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मंदिर वहीं बनेगा, मस्जिद कहीं और बनेगा: 10 प्वाइंट्स में समझें सुप्रीम कोर्ट का पूरा फ़ैसला

491 सालों का लम्बा इन्तजार। बाबरी मस्जिद निर्माण के 491 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुना राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ़ कर दिया कि मुस्लिम पक्ष अयोध्या की विवादित ज़मीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा।

राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट स्थापित कर 3 महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए योजना शुरू की जाए, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले के दौरान और क्या-क्या कहा, इसे बिंदुवार समझें:

  • सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से फ़ैसला सुनाया। अर्थात, ये निर्णय 5-0 से आया। कोर्ट ने सबसे पहले निर्मोही अखाड़ा और शिया वक़्फ़ बोर्ड की याचिका को ख़ारिज किया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महज आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं सुनाया जा सकता। साथ ही केवल एएसआई की रिपोर्ट को आधार बना कर भी निर्णय नहीं सुनाया जा सकता है।
  • एएसआई की रिपोर्ट से पता चलता है कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई ढाँचा था, जिसके ऊपर मस्जिद बनाई गई। लेकिन, एएसआई यह साबित नहीं कर पाया कि मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बनाया गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुसार, वो सभी धर्मों की भावनाओं का ख़्याल रखने के लिए प्रतिबद्ध है और संतुलन का ध्यान रखते हुए यह साबित होता है कि हिन्दू बाहरी हिस्से में काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे थे।
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड यह साबित नहीं कर पाया कि विवादित ज़मीन पर उसका विशेषाधिकार अथवा एक्सक्लूसिव स्वामित्व था।
  • फ़ैसले का सबसे अहम भाग ये रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ट्रस्ट बना कर मस्जिद के लिए अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ ज़मीन की व्यवस्था करने को कहा। इसी ट्रस्ट के माध्यम से राम मंदिर निर्माण के लिए भी योजना बनाने के लिए कहा गया। इस मामले में केंद्र और यूपी सरकार आपस में बातचीत कर आगे की कार्रवाई करे, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया।
  • केंद्र जो ट्रस्ट स्थापित करेगा, उसे बाहरी और भीतरी अहाते का अधिकार दे दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़-साफ़ कहा कि हिन्दू विवादित ज़मीन पर अंग्रेजों के आने से पहले से ही पूजा करते आ रहे हैं। कोर्ट ने 1934 के दंगे का जिक्र करते हुए बताया कि भीतरी हिस्सा उसी वक़्त गंभीर विवाद का विषय बन गया था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं की उस आस्था और विश्वास की भी पुष्टि की, जिसके अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म मुख्य गुम्बद के नीचे हुआ था। हालाँकि, कोर्ट ने बताया कि गवाहों के बयान से ये भी पता चलता है कि वहाँ मुस्लिम भी नमाज पढ़ा करते थे।
  • सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सार यह है कि पूरी की पूरी विवादित ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जाएगी और सरकार एक ट्रस्ट बना कर आगे का कार्य करेगी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इनर कोर्टयार्ड और आउटर कोर्टयार्ड को लेकर अलग-अलग बातें कहीं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि के न्यायिक व्यक्ति होने की बात भी अस्वीकार कर दी।

सीएम पिता जानते थे बेटा CJI बनेगा, पर शायद ही पता रहा हो अयोध्या जैसा फैसला भी सुनाएगा

न्यायाधीश का काम ही है फैसला सुनाना। लेकिन, ज्यादातर न्यायाधीशों के करियर में ऐसे मौके नहीं आते कि उनके सुनाए फैसले की छाप अमिट हो। अयोध्या जैसे दशकों पुराने, राजनीतिक रूप से संवेदनशील और आस्था से जुड़े मसले पर फैसला सुनाने का मौका तो विरले को ही मिलता है। इस लिहाज से मौजूदा मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और उनकी अगुवाई वाली पीठ में शामिल जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर विरले ही माने जा सकते हैं।

सीजेआई रंजन गोगोई को लेकर किताब ‘गुवाहाटी हाईकोर्ट, इतिहास और विरासत’ में एक रोचक किस्से का जिक्र है। इसके मुताबिक उनके पिता केशब चंद्र गोगोई से उनके एक दोस्त ने पूछा कि क्या उनका बेटा भी उनकी ही तरह राजनीति में आएगा? जवाब में उनके पिता ने कहा- मेरा बेटा शानदार वकील है और उसके अंदर इस देश का मुख्य न्यायाधीश बनने की क्षमता है। उल्लेखनीय है कि 18 नवंबर 1954 को जन्मे गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के बेटे हैं।

बीते साल 03 अक्टूबर को चीफ जस्टिस पद की शपथ लेने वाले गोगोई इस साल 17 नवंबर में रिटायर हो जाएँगे। देश के 46वें चीफ जस्टिस गोगोई इस पद तक पहुॅंचने वाले पूर्वोतर से पहले जज हैं। उनकी छवि पारदर्शिता को पसंद करने वाले और बेहद खुलकर बोलने वाले जज की रही है। सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर को लेकर जब बीते साल चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी तो उसमें गोगोई भी शामिल थे। इसके बाद कुछ खेमों से आशंका जताई गई थी कि उनकी वरिष्ठता को नजरंदाज कर किसी और को सीजेआई बनाया जा सकता है।

विनम्र स्वभाव के गोगोई सख्त जज माने जाते हैं। एक बार उन्होंने अवमानना नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू को अदालत में तलब कर लिया था। काटजू ने सौम्या मर्डर केस में ब्लॉग लिखकर उनके फैसले पर सवाल उठाए थे। जेएनयू के छात्र नेता रहे कन्हैया कुमार के मामले में एसआईटी के गठन से इनकार करने वाले जज भी गोगोई ही थे।

फाइटर प्लेन मिराज के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जॉंच को लेकर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने याचिकाकर्ता वकील अलख आलोक श्रीवास्तव से पूछा था कि मिराज किस जेनरेशन का है। वकील का जवाब सुन कर कहा:

“आपने याचिका दाखिल की है और आपको पता ही नहीं मिराज किस जेनरेशन के हैं। आप भाग्यशाली हैं कि हम आप पर इस याचिका को दाखिल करने के लिए जुर्माना नहीं लगा रहे और ऐसा इसलिए क्योंकि आप वकील हैं।”

रिटायर होने से पहले जस्टिस गोगोई कई और अहम मामलों में फैसला सुना सकते हैं। इनमें सबरीमाला रिव्यू पिटिशन, राफेल रिव्यू पिटिशन, राहुल गाँधी पर अवमानना का मुकदमा, फाइनेंस एक्ट 2017 की वैधता जैसे मामले शामिल हैं।

मंदिर वहीं बनेगा, ट्रस्ट बना कर निर्माण शुरू करे सरकार: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला

आखिरकार वह फैसला आ ही गया जिसका इंतजार हिंदू दशकों से कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपने फैसले में कहा कि विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष अपना दावा साबित करने में विफल रहे। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने इस जगह पर ट्रस्ट बनाकर मंदिर का निर्माण शुरू करने का आदेश केंद्र सरकार को दिया है।

ट्रस्ट बनाने और मंदिर निर्माण की योजना के लिए तीन महीने का वक्त सरकार को दिया गया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहीं और मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का भी निर्देश दिया है। यानी, सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अलग से ज़मीन दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि बाहरी हिस्से पर हिन्दुओं द्वारा पहले से ही पूजा की जा रही थी, इसमें कोई विवाद नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम भीतरी हिस्से पर भी अपना दावा साबित करने में विफल रहे। 1857 से पहले यहाँ हिन्दुओं द्वारा पूजा करने के सबूत हैं। मुस्लिम पक्ष को राम मंदिर बनाने के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन दी जाएगी।

ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा की भागीदारी सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। हालॉंकि जमीन पर उसका दावा पीठ ने खारिज कर दिया। शिया बोर्ड का भी दावा अदालत ने नहीं माना। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जमीन को तीन हिस्सों में बॉंटने के फैसले को भी शीर्ष अदालत की पीठ ने गलत बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए, बल्कि कानून के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का शूट लिमिटेशन एक्ट के तहत आता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये लिमिटेशन 12 साल का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि मुस्लिम पक्ष विवादित ज़मीन के भीतरी हिस्से पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा है और सारा विवाद भीतरी हिस्से को लेकर ही है। यानी, बाहरी हिस्से पर हिन्दू काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे हैं, इसमें कोई विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पीठ में शामिल सभी जजों को संविधान के अनुसार फ़ैसला सुनना है।

विराजमान रहेंगे रामलला, मस्जिद के लिए मिलेगी दूसरी जगह, केंद्र बनाएगी योजना: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए बल्कि क़ानून के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का शूट लिमिटेशन एक्ट के तहत आता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये लिमिटेशन 12 साल का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि दूसरा पक्ष विवादित ज़मीन के भीतरी हिस्से पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा है और सारा विवाद भीतरी हिस्से को लेकर ही है। यानी, बाहरी हिस्से पर हिन्दू काफ़ी पहले से पूजा करते आ रहे हैं, इसमें कोई विवाद नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पीठ में शामिल सभी जजों को संविधान के अनुसार फ़ैसला सुनना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला गलत था। यानी, तीन हिस्सों में ज़मीन को बाँटने का फ़ैसला ग़लत था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरी जगह पर मंदिर बनाने के लिए जगह दी जाए।

सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि कि पूरा जजमेंट पढ़ने में आधा घंटा लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा का दावा ख़ारिज कर दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए और लोगों की आस्था में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शिया समुदाय का भी दावा ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का सूट केवल मैनेजमेंट का है, वो सहबैत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि राम जन्मभूमि कोई ज्यूरिस्टिक पर्सन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी, वहाँ कोई न कोई स्ट्रक्चर था। उससे पहले वहाँ जो भी स्ट्रक्चर था, वो इस्लामिक नहीं था। अर्थात, बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बना था।

अयोध्या फैसले से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने बुलाई उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक, शामिल होने पहुँचे अजीत डोभाल

अयोध्या विवाद में फैसले की घड़ी आ गई है। सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना रहा है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। पाँच सदस्यीय पीठ ने छह अगस्त से लगातार 40 दिन इस मामले की सुनवाई की थी। पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर शामिल हैं।

अयोध्या में यह विवाद सदियों से चला आ रहा था। माना जा रहा है कि शनिवार को आ रहा फैसला इस पूरे विवाद पर पूर्णविराम लगाने में सफल होगा। अयोध्या फैसले को लेकर बीजेपी ने आज दिल्ली में बड़ी बैठक बुलाई है। जानकारी के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई है। इस बैठक में शामिल होने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, अमित शाह के आवास पर पहुँच चुके हैं। इसके अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के प्रमुख अरविंद कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होने वाले हैं।

इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी राजधानी दिल्‍ली पहुँच चुके हैं। भागवत स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं और वह आज दिल्‍ली में ही रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके घर के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी को भी वहाँ से गुजरने की इजाजत नहीं है।

वहीं उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एहतियात के तौर पर पूरे प्रदेश में स्कूल, कॉलेज, एजुकेशनल सेंटर और ट्रेनिंग सेंटर बंद रखने का फैसला लिया है। जानकारी के मुताबिक यूपी में 9 से 11 नवंबर तक स्कूल और कॉलेजों में छुट्टी घोषित की गई है। संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे प्रदेश में शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें। योगी ने अपने अपील में कहा है कि प्रशासन सभी की सुरक्षा व प्रदेश में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रदेश की जनता से यह भी अपील की है कि आने वाले फैसले को जीत-हार के साथ जोड़कर न देखा जाए और अफवाहों पर कतई ध्यान न दें।

मुस्लिम पक्ष अपना दावा साबित करने में विफल रहा, हिन्दू 1857 से पहले से पूजा करते आ रहे हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर फ़ैसला नहीं करना चाहिए बल्कि क़ानून के हिसाब से निर्णय लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का शूट लिमिटेशन एक्ट के तहत आता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये लिमिटेशन 12 साल का है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि 1857 से पहले हिन्दू यहाँ पूजा करते थे। यानी, अंग्रेजों के आने से पहले ही राम चबूतरा, सीता रसोई और विवादित ज़मीन के बाहरी हिस्से में हिन्दू पूजा किया करते थे। अर्थात, आउटर कोर्टयार्ड हिन्दुओं की पूजा का मुख्य बिंदु था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सारा विवाद अंदर के हिस्से को लेकर है।

मुस्लिम पक्ष भीतरी हिस्से पर अपना स्वामित्व साबित करने में विफल रहे, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने कहा।

सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि कि पूरा जजमेंट पढ़ने में आधा घंटा लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा का दावा ख़ारिज कर दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए और लोगों की आस्था में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शिया समुदाय का भी दावा ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का सूट केवल मैनेजमेंट का है, वो सहबैत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि राम जन्मभूमि कोई ज्यूरिस्टिक पर्सन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी, वहाँ कोई न कोई स्ट्रक्चर था। उससे पहले वहाँ जो भी स्ट्रक्चर था, वो इस्लामिक नहीं था। अर्थात, बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बना था।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एएसआई ने इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा है कि वहाँ हिन्दू मंदिर को तोड़ कर ही मस्जिद बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहाँ क्या था, इस सम्बन्ध में अकेले एएसआई के आधार पर फ़ैसले पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों से पता चलता है कि वहाँ दोनों धर्मों के लोग प्राथना करते आ रहे थे।

खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी बाबरी मस्जिद, पहले से था ढाँचा: सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई रंजन गोगोई ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि कि पूरा जजमेंट पढ़ने में आधा घंटा लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा का दावा ख़ारिज कर दिया। सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को संतुलन बनाए रखना चाहिए और लोगों की आस्था में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शिया समुदाय का भी दावा ख़ारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा का सूट केवल मैनेजमेंट का है, वो सहबैत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि राम जन्मभूमि कोई ज्यूरिस्टिक पर्सन नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी, वहाँ कोई न कोई स्ट्रक्चर था। उससे पहले वहाँ जो भी स्ट्रक्चर था, वो इस्लामिक नहीं था। अर्थात, बाबरी मस्जिद खाली ज़मीन पर नहीं बनी थी।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एएसआई ने इस सम्बन्ध में कुछ नहीं कहा है कि वहाँ हिन्दू मंदिर को तोड़ कर ही मस्जिद बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहाँ क्या था, इस सम्बन्ध में अकेले एएसआई के आधार पर फ़ैसले पर निर्णय नहीं लिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों से पता चलता है कि वहाँ दोनों धर्मों के लोग प्राथना करते आ रहे थे।

सुनवाई के मद्देनज़र भारत के कई हिस्सों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और संवेदनशील इलाक़ों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार नज़र रख रही है और अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपील कर चुके थे कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को शांति से स्वीकार किया जाना चाहिए। आज सीजेआई कोर्टरूम का दरवाजा जैसे ही खुला, तभी वकीलों और पत्रकारों की भीड़ अंदर जाने के लिए बेचैन हो उठी। सुप्रीम कोर्ट के इर्द-गिर्द भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।

राम मंदिर मामले में चल रही सुप्रीम कोर्ट की नियमित सुनवाई 6 अगस्त को शुरू हुई थी। 40 दिनों की नियमित सुनवाई के बाद सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 16 अक्टूबर को फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में तय था कि फ़ैसला उससे पहले ही सुनाया जाएगा। इस पीठ में उनके अलावा भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोड़बे, जस्टिस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस वाई चंद्रचूड़ शामिल थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के साथ ही तस्वीर साफ़ हो गई है।

अयोध्या: सुप्रीम कोर्ट ने शिया मुस्लिमों का दावा ख़ारिज किया, आधे घंटे में आएगा पूरा जजमेंट

अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला आने में थोड़ा वक्त लगेगा। पॉंच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से शिया वक़्फ़ की याचिका को रद्द कर दिया है।

सुनवाई के मद्देनज़र भारत के कई हिस्सों में स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और संवेदनशील इलाक़ों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सोशल मीडिया पर लगातार नज़र रख रही है और अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपील कर चुके थे कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को शांति से स्वीकार किया जाना चाहिए। आज सीजेआई कोर्टरूम का दरवाजा जैसे ही खुला, तभी वकीलों और पत्रकारों की भीड़ अंदर जाने के लिए बेचैन हो उठी। सुप्रीम कोर्ट के इर्द-गिर्द भारी संख्या में सुरक्षा बलों तैनात किए गए थे।

राम मंदिर मामले में चल रही सुप्रीम कोर्ट की नियमित सुनवाई 6 अगस्त को शुरू हुई थी। 40 दिनों की नियमित सुनवाई के बाद सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 16 अक्टूबर को फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई गोगोई 17 नवम्बर को रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में तय था कि फ़ैसला उससे पहले ही सुनाया जाएगा। इस पीठ में उनके अलावा भावी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बोड़बे, जस्टिस अब्दुल नज़ीर, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस वाई चंद्रचूड़ शामिल थे। अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के साथ ही तस्वीर साफ़ हो गई है।

राम मंदिर मामले पर कई बार मध्यस्तथा की भी कोशिश की गई लेकिन वो सफल नहीं हो सकी। श्री श्री रविशंकर सहित कई अन्य प्रबुद्ध जनों ने मध्यस्तथा की पहल की लेकिन उसके असफल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 5 सदस्यीय पीठ का गठन कर नियमित सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष की तरफ़ से 92 वर्षीय के पराशरण और वैद्यनाथन ने दलीलें रखीं। वहीं राजीव धवन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील थे। पूरी सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष दलीलों और तथ्यों के मामले में मुस्लिम पक्ष पर भारी पड़ा। राजीव धवन कई बार कोर्ट में झल्लाते हुए भी नज़र आए।

अयोध्या: फ़ैसले से पहले ही SC का अभूतपूर्व क़दम, CJI को Z प्लस सिक्योरिटी

अयोध्या भूमि विवाद मामले में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, एसए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण को अयोध्या में क़ानून और व्यवस्था सुनिश्चित करने संबंधी जानकारी से अवगत कराने के लिए यूपी के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने शुक्रवार (8 नवंबर) को ब्रीफिंग की।

CJI और दो अन्य जजों को बताया गया कि अयोध्या या राज्य के किसी भी हिस्से में अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षाबल की तैनाती की गई है और प्रशासन पूरी तरह से फिट है। यह तीनों न्यायाधीश पाँच जजों वाली पीठ का हिस्सा हैं, जो शनिवार को मामले पर अपना फ़ैसला सुनाएगी।

पीठ में अन्य दो न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एस अब्दुल नज़ीर भी शामिल हैं। अयोध्या में 4,000 से अधिक अर्धसैनिक बलों की तैनाती के सन्दर्भ में एक घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में मुख्य सचिव और डीजीपी ने CJI को सूचित किया। जजों को यह भी बताया गया कि रैपिड एक्शन फ़ोर्स प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए 78 हॉटस्पॉटों पर निरंतर निगरानी रखेगी।

बता दें कि पिछले कुछ महीने से सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई निरंतर हो रही थी। आज आने वाला फ़ैसला इसलिए भी अनूठा है क्योंकि आमतौर पर शनिवार को कोर्ट की छुट्टी रहती है, लेकिन फ़ैसले के लिए शनिवार का दिन चुनना भी अपने आप में एक ऐतिहासिक क़दम है।

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद कर दी गई है। इस फ़ैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट के जजों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को जेड प्लस सुरक्षा दी गई है। वहीं बाकी जजों की और उनके आवास समेत सुप्रीम कोर्ट परिसर और आसपास की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की इनर मोस्ट जोन की सुरक्षा भी दिल्ली पुलिस की सिक्युरिटी यूनिट के हवाले रहती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के अंदर जो सुरक्षा होगी। वह सिक्योरिटी यूनिट देखेगी। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ जाने वाली सभी सड़कों की निगरानी बढ़ा दी गई है। तिलक मार्ग, भगवानदास रोड, मथुरा रोड, महादेव रोड और इंडिया गेट सर्कल की सुरक्षा न्यू दिल्ली डिस्ट्रिक्ट पुलिस देखेगी।

सुप्रीम कोर्ट समेत कई इलाकों में पेट्रोलिंग शुरू कर दी गई है। संदिग्ध लोगों पर नज़र रखी जा रही है। अयोध्या मामले पर फ़ैसले से पहले दिल्ली पुलिस ने एक्स्ट्रा फोर्स भी बुलाई है। उन सभी को नई दिल्ली इलाके में भी तैनात किया जाएगा। सभी की तैनाती शुरू हो चुकी है। डीसीपी नई दिल्ली और जॉइंट सीपी नई दिल्ली रेंज सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने में जुटे हुए हैं।

बाराबंकी में वकीलों ने जज के साथ की बदसलूकी, कहा- हड़ताल है तो क्यों कर रहे हो काम?

दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच विवाद का असर देश के कई जगहों पर देखने को मिला। लेकिन, यूपी के बाराबंकी में वकीलों द्वारा जज के साथ मारपीट और अभद्रता करने की घटना सामने आई है। वकीलों ने जज के चेंबर में घुसकर उनके साथ अभद्रता की। आरोप है कि वकीलों ने जज का कॉलर पकड़ लिया उनके साथ गाली-गलौज की।

दरअसल, तीस हजारी कोर्ट में हुए विवाद के कारण जिले के अधिवक्ताओं की शुक्रवार (नवंबर 8, 2019) को हड़ताल चल रही थी। इसी दौरान तहसील के सामने स्थित मोटर दुर्घटना कार्यालय में वकीलों के समूह ने जज संदीप जैन के कार्यालय में घुस कर उनके और उनके कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की। 

बता दें कि संदीप जैन मोटर दुर्घटना दावा अभिकरण के पीठासीन अधिकारी (जज) हैं। उन्होंने बताया कि वो अपने कार्यालय में बैठ कर कुछ जरूरी आदेश आशुलिपिक से लिखवा रहे थे। तभी 40- 50 वकील उनके कार्यालय में घुस आए और उनके साथ अभद्रता करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए। 

विरोध कर रहे वकील जज के कार्यालय में घुस आए और उनका कॉलर पकड़ कर अभद्रता कर कहने लगे कि हड़ताल के दिन काम क्यों करवा रहे हो। उनके अलावा वकीलों ने उनके आशुलिपिक, गनर और स्टाफ के लोगों के साथ भी गाली गलौज और अभद्रता की। मोबाइल से फोटो खींचने पर वकीलों ने मोबाइल फोन छीन लिया और जम कर उत्पात मचाया।

इस घटना का विवरण देते हुए संदीप जैन ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर दोषी वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की माँग की है। इस मामले में बाराबंकी के अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि इस संबंध में संदीप जैन की तहरीर पर अज्ञात वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। आगे जाँच में जो तथ्य सामने आएँगे उसके अनुसार कार्यवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी अभद्रता की बात सामने आई है और सरकारी कार्य में बाधा डालने का अभियोग पंजीकृत किया गया है। सीसीटीवी कैमरे की भी जाँच में यदि कोई फुटेज मिलता है तो उसे भी संज्ञान में लिया जाएगा।