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फैक्ट चेक: स्क्रॉल ने 65 लाख टन अनाज बर्बाद होने का फैलाया फेक न्यूज़, PIB ने खोली झूठ की पोल

लॉकडाउन के बीच कई मीडिया संस्थान सरकार का विरोध करने के लिए लगातार फेक न्यूज प्रसारित कर रहे है। ऐसे ही कई फर्ज़ी खबरों को प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम बेनकाब कर रही है। पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे द कारवां, इंडियन एक्सप्रेस, द वायर और स्क्रॉल सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों की फेक न्यूज का सच सबके सामने लाया है।

इन मीडिया संस्थानों ने अलग-अलग फेक न्यूज और वीडियों के माध्यम से सरकार की छवि खराब करने की लगातार कोशिश की है। रिपोर्टों का विश्वसनीयता से कोई सरोकार नहीं होता। वामपंथी वेबसाइट द स्क्रॉल ने एक बार फिर से इसी ट्रैक पर चलते हुए जनवरी से मई 2020 तक 65 लाख टन अनाज बर्बाद होने का झूठ फैलाया। हालाँकि, प्रोपेगेंडा पोर्टल की रिपोर्ट में परोसे गए झूठ की पोल खुद पीआईबी ने फैक्टचेक कर खोली है।

दरअसल, स्क्रॉल के एक लेख में दावा किया गया कि भारत ने जनवरी से मई 2020 तक 65 लाख टन अनाज बर्बाद कर दिया है। पीआईबी ने इसका फैक्ट चेक करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत है। यह लेख बेबुनियाद है और इसमें तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है। FCI द्वारा ट्रंजिट में स्टॉक भेजने को अन्न की बर्बादी के रूप में व्याख्या की गई है।

स्क्रॉल ने 3 जून, 2020 को एक लेख प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था: “India let 65 lakh tonnes of grain go to waste in four months, even as the poor went hungry” जिसमें यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस को लेकर लागू लॉकडाउन संकट के दौरान गरीबों और भूखों को खिलाने के लिए रखे गए अनाज के स्टॉक को सरकार उन्हें उपलब्ध कराने के बजाय गोदामों में रखकर सड़ा रही है। पीआईबी ने इसका फैक्ट चेक कर इनकी पोल खोल दी है।

गौरतलब है कि इससे पहले वामपंथी मीडिया पोर्टल स्क्रॉल ने ‘newsd’ नाम के यूट्यूब चैनल की एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया था कि बिहार के जहानाबाद में कुछ बच्चे खाना न मिलने के कारण लॉकडाउन में मेंढक खाने को मजबूर हैं। जिसके बाद वहाँ के जिलाधिकारी ने खुद इस दावे की जाँच की और इन अफवाहों का खंडन करके स्क्रॉल के प्रोपगेंडे को ध्वस्त कर किया।

बिहार सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग ने जानकारी साझा करते हुए कहा था कि वीडियो द्वारा किए गए दावों की जाँच करने पर, यह पाया गया कि बच्चों के घरों में पर्याप्त भोजन इकट्ठा था और इनमें से किसी के पास मेंढक पकड़ने या खाने का कोई कारण नहीं था। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को कुछ लोगों ने जिला प्रशासन की छवि धूमिल करने के लिहाज से बनाया था।

इस स्पष्टीकरण के बाद पीआईबी फैक्ट चेक की टीम ने भी स्क्रॉल द्वारा शेयर की गई वीडियो को फर्जी और असत्यापित बताया। इसके अलावा बिना तथ्यों की जाँच परख के निराधार दावे करने पर पीआईबी ने लिखा, “स्क्रॉल- एक प्रमुख मीडिया चैनल ने जहानाबाद में बच्चों के मेंढक खाने को लेकर झूठा दावा किया कि उनके पास खाने को कुछ नहीं है। इसके बाद वीडियो वायरल हुआ। मगर डीएम जहानाबाद की जाँच में ये दावा झूठा पाया गया और ये भी पता चला कि इन बच्चों के घरों में खाने को पर्याप्त सामग्री थी।”

पूजा भट्ट ने 70% मुस्लिमों की आबादी के बीच गणेश को पूजने वालों को गर्भवती हथनी की हत्या का जिम्मेदार बताया है

केरल में भूखी हथनी को स्थानीय लोगों द्वारा पटाखों से भरा अनानास खिला देने की घटना के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस पूजा भट्ट ने अपनी मूर्खता का उदाहरण पेश करते हुए इसके लिए हिन्दुओं को दोष दिया है। पूजा भट्ट का मानना है कि 70% मुस्लिम आबादी वाले केरल के मल्लपुरम में इस हत्या के लिए गणेश को पूजने वाले लोग जिम्मेदार हैं।

बॉलीवुड एक्ट्रेस पूजा भट्ट (Pooja Bhatt) ने इस गर्भवती हथनी की मौत के बहाने तमाम तथ्य और तर्कों को एक किनारे रखकर ट्वीट किया है –

“हम भगवान गणेश की पूजा करते हैं और हाथियों को मारते हैं और उनका दुरुपयोग करते हैं। हम भगवान हनुमान की आराधना करते हैं और बंदरों को जंजीरों में जकड़े हुए अजीबोगरीब करतब करते हुए देखकर खुश होते हैं। हम देवियों की पूजा करते हैं, लेकिन महिलाओं को गाली देते हैं, उन्हें पंगु बना देते हैं और कन्या भ्रूण हत्या भी करते हैं।”

खुद को ‘ईश्वर की अपनी धरती’ कहने वाले केरल राज्य में हुई इस गर्भवती हथनी की निर्मम हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हो रही है लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि इस हत्या को कोई हिन्दुओं की आस्था पर चोट करने का हथियार बनाकर इस्तेमाल करेगा।

पूजा भट्ट से कुछ सवालों में से सबसे पहला तो यह किया जाना चाहिए कि वह इस निष्कर्ष पर आखिर कैसे पहुँची कि मुस्लिम-वामपंथी गठजोड़ वाला यह केरल राज्य, जिसमें 300 वर्ष पहले तक 99% हिन्दू निवास करते थे, और जो अब वर्तमान में केरल की कुल 3.50 करोड़ आबादी का 54.7% भाग रह गए हैं, जहाँ 26.6% मुस्लिम और 18.4% ईसाई रहते हैं, उसी केरल के ही मल्लपुरम, जहाँ 70% मुस्लिम निवास करते हैं, वहाँ पर एक गर्भवती हथनी की मौत के पीछे ‘हिन्दुओं की आस्था’ वजह रही हो?

चूँकि, पूजा भट्ट ने इस अपराध के लिए धर्म को ही पहला मुद्दा ठहराने का प्रयास किया है इसलिए यदि तमाम सम्भावनाओं को नकार दें और इसमें पचास-पचास प्रतिशत भी दो धर्मों (हिन्दू-मुस्लिम) में से किसी एक के भी अपराधी होने को सत्य मान लिया जाए तब भी यही क्यों मान लिया जाए कि यह कार्य उन लोगों ने किया, जो गणेश की पूजा करते हैं? यह तथ्य तो स्वयं विरोधाभासी हो जाता है कि जो हिन्दू हाथियों को भी प्रकृति के साथ पूजनीय मानते हैं, वह एक गर्भवती हथनी के साथ इस तरह का कुत्सित प्रयास करेंगे।

जिस मानसिकता के साथ महेश भट्ट की बेटी ने यह ट्वीट किया है यदि उसी की गहराई में जाएँ तो पता चलता है कि हाथी और गाय की पूजा करने वाले उनका वध भी नहीं करते, दूसरा यह कि हिन्दुओं के अलावा किसी अन्य मजहब में स्त्रियों, प्रकृति और जानवरों को पूजने का जिक्र शायद ही किया गया हो।

अगर दूसरे पहलू पर ध्यान दें तो ‘ओकेजनली’ पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करने वाला बॉलीवुड का यह मानसिक दैन्य वर्ग वही है जो जिंदगीभर गोरेपन की क्रीम के विज्ञापनों का चेहरा बनते हैं और सोशल मीडिया पर ‘ब्लैक लाइफ़ मैटर्स’ वाले कैम्पेन चलाते नजर आते हैं। पूजा भट्ट के ट्वीट को देखकर सिर्फ और सिर्फ एक ही निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि जब इंसान सस्ती लोकप्रियता के लिए तथ्य और तर्कों से समझौता कर लेता है तो वह पूजा भट्ट हो जाता है।

ऐसे में पूजा भट्ट जैसी अभिनेत्रियों को अपने पशु-प्रेम की आड़ में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के प्रयास करने से बेहतर है कि वह मौन बनाएँ रखें। कम से कम लोगों में यह तो खुशफ़हमी रहे कि यह चुप रहकर ज्यादा ‘बड़े विचारक’ नजर आते हैं।

गौरतलब है कि केरल के मल्लपुरम में एक गर्भवती हथिनी के साथ पशु दुर्व्यवहार का बेहद क्रूर चेहरा सामने आया है। कुछ दिनों पहले ही एक हथिनी को कुछ लोगों ने ऐसा अनानास खिला दिया था, जिसमें विस्फोटक पटाखे भरे हुए थे। हथिनी को वह अनानास स्थानीय लोगों ने खिलाया था।

इसे खाने के बाद हथिनी के मुँह में ही यह अनानास फट गया, जिस कारण उसका मुँह बुरी तरह से जख्मी हो गया। इसके बाद वह दर्द में तड़पती हुई इधर-उधर भागी, उसने किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचाया और आखिर में एक नदी में मुँह डुबाए खड़ी हो गई जहाँ उसकी मौत हो गई। इस घटना से लोग दुखी और आक्रोशित हैं।

ISIS समर्थकों ने अमेरिका में हिंसक दंगों पर जताई खुशी, कहा- हमारे साथ किए बर्ताव की सजा दे रहा अल्लाह

संयुक्त राज्य अमेरिका के मिनिपोलिस में 46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की एक पुलिस अधिकारी के हाथों दुर्भाग्यपूर्ण हत्या के बाद भड़के दंगे और हिंसा अब भी जारी हैं। कुछ आईएसआईएस समर्थक और उससे सहानुभूति रखने वाले ऑनलाइन अराजक तत्व भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसने देश भर के सैकड़ों शहरों को अपना शिकार बना लिया है।

द सन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार टेलीग्राम चैट एप पर बिना नाम का एक आईएसआईएस समर्थक संयुक्त राज्य अमेरिका में कई जगहों पर हो रहे हिंसक प्रदर्शनों को लेकर खुशी जाहिर करने से खुद को रोक नहीं पाया।

बता दें कि इन विरोध प्रदर्शनों की वजह से अमेरिका में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है, ध्वस्त हो गई। ISIS समर्थक इसे ‘मजहब वालों के साथ किए जा रहे सलूक के लिए ईश्वरीय सहायता’ बताया है।

आईएसआईएस समर्थकों में से एक ने संयुक्त राज्य अमेरिका में कट्टरपंथियों के बंदूक रखने को आत्मरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि वो अपने साथ हथियार इसलिए रखते हैं, क्योंकि आगे उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

एक अन्य ISIS समर्थक ने लिखा, “उन्होंने सोमालिया, अफगानिस्तान, यमन, इराक, सीरिया और फिलिस्तीन में लोगों के साथ जो किया, अल्लाह उन्हें उसका मजा चखा रहा है। वहाँ के समुदाय के सभी लोगों को हर बुराई से बचाए।”

टेलीग्राम ऐप अज्ञात ISIS समर्थकों से भरा हुआ है, जो दूसरे धर्म के खिलाफ नफरत फैलाकर अशांति कायम कर रहा है। इसी तरह के एक और मैसेज में अमेरिका में हो रहे हालिया उथल पुथल पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि काफिरों के साथ जो रहा है, उसके लिए वो काफी खुश है। ISIS समर्थक ने लिखा कि ऐसा उन लोगों के साथ हो रहा है, जो हमारे साथ और अल्लाह के मजहब पर हमला करते हैं।

ISIS के एक समर्थक ने अमेरिका में हिंसा की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “हे अल्लाह, उन्हें ऐसे जलाओ जैसे उन्होंने हमारी ज़मीन को जलाया।”

बता दें कि पिछले दिनों 46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मिनिपोलिस में पुलिस अधिकारी के हाथों मौत हो गई। कथित तौर मिनिपोलिस में पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड की गर्दन पर लगभग 9 मिनट तक अपना घुटना रखा। जॉर्ज फ्लॉयड इस दौरान घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा। उसने यह भी कहा कि वह साँस नहीं ले पा रहा है। लेकिन पुलिस अधिकारी नहीं पिघला और फ्लॉयड की मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा पुलिस के प्रति भड़क गया और हिंसक रुप ले लिया।

शनिवार को यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया। जिसके कारण कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया। फिलाडेल्फिया में प्रदर्शनकारियों ने मियामी में राजमार्ग यातायात को बंद करने के दौरान एक मूर्ति को गिराने की कोशिश भी की।

दंगे को दौरान ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे भी लगाए गए। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। जिसमें देखा जा सकता है कि दंगाई लगातार इस्लामिक नारे लगा रहे हैं। वे ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के साथ ही ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए देखे और सुने जा सकते हैं।

वहीं दूसरे वीडियो में आप देख सकते हैं कि सैकड़ों की संख्या में सड़क पर प्रदर्शनकारी जमा हैं। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को अर्धनग्न अवस्था में देखा जा सकता है, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि विवादित पत्रकार और मी टू के आरोपित विनोद दुआ ने सोमवार (जून 1, 2020) को अपने डेली शो में भारतीयों को उसी तरह से हिंसा और दंगा करने के लिए उकसाया, जैसा कि फिलहाल अमेरिका में हो रहा है। उन्होंने कहा था कि भारतीय अपने अधिकार से अनजान हैं।

वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने ‘किट्टी पार्टी जर्नलिस्ट’ सबा नकवी के झूठ, घृणा, फेक न्यूज़ को किया बेनकाब, देखें Video

स्वघोषित ‘पत्रकार’ सबा नकवी के लिए मंगलवार (जून 2, 2020) को बेहद ही शर्मनाक क्षण रहा, जब नैशनल टेलीविजन पर उनका झूठ और प्रोपेगेंडा उजागर हो गया।

मंगलवार को टाइम्स नाउ के डेली शो ‘India Upfront’ में AAP नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुद्दे के साथ ही दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में भारत विरोधी प्रचारक उमर खालिद और पिंजड़ा तोड़ जैसे अल्ट्रा लेफ्ट विंग समूह के बारे में डिबेट चल रही थी।

डिबेट के दौरान, आम आदमी पार्टी के प्रति लगाव के लिए जानी जाने वाली सबा नकवी ने दिल्ली पुलिस को आरोपित AAP नेता ताहिर हुसैन सहित अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप लगाने के लिए यह कहते हुए फटकार लगाई कि दिल्ली पुलिस ने दंगा के संबंध में जो अपनी चार्जशीट में दावा किया है, उस पर किसी को विश्वास नहीं है। इतना ही नहीं, सब नकवी ने दंगे को ‘नागरिक अधिकार आंदोलन’ का नाम दिया और लगातार यह आरोप लगाती रही कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है।

सबा नकवी ने एक बार फिर से अपने पुराने बयान का सहारा लेकर समुदाय विशेष को पीड़ित बताते हुए कहा कि दंगे के दौरान सबसे अधिक प्रभावित मजहबी लोग ही हुए थे और और चार्जशीट में दिल्ली दंगों के दौरान समुदाय विशेष पर किए गए कथित अत्याचारों की अनदेखी की गई।

इसके अलावा, नकवी ने दावा किया कि AAP नेता ताहिर हुसैन समेत सभी आरोपितों के खिलाफ दायर आरोप पत्र मोदी सरकार द्वारा देश में हो रहे नागरिक अधिकारों के आंदोलन को कुचलने का एक प्रयास था। कथित पत्रकार ने यह भी कहा कि आरोप पत्र आरोपितों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाने के लिए एक कवायद है, विशेष रूप से मीडिया द्वारा। इसके साथ ही उन्होंने टाइम्स नाउ के पैनलिस्टों समेत सम्मानित वैज्ञानिक डॉ आनंद रंगनाथ पर बीजेपी का प्रवक्ता होने का आरोप लगाया।

सबा नकवी द्वारा इस तरह से अपने ऊपर किए गए व्यक्तिगत हमले के बाद डॉ आनंद रंगनाथन ने न केवल सबा नकवी के नफरत, सेलेक्टीविटी, झूठ और प्रोपेगेंडा को उजागर किया बल्कि उन्हें ‘किट्टी पार्टी जर्नलिस्ट’ (Kitty-party journalist) भी कहा। जिसके बाद आम आदमी पार्टी समर्थित पत्रकार को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

प्रोफेसर रंगनाथन ने कहा कि सबा नकवी ने पहले से ही सुनिश्चित कर लिया है कि कैसे फर्जी खबरों और प्रोपेगेंडा को फैलाना है। इसके साथ ही उन्होंने नकवी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “यह ऐसी पत्रकार हैं, जो हर रात अपनी खूबसूरत ऊँगलियों से पत्रकारिता के आदर्शों को नोंचती-खरोंचती हैं।”

“मैं ताहिर हुसैन को नहीं जानता, लेकिन वह (नकवी) निश्चित रूप हिस्ट्र्री शीटर हैं।” यह कहते हुए आनंद रंगनाथन ने AAP समर्थित ‘पत्रकार’ नकवी द्वारा फैलाए गए सभी झूठों के लिस्ट सामने रख दिए।

आनंद रंगनाथन ने कथित पत्रकार को बेनकाब करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने कश्मीर में भीड़ इकट्ठा करने के लिए प्रोपेगेंडा फैलाया था और गोधरा दंगों एवं फेक चर्च अटैक पर भी फर्जी खबर फैलाई थी। उन्होंने सांप्रदायिक घटनाओं पर रिपोर्टिंग में नकवी के चयन और पक्षपात को उजागर किया।

प्रोफेसर रंगनाथन ने कहा कि वह केवल हिंदू हेट क्राइम को लेकर उन्मत्त रहती हैं, जबकि हिन्दुओं पर मजहबी भीड़ द्वारा किए गए 150 हमलों पर वो चुप रहती हैं।

आगे उन्होंने कहा, “असल में वह काफिरों से नफरत करती है, मुझे नहीं पता कि वह हर सुबह कौन सी किताबें पढ़ती है जो उन्हें काफिर से इतना नफरत करने के लिए उकसाती है। बार-बार बेनकाब होने के बाद भी यह ‘किट्टी पार्टी जर्नलिस्ट’ शांत नहीं होने वाला है।”

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (जून 2, 2020) को बड़ी कार्रवाई करते हुए फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में 2 चार्जशीट दायर किया। इसमें आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया है। उसके भाई शाह आलम सहित 15 अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया है। क्राइम ब्रांच की टीम ने दस्तावेजों के साथ कड़कड़डूमा कोर्ट पहुँच कर चार्जशीट दाखिल की।

चाँदबाग और जफराबाद में हुए दंगों को लेकर ये चार्जशीट दायर की गई। ताहिर हुसैन पर इन दंगों को फंड करने और इसका मास्टरमाइंड होने की बात कही गई है। दंगों को भड़काने में 1.3 करोड़ रुपए से भी ज्यादा फूँके गए।

POK में बौद्ध धरोहरों के नुकसान का भारत ने लिया संज्ञान: अवैध कब्जे को खाली करने के लिए पाक को सख्त चेतावनी

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान में हाल ही में बौद्ध कलाकृतियों को नुकसान पहुँचाने और उन पर पाकिस्तानी झंडे उकेरने की घटना के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर पाकिस्तान को फटकार लगाने के साथ ही चिंता व्यक्त करते हुए पाकिस्तान से जल्द से जल्द PoK के सभी अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की सलाह दी है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव (Anurag Srivastava, spokesperson, MEA) ने पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय इलाके गिलगित-बाल्टिस्तान में बौद्ध हैरिटेज को नुकसान पहुँचाए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह काफी चिंता की बात है कि बौद्ध निशानियों को नष्ट किया जा रहा है और भारतीय क्षेत्र पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता को ऐसे खत्म किया जा रहा ।

उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत के हिस्से में आता है लेकिन पाकिस्तान ने इस पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासतों का अपमान करने वाली ऐसी घटनाएँ निंदनीय हैं। हमने इस अमूल्य पुरातात्विक धरोहर को दोबारा स्थापित करने के लिए और इसे संरक्षित करने के लिए विशेषज्ञों से माँग की है कि वह तत्काल वहाँ पहुँचें।

उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले गिलगित-बाल्टिस्तान के चिलास इलाके में 800 ईसवी की बौद्ध शिलाओं और कलाकृतियों को क्षतिग्रस्त कर उन पर पाकिस्तानी झंडे उकेरे गए थे। ये नक्काशियाँ और कलाकृतियाँ पुरातत्व की दृष्टि से बहुत अहम हैं।

विदेश मंत्रालय ने सख्त चेतवानी देते हुए कहा – “हमने पाकिस्तान से एक बार फिर कहा है वह अवैध रूप से कब्जा किए सभी क्षेत्रों को तत्काल रूप से खाली कर दे और वहाँ रहने वाले लोगों के सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों का उल्लंघन करना बंद करे।”

दिआमेर-ब्हाशा बाँध बनाना चाहता है पाकिस्तान

स्थानीय लोग काफी लम्बे समय से इन बौद्ध कलाकृतियों के संरक्षण की माँग कर रहे हैं। ये कलाकृतियाँ इन्हीं स्थानीय लोगों द्वारा ढूँढी भी गईं थीं। इन कलाकृतियों को नुकसान पहुँचाने के पीछे एक प्रमुख वजह चीन के खर्चे पर पाकिस्तान द्वारा तैयार किया जाने वाला दिआमेर-ब्हाशा बाँध बताया जा रहा है।

बौद्ध प्रतीकों को नष्ट करने की ऐसी घटना इससे पहले 2001 में सामने आई थी, जब बुद्ध की नक्काशीदार प्रतिमा को नष्ट कर दिया गया था। कई सालों तक किसी ने भी तालिबान के डर से इस प्रतिमा को दोबारा बनाने की कोशिश नहीं की। यह बलुआ पत्थर की प्राचीन प्रतिमा कभी विश्व में बुद्ध की सबसे ऊँची मूर्ति हुआ करती थी।

गत 13 मई को ही पाकिस्तान सरकार ने चीन की एक कंपनी के साथ बाँध निर्माण के लिए 442 बिलियन रुपए की डील साइन की। इसके बाद से इस मुद्दे को लेकर विवाद छाया हुआ है। बताया जा रहा है कि इस बाँध के निर्माण से यहाँ पर मौजूद 50 गाँव डूब जाएँगे।

14 मई को, भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में बाँध बनाने के पाकिस्तान और चीन के फैसले का विरोध किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था।

भारत ने इस परियोजना पर चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ अपने विरोध और चिंताओं को साझा किया है। इससे पहले, भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (Economic Corridor) के हिस्से के रूप में पीओके में परियोजनाओं का विरोध किया है।

कई स्थानीय मुस्लिम भी सोशल मीडिया पर इस बाँध के निर्माण का विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि वे एक समृद्ध विरासत के नष्ट होने से दुखी हैं, क्योंकि बाँध बनने के साथ ही ‘इंडिक इतिहास’ की संपत्ति भी पानी में डूब जाएगी।

‘हम कश्मीरी तिरंगे पर पेशाब करते हैं’: ‘प्राइड मार्च’ से खफा आकिब ने माँ सीता को कहे अपशब्द, पुलवामा दोहराने की दी धमकी

भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर राज्य में आतंकवाद और अलगाववादियों के नेटवर्क पर गहरी चोट की। इसके बाद जहाँ पर भारत का झंडा फहराना भी मुश्किल हुआ करता था, वहाँ कुछ लोगों ने ‘प्राइड मार्च’ निकालने की योजना बनाई। हालाँकि, कश्मीर के कई स्थानीय लोगों को ये पसंद नहीं आया। जब से ‘प्राइड कश्मीर’ ने ये ‘प्राइड मार्च’ निकालने की बात की है, इस्लामी कट्टरपंथियों की तरफ से उन्हें केवल गालियाँ ही पड़ रही हैं।

एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आकिब दार नामक व्यक्ति माँ और बहन की गाली देते हुए कह रहा है कि तू कश्मीर का हो ही नहीं सकता क्योंकि तू हिन्दू नस्ल का है। साथ ही उसने इसे सूअर की नस्ल भी बताया और धमकी दी कि अपनी जबान से वो कश्मीर का नाम न लें। साथ ही उसने ‘प्राइड कश्मीर’ के ‘प्राइड मार्च’ के आयोजक को ‘हिंदुस्तान का कुत्ता’ बताया और कहा कि वो तिरंगे पर रोज पेशाब करता है और भारतीय सेना की कश्मीरियों से ‘फटती’ है।

साथ ही आकिब ने धमकाया कि कश्मीर का नाम लेकर तू क्या उखाड़ लेगा, तेरी बहन %$# देंगे और पेज को रिपोर्ट करवा के बंद कर देंगे। साथ ही उसने अफजल गुरु को आतंकी कहने पर आपत्ति जताई और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और शहीद भगत सिंह को ‘सूअर का बच्चा’ बताया। उसने हिंदुस्तान की माँ $%२ देने की धमकी दी और कहा कि भारतीय सेना खौफ में ‘कुत्ते की तरह’ जीती है कश्मीर में क्योंकि उन्हें ‘डर’ रहता है कि वो कभी भी मर सकते हैं, बम गिर सकता है।

डिस्क्लेमर: ट्वीट में आकिब द्वारा दी गई गालियों का ऑडियो है, जो बहुत ही गन्दा है लेकिन हम प्रमाण के तौर पर लगा रहे हैं। ऑपइंडिया ऐसे किसी भी कृत्य का न समर्थन करता है और न बढ़ावा देता है।

साथ ही उसने खुद को कश्मीरी बताते हुए पुलवामा हमले का महिमामंडन किया और इस तरह के और हमलों की भी धमकी दी। इसके बाद वो हिन्दू देवी-देवताओं को गाली देने पर उतर आया और उसने सीता माँ को अपशब्द कहे। आकिब ने धमकी दी कि तुम सब मरोगे और सेना के पुलवामा की तरह कभी भी ‘चीथड़े उड़ सकते’ हैं। उसने स्पष्ट बताया कि वो पाकिस्तानी नहीं है, कश्मीरी है। ट्विटर पर कई लोगों ने आकिब की इस भाषा पर आपत्ति जताई।

सबसे ज्यादा कट्टरपंथियों ने इन्स्टाग्राम पर इस मार्च को निशाना बनाया। एक यूजर ने लिखा कि ये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा राज्य की डेमोग्राफी में बदलाव करने की साजिश का एक हिस्सा है। उसने लिखा कि उसे LGBT समुदाय से कोई समस्या नहीं है लेकिन साथ ही उसने इसे कश्मीरी पंडितों का प्रोपगंडा करार दिया। साथ ही उसने लिखा कि कश्मीरी इस चीज को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ ने तो इसे ‘कैंसर’ तक बता दिया।

एक ने तो माँ की गाली देते हुए इसे ‘टट्टीपना’ बताया। एक ने तो मुफ्त की सलाह दी कि ‘प्राइड कश्मीर’ मार्च निकालने की बजाए कश्मीरी लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए। बता दें कि अगर अनुच्छेद 370 के प्रावधान जब तक राज्य में लागू थे, तब तक वहाँ समलैंगिकता अपराध की श्रेणी में आता था। एक यूजर ने लिखा कि ‘प्राइड मार्च’ एक ऐसी चीज है, जो इजराइल से सीखी गई है। उसने कहा कि ये इजराइल में फेल हो गया था, यहाँ भी हो जाएगा।

एक ने तो लिखा कि भारत भले ही संविधान के नियम बदल दे लेकिन वो पैगम्बर मुहम्मद के नियमों को नहीं बदल पाएगा। उसने दावा किया कि इस्लाम में समलैंगिकता हराम है और ये सब ‘वायरस’ बाहर से आ रहे हैं। अपने डीपी में कम्युनिस्ट झंडा लगाए एक यूजर ने दावा किया कि ये सब गैर-इस्लामिक चीजें हैं और उसे रिप्लाई देते हुए उसके एक फॉलोवर ने कहा कि इससे प्लेग, टिड्डी सहित कई अन्य आपदाएँ आएँगी।

मरकज और देवबंद के संपर्क में था दिल्ली दंगे का मुख्य आरोपित फैजल फारुख, फोन रिकॉर्ड से हुआ खुलासा

दिल्ली दंगों की जाँच में बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस को जाँच के दौरान पता चला है कि इन दंगों का निजामुद्दीन मरकज कनेक्शन भी हो सकता है, क्योंकि जिस राजधानी स्कूल की छत से बड़ी गुलेल के जरिए एसिड बम आदि फेंके गए थे उस स्कूल का मालिक फैजल फारुख निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के संपर्क में था। इसके साथ ही दंगे से 1 दिन पहले वह देवबंद भी गया था।

दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।

पुलिस ने बताया कि जाँच के दौरान यह पाया गया कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों के संपर्क में था। उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं।

दिल्ली पुलिस ने स्कूल और स्कूल के मालिक की दिल्ली दंगों में संदिग्ध भूमिका की जाँच के चलते स्कूल मालिक फैसल फारुख समेत 18 को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही राजधानी स्कूल को सील भी कर दिया गया था। बता दें कि दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में लगभग 53 लोगों की मौतें हुई, वहीं घटना में कुल 400 लोग घायल हुए थे।

गौरतलब है कि 24 फरवरी को दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हुई हिंदू विरोधी हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पहले तो करावल नगर खजुरी खास स्थित ताहिर हुसैन के मकान को और फिर शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाया था, क्योंकि यह दोनों ही इमारतें हिंदू इलाके में ऊँची और मुस्लिम मालिकों की थीं।

यही वो राजधानी स्कूल है, जिसकी सबसे ऊपरी छत को दंगाइयों ने अपना केन्द्र बनाते हुए वहाँ बड़ी गुलेल को लगाया था। इसके साथ ही बड़ी संख्या में ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम और तेजाब की बोतलों को छत पर पहले ले ही तैयारी के साथ रखा गया था। दंगाइयों ने पहले बगल वाले डीआरपी स्कूल को निशाना बनाया। राजधानी स्कूल दंगाइयों का मुख्य अड्डा बना और सारी गोलीबारी, पत्थरबाजी और बमबारी यहीं से हुई। इसके बाद डीआरपी स्कूल को जला कर ख़ाक कर दिया गया।

स्कूल के कंप्यूटर और मँहगे सामान लूट लिए गए। फारुख के इशारे पर इन दंगाइयों ने पास ही एक दूसरी इमारत में भी आग लगा दी।

फैज़ल के इशारे पर ही डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल, अनिल स्वीट्स और पास बनीं 2 बड़ी पार्किंग को आग के हवाले किया गया था। पुलिस को स्कूल के गार्डों, मैनेजर और कर्मचारियों के अलावा कई और गवाह मिले हैं। इस मामले की जाँच के दौरान जो तथ्य सामने आया है, उससे एक बार फिर दिल्ली का निजामुद्दीन मरकज सवालों के बड़े घेरे में आ जाता है।

ऑपइंडिया की वो 3 ग्राउंड रिपोर्ट, जिससे राजधानी स्कूल हुआ था बेनकाब: दिल्ली दंगों में निजामुद्दीन कनेक्शन की कहानी

गत फरवरी माह में हिन्दू-विरोधी दिल्ली दंगों की जाँच में दिल्ली पुलिस को इन दंगों का सम्बन्ध निजामुद्दीन मरकज से होने के भी प्रमाण मिल रहे हैं।

राजधानी पब्लिक स्कूल (Rajdhani Public School, Shiv Vihar) की छत से बड़ी गुलेल के जरिए पत्थर और एसिड बम आदि फेंके गए थे। इस स्कूल का मालिक फैजल फारुख (Faisal Farooque) के मोबाइल से इस बात के अहम सबूत मिले हैं। फैजल दंगों से ठीक पहले निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी, देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था।

दंगों के मामलों में दूसरी चार्जशीट राजधानी स्कूल केस में दायर की गई है, जो कि 5 मार्च को दर्ज किया गया था। यह मामला राजधानी पब्लिक स्कूल, शिव विहार, न्यू मुस्तफाबाद, दिल्ली के बाहर 24 फरवरी को हुए दंगों के लिए दर्ज किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में राजधानी पब्लिक स्कूल (Rajdhani Public School, Shiv Vihar) के मालिक फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में घटित हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे एक वीडियो में से एक शिव विहार के राजधानी पब्लिक स्कूल का भी सामने आया था। इस स्कूल का मालिक ही फैज़ल फारुख है।

ऑपइंडिया ने इन दंगों की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान दिल्ली के शिव विहार स्थित राजधानी स्कूल और उसके आस पास के क्षेत्र से कुछ जानकारियाँ जुटाई थीं, जो कुछ इस तरह से हैं –

  1. फरवरी 24, 2020 को दंगाइयों ने पहले तो करावल नगर खजुरी खास स्थित ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) के मकान को और फिर शिव विहार स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल को अपना केन्द्र बनाया था, क्योंकि यह दोनों ही इमारतें हिंदू इलाके में ऊँची और मुस्लिम मालिकों की थीं।
  2. राजधानी स्कूल को एक ‘अटैक बेस’ की तरह प्रयोग में लाया गया। वहाँ दंगाइयों को संरक्षण मिला था।
  3. इस स्कूल की छत पर एक बडा गुलेल सेट किया गया था।
  4. छत पर बड़ी संख्या में ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम तथा तेजाब की बोतलों को पहले से ही तैयारी के साथ रखा गया था।
  5. इस गुलेल का इस्तेमाल पत्थर और पेट्रोल बम बरसाने के लिए किया गया। यहीं से पूरे क्षेत्र में बमबारी की गई, पत्थरबाजी हुई, गोली चलाई गई।
  6. ये गुलेल आम गुलेल की तरह नहीं बल्कि लोहे की रॉड पर रबड़ लगाकर बड़े आकार में बनाया गया था।
  7. स्कूल की छत से बगल में हिन्दुओं के एक स्कूल को दंगाइयों ने तहस-नहस कर दिया।
  8. स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था।
  9. स्कूल की छत को अपना केन्द्र बनाकर हजारों दंगाइयों ने हिंदुओं के घरों और संपत्तियों को निशाना बनाकर उनको तबाह किया था।

दंगाइयों ने अनिल स्वीट्स से जुड़ी एक इमारत को भी जला दिया था, जो सड़क के दूसरी तरफ राजधानी स्कूल के सामने मौजूद थी। यहीं अनिल स्वीट्स के एक कर्मचारी दिलबर नेगी अंदर फंसे हुए थे, जिन्हें काटकर जिन्दा आग में झोंक दिया गया था और उनका राख हुआ शव पुलिस को बाद में बरामद हुआ था।

इस मामले में फैज़ल फारुख, जो कि राजधानी पब्लिक स्कूल का मालिक है, सहित अठारह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

अभी और राज सामने आएँगे: नवाजुद्दीन की भतीजी ने चाचा पर लगाए यौन शोषण के आरोप तो बोली पत्नी अंजलि

अपनी पत्नी अंजलि के बयानों के कारण नवाजुद्दीन सिद्दीकी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी का हाल ही में अपनी पत्नी के साथ तलाक हुआ है। उसके बाद उनकी भतीजी ने नवाजुद्दीन के भाई पर यौन शोषण के आरोप लगाए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्नी अंजलि ने कहा है कि अगले कुछ दिनों और भी राज़ खुलने की सम्भावना है। बता दें कि उन्होंने अपना नाम आलिया सिद्दीकी रखा था लेकिन उन्होंने बताया था कि अब वो फिर से ‘अंजलि’ बन गई हैं।

अंजलि ने आरोप लगाया है कि नवाजुद्दीन का पूरा परिवार पैसे के बल पर सच्चाई को दबाने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें काफी समर्थन मिल रहा है और अभी तो सिर्फ शुरुआत ही है। उन्होंने दावा किया कि आगे जो बहुत सारे खुलासे होने वाले हैं, वो सबको चौंका देंगे। अंजलि ने ट्विटर पर लिखा कि इस परिवार में वो अकेली नहीं हैं, जो इतना कुछ झेल रही थीं। उन्होंने पूछा कि पैसे के बल पर सच्चाई कितनी दबेगी और वो किस-किस को घूस खिलाते फिरेंगे?

 भतीजी ने उनके छोटे भाई मीनाज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस मामले में दिल्ली के जामिया नगर पुलिस थाने में FIR दर्ज हुई है, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुईं यातनाओं के बारे में बताया है। उन्होंने उस सम्बन्ध में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया था:

“उस वक्त मेरी उम्र 9 साल थी, जब मेरे चाचा ने मेरे साथ गलत काम करने और मुझ पर बुरी नीयत रखने की शुरुआत कर दी थी। वो अक्सर मुझे गलत तरह से छूने की कोशिश किया करते थे। जब चाचा ने इस तरह की हरकतें शुरू कीं, तो पहले मुझे कुछ समझ नहीं आया करता था, पर वो सब बहुत अजीब लगता था। जब मैं इस बारे में पापा या दादी को बताती तो वो यकीन नहीं करते। बाद में जब मैं बड़ी हुई तो मुझे एहसास हुआ कि यह अलग तरह का टच था।”

इससे पहले नवाजुद्दीन पति-पत्नी में तलाक हो गया था। अंजना किशोर पांडेय अथवा आलिया सिद्दीकी के मुताबिक, नवाज का भाई शमास भी उनकी समस्याओं के पीछे इन सबके पीछे एक वजह है। उनका कहना है, “मैंने वापस अपना नाम अंजना किशोर पांडेय कर लिया है। मैं नहीं चाहती कि कोई बार-बार ये याद दिलाए कि मैं किसी और की पहचान का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रही हूँ।” वो अब भी अपने पति के परिवार पर निशाना साधते रहती हैं।

अपडेट: नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई शम्स नवाब सिद्दीकी ने अपने भाई का बचाव करते हुए ट्वीट किया है।

शम्स ने लिखा कि कोई कैसे कानून का मजाक बनाते हुए एक ही घटना के बारे में अलग-अलग स्टेटमेंट देकर रिपोर्ट करवा सकता है जबकि पहले से ही मामला किसी दूसरी हाई कोर्ट में दर्ज है।

जबड़ा टूटने से एक और हथिनी की हुई थी मौत, वन अधिकारियों को शक- उसे भी खिलाए गए पटाखे!

केरल में गर्भवती हथिनी की मृत्यु के बाद अब कोल्लम जिले से एक और हथिनी की मौत का मामला प्रकाश में आया है। हालाँकि, ये घटना लगभग 1 माह पुरानी है। लेकिन केरल का मामला तूल पकड़ने के बाद इस घटना के बारे में भी अधिकारियों ने आज चर्चा की और बताया कि उस हथिनी की मौत भी मुँह में चोट आने से हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि केरल जैसा ही एक मामला अप्रैल में कोल्लम जिले से आया था। उस समय पठानपुरम के जंगलों के किनारी इलाके में उन्होंने एक हथिनी को गंभीर अवस्था में पाया था। अधिकारी के मुताबिक, उसके जबड़े टूट चुके थे और वह कुछ खा-पी नहीं पा रही थी।

उनके अनुसार, वह हथिनी बेहद कमजोर थी। ऐसे में उसकी सूचना पाने के बाद जब वन अधिकारी उसके पास गए तो वो पहले दिन भागकर अपने झुंड में मिल गई। लेकिन अगले दिन वो फिर उस झुंड से अलग हो गई।

हथिनी की हालत देकर उसे उपयुक्त उपचार दिया गया। लेकिन अफसोस, उसके घाव इतने अधिक गहरे थे कि उसकी कुछ समय बाद मौत हो गई।

एक अन्य अधिकारी की मानें तो, इस संबंध में पड़ताल शुरू हो चुकी है। ऐसा संदेह है कि हथिनी को खाने में पटाखे रखकर खिलाया गया, जो उसके मुँह में जाकर फट गए। अधिकारियों ने कहा कि वह फिलहाल मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

वन अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में उनके लिए जाँच कर पाना बेहद मुश्किल होता है। वे बताते हैं कि ऐसे मामलों में सबसे अधिक परेशानी जानकारी जुटाने में आती है। क्योंकि एक हाथी दिन में कई किलोमीटर चलता है, इसलिए ये पता लगाना कि घटना कहाँ घटी? बहुत मुश्किल काम है।

बता दें, ये वाकया वन अधिकारियों के संज्ञान में तब आया था जब हथिनी अपने झुँड से बिछड़ी। वह भी कई हफ्तों के बाद। इससे उनके लिए जाँच और कठिन हो गई।

गौरतलब है कि हाल ही में केरल से एक प्राणी पर मानवीय अत्याचार की एक ऐसी खबर आई थी, जिसने चारों ओर सबको झकझोर दिया। दरअसल, केरल के मल्लपुरम के पलक्कड़ में एक अत्याचारी ने गर्भवती मादा हाथी को धोखे से अनानास में पटाखे रख कर खिला दिया था, जो उसके मुँह में ही फट गया। अत्यंत पीड़ा और असहनीय दर्द के कारण गर्भवती मादा हाथी नदी के पानी में जाकर खड़ी हो गई और वहीं उसकी मौत हो गई।

इसके बाद नीलांबुर के सेक्शन फारेस्ट ऑफिसर मोहन कृष्णन ने जनता के साथ इस घटना को साझा किया। हाथी को बचाने के लिए जो रैपिड एक्शन टीम गई थी, उसका नेतृत्व वही कर रहे थे। उन्होंने भावुक होकर मलयाली में फेसबुक पर लिखा:

“वो 20 महीने बाद अपने बच्चे को जन्म देने वाली थी। उसे भूख लगी थी, उसे क्या पता था कि क्रूर इंसानों के जिस भोजन को वो उनका प्यार समझ कर ग्रहण करेगी, वो सिर्फ़ एक छलावा है, जो दोहरी जिंदगियों का भक्षक बन जाएगा। मेरे सामने अब भी उसका चेहरा घूम रहा है। उसने पानी में ही कब्र बना ली। अब हम उसे लेकर जा रहे हैं, दफनाने के लिए। वो उसी ज़मीन के नीच हमेशा के लिए सोएगी, जहाँ उसने बचपन से हँसा-खेला था। मैं और क्या कर सकता हूँ? स्वार्थी मानव जाति की तरफ से उसे कहता हूँ- बहन, क्षमा करो।”