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जो लाइट्स ऑफ करेगा, उनके दरवाजे पर चॉक से निशान बनेगा: TMC अपनाएगी हिटलर वाला तरीका

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर अक्सर तानाशाही के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन अबकी बंगाल में कोरोना की महामारी पर भी राजनीति हो रही है। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस पर आरोप लगा है कि पार्टी रविवार (अप्रैल 5, 2020) को उन सभी घरों को चिह्नित करेगी, जहाँ लाइट्स ऑफ किए जाएँगे। साथ ही धमकी भरे अंदाज़ में आज रात 9 बजे लाइट ऑफ करने वालों के दरवाजों पर निशान लगाने की बात भी कही गई है। तृणमूल से जुड़े प्रसून भौमिक की फेसबुक पोस्ट से तो ऐसा ही प्रतीत होता है।

प्रसून भौमिक ने अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया है कि 5 अप्रैल को रात 9 बजे ऐसे लोगों के घरों के दरवाजे पर निशान लगा कर चिह्नित किया जाएगा, जहाँ लाइट्स ऑफ होंगे। बता दें कि पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की लगातार हत्या होती रही है। वहाँ ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने और भाजपा की रैलियों में भाग लेने वालों के ख़िलाफ़ तृणमूल कार्यकर्ता खुलेआम गुंडागर्दी करते हैं। प्रसून ने दावा किया है कि 5 अप्रैल को जिन घरों की लाइट्स ऑफ होंगी, उनके दरवाजे पर चॉक से निशान बनाया जाएगा।

भौमिक बंगाल थिएटर से जुड़ा हुआ है और कवि है। उसने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ कोलकाता’ से पढ़ाई की है। साथ ही तृणमूल कॉन्ग्रेस से जुड़ा हुआ है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की थी कि सभी देशवासी 5 अप्रैल को रात 9 बजे घर की सभी लाइटें बंद कर, घर के दरवाजे पर या बालकनी में खड़े रहकर 9 मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएँ। पीएम मोदी ने कहा था कि घर की सभी लाइटें बंद कर चारों तरफ जब हर व्यक्ति एक-एक दीया जलाएगा, तब प्रकाश की उस महाशक्ति का एहसास होगा जिसमें एक ही मकसद से हम सब लड़ रहे हैं, ये उजागर होगा।

प्रसून भौमिक की फेसबुक पोस्ट में दी गई धमकी

पत्रकार कंचन गुप्ता ने ट्विटर पर प्रसून भौमिक की इस धमकी की तरफ ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि जहाँ एक तरफ बंगाल के सांसद पार्लियामेंट में ‘फासिज्म के लक्षण’ गिनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में वही तरीका अपनाया जा रहा है जिसे कभी हिटलर जैसे तानाशाह ने अपनाया था। टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा ने जून 2019 में लोकसभा में अपने पहले ही भाषण में ‘भारत में फासिज्म के 7 लक्षण’ गिना कर मोदी सरकार पर निशाना साधा था।

AAP नेता आशु खान गिरफ्तार, जामिया नगर में हिंसा के दौरान लोगों को भड़का रहा था

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 15 दिसम्बर को जामिया नगर और न्यू फ्रेंड्स कालोनी के पास हुई हिंसा मामले में जामिया नगर इलाके के एक स्थानीय नेता आशु खान को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार कर उसे शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अदालत में पेश किया। अदालत ने खान को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब पुलिस उससे आगे की पूछताछ कर रही है।

आशु खान आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ा हुआ है और जामिया नगर इलाके का स्थानीय नेता है। उसके खिलाफ जामिया नगर थाने और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में दो अगल-अलग केस दर्ज हुए थे। दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे लोगों को जब पुलिस ने हटाया था तब भी आशु खान भीड़ लेकर आया था। पुलिस के मुताबिक, आशु खान के खिलाफ जामिया हिंसा के दौरान लोगों को भड़काने का आरोप है।

गौरतलब है कि 15 दिसंबर को जामिया में हुई हिंसा में शुरुआती रिपोर्ट में जिन 6 लोगों पर आरोप लगा था उनमें आशु खान भी था। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ खान, स्थानीय नेता मुस्तफा और हैदर, आईसा सदस्य चंदन कुमार, एसआईओ सदस्य आसिफ तन्हा और सीवाईएसएस सदस्य कामिस उस्मानी का नाम भी शामिल था।

FIR के मुताबिक, आसिफ और आशु खान प्रदर्शनकारियों को उकसा रहे थे और नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारी CAA और NRC विरोधी नारे लगा रहे थे और मथुरा रोड की ओर बढ़ रहे थे। बाद में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और पुलिसकर्मियों और डीटीसी बसों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। 

इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने तिकोना पार्क और जाकिर नगर पुलिस बूथ को भी तोड़ दिया था। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने 70-80 मोटर बाइकें भी तोड़ दीं, कई बसों को आग लगा दी थी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था और आँसू गैस के गोले छोड़े थे।

मरकज का असर फिर भी कोरोना से बेहतर तरीके से लड़ रहा भारत: डाटा और ग्राफ से समझें गणित

रणनीतिकारों और विशेषज्ञों ने यह मानना शुरू कर दिया था कि देश में 21 दिनों के राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए वुहान कोरोना वायरस पर काफी हद तक काबू पा लिया जाएगा, लेकिन रुढ़िवादी इस्लामी संगठन तबलीगी जमात ने देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस संक्रमण का भारी मात्रा में प्रसार किया। नतीजा यह हुआ कि भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्य सैनिकों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया। इस एक मामले ने कोरोना की लड़ाई में देश को कई दिन पीछे धकेल दिया है।

भारत में पिछले दो दिनों में रिपोर्ट किए गए कोरोनवायरस के 95% से अधिक मामलों में दिल्ली में तबलीगी जमात संगठन के साथ ताल्लुकात पाए गए हैं। हालाँकि इससे जुड़े लोगों की पहचान करने और उन्हें तत्काल प्रभावी ढंग से क्वारंटाइन करने के सरकार के अथक एवं सतत प्रयासों की वजह से कल फिर से कोरोना वायरस के फैलने की स्थिति में गिरावट देखने को मिली। इसके बाद लोगों के बीच फिर से ये उम्मीद जगी कि अगर हम इसे इसी तरह बरकरार रखते हैं, तो भारत जल्द ही पटरी पर लौट सकता है।

ब्रुकिंग्स इंडिया की रिसर्च डायरेक्टर शमिका रवि ने ट्वीट्स की एक श्रृंखला में आज सांख्यिकीय आँकड़ों के कुछ ग्राफ को भारत में कोरोना वायरस से लड़ने में विकास दर में एक स्वागत योग्य टर्न बताया। इन ग्राफ में दिखाया गया है कि भारत ‘कोरोना कर्व’ को ‘फ्लैट’ करने की तरफ़ बढ़ रहा है। वह मानती हैं कि भले ही इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी, लेकिन अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो यह जल्द ही भारत के लिए कुछ राहत लेकर आएगा। 

बता दें कि शमिका इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल यानी आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य भी रह चुकी हैं। फिलहाल भारत के कोरोना ग्राफ पर ब्रुकिंग्स इंडिया ने लगातार नजर बनाई है। 

पहले ग्राफ में शमिका 4 अप्रैल 2020 तक उन देशों के साथ भारत की तुलना करती है, जहाँ 50,000 से अधिक कोरोना पॉजिटिव मामले है। यह ग्राफ उन देशों को दर्शाता है जहाँ प्राय: हर दो, तीन और पाँच दिनों में कोरोना वायरस के मामले दोगुने हुए हैं।

ग्राफ में अमेरिका और स्पेन जैसे देशों की तुलना में जहाँ नियमित रूप से हर 2-3 दिन में दोगुने मामले देखने को मिलते हैं, 23 मार्च को भारत में हर 3 से 5 दिन में दोगुने होने वाले मामलों की वृद्धि दर में कमी देखने को मिली। बता दें कि भारत में कोराना के केस 23 मार्च से पहले 3 दिन में दोगुने हो रहे थे। 23 मार्च से 29 मार्च तक 5 दिन में दोगुने हो रहे थे। 29 मार्च के बाद से कोरोना के मामले 4 दिन में दोगुना हो रहे थे।

रिसर्च के आँकड़ों के पीछे शमिका वजहें भी गिनाती हैं और कहती हैं कि इस गिरावट के पीछे की बहुत बड़ी वजह केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उठाए कदम थे। केंद्र और राज्य सरकारों ने 12 मार्च के बाद ही जगह-जगह पर एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए थे।

जैसे:-

  • स्कूलों को बंद करना
  • ट्रैवल एडवाइजरी
  • एपिडेमिक एक्ट लागू करना
  • लोगों के जमा होने पर एडवाइजरी जारी करना
  • समय-समय पर हाथ धोने की सलाह
  • सोशल डिस्टेंसिंग की गाइडलाइन जारी करना
  • राज्य सरकारों द्वारा क्वारंटाइन का सख्ती से पालन करना

29 मार्च के अपडेट के अनुसार, भारत में संक्रमण की दर में एक बार फिर से वृद्धि हुई है। यह 4-5 दिन में दोगुनी हो रही है। शमिका रवि का कहना है कि ये वृद्धि शायद 13 मार्च से 15 मार्च के बीच दिल्ली में आयोजित तबलीगी जमात के मजहबी आयोजन का प्रभाव है।

Graph depicting the Coronavirus spread in India shared by Shamika Ravi

दूसरे ट्वीट में शमिका रवि ने दो ग्राफ शेयर किए। पहले ग्राफ में ऑरेंज लाइन भारत में 21 मार्च से 4 अप्रैल तक कोरोना के कुल संक्रमित मामलो को दर्शाती है। जैसा कि हम ग्राफ में देख सकते हैं कि भारत ने 31 मार्च से 2 अप्रैल तक मामलों में अचानक उछाल देखा। अचानक आया उछाल संभवत: तबलीगी जमात के मामलों के कारण है। 

Graph depicting the Coronavirus spread in India shared by Shamika Ravi

हालाँकि, ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन यह दर्शाता है कि 2 अप्रैल के बाद 4 अप्रैल तक पीली रेखा समतल है। इसका मतलब यह है कि पिछले दो दिनों के आँकड़ों के अनुसार भारत के लिए ग्रोथ कर्व में तेजी आई है। इसके लिए सरकार के अनुकरणीय अथक प्रयासों को श्रेय दिया जा सकता है, जो ऐसे लोगों को सफलतापूर्वक पहचान कर उन्हें तुरंत क्वारंटाइन कर देते हैं।

Graph depicting the Coronavirus spread in India shared by Shamika Ravi

दूसरा ग्राफ दिखाता है कि भारत में पिछले पाँच दिनों में कोरोना संक्रमण मामलों में 20.6% की वृद्धि हुई है।

शमिका ने ट्वीट में भी दो ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन के जरिए समझाया है कि भारत में कोरोना संक्रमण पुष्टि के मामलों में दैनिक विकास दर 13.05% है। पहले ग्राफ में 0 से यानी कि जब भारत में पहला मामला सामने आया था, तब से 4 अप्रैल तक के मामलों को दर्शाया गया है। वहीं दूसरे ग्राफ में भारत में नए पुष्टि किए गए मामलों के 5-दिवसीय मूविंग एवरेज का पुनर्मूल्यांकन है।

Graph 1
Graph 2

इसके बाद के ट्वीट में शमिका रवि ने प्रमुख हॉटस्पॉट देशों और भारत में चीनी कोरोना वायरस से हुई कुल मौतों को दिखाया। ग्राफ के अनुसार सभी चुनिंदा देशों में, 4 अप्रैल को प्रति मिलियन मृत्यु दर भारत में सबसे कम रहा।

Graph depicting the Coronavirus spread in India shared by Shamika Ravi

अपने आखिरी ट्वीट में, रवि ने कुल मिलाकर पुष्टि किए गए मामलों को 3 श्रेणियों में बाँटा:-

  • 4 अप्रैल को कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या
  • 4 अप्रैल को ठीक हुए कोरोना मरीजों की कुल संख्या
  • 4 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से हुई कुल मौत
Graph depicting the Coronavirus spread in India shared by Shamika Ravi

यदि हम इन आँकड़ों पर विश्वास करें, तो भारत के कोरोना वायरस प्रसार कर्व पिछले दो दिनों में फिर से समतल हो गए हैं। इससे उम्मीद बँधती है कि 2 दिवसीय उछाल बड़े पैमाने पर तबलीगी जमात सुपर स्प्रेडर प्रभाव के कारण था।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक पिछले दो दिनों में सामने आए कोरोना वायरस संक्रमण के 647 पॉजिटिव मामले तबलीगी जमात के कार्यक्रम से संबंधित हैं। पिछले दो दिनों में इसमें काफी वृद्धि देखने को मिली है। पिछले दो दिनों में 664 नए केस आए हैं, जिसमें से गुरुवार को 328 और शुक्रवार को 336 केस सामने आए।

मौलाना साद बेताज बादशाह, असली चेहरा दिखाया तो मुसीबत में पड़ जाओगे: मौलाना की मीडिया को धमकी

नियम-कानूनों को ताक पर रख दिल्ली के निजामुद्दीन में मजहबी सम्मेलन का आयोजन करने वाले तबलीगी जमात के मौलाना साद पर शिंकजा कसना देश के दूसरे मौलानाओं को रास नहीं आ रहा है। तहफ्फुज-ए-दीन द्वारा जारी एक वीडियो में एक मौलाना ने मीडिया को धमकी देते हुए कहा है कि तुमने जमात का असली रूप नहीं देखा है, अग़र असली रूप देखा तो मुसीबत में पड़ जाओगे।

मौलाना की यह खुलेआम धमकी देश के उन बड़े मीडिया हाउसों को नाम लेकर दी गई है, जिन्होंने तबलीगी जमात या फिर मौलाना साद से जुड़ी हुई खबरों को प्रमुखता से दिखाया है। तहफ्फुज-ए-दीन इंडिया द्वारा जारी इस वीडियो में आप देख सकते है कि महफूज उर रहमान नामक मौलाना ने तबलीगी जमात को बदनाम करने का आरोप लगाकर देश के कई बड़े मीडिया चैनलों को अपना निशाना बनाया है।

स्वराज्य की खबर के मुताबिक रहमान ने वीडियो के माध्यम से कहा कि देश के मीडिया हाउस तबलीगी जमात और कोरोना वायरस की आड़ में प्रोपेगेंडा फैलाकर एक समुदाय को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं। रहमान ने अपने संदेश में ZEE TV, आज तक, ABP न्यूज़, इंडिया टीवी जैसे अन्य कई टीवी चैनलों का नाम लिया।

इससे पहले मौलाना रहमान ने धमकी भरे लफ्जों में कहा कि मीडिया ज़बान सँभाल कर काम करे। तबलीगी जमात और मरकज को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। मौलाना साद अमीर-उल-हिंद है और वे समुदाय के बेताज़ बादशाह हैं। आप मु###नों के जज्बातों के साथ खिलवाड़ मत कीजिए। मौलाना ने कहा कि मैं मीडिया को बता देना चाहता हूँ कि अगर आप किसी भी जमात के सदस्य का साक्षात्कार करेंगे तो आपको पता चलेगा कि वह एक समय अपराधी हुआ करता था। इसलिए अगर ये लोग अपनी वास्तविकता पर आ गए तो आपके लिए बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

मौलाना ने कहा कि “मैं रजत शर्मा से पूछता हूँ कि आपके पास क्या सबूत है कि तबलीगी जमात ने कोरोना वायरस फैलाया? मौलाना साद के बुलावे पर ये लोग इकट्ठा हुए थे।” मौलाना ने यह भी कहा कि जमात विश्वभर से विदेशी मुद्रा लाकर भारत में अच्छा प्रचार करके देश को फायदा पहुँचा रही है। रहमान ने यह भी कहा कि जमात की पहुँच देश के छोटे शहरों और कोने-कोने तक है। इस तबलीगी जमात का मकसद बिगड़े हुए लोगों को सही लोगों बनाना है। मौलाना ने आगे यह भी कहा कि जमात सामाजिक सुधार, शराब के खिलाफ लड़ाई आदि के लिए काम करता है। इसलिए मीडिया को जमात की वास्तविकता के बारे में पता लगाना चाहिए।

लॉकडाउन का असर: वाराणसी-कानपुर में गंगा जल की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार

एक ओर जहाँ कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए घोषित देशव्यापी लॉकडाउन से आम जन-जीवन ठहर गया है, वहीं इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इसी बहाने प्रकृति को भी थोड़ा राहत मिली है। सोशल मीडिया पर भी देखा जा रहा है कि लोग दिल्ली-पंजाब आदि शहरों के साफ और चमकदार आसमान की तस्वीर शेयर कर रहे हैं। इस देशव्यापी बंद के कारण कई कारखाने-फैक्ट्री बन्द होने का असर अब हिन्दू आस्था के सबसे बड़े प्रतीक गंगा नदी पर भी नजर आने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी और कानपुर जैसे शहरों में गंगा नदी भी काफी स्वच्छ हो गई है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने कहा कि गंगा नदी की धारा में ऑक्सीजन का स्तर काफी हद तक बढ़ गया है और पानी की गुणवत्ता बेहतर हुई है। अब यह पानी नहाने लायक है।

कालिका सिंह ने कहा, “जब से 21 दिन के देशव्यापी बंद की घोषणा की गई है, वाराणसी में सड़कें पूरी तरह से वीरान हैं क्योंकि लोग घर के अंदर हैं। सड़कों पर सिर्फ उन्हीं लोगों के वाहन दिख रहे हैं जिन्हें आवश्यक सेवाओं में लगाया गया है। हवा की गुणवत्ता (AQI) में भी सुधार हुआ है और वायु गुणवत्ता सूचकांक के अनुसार अब यह संतोषजनक हो गया है।”

उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि गंगा में ऑक्सीजन का स्तर 8.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से ऊपर है जो अनुशंसित 7 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक है। इस कारण यह पानी अब नहाने के लिए उपयुक्त है।

वहीं, कानपुर में परमट मंदिर के महंत अजय पुजारी ने कहा, “चूँकि सभी कारखाने लॉकडाउन के कारण बंद हैं, इसलिए गंगा नदी स्वच्छ हो गई है।” उन्होंने कहा कि पुजारी पहले पवित्र गंगा नदी के जल के दूषित होने के कारण इस में स्नान नहीं करते थे। लेकिन, बंद के कारण साफ़ नदी में अब वे पिछले एक सप्ताह से गंगा नदी में स्नान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री के गंगा की सफाई को लेकर चलाए गए नमामि गंगे अभियान की तारीफ करते हुए मंदिर के पुजारी ने कहा कि सीसामऊ नाला, जो लाखों लीटर गंदा पानी नदी में छोड़ता था, पिछले साल नमामि गंगे परियोजना के तहत पूरी तरह से साफ किया गया था। इससे जल प्रदूषण में भी कमी आई है, लेकिन वर्तमान में हम जो सुधार देख सकते हैं वह अभूतपूर्व है। लॉकडाउन ने निश्चित रूप से गंगा नदी के स्वास्थ्य में सुधार किया है जो सरकार की कई परियोजनाएँ नहीं कर पा रही थीं।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी ने देशवासियों से 21 दिन तक के लॉकडाउन की अपील की है। इस बीच सिर्फ आवश्यक सेवाएँ ही जारी रहेंगी। हालाँकि, एक बड़ा वर्ग अभी भी ऐसा है जो मजहबी कारणों से देशव्यापी बंद में सहयोग करने के बजाए शासन-प्रशासन के साथ-साथ आम जनता के लिए भी मुसीबतें खड़ी करते हुए देखा जा रहा है।

गाजियाबाद से दबोची गई 5 विदेशी जमाती महिलाएँ, पनाह देने वालों पर हो सकती है कार्रवाई

गाजियाबाद से इंडोनेशिया के 10 नागरिक हिरासत में लिए गए हैं। ये तबलीगी जमात के आयोजनों में शिरकत करने आए थे। इनमें 5 महिलाएँ 5 पुरुष हैं। ये सभी लोग 10 लोग जनवरी को इंडोनेशिया से भारत आए थे। हालाँकि, इस दौरान ये लोग निज़ामुद्दीन स्थित जमात के मरकज़ में नहीं गए थे। लेकिन, देश के कई शहरों में इनका मूवमेंट रहा है। फ़िलहाल ये सभी 10 लोग साहिबाबाद इलाक़े में छिप कर रह रहे थे। पुलिस ने इन सभी को क्वारंटाइन के लिए भेजा है। इनको पनाह देने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है।

गाजियाबाद से कई और जमाती मिले

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज़ से दो हजार से ज्यादा निकाले गए थे। करीब 1500 लोग यहॉं से देश के अलग-अलग प्रदेशों में गए हैं। इनमें से कई की अभी भी तलाश की जा रही है। मरकज देश में कोरोना संक्रमण का केंद्र बनकर उभरा है। पिछले कुछ दिनों में जो मामले सामने आए हैं उनमें से ज्यादातर जमात से जुड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि तबलीगी जमात के सदस्य और उनके संपर्क में आए अब तक करीब 22 हजार लोग देश भर में क्वारंटाइन किए जा चुके हैं।

जाँच एजेंसियों ने देश को कोरोना संकट में डालने वाले रुढ़िवादी इस्लामी संगठन तबलीगी जमात के फंडिंग के स्त्रोत की जाँच शुरू कर दी है। जमात से फंडिंग के स्त्रोत और विदेशियों की डिटेल माँगी है। जमात ने पिछले तीन सालों में कितना टैक्स भरा है, उसके बैंक खातों में कहाँ-कहाँ से कितने पैसे आए हैं, इन सब डिटेल्स के साथ पैन नंबर का विवरण भी माँगा है। इसके अलावा मरकज प्रमुख मौलाना साद और 6 अन्य सदस्यों से उन विदेशियों और भारतीय जमातियों की लिस्ट भी माँगी गई है, जिन्होंने 12 मार्च के बाद मरकज में शिरकत की थी।

जमात के सदस्य अपनी करतूतों को लेकर भी चर्चा में है। गाजियाबाद के अस्पताल में नर्सों के सामने नंगा होकर इन्होंने हदें पार कर दी थी। इसके अलावा यूपी के अलग-अलग जिलों से जमातियों द्वारा हॉस्पिटल में बदतमीजी किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया। मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल और हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में इनके उपद्रव के बाद पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। इनलोगों ने सड़कों पर, अस्पतालों में, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर थूक कर संक्रमण तक फैलाने की कोशिश की है।

जमात और उनके संपर्क में आए 22000 क्वारंटाइन, तमिलनाडु में संक्रमण के 74 नए मामलों में से 73 मरकज के

दिल्ली में हुए तबलीगी जमात के आयोजन ने देश में कोरोना वायरस संक्रमण के हालत को भयावह कर दिया है। जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज संक्रमण का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। देश का कोई राज्य इससे अछूता नहीं है। तमिलनाडु से संक्रमण के जो 74 नए मामले सामने आए, उनमें 73 के तार मरकज से ही जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही राज्य में संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 485 हो गई है। इनमें से 422 मामलों का स्रोत एक ही है। तबलीगी जमात। यह जानकारी राज्य की स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश ने शनिवार को दी।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 601 नए कोरोना पॉजिटिव केसेस आने के बाद देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2902 हो गई है। संक्रमण से 68 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 1023 नए मामलों में से 30 प्रतिशत तबलीगी जमात से संबंधित हैं जो देश के 17 राज्यों में फैले हैं।

लव अग्रवाल ने यह भी बताया कि संक्रमण के कुल मामलों में से 9% जहाँ 0-20 साल की उम्र के हैं, वहीं 42% 21-40 की उम्र के, 33% 41-60 साल के बीच और 17% की उम्र 60 साल से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि COVID-19 केसेस में वृद्धि की दर भारत में अन्य देशों की अपेक्षा कम है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि देश भर में तबलीगी जमात के सदस्य और उनके संपर्क में आए 22 हजार लोग अब तक क्वारंटाइन किए गए हैं।

याद रहे कि देश भर से तब्लीगी जमात के लोगों द्वारा मेडिकल स्टाफ और नर्सों के साथ बदसलूकी की खबरों के बीच शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने बताया था कि सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर स्वास्थ्यकर्मियों आदि पर हो रहे हमलों के विषय में कठोर एक्शन लेने और कोरोना महामारी के विरुद्ध जारी इस लड़ाई में शामिल डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

मुनीर ने नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर रेप किया, मौलवियों ने जबरन इस्लाम कबूल करवा निकाह करवाया

पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले अत्याचार कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी जारी हैं। गरीब नाबालिग हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर उनका जबरन निकाह करवाकर इस्लाम में उनका धर्म परिवर्तन करने की घटनाएँ आम हो चुकी हैं।

पाकिस्तान के बहावलपुर में एक और हिंदू नाबालिग लड़की को अगवा कर जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने का नया मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते 13 मार्च को बहावलपुर के मुनीर अहमद ने 15 वर्षीय नाबालिग हिन्दू लड़की को अगवा कर लिया। इसके बाद फैसलाबाद ले जाकर मुनीर ने उसके साथ बलात्कार किया।

इस घटना के बाद मौलवियों ने उस बच्ची को जबरन इस्लाम कबूल कराकर उसकी शादी बलात्कारी मुनीर अहमद के साथ शादी करा दी। नाबालिग पीड़िता के पिता नहीं है। ट्विटर पर वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान नामक एक अकाउंट ने विडियो शेयर किया है जिसमें पीड़ित बच्ची की माँ कहा रही हैं, “हम मजदूर हैं। मेरे 6 बच्चे हैं। मुनीर अहमद ने जबरन ने मेरी बेटी को अगवा किया है।”

पीडिता की माँ का कहना है कि उन्हें डर था कि मुनीर उनकी दूसरी बेटियों को भी अगवा कर सकता है, इसलिए उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और अब वो एक रिश्तेदार के घर पर आ गई हैं। उन्होंने कहा कि 15 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन पुलिस-प्रशासन हम गरीब हिंदूओं की मदद नहीं कर रहा है।

पीड़िता की माँ ने बताया कि जब मुनीर अहमद ने उनकी बच्ची को अगवा किया तब उन्होंने इसकी सूचना गाँव के मुखिया को दी। लेकिन गाँव के मुखिया ने उनकी मदद करने और पुलिस को बताने की बजाए उनसे कहा कि आरोपित मुनीर अहमद बेटी को वापस करने के लिए 4 लाख रुपए माँग रहा है। उन्होंने कहा हम गरीब हैं। फिरौती नहीं दे सकते थे। मेरी बेटी को छुड़ाने के लिए मेरे भतीजे ने हिंदू समुदाय से मदद माँग कर रुपए इकट्ठे किए। लेकिन आरोपित मुनीर अहमद ने फिरौती की रकम लेकर भी बच्ची को नहीं छोड़ा। बच्ची को वापस लौटाने की बजाए आरोपित मुनीर अहमद ने कहा कि बच्ची ने इस्लाम कबूल कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग के अनुसार 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में एक हजार से ज्यादा ईसाई और हिंदू लड़कियों को जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया जाता है। पीएम इमरान खान भी इन घटनाओं पर हमेशा चुप रहते हैं और कोई ठोस कदम नहीं उठाते है। अतंरराष्ट्रीय स्तर पर अक्सर पीएम इमरान खान कहते हैं कि उनके देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति अच्छी है, लेकिन वास्तविकता नाबालिग हिन्दू लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएँ बयान करती है।

काबुल गुरुद्वारा अटैक: मास्टरमाइंड ISKP सरगना मौलवी अब्दुल्ला गिरफ़्तार, 4 अन्य पाकिस्तानी भी दबोचे गए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के गुरुद्वारे पर हुए हमले का मास्टरमाइंड दबोचा गया है। अफ़ग़ानिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऑपरेशन में आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट खोरासन प्रोविंस (ISKP) के सरगना मौलवी अब्दुल्ला उर्फ़ असलम फ़ारूक़ी को गिरफ्तार किया। उसी ने पूरे हमले की साजिश रची थी। वह पाकिस्तानी नागरिक है और पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वो तहरीक-ए-तालिबान में सक्रिय रहा। फिर आईएसकेपी का प्रमुख बना। उससे पहले ये जिम्मेदारी अबू उमर खोरासनी निभा रहा था।

अब्दुल्ला ने ISKP की कमान अप्रैल 2019 में सँभाली थी। अफ़ग़ानिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ‘नेशनल डायरेक्टरेट ऑफ़ सिक्योरिटी (NDS)’ ने एक प्रेस रिलीज का जरिए खोरासन के सरगना के गिरफ़्तारी की पुष्टि की है। एजेंसी ने बताया कि असलम फ़ारूक़ के तार लश्कर के साथ-साथ हक्कानी और पाकिस्तान के अन्य आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। उसके अलावा 4 अन्य पाकिस्तानी आतंकियों को भी गिरफ़्तार किया गया। ये भी आईएसआईएस से जुड़े हैं। इनमें मोसदुल्लाह और ख़ान मोहम्मद खैबर पख्तूनख्वा का है, वहीं सलमान कराची का और अली मोहम्मद इस्लामाबाद का रहने वाला है।

बता दें कि काबुल में गुरुद्वारा पर 25 मार्च को हमला किया गया था। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी। इस्लामिक स्टेट ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। हमले के दौरान एक फिदायीन ने खुद को उड़ा लिया था। इसके बाद उसके साथी अंधाधुंध फायरिंग करते हुए गुरुद्वारे में घुस गए और लोगों को बंधक बना लिया। जवानों ने आतंकियों को ढेर कर लोगों को मुक्त कराया था। हमले के बाद ISKP ने फिदायीन हमलावर का नाम अबू खालिद-अल-हिन्दी बताया था। अबू खालिद कोई और नहीं केरल दुकानदार मोहम्मद साजिद था, जो चार साल पहले चौदह लोगों के साथ ISIS ज्वाइन करने निकल गया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी जिसका एक और नाम अब्दुल खयूम भी है, केरल के कासरगोड का रहने वाला है, जो साल 2015 में अफगानिस्तान में जाकर इस्लामिक स्टेट का आतंकी बन गया था।

कुछ मीडिया रिपोर्ट में खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि ये आतंकी पहले भारतीयों को मारने के लिए काबुल स्थित इंडियन एंबेसी को निशाना बनाने आए थे। लेकिन वहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखकर गुरुद्वारे को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने इस तरह के हमले को लेकर आगाह कर रखा था। इसमें कहा गया था कि अफगानिस्तान से भारत को बाहर ​निकालने के मकसद से आतंकी साजिशें रची जा रही है। इन इनपुट के आधार पर एंबेसी की सुरक्षा के इंतजाम सख्त कर दिए गए थे। इसके कारण आतंकी अपने मूल उद्देश्य को अंजाम नहीं दे पाए।

इस मुश्किल वक्त बिहारी मजदूरों का सहारा बना सब्जी बेजने वाला IIM का वो लड़का

जहाँ एक तरफ लोग आईआईएम से निकलने के बाद महँगी मौकरी और ऐशो-आराम की ज़िन्दगी चुनते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा भी शख्स है जिसने यहॉं से निकलकर सब्जी बेचना पसंद किया। जी हाँ, कौशलेन्द्र कुमार ने किसी बड़ी कम्पनी को ज्वाइन करने की जगह बिहार जाकर अपने जड़ों को और मजबूत करने में ध्यान लगाया। वहाँ उन्होंने एक एग्री-बिजनेस कम्पनी खोली। आज उनकी कम्पनी का टर्नओवर 5 करोड़ है और वो 20 हज़ार किसानों के रोजगार का माध्यम भी बने हैं।

अब कौशलेन्द्र कोरोना वायरस की आपदा के बीच भी जनसेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने उन मजदूरों की और उनके परिवारों की मदद करने का निश्चय लिया है, जो इस महामारी के प्रकोप के बीच अपनी रोजमर्रा की ज़रूरतों को पूरा करने में भी विफल रहे हैं। इनमें से बहुतों को तो ठीक से पता भी नहीं है कि देश-दुनिया में क्या हो रहा है? ये वो लोग हैं जो अस्थायी टेंटों औ रफुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं। लॉकडाउन के बीच उन्हें काम भी नहीं मिल पा रहा है और परिवार भी चलाना है। ऐसे में उनकी मदद के लिए कौशलेन्द्र का कौशल्या फाउंडेशन आगे आया है।

कौशल्या फाउंडेशन न सिर्फ़ उनलोगों को हाइजेनिक भोजन पहुँचा रहा है, बल्कि उन्हें कोरोना वायरस के ख़तरों के प्रति जागरूक भी कर रहा है। उन्हें सुरक्षा और बचाव के सामान भी दिए जा रहे हैं। इस काम में कई स्वयंसेवक लगाए गए हैं। उनके बचाव की भी व्यवस्था की गई है और उन्हें इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। कौशल्या फाउंडेशन इस दौरान लोगों के सहयोग का भी आकांक्षी है और आप इस लिंक पर जाकर अपनी क्षमतानुसार वित्तीय सहयोग कर सकते हैं। फाउंडेशन ने कहा है कि लोगों द्वारा सहयोग की गई राशि का उपयोग इन गरीबों की सहायता में किया जाएगा।

कौशल्या फाउंडेशन ने बताया है कि कैसे ग़रीबों की मदद की जा रही है

इस समय जब पूरा देश इस महामारी से जूझ रहा है, हमें कौशलेन्द्र जैसे लोगों का सहयोग करने की ज़रूरत है जो गरीबों के बारे में सोच रहे हैं और उनके भले के लिए काम कर रहे हैं। कौशलेन्द्र ने एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। कौशलेन्द्र अपने भाई के साथ मिल कर कौशल्या फाउंडेशन का सञ्चालन करते हैं। उन्होंने इसकी स्थापना बिहार के किसानों के सशक्तिकरण के लिए की थी। उनकी कम्पनी में फ़िलहाल 700 लोग काम करते हैं।