौजूदा कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा कि रियल-टाइम कवरेज, विजुअल्स का प्रसारण या सूत्रों के हवाले से खबरें चलाना पूरी तरह बंद करना होगा। ऐसा करना शत्रुओं की मदद कर सकता है और सैन्य अभियानों को नुकसान पहुँचा सकता है।

बता दें कि कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई हमले और कंधार हाईजैकिंग जैसी घटनाओं के दौरान मीडिया की लाइव कवरेज ने देश को भारी नुकसान पहुँचाया था। इन घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि किसी भी आतंक-विरोधी अभियान की लाइव कवरेज नहीं होनी चाहिए। खबरों को सिर्फ सरकारी प्रेस ब्रीफिंग तक सीमित रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि मीडिया एक जिम्मेदार भूमिका निभाए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक करना सैनिकों की जान को खतरे में डाल सकता है। मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (संशोधन) नियम, 2021 का हवाला देते हुए कहा कि सभी टीवी चैनलों को इन नियमों का पालन करना होगा। इसमें साफ लिखा है कि आतंक-विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज नहीं होनी चाहिए और खबरें सिर्फ सरकारी ब्रीफिंग तक सीमित रहें। मंत्रालय ने सभी हितधारकों से सतर्कता और संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।

आपको याद ही होगा कि 26/11 मुंबई हमले के लाइव कवरेज ने आतंकियों को मदद पहुंचाई थी। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई को चार दिनों तक बंधक बनाए रखा। इस हमले में 166 लोग मारे गए, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। नौ आतंकी मारे गए, जबकि अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। इस हमले की साजिश हाफिज सईद और जकीउर्रहमान लखवी ने रची थी, जो आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं। उस वक्त की मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को कई डोजियर सौंपे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस हमले के दौरान मीडिया की भूमिका पर सवाल उठे थे। खासतौर पर पत्रकार बरखा दत्त की रिपोर्टिंग को लेकर काफी विवाद हुआ। उस समय बरखा एनडीटीवी के लिए काम करती थीं और उनकी लाइव कवरेज पर गंभीर सवाल खड़े हुए। 2012 में न्यूजलॉन्ड्री को दिए एक इंटरव्यू में बरखा ने खुद स्वीकार किया कि उनकी और अन्य पत्रकारों की रिपोर्टिंग की वजह से सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। उन्होंने यह भी माना कि उनकी कवरेज से सुरक्षा बलों को भी नुकसान हुआ। न्यूजलॉन्ड्री की मधु त्रेहान ने इंटरव्यू में बरखा से इस बारे में सवाल किए थे।

मुंबई हमले के दौरान बरखा पर आरोप लगा कि उन्होंने एक फंसे हुए व्यक्ति के रिश्तेदार को फोन करके उसकी लोकेशन लाइव टीवी पर उजागर कर दी। इससे आतंकियों को उसकी जगह का पता चल गया और उसकी जान चली गई। ब्लॉगर चैतन्य कुंते ने बरखा से पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में बरखा ने उन्हें लीगल नोटिस भेज दिया। चैतन्य ने यह भी आरोप लगाया कि बरखा की वजह से हेमंत करकरे की मौत हुई, हालांकि बरखा ने इससे इनकार किया और कहा कि उस वक्त वे दिल्ली में थीं।

बरखा ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि उन्हें और अन्य पत्रकारों को अपनी गलती का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने दूसरे दिन से लाइव विजुअल्स को 15 मिनट की देरी से दिखाना शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता था कि आतंकी भी टीवी देख रहे हैं। एक अन्य घटना में बरखा पर आरोप लगा कि उन्होंने ओबेरॉय होटल के मैनेजर को कॉल किया, जिससे आतंकियों को पता चल गया कि वहाँ कई लोग बंधक हैं। इन सभी घटनाओं ने मीडिया की लाइव कवरेज के खतरों को उजागर किया।

इसी तरह, कारगिल युद्ध के दौरान भी मीडिया की लाइव रिपोर्टिंग ने सेना की रणनीति को प्रभावित किया था। 1999 में हुए इस युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाकर उन्हें खदेड़ा, लेकिन इस दौरान मीडिया की पल-पल की कवरेज ने सेना की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। कंधार हाईजैकिंग की घटना में भी यही हुआ। 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक कर लिया गया था। इस दौरान मीडिया की कवरेज ने हाईजैकर्स को यात्रियों की स्थिति और सरकारी रणनीति की जानकारी दी, जिससे बातचीत और ऑपरेशन में दिक्कत हुई।

इन सभी घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने कहा कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना होगा। यह कदम भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है।

‘बेहूदा साइंस मंत्री, इसीलिए तुम्हारे नाम के आगे Ch लगा है’: पाकिस्तानी नेता को अदनान सामी ने पियानो की तरह बजाया, हो गई ‘गजब बेइज्जती’

जम्मू कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस कड़ी में सबसे बड़ा फैसला भारत में रहने वाले पाकिस्तानियों को वापस भेजने पर लिया गया है। हर तरह के वीजा लिए हुए पाकिस्तानियों को अधिकतम 1 मई, 2025 तक अपने वतन लौट का आदेश दिया गया है। इस बीच पाकिस्तान में इमरान सरकार के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने लोकप्रिय गायक अदनान सामी की वापसी पर तंज कसा है। इसके बाद सामी ने हुसैन को जमकर लताड़ लगाई।

वतन वापसी के आदेश से कई पाकिस्तानी नागरिक मीडिया के सामने भी अपना खीझ उतार रहे हैं। कुछ इलाज के लिए यहाँ आने का दावा कर रहे हैं तो किसी का मायका या ससुराल भारत में है। कुछ पाकिस्तानी अन्य कारणों से भी भारत में रह रहे हैं। वहीं, पहलगाम हमले के बाद भारतीयों ने पाकिस्तानी अभिनेताओं की फिल्मों का बॉयकॉट करने की भी बात कही है।

भारत सरकार ने पाकिस्तानियों का वीजा रद्द करते हुए उन्हें वापस लौट जाने का आदेश दिया है, जिसपर चुटकी लेते हुए फवाद ने ‘X’ पर लिखा, “अदनान सामी का क्या होगा?” इस पर अदनान ने फवाद पर तंज कसते हुए जवाब दिया, “इस अनपढ़ को कौन समझाए?” हालाँकि, फवाद हुसैन ने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए फिर कुछ लिखा लेकिन इस बार भी ‘भारतीय’ अदनान सामी के आगे टिक नहीं पाए।

अदनान के ट्वीट के जवाब में फवाद उनकी बॉडी शेमिंग पर उतर आए। फवाद ने लिखा, “हमारे अपने लाहौरी अदनान ऐसे लग रहे हैं जैसे गुब्बारे से हवा निकाल दी गई हो। आप जल्दी ठीक हो जाइए।”

इसके जवाब में अदनान ने फवाद को ठीक-ठाक ज्ञान का पाठ पढ़ा दिया। फवाद को जवाब देते हुए अदनान ने लिखा, “तुम्हें तो इतना भी नहीं पता मूर्ख इंसान, मेरी जड़ें पेशावर से हैं, लाहौर से नहीं। ये सोचकर कि तुम सच में सूचना मंत्रालय के मंत्री थे और जानकारी तुम्हारे पास किसी भी बात की नहीं, मेरी सच में हवा निकल गई। तुम तो गुब्बारे जैसे फूले हुए हो न? और तुम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मंत्री थे- क्या बेहूदगी है, साइंस के मंत्री। अब मुझे पता चला कि तुम्हारे नाम के आगे CH क्यों लिखा है और इसका असल अर्थ क्या है।”

अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता ले ली है। उनका परिवार मुंबई में रहता है। हालाँकि, कई लोग इस बात से खबर या बेखबर उनका मजाक बनाने से बाज नहीं आते। अदनान सामी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

‘अल-मतीन मस्जिद का विस्तार होकर रहेगा’: ब्रह्मपुरी में अवैध निर्माण में जुटी मुस्लिम जमात को दिल्ली पुलिस-MCD का भी डर नहीं, ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर लगाने को मजबूर हिन्दू

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीलमपुर है। इसी में है ब्रह्मपुरी नाम इलाका, जहाँ की गली नंबर 12 में बनी अल-मतीन मस्जिद लंबे समय से विवादों में है। उसके विस्तार का विरोध हिंदू कर रहे हैं। स्थानीय हिंदू समुदाय का आरोप है कि मस्जिद को धोखे से बनाया गया था और अब इसे और बड़ा करने की कोशिश एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। मस्जिद का नया गेट गली नंबर-12 में खोलने की योजना है, जो ठीक सामने 1984 से बने शिव मंदिर के पास पड़ता है।

इस मुद्दे ने हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट्स में बताया था कि किस तरह से अल-मतीन मस्जिद के नाम पर स्थानीय हिंदू लोगों में डर फैलाया जा रहा है। इस मस्जिद के विस्तार में किस तरह से काले धन और विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हो रहा है, उसका भी खुलासा ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में किया था।

इसी बीच, इस मस्जिद के विस्तार का काम फिर से शुरू करने की कोशिश की गई। मस्जिद के निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने पर स्थानीय लोग खड़े हो गए। उनका आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस प्रशासन से मस्जिद के निर्माण कार्य को रोकने की माँग की, तो एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा ने उनसे कहा कि मस्जिद से जुड़े लोगों ने 2 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, ऐसे में निर्माण कार्य चलेगा। पुलिस ने साफ तौर पर कहा कि निर्माण कार्य को रोका नहीं जाएगा।

MCD और पुलिस पर प्रशासन की मिलीभगत के आरोप

मस्जिद के विस्तार का मामला 2023 से चल रहा है। पहले जब काम शुरू हुआ तो लोगों ने पुलिस में शिकायत की और निर्माण रुक गया। फिर मस्जिद कमेटी ने 23 नवंबर 2024 को MCD से परमिशन ली। फरवरी 2025 में काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन 13 फरवरी 2025 को उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस को शिकायत मिली। जाँच में पता चला कि मस्जिद का नक्शा गलत तरीके से पास कराया गया था। MCD ने काम रोक दिया और मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजा।

हालाँकि, ऑपइंडिया की 25 अप्रैल 2025 की फॉलोअप रिपोर्ट में स्थिति और गंभीर दिखी। स्थानीय लोग गुस्से में थे क्योंकि रोक के बावजूद मस्जिद का निर्माण कार्य चल रहा था। एक बोर्ड लगा था, जिसमें लिखा था, “समिति की ओर से निजी लिया गया कोई दस जगह पर कोई मस्जिद नहीं बनवाई जाएगी। पर कोई आपस में हिंदू-मुस्लिम तकी अड़चनें नहीं रहे!” लेकिन इसके बावजूद लोग काम करते पाए गए। हिंदुओं ने हंगामा किया, तो पुलिस हिंदू पक्ष के ही दो लोगों को पकड़कर थाने ले गई, हालाँकि अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया।

मस्जिद निर्माण न होने का बोर्ड, फिर भी चल रहा था निर्माण कार्य

पुलिस और प्रशासन के इस रवैये के विरोध में गली नंबर-13 में लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर लगा दिए, जिनमें लिखा था, “मकान नंबर एल-11, गली नंबर 12 ब्रह्मपुरी पर पुलिस के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध मस्जिद का निर्माण करवाया जा रहा है। 112 पर कॉल पर पुलिस उल्टा हमें बंद कर रही है। अब हम अपने घरों के सामने बैठकर धरना दे रहे हैं। पुलिस हमें गोलियाँ मार दे या झूठे केस लगाकर बंद कर दे। पुलिस, MCD हमारे मकानों को बिकवाने पर मजबूर कर रही है।”

हिंदुओं का आरोप है कि प्रशासन मस्जिद कमेटी के साथ मिला हुआ है। गौतम कहते हैं, “MCD ने पहले गलत नक्शा पास किया, अब बोर्ड लगाकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। यह सब ऊपरी दबाव में हो रहा है।”

मुस्लिमों के भरोसे पर खरा उतर रहा प्रशासन

मस्जिद कमेटी और स्थानीय मुस्लिमों ने पहले भी भरोसा जताया था कि वे अपना काम (मस्जिद निर्माण का काम) पूरा कर लेंगे। ऑपइंडिया की 7 मार्च 2025 की रिपोर्ट में मस्जिद के डिप्टी ईमाम सद्दाम हुसैन ने कहा था, “विवाद ठंडा पड़ने के बाद प्रशासन खुद मस्जिद बनाने में मदद करेगा।” इस बात की पुष्टि स्थानीय लोगों से बातचीत में भी हुई थी। 25 अप्रैल 2025 को जब ऑपइंडिया दोबारा ब्रह्मपुरी पहुँचा, तो हिंदुओं का गुस्सा साफ दिखा क्योंकि प्रशासन वाकई निर्माण में सहयोग दे रहा था।

वैसे, मस्जिद के नायब इमाम सद्दाम हुसैन ने कहा भी था, “हमें भरोसा है कि मामला ठंडा होने के बाद निर्माण कार्य जरूर पूरा होगा। अभी पुलिस और MCD का दबाव है, लेकिन ये ज्यादा दिन नहीं चलेगा।” कुछ मुस्लिमों का कहना है कि वे मौके का इंतजार कर रहे हैं। एक दुकानदार ने कहा, “अभी सब चुप हैं, लेकिन मौका मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। हमें अपनी मस्जिद चाहिए।” हिंदुओं का ये डर सही साबित हो रहा है, क्योंकि मस्जिद का काम चुपके से बढ़ाया जा रहा है। इसका विरोध हिंदू कर रहे हैं।

विवाद की जड़ को समझें

ब्रह्मपुरी की अल-मतीन मस्जिद की कहानी 2013 से शुरू होती है। स्थानीय निवासी पंडित शंकर लाल गौतम बताते हैं, “2013 में गली नंबर-13 में कुछ मुस्लिम लोगों ने एक फ्लैट खरीदा था। शुरू में वहाँ नमाज पढ़ी जाने लगी, जिससे किसी को आपत्ति नहीं थी। लेकिन धीरे-धीरे उस फ्लैट को मस्जिद में बदल दिया गया।” गौतम के अनुसार, यह एक आम घर था, लेकिन बाद में इसे चार मंजिला मस्जिद बना दिया गया। उनका मानना है कि यह सब सोच-समझकर किया गया ताकि इलाके में मुस्लिमों की पकड़ मजबूत हो। शुरू में किसी को शक नहीं हुआ, लेकिन 2020 के दिल्ली दंगों के बाद लोगों की आँखें खुल गईं।

अल-मतीन मस्जिद से चली थी हिंदुओं पर गोलियाँ

साल 2020 के फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे ब्रह्मपुरी के लोगों के लिए आज भी एक डरावना सपना हैं। सीलमपुर, जाफराबाद और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में हिंसा ने 53 लोगों की जान ले ली और सैकड़ों घायल हुए। इस दौरान अल-मतीन मस्जिद का नाम खास तौर पर सामने आया। गौतम बताते हैं, “25 फरवरी को मस्जिद से गोलियाँ चली थीं। वहाँ अचानक हजारों लोग जमा हो गए। झूठ फैलाया गया कि मस्जिद में आग लगाई गई। इसके बाद गली नंबर-13 में गोलीबारी हुई, जिसमें तीन हिंदू लड़के घायल हुए।” इस घटना के बाद हिंदुओं में डर बैठ गया। कई परिवार इलाका छोड़कर चले गए और अपने घर बेच दिए।

मस्जिद के विस्तार को साजिश मानते हैं हिंदू

साल 2020 के बाद मस्जिद को बड़ा करने की कोशिश शुरू हुई। 2023 में मस्जिद कमेटी ने गली नंबर-12 में इसके बगल का एक प्लॉट खरीदा, जो पहले एक हिंदू परिवार का था। गौतम कहते हैं, “पहले उस घर को खरीदा, फिर तोड़ दिया और वहाँ मस्जिद का हिस्सा बनाने लगे। यह सब बहुत सोच-समझकर हुआ।” योजना थी कि मस्जिद का नया गेट गली नंबर-12 में खोला जाए, जो ठीक सामने बने शिव मंदिर के पास पड़ता है। इस मंदिर में 1984 से पूजा होती है, हर सोमवार को भक्त जमा होते हैं, और होली पर होलिका दहन होता है। हिंदुओं को डर है कि मस्जिद का गेट सामने खुलने से रोज झगड़ा होगा और 2020 जैसी घटना दोहराई जा सकती है।

ब्रह्मपुरी की गली नंबर 13 में यहीं पर खोला जाना है मस्जिद का नया गेट

मस्जिद के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन का कहना है, “हमारी आबादी बढ़ रही है। मस्जिद छोटी पड़ गई थी। इसमें गलत क्या है? हम शांति से रहना चाहते हैं।” लेकिन हिंदुओं को यह बात साजिश लगती है। गली नंबर-12 में रहने वाले सोनू (नाम बदला हुआ) कहते हैं, “अगर मस्जिद दो गुनी बड़ी हो गई तो सोचो, कितने लोग यहाँ जमा होंगे। यह हमारे लिए खतरे की घंटी है।”

‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर और डेमोग्राफी बदलाव का डर

मस्जिद के विस्तार के विरोध में गली नंबर-12 के करीब 60 हिंदू परिवारों में से 25-30 ने अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर लगा दिए। स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा (नाम बदला हुआ) बताते हैं, “2020 के बाद यहाँ का माहौल बदल गया। दंगों में हमने अपने लोगों को खोया, घर जले, और डर ऐसा बैठा कि कई लोग यहाँ से चले गए। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि फिर वही सब होगा।” हिंदुओं का आरोप है कि यह इलाके की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। उनका कहना है कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है, और हिंदू पलायन को मजबूर हो जाते हैं।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि लोग अपनी मर्जी से घर बेच रहे हैं। सद्दाम हुसैन कहते हैं, “हम अच्छे पैसे दे रहे हैं, इसलिए लोग बेच रहे हैं। कोई जबरदस्ती नहीं है।” लेकिन हिंदुओं का मानना है कि यह डर की वजह से हो रहा है। एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं, “पहले यहाँ हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे। दंगों के बाद सब बदल गया। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें यहाँ से भगाने की तैयारी है।”

कम्युनिटी सेंटर का झूठ फैला रही कमेटी, स्थानीय लोग बता रहे सच

बहरहाल, मस्जिद कमेटी अब दावा कर रही है कि गली नंबर-12 में मस्जिद नहीं, बल्कि कम्युनिटी सेंटर बनाया जा रहा था। सद्दाम हुसैन कहते हैं, “हम बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए जगह बनाना चाहते थे। यह कोई साजिश नहीं है।” लेकिन हिंदुओं को यह बात हजम नहीं हो रही। गौतम कहते हैं, “यह सब बहाना है। पहले मस्जिद बनाने की बात थी, अब जब विरोध हुआ तो कहानी बदल दी।” कुछ स्थानीय मुस्लिम भी मानते हैं कि असल में मस्जिद ही बन रही थी। एक शख्स ने कहा, “कम्युनिटी सेंटर की बात बस लोगों को चुप कराने के लिए है।”

ब्रह्मपुरी का यह विवाद सिर्फ मस्जिद निर्माण तक सीमित नहीं है। यह 2020 के दंगों का जख्म, डेमोग्राफी बदलाव का डर, धार्मिक त्योहारों का टकराव और प्रशासन पर अविश्वास की कहानी है।

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गाँजा पिलाकर, पोर्न दिखाकर, गले पर छुरी रख हिंदू लड़कियों का बलात्कार: वीडियो भी सर्कुलेट करता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों को फँसाकर रेप करने और ब्लैकमेल करने के मामले में नए खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि मुस्लिम गैंग के सदस्यों ने पीड़िताओं का रेप करने के लिए उन्हें न केवल गांजा पिलाया, बल्कि गले पर छुरी रखकर, पोर्न दिखाकर उनका बलात्कार किया।

केस का मुख्य आरोपित फरहान खान है। पुलिस उसके साथ मोहम्मद साद, अरबाज, अयान, शाहरुख, जावेद उर्फ भय्यू, जोया, फैजान को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा केस में मोहम्मद अली, अबरार खान, हामिद, अरशद और सिराज समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस बंगाल तक दबिश दे रही है।

पुलिस को आरोपितों के फोन की जाँच में और पीड़िताओं का नाम भी पता चला है। इनमें दो तो सगी बहनें हैं। अब पीड़िताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। छानबीन में पता चला है कि फरहान और उसके साथी अश्लील वीडियोज बनाने के बाद एक दूसरे को भेजते थे। फिर पीड़िताओं से अन्य लड़कियों से मिलवाने के लिए कहते थे। इनके मोबाइल से लड़कियों को भेजे गए धमकियों के सबूत भी मिले हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि फरहान से उसकी मुलाकात कॉलेज में सहेली के जरिए हुई थी। इसके बाद फरहान एक दिन उसे हामिद के घर लेकर गया और वहाँ रेप करके वीडियो बना ली। उसने विरोध किया तो उसे धमकाकर नॉनवेज तक खिलाया गया। बाद में फरहान ने पीड़िता की छोटी बहन को निशाना बनाया। उसकी जान-पहचान अली से करवाई। अली भी पीड़िता की छोटी बहन को घुमाने के लिहाज से ले गया और बाद में उसके संबंध बनाकर वीडियो बना ली।

पीड़िता ने यह भी बताया कि फरहान उससे अन्य सहेलियों को मिलवाने के लिए डिमांड करता था। न बात सुनने पर ब्लैकमेल करता था। एक बार डर से पीड़िता अपनी सहेली को लाई तो उसकी मुलाकात साहिल से करवाई गई। साहिल ने भी लड़की के साथ वही किया, जो फरहान ने उसके साथ किया था।

पीड़िता के अनुसार, उसे जबरन पोर्न दिखवाया जाता था। बात न मानने पर कार में पीटा जाता था। गले पर छुरी रखकर धमकी दी जाती थी। धर्म बदलकर शादी करने के लिए दबाव डाला जाता था।

इसी प्रकार एक पीड़िता ने शाहरुख, अयान, जोया का नाम अपने बयान में लिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि भोपाल के बैरागढ़ के शाहरुख ने उसे अपने प्रेमजाल में फांसा। उसके बाद उससे दुष्कर्म किया। कुछ समय बाद उसकी एक नाबालिग दोस्त के साथ शाहरुख ने अपने दोस्त अयान के साथ रिश्ता बनवाने का दबाव बनाया। अयान ने दोस्ती होने के बाद नाबालिग के साथ रेप किया। इसका वीडियो भी बनाया।

इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर शाहरुख ने पीड़ित को उसके दूसरे दोस्त अरबाज के पास जाने को कहा। अरबाज ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि शाहरुख उसे बाणगंगा में रहने वाले जोया और उसके पति फैजान के किराए के कमरे पर लेकर जाता था। फैजान के साथ जावेद नाम का भी एक शख्स वहाँ होता था।

फरहान की शिकार हुई पीड़िता बताती है कि भोपाल छोड़ने पर भी उसके साथ ब्लैकमेलिंग का सिलसिला खत्म नहीं हुआ। अंत में तंग आकर उसने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इसी के बाद पुलिस ने और पीड़िताओं को खोजा और कुल छह पीड़िताओं की डिटेल सामने आई। पुलिस ने सबकी काउंसलिंग की और इन सबकी शिकायत पर शहर के पाँच थानों में 12 लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। अब पुलिस एसआईटी गठित करके हर एंगल से जाँच कर रही है।

मीडिया को भोपाल के पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया ये एक सोचा- समझा पैटर्न है। मामले की गंभीरता को देखकर अन्य लड़कियों से भी संपर्क किया जा रहा है। पकड़े गए आरोपितों के मोबाइल से लड़कियों के अश्लील वीडियो भी मिले हैं। अन्य फरार आऱोपितों को भी पकड़ने की कोशिश जारी है।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसे मामले अजमेर और ब्यावर से सामने आ चुके थे। हाल में इस मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल भी सुर्खियों में आया। पीड़िताएँ निजी कॉलेज की छात्राएँ हैं। वहीं फरहान व कुछ आरोपित उसी कॉलेज में MBA के छात्र हैं।

20 शवों की पतलून उतरी हुई, दिखाई दे रहे थे अंडरवियर और प्राइवेट पार्ट्स: पहलगाम के चश्मदीदों ने जो बताया उसपर जाँच टीम की भी मुहर, आतंकियों ने लिया था ‘ट्रिपल टेस्ट’

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 निर्दोषों की जान ले ली। इस घटना में जीवित बचे कई पीड़ितों ने बताया कि आतंकी पुरुषों की पैंट खुलवाकर चेक कर रहे थे कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जिनका खतना नहीं हुआ था, उनकी हत्या कर दी जा रही थी। अब शुरुआती जाँच में भी इसकी पुष्टि हो गई है। जहाँ कट्टर मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी स्वीकारा था कि मजहब पूछकर लोगों को मारा गया, वहीं सोशल मीडिया पर कई प्रपंची दावा का रहे थे कि मृतकों में एक मुस्लिम है, इसीलिए सारे पीड़ित व मृतकों के परिजन झूठ बोल रहे हैं।

26 शवों की प्रारंभिक जाँच करने वाली टीम ने पाया है कि इनमें से 20 पुरुषों के पैंट की चेन खुली हुई थी। साथ ही उनके पैंट आधे उतार लिए गए थे। इससे इसकी पुष्टि हो जाती है कि आतंकियों का इरादा हिन्दुओं को चिह्नित कर उन्हें निशाना बनाए जाने का था। भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और प्रशासन की टीम ने पाया है कि पुरुषों के पैंट कुछ इस तरह खोले गए थे कि किसी का अंडरवियर तो किसी का प्राइवेट पार्ट खुले में दिखाई दे रहा था। मृतकों के परिजन उन्हें इस अवस्था में देखकर सदमे में थे।

प्रशासन के कर्मचारियों ने भी इन शवों को उसी अवस्था में जाँच के लिए पहुँचाया, जैसे वो उस समय थे। इस दौरान उन्हें चादरों से ढँक दिया गया था। FIR में डालने के लिए उन शवों के अंतिम विवरण दर्ज किए गए। एक तरह से इन आतंकियों ने मध्यकाल के बर्बर तौर-तरीकों को आजमाया, हत्या से पहले धर्म की पुष्टि के लिए। कई चश्मदीदों ने भी इसकी पुष्टि की है। साथ ही लोगों से उनका आईडी कार्ड दिखाने को भी कहा गया था, ताकि नाम देखकर पता लगाया जा सके कि वो हिन्दू हैं या नहीं।

इतना ही नहीं, लोगों को कलमा पढ़ने के लिए भी कहा गया। जो कलमा नहीं पढ़ पाए, उन्हें मार डाला गया। यानी, हिन्दू पहचान की पुष्टि के लिए 3 ‘टेस्ट’ लिए गए – खतना चेक किया, आईडी कार्ड देखा और कलमा पढ़ने के लिए कहा। घाटी में आतंकियों से जुड़े 70 लोगों को गिरफ़्तार कर पहलगाम आतंकी हमले के संबंध में पूछताछ की जा रही है। 1500 को हिरासत में लिया गया था, लेकिन अब उनमें से 70 सबसे बड़े संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। FIR में हर एक डिटेल दर्ज की गई है, ताकि आतंकियों को सज़ा मिल सके।