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तबलीगियों पर युवक ने की टिप्पणी, मो. सोना ने गोली मार हत्या की: CM योगी ने दिया रासुका लगाने का निर्देश

तबलीगी जमातियों ने एक ओर जहाँ देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद कोरोना वायरस के संक्रमण के आँकड़ों को अचानक से तेजी से बढ़ाया, वहीं इस पर बात करने के कारण प्रयागराज के युवक को अपनी जान गँवानी पड़ी।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में रविवार (अप्रैल 05, 2020) सुबह करेली थाना क्षेत्र के बक्शी मोड़ा में गोली मारकर एक युवक की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद घटनास्थल से भाग रहे हमलावर को भीड़ ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने गिरफ्तारी करने के बाद जाँच शुरू कर दी है।

जमातियों पर टिप्पणी के कारण हुई हत्या

पुलिस की शुरुआती जाँच में पता चला है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में बढ़ोत्तरी के लिए जिम्मेदार जमातियों पर इस युवक ने टिप्पणी कर दी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए आरोपितों पर रासुका (NSA) लगाने का निर्देश दिया है। साथ ही पीड़ित परिवार को ₹5 लाख मुआवजा देने की भी घोषणा  की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के करेली थाना क्षेत्र के बक्सी मोड़ा गाँव निवासी लोटन निषाद रविवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे किसी काम से घर से बाहर निकले थे। वह एक चाय की दुकान पर थे, तभी उनका जमातियों पर टिप्पणी करने को लेकर गाँव के ही निवासी मोहम्मद सोना से विवाद हो गया।

विवाद बढ़ने पर दोनों के बीच मारपीट शुरू हो गई। इसी बीच मोहम्मद सोना ने तमंचे से उन पर फायर कर दिया। गोली लगने से लोटन निषाद की मौत हो गई। फायरिंग की आवाज सुनकर आस-पास के लोग दौड़े और मोहम्मद सोना को पकड़ लिया और उसकी पिटाई की। सूचना पाकर पहुँची पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इलाके में तनाव की आशंका के चलते पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है।

UP के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन के दौरान चाय की दुकान के खुले होने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह नियमों का उल्लंघन है और नियमों के पालन में लापरवाही बरती गई है।

पुलिस ने युवक के शव को कब्जे में ले लिया। इसके बाद आइजी रेंज समेत पुलिस के उच्‍च अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। मामले की तहकीकात की जा रही है।

‘हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते, हमें अल्लाह पर विश्वास है’ – 37 मौतों के बाद भी खुली हैं मस्जिदें

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश भर में लॉकडाउन की घोषणा तो की है लेकिन मस्जिदों को आधिकारिक रूप से बंद नहीं किया गया है। इमरान खान लोगों से अपील कर रहे हैं कि सोशल डिस्टैन्सिंग का ख्याल रखें और मस्जिदों में बड़ी संख्या में जमा ना हों। समुदाय विशेष बहुल मध्य पूर्व में भी मस्जिदें बंद कर दी गई हैं, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने मौलवियों के सामने घुटने टेक दिए। अब तक वहाँ कोरोना संक्रमण के ढाई हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 37 लोगों की जानें जा चुकी हैं।

इन मौलवियों ने सरकार के लॉकडाउन और सोशल डिस्‍टेसिंग के नियमों को ताक पर रख दिया है। मौलवियों ने कोरोना महामारी को गंभीरता से नहीं लिया और मजहबी के नाम पर इंसान का इंसान से अलगाव को रोकने से इनकार कर दिया है। AFP की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद के निवासी अल्ताफ खान का कहना है, “हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते हैं, हम अल्लाह पर विश्वास करते हैं। जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की मर्जी से होता है।”

वहीं कुछ मौलवियों ने लोगों को मस्जिदों में नमाज अता करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस्लामाबाद के एक अन्य आदमी ने लोगों के मस्जिद जाकर नमाज अता करने पर बात करते हुए कहा कि लोग अल्लाह से मदद माँगने के लिए मस्जिद में जाते हैं क्योंकि वे डर गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि लोगों को मस्जिदों में जाने से रोकना आसान नहीं था, जब तक कि वे स्वेच्छा से सहयोग नहीं करते। दरअसल पिछले हफ्ते मार्च के अंत तक, देश के मजहबी विद्वानों ने केवल बीमार और बुजुर्ग लोगों को मस्जिद में जाकर नमाज अता करने से परहेज करने के लिए कहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंध सरकार ने लोगों को मस्जिदों में जाने से रोकने के लिए दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक कर्फ्यू जैसी पाबंदी की घोषणा की थी, जो कि नमाज पढ़ने का समय होता है। वहीं पंजाब सरकार ने लोगों को अपने घरों में नमाज अता करने का फतवा जारी किया था। अन्य प्रांतों और संघीय सरकार द्वारा इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे। मस्जिदों ने भी लोगों से घर पर नमाज पढ़ने की घोषणा की है। हालाँकि, पाकिस्तानियों ने दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर भारी संख्या में मस्जिदों में नमाज अता की, खासकर शुक्रवार को।

जामिया मस्जिद कुबा में नमाज पढ़वाने वाले ने कहा, “सरकार और पुलिस डर की भावना पैदा करने के लिए ऐसे बयान दे रही है। कुछ नहीं होगा। कराची 20 मिलियन का शहर है, सरकार हर नुक्कड़ या हर सभा में अपना फैसला लागू नहीं कर सकती है।”

कराची में न्यू मेमन मस्जिद और कुछ अन्य इलाकों में पुलिस और रेंजर्स के जवानों की भारी टुकड़ी की तैनाती भी की गई थी। कराची में, अधिकांश मस्जिदों ने सरकारी आदेशों का पालन किया है, हालाँकि कुछ मस्जिदों में नियमित रुप से नमाज अता की गई। प्रांत के अन्य कुछ शहरों में मस्जिदों को बंद का निर्देश दिया गया है, साथ ही कहा गया है कि तीन से पाँच लोग जुमे की नमाज अदा कर सकेंगे। 

हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर गाँवों में, लॉकडाउन को सख्ती से लागू नहीं किया गया है। कम्बर शाहदकोट जिले के एक गाँव में रहने वाले अब्दुल हनन ने कहा, “हमने शुक्रवार को अपनी नमाज जामिया मस्जिद में उसी भीड़ के साथ अदा की।”

बलूचिस्तान में भी स्थिति बहुत अलग नहीं थी। एक पुलिस स्टेशन के पास स्थित प्रांतीय राजधानी क्वेटा की कंधारी मस्जिद में शुक्रवार की नमाज में भाग लेने के लिए एक बड़ी भीड़ आई थी। प्रांत के अन्य क्षेत्रों में अधिकांश मस्जिदें खुली थीं, लेकिन उपस्थिति कम थी।

इससे इतर पंजाब में, मस्जिदों ने लोगों से घरों पर नमाज अदा करने का अनुरोध किया है। शहरों में इन आदेशों का अधिकतर पालन किया गया लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अलग थी क्योंकि लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने के लिए बाहर आए थे।

लाहौर के एक इस्लामिक विश्वविद्यालय, दार उल इफ्ता जामिया नईमिया ने एक फतवा जारी करते हुए कहा कि जिन लोगों को सरकार द्वारा मस्जिदों में आने से रोका जाता है, वे समूह में नमाज़ अदा करने के लिए बाध्य नहीं थे।

मस्जिदों में जाने के मुद्दे पर पुलिस और समुदाय विशेष के बीच टकराव के मामले सामने आए हैं। कराची के लियाकताबाद इलाके में घौसिया मस्जिद के पास लोग इकट्ठा हुए और मस्जिद में घुसने से रोकने पर पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने कहा कि हमले में स्थानीय स्टेशन हाउस अधिकारी का आधिकारिक वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया था।

पहले चाकू पर थूक लगाया, फिर तरबूज काटा… और उसके बाद लोगों को बेचा: अब्दुल, अहमद सहित 3 पर FIR

मध्य प्रदेश के रायसेन का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति थूक लगा कर फल बेचता हुआ दिखा था। उसका नाम शेरू मियाँ है, जिसे पुलिस ने धर-दबोचा है। उसे जेल भेज दिया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद उक्त फल विक्रेता के ख़िलाफ़ लोगों ने आवाज़ उठाई थी। वहीं उसकी बेटी का कहना था कि उसके अब्बा को ऐसे ही नोट गिनने की आदत है, जिसके कारण ऐसा हुआ। पुलिस के अनुसार, शेरू के परिवार के लोग कह रहे हैं कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

उधर ये मामला अभी शांत हुआ भी नहीं था कि दक्षिणी मध्य प्रदेश के बैतूल बाजार में एक नया मामला सामने आया है। आरोपित अब्दुल रफीक, सादी अहमद, रितेश मधाना ऑटो रिक्शा से तरबूज बेच रहे थे। ये घटना शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) शाम की है। ये लोग चाकू पर थूक लगा कर तरबूज काट रहे थे। इस दौरान पुरुषोत्तम यादव ने देखा कि पहले चाकू पर थूक लगाया जा रहा था और फिर तरबूज काटा जा रहा था।

इसकी सूचना पुरुषोत्तम यादव ने तत्काल बजरंग दल के विभाग संयोजक कृष्णकांत गावंडे को दी। उन्होंने कुछ युवाओं एवं प्रत्यक्षदर्शी के साथ थाने पहुँच कर मामले की रिपोर्ट दी। चाकू पर थूक लगाकर तरबूज काटकर बेचने की शिकायत पर बैतूल बाजार पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR कर लिया है। पुलिस ने उनका तरबूज से भरा ऑटो भी जब्त कर लिया गया। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने इस घटना को देखा, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

फलों पर थूकने वाले शेरू मियाँ पर FIR पर बेटी ने कहा- अब्बू नोट गिनने की आदत के कारण ऐसा करते हैं

डॉक्टरों के साथ जमातियों की बदसलूकी अब कानपुर मेडिकल कॉलेज में: थूक-थूक कर फैलाई गंदगी, बैठते हैं साथ

मौलाना के बेटे ने दलित के चेहरे पर थूका, हाथ में काटा: लॉकडाउन में गुटखा-बीड़ी देने से कर दिया था इनकार

उधर फलों पर थूक वाले मामले में कोतवाली थाना प्रभारी जगदीश सिंह सिद्धू ने शेरू की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पुलिस अब शेरू के मानसिक संतुलन की जाँच कराएगी, ताकि ये पता लग सके कि परिवार के दावों में कितनी सच्चाई है। उसके ख़िलाफ़ शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) को शिकायत मिली थी, जिसके बाद वीडियो की जाँच की गई। जाँच में वीडियो को सही पाया गया। ये वीडियो 16 फ़रवरी का है। जब ये वीडियो सामने आया तो ‘ऑल्ट न्यूज़’ ने उसे बचाने और पाक-साफ़ साबित करने के लिए एक कथित फैक्ट-चेक भी किया था। इसमें उसे ‘बुजुर्ग ठेले वाला’ बता कर उसे बचाने की कोशिश की गई थी और वीडियो को पुराना कहा गया था।

कई लोगों ने इस वीडियो को कोरोना वायरस के खतरों से भी जोड़ा था। टिक-टॉक पर इस वीडियो को दीपक नामदेव ने शेयर किया था और पुलिस में शिकायत भी उन्होंने ही की थी। इससे कुछ दिनों पहले एक अन्य वीडियो सामने आया था, जिसमें एक सब्जी विक्रेता सब्जियों को नाली में डाल कर भिगोते हुए दिख रहा था। कई लोगों ने ऐसे फल व सब्जी विक्रेताओं के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की थी।

जम्मू-कश्मीर में सेना को बड़ी कामयाबी, 24 घंटे में 9 आतंकी ढेर

लॉकडाउन में भी जम्मू-कश्मीर में सेना का आतंकियों के खिलाफ सफाई अभियान जारी है। पिछले 24 घंटों में सेना ने कश्मीर घाटी में 9 आतंकियों को मार गिराया है। 4 आतंकियों को शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को सेना ने दक्षिणी कश्मीर के बतपुरा में मार गिराया। वहीं 5 आतंकियों को रविवार (अप्रैल 5, 2020) को एलओसी के पास केरन सेक्टर में ढेर किया। 

आतंकियों के खिलाफ चले इस ऑपरेशन में भारतीय सेना के एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गए जबकि दो जवान जख्मी हैं। भारी बर्फबारी और खराब मौसम की वजह से घायलों को अस्पताल लाने में मुश्किलें हो रही हैं। फिलहाल सेना का ऑपरेशन जारी है।

शनिवार को मारे गए आतंकियों ने पिछले 12 दिनों में चार निर्दोष नागरिकों की हत्या की थी। ये आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़े थे। पुलिस ने हिजबुल मुजाहिदीन के चारों आतंकियों को ट्रैक किया और शनिवार की सुबह एक ऑपरेशन चलाकर उन्हें मार गिराया।

विक्टर फोर्स के जीओसी मेजर जनरल ए सेनगुप्ता ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों की शिनाख्त अनंतनाग के आरवनी के मोहम्मद अशरफ मलिक, दमहाल हाजीपुरा के शाहिद सिद्दीक और चवालगाम के वकार यत्तू के तौर पर हुई। चौथा टंकी एजाज अहमद नायकू उर्फ मुसा इनका सरगना था और चिमर का रहने वाला था। आतंकियों के पास से एक एसएलआर, एक एके-47, एक इंसास और चीन निर्मित पिस्टल के अलावा मैगजीन भी मिली है।

वहीं, सेना ने केरन सेक्टर में सीमा पार से भारत में घुसने की आतंकियों की कोशिशों को नाकाम कर दिया। खराब मौसम का फायदा उठाते हुए रविवार को पाँच आतंकी भारत में दाखिल होने की फिराक में थे। सेना ने मोर्चा सँभाला और खराब मौसम की परवाह न करते हुए सभी आतंकियों को ढेर कर दिया।

इससे पहले शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के सोपोर और हंदवारा इलाके से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर गुरुवार रात को कुपवाड़ा जिला अंतर्गत हंदवारा इलाके के शालपोरा गाँव में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान लश्कर के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि इनकी पहचान आजाद अहमद भट और अल्ताफ अहमद बाबा के रूप में हुई है। इनके कब्जे से दो पिस्तौल और दो हथगोले बरामद किए गए हैं।

सबा नकवी बेपर्दा: जमात की हरकत ढकने के लिए शेयर किया मंदिर में श्रद्धालुओं का पुराना Video

जब से तबलीगी जमात की करतूत सामने आई है लिबरल गैंग खार खाए बैठा है। वह जमातियों के गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए हिंदुओं को कसूरवार ठहराने का हर जतन कर रहा है। इस क्रम में फेक न्यूज, पुराने वीडियो तक सोशल मीडिया में पोस्ट किए जा रहे। इस गिरोह में कथित पत्रकार सबा नकवी भी है जो हिंदुओं के खिलाफ जहर फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ती। अब उसने एक पुराना विडियो शेयर कर यह जताने की कोशिश की है कि हिंदू भी लॉकडाउन का उल्लंघन कर रहे हैं।

नकवी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें मंदिर में कई श्रद्धालु दर्शन हेतु जाते दिख रहे हैं। नकवी ने दावा किया कि यह घटना तबलीगी जमात के आयोजनों जैसा ही है और हिन्दुओं ने भी बड़े पैमाने पर लॉकडाउन का उल्लंघन किया है। उसने दावा किया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए बिना और सरकारी निर्देशों की अवहेलना करते हुए भक्तगण मंदिरों में टूट पड़े हैं। लेकिन, सच्चाई कुछ और ही है। चोरी पकड़े जाने के बाद नकवी ने अपना ये ट्वीट डिलीट कर दिया है।

18 मार्च को यूट्यब पर पोस्ट किया गया था ये वीडियो

सबा नकवी ने जो विडियो शेयर किया, वो 18 मार्च का है। तब न तो पीएम मोदी ने ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया था और न ही देश में लॉकडाउन लगाया गया था। ये विडियो अयोध्या का है। सबा नकवी ने 18 मार्च के विडियो को 15 दिनों के बाद शेयर किया और लिखा कि ये लॉकडाउन का उल्लंघन है। उस समय तक कई मंदिरों में दर्शन चालू थे और लोग बाहर भी निकल रहे थे। फिर सबा नकवी के अनुसार, लोगों ने तब लॉकडाउन का उल्लंघन किया जब लॉकडाउन लगाया ही नहीं गया था। पीएम मोदी ने 19 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का ऐलान किया, जिसका पालन 22 मार्च को किया जाना था।

ये वीडियो 18 मार्च का है, जिसे नकवी ने अप्रैल में शेयर किया

बाद में यूपी सरकार और केंद्र सरकार ने मिल कर अयोध्या में मास गैदरिंग रोकने की पहल की, जिसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई। लेकिन, सबा नकवी ने इस घटना की तुलना उस घटना से कर दी, जिसमें कई दिनों तक लगातार पुलिस-प्रशासन की बातों की अवहेलना करते हुए लॉकडाउन का उल्लंघन किया जाता रहा। लॉकडाउन के बावजूद दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में मजहबी कार्यक्रम आयोजित होते रहे। उल्लेखनीय है कि दिल्ली में लॉकडाउन के ऐलान से काफी पहले ही 200 लोगों के जुटान पर रोक लगा दी गई थी। बावजूद इसके मरकज में ह​जारों लोग थे। इनमें विदेश भी थे। आज मरकज कोरोना वायरस संक्रमण का देश में मुख्य केंद्र बनकर उभरा है।

कानपुर के हॉस्पिटल में जमाती इकट्ठे होकर पढ़ रहे नमाज, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही धज्जियाँ: देखें Video

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से निकले कोरोना संदिग्ध पूरे देश के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। दिल्ली और यूपी के कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने शिकायत की है कि जमात के लोग जाँच और इलाज कराने में मनमानी कर रहे हैं। कानपुर में जमातियों से परेशान डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया कि ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ा रहे हैं। अब टाइम्स नाउ का एक वीडियो सामने आया है, जो इस बात की पुष्टि करता है।

टाइम्स नाउ के मुताबिक जमात के लोग सोशल डिस्टेंसिंग को ताक पर रखकर एक साथ जमा होते हैं और फिर समूह में नमाज अदा करते हैं। इससे पहले कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या आरती लाल चंद्दानी ने जमातियों की शिकायत करते हुए कहा था, “निजामुद्दीन के मरकज में हुए आयोजनों में शामिल 22 लोग हमारे यहाँ आए थे। डॉक्टरों की टीम के साथ वार्ड ब्वाय, नर्स, टेक्निशियन सभी पूरे सुरक्षा किट के साथ मरीजों की सेवा कर रहे थे। लेकिन जमात के लोग डॉक्टरों से बदसलूकी कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके साथ बात-बात पर बहस कर माहौल खराब करने का काम कर रहे है। इसके साथ ही क्वारंटाइन वार्ड में थूक-थूक कर गंदगी फैला रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन एक मजबूत कदम के रूप में सामने आया था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग एकमात्र उपाय है। पिछले दिनों रिपोर्ट भी आईं थीं कि भारत जैसे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने का औसत गंभीर रूप से प्रभावित और विकसित देशों से काफी कम है। 

ऐसे में ये 21 दिनों का लॉकडाउन देश को सुरक्षित रास्ते पर ले जा रहा था। लेकिन तबलीगी जमात के आयोजनों ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। मरकज में विदेशियों सहित दो हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा थे। इनमें से सैकड़ों संक्रमित पाए गए हैं।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल और सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज में जमातियों के महिला स्टाफ के साथ बदतमीजी की घटनाएँ सामने आई थी। एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती नंगे घूम रहे थे। अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे। इनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज में भी इन जमातियों ने महिला स्टाफ के साथ अभद्रता की थी।

जमातियों को कार में बिठा कॉन्स्टेबल इमरान ने पार कराया बॉर्डर, रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद सस्पेंड

दिल्ली पुलिस ने अपने उस कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया है, जिसने तबलीगी जमात के सदस्यों की मदद की थी। उक्त कॉन्स्टेबल ने जमातियों को दिल्ली-यूपी बॉर्डर पार कराने में मदद की थी। उसका नाम इमरान है। वह दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में पदस्थापित था। गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) को उसने अपनी कार में जमातियों को बिठा कर उन्हें यूपी पहुँचाया था। गाजियाबाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था। रंगे हाथों पकडे जाने के बाद इमरान से यूपी पुलिस ने पूछताछ की थी।

गाजियाबाद पुलिस ने इमरान के सम्बन्ध में दिल्ली पुलिस को सूचना दी। अब दिल्ली पुलिस यह पता करने में जुटी है कि उन जमातियों ने इमरान से कैसे संपर्क साधा या फिर इमरान उन्हें कैसे जानता था। दिल्ली पुलिस को आशंका है कि इमरान ने पहले भी जमातियों को बॉर्डर पार कराया होगा। लिहाजा यह पता लगाना आवश्यक है कि उसने कितने लोगों की अवैध रूप से मदद की है। पुलिस उन सभी के बारे में पता कर उन्हें ट्रेस करने में जुटी हुई है। इमरान जिन्हें लेकर जा रहा था, वे अमरोहा के रहने वाले थे।

इमरान के साथ-साथ वे सभी लोग भी दबोचे जा चुके हैं, जिसे उसने बॉर्डर पार कराने का प्रयास किया था। उन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है। इमरान उत्तर प्रदेश के लोनी का रहने वाला है। बता दें कि तबलीगी जमात के 2500 लोग दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में छिपे हुए थे। यहाँ से निकल कर करीब 1500 देश के विभिन्न राज्यों में गए हैं। इनमें से अधिकतर को पुलिस ट्रेस कर चुकी है जबकि बाकियों की तलाश जारी है। कई जिलों में इनलोगों के मजहबी कार्यक्रम हुए थे और लॉकडाउन के बाद जो जहाँ थे, वहीं छिप गए। कई क्षेत्रों में पुलिस जब समुदाय विशेष बहुल इलाक़ों में इन जमातियों का पता लगाने गई तो पुलिस पर ही हमले किए गए।

इमरान मामले में अभी तक यूपी पुलिस ने कोई केस फाइल नहीं किया है। उसे गाजियाबाद के टीला मोड़ से दबोचा गया था। तबलीगी जमात वालों के कारण भारत में कोरोना वायरस के नए मामलों में काफ़ी वृद्धि आई है। जितने भी नए मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें अधिकतर जमाती ही हैं।

मौलाना के बेटे ने दलित के चेहरे पर थूका, हाथ में काटा: लॉकडाउन में गुटखा-बीड़ी देने से कर दिया था इनकार

देश भर में जारी लॉकडाउन और कोरोना संकट से लड़ने के बीच मेरठ से एक बेहद ही शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ मौलाना के बेटों ने गुटखा और बीड़ी न देने पर दुकानदार के साथ मारपीट की। पीड़ित दुकानदार दलित है। उसको बुरी तरह पीटने के साथ ही मौलाना के बेटे ने हाथ में काट लिया और चेहरे पर थूक दिया। इसके बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

घटना शनिवार (अप्रैल 4, 2020) रात 8 बजे की है। दरअसल लॉकडाउन की वजह से आवश्यक सामग्रियों को छोड़कर सभी दुकानों को बंद रखने का निर्देश दिया गया है। मेरठ के लखवाया गाँव के अरुण ने भी सरकार के इसी निर्देश का पालन करते हुए अपनी दुकान बंद रखी थी। गाँव के ही इस्लामुद्दीन का बेटा रहीश उसकी दुकान पर आया। उसने अरुण से बीड़ी और गुटखा का बंडल माँगा। मगर अरुण ने लॉकडाउन की वजह से दुकान बंद होने की बात कहकर गुटखा और बीड़ी का बंडल देने से मना कर दिया।

इसके बाद रहीश गाली-गलौज करने लगा। अरुण व अन्य ग्रामीणों ने विरोध किया तो वह देख लेने की धमकी देकर चला गया। थोड़ी देर बाद रहीश अपने भाइयों व अब्बू के साथ आया और अरुण को घर से खींचकर बाहर निकाल कर ले गए। इसके बाद उसको लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा। रहीश ने अरुण के हाथ में काट लिया। इससे अरुण के हाथ में गहरा घाव भी हो गया।

रहीश यहीं पर नहीं रुका। उसने अरुण के चेहरे पर थूक दिया। इस बीच शोर सुनकर ग्रामीण वहाँ पर जमा हुए, तो हमलावर भाग निकले। बाद में पुलिस ने घेराबंदी कर हमलावरों को दबोच लिया। इंस्पेक्टर बीपी सिंह ने बताया बीड़ी का बंडल लेने पर झगड़ा हुआ था। उन्होंने बताया कि पीड़ित ने आरोपित के खिलाफ कंकरखेड़ा थाने में तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर आरोपितों के खिलाफ दर्ज किया जाएगा।

ट्रंप ने मोदी से माँगी मदद, कहा- हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन दें, इससे लाखों मरीजों को होगा फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों के साथ बातचीत की। भारत ने हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन के निर्यात पर पाबंदी लगाई हुई है। ट्रंप ने मोदी से माँग करते हुए कहा कि वो अमेरिका द्वारा ऑर्डर की गई इसकी मात्रा को रिलीज करें। बता दें कि भारत के ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड’ ने 25 मार्च को हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। ऐसा कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में इसके प्रयोग के कारण किया गया था।

इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स ने कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन नामक मेडिकल ड्रग देने का प्रस्ताव दिया था। जिस मामले में स्थिति ज्यादा ख़राब हो, वहाँ इसका प्रयोग किया जा सकता है। एनटीएफ ने कहा है कि ‘हाई रिस्क’ वाले मामलों में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालाँकि, ध्यान देने वाली बात ये है कि बिना डॉक्टर की सलाह के इस दवा को लेने से मना किया गया है।

इस दवा का इस्तेमाल अब तक मलेरिया से निपटने के लिए किया जाता रहा है। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में ये दवा गेमचेंजर साबित हो सकता है। ट्रंप ने भी पुष्टि की है कि उन्होंने पीएम मोदी से अमेरिका द्वारा माँगी गई हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन ड्रग्स की निर्यात करने को कहा है। उन्होंने बताया कि भारत इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालाँकि, भारत ने इसके निर्यात पर रोक लगाते समय कहा था कि मानवता के आधार पर कुछ निश्चित शिपमेंट को अनुमति दी जा सकती है।

दशकों से मलेरिया के इलाज में प्रयोग किए जाने वाले ड्रग हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन को लेकर ट्रंप सरकार उत्साहित है, क्योंकि शुरूआती जाँच एवं परीक्षण में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अमेरिका में 1500 कोरोना मरीजों के ऊपर इस ड्रग का कुछ अन्य दवाओं के कॉम्बिनेशन के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि अगले कुछ सप्ताहों में अगर अमेरिका में कोरोना का वैक्सीन नहीं आया तो ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन में ‘जंगल के आग की तरह’ तेज़ी आने की आशंका है।

हालाँकि, ट्रंप ने ये तो नहीं बताया कि अमेरिका ने भारत से हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्विन की कितनी मात्रा की माँग की है लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि इससे यूएस को इस दवा के ‘कई मिलियन डोज’ मिल सकते हैं। ट्रंप सरकार ने इसे ड्रग को ‘स्ट्रेटेजिक नेशनल स्टॉकपाइल’ का हिस्सा बनाया है। पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के अलावा ब्राजील, बोलसेनारो के राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी कोरोना विपदा पर चर्चा की। गौरतलब है कि अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही मौतों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहॉं अब 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 8,452 लोगों की जान भी जा चुकी है।

दुबई से आकर 1500 लोगों को भोज दिया, परिवार में 12 कोरोना+: मुरैना का एक मोहल्ला सील

मध्य प्रदेश में इंदौर के बाद मुरैना जिला कोरोना वायरस संक्रमण का दूसरा हाट स्पॉट बनकर उभरा है। यहॉं एक शख्स की लापरवाही ने पूरे शहर को दहशत में ला दिया है। 17 मार्च को दुबई से लौटा यह शख्स और उसकी पत्नी समेत परिवार 12 सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। यह बात भी सामने आई है कि विदेश से लौटने की जानकारी छिपाते हुए इस शख्स ने माँ की तेरहवीं पर एक भोज का आयोजन किया था। इसमें तकरीबन 1500 लोग शामिल हुए थे। शख्स के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इसके संक्रमण के प्रसार की आशंकाएँ बढ़ गई है।

संक्रमण का पता चलने के बाद अधिकारियों ने मुरैना के उस मोहल्ले को सील कर दिया है जहॉं यह परिवार रहता है। जानकारी के मुताबिक इस शख्स का नाम सुरेश है और वह दुबई में वेटर का काम करता है। वह 17 मार्च को भारत वापस आया और 20 मार्च को भोज का आयोजन किया। इसमें कथित तौर पर मुरैना के लगभग 1500 लोगों ने हिस्सा लिया।

रिपोर्टों के अनुसार, सुरेश को 25 मार्च को कोरोना वायरस के लक्षण दिखने शुरू हो गए थे, लेकिन वह अगले चार दिनों तक अस्पताल नहीं गया। चार दिन के बाद वह 29 मार्च को हॉस्पिटल गया और फिर तुरंत अपनी पत्नी के साथ क्वारंटाइन हो गया। 2 अप्रैल को सुरेश और उसकी पत्नी दोनों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया। इसके बाद उसके 23 रिश्तेदारों का मेडिकल टेस्ट करवाया गया, जिसमें से 10 लोगों को पॉजिटिव पाया गया। 

मुरैना के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी बंडिल ने कहा, “हमने दो कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने वाले 23 लोगों के सैंपल जाँच के लिए भेजे थे। शुक्रवार को आई रिपोर्ट के अनुसार 10 लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इनमें 8 महिलाएँ हैं। सभी संक्रमित 12 लोगों को अस्पताल में क्वारंटाइन किया गया है। ​जॉंच में जिन्हें संक्रमित नहीं पाया गया है उन्हें मुरैना जिले के अलग-अलग हिस्सों में उनके घरों में 14 दिन के लिए आइसोलेट किया गया है।”

सुरेश का कहना है कि दुबई से आने से पहले उसे कोरोना का कोई लक्षण नहीं दिख रहा था। उसने दावा किया कि उसकी पत्नी मुरैना आने से दो दिन पहले स्वस्थ महसूस नहीं कर रही थी। उल्लेखनीय है कि देश में अब तक 3072 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 75 लोगों की जानलेवा संक्रामक बीमारी से मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश की बात करें तो यहाँ अब तक 104 मामले सामने आ चुके हैं और 6 लोगों की मौत हो चुकी है।