पाकिस्तान ने माना है कि ऑपरेशन सिंदूर में उसके 26 लोग मारे गए हैं और 40 से ज्यादा घायल हैं। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत को ‘भारी कीमत चुकाने’ की धमकी दी है। शहबाज शरीफ ने कहा “भारत ने जो गलती पिछली रात (7 मई) की, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी” पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत की सेना सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की थी लेकिन उसे कुछ ही घंटों के भीतर खदेड़ दिया गया।
पाकिस्तान का बड़बोलापन
पाकिस्तानी पीएम के बड़बोलेपन को मात देते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने और भी ज्यादा बड़ा दावा कर दिया। उनका कहना है कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच गतिरोध ज्यादा लंबा चला तो परमाणु युद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान न्यूज चैनल जियो न्यूज को दिये एक साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान सिर्फ भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।
पाकिस्तान ने फैलाई अफवाह
इस बीच पाकिस्तान ने 8 मई को फिर गुजरांवाला में ड्रोन अटैक की अफवाह फैलाई है। पाकिस्तान के अधिकारी ने एक और झूठ बोलते हुए कहा है कि एक दिन पहले यानी 7 मई को फाइटर से जंग हुई थी यानी पाकिस्तानी सेना ने भारत का मुकाबला किया। जबकि भारत ने जो अटैक पाकिस्तान स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर किया उस पर पाकिस्तानी फौज सकते में आ गई और कुछ नहीं कर पाई।
Amritsar resumes blackout as part of nationwide civil defence drill; DPRO urges residents not to panic
इस बीच भारत में पाक से लगे सीमा क्षेत्रों पर अलर्ट जारी है। बुधवार देर रात पंजाब के अमृतसर, जालंधर, लुधियाना जैसे शहरों में ब्लैक आउट हुआ। अमृतसर में तीन धमाके सुनाई दिए और फिर ब्लैक आउट हो गया। यहाँ लोगों को घरों में ही रहने के आदेश दिए गये हैं। एयरपोर्ट खाली करा दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक अमृतसर में रात करीब 2 बजे धमाके सुनाई दिए जिसके बाद ब्लैक आउट हो गया। प्रशासन ने लोगों को संयम बरतने की अपील की है। 7 मई को भी पंजाब के गुरदासपुर में धमाके हुए थे और लोग डर के कारण घरों में दुबक गए थे। ये धमाका खेत में हुआ था।
मई 2019 में एक कोरियन फ़िल्म आई थी, जिसका अंग्रेजी शीर्षक था – ‘पैरासाइट’। जिन्होंने प्राथमिक स्तर की भी शिक्षा ली है, वो Parasite का अर्थ जानते हैं। ऐसे जीवाणु जो किसी अन्य जीव के शरीर में रहते हैं और उसी शरीर से न्यूट्रिएंट्स ग्रहण कर उसे नुकसान पहुँचाते हैं, वो होते हैं पैरासाइट्स – रोगाणु या विषाणु। मानव शरीर में रहकर दाना-पानी पाते हैं, फिर उसे रोगी बना देते हैं। हिंदी में एक कहावत भी है – जिस थाली में खाना, उसी थाली में छेद करना। ये सब गद्दारी के लक्षण हैं।
‘पैरासाइट’ फ़िल्म, पहलगाम आतंकी हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’
92वें एकेडमी अवॉर्ड्स समरोह के दौरान ‘पैरासाइट्स’ को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का ऑस्कर पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। फ़िल्म की कहानी एक ऐसे युवक की है, जो एक अमीर परिवार में नौकरी करने के लिए हायर किया जाता है। बाद में उसके पिता, माँ और बहन सभी उस परिवार में किसी न किसी रूप में नौकरी कर रहे होते हैं। किम इंग्लिश ट्यूटर, उसकी बहन आर्ट थेरेपिस्ट, इनके पिता ड्राइवर और इनकी माँ हाउसकीपर बनकर उस परिवार में नौकरी कर रहे होते हैं। चारों एक-दूसरे को न जानने का दिखावा भी करते हैं।
खैर, ये तो थी फिल्म की कहानी। अब आते हैं वास्तविकता पर। 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने 26 पर्यटकों को निशाना बनाया। धर्म पूछ-पूछकर हिन्दुओं को मारा गया। पैंट खोल-खोलकर चेक किया गया कि खतना हुआ है या नहीं। घटना के 13 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के 9 ठिकानों पर हमला कर आतंकियों को नेस्तनाबूत किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत उन महिलाओं के सिंदूर उजाड़ने का बदला लिया गया, जिनके पतियों को मारने के बाद आतंकियों ने कहा था – “मोदी को जाकर बता देना।”
भारत ने किसी भी नागरिक ठिकानों रिहायशी इलाक़ों को निशाना नहीं बनाया, केवल उन्हीं आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया जिन्होंने 2001 में दिल्ली के संसद भवन से लेकर 2016 में पठानकोट, 2019 में पुलवामा और 2025 में पहलगाम को दहलाया। मौलाना मसूद अज़हर के परिवार के 14 लोग मारे गए। इसी मसूद अज़हर को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने 1999 में एक पूरा का पूरा विमान हाईजैक कर लिया था। इस तरह की कार्रवाई से कोई भारतीय ख़ुश ही होगा।
लेकिन, कुछ ऐसे लोग हैं जो इससे दुःखी हैं। कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तंज कसने के अंदाज़ में पूछा कि क्या चुन-चुनकर आतंकियों को निशाना बनाया गया है। इसी तरह कॉन्ग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने दावा कर दिया कि इससे पहले जो सर्जिकल व एयर स्ट्राइक्स हुई थीं उनसे भारत की दुनिया भर में खिल्ली उड़ी, केवल चील-कौवे ही मरे। जब कॉन्ग्रेस नेता मीडिया के सामने आए तो उनके चेहरे उतरे हुए थे। इन सबसे पता चलता है कि भारत को बाहर के दुश्मनों की आवश्यकता नहीं है, दिवंगत जनरल विपिन रावत ने ठीक कहा था कि देश ढाई मोर्चे पर लड़ रहा है (पाकिस्तान, चीन और आधा मोर्चा देश के भीतर)।
मंदाना करीमी: भारत ने दी पहचान और कमाई
अब हम आपको ऐसी ही एक ‘पैरासाइट’ के बारे में बताने जा रहे हैं। ईरान मूल की एक अभिनेत्री व मॉडल हैं – मंदाना करीमी। 2015 में फिल्म ‘भाग जॉनी’ और रियलिटी शो ‘बिग बॉस 9’ से सुर्ख़ियों में आईं मंदाना करीमी तेहरान में पली-बढ़ी हैं, एयर होस्टेस से लेकर उन्होंने यहाँ तक का सफर तय किया है। 2018 में ‘इशकबाज’ के जरिए उन्हें छोटे पर्दे के दर्शकों ने जाना और 2022 में कंगना रनौत के शो ‘लॉक अप’ से डिजिटल की दुनिया ने उन्हें देखा। यानी, मंदाना करीमी भारतीय मनोरंजन की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम बन गईं।
स्पष्ट है, मंदना करीमी ने भारत के दर्शकों से कमाई की। वरना, आज भी वो एक एयर होस्टेस ही होतीं, सेलेब्रिटी नहीं। 2017 में उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड गौरव गुप्ता के साथ हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह किया। ये भी ख़बर आई कि उन्होंने इस्लाम मजहब छोड़कर हिन्दू धर्म अपना लिया है। उसी साल अचानक से इन दोनों का रिश्ता बिगड़ गया और उन्होंने अपने पति के विरुद्ध घरेलू हिंसा का केस कर दिया। बाद में उन्होंने सेटलमेंट के लिए मामला वापस ले लिया। फिर 2022 में दोनों का तलाक़ हो गया।
ऐसा लगता है, तलाक़ के साथ ही मंदाना करीमी ने वापस इस्लामी कट्टरपंथी सोच को अपना लिया है और भारत से घृणा करने लगी हैं। या फिर हो सकता है कि भारत में अब काम न मिलने की वजह से वो वापस भागकर ईरान में काम चाह रही होंगी, वो ईरान जहाँ और मुल्ला का शासन है, जहाँ सुप्रीम लीडर मौलवी होता है। ऐसा सुप्रीम लीडर जो महिलाओं की आज़ादी का विरोधी है। जहाँ हिजाब न पहनने पर महासा अमीनी नामक महिला को मार डाला जाता है, लाखों महिलाएँ सड़क पर उतरती हैं फिर भी इस्लामी मुल्क़ अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को नहीं छोड़ता।
पाकिस्तान का एजेंडा चलातीं मंदाना करीमी
अब ईरान के मुल्लाओं को ख़ुश करने और वहाँ काम के लिए भारत को गाली देने का उपक्रम शुरू कर पड़ेगा न। तो मंदाना करीमी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक स्टोरी साझा किया। इस स्टोरी में उन्होंने न्यूयॉर्क की कट्टर इस्लामी लेखिका हेब जमाल का एक पोस्ट साझा किया। सवाल ये है कि उस पोस्ट में क्या था, तो आइए बताते हैं। उस पोस्ट में लिखा था कि दुनिया जल रही है और भारत ने पाकिस्तान में बमबारी करके महिलाओं-बच्चों की जान ले ली है।
उस पोस्ट में आगे लिखा है, “इज़रायल ने खान यूनिस में एक पूरे परिवार को मार डाला। अमेरिका ने यमन पर हमला कर आम नागरिकों को निशाना बनाया। ये सारी हत्याएँ उन सामूहिक विनाशकारी शक्तियों की देन हैं जिन्होंने एक-दूसरे से यह सीख लिया है कि अगर तुम शक्तिशाली हो तो युद्ध अपराध करके भी बच सकते हो — क्योंकि दुनिया चुप्पी साध लेती है। चाहे वो ज़ायोनिज़्म हो, हिंदुत्वा फ़ासीवाद हो या अमेरिकी श्रेष्ठतावाद — सभी रूपों में साम्राज्यवाद फैलता जा रहा है और जो भी उसके रास्ते में आता है, उसे खाक कर देता है।”
मंदाना करीमी की इंस्टाग्राम स्टोरी, भारत विरोधी प्रपंच
यानी, जिस मंदाना करीमी ने कुछ वर्षों पहले ही हिन्दू धर्म अपनाया था और हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह किया था, उनके लिए अब हिन्दू धर्म फासीवाद और साम्राज्यवाद हो गया है। उनके लिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया जाना महिलाओं-बच्चों को निशाना बनाए जाने के समान है। ये वो मंदाना करीमी कह रही हैं, जिन्हें 6 फ़िल्में, 3 रियलिटी शो, एक सीरियल और एक वेब सीरीज मिली। जिन्हें यहाँ के बड़े अभिनेताओं के साथ विज्ञापन मिला, जिन्हें मॉडलिंग के कई बड़े काम भी इसी भारत में मिले।
क्या मंदाना करीमी को ये नहीं दिखाई दिया कि कैसे पाकिस्तान ने भारत के गुरुद्वारों को निशाना बनाया है? कैसे बच्चों की जान ले ली गई। उन बच्चों की लाशों की तस्वीरें सोशल मीडिया में तैर रही हैं। इसका बदला लेने के लिए भारत फिर कुछ आतंकियों को मरेगा तो मंदाना करीमी जैसों का फिर से पोस्ट आ जाएगा। 15 से अधिक लोग सीमा पार से हुई गोलीबारी में मारे गए हैं, सरे मासूम नागरिक हैं। पहलगाम में जो 26 मारे गए, सब हमारे निर्दोष लोग थे। मंदाना करीमी को तब समस्या नहीं हुई। अब हो रही है।
बॉलीवुड नहीं बन पाया भारत का ‘सॉफ्ट पॉवर’
आज जब वही मंदाना करीमी पाकिस्तान के विरोधी में दुश्मन मुल्क़ पाकिस्तान का एजेंडा चलाती हैं तो अनायास ही ‘पैरासाइट’ फिल्म की याद आ ही जाती है। वैसे भी जिस बॉलीवुड को भारत का ‘सॉफ्ट पॉवर’ होना चाहिए था, हमेशा से उसका पूरा ज़ोर भारत के दुश्मनों को ख़ुश करने में ही रहा। फराह खान द्वारा निर्देशित और शाहरुख़ खान अभिनीत ‘मैं हूँ ना’ (2004) में दिखाया गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच समस्या का एक ही कारण है – एक ‘हिन्दू आतंकवादी’। अगर ये एक किरदार हट जाए तो सब ठीक हो जाएगा, दुनिया ठीक से चलने लगेगी।
अमेरिका ने किस तरह से हॉलीवुड के जरिए देश-दुनिया में अपने एजेंडे का प्रयास किया, किस तरह शीत युद्ध के ज़माने में सोवियत रूस ने हॉलीवुड फिल्मों को बैन कर दिया – उससे पता चलता है कि बॉलीवुड इन सब मामलों में पीछे रहा। हालाँकि, थोड़ा बदलाव आया है और अब वही बॉलीवुड हमारे ऐतिहासिक नायकों पर ‘छावा’ जैसी फ़िल्में बना रहा है, कश्मीरी पंडितों का नरसंहार दिखा रहा है और सर्जिकल स्ट्राइक पर फिल्म बना रहा है। पहले ऐसा नहीं था। मंदाना करीमी बॉलीवुड की उसी पौध का DNA धारण करती हैं और ये उनकी मानसिकता में दिखाई दे रहा है।
अंत में, ये भी जान लीजिए कि केवल राजनीति या मनोरंजन की इंडस्ट्री में ही ऐसे ‘पैरासाइट’ नहीं हैं। पत्रकारिता की दुनिया में भी कई ऐसे हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। आरफा खानम शेरवानी को ही ले लीजिए, जिन्होंने ‘The Wire’ पर पाकिस्तान का एजेंडा चलाते हुए कहा कि भारत ने आम नागरिकों को मारा है। मंदाना करीमी भी यही कह रही हैं। अब समय आ गया है जब ऐसे-ऐसों को दाना-पानी देना बंद होना चाहिए, पैरासाइट हटाने वाले एंटीबायोटिक्स का इंतजाम किया जाना चाहिए।
भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का करारा जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। इस कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बात की और भारत की नपी-तुली कार्रवाई का स्पष्ट संदेश दिया। डोभाल ने कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर पाकिस्तान ने कोई हिमाकत की, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा।
डोभाल ने चीन के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सऊदी अरब, यूएई, रूस और फ्रांस के अपने समकक्षों से भी बात की। उन्होंने अमेरिकी NSA मार्को रुबियो को बताया कि भारत ने केवल आतंकी शिविरों को निशाना बनाया, किसी पाकिस्तानी नागरिक या सैन्य ठिकाने को नहीं। भारत ने साफ किया कि उसका इरादा तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि भविष्य के हमलों को रोकना है। डोभाल ने इन देशों को पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे के खिलाफ मिसाइल हमलों के बारे में जानकारी दी।
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने मुजफ्फराबाद, कोटली, बहावलपुर जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जो लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के भर्ती केंद्र, प्रशिक्षण शिविर और हथियार डिपो थे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि यह कार्रवाई विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित थी, जिसने भारत के खिलाफ और हमलों की साजिश का खुलासा किया था। मिस्री ने कहा, “हमारी कार्रवाई सटीक, जिम्मेदार और गैर-उग्रवादी थी। इसका मकसद आतंकी ढांचे को ध्वस्त करना था, न कि युद्ध को बढ़ावा देना।”
चीन ने इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को संयम बरतने की सलाह दी। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और पाकिस्तान पड़ोसी हैं और उन्हें शांति से मसले सुलझाने चाहिए। यह पहली बार है जब चीन ने इस तरह की स्थिति में पाकिस्तान को खुलकर समर्थन देने से परहेज किया।
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ मंगलवार (6 मई, 2025) की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया। भारतीय सेना ने 9 हमलों में कई आतंकी ठिकानों को मिसाइल से अटैक कर तबाह कर दिया। ये 13 दिन पहले जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का बदला था, जिसमें महिलाओं के सिंदूर उजाड़े गए थे। पत्नियों के सामने उनके पति को गोली से मार डाला था।
इसके जवाब में भारत ने दुश्मनों को एक चुटकी सिंदूर की कीमत समझा दी है। अब कोई भी इस सिंदूर पर आँच डालने से पहले सौ बार सोचेगा। आतंकियों के खिलाफ इस हमले को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम देने के पीछे भी कारण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नाम का सुझाव दिया था। क्योंकि, पीएम जानते थे उन महिलाओं के दर्द को जिन्होंने अपने पति को खोया।
पहलगाम में जिन आतंकियों ने महिलाओं से कहा था, ‘जाकर मोदी को बता देना’, उन्हीं मोदी ने महिलाओं के प्रतिशोध को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए वास्तविक रूप दिया। अपने सुहाग को खोने वाली इन महिलाओं के सम्मान में ही इस कार्रवाई का नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रखा गया।
भारतीय संस्कृति में सिंदूर का महत्व
भारतीय संस्कृति में सिंदूर को सौभाग्य और सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यह विवाहित महिलाओं की निशानी होती है। स्त्री के सोलह श्रृंगार में सिंदूर का खास महत्व है। हिंदू धर्म में सुहाग की निशानी के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
शादी के समय सात फेरों के बाद पति अपनी अर्द्धांगिनी को सिंदूर लगाता है। इसके बाद ही विवाह संपन्न होता है। इसी सिंदूर को जीवन भर महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं।
आमतौर पर महिलाएँ लाल रंग का सिंदूर लगाती हैं। ये लाल रंग के पाउडर के रूप में होता है। पारंपरिक रूप से विवाहित महिलाएँ इसे माथे या बालों के बीच में लगाती हैं।
हालाँकि, सिंदूर सिर्फ लाल रंग का ही नहीं होता है। देश के विभिन्न हिस्सों में नारंगी रंग का सिंदूर भी लगाया जाता है। खासतौर पर पूर्वांचल के हिस्सों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में महिलाएँ नारंगी रंग का सिंदूर लगाती हैं। इसके अलावा महिलाएँ गुलाबी रंग का सिंदूर भी लगाती हैं।
सिंदूर का इतिहास
हिंदू धर्म में सिंदूर की परंपरा हजारों युग पुरानी है। स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में देवी पूजा के संदर्भ में सिंदूर का उल्लेख है। विशेष रूप से माँ पार्वती और माँ दुर्गा के लिए यह दिव्य ऊर्जा (शक्ति) का प्रतीक है। इसी कारण से सिंदूर को वैवाहिक अनुष्ठानों में शामिल किया जाता है।
गुप्त काल (लगभग 320-550 ईस्वी) तक सिंदूर को हिंदू विवाह के रीति-रिवाजों से जुड़ गया। मनुस्मृति और अन्य ग्रंथों में सुहागिनों के लिए श्रृंगार के वर्णन में इसका जिक्र हुआ है। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे भारत में फैल गई।
जब श्री हनुमान ने पूरे शरीर पर लगा लिया सिंदूर
रामायण में देवी सीता अपने पति भगवान राम के लिए सिंदूर लगाती थीं। रामायण कथा के अनुसार जब श्रीराम, लक्ष्मण और माँ सीता वनवास से वापस लौटे थे। तब, श्रीराम ने अयोध्या के राजा के रूप में राज्य को सँभाला। ऐसे में भक्त हनुमान जी श्रीराम को उपहार देना चाहते थे।
हनुमान जी ने माँ सीता से प्रश्न पूछा कि माता! प्रभु श्रीराम को क्या पसंद है? अर्थात उन्हें किस चीज को देखकर अधिक प्रसन्नता होती है? माता सीता जब प्रश्न का उत्तर दे रही थी उस वक्त वे अपनी माँग में सिंदूर भी लगा रही थीं। हनुमान जी ने सिंदूर का महत्व पूछा तो माँ सीता ने मुस्कुराते हुए कहा, “इससे प्रभु श्रीराम को दीर्घायु मिलेगी। इसीलिए मैं सिंदूर माँग में लगाती हूँ।”
माता सीता की बात सुनकर हनुमान जी ने प्रसन्न होकर कहा कि क्या इस चुटकी भर सिंदूर को लगाने से प्रभु श्रीराम प्रसन्न होते हैं? तब माता सीता मुस्कुराई और कहा, “हाँ! मेरी माँग में सिंदूर को देखकर प्रभु श्रीराम बहुत प्रसन्न होते हैं।”
माता सीता की बात सुनकर हनुमान जी ने सोचा कि अगर एक चुटकी सिंदूर से प्रभु श्रीराम प्रसन्न होते हैं, तो इससे बेहतर उपहार प्रभु के लिए कुछ नहीं हो सकता। हनुमान जी अयोध्या के राजदरबार में पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर आए। हनुमान जी का समर्पण भाव देखकर श्रीराम ने उन्हें गले लगा लिया।
बंगाल में सिंदूर खेला
बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान दशमी पर सिंदूर खेला होता है। इस दिन माँ दुर्गा को सिंदूर समर्पित कर धूमधाम से विदाई दी जाती है। विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला परंपरा को निभाती हैं। खासतौर पर बंगाली समाज में इसका अधिक महत्व है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से बौखलाई पाकिस्तानी फौज ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ और तंगधार में मंगलवार (6 मई 2025) देर रात से भारी गोलाबारी की है। इन हमलों में 15 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 43 अन्य घायल हुए हैं। एलओसी पर पुंछ और आसपास के इलाकों में पाकिस्तान की तरफ से लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर गोलीबारी की जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुंछ के केंद्रीय गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब पर पाकिस्तानी फौजियों ने बमबारी की, जिसमें तीन सिख भाई – रागी सिंह भाई अमरीक सिंह, सैनिक भाई अमरजीत सिंह और दुकानदार भाई रंजीत सिंह की मौत हो गई। माणकोट इलाके में सिख महिला बीबी रूबी कौर की भी मौत हुई। इस हमले में गुरुद्वारे की दीवार क्षतिग्रस्त हुई और कई घर जलकर खाक हो गए। सैकड़ों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
यह हमला भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में हुआ, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके के नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए। ये हमले पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए हिंदुओं के नरसंहार का बदला लेने के लिए किए गए हैं।
पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल ने इस हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “सिख हमेशा देश की तलवार रहे हैं। हम अपने सशस्त्र बलों के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं।” उन्होंने शहीदों के परिवारों के लिए मुआवजे और सम्मान की माँग की। सुखबीर ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल शोक संतप्त परिवारों के साथ है और शांति के लिए अरदास करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन ने सम्मान को चुनौती दी, तो सिख अपने देशभक्ति के कर्तव्यों को पूरा करेंगे।
Strongly condemn the inhuman attack by Pakistani forces on the sacred Central Gurdwara Sri Guru Singh Sabha Sahib in Poonch, in which three innocent Gursikhs, including Bhai Amrik Singh Ji (a raagi Singh), Bhai Amarjeet Singh and Bhai Ranjit Singh lost their lives. The Shiromani… pic.twitter.com/T5CFLfBeyx
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) May 7, 2025
श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने कहा, “यह हमला सिर्फ गुरुद्वारे पर नहीं, बल्कि मानवता पर हमला है।” उन्होंने भारत और पाकिस्तान से तनाव कम करने और शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
जत्थेदार ने कहा, “युद्ध मासूमों को निगलता है। शांति कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत है।” उन्होंने सीमावर्ती लोगों से एक-दूसरे का साथ देने और गुरबानी में आस्था रखने को कहा। भारतीय सेना ने पाकिस्तान की गोलाबारी का मुँहतोड़ जवाब दिया, जिसमें कई पाकिस्तानी फौजियों के मारे जाने की खबर है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
जहाँ एक तरफ पूरा देश ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय सेना को धन्यवाद दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ ‘The Wire’ जैसे मीडिया संस्थान और अरफ़ा खानम शेरवानी जैसे एजेण्डाबाज पत्रकार प्रपंच से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे संवेदनशील समय में भी दुश्मन का एजेंडा चला रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। सिंधु जल संधि के स्थगन के साथ पाकिस्तानियों के वीजा रद्द करने और चेनाब नदी का पानी रोकने के बाद आखिरकार जब भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूद किए, उसके बाद कहीं भारतीयों के कलेजों को ठंडक मिली, लेकिन देश की ये बहादुरी भी प्रोपेगेंडा चलाने वालों को हजम नहीं हुई।
जम्मू कश्मीर में पहलगाम के बैसारन घाटी में 22 अप्रैल, 2025 को भरी दोपहर में उस समय आतंकी हमला हुआ जब पर्यटक घाटी में अपने लिए यादें संजो रहे थे। कुछ बिल्कुल नए विवाहित जोड़े अपने हनीमून पर आए थे तो वहीं कुछ परिवार देश के दक्षिणी हिस्से से एकदम उत्तर में आकर प्रकृति के अप्रतिम दृश्यों को निहार रहे थे।
उसी समय पाकिस्तानी आतंकियों ने गोलीबारी शुरु कर दी। 24 हिंदुओं समेत कुल 28 लोगों को गोली मारी गई। हत्या से पहले उन सभी से उनका धर्म पूछा गया। गैर-मुस्लिम होने का प्रमाण जाँचा गया। हिंदू महिलाओं के सामने ही उनका सुहाग उजाड़ दिया गया।
इस आतंकी हमले के बाद देशभर में लोगों में आक्रोश फैल गया। सबके दिलों में न्याय की ज्वाला धधक रही थी। एक ओर भारत सरकार अपने निर्णय ले रही था को वहीं आम लोग भी अपने-अपने तरीकों से इसका विरोध जता रहे थे। कई शहरों में पाकिस्तान के झंडों के पोस्टर सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर चिपकाए गए। कुछ ने सोशल मीडिया पर प्रक्रिया दी तो कई जगहों पर कैंडल मार्च निकाल कर न्याय की आस लगाई थी।
भारत सरकार ने भी लोगों का भरोसा टूटने नहीं दिया। लगातार अपने कड़े निर्णयों से सरकार बताती रही कि वो फुल फॉर्म में है। हमले के ठीक 15 दिन बाद 7 मई, 2025 की आधी रात में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ मिशन का आगाज किया और पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में अपनी नींव जमाए बैठे आतंकी संगठनों के 9 ठिकाने तबाह कर दिए। इस मिशन से जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैय्यबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकियों को जमींदोज कर दिया गया। सेना ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया हैंडल से दी।
‘The Wire’ की आरफा खानम शेरवानी ने चलाया पाकिस्तान का एजेंडा
इस मिशन की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद प्रोपेगेंडा चलने वाले न्यूज पोर्टल और पत्रकारों में इस बात की खलबली मच गई कि किस तरह से पाकिस्तान को ‘पीड़ित’ दिखलाया जाए। किस तरह से बताया जाए की जो मारे गए वह आतंकी नहीं थे और किस तरह से भारत सरकार के खिलाफ एक नया जहर घोला जा सके।
इस कड़ी में प्रोपेगेंडा न्यूज पोर्टल ‘द वायर’ की सीनियर एडिटर आरफा खानम शेरवानी ने एक पैनल डिस्कशन कर डाला। इसने कुछ वामपंथी पत्रकारों को शामिल कर लिया गया और इस पैनल चर्चा में आरफा ने ये तक कह डाला कि जो मारे गए वह आतंकी नहीं थे बल्कि आम नागरिक थे।
पाकिस्तान में आतंकी नहीं सिवलियन मारे गए है- आरफ़ा @HMOIndia इनसे सख्ती और शक्ति द्वारा निपटिये।
आरफा खानम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से शुरू होकर पूरे मिशन की चिरौरी करते हुए लगभग एक घंटे के वीडियो में ये बताने की कोशिश की कि मिशन में क्या क्या खामियाँ रहीं, इस मिशन से पाकिस्तान के लोग किस तरह परेशान हो रहे हैं और इस मिशन के जरिए मोदी सरकार क्या-क्या फायदे लेगी।
आरफा ने सबसे पहले इसी बात पर चर्चा जरूरी समझी कि इस मिशन का नाम सिंदूर रखा तो उसे किस तरह से लिखा गया। आरफा ने कहा, “भारतीय सेना ने पारंपरिक तरीकों से हटकर मिशन जानकारी सोशल मीडिया हैंडल से दी गई। इसमें पोस्टर लगाया गया और उसमें सिंदूर को इस तरह लिखा गया जैसे भारत में शादीशुदा औरतें अपनी माँग में सिंदूर भरती हैं और साथ में ये भी कहा है कि न्याय हुआ।”
इसके बाद आरफा ने भारत ने एयरस्ट्राइक पर सवाल जवाब किए। पैनल डिस्कशन में कहा गया कि हमारे पास सिर्फ भारत सरकार और पाकिस्तान की ओर से किए गए दावे ही हैं कि उन्होंने मिशन में क्या किया है।
आरफा ने पैनलिस्ट्स से पूछा कि भारत के दर-दर से और घर-घर आवाज आ रही थी कि लोगों को जंग चाहिए। तो क्या ये जंग है? इसके जवाब में पैनलिस्ट और वरिष्ठ पत्रकार राहुल बेदी ने कहा, “भारत ने पाकिस्तान के 9 ठिकानों पर हमला किया है तो इसकी जवाबी हमले 100% होंगे और यह कहाँ होंगे हमें नहीं पता है। मिलिट्री पर या एयरफोर्स पर हमले हो सकते हैं।”
अपने पैनल डिस्कशन में आरफा ने पाकिस्तान सरकार की बातें इतनी मजबूती से रखी मानो ऐसा लग रहा हो कि वह पाकिस्तान की कोई प्रवक्ता हों। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान कह रहा है कि जो लोग मारे गए हैं उनमें कोई आतंकवादी नहीं है। ऐसे में जितने हमले हुए हैं उनमें कोई आतंकवादी नहीं मारा है बल्कि आम नागरिकों की मौत हुई है।”
आरफा के इस बयान से लोगों में काफी गुस्सा बढ़ गया। लोगों का कहना है कि देश के लिए खड़े होने से ज्यादा जरूरी पाकिस्तान को समर्थन देना नहीं हो सकता, लेकिन प्रोपेगंडा चलाने वाले इन पत्रकारों के लिए पाकिस्तान को पीड़ित दिखलाना शायद सबसे जरूरी है। राहुल बेदी ने कहा कि इस मिशन से पीएम मोदी अपना राजनीतिक फायदा ज़रूर उठाएँगे।
पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहे पानी के विवाद में अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दखल दिया है। हाई कोर्ट ने पंजाब की भगवंत मान सरकार को फटकार लगाई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि हरियाणा के लिए पानी को पंजाब ना रोके। पानी पर विवाद को लेकर हाई कोर्ट ने भारत-पाकिस्तान विवाद का भी उदाहरण दिया है।
बुधवार (07 मई 2025) को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की एक याचिका पर यह फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पंजाब सरकार या उनके अफसर और पुलिस भाखड़ा डैम और कंट्रोल रूम के ऑफिस में दखल नहीं दे सकते हैं।
बेंच ने निर्देश दिए कि पंजाब सरकार BBMB द्वारा जारी किए गए उस आदेश का पालन करे, जिसमें हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अतिरिक्त 4500 क्यूसेक पानी देने के लिए कहा गया था। पानी रोकने को पंजाब की भगवंत मान को फटकार भी लगाई गई।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा, “हम अपने दुश्मन देश के साथ ऐसा कर रहे हैं। हमें अपने राज्यों के भीतर यही नहीं करना चाहिए।” हाई कोर्ट ने कहा कि पंजाब पुलिस भाखड़ा नांगल बाँध को सुरक्षा दे लेकिन दखल नहीं दे सकती।
इससे पहले 23 अप्रैल 2025 को BBMB की तकनीकी समिति की बैठक ने हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया था। इस पानी में राजस्थान और दिल्ली के हिस्से का जल भी शामिल था। बाद में पंजाब ने इसका विरोध करते हुए कहा कि हरियाणा और राजस्थान अपनी तय हिस्सेदारी से अधिक पानी माँग रहे हैं।
1 मई 2025 को पंजाब पुलिस ने भाखड़ा नाँगल बाँध और लोहंड कंट्रोल रूम पर नियंत्रण लेने की घटना सामने आई थी। BBMB ने इस घटना की आलोचना करते हुए अपने अधिकारों में अवैध हस्तक्षेप करार दिया। इसके बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट में 3 याचिकाएँ हुई दायर
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में जल विवाद को लेकर 3 याचिकाएँ दायर की गई हैं। पहली याचिका एडवोकेट रविंद्र ढुल ने दायर की। दूसरी याचिका फतेहाबाद ग्राम पंचायत ने दायर की। इन दोनों याचिकाओं में कहा गया कि पंजाब पुलिस को भाखड़ा डैम से पुलिस हटाने का निर्देश दिया जाए। साथ ही हरियाणा को पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।
इसके दो दिन बाद सोमवार (05 मई 2025) को BBMB ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि पंजाब पुलिस ने डैम पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। पुलिस के जवानों ने डैम को सभी कंट्रोल यूनिट अपने हाथ में ले लिए हैं।
वहीं सोमवार (05 मई 2025) को पंजाब विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर पंजाब-हरियाणा पानी विवाद पर चर्चा की गई थी। सदन में हरियाणा को एक बूँद भी पानी न देने समेत 6 प्रस्ताव पारित किए गए थे। इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि अभी तो हम ये पानी दे रहे है आगे से ये भी नहीं मिलेगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्ताव की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव असंवैधानिक और भारत के संघीय ढाँचे के खिलाफ है। सीएम ने कहा था कि पंजाब सरकार तो कुछ भी कह सकती है।
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया गया, धर्म पूछ-पूछकर मारा गया। उसके बाद भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। भारतीय वायुसेना द्वारा बुधवार (7 मई, 2025) की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ तहत 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य भी मारे गए।
इनमें मसूद की बड़ी बहन, बहनोई और 4 करीबी सहयोगियों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मारे गए लोगों में मौलाना काशिफ, उसका परिवार, मौलाना अब्दुल रऊफ की बड़ी बेटी, पोते और चार बच्चे शामिल हैं। पहलगाम हमले में 26 लोगों के नरसंहार के बाद से ही लगातार आवाज़ उठ रही थी कि भारत जवाबी कार्रवाई करे और आतंक का पोषण करने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाए। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैय्यबा का सहयोगी संगठन माना जाता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना ने 23 मिनट तक चले हमले में पाकिस्तान के बहावलपुर और अन्य क्षेत्रों में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर 24 मिसाइलें दागीं। इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें मसूद अज़हर के परिवार के सदस्य भी मारे गए।
इसके बाद उसने कहा, “अच्छा होता कि मैं भी मर जाता।” हालाँकि, पाकिस्तान सरकार ने इन हमलों में नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है और भारतीय कार्रवाई को ‘युद्ध की कार्यवाही’ बताया है। जहाँ तक मसूद अजहर की बात है, वो जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है और भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल रहा हैं।
मसूद अजहर की भूमिका 2001 के संसद हमले, से लेकर 2016 के पठानकोट हमले और 2019 के पुलवामा हमले में स्पष्ट रूप से सामने आई है।
2001 संसद हमला
13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकवादी शामिल थे। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। मसूद अजहर को पाकिस्तान में हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसे कभी औपचारिक रूप से आरोपित नहीं किया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।
2016 पठानकोट हमला
जनवरी 2016 में, पठानकोट एयरबेस पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने हमला किया, जिसमें 7 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मसूद अजहर, उनके भाई रऊफ असगर और दो अन्य को इस हमले की साजिश रचने के आरोप में चार्जशीट में नामित किया। चार आतंकवादी, जो हमले में मारे गए, पाकिस्तान में जैश के शिविरों में प्रशिक्षित थे।
2019 पुलवामा हमला
14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमले में 40 जवान बलिदान हुए। NIA ने मसूद अजहर, उनके भाई रऊफ असगर, भतीजे उमर फारूक और अन्य को इस हमले की साजिश में शामिल पाया। चार्जशीट में बताया गया कि हमले की योजना 2016 से बन रही थी, और इसमें पाकिस्तान की भूमिका स्पष्ट थी। उमर फारूक, जो हमले का मास्टरमाइंड था, 2018 में भारत में घुसपैठ कर चुका था और बाद में मुठभेड़ में मारा गया।
1994 में मसूद अजहर को भारत ने श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। उसे रिहा कराने के लिए जैश ने दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को कंधार में हाईजैक कर लिया गया था। भारत सरकार को यात्रियों की सुरक्षा के बदले मसूद अजहर को रिहा करना पड़ा, जिसके बाद वह पाकिस्तान लौट गया और जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की।
मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के पीछे मुख्य साजिशकर्ता रहा हैं। उसकी भूमिका विशेष रूप से 2001, 2016 और 2019 के आतंकी हमलों में स्पष्ट रूप से सामने आई है। हालाँकि, 2008 के मुंबई हमले में उसकी सीधी संलिप्तता के प्रमाण नहीं हैं। उसकी गतिविधियों के कारण, संयुक्त राष्ट्र ने उसे 2019 में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया।
पहलगाम हमले का बदला लेते हुए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी प्रेस ब्रीफिंग में दी। इन दोनों सेना के अधिकारियों ने कहा कि भारत की वायु सेना, थल सेना और जल सेना तीनों ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। भारत ने दो महिला अधिकारियों से प्रेस कॉन्फ्रेंस कराकर दुनिया को नारी शक्ति का संदेश भी दिया।
शांति अभियानों का हिस्सा रही हैं सोफिया कुरैशी
प्रेस ब्रीफिंग करने वाली इन दो अधिकारियों में एक हैं कर्नल सोफिया कुरैशी। 17 साल की उम्र में अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होने इंडियन आर्मी ज्वॉइन की। सोफिया का जन्म गुजरात के वड़ोदरा में 1981 में हुआ। वो शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 1999 में सेना में शामिल हुईं। सोफिया का आर्मी बैकग्राउंड है। उनके दादा आर्मी में थे। सोफिया के पति आर्मी अधिकारी हैं ।
सोफिया सेना के शांति स्थापना अभियानों से जुड़ी रही हैं। उन्होने पंजाब बॉर्डर पर चले ऑपरेशन पराक्रम और उत्तर पूर्व के बाढ़ राहत कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। उनके कार्यों की सराहना की गई। इसके अलावा 18 देशों को मिलाकर पुणे में एक्सरसाइज फोर्स 18 का आयोजन किया गया था। इसमें आसियान देश भी शामिल थे। इस अभियान के 40 अधिकारियों में एकमात्र सोफिया कुरैशी महिला अधिकारी थीं।
व्योमिका की आकांक्षाओं को उड़ान दी वायु सेना ने
अब बात करते हैं विंग कमांडर व्योमिका सिंह की। व्योमिका यानी आकाश से जुड़ा। वायुसेना की अधिकारी व्योमिका बचपन से ही उड़ना चाहती थीं। उनके नाम ने उनकी आकांक्षाओं को और ज्यादा मजबूत किया। उन्होने एससीसी से सफर की शुरुआत की और इंजीनियरिंग करके सेना में शामिल हो गईं। सेना में शामिल होने वाली व्योमिका अपने परिवार की पहली सदस्य हैं। भारतीय वायु सेना में एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में कमीशन दिया गया और 2019 में फ्लाइंग ब्रांच में स्थायी कमीशन प्राप्त हुआ। उन्होंने जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर सहित कुछ सबसे कठिन इलाकों में चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टरों का संचालन किया।
व्योमिका सिंह कई बचाव अभियान का भी हिस्सा रही हैं। 2021 में वह माउंट मणिरंग पर तीनों सेनाओं की महिला पर्वतारोहण अभियान का हिस्सा रहीं। इस अभियान से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली।
अंग्रेजी समाचार संस्थान The Hindu ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय वायु सेना को लेकर एक फर्जी खबर चलाई है। झूठा साबित होने पर उसने इससे सम्बन्धित पोस्ट डिलीट कर दिया। कुछ देर बाद उसे सफाई भी जारी करनी पड़ी। लेकिन इस बीच उसने पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को खूब हवा दी है।
भारत ने 6-7 मई, 2025 की दरम्यानी रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के भीतर 9 आतंकी कैम्प पर हमला किया। भारत ने इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी कैम्पों को निशाना बनाया।
तगड़ी मार खाने के बाद पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा करने लगे। किसी पाकिस्तानी ने दावा किया कि उनके मुल्क ने भारत के 6 लड़ाकू विमान मार गिराए तो किसी पत्रकार ने यह संख्या 3 बताई। इसी पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा में 7 मई, 2025 की सुबह The Hindu भी शामिल हो गया।
The Hindu ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट की। इसमें उसने लिखा, “एक सरकारी कर्मचारी ने यह जानकारी दी है कि जम्मू-कश्मीर के अखनूर, रामबन और पंपोर इलाकों में कम से कम 3 भारतीय विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए हैं।” The Hindu ने बताया कि यह रिपोर्ट उसके लिए डिप्टी एडिटर विजयता सिंह ने लिखी है।
The Hindu ने यह पोस्ट डिलीट कर दी
इसमें उसने एक जगह के 4 फोटो भी लगाए जिसमें कुछ मलबा दिखाई पड़ता है। यह फोटो असल में पुलवामा के वुयान गाँव की थी। The Hindu ने इस मलबे को भारतीय वायुसेना के गिरे हुए विमान बताने का दावा किया। हालाँकि, पोस्ट के तुरंत बाद ही लोग The Hindu की सच्चाई बताने लगे।
The Hindu के दावे के उलट रक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यह कोई गिरा हुआ विमान नहीं बल्कि लड़ाकू विमान में अतिरिक्त ईंधन के लिए लगाए जाने वाले टैंक हैं। उन्होंने बताया कि जिसे The Hindu एयरक्राफ्ट का मलबा बताने का दावा कर रहा है वह संभवतः एयरक्राफ्ट द्वारा गिराया है ताकि उसकी गति बढ़ जाए।
These seem to be underwing fuel tanks which were released . as is often the case during air combat. https://t.co/sPexqnMhqs
स्पष्ट किया गया कि किसी विमान का अपने ईंधन टैंक गिराना वायुसेना के भीतर एक सामान्य प्रक्रिया है। फजीहत होने के बाद चुपके से The Hindu ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन इसके बाद भी उसे लोगों ने लताड़ना बंद नहीं किया। The Hindu ने खबर डिलीट करने के बाद भी अपनी ढिठाई नहीं छोड़ी। उसने ना ही कोई माफी माँगी और ना ही स्पष्ट बात की।
The Hindu ने लिखा, “हमने ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय विमानों के बारे में एक पुरानी पोस्ट हटा दी है। भारत की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए हमने अपने प्लेटफॉर्म से उस पोस्ट को हटाने का फैसला किया है। हमें खेद है कि इसने हमारे पाठकों के बीच भ्रम पैदा किया।”
We have deleted an earlier post about Indian aircraft involved in Operation Sindoor. There is no such on-record official information from India. We therefore decided to remove the post from our platforms. We regret that it created confusion among our readers.
The Hindu भले ही पोस्ट हटा कर गड़बड़ी की बात मान ली हो लेकिन उसने अपने एक ट्वीट से पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का बढ़ाया। उसके इस ट्वीट के आधार पाकिस्तानियों ने भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा किया। The Hindu ने यह खबर बिना वायुसेना से कोई भी आधिकारिक जानकारी लिए और बिना किसी सत्यापन के ही बना दी थी।
पाकिस्तानी ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही कहीं भारतीय विमान गिराने का तो कहीं भारतीय पायलट पकड़ने की फर्जी बातें चला रहे हैं। भारत के बड़े मीडिया संस्थान होने के बाद भी The Hindu ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी और इसी प्रोपेगेंडा विंग का हिस्सा हो गया।