पहलगाम आतंकी हमला 22 अप्रैल को हुआ था। इसमें 28 पर्यटकों की मौत हो गई थी। मृतकों में देश भर के सैलानियों के साथ दो विदेशी पर्यटक भी थे। इस हमले पर दुनिया भर के लोग निंदा जता रहे हैं तो वहीं असम के विपक्षी विधायक अमीनुल इस्लाम ने इसे ‘सरकार की साजिश’ बता दी। हालाँकि इसके बाद उन्हें असम पुलिस ने कानून का पाठ पढ़ाया और गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ 8 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी जो आतंकी हमले के बाद किसी भी तरह से पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं। इस तरह के लोगों की गिरफ्तारी आगे भी चलती रहेगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “असम ऐसे किसी भी व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पाकिस्तान का समर्थन करता हो।”
As part of its intensified crackdown on individuals promoting anti-national sentiments, the @assampolice has made two additional arrests: •Barpeta: Md. Jarif Ali (25), also known as Sharif Sing, •Biswanath: Anil Bania, District Secretary of the Satra Mukti Sangram Parishad https://t.co/hwLlu2XfJm
23 अप्रैल 2025 को विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक अमीनुल इस्लाम ने दावा किया कि 14 फरवरी 2019 में पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर हुआ हमला और पहलगाम का आतंकी हमला सरकार की साजिश थी। नागाँव के निवासी अमीनुल इस्लाम को इसके बाद असम पुलिस ने भड़काऊ टिप्पणी के लिए गिरफ्तार कर लिया गया।
विधायक के अलावा सात अन्य लोगों को भी सोशल मीडिया पर हमले के समर्थन में बात करने वालों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक असम विश्वविद्यालय का छात्र भी है। उसने सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक और भड़काऊ पोस्ट करने के साथ ABVP की शिकायत के सदस्यों को भी अपना निशाना बनाया था। ABVP की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। अन्य गिरफ्तार लोगों में दो सिलचर के कछार और हाइलाकांडी, मोरीगाँव, नागाँव और शिवसागर जिले से एक-एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।
गुजरात में घुसपैठियों के ख़िलाफ़ अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। गुजरात पुलिस ने विभिन्न शहरों से अबतक 500 से भी अधिक घुसपैठियों को हिरासत में लिया है। बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले में 28 निर्दोषों की जान चली गई थी, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करके उनके यहाँ रह रहे पाकिस्तानियों वापस भेजने के लिए कहा था। भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानियों का वीजा रद्द कर दिया गया है। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों से 500 से भी अधिक घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया है।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के DCP सजीत राजियान ने जानकारी दी कि अकेले अहमदाबाद में अभियान चलाकर 400 से अधिक संदिग्ध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है। उधर सूरत में 100 से भी अधिक अवैध प्रवासी पकड़े गए हैं। गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने जानकारी दी है कि सिन सभी को डिपोर्ट किया जाएगा। इससे पहले 2 FIR करके 127 बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया था। इनमें से 70 को डिपोर्ट किया जा चुका है, बाकियों को भी वापस उनके मुल्क़ भेजा जा रहा है। इधर हिरासत में लिए गए 500+ प्रवासियों से पूछताछ की जा रही है।
गुजरात पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाया। शुक्रवार रात सर्च ऑपरेशन के बाद अहमदाबाद से 400 और सूरत से 120 घुसपैठिए हिरासत में लिए गए। ये सभी फर्जी डॉक्युमेंट के आधार पर भारत में रह रहे थे। pic.twitter.com/fe9bWpfvrE
ये पता लगाया जा रहा है कि वो भारत में कैसे घुसे, उन्होंने फ़र्ज़ी दस्तावेज कैसे बनवाए और वो किन-किन लोगों से संपर्क में थे। इन सभी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं। इनमें से कइयों के पास फ़र्ज़ी आधार कार्ड तक मिले हैं। शनिवार (26 अप्रैल, 2025) को तारीख़ बदलते ही रात के 12 बजे के बाद सघन छापेमारी शुरू कर दी गई। सुबह 6 बजे तक ये अभियान चला। पुलिस ने इन घुसपैठियों की परेड निकाली और इन सबको लेकर हेडक़्वार्टर पहुँची। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल हैं। धर-पकड़ का वीडियो भी सामने आया है।
अहमदाबाद :
घुसपैठियों के ख़िलाफ़ अबतक की सबसे बड़ी कार्यवाही.
केवल पाकिस्तानीओं को ही नहीं बांग्लादेशियों को भी पकड़ पकड़कर देश के बाहर निकाला जा रहा है.
इसे अमदावाद और सूरत क्राइम ब्रांच की सर्जिकल स्ट्राइक ही समझे.
गुजरात में घुसपैठियों की धर-पकड़ का ये अभियान अब भी जारी है। एक फुटबॉल ग्राउंड में सभी घुसपैठियों को जमा किया गया, क्योंकि उनकी संख्या अधिक थी। अधिकतर घुसपैठिए अहमदाबाद के चंदोला क्षेत्र से पकड़े गए। वहीं सूरत के उन पटिया व भिंडी बाजार क्षेत्र से बड़ी संख्या में ये घुसपैठिए पकड़े गए। इसके बाद अन्य राज्यों में भी इस तरह का अभियान चलाने की माँग की जा रही है। बता दें कि भारत में बड़ी संख्या में घुसपैठिए हैं जो अक्सर कई आपराधिक कृत्यों में भी लिप्त पाए जाते हैं।
पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) पहलगाम के बैसरन घाटी में हमला करके 28 निर्दोषों की जान ले ली। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद कर दिया, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवा स्थगित कर दी और पाकिस्तानी रक्षा विभाग के अधिकारियों को भारत छोड़ने के लिए कह दिया। इधर पाकिस्तान की तरफ से लगातार दूसरी रात LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) के उस पार से गोलीबारी की गई।
LOC के पास एक नहीं बल्कि कई जगहों पर पाकिस्तानी फ़ौज ने गोलीबारी की, जिसका भारतीय सेना ने भी छोटे हथियारों से मुँहतोड़ जवाब दिया। हालाँकि, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बताया जाता है कि भारत में पाकिस्तान को सबक सिखाने की माँग के बीच पाकिस्तानी फ़ौज ये जाँच रही थी कि भारतीय सेना कितनी सतर्क है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही चेता चुके हैं कि पहलगाम हमला और इसकी साजिश रचने वालों को कल्पना से परे सबन सिखाया जाएगा। इस हमले की जिम्मेदारी LeT (लश्कर-ए-तैय्यबा) से सम्बद्ध आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ़ोर्स’ (TRF) ने ली है।
भारत ने अपने घर से कार्रवाई की शुरुआत भी कर दी है। शुक्रवार (25 अप्रैल, 2025) को जम्मू कश्मीर में 5 आतंकियों के घर ध्वस्त किए गए। शोपियाँ, कुलगाम और पुलवामा जिलों में ये कार्रवाई की गई।शोपियाँ के चोटीपोरा में LeT कमांडर शाहिद अहमद कुट्टे के घर को मलबे में तब्दील कर दिया गया। वो पिछले 3-4 वर्षों से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय है। पुलवामा ने मुर्रन में 2018 में पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर हाल ही में कश्मीर वापस लौटे आतंकी अहसान-उल-हक़ का घर ध्वस्त किया गया।
2023 से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय एहसान अहमद शेख की दोमंजिला इमारत को भी मिट्टी में मिला दिया गया। ये कार्रवाई पुलवामा के काचीपोरा में की गई। इससे पहले गुरुवार को आदिल हुसैन ठोकर और आसिफ शेख नामक आतंकियों के घर ज़मींदोज़ किए गए थे। पूरे कश्मीर घाटी में आतंकियों के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है। उधर नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय बैठकों का दौर जारी है। याद दिला दें कि ख़ुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह घटनास्थल पर पहुँचे थे और पीड़ित परिजनों से मुलाक़ात की थी।
दुनिया भर में भारतीय समाज पहलगाम आतंकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इसी क्रम में UK में भी पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने भारतीय समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिक तैमूर राहत भीतर से लोगों को उकसाता रहा। उसने स्कवाड्रन लीडर अभिनंदन की तस्वीर पर ‘Chai Is Fantastic’ लिखवाकर उसे लहराया। बता दें कि 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में अभिनंदन (तब विंग कमांडर) को पाकिस्तान ने बंधक बना लिया था।
No End to Pak Provocation#WATCH | A member of the Pakistani High Commission in the UK held up a photo of India's Abhinandan and made a gesture suggesting a throat-slitting action.
हालाँकि, भारत की चेतावनी के बाद पाकिस्तान को अभिनंदन को छोड़ना पड़ा था। पाकिस्तानियों ने इस दौरान अभिनंदन का चाय पीते हुए वीडियो शेयर करके भारत का मजाक बनाया था। पाकिस्तानी राजनयिक ने लंदन में इस दौरान भारतीयों की तरफ इशारा करते हुए उनका गला रेतने का भी इशारा किया। इसके बाद इस राजयनयिक को वापस भेजने की माँग हो रही है। पाकिस्तान की तरफ से लगातार भारत को उकसाने वाली गतिविधियाँ की जा रही हैं।
दिल्ली का सीलमपुर इलाका इन दिनों दहशत के साये में है। यहाँ 17 साल के हिंदू नौजवान कुणाल की निर्मम हत्या ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों की भयावह तस्वीर को सामने ला दिया। स्थानीय लोगों का दावा है कि सीलमपुर में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिसके चलते कई परिवार पलायन को मजबूर हो रहे हैं। कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया से बातचीत में इंसाफ की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उनके बेटे को सुनियोजित तरीके से मारा गया, और इस हत्याकांड के पीछे इलाके की कुख्यात ‘लेडी डॉन’ जिकरा और उसका गैंग है।
कुणाल को पहले गले पर चाकू से मारा, फिर पेट में किए अनगिनत वार
बीते गुरुवार (17 अप्रैल 2025) की शाम करीब 7:38 बजे सीलमपुर के जे-ब्लॉक में कुणाल पर चाकुओं से हमला किया गया। वह घर से दूध और समोसे लाने निकला था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा।
कुणाल के लिए न्याय की माँग वाले पोस्टर
कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि कुछ बदमाशों ने उनके बेटे को बुलाकर गली के बाहर ले गए। वहाँ जिकरा और उसके साथियों ने उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। पहला वार कुणाल के गले पर हुआ। वह जैसे-तैसे भागकर स्थानीय क्लीनिक पहुँचा, जहाँ उसकी पट्टी की गई। लेकिन जिकरा का गैंग कहाँ रुकने वाला था? उन्होंने कुणाल को फिर से घेर लिया और उसके पेट पर अनगिनत वार किए। जब तक वह जेपीसी अस्पताल पहुँचा, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मृतक कुणाल की माँ और पिता
कुणाल की माँ इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। वह बार-बार बेहोश हो रही हैं और राजवीर उन्हें संभाल रहे हैं। रोते हुए राजवीर ने कहा, “मेरा बेटा तो दूध लेने गया था। उसने किसी का क्या बिगाड़ा था? जिकरा और उसके गुंडों ने मेरे बच्चे को मार डाला। हमें इंसाफ चाहिए।”
कौन है जिकरा, जिसके नाम से काँपता है सीलमपुर?
इस हत्याकांड का आरोप जिस जिकरा पर है, उसे सीलमपुर के इलाके में ‘लेडी डॉन’ के नाम से जाना जाता है। जिकरा 27 साल की है, पूरी तरह से एक दबंग महिला है। वह सीलमपुर की गलियों में 8-10 लोगों के गैंग के साथ घूमती है और खास तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाती है। जिकरा का एक बच्चा भी है, लेकिन उसकी गुंडागर्दी की कहानियाँ इलाके में मशहूर हैं। वह हमेशा अपने साथ पिस्तौल रखती थी और सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ उसकी तस्वीरें और वीडियो भी वायरल हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिकरा के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। अभी 2-3 महीने पहले ही वह अवैध हथियार बरामदगी के एक मामले में जेल से छूटी थी। सूत्रों के अनुसार, जिकरा जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा की बीवी जोया के साथ रहती थी। जोया के जेल जाने के बाद जिकरा ने अपना खुद का गैंग बनाया, जिसमें कुछ नाबालिग लड़के भी शामिल थे।
लेडी डॉन जिकरा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
कुणाल की हत्या का कारण जिकरा की पुरानी रंजिश थी। जिकरा का मानना था कि कुणाल उस शख्स ‘लाला’ का दोस्त था, जिसने उसके भाई को कुछ समय पहले पीटा था। हालाँकि, कुणाल नाबालिग होने के कारण उस मामले में बच गया था, लेकिन जिकरा ने उसे जिम्मेदार ठहराया और बदला लेने के लिए उसकी हत्या कर दी।
सीलमपुर में हिंदुओं की दयनीय स्थिति
ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड रिपोर्ट के लिए सीलमपुर का दौरा किया। कुणाल के घर के पास ही संत रविदास मंदिर है, जहाँ उसका परिवार शरण लिए हुए है। मंदिर के आसपास की गलियों में ‘हिंदू पलायन करने को मजबूर’ और ‘घर बिकाऊ है’ जैसे पोस्टर चिपके हुए हैं। ऑपइंडिया के पास इन पोस्टरों की तस्वीरें भी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 2008 से 2025 के बीच सीलमपुर में कम से कम 7 हिंदुओं की हत्या मुस्लिमों द्वारा की गई है। इनमें से कई मामले पुरानी रंजिश या सांप्रदायिक तनाव से जुड़े हैं।
कुणाल का घर और जिकरा का घर सिर्फ दो गलियों के फासले पर हैं। ऑपइंडिया की टीम जिकरा के घर भी गई, जो उसकी नानी का बताया जाता है। लेकिन वहाँ ताले और जंजीरें लटक रही थीं। जिकरा और उसका पूरा परिवार फरार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिकरा का गैंग आए दिन हिंदुओं को धमकाता था। एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यहाँ हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। जिकरा और उसके गुंडे हमें जीने नहीं दे रहे। कोई सिर फोड़ देता है, कोई आँख निकाल देता है।”
जिकरा की नानी का घर, गुस्साए लोगों ने तोड़फोड़ की कोशिश भी की थी
कई लोगों ने जिकरा की नानी के घर के आसपास भी जिकरा का जिक्र करने से मना कर दिया। यहाँ तक कि ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम जब मौके पर पहुँची, तो लोगों ने जिकरा के घर की पहचान तक करने से इनकार कर दिया। जिकरा की नानी का घर जिस गली में है, उसकी शुरुआत में ही एक मस्जिद है और उसमें मदरसा भी चलता है। यहीं से पढ़कर निकले लोग आज जिकरा की ताकत बने हुए हैं। जिकरा के डर की इंतिहाँ तो देखिए, कि उसकी गली में खड़े लोग भी उसका घर बताने से बचते दिखे।
मस्जिद वाली गली में जिकरा की नानी का घर, इसी से 2 गली पीछे ही कुणाल का घरहै
पलायन को मजबूर हो रहे हिंदू परिवार, पोस्टर भी लगाया
स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि सीलमपुर कभी हिंदू बाहुल्य इलाका हुआ करता था, लेकिन अब यहाँ मुस्लिम आबादी हावी हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिकरा जैसे दबंगों की गुंडागर्दी से तंग आकर कई हिंदू परिवार अपने घर बेचकर पलायन कर रहे हैं। संत रविदास मंदिर वाली गली में ही कम से कम 3 हिंदू परिवारों ने अपने घर मुस्लिमों को बेच दिए हैं। 50-60 लाख रुपये में मकान खरीदकर मुस्लिम परिवार इलाके की डेमोग्राफी को तेजी से बदल रहे हैं।
‘राम राम’ लिखे इस घर का मालिक अब एक मुस्लिम
स्थानीय लोगों ने विरोध में प्रदर्शन भी किए। ‘हिंदू पलायन करने को मजबूर’ जैसे पोस्टर लगाकर उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। एक बुजुर्ग ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे बच्चे यहाँ सुरक्षित नहीं हैं। हर दिन डर में जीते हैं। सरकार और पुलिस कुछ नहीं करती। हम मजबूरन अपने घर बेचकर जा रहे हैं।”
पलायन थामने के लिए योगी मॉडल की माँग करने वाले पोस्टर कई घरों पर लगे
जिकरा पर कार्रवाई पहले ही हो जाती, तो शायद कुणाल जिंदा होता
कुणाल हत्याकांड के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। 18 अप्रैल को जिकरा को गिरफ्तार किया गया, और 20 अप्रैल तक कुल 9 आरोपितों को हिरासत में लिया गया। इनमें दो महिलाएँ (जिकरा और जाहिदा) और दो नाबालिग शामिल हैं। गिरफ्तार अन्य आरोपितों में साहिल (18), सोहैब (35), नफीस (32), अनीश (19), और विकास (29) शामिल हैं। पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद और अमरोहा में छापेमारी कर इन लोगों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, कुणाल और साहिल के बीच पुरानी रंजिश थी, जिसके चलते जिकरा, साहिल और दो नाबालिगों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। बाकी आरोपितों ने मुख्य आरोपितों को फरार होने और छिपने में मदद की। पुलिस अभी हत्या में इस्तेमाल हथियारों की तलाश कर रही है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्रम में ऑपइंडिया की टीम सीलमपुर थाने भी पहुँची। उस समय एसएचओ मौके पर मौजूद नहीं थे। एक सिपाही ने कहा, “अब सबकुछ खत्म हो चुका है, तब आप आए हैं। जिकरा और उसका गैंग जेल भेजा जा चुका है।”
सीलमपुर थाने के गेट की तस्वीर, एसएचओ से नहीं हुई मुलाकात
हालाँकि, स्थानीय लोग पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिकरा जैसे अपराधी बार-बार जेल से छूटकर और बड़े जुर्म करते हैं। एक व्यक्ति ने गुस्से में कहा, “जिकरा को पहले भी पकड़ा गया था, लेकिन वह फिर छूट गई। अगर पुलिस ने पहले सख्ती की होती, तो शायद हमारा कुणाल आज जिंदा होता।”
सीएम ने दिया बयान, लेकिन कार्रवाई चाहते हैं लोग
कुणाल हत्याकांड के बाद सीलमपुर में कई दिनों तक तनाव रहा। स्थानीय लोगों के विरोध और पलायन की खबरों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी बयान देने के लिए मजबूर किया। लेकिन हिंदू समुदाय का मानना है कि सरकार और मुख्यधारा की मीडिया इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है। एक बार मामले की कवरेज के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया गायब हो चुका है। सरकार और प्रशासन से कोई पहुँचा नहीं। बीजेपी नेता मौके पर पहुँचते हैं और सहायता की बात भी कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई खास कदम नहीं उठाया गया। सिवाय 9 आरोपितों को पकड़ने के। सरकार चाहती तो पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकती थी।
कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया से कहा, “मेरे बेटे को मारने वालों को सजा मिलनी चाहिए। जिकरा और उसके गैंग ने हमारे परिवार को बर्बाद कर दिया। हम चाहते हैं कि सरकार हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कुछ करे, ताकि कोई और परिवार हमारी तरह न टूटे।”
न्याय की माँग को लेकर लगे हस्तलिखित पोस्टर
सीलमपुर में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और पलायन की यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड की कहानी नहीं है। यह उस डर और असुरक्षा की कहानी है, जो एक समुदाय को अपने ही घरों से बेघर कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक हिंदू परिवार इस तरह डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे? और कब तक जिकरा जैसे अपराधी बेखौफ होकर गलियों में गुंडागर्दी करते रहेंगे?
दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सरदार राजा इकबाल सिंह ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 133 वोट मिले, जबकि कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार मनदीप को मात्र 8 वोटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस चुनाव से खुद को अलग रखा।
#WATCH | Raja Iqbal Singh elected as Delhi's new Mayor
He says, "The main goal will be to improve the sanitation system of Delhi, remove the mountains of garbage, solve the problem of water logging and provide all the basic and essential facilities to the people of Delhi. We… pic.twitter.com/9t8kNZw5Qi
बीजेपी ने चुनाव से पहले ही सरदार राजा इकबाल सिंह को मेयर और जय भगवान यादव को डिप्टी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। बता दें कि राजा इकबाल सिंह इस समय नगर निगम में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे।
अकाली राजनीति से बीजेपी
राजा इकबाल सिंह की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत शिरोमणि अकाली दल से हुई थी। उनका पारिवारिक संबंध भी अकाली राजनीति से गहरा रहा है। उनके ससुर जीटीबी नगर से पार्षद रहे हैं, जबकि उनके साले आज भी अकाली दल से जुड़े हुए हैं। खुद राजा इकबाल सिंह भी जीटीबी नगर से पार्षद रह चुके हैं।
सितंबर 2020 तक वे दिल्ली नगर निगम के सिविल लाइंस जोन के प्रमुख थे। इसी दौरान जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध हुआ और अकाली दल ने एनडीए से समर्थन वापस लिया, तब पार्टी ने इकबाल सिंह से इस्तीफा देने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके नौ महीने बाद बीजेपी ने उन्हें उत्तर दिल्ली नगर निगम का मेयर बना दिया।
जहाँगीरपुरी में कार्रवाई से आए थे सुर्खियों में
हनुमान जयंती के दिन 16 अप्रैल 2020 में दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद नगर निगम ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसमें अधिकांश निर्माण मुस्लिम समुदाय के थे। उस समय उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल सिंह ही थे। यह कार्रवाई उन्हें राजनीतिक रूप से चर्चा में ले आई थी।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले में 28 लोगों की मौत के बाद सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज कर दी है। इस हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों- आसिफ शेख और आदिल हुसैन थोकर उर्फ आदिल गुरी के मकानों को सुरक्षाबलों ने ध्वस्त कर दिया है। इनमें से एक आतंकी का घर पुलवामा के त्राल में है और दूसरे का अनंतनाग जिले के बिजबेहरा में है।
आदिल पहलगाम हमले का मुख्य आरोपित है। आदिल साल 2018 में वैध रूप से पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़कर आतंकी प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद वह पिछले साल जम्मू-कश्मीर लौट आया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह आतंकियों के स्थानीय गाइड का काम कर रहा था। दोनों आतंकियों पर 20-20 लाख रुपए के इनाम घोषित किए गए हैं।
#WATCH | Tral, J&K | Visuals of a destroyed house that is allegedly linked to a terrorist involved in the Pahalgam terror attack pic.twitter.com/luIH9rQIKR
इस बीच, इस्लामी आतंकी आदिल गुरी के परिवार वालों ने खुद को इस पूरे मामले से अलग बताया है। आदिल की बहन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरा एक भाई जेल में है और दूसरा मुजाहिद (इस्लाम के लिए लड़ने वाला या जिहाद करने वाला) है, लेकिन हमारा परिवार निर्दोष है। हमें इस हमले की कोई जानकारी नहीं है।”
#WATCH | Tral, J&K | "My brother is a Mujahideen," says the sister of a terrorist allegedly involved in Pahalgam attack whose house in Tral was demolished
"…My one brother is in jail, the other brother is a 'Mujahideen', and I also have two sisters. Yesterday, when I came here… pic.twitter.com/4sMr6GM1V4
आदिल की बहन ने आरोप लगाया है कि जब वह अपने घर में मौजूद थीं, तब सुरक्षाबल के जवान आए और उसे पड़ोसियों के घर जाने को कहा। इसके बाद जवानों ने मकान में बम जैसी कोई चीज रखकर उसे उड़ा दिया। उसका यह भी आरोप है कि परिवार के लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आदिल गुरी की गतिविधियाँ लंबे समय से संदिग्ध थीं। वह लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है।पहलगाम हमले के बाद से वह फरार है। उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी एजेंसियाँ अब आदिल गुरी के नेटवर्क और उसके पाकिस्तानी कनेक्शन की गहन जाँच में जुटी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में चुन-चुन कर हिंदुओं के नरसंहार से देश भर में गुस्सा है। इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं से कलमा पढ़वाया, उनके नाम और धर्म पूछा, कुछ को कपड़े भी उतरवाए और इसके बाद सिर्फ पुरुषों को गोली मार दी। मृतकों का पूरा परिवार आतंकित होकर परिवार के सदस्य का नरसंहार होता देखकर रहा। इसके बावजूद ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ इस नरसंहार को अलग दिशा देने की कोशिश की। वहीं, ‘द हिंदू’ अखबार ने भारत के खबरों में पाकिस्तान को तरजीह दी।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के हालिया लेख में एक बेतुकी कहानी को बढ़ावा देकर आतंक को उचित ठहराने का छुपा हुआ प्रयास किया गया है। इस में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि पहलगाम में भारतीय नागरिकों पर पाकिस्तान का हमला किसी-न-किसी रूप में बलूचिस्तान के क्वेटा में बलूच विद्रोहियों द्वारा जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण का ‘प्रतिशोध’ था।
इस लेख की लेखिका नीना गोपाल ने ‘कश्मीरी गर्मी का अंत: क्या पहलगाम जाफर एक्सप्रेस अपहरण का बदला है?’ शीर्षक से लिखा है। इस विचार स्तंभ में तथ्य और मामले की गंभीरता को पीछे छोड़ दिया गया है और झूठी बातों को प्राथमिकता दी गई है। दरअसल, यह पत्रकारिता नहीं है। यह पाकिस्तान की प्रेस विज्ञप्तियों को दोहराना है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखा गया लेख
दरअसल, झूठे नैतिक समानताओं का बनाकर करके भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को वैध बनाने का एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। बलूचिस्तान में जो लड़ाई है, वह पंजाबी आधिपत्य से खुद को अलग करने की बलूचों की लड़ाई है। हालाँकि, लेख के जरिए पाकिस्तानी सेना द्वारा आंतरिक मामलों में भारतीय हस्तक्षेप के दावों को इसमें सही ठहराने की कोशिश की गई है।
पाकिस्तान हमेशा से बलूचिस्तान के अलगाववादी विद्रोह में भारत का हाथ होने का दावा करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र किया, तब से पाकिस्तान अपने दावे को और सही ठहराने लगा। हालाँकि, इसके पक्ष में वह आज तक कोई सबूत दुनिया के सामने पेश नहीं कर सका। इसके बजाय वह इस्लामी आतंकियों को प्रश्रय देकर भारत में हमले जरूर करवाता रहा है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस का लेख अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाकिस्तानी राजनयिकों द्वारा संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के लेखों को हाथों-हाथ लेकर लहराया जाएगा और इसे सबूत बताकर पेश किया जाएगा और कहा जाएगा कि भारत आतंकवाद को उचित ठहराता है और पाकिस्तान में दखल देता है। यह लेख देश के लिए एक रणनीतिक मूर्खता है।
‘The Hindu’ का पाकिस्तान प्रेम
वहीं, हिंदू और भारतीय संस्कृति से नफरत के लिए पहचाना जाने वाला अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने भी खबरों के साथ कलाकारी की है। पहलगाम में नाम और धर्म पूछकर हिंदुओं का नर संहार किया गया और 28 लोगों को सरेआम हत्या कर दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाएगा और उनकी उम्मीद से बढ़कर सजा दी जाएगी।
इस खबर का हिंदू अखबार के लिए कम महत्व है। उसके लिए ज्यादा महत्व पाकिस्तान की खबरों का है। इसलिए उसने प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी से ऊपर पाकिस्तान की खबर को तरजीह दी। उसने लीड खबर में लिखा, ‘पाकिस्तान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया और भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंध को तोड़ा’। वहीं, उसके नीचे सिर्फ दो कॉलम में प्रधानमंत्री मोदी के छापा।
अखबार के इस बौद्धिक बदमाशी का सोशल मीडिया में जमकर आलोचना हो रही है। हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के डायरेक्टर एन. राम को टैग करते हुए सोशल मीडिया यूजर अंकुर सिंह ने लिखा, “एन. राम और कितना नीचे गिरोगे? द हिंदू तो पाकिस्तान के ‘द डॉन’ से भी बदतर हो गया है। देखिए, कितनी बेशर्मी से यह पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा चला रहा है।” वहीं, अनुपम मिश्रा नाम के एक यूजर ने लिखा कि अखबार में पाकिस्तान की ख़बर लीड लगी है और प्रधानमंत्री का बयान उसके नीचे है।
वामपंथी सोच वाला द हिंदू अखबार चीन का प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए भी कुख्यात रहा है। जून 2022 में चीन के राजदूत सन वेइदॉन्ग (Chinese Ambassador Sun Weidong) ने वामपंथी आउटलेट द हिंदू के मुख्यालय का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने संपादक सुरेश नंबथ और स्टाफ के अन्य सदस्यों से मुलाकात की थी। वेइदॉन्ग ने इस मुलाकात का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर किया था।
इतना ही नहीं, अखबार द हिंदू ने 1 जुलाई 2021 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की शताब्दी की वर्षगाँठ पर पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित किया था। यह पेड कंटेंट समाचार पत्र के तीसरे पेज पर था। दिलचस्प बात यह है कि चीन द्वारा जो पेड कंटेंट प्रकाशित किया गया था, वह नियमित रिपोर्ट की तरह ही दिखाई दे रहा था, लेकिन बारीकी से देखने पर पता चला कि यह चीन द्वारा पेड कंटेंट था।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए पुणे के दो दोस्तों, कौस्तुभ गुनबोटे और संतोष जगदाले का गुरुवार (24 अप्रैल 2025) की सुबह पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। गुनबोटे और जगदाले अपने परिवार के साथ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में छुट्टियाँ मनाने के लिए गए थे। इसी दौरान इस्लामी आतंकियों ने उनका धर्म पूछकर गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के समय दोनों का परिवार भी मौके पर मौजूद था। मौके पर उपलब्ध मौजूद 58 साल के कौस्तुभ गुनबोटे की पत्नी संगीता गुनबोटे ने बताया, “हमने डर के मारे माथे से टिकुली (बिंदी) हटा ली और ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा भी लगाया कि शायद हमारी जान बच जाए, लेकिन उन्होंने मेरे पति, उनके दोस्त और एक अन्य व्यक्ति को हमारे सामने ही बेरहमी से मार डाला।”
संगीता ने बताया कि जैसे ही हमला हुआ, वे सब घबराकर बाजार की ओर भागे। हालाँकि, उनकी जान नहीं बच पाई। वहीं, 54 वर्षीय संतोष जगदाले से आतंकियों ने कलमा पढ़ने के लिए कहा, लेकिन वे कलमा नहीं सुना पाए। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। किसी तरह घायलों को इनके परिजनों ने पहलगाम के मुख्य बाजार तक पहुँचाया। वहाँ अधिकारियों से संपर्क की गई।
कुछ ही देर में सेना और पुलिस के जवान मौके पर पहुँच गए। सेना के हेलिकॉप्टर से घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया। एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण संगीता से मिलने पहुँचे। वहीं केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल और राज्य मंत्री माधुरी मिसाल भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। मृतकों के पार्थिव शरीर गुरुवार तड़के 4 बजे फ्लाइट से पुणे लाए गए थे।
पश्चिम बंगाल के अशोकनगर कल्याणगढ़ में रहने वाली युवती प्रियंका दत्ता को लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उसने सोशल मीडिया पर पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में पोस्ट साझा किया था जिसमें आतंकियों को सबक सिखाने की बात कही थी। वीडियो के बाद युवती ने दावा किया है कि उसे टीएमसी से जुड़े मुस्लिमों ने अपहरण और रेप की धमकियाँ दी।
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में पीड़िता कहती हुई सुनाई दे रही है, “मैंने कश्मीर घटना पर बहुत सारी बातें शेयर की थीं। कुछ लोगों ने मेरे विचार का समर्थन किया, तो कुछ ने मुझे और मेरे समर्थकों को गालियाँ दीं। मैं अब भी यही कहूँगी कि आतंकी हमला बेहद निंदनीय था और बर्दाश्त करने लायक नहीं था।”
इस दौरान रोते हुए युवती ने कहा, “जब वे तर्क और दलीलों का उपयोग करके मुझसे नहीं लड़ सके, तो वे मेरे डीएम में गए और बार-बार मुझे बलात्कार की धमकियाँ दीं।” युवती ने आगे जोर देकर कहा, “उन्होंने मुझे मेरे घर से अगवा करने की धमकियाँ दी, मैसेंजर पर बार-बार कॉल किया और बलात्कार की धमकी दी।”
प्रियंका दत्ता ने एक आरोपी की पहचान एमजे मारूफ के रूप में की है। उनके द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में से एक में मारूफ को वॉयस नोट भेजते और कुछ ‘अश्लील शब्द’ लिखते हुए देखा गया। एक दूसरा आरोपित लड़का जिसने अपना छद्म नाम ‘मिस्टी माये दूष्टो छेला ‘ नाम से अकाउंट रखा है, उसके फेसबुक प्रोफाइल से टीएमसी से जुड़े होने का पता चलता है।
युवती का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें उसने कहा है कि पुलिस अधिकारी घर पर आए और धमकी दी कि उस वीडियो को डिलीट करें जिसमें आरोप लगाए गए हैं।
वो कह रही है कि अधिकारी उसके घर आए और धमकी दी कि अगर उसने वीडियो डिलीट नहीं किया तो उसे झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर उसने अपना वीडियो डिलीट नहीं किया तो उसके माता-पिता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
बिहार के मुजफ्फरपुर में ढाई महीने से लापता एक हिंदू लड़की को मुस्लिम युवक मोहम्मद आजाद ने बुर्का पहनाकर अदालत में पेश किया। इसको लड़की की माँ का आक्रोश फूट पड़ा और अदालत परिसर में बेटी को छुड़ाने के लिए पुलिस से उलझ गई। उसने कहा कि उसकी बेटी 16 साल की नाबालिग है और वह किसी भी हालत में अपनी बेटी को किसी मुस्लिम को नहीं सौंपेगी।
यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, यहाँ की एक हिंदू युवती 6 फरवरी 2025 को घर से लापता हो गई। परिजनों ने पता लगाया तो पता चला कि मोहल्ले का ही रहने वाला मोहम्मद आजाद उसको लेकर लापता हुआ है। इसके बाद युवती के परिजनों ने मोहम्मद आजाद और उसके भाई शहजाद के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया था।
हालाँकि, पुलिस युवती को ढाई महीने बाद बरामद की। इसके बाद पुलिस युवती का बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार (23 अप्रैल 2025) को कोर्ट लेकर आई। लड़की के साथ मोहम्मद आजाद भी था। अपनी बेटी को बुर्के में देखकर माँ का गुस्सा फूट पड़ा। वह बेटी को छुड़ाने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ उलझ गई और बेटी को उसे सौंपने के लिए कहा।
पीड़ित माँ ने कहा, “मैं किसी भी सूरत में अपनी बेटी को एक मुस्लिम परिवार के हाथ में नहीं सौंपूँगी।” परिजनों का कहना है कि लड़की की उम्र 16 साल है, लेकिन जाँच अधिकारियों ने मुस्लिम पक्ष से 2 लाख रुपए लेकर युवती की उम्र आधार कार्ड में 18 साल कर दी है। वहीं, कोर्ट परिसर में मौजूद हिंदू संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है।
पीड़िता की माँ ने यह भी कहा कि उसके पति की लगभग पाँच पहले मौत हो गई चुकी है। घर में उसके चार बच्चे हैं। उसने बताया कि साल 2023 में ही उसकी लड़की ने एक हिंदू युवक से कोर्ट मैरिज कर ली थी। उस लड़़के साथ वह लगभग डेढ़ साल तक रही और फिर आकर अपने मायके रहने लगी। इसी दौरान मोहल्ले में रहने वाला मोहम्मद आजाद उसे अपनी बातों में फँसा लिया।
हिंदू संगठन के लोगों ने पुलिसवालों पर आरोप लगाया है कि वह मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और एक हिंदू लड़की को बुर्का पहनाकर कोर्ट में पेश कर रही है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवती की सुरक्षा के लिए उसे बुर्का पहनाया गया था। हालाँकि, युवती के परिजन और हिंदू संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है।
इस मामले को लेकर वकीलों के दो गुट भी कोर्ट परिसर में ही भिड़ गए। वकीलों के एक गुट ने दूसरे गुट पर आरोप लगाया कि वे लव जिहाद मामले में मुस्लिम युवक का पक्ष ले रहे हैं। मानवाधिकार मामलों के वकील ने कहा कि मुजफ्फरपुर में लव जिहाद के मामले लगातार बढ़ रहे है। इस्लामी संगठन के कार्यकर्ता लगातार हिंदू लड़कियों को टारगेट कर उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं।
बता दें कि इससे पहले भी मुजफ्फरपुर में धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आ चुके हैं। 16 अप्रैल 2025 को मुस्लिम युवक एक हिंदू युवती का धर्मांतरण करा कर उससे निकाह करने की कोशिश कर रहा था। युवती का नाम सरस्वती था और उसका नाम बदलकर मुस्कान खान कर दिया गया था। इसी नाम से उसके नए दस्तावेज भी तैयार करवाए गए थे।
वहीं, 22 अप्रैल 2025 को शमशाद नाम का युवक सूरज बनकर नेहा नाम की हिंदू युवती को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। युवती ने जब उससे शादी करने की बात कही तो उसने अपना असली नाम शमशाद बताया और उसे धर्मांतरण करने के लिए कहा। जब युवती ने मना किया तो वह जान से मारने की धमकी देने लगा। इसके बाद युवती ने शमशाद के खिलाफ मामला दर्ज कराया।