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जहाँ लिद्दर किनारे रचा गया ‘जय सोमनाथ’, शिव ने नंदी बैल को छोड़ा: पहलगाम के कण-कण में है शिवत्व, आज जहाँ 80% मुस्लिम कभी वहीं अर्धांगिनी संग विचरते थे पशुपति

पहलगाम – ये नाम सुनते ही ख़ौफ़ का एक मंज़र सामने आ जाता है, मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को जो हुआ वो याद करके रक्त में उबाल उठने लगता है। अनंतनाग जिले में स्थित इसी क्षेत्र की बैसरन घाटी में आतंकियों ने उस दिन जो ख़ूनी खेल खेला, हर हिन्दू उसे व्यक्तिगत क्षति मानकर चल रहा है। कारण – हिन्दुओं को निशाना बनाया गया, पैंट खोलवाकर देखा गया कि खतना हुआ है या नहीं। जो कलमा नहीं पढ़ पाए, उन्हें मार डाला गया। जिनकी आईडी कार्ड में मुस्लिम नाम नहीं था, उन्हें मार डाला गया।

एक-एक कर 28 लाशें गिरा दी गईं। महिलाओं को छोड़ दिया गया, उन्हें कहा गया कि जाओ मोदी को बता देना। पहलगाम के कई स्थानीय लोग वो घोड़े पर पर्यटकों को घुमाने वाले भी इस साज़िश में शामिल मिले, कइयों की जाँच चल रही है। इस घटना के बारे में सुनकर आपकी राय ऐसी ही बनेगी कि पहलगाम कोई इस्लामी इलाक़ा है, तो आप ग़लत हैं। आज भले ही पहलगाम में 81% मुस्लिम हों और हिन्दुओं की जनसंख्या मात्र 17% पर सीमित होकर रह गई हो, पहलगाम के कण-कण में शिवत्व का वास है। आइए, समझाते हैं कैसे।

पहलगाम का ऐतिहासिक महत्व, हिन्दू धर्म से जुड़ा है इतिहास

अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम ही वो तहसील है, जहाँ बाबा बर्फानी विराजते हैं, हर वर्ष अमरनाथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। लिद्दर नदी के किनारे स्थित पहलगाम, अनंतनाग के जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर की दूसरी पर स्थित है, समुद्र-तल से 7200 फ़ीट ऊपर। यही कारण है कि गर्मियों में लंबे समय से ये एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल रहा है, ख़ासकर के जोड़ों के लिए। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता उन्हें लुभाती है। वहीं विदेशी पर्यटक भी यहाँ आते रहे हैं। बैसरन के अलावा ‘बेताब’ (1983) फिल्म के नाम पर लोकप्रिय ‘बेताब घाटी’ भी यहाँ आकर्षण का केंद्र रही है।

‘मिशन कश्मीर’ (2000), ‘जब तक है जान’ (2012), ‘हैदर’ (2014) और ‘बजरंगी भाईजान’ (2015) जैसी बड़ी फिल्मों की शूटिंग यहाँ पर हो चुकी है। पहलगाम के इतिहास की बात करें तो यहाँ पाषाणकालीन संस्कृति के ही प्रमाण मिलते हैं। अमरनाथ यात्रा का पारंपरिक रूट भी पहलगाम होकर ही जाता है, यात्री यहीं पहला पड़ाव डालते हैं। पहलगाम तहसील मुख्यालय से अमरनाथ धाम की दूरी 42 किलोमीटर है। शेषनाग और पंचतरणी – इन दोनों स्थलों पर यात्री रात्रि-पड़ाव डालते हैं।

इन नामों से ही आपको पता चल रहा होगा कि इस क्षेत्र का इतिहास कैसा रहा है। शेषनाग नामक स्थान पर मान्यता है कि यहाँ स्वयं शेषनाग विराजते हैं। रात्रि विश्राम करने वाले यात्रियों को लिद्दर नदी की कल-कल बहती धारा शांति देती है और वहाँ का जलवायु व ठंडी हवाएँ श्रद्धालुओं को शीतलता प्रदान करती है। श्रद्धालु लिद्दर नदी में स्नान भी करते हैं। रास्ते में अमरनाथ धाम जाने के लिए पिस्सू घाटी को पार करना पड़ता है। ये भी जानने वाली बात है कि कारगिल युद्धक्षेत्र से अमरनाथ धाम की दूरी 80 किलोमीटर ही है।

अमरनाथ गुफा का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, 12वीं सदी के महाकवि कल्हण रचित इतिहास-ग्रन्थ ‘राजतरंगिणी’ में भी इसका वर्णन मिलता है। अमरनाथ धाम का महत्व ये है कि यहीं पर भगवान शिव ने अमरता का सूत्र माँ पार्वती को दिया था। कहते हैं कि कोई और ये रहस्य न सुन पाए, इसीलिए उन्होंने इतनी दूर इस ऊँचे स्थल को चुना। उन्होंने पहलगाम में नंदी बैल को, चंदनबाड़ी में चन्द्रमा को, शेषनाग झील के किनारे सर्पों को और महागुणस पर्वत पर अपने बेटे गणेश को छोड़ा। 19वीं सदी में कश्मीर के राजा गुलाब सिंह ने कई तीर्थस्थलों का विकास करवाया, जिसमें अमरनाथ धाम भी शामिल है।

छठी शताब्दी में मिहिरकुल नामक हूण शासक ने पहलगाम में मिहिरेश्वर मंदिर की स्थापना कराई थी, जिसे आज मामलेश्वर के रूप में भी जाना जाता है। सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाने वाले स्वतंत्रता सेनानी कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने युवावस्था के दौरान पहलगाम की घाटी में लिद्दर नदी के किनारे बैठकर ही ‘जय सोमनाथ’ नामक उपन्यास की रचना की, जिसमें सोमनाथ के विभाग और ध्वंस का वर्णन किया गया। महमूद गजनी के हमले के बारे में लिखते हुए उन्होंने हिन्दुओं की वेदना को उकेरा।

जम्मू कश्मीर का इतिहास: सनातन में हैं जड़ें, पुराना विभाग वापस लाने की ज़रूरत

कहीं भी जब कश्मीर का नाम आता है तो आपने क्या पढ़ा है? कहीं आपने पढ़ा होगा कि जहाँगीर ने इसे ‘धरती का स्वर्ग’ कहा, तो कहीं आपने पढ़ा होगा कि मुगलों को ये ख़ास प्रिय था। जिन महर्षि कश्यप के नाम पर कश्मीर का नाम पड़ा, कितनी बार कश्मीर के साथ अपने उनका नाम पढ़ा है? कितनी बार आपने कवि कल्हण और उनकी कृति ‘राजतरंगिणी’ के बारे में सुना है? कल्हण ने कश्मीर को माता कहा, उन्होंने तभी भविष्यवाणी कर दी थी कि अगर कश्मीर असुरक्षित हो गया तो सबकुछ नष्ट हो जाएगा।

उन्होंने कश्मीर के राजाओं को शिव का अंश माना। कितनी बार आपने पढ़ा है कि कश्मीर माँ शारदा की भूमि है? कितनी बार आपको बताया गया कि ऐतिहासिक ग्रंथों में इसे ‘शारदा क्षेत्र’ कहा गया है। ‘नीलमत पुराण’ में कश्मीर को ‘कश्मीरा’ कहा गया है, इस क्षेत्र को साक्षात् देवी पार्वती का रूप बताया गया है – कितने बच्चों ने किताबों में पढ़ा ये? अगर महाभारत में अर्जुन के दिग्विजय का वर्णन पढ़ा दिया जाए तो कश्मीर का उस समय का भूगोल पता चल जाएगा। मुगलों ने ये बोला, मुगलों ने वो बोला – बाकी का इतिहास कहाँ गया? डेमोग्राफी के साथ गायब?

जम्मू कश्मीर स्थित शारदापीठ आज पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर है। जब शंकराचार्य यहाँ आए थे तो उन्हें यहाँ के पंडितों को शास्त्रार्थ के जरिए हराना पड़ा था, तभी उनके लिए मंदिर के दरवाजे खुले थे। हिन्दू धर्म में शास्त्रार्थ की परंपरा रही है, हथियारों के जरिए अपनी बात मनवाने की नहीं। कश्मीर का इतिहास शैव इतिहास है, हिन्दू धर्म का इतिहास है। श्रीनगर से पहलगाम जाते समय रास्ते में अवंतीपुरा पड़ता है, वहाँ के मंदिर भी काफी प्राचीन व लोकप्रिय हैं।

मान्यता ये भी है कि पहले पहलगाम का नाम ‘बैलगाम’ था, क्योंकि शिव ने अपने बैल को यहाँ छोड़ा था। इस बार भी अमरनाथ यात्रा 27 जून से शुरू होने वाली है, इस आतंकी हमले को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करके रखी जाएगी। जब भी पहलगाम का नाम आए तो ये ज़रूर ध्यान में रखें कि ये क्षेत्र शिवत्व को अपने भीतर समेटे हुए है, इसका कण-कण शिव-शिव बोलता है। पहलगाम कहिए या बैलगाम, अगर ये क्षेत्र पाकिस्तान में होता तो शायद इसका भी कुछ उर्दू नाम रख दिया जाता।

दिल्ली में रह रहे हैं 5000 पाकिस्तानी, IB ने तैयार की लिस्ट: 18 साल पहले क्रिकेट मैच देखने कानपुर आए 28 लोग भी गायब, पहलगाम अटैक के बाद तलाश तेज

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के सभी शॉर्ट टर्म वीजा रद्द कर दिए हैं। इस फैसले के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) ने देशभर में पाकिस्तानी नागरिकों की तलाश शुरू कर दी है। इस बीच, कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ साल 2007 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज देखने आए 32 पाकिस्तानी नागरिकों में से 28 पिछले 18 साल से लापता हैं। हैरानी की बात यह है कि कानपुर पुलिस और एलआईयू के पास इनका कोई रिकॉर्ड तक नहीं है।

बता दें कि 2007 में भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज के दौरान कानपुर में ग्रीनपार्क स्टेडियम में मैच हुआ था। इस दौरान कई पाकिस्तानी प्रशंसक भारत आए थे। इनमें से 32 लोग अपने देश वापस नहीं लौटे। ये सभी इक्जम्पटेड फॉर पुलिस रिपोर्ट (ईपीआर) वीजा पर थे, जिसके तहत उन्हें किसी भी जिले में जाने पर पुलिस को सूचना देने की जरूरत नहीं थी। इसी का फायदा उठाकर ये लोग अचानक गायब हो गए। पुलिस ने तलाश शुरू की, लेकिन सिर्फ चार लोगों का पता चला, जिन्हें पाकिस्तान वापस भेज दिया गया। बाकी 28 का आज तक कोई सुराग नहीं मिला। एलआईयू के एडीसीपी राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि ईपीआर वीजा के चलते लापता लोगों की जानकारी जुटाना मुश्किल है।

आईबी ने दिल्ली पुलिस को सौंपी 5000 पाकिस्तानियों की लिस्ट

दिल्ली में भी स्थिति गंभीर है। आईबी ने दिल्ली पुलिस को करीब 5000 पाकिस्तानी नागरिकों की सूची सौंपी है, जिन्हें देश छोड़ने को कहा गया है। फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) ने यह सूची दिल्ली पुलिस की स्पेशल ब्रांच को दी है, जो अब जिलों में सत्यापन कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में सबसे ज्यादा पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं। मजनू का टीला में करीब 900 और सिग्नेचर ब्रिज के पास 600-700 लोग हैं। दिल्ली पुलिस को दो सूचियाँ मिली हैं, एक में 3000 और दूसरी में 2000 नाम हैं, जिनमें कुछ नाम दोहराए गए हैं। इनका सत्यापन जारी है, क्योंकि कई लोग पहले ही देश छोड़ चुके हैं।

विदेश मंत्रालय ने 27 अप्रैल, 2025 से सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए हैं, सिवाय लॉन्ग टर्म वीजा (एलटीवी), डिप्लोमैटिक और ऑफिशियल वीजा के। मेडिकल वीजा भी 29 अप्रैल तक ही वैध रहेंगे। हालाँकि, हिंदू पाकिस्तानी नागरिकों के एलटीवी को छूट दी गई है। कानपुर में 50 पाकिस्तानी नागरिक एलटीवी पर रह रहे हैं, जिनमें 42 मुस्लिम और 8 हिंदू परिवार शामिल हैं। ये लोग 60 और 90 के दशक में आए थे और यहीं शादी कर बस गए हैं। पुलिस इन पर नजर रख रही है।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें से वीजा छूट योजना और सिंधु जल संधि को निलंबित करना शामिल है। अब खुफिया एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन लापता पाकिस्तानी नागरिकों को ढूँढना है, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात से चिंतित हैं कि ये लोग देश के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं। दिल्ली और कानपुर में चल रही तलाश के साथ ही अन्य राज्यों में भी जाँच तेज कर दी गई है।

PoK में बाढ़ का अलर्ट, झेलम में बढ़ा जलस्तर: पाकिस्तान लगा रहा ‘जलयुद्ध’ का आरोप, जानिए क्या है मामला

पहलगाम में हुए इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत ने इसके बाद सिंधु जल समझौता निलंबित कर दिया है। इसके बाद से पाकिस्तान पर सूखे का खतरा मंडराया है। सूखे के उलट पाकिस्तानी अब भारत पर झेलम नदी में बाढ़ लाने का आरोप लगा रहे हैं।

शनिवार (26 अप्रैल, 2025) को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में झेलम नदी के जलस्तर में अचानक तेज वृद्धि देखी गई है। इसके बाद यहाँ के सबसे शहर मुजफ्फराबाद में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारत ने पाकिस्तान के अधिकारियों को बिना किसी पूर्व चेतावनी के पानी छोड़ दिया है।

चकोठी सीमा से लेकर मुजफ्फराबाद शहर तक स्थानीय लोगों ने नदी के तेजी से बढ़ते जलस्तर को देखा। इससे उनमें डर का माहौल बन गया है। मुजफ्फराबाद में जलस्तर बढ़ने के चलते सायरन बजाए जा रहे हैं और मस्जिदों से चेतावनी दी जा रही है।

यहाँ तक कि नदी के किनारे बसे हटियन बाला, घारी दुपट्टा, मझोई में अफरा-तफरी मच गई और यहाँ रहने वालों को ऊँची जगहों पर भागना पड़ा। घारी दुपट्टा के एक निवासी ने बताया, “हमें इसका बिलकुल भी अंदाजा नहीं था। उसने बताया कि मस्जिदों के लाउडस्पीकर से भागने का ऐलान किया गया।

पाकिस्तान का दावा है कि यह पानी अचानक नहीं बढ़ा है बल्कि भारत ने जानबूझ कर यह हरकत की है। पाकिस्तान का दावा है कि पहलगाम में हुए आंतकी हमले के जवाब में भारत अब पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है और इसे पानी रणनीति में शामिल कर रहा है।

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक जावेद सिद्दीकी ने “सिंधु जल समझौताको स्थगित करने की भारत की धमकी फर्जी नहीं थी। आज पानी छोड़ा जाना एक जोरदार और स्पष्ट मैसेज था।” झेलम के जलस्जतर में बढ़ोतरी की मुजफ्फराबाद प्रशासन ने भी पुष्टि की है। PoK के कुछ हिस्सों में आधिकारिक तौर पर आपातकाल की घोषणा की गई है।

रिपोर्ट बताती हैं कि पानी का अचानक बहाव भारत के अनंतनाग में चकोठी से चालू हुआ। इसको लेकर तमाम वीडियो भी सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। इनमें तमाम पाकिस्तानी जलस्तर बढ़ने की बात कर रहे हैं और भारत को दोष दे रहे हैं।

झेलम के जलस्तर में यह बढ़ोतरी अगर सही में भारत का कदम है तो यह सिंधु जल समझौते के ताबूत में अंतिम कील साबित हो सकती है। भारत ने इस समझौते को 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ‘निलंबित’ कर दिया था और कहा था कि पाकिस्तान जब तक आतंक पर कार्रवाई नहीं करेगा तब तक वह इस पर अमल नहीं करेगा।

इस हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस्लामी आतंकियों ने इस हमले में धर्म पूछ-पूछ कर लोगों को गोलियाँ मारी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर कैबिनेट समिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें इस समझौते को निलंबित करने का निर्णय लिया गया था।

जोधपुर में शौकत अली की दुकान के सामने भगवा झंडे का अपमान, सड़क पर उतरे लोग: पश्चिम बंगाल से आकर राजस्थान में कट्टरता का धंधा, हिंदुओं ने की कार्रवाई की माँग

राजस्थान के जोधपुर शहर में आने वाले घोड़ा चौक इलाके में शनिवार (26 अप्रैल 2025) की रात एक भगवा झंडे को लेकर बड़ा विवाद हो गया। ये इलाका शहर का मशहूर ज्वेलरी और बुलियन ट्रेडिंग हब है, जहाँ संकरी गलियों में घरों पर भगवा झंडे लगे थे। सुबह एक झंडा नीचे गिर गया और दुकान कर्मचारी की स्कूटी पर जा पड़ा। कर्मचारी ने दुकान खोलने के बाद उस झंडे को हटाने की कोशिश की, लेकिन ये हरकत सामने लगे सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। थोड़ी ही देर में वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद मामला गरमा गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों से जुड़े लोग मौके पर जमा हो गए और कर्मचारी पर भगवा झंडे का अपमान करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ये हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम है। देखते ही देखते भीड़ बढ़ने लगी और प्रदर्शन शुरू हो गया।

प्रदर्शनकारी दुकान मालिक शौकत अली के खिलाफ भी कार्रवाई की माँग करने लगे। उनका आरोप था कि शौकत अली पड़ोसी देश से आए लोगों को पनाह देता है और उसकी सोच कट्टर है। शौकत अली घटना के बाद से फरार बताया जा रहा है।

हंगामा बढ़ता देख भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। जोधपुर के डीसीपी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि सुबह 11:30 बजे सादर बाजार के एसएचओ से सूचना मिली थी। पुलिस ने कर्मचारी को हिरासत में ले लिया, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। कर्मचारी और दुकान मालिक दोनों पश्चिम बंगाल के बताए जा रहे हैं। भीड़ ने बाजार बंद करने की माँग की, जिसके बाद बाजार कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया। करीब 300-400 लोग मौके पर जमा थे। बाद में प्रदर्शनकारी सोजती गेट पुलिस चौकी के सामने इकट्ठा हुए और सख्त कार्रवाई की माँग की।

जोधपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन सोनी ने भी शौकत अली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दुकान मालिक की कट्टर सोच के बारे में पहले से शिकायतें थीं। पुलिस ने भीड़ को समझाने की कोशिश की और कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस चौकी में बातचीत की और एक एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने कहा कि कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। शाम तक हालात काबू में आ गए और बाजार फिर से खोल दिया गया। हालाँकि, इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

सिर्फ रेप-ब्लैकमेल नहीं, हिंदू लड़कियों को सिगरेट से भी जलाता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’: पीड़िताओं को बुर्का पहनाए-रोजे रखवाए, फैजान के फोन में मिले Videos

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों को फँसाने के सुनियोजित पैटर्न का अब खुलासा हो चुका है। पकड़े गए आरोपितों ने स्वीकार किया है कि वो गरीब हिंदू लड़कियों को फँसाते थे, उनका बलात्कार करते थे, पीड़िताओं की वीडियो बनाते थे, उन्हें ब्लैकमेल करते थे और दूसरों से उनका रेप करवाते थे।

अब पुलिस इनसे आगे पूछताछ कर रही है। अभी तक शहर के पाँच अलग-अलग थानों में मुस्लिम गैंग के कम से कम 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। पाँच थानों के नाम बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद, बैरागढ़ और श्यामा हिल्स हैं।

बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद के मामलों में जहाँ मुख्य रूप से फरहान कान, साहिल, अली, अबरार और शमशुद्दीन का नाम सामने आया है। वहीं बैरागढ़ और श्यामा हिल्स के केस में शाहरुख, जुनैद, जोया और फैजान के नामों का पता चला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैजान इस पूरे कांड में मुख्य आरोपित है। उसके फोन से कई लड़कियों की अश्लील वीडियो मिली है। एक वीडियो में तो दिख रहा है कि वो एक साथ तीन लड़कियों का रेप कर रहा था। उन्हें बेरहमी से पीट रहा था और उनके शरीर को सिगरेट से दाग रहा था।

इससे पहले फरहान को लेकर सामने आया था कि उसने पीड़िता को कॉलेज में रहते हुए अपने जाल में फँसाया था। बाद में उसका रेप करके उसकी वीडियो बनाकर और लड़कियों को भी फँसाया था। जब पीड़िता ने इन हरकतों का विरोध किया तो उसे मीट खिला दिया गया। उसे धमकाया गया कि वो अपनी और सहेलियों को भी फरहान और उसके दोस्तों से मिलवाए।

फरहान का ही दोस्त साहिल खान था। अशोक गार्डन में डांस सिखाने वाले साहिल को लेकर जानकारी सामने आई है कि वो अपनी एकेडमी में गरीब हिंदू लड़कियों को लाता था। उन्हें फिर बड़े-बड़े सपने दिखाकर लॉन्ज ले जाता था और बाद में उनका बलात्कार करके वीडियो बनाता था।

फरहान के ग्रुप के सदस्यों ने एक पीड़िता की नाबालिग बहन को फाँसा था। उसके साथ अली ने होटल में गलत काम किया था और बाद में वीडियो फरहान के साथ साझा की थी। फरहान ने भी वीडियो के दम पर ब्लैकमेल करके दोबारा लड़की के साथ उसका रेप किया था।

इन तीनों की इस घटिया हरकत में मदद करने वालों का नाम शमशुद्दीन, अबरार और नबील हैं। शम्सुद्दीन केवल लड़कियों को 500-500 रुपए के लालच लड़कियों लाने-छोड़ने का काम नहीं करता था बल्कि उन्हें गाँजा पिलाता था। इसी तरह अबरार अपना कमरा इन्हें देता था ताकि वो रेप कर सकें और नबील लड़कियों को बदनाम करने में शामिल था।

अब मामला बैरागढ़ और श्यामलहिल्स का। मुख्य आरोपित शाहरुख, अयान और अरबाज हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये तीनों ही गरीब परिवार के लड़के हैं लेकिन जब हिंदू लड़कियों को फँसाना होता था तो इनके पास महंगी बाइकें आ जाती थीं और ये लड़कियों को बड़े-बड़े होटल में ले जाते थे।

इसके बाद वहाँ ये लड़कियों से संबंध बनाते थे और उनका वीडियो रिकॉर्ड करके धमकाते थे। पुलिस इन केसों का पैटर्न देखने के बाद ये जाँच रही है कि आरोपितों के पास आखिर इन सब चीजों के लिए रुपया आ कहाँ से रहा था? क्या इस कांड के पीछे कोई बाहरी हाथ था या हिंदू घृणा में ये लोग लड़कियों को फँसाते थे?

मालूम हो कि भोपाल में लव जिहाद का ये पैटर्न बिलकुल ‘द केरल स्टोरी’ की कहानी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इस मामले में भी सामने आया है कि मुस्लिम लड़की, हिंदू लड़कियों की मुलाकात मुस्लिम लड़कों से कराती थी और फिर रेप करने में उन्हें जगह देती थी। जोया को पुलिस ने इसी आरोप में गिरफ्तार किया है। उसने ही अपने पड़ोस की लड़की को शाहरुख से मिलवाया था। जब शाहरुख ने उसका रेप कर दिया तो अयान के साथ भी पीड़िता को संबंध बनाने को कहे गए थे।

इस केस में कुछ पीड़िताओं ने ये भी खुलासा किया है कि ये गैंग उनका ब्रेनवॉश करती थी। उन्हें बुर्का पहनने को, रोजा रखने को मजबूर करती थी और निकाह व धर्मांतरण का दबाव बनाती थी। इतना ही नहीं गाँजा पिलाकर रेप किया जाता था, चलती कार में बलात्कार होता था, पोर्न देखने को मजबूर किया जाता था, बात न सुनने पर गले पर छुरी रखकर दुष्कर्म होते थे। पुलिस अब आरोपितों को पकड़कर बिहार से बंगाल तक दबिश दे रही है। मामले की जाँच के लिए एसआईटी भी गठित है। वहीं मुख्यमंत्री यादव ने स्कूल, कॉलेज की छात्राओं के हुए घिनौने काम पर चिंता जताते हुए इस मामले में सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

‘पहलगाम हमले के दोषियों और साजिशकर्ताओं को देंगे कठोरतम जवाब’: ‘मन की बात’ में PM मोदी का ऐलान – पीड़ितों को मिलकर रहेगा न्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (27 अप्रैल, 2025) को ‘मन की बात’ के 121वें संस्करण के जरिए देश को संबोधित किया। पीएम मोदी ने अपने मन में गहरी पीड़ा होने की बात करते हुए कहा कि मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को पहलगाम में हुई आतंकी वारदात ने देश के हर नागरिक को दुख पहुँचाया है। पीड़ित परिवारों के प्रति हर भारतीय के मन में गहरी संवेदना है – भले वो किसी भी राज्य का हो, वो कोई भी भाषा बोलता हो, लेकिन वो उन लोगों के दर्द को महसूस कर रहा है, जिन्होंने इस हमले में अपने परिजनों को खोया है। बकौल पीएम मोदी, उन्हें एहसास है कि हर भारतीय का खून, आतंकी हमले की तस्वीरों को देखकर खौल रहा है।

‘पहलगाम के साजिशकर्ताओं को देंगे कठोरतम जवाब’: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पहलगाम में हुआ ये हमला, आतंक के सरपरस्तों की हताशा को दिखाता है, उनकी कायरता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब कश्मीर में शांति लौट रही थी, स्कूल-कॉलेजों में एक चहल-पहल थी, निर्माण कार्यों में अभूतपूर्व गति आई थी, लोकतंत्र मजबूत हो रहा था, पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो रही थी, लोगों की कमाई बढ़ रही थी, युवाओं के लिए नए अवसर तैयार हो रहे थे – देश के दुश्मनों को, जम्मू-कश्मीर के दुश्मनों को, ये रास नहीं आया। पीएम मोदी ने समझाया कि आतंकी और आतंक के आका चाहते हैं, कश्मीर फिर से तबाह हो जाए और इसलिए इतनी बड़ी साजिश को अंजाम दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में देश की एकता, 140 करोड़ भारतीयों की एकजुटता, हमारी सबसे बड़ी ताकत है और यही एकता, आतंकवाद के खिलाफ हमारी निर्णायक लड़ाई का आधार है। उन्होंने सन्देश दिया कि हमें देश के सामने आई इस चुनौती का सामना करने के लिए अपने संकल्पों को मजबूत करना है, हमें एक राष्ट्र के रूप में दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना है। बकौल पीएम मोदी, आज दुनिया देख रही है, इस आतंकी हमले के बाद पूरा देश एक स्वर में बोल रहा है।

‘मन की बात’ के 121वें संस्करण में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के हम लोगों में जो आक्रोश है, वो आक्रोश पूरी दुनिया में है। इस आतंकी हमले के बाद लगातार दुनिया-भर से संवेदनाएं आ रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उन्हें भी वैश्विक नेताओं ने फोन किए हैं, पत्र लिखे हैं, संदेश भेजे हैं। इस जघन्य तरीके से किए गए आतंकी हमले की सब ने कठोर निंदा की है। वैश्विक नेताओं ने मृतकों के परिवारजनों के प्रति संवेदनाएँ प्रकट की हैं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पूरा विश्व, आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई में, 140 करोड़ भारतीयों के साथ खड़ा है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को फिर से भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय मिलेगा, न्याय मिलकर रहेगा – इस हमले के दोषियों और साजिश रचने वालों को कठोरतम जवाब दिया जाएगा।

अंतरिक्ष क्षेत्र को नई दिशा देने वाले डॉ K कस्तूरीरंगन का निधन

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिन पहले देश के महान वैज्ञानिक डॉ K कस्तूरीरंगन के निधन का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी उनसे मुलाकात हुई, हम भारत के युवाओं की प्रतिभा, आधुनिक शिक्षा, अंतरिक्ष-विज्ञान ऐसे विषयों पर काफी चर्चा करते थे। विज्ञान, शिक्षा और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाई देने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उनके नेतृत्व में ISRO को एक नई पहचान मिली। पीएम मोदी ने कहा कि डॉ K कस्तूरीरंगन के मार्गदर्शन में जो अंतरिक्ष कार्यक्रम आगे बढ़े, उससे भारत के प्रयासों को वैश्विक मान्यता मिली।

उन्होंने कहा कि आज भारत जिन सैटेलाइट्स का उपयोग करता है, उनमें से कई डॉ कस्तूरीरंगन की देखरेख में ही लॉन्च की गई थी। उन्होंने दिवंगत वैज्ञानिक के व्यक्तित्व की ख़ास बात बताते हुए कहा कि इससे युवा-पीढ़ी उनसे सीख सकती है – उन्होंने हमेशा इनोवेशन को महत्व दिया, कुछ नया सीखने, जानने और नया करने का विजन बहुत प्रेरित करने वाला है। बकौल पीएम मोदी, डॉ के कस्तूरीरंगन जी ने देश की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि डॉ कस्तूरीरंगन 21वीं सदी की आधुनिक जरूरतों के मुताबिक Forward Looking Education का विचार लेकर आए थे, देश की नि:स्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। पीएम मोदी ने डॉ के कस्तूरीरंगन जी को विनम्र भाव से श्रद्धांजलि अर्पित की।

चंद्रयान, गगनयान, एक साथ 104 सैटेलाइट्स का लॉन्च: अंतरिक्ष में झंडे गाड़ता भारत

आगे बढ़ते हुए पीएम मोदी ने इसी महीने अप्रैल में आर्यभट्ट सैटेलाइट की लॉन्चिंग के 50 वर्ष पूरे होने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, 50 वर्षों की इस यात्रा को याद करते हैं – तो लगता है हमने कितनी लंबी दूरी तय की है। अंतरिक्ष में भारत के सपनों की ये उड़ान एक समय केवल हौसलों से शुरू हुई थी। पीएम ने ध्यान दिलाया कि राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा पाले कुछ युवा वैज्ञानिक – उनके पास न तो आज जैसे आधुनिक संसाधन थे, न ही दुनिया की तकनीक तक वैसी पहुँच थी – अगर कुछ था तो वो था, प्रतिभा, लगन, मेहनत और देश के लिए कुछ करने का जज्बा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि बैलगाड़ियों और साइकिलों पर संवेदनशील उपकरण को खुद लेकर जाते हमारे वैज्ञानिकों की तस्वीरों को हमने देखा है – उसी लगन और राष्ट्रसेवा की भावना का नतीजा है कि आज इतना कुछ बदल गया है। पीएम ने गर्व से कहा कि आज भारत एक ग्लोबल स्पेस पॉवर बन चुका है, हमने एक साथ 104 सैटेलाइट्स का लॉन्च करके रिकॉर्ड बनाया है।

उन्होंने आंतरिक के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाले पहले देश बने हैं, भारत ने मार्स ऑर्बिटर मिशन किया है और हम आदित्य – L1 Mission के जरिए सूरज के काफी करीब तक पहुँचे हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा कोस्ट इफेक्टिव लेकिन सफल स्पेस प्रोग्राम का नेतृत्व कर रहा है, दुनिया के कई देश अपनी सैटेलाइट्स और स्पेस मिशन के लिए ISRO की मदद लेते हैं।

देशवासियों की भावनाओं को व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम जब ISRO द्वारा किसी सैटेलाइट का लॉन्च देखते हैं तो हम गर्व से भर जाते हैं। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऐसी ही अनुभूति उन्हें तब हुई जब वो मैं 2014 में PSLV-C-23 की लॉन्चिंग के साक्षी बने थे। उन्होंने कहा कि 2019 में Chandrayaan-2 की लैंडिंग के दौरान भी, वो बेंगलुरू के ISRO सेंटर में मौजूद थे। हालाँकि, उन्होंने जिक्र किया कि कैसे उस समय ‘चंद्रयान’ को वो अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, तब वैज्ञानिकों के लिए, वो, बहुत मुश्किल घड़ी थी। लेकिन, उस दौरान वो अपनी आंखों से वैज्ञानिकों के धैर्य और कुछ कर गुजरने का जज्बा भी देख रहे थे। पीएम मोदी ने गर्व से याद किया कि कैसे इसके कुछ साल बाद ही पूरी दुनिया ने भी देखा कैसे उन्हीं वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 को सफल करके दिखाया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के जरिए देशवासियों को जानकारी दी कि अब भारत ने अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए भी खोल दिया है। आज बहुत से युवा स्पेस स्टार्टअप में नए झंडे लहरा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 10 साल पहले इस क्षेत्र में सिर्फ एक कंपनी थी, लेकिन आज देश में, सवा तीन सौ से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने घोषणा की कि आने वाला समय अंतरिक्ष में बहुत सारी नई संभावनाएँ लेकर आ रहा है और भारत नई ऊँचाइयों को छूने वाला है। उन्होंने जानकारी दी कि देश देश गगनयान, SpaDeX और चंद्रयान-4 जैसे कई अहम् मिशन की तैयारियों में जुटा है। साथ ही हम वीनस ऑर्बिटर मिशन और मार्स लैंडर मिशन पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिक अपने इनोवेशंस से देशवासियों को नए गर्व से भरने वाले हैं।

म्यांमार भूकंप के बाद भारत की मदद, मिला बौद्ध भिक्षुओं का आशीर्वाद

पीएम मोदी ने इसके बाद म्यांमार का जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पिछले महीने म्यांमार में आए भूकंप की खौफनाक तस्वीरें सबने देखी है। भूकंप से वहाँ बहुत बड़ी तबाही आई, मलबे में फँसे लोगों के लिए एक-एक साँस, एक-एक पल कीमती था। उन्होंने गर्व से कहा कि कैसे इसलिए भारत ने म्यांमार के हमारे भाई-बहनों के लिए तुरंत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया। वायुसेना के एयरक्राफ्ट्स से लेकर नौसेना के जहाज तक म्यांमार की मदद के लिए रवाना हो गए। वहाँ भारतीय टीम ने एक फिल्ड हॉस्पिटल तैयार किया। इंजीनियरों की एक टीम ने अहम इमारतों और संरचनाओं को हुए नुकसान का आकलन करने में मदद की। भारतीय टीम ने वहाँ कंबल, टेंट, स्लीपिंग बैग्स, दवाइयां, खाने-पीने के सामान के साथ ही और भी बहुत सारी चीजों की सप्लाई की। इस दौरान भारतीय टीम को वहाँ के लोगों से बहुत सारी तारीफ भी मिली।

पीएम मोदी ने बताया, “इस संकट में, साहस, धैर्य और सूझ-बूझ के कई दिल छू जाने वाले उदाहरण सामने आए। भारत की टीम ने 70 वर्ष से ज्यादा उम्र की एक बुजुर्ग महिला को बचाया जो मलबे में 18 घंटों से दबी हुई थी। जो लोग अभी TV पर ‘मन की बात’ देख रहे हैं, उन्हें उस बुजुर्ग महिला का चेहरा भी दिख रहा होगा। भारत से गई टीम ने उनके ऑक्सीजन लेवल को स्थिर करने से लेकर फ्रैक्चर के इलाज तक, इलाज की हर सुविधा उपलब्ध कराई। जब इस बुजुर्ग महिला को अस्पताल से छुट्टी मिली तो उन्होंने हमारी टीम का बहुत आभार जताया। वो बोली कि, भारतीय बचाव दल की वजह से उन्हें नया जीवन मिला है। बहुत से लोगों ने हमारी टीम को बताया कि उनकी वजह से वो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ढूँढ पाए।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि भूकंप के बाद म्यांमार में मांडले स्थित एक बौद्ध मठ में भी कई लोगों के फँसे होने की आशंका थी, हमारे साथियों ने यहाँ भी राहत और बचाव अभियान चलाया, इसकी वजह से उन्हें बौद्ध भिक्षुओं का ढ़ेर सारा आशीर्वाद मिला। पीएम मोदी ने कहा कि हमें ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों पर बहुत गर्व है, हमारी परंपरा है, हमारे संस्कार हैं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना – पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने बताया कि कैसे संकट के समय विश्व-मित्र के रूप में भारत की तत्परता और मानवता के लिए भारत की प्रतिबद्धता हमारी पहचान बन रही है।

इथियोपिया के बच्चों के इलाज का ख़र्च उठा रहा भारतीय समाज

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में बताया कि उन्हें इथियोपिया में प्रवासी भारतीयों के एक अभिनव प्रयास का पता चला है। इथियोपिया में रहने वाले भारतीयों ने ऐसे बच्चों को इलाज के लिए भारत भेजने की पहल की है जो जन्म से ही हृदय की बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत से बच्चों की भारतीय परिवारों द्वारा आर्थिक मदद भी की जा रही है, अगर किसी बच्चे का परिवार पैसे की वजह से भारत आने में असमर्थ है, तो इसका भी इंतजाम, हमारे भारतीय भाई-बहन कर रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, कोशिश ये है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे इथियोपिया के हर ज़रूरतमंद बच्चे को बेहतर इलाज मिले।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रवासी भारतीयों के इस नेक कार्य को इथियोपिया में भरपूर सराहना मिल रही है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे भारत में मेडिकल सुविधाएँ लगातार बेहतर हो रही हैं, इसका लाभ दूसरे देश के नागरिक भी उठा रहे हैं।

अफगानिस्तान और नेपाल को भी मदद भेज रहा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि कैसे कुछ ही दिन पहले भारत ने अफगानिस्तान के लोगों के लिए बड़ी मात्रा में वैक्सीन भी भेजी है। ये टीके रैबीज, टिटनेस, हेपटाइटिस B और इन्फ्लुएंजा जैसी खतरनाक बीमारियों से बचाव में काम आएगी।

इसके अलावा भारत ने इसी हफ्ते नेपाल के आग्रह पर वहाँ दवाइयाँ और वैक्सीन की बड़ी खेप भेजी है। इनसे थैलेसीमिया और सीकल सेल डिजीज के मरीजों को बेहतर इलाज सुनिश्चित होगा। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि जब भी मानवता की सेवा की बात आती है, तो भारत, हमेशा इसमें आगे रहता है और भविष्य में भी ऐसी हर जरूरत में हमेशा आगे रहेगा।

प्राकृतिक आपदाओं से हमें बचाने के लिए आ गया App – ‘सचेत’

आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रबंधन की बात की। उन्होंने आम लोगों को समझाया कि किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने में बहुत अहम होती है -आपकी सतर्कता, आपका सचेत रहना। इस सतर्कता में अब आपको अपने मोबाइल फोन के एक स्पेशल APP से मदद मिल सकती है। पीएम ने समझाया कि ये एप आपको किसी प्राकृतिक आपदा में फँसने से बचा सकते हैं और इसका नाम भी है ‘सचेत’।

‘सचेत’ एप, भारत की National Disaster Management Authority (NDMA) ने तैयार किया है। बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, सुनामी, जंगलों की आग, हिम-स्खलन, आँधी, तूफान या फिर बिजली गिरने जैसी आपदाएँ हो, ‘सचेत’ एप आपको हर प्रकार से सूचित और संरक्षित रखने का प्रयास करता है। पीएम ने बताया कि इस एप के माध्यम से आप मौसम विभाग से जुड़े अपडेट्स प्राप्त कर सकते हैं। खास बात ये है कि ‘सचेत’ एप क्षेत्रीय भाषाओं में भी कई सारी जानकारियाँ उपलब्ध कराता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस एप का फायदा उठाएँ और अपने अनुभव सरकार से ज़रूर साझा करें।

आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि आज हम पूरी दुनिया में भारत के प्रतिभा की तारीफ होते देखते हैं। भारत के युवाओं ने भारत के प्रति दुनिया का नज़रिया बदल दिया है, और, किसी भी देश के युवा की रुचि किस तरफ है, किधर है, उससे पता चलता है कि देश का भविष्य कैसा होगा। उन्होंने कहा कि आज भारत का युवा, विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे इलाके, जिनकी पहचान पहले पिछड़ेपन और दूसरे कारणों से होती थी, वहाँ भी युवाओं ने ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जो हमें, नया विश्वास देते हैं।

छत्तीसगढ़ में ‘साइंस सेंटर’, गुजरात में ‘साइंस गैलरी’

पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा का विज्ञान केंद्र आजकल सबका ध्यान खींच रहा है। कुछ समय पहले तक, दंतेवाड़ा का नाम केवल हिंसा और अशान्ति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब वहाँ, एक साइंस सेंटर बच्चों और उनके माता-पिता के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है। इस साइंस सेंटर में जाना बच्चों को खूब पसंद आ रहा है, वे अब नई–नई मशीनें बनाने से लेकर तकनीक का उपयोग करके नए उत्पाद बनाना सीख रहे हैं। उन्हें 3D प्रिंटर्स और रोबोटिक्स कारों के साथ ही दूसरी तनोवेटिव चीजों के बारे में जानने का मौका मिला है।

पीएम मोदी ने जानकारी दी कि अभी कुछ समय पहले उन्होंने गुजरात साइंस सिटी में भी साइंस गैलरीज का उद्घाटन किया था। उन्होंने जानकारी दी कि इन गैलरीज से ये झलक मिलती है कि आधुनिक विज्ञान का पोटेंशिक्षमतायल क्या है, विज्ञान हमारे लिए कितना कुछ कर सकता है। इन को लेकर वहाँ बच्चों में बहुत उत्साह है। बकौल पीएम मोदी, विज्ञान और नवाचार के प्रति ये बढ़ता आकर्षण, ज़रूर भारत को नई ऊँचाई पर ले जाएगा।

‘एक पेड़, माँ के नाम’ से अहमदाबाद लड़ रहा ग्लोबल वॉर्मिंग से

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हमारे 140 करोड़ नागरिक हैं, उनका सामर्थ्य है, उनकी इच्छा शक्ति हैं और जब करोड़ों लोग, एक-साथ किसी अभियान से जुड़ जाते हैं, तो उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि ये अभियान उस माँ के नाम है, जिसने हमें जन्म दिया और ये उस धरती माँ के लिए भी है, जो हमें अपनी गोद में धारण किए रहती है। उनको जानकारी दी कि 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर इस अभियान के एक साल पूरे हो रहे हैं।

पीएम ने जानकारी दी कि इस एक साल में इस अभियान के तहत देश-भर में माँ के नाम पर 140 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। भारत की इस पहल को देखते हुए, देश के बाहर भी लोगों ने अपनी माँ के नाम पर पेड़ लगाए हैं। पीएम ने जनता से अपील की कि आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें, ताकि एक साल पूरा होने पर, अपनी भागीदारी पर आप गर्व कर सकें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पेड़ों से शीतलता मिलती है, पेड़ों की छाँव में गर्मी से राहत मिलती है, ये हम सब जानते हैं। उन्होंने एक ख़बर बताई कि गुजरात के अहमदाबाद शहर में पिछले कुछ वर्षों में 70 लाख से ज्यादा पेड़ लगाए गए हैं। इन पेड़ों ने अहमदाबाद में हरित क्षेत्र को काफी बढ़ा दिया है। बकौल पीएम मोदी, इसके साथ–साथ, साबरमती नदी पर रिवरफ्रंट बनने से और कांकाँकरिया करिया झील जैसे कुछ झीलों के पुनर्निर्माण से यहाँ जलस्रोतों की संख्या भी बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में अहमदाबाद ग्लोबल वॉर्मिंग से लड़ाई लड़ने वाले प्रमुख शहरों में से एक हो गया है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव को, वातावरण में आई शीतलता को, वहाँ के लोग भी महसूस कर रहे हैं।

पीएम मोदी बोले, “अहमदाबाद में लगे पेड़ वहाँ नई ख़ुशहाली खुशहाली लाने की वजह बन रहे हैं | मेरा आप सबसे फिर आग्रह है कि धरती की सेहत ठीक रखने के लिए, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए, और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए, पेड़ ज़रूर लगाएँ – ‘एक पेड़ – माँ के नाम’।

कर्नाटक में सेब, तमिलनाडु-राजस्थान में लीची, हिमाचल-वायनाड में केसर

इसके बाद ‘जहाँ चाह-वहाँ राह’ कहावत को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम कुछ नया करने की ठान लेते हैं, तो मंजिल भी जरूर मिलती है। पीएम ने जनता से कहा कि आपने पहाड़ों में उगने वाले सेब तो खूब खाए होंगे, लेकिन, अगर वो पूछें कि क्या आपने कर्नाटक के सेब का स्वाद चखा है? तो आप हैरान हों जाएँगे।

पीएम मोदी ने बताया कि आमतौर पर हम समझते हैं कि सेब की पैदावार पहाड़ों में ही होती है, लेकिन कर्नाटक के बागलकोट में रहने वाले श्री शैल तेली जी ने मैदानों में सेब उगा दिया है। उनके कुलाली गाँव में 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान में भी सेब के पेड़ फल देने लगे हैं। दरअसल, श्री शैल तेली को खेती का शौक था तो उन्होंने सेब की खेती को भी आजमाने की कोशिश की और उन्हें इसमें सफलता भी मिल गई। आज उनके लगाए सेब के पेड़ों पर काफी मात्रा में सेब उगते हैं जिसे बेचने से उन्हें अच्छी कमाई भी हो रही है।

खेती-बाड़ी की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अब जब सेबों की चर्चा हो रही है, तो आपने किन्नौरी सेब का नाम जरूर सुन होगा। सेब के लिए मशहूर किन्नौर में केसर का उत्पादन होने लगा है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हिमाचल में केसर की खेती कम ही होती थी, लेकिन अब किन्नौर की खूबसूरत सांगला घाटी में भी केसर की खेती होने लगी, ऐसा ही एक उदाहरण केरला के वायनाड का है – यहाँ भी केसर उगाने में सफलता मिली है। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि वायनाड में ये केसर किसी खेत या मिट्टी में नहीं बल्कि Aeroponics तकनीक से उगाए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने एक और नई जानकारी दी कि कुछ ऐसा ही हैरत भरा काम लीची की पैदावार के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि हम तो सुनते आ रहे थे कि लीची बिहार, पश्चिम बंगाल या झारखंड में उगती है, लेकिन अब लीची का उत्पादन दक्षिण भारत और राजस्थान में भी हो रहा है। पीएम ने बताया कि कैसे तमिलनाडु के थिरु वीरा अरासु, कॉफी की खेती करते थे, कोडईकनाल में उन्होंने लीची के पेड़ लगाए और उनकी 7 साल की मेहनत के बाद अब उन पेड़ों पर फल आने लगे। लीची उगाने में मिली सफलता ने आसपास के दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया है। इसी तरह प्रधानमंत्री ने राजस्थान में जितेंद्र सिंह राणावत के बारे में बताया, जिन्हें लीची उगाने में सफलता मिली है। पीएम ने कहा कि ये सभी उदाहरण बहुत प्रेरित करने वाले हैं – अगर हम कुछ नया करने का इरादा कर लें, और मुश्किलों के बावजूद डटे रहें, तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।

चंपारण सत्याग्रह और ‘दांडी यात्रा’

अप्रैल के आखिरी रविवार के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कुछ ही दिनों में मई का महीना शुरू हो रहा है। पीएम मोदी इसके बाद जनता को 108 साल पूर्व लेकर गए। उन्होंने बताया कि साल 1917 अप्रैल और मई के यही दो महीने – देश में आजादी की एक अनोखी लड़ाई लड़ी जा रही थी, अंग्रेजों के अत्याचार उफान पर थे, गरीबों, वंचितों और किसानों का शोषण अमानवीय स्तर को भी पार कर चुका था, बिहार की उपजाऊ धरती पर ये अंग्रेज किसानों को नील की खेती के लिए मजबूर कर रहे थे।

पीएम मोदी ने कहा कि नील की खेती से किसानों के खेत बंजर हो रहे थे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत को इससे कोई मतलब नहीं था, ऐसे हालात में, 1917 में महात्मा गाँधी जी बिहार के चंपारण पहुँचे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों ने गाँधीजी को बताया – हमारी जमीन मर रही है, खाने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है। लाखों किसानों की उस पीड़ा से गांधी जी के मन में एक संकल्प उठा। वहीं से चंपारण का ऐतिहासिक सत्याग्रह शुरू हुआ। ‘चंपारण सत्याग्रह’ ये बापू द्वारा भारत में पहला बड़ा प्रयोग था।

पीएम मोदी ने इतिहास याद करते हुए कहा कि बापू के सत्याग्रह से पूरी अंग्रेज हुकूमत हिल गई। अंग्रेजों को नील की खेती के लिए किसानों को मजबूर करने वाले कानून को स्थगित करना पड़ा। ये एक ऐसी जीत थी जिसने आज़ादी की लड़ाई में नया विश्वास फूँका। पीएम ने कहा, “आप सब जानते होंगे कि इस सत्याग्रह में बड़ा योगदान बिहार के एक और सपूत का भी था, जो आज़ादी के बाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। वो महान विभूति थे – डॉ राजेन्द्र प्रसाद। उन्होंने ‘चंपारण सत्याग्रह’ पर एक किताब भी लिखी – ‘Satyagraha in Champaran’, ये किताब हर युवा को पढ़नी चाहिए। अप्रैल में ही स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के कई और अमिट अध्याय जुड़े हुए हैं। अप्रैल की 6 तारीख को ही गाँधी जी की ‘दांडी यात्रा’ संपन्न हुई थी। 12 मार्च से शुरू होकर 24 दिनों तक चली इस यात्रा ने अंग्रेजों को झकझोर कर रख दिया था। अप्रैल में ही जलियाँवाला बाग नरसंहार हुआ था। पंजाब की धरती पर इस रक्तरंजित इतिहास के निशान आज भी मौजूद हैं।

वीर कुँवर सिंह को श्रद्धांजलि, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वर्षगाँठ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि 10 मई को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वर्षगाँठ भी आने वाली है। आज़ादी की उस पहली लड़ाई में जो चिंगारी उठी थी, वो आगे चलकर लाखों सेनानियों के लिए मशाल बन गई। उन्होंने याद दिलाया कि अभी 26 अप्रैल को हमने 1857 की क्रांति के महान नायक बाबू वीर कुँवर सिंह जी की पुण्यतिथि भी मनाई है। बकौल पीएम मोदी, बिहार के महान सेनानी से पूरे देश को प्रेरणा मिलती है और हमें ऐसे ही लाखों स्वतंत्राता सेनानियों की अमर प्रेरणाओं को जीवित रखना है। हमें उनसे जो ऊर्जा मिलती है, वो अमृतकाल के हमारे संकल्पों को नई मजबूती देती है।

पीएम ने अपने रेडियो कार्यक्रम की बात करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ की इस लंबी यात्रा में आपने इस कार्यक्रम के साथ एक आत्मीय रिश्ता बना लिया है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि देशवासी जो उपलब्धियाँ दूसरों से साझा करना चाहते हैं उसे ‘मन की बात’ के माध्यम से लोगों तक पहुँचाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले महीने हम फिर मिलकर देश की विविधताओं, गौरवशाली परंपराओं और नई उपलब्धियों की बात करेंगे। प्रधानमंत्री ने बताया कि हम ऐसे लोगों के बारे में जानेंगे जो अपने समर्पण और सेवा भावना से समाज में बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने जनता से हमेशा की तरह अपने विचार और सुझाव भेजते रहने की अपील की।

1962 में खत्म हो गई लीज, फिर भी किराएदार खाली नहीं कर रहा था… 63 साल चला केस, अब सुप्रीम कोर्ट ने मकान मालिक की ‘जरूरत’ समझ बेदखली का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 6 दशक से फँसे से एक मामले को हाल ही में निस्तारित किया है। यह मामला किराएदार और मकान मालिक के विवाद से जुड़ा हुआ था। पिछले 63 वर्षों में इस मामले में दोनों पक्ष न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे थे। 24 अप्रैल, 2025 को जाकर इसका अंतिम फैसला हो पाया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस MM सुंदरेश और जस्टिस KV विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले में किराएदार के दावे को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में किराएदार को सम्पत्ति से बेदखल किए जाने का आदेश दिया है। किराएदार को हटाने की अनुमति मकान मालिक को मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला इसी मामले में 1983 में दिए गए एक निचले अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मकान मालिक को वास्तव में अपने दिव्यांग और बेरोजगार बेटे के लिए अपनी इस सम्पत्ति की आवश्यकता थी। कोर्ट ने यह भी पाया कि उनके पास और कोई भी सम्पत्ति नहीं थी जिससे वह भरण-पोषण कर सकें।

मकान मालिक को राहत देते हुए कोर्ट ने कहा कि बेदखली केवल मकान मालिक की जरूरत के आधार पर ही नहीं बल्कि मकान मालिक के परिवार की आवश्यकता के आधार पर भी किराएदार को बेदखल किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह अच्छी तरह से स्थापित हो चुका है कि मकान मालिक को अधिकार दिलाने के लिए जरूरत को समझा जाए और इसी तरह परिवार के सदस्यों की आवश्यकता को इसमें भी कवर किया जाएगा।”

इस मामले में किराएदार लगातार बेदखली का विरोध कर रहा था। उसने दावा किया कि उससे अगर सम्पत्ति खाली करवाए जाने से उसे कठिनाई होगी। हालाँकि, कोर्ट के सामने किराएदार ने यह साबित नहीं किया कि उसने इन 6 दशक के समय में कोई नया ठिकाना तलाशा है या वह ऐसा करने में विफल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इस मामले में, ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं है जो यह दर्शाता हो कि यहाँ 73 वर्षों से रहने वाला किराएदार, जिसमें से 63 वर्ष लीज की समाप्ति के बाद भी पूरे हो चुके हैं, उसने कोई वैकल्पिक आवास पाने का कोई प्रयास किया है और ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया है जिससे यह पता चले कि वह इसे पाने में असमर्थ था।”

क्या था मामला?

यह फैसला 13 अक्टूबर, 1952 को हुई एक लीज को लेकर हुआ है। यह लीज 1952 में इस मकान के पहले मालिक द्वारा की गई थी। इसकी लीज 1962 में खत्म हो गई। इस बीच इस सम्पत्ति को वर्तमान मालिक ने खरीद लिया। लेकिन पट्टा खत्म होने के बावजूद किराएदार ने सम्पत्ति नहीं खाली की।

मकान मालिक ने इस संबंध में कानूनी कार्रवाई भी चालू की। उसने उत्तर प्रदेश के कानूनों के अनुसार, अपनी जरूरत भी बताई। 20 दिसंबर, 1983 को उसे इस मामले में सफलता मिली और किराएदार को मकान खाली करने का आदेश भी दिया गया ।

इस निर्णय को अपील अदालत ने पलट दिया और किराएदार को राहत दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने भी किराएदार के हक़ में फैसला दिया। इसके चलते यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने शुरूआती फैसला बरकरार रखा और मकान मालिक को वापस उसका कब्जा देने का आदेश दिया।

माँ-बाप ने नाम रखा ‘श्रेष्ठा’, पर निकली ‘कुल कलंकिनी’: पहलगाम अटैक को बताया ‘पॉलिटिकल प्लान’, कहा- मुस्लिम आतंकियों की फोटो फर्जी, सरकार जिम्मेदार

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरा देश गुस्से में हैं। सरकार और विपक्ष, दोनों ही इस मामले में कड़े एक्शन को लेकर बात कर रहे हैं। इस बीच एक इंस्टाग्राम इनफ्लुएंसर इस हमले को ‘राजनीतिक योजना’ और भारत सरकार की प्लानिंग बता रही हैं। वह लगातार पाकिस्तान के बचाव में वीडियो, स्टेटस स्टोरी और पोस्ट कर रही है। जब लोगों ने उसे टोका तो वह कुतर्कों पर भी उतर आई है। इस इन्फ्लुएंसर का नाम श्रेष्ठा झा है।

श्रेष्ठा झा के इंस्टाग्राम पर 1 लाख 10 हजार फॉलोअर हैं। वह अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दुनिया-जहान का ज्ञान देती है। उसने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद एक वीडियो पोस्ट की, जिसमे उसने दावा किया कि इस हमले में मुस्लिम-हिन्दू वाला कोई एंगल नहीं है। उसने आतंकियों के हिन्दू नाम पूछ कर मारने की घटना को झुठलाने की कोशिश की और कहा कि इससे नफरत फैलती है। उसने दावा किया कि भारत के पड़ोसी अफगानिस्तान और पाकिस्तान हैं, इसलिए यहाँ आने वाले लोग मुस्लिम ही होंगे।

इसके बाद श्रेष्ठा झा को जब लोगों ने इस बात के सबूत दिखाए तो भी वह नहीं मानी। श्रेष्ठा झा ने कहा कि मुस्लिम आतंकियों को लेकर कोई भी प्रश्न ना पूछा जाए और अब पूरा फोकस सरकार के ऊपर रखा जाए। उसने इस दौरान और भी कई आपत्तिजनक बातें भी कही। लोगों के जवाब को लेकर भी उसने कई बार विक्टिम कार्ड खेला। इसके बाद उसने एक और वीडियो में स्थानीय कश्मीरी लोगों को लेकर बात की और उनका कोई भी रोल होने से एकदम इनकार कर दिया।

इस वीडियो में श्रेष्ठा झा ने दावा कर दिया कि हमले के बाद जिन इस्लामी आतंकियों की फोटो घुमाई जा रही है वो फर्जी हैं और उन्होंने हमला किया ही नहीं था। श्रेष्ठा झा लगातार लोगों के जवाब देने और स्पष्ट सबूत दिखाने के बाद भी नहीं मानी। उसने अपना यही प्रलाप जारी रखा। यहाँ तक कि उसने अपनी एक और वीडियो में दावा कर दिया कि यह सब सरकार के शह पर हुआ है। उसने इस वीडियो में एक पाकिस्तानी का फर्जी वीडियो भी डाला, जिसमे वह खुद के भारतीय सैनिक होने का दावा कर रहा था। बाद में उसने अपनी रील से यह क्लिप हटा दी।

उसकी यह सारी करतूतें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। श्रेष्ठा झा यहीं तक नहीं रुकी बल्कि उसने अपनी सोशल मीडिया स्टोरी में पहलगाम के आतंकी हमले के लिए सीधे तौर पर मोदी सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया। इसके स्क्रीनशॉट अब वायरल हो रहे हैं। उसने दावा किया कि यह सारी बातें बाद में सामने आएँगी लेकिन तब तक देर हो चुकी होगी। श्रेष्ठा झा ने कहा कि पहलगाम हमला पूरा राजनीतिक प्लान है।

अब उसके खिलाफ सोशल मीडिया पर कार्रवाई की माँग चल रही है। उसका अकाउंट बैन करने और उसके फर्जी दावों को लेकर कार्रवाई करने की बात भी कही जा रही है। उसकी सारी करतूतें सामने आने के बाद भी वह माफ़ी माँगने के बजाय लोगों को ही दोषी ठहरा रही है। उसे उसके इनबॉक्स में कथित तौर पर कुछ लोगों ने धमकियाँ दी हैं, जिन्हें वह पोस्ट कर रही है। हालाँकि, उसने अपने कृत्यों को लेकर ना ही कोई माफ़ी माँगी है और ना पुराने वीडियो हटाए हैं। उसका यह रवैया तब है जब इस हमले में हिन्दू चुन-चुन कर मारे गए हैं।

‘बाढ़ आ जाएगी, अपने ही लोग मरेंगे’: सिंधु जल समझौता निलंबित होने से नाराज़ हुए रवीश कुमार, बोले – पानी रोकना प्रकृति तय करेगी या मोदी के मंत्री?

पत्रकार से यूट्यूबर बने रवीश कुमार अब पाकिस्तान के लिए ‘हथियार’ बन रहे हैं। पहलगाम में हुए इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया, अब रवीश कुमार ने भारत द्वारा पाकिस्तान के लिए पानी रोके जाने का मजाक उड़ाया है। रवीश कुमार ने कहा कि क्या ये संभव है कि आप बाँध बनाकर सतलुज और व्यास जैसी नदियों के पानी को रोका जा सके। उन्होंने जल शक्ति मंत्री द्वारा पाकिस्तान को एक बूँद पानी न देने वाले बयान पर भी तंज कसा।

रवीश कुमार ने बेशर्मी से पूछा कि 6 नदियों का पानी रोकना कौन तय करेगा, प्रकृति या मोदी के मंत्री? वो इतने पर ही नहीं रुके, बल्कि ‘पानी नहीं देंगे’ और ‘प्यासा मार देंगे’ जैसे सोशल मीडिया में चल रहे संदेशों पर तंज कसते हुए वो यहाँ तक कह गए कि भाजपा को पानी के रूप में एक नया हथियार मिल गया है। रवीश कुमार ने कहा कि भाजपा लोगों में जोश भरने के लिए ऐसा कह रही है। उन्होंने कहा कि हाउसिंग सोसाइटी के अंकल नहाना -धोना छोड़कर ये सब होता हुआ देखने के लिए टीवी के सामने बैठ जाएँगे।

रवीश कुमार ने आतंकियों को पोषित करने वाले पाकिस्तान की आलोचना करने वाले यूट्यूब चैनलों को ‘गोदी मीडिया’ बताया और कहा कि उनका थंबनेल देखकर लगता है कि इस देश के लोगों ने भले नदियों को अनंतकाल से देखा-पढ़ा सुना है, लेकिन संपादकों-एंकरों-पत्रकारों ने न तो उन नदियों के बारे में कुछ देखा है न पढ़ा है। बता दें कि पाकिस्तानी हैंडल्स पहले से ही नेहा सिंह राठौड़ का वीडियो शेयर करके भारत पर पहलगाम में आतंकी हमला करने का झूठा आरोप लगा रहे हैं। अब उन्हें रवीश कुमार का वीडियो मिल गया।

रवीश कुमार ने 2016 में सिंधु जल समझौते के लिए बने टास्क फ़ोर्स का भी मजाक बनाया। पूरे वीडियो में रवीश कुमार ने एक बार भी नहीं बताया कि इस हमले में हिन्दुओं को निशाना बनाया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ’56 इंच’ वाले कटाक्ष का इस्तेमाल किया और कहा कि पाकिस्तान को पानी न देने से भारत में बाढ़ आ जाएगी और अपने ही लोग मरेंगे। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा का बयान भी चलाया। हो सकता है अब पाकिस्तान भी रवीश कुमार का वीडियो शेयर करे।

‘ये लोग लंबे समय से रह रहे’: केंद्र की डेडलाइन के बावजूद पाकिस्तानियों को वापस नहीं भेजेगा केरल, यूपी में एक-एक को निकाल बाहर करने का अभियान हुआ पूरा

केरल पुलिस ने तीन पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का दिया गया नोटिस वापस ले लिया है। उन्हें पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत से वापस पाकिस्तान जाने को कहा गया था। पुलिस ने इसके पीछे उनका लम्बे समय से भारत में रहना बताया है। वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस ने बताया है कि राज्य में 1 को छोड़ कर सारे पाकिस्तानी वापस भेजे जा चुके हैं। हरियाणा में भी 400+ पाकिस्तानियों को वापस भेजने की प्रक्रिया चालू हो गई है।

केरल पुलिस ने वापस लिया नोटिस

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल पुलिस ने विदेश मंत्रालय के पाकिस्तानियों के वीजा रद्द करने के आदेश के बाद कोझिकोड जिले में रहने वाले 3 पाकिस्तानियों को नोटिस जारी किया था। इनमें एक पुरुष जबकि 2 महिलाएँ हैं। इन तीनों के नाम पुथनपुरावलप्पिल हम्सा, खमरुन्निसा और अस्मा हैं।

इन्हें शुक्रवार (25 अप्रैल, 2025) और शनिवार को नोटिस दिया गया था। इनसे 27 अप्रैल तक भारत छोड़ कर वापस पाकिस्तान चले जाने को कहा गया था। हालाँकि, यह नोटिस शनिवार रात वापस ले लिया गया। केरल पुलिस के एक अफसर ने बताया कि यह तीनों लम्बे समय से रह रहे हैं।

केरल पुलिस ने कहा कि उन्होंने उन लोगों के नोटिस वापस लेने का फैसला लिया है जिन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर दिया है या फिर लम्बी अवधि के वीजा के लिए भारत के भीतर हैं। केरल के मामले में तीनों ही ऐसी ही प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

कोझिकोड में नोटिस पाने वाले पुथनपुरावलप्पिल हम्सा ने बताया है कि वह ‘चाय बेचने’ के लिए पाकिस्तान चले गए थे और 2007 में लौटे। तब से वह वीजा के आधार पर भारत में रह रहे हैं। हालाँकि, उनका वीजा भी खत्म हो गया था जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में मामला दायर किया था। कोर्ट ने उन्हें भारत में रहने की इजाजत दे दी थी।

वहीं बाकी 2 महिलाएँ आपस में बहनें हैं और उनके पिता कराची में व्यापार करते थे। यह दोनों 1992 में पाकिस्तान से भारत आई थीं। तब से यह भारत में ही रह रही हैं। यह भी भारतीय नागरिकता के लिए प्रयास कर रही हैं। इन तीनों को अब 27 अप्रैल तक भारत नहीं छोड़ना होगा।

उत्तर प्रदेश से सारे पाकिस्तानी भेजे गए वापस

विदेश मंत्रालय के निर्णय के बाद उत्तर प्रदेश से सारे पाकिस्तानी वापस भेज दिए गए हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार ने दी है। उन्होंने कहा है कि 1 पाकिस्तानी नागरिक अभी प्रदेश में बचा है, उसे 30 अप्रैल, 2025 को वापस भेज दिया जाएगा।

डीजीपी प्रशांत कुमार ने जानकारी दी है कि पाकिस्तान वापस भेजे जाने वाले यह सभी लोग छोटी अवधि के लिए दिए गए वीजा पर भारत आए थे। इनमें से उत्तर प्रदेश के जिलों में अपनी रिश्तेदारियों में आए थे। पुलिस ने उनकी पहचान कर उन्हें वापस भेजा है।

उत्तर प्रदेश में उन लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई है, जो लम्बी अवधि के लिए दिए गए वीजा पर हैं। ऐसे अधिकांश लोग शरणार्थी हिन्दू हैं। बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 1000 लोग ऐसे लम्बी अवधि के वीजा पर रह रहे हैं।

हरियाणा में भी तेज हुई कार्रवाई

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी राज्य के गृह विभाग से पाकिस्तानियों पर कार्रवाई तेज करने को कहा है। बताया गया है कि हरियाणा में वर्तमान में 450 से अधिक पाकिस्तानी रह रहे हैं। CM सैनी ने कहा है कि कोई भी पाकिस्तानी राज्य में नहीं रहना चाहिए। CM सैनी ने पाकिस्तानियों को 24 घंटे का समय भी दिया है। उन्होंने यह कार्रवाई 27 अप्रैल तक पूरी करने को कहा है। राज्य में कई हिन्दू शरणार्थी परिवार भी हैं।

गौरतलब है कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सभी पाकिस्तानियों को दिए गए वीजा रद्द करने का फैसला लिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि लम्बी अवधि वाले वीजा छोड़ कर बाकी सभी पाकिस्तानी 27 अप्रैल तक अपने मुल्क वापस चले जाएँ।