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सुषमा की मृत्यु के बाद अब खुला यह राज: उन्होंने कहा था- उनकी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी अगर विदेश में हुई तो…

हाल ही में दिवंगत हुईं भूतपूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल ने उनकी सर्जरी के बारे में महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि सुषमा स्वराज ने डॉक्टरों की सलाह के बावजूद अपना इलाज विदेश में कराने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनकी किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी अगर विदेश में हुई तो यह देश के सम्मान पर सवाल बन जाएगा। अपने डॉक्टर डॉ. मुकुट मिंज से उन्होंने कहा था, “डॉक्टर साहब, आप सिर्फ़ इंस्ट्रूमेंट (सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण) पकड़िए, कृष्णा मेरी सर्जरी आप करेंगे।”

सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल पेशे से वकील हैं और महज़ 37 साल की उम्र में मिज़ोरम के गवर्नर का पद भी संभाल चुके हैं। उन्होंने यह बातें अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखीं।

उन्होंने आगे लिखा कि देश के बाहर सर्जरी के नाम पर सुषमा ने कहा, “अगर हम विदेश गए, तो लोग हमारे डॉक्टरों और अस्पतालों पर विश्वास खो देंगे।” कौशल ने यह भी बताया कि सर्जरी के एक ही दिन बाद आराम कुर्सी पर मुस्कुराते हुए उन्होंने यह बात कही थी। उन्होंने अपनी सर्जरी को बहुत छोटी बताया, और उसका पूरा क्रेडिट एम्स के डॉक्टरों, नर्सों और समर्पित स्टाफ़ को दिया।

स्वराज कौशल ने सुषमा की सर्जरी और स्वास्थ्य लाभ में सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि मोदी हमेशा स्वराज को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए कहते थे, और उन्होंने पीएम के लिए हमेशा रिज़र्व रहने वाला एम्स का विंग भी स्वराज के इलाज के लिए दे दिया।

BBC ने फिर परोसा झूठ: RSS को बदनाम करने के लिए खबर में डाला फर्जी एंगल… लेकिन पकड़े गए

RSS और भाजपा की छवि धूमिल करने के प्रयासों में एक बार फिर से बीबीसी के झूठ का पर्दाफाश हुआ है। बीबीसी ने एक बार फिर अपनी खबर को एंगल देने के लिए आरएसएस को बदनाम करने की कोशिश की है। अब ये चाहे उसने अपने अजेंडे के तहत किया हो या फिर अज्ञातनावश, लेकिन एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि बीबीसी अपनी रिपोर्टों के जरिए हिंदूवादी संगठनों को बदनाम करने के लिए इतना आतुर है कि वो भूल चुका है, खबर में किसी तथ्य की पुष्टि करने से पहले उसके बारे में खँगालना पत्रकारिता का मूल धर्म है।

दरअसल, कुछ समय पहले एक खबर आई कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर चिंता जाहिर की। साथ ही इस संबंध में केंद्र सरकार और राज्य सरकार को फटकार भी लगाई गई। जिसपर भारतीय किसान यूनियन की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है। उनकी ओर से पंजाब के महासचिव हरिंदर लाखोवाल ने अपने बयान में कहा कि हम प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अपने लिए सब्सिडी माँग रहे हैं जब तक किसानों के खाते में सब्सिडी नहीं आएगी तब तक हम ऐसे ही पराली जलाते रहेंगे।

अब चूँकि प्रदूषण मुद्दे पर इतना गैर-जिम्मेदाराना बयान आया तो इस पर हर मीडिया हाउस में रिपोर्ट की जानी आम बात है। लेकिन बीबीसी ने इस पूरी रिपोर्ट को करके आखिर में अपनी अजेंडापरस्त पत्रकारिता का फिर उदाहरण दे दिया। दरअसल, रिपोर्ट के अंत में लिखा गया कि ‘भारतीय किसान यूनियन’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध संगठन है। जबकि वास्तविकता में ये संगठन आरएसएस से जुड़ा हुआ ही नहीं है।

बीबीसी में परोसा गया अजेंडा

हालाँकि, ये बात सच है कि आरएसएस से किसानों का बहुत बड़ा संगठन जुड़ा हुआ है, लेकिन उसका नाम भारतीय किसान यूनियन नहीं है, बल्कि भारतीय किसान संघ है। जिसकी स्थापना श्री दत्तोपंथ जी थेंगड़ी द्वारा 4 मार्च 1979 में की गई थी।

भारतीय किसान संघ की वेबसाइट पर मौजूद परिचय

जबकि भारतीय किसान यूनियन की स्थापना चौधरी महेंद्र सिंह टिकैट द्वारा की गई थी। जिसकी पुष्टि स्वयं भारतीय किसान संघ ने पिछले साल अपने एक बयान में की थी और बताया था कि दोनों संगठन अलग-अलग हैं।

अब ये कहा जा सकता है कि प्रथम दृष्टया, इन दोनों संगठनों के नाम में समानता के कारण इनमें फर्क़ समझना थोड़ा कठिन है क्योंकि ‘यूनियन’ का हिंदी पर्याय ‘संघ’ ही होता है। इसके अलावा इंटरनेट पर भारतीय किसान यूनियन डालने पर भी आरएसएस से जुड़े संगठन यानी भारतीय किसान संघ का ही पेज खुलता है। जिसका तकनीकी कारण, दोनों शब्दों का लगभग एक जैसा मिलना या फिर आरएसएस से जुड़े इस संघ का गूगल पर ज्यादा सर्च किया जाना हो सकता है। इसलिए, मुमकिन है कि ये गलती किसी पत्रकार से अज्ञानतवश या हड़बड़ी में हुई हो।

लेकिन, ऐसी स्थिति में भी बीबीसी को ये समझने की जरूरत है कि जब आप किसी मामूली खबर में जबरन अपने संस्थान के अजेंडे को परोसने की कोशिश करते हैं, तब ये गलती भूल नहीं, उतावलापन कहलाती है। उस समय साफ पता चलता है कि ये जल्दबाजी में किसी की छवि धूमिल करने का एक प्रयास है। इसके लिए जरूरी है कि रिपोर्ट में झूठी पुष्टि करने से पहले तथ्यों की छानबीन की जाए। ताकि पाठक और विरोधी आप पर, आपकी पत्रकारिता पर, आपके संस्थान की नीतियों पर सवाल न उठा पाएँ?

बता दें कि बीबीसी की भाँति ही हिंदी मीडिया के जाने-माने संस्थान जनसत्ता ने भी इस खबर को इसी एँगल से पेश किया है।

अब जब सारा सच सामने है तो यह कहा जा सकता है कि एजेंडाबाजी की आड़ में बीबीसी जैसे बड़े संस्थान फेक न्यूज़ या मनचाहा ट्वीस्ट देने के अड्डे बनते जा रहे हैं। उस पर मजेदार बात यह है कि पकड़े जाने पर भी न माफ़ी माँगते हैं और न ही जल्दी भूल-सुधार करते हैं।

मोदी सरकार की पहल पर म्यांमार में रोहिंग्याओं की कैद से छूटेंगे 5 भारतीय: एक गँवा चुका है जान

म्यांमार के अराकान आर्मी द्वारा बंधक बना लिए गए पाँच भारतीयों के लिए मोदी सरकार ने आख़िरकार रिहाई का रास्ता तैयार कर दिया। अराकान आर्मी नाम के एक रोहिंग्या विद्रोही संगठन ने इन पाँच भारतीयों को उस वक़्त गिरफ्तार कर लिया था जिस वक़्त म्यांमार के उत्तर में स्थित रखाइन प्रान्त से होकर एक सड़क परियोजना पर काम करने के लिए जा रहे थे। बंधक बना लिए गए इन भारतीयों में विजय कुमार सिंह (48), नांगशानबोक(47), राकेश शर्मा (64) और अजय कोठियाल (64) शामिल हैं।

तीन नवम्बर को म्यांमार के एक सांसद, दो स्थानीय ट्रांसपोर्टर और एक बोट ऑपरेटर सहित पाँच भारतीयों को एक उपद्रवी संगठन ने क्युँत्काव से रखाइन प्रान्त के रास्ते जाते वक़्त बंधक बना लिया। बंधक बना लिए जाने के बाद इनमें से एक भारतीय की मृत्यु हो गई थी। अराकान में बंधक बनाए रखे जाने के दौरान मरने वाले भारतीय व्यक्ति की पहचान 60 वर्षीय वीनू गोपाल के तौर पर हुई जोकि वहाँ एक कंस्ट्रक्शन एडवाइज़र के तौर पर काम करता था।

इस मामले में मोदी सरकार के दखल के बाद बंधक बनाए गए भारतीय नागरिकों को वीनू गोपाल के पार्थिव शरीर समेत भारत वापस भेजने की तैयारी तेज़ हो चुकी है। इन्हे रिहाई के बाद सितवा भेझा जा चुका है जहाँ से वे मंगलवार को यंगून के रास्ते भारत आएँगे। एक रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास इस पूरी कार्रवाई पर अपनी नज़र बनाए हुए है ताकि भारतीयों को हर संभव मदद मिल सके और गोपाल के शरीर को भी ससम्मान भारत भेजा जा सके।

हालाँकि, इस मुद्दे पर जब बंधक बनाने वाली अराकान आर्मी के आदमी से बात की गई तो उसने कहा कि किसी को भी बंधक नहीं बनाया गया था। उसके मुताबिक “कालादान नदी में सामान्य चेकिंग के चलते इन लोगों को रोका गया था, जिसमें पाँच भारतीय और दो ट्रांसलेटर और दो नाविक शामिल थे। हमें हिन्दुस्तानियों से भला क्या मामला हो सकता है। यही वजह है कि हमने कल शाम ही इन्हें रिहा करने का निर्णय ले लिया था।”

अराकान आर्मी ने एक बयान जारी करते ही दावा किया कि रविवार सुबह करीब 10 बजे भारतीयों को नाव से पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इसके बाद अगले ही दिन सुबह 5:45 पर सोमवार को उन्हें मुक्त कर दिया। उन्होने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के विकास परियोजना के खिलाफ नहीं हैं जो जनता के हित में हो। गौरतलब है कि इस संगठन ने मृतक वीनू गोपाल की मौत पर शोक जताया है जबकि वीनू ने अपनी मौत का ज़िम्मेदार इसी संगठन की हरकत को बताया था जिसके चलते उन्हें डायबिटीज और हार्ट की समस्या बढ़ी और उन्होंने दम तोड़ दिया।

‘मुस्लिमों को आरक्षण देगी शिवसेना, NCP और कॉन्ग्रेस के समर्थन से बन सकती है सरकार’

महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में राष्ट्रपति शासन और समय पूर्व चुनाव की आहटों के बीच एनसीपी ने अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी कुछ इसी तरफ इशारा किया था। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री पवार ने कहा था कि भविष्य में उनकी पार्टी का स्टैंड बदल भी सकता है। अब एनसीपी के मुंबई इकाई के अध्यक्ष नवाब मलिक ने अपनी पार्टी के शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना ने भाजपा के साथ जाने के बाद ही धर्म की राजनीति शुरू की।

नवाब मलिक ने कहा कि अगर शिवसेना भाजपा का साथ छोड़ कर आती है और एनसीपी से समर्थन माँगती है तो पार्टी उसे समर्थन देगी और कॉन्ग्रेस को भी इसके लिए राजी करेगी। नतीजे आने के बाद 12 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक महाराष्ट्र में सरकार गठन की कवायद ही चल रही है और कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। नवाब मलिक ने कहा कि भाजपा ने शिवसेना को 5 साल तक अपमानित किया और अब उसे लग रहा है कि कुंजी एनसीपी के हाथों में है। उन्होंने आश्वासन दिया कि कॉन्ग्रेस के साथ बात हो जाएगी लेकिन पहले शिवसेना तो फ़ैसला करे।

शिवसेना की विचारधारा को लेकर मुंबई एनसीपी के अध्यक्ष ने कहा कि उनकी विचारधारा आड़े नहीं आएगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से अलग होते ही शिवसेना की विचारधारा बदलेगी। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस के भीतर भी शिवसेना को समर्थन देने को लेकर कोई अंदरूनी विवाद नहीं है। बकौल मलिक, शिवसेना ने मुस्लिमों को आरक्षण देने का भी वादा किया है। उधर शिवसेना ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के नेतृत्व में सरकार गठन की बातें की जा रही थीं।

शिवसेना नेता संजय राउत ने दावा किया है कि राज्य में मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा। सामना के एग्जीक्यूटिव एडिटर राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति बदल रही है और लोग जिसे हंगामा बता रहे हैं, वो न्याय की लड़ाई है। राउत ने कहा कि महाराष्ट्र का निर्णय महाराष्ट्र में होगा और अंतिम निर्णय उद्धव ठाकरे लेंगे। मीडिया में ये बातें भी चल रही हैं कि शिवसेना मुख्यमंत्री का पद अपने पास रख कर 2 उप-मुख्यमंत्री बना सकती है। कॉन्ग्रेस और एनसीपी के कोटे से एक-एक डिप्टी सीएम होंगे। हालाँकि, अभी कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं और शरद पवार भी चुप ही हैं।

बांग्लादेशी कामगार नहीं चलेंगे: बंगलुरु में बंग-भाषी घरेलू नौकरों के खिलाफ जारी फरमान

बंगलुरु में अपार्टमेंट सोसाइटियों ने ऐसे सभी लोगों को नौकरी पर न रखने का फैसला किया है जो बाद में बांग्लादेशी अवैध प्रवासी निकल सकते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने यहाँ घरेलू नौकर, सिक्योरिटी गार्ड समेत कामगार भेजने वाली नौकरी एजेंसियों को निर्देश भेजा है कि उनकी सोसाइटी में बंगाली बोलने वाले लोगों को काम पर न भेजा जाए, क्योंकि बाद में वे अगर बांग्लादेशी निकले तो उन्हें नौकरी पर रखने वाले मालिकों, यानि अपार्टमेंट सोसाइटी के निवासियों, के लिए भी क़ानूनी पचड़े में फँसने की संभावना हो सकती है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार यह निर्णय लेने वाली सोसाइटियाँ मुख्यतः वाइटफ़ील्ड, मराठाहल्ली और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में स्थित हैं। यह तीनों इलाके बंगलुरु के टेक कॉरिडोर कहे जाते हैं, जहाँ आईटी इंडस्ट्री के ऑफिस और उन्हीं के आसपास उनमें काम करने वाले लोगों के रिहाइशी इलाके हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह निर्णय बंगलुरु पुलिस की अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद लिया गया है। हाल ही में बंगलुरु पुलिस ने बड़े पैमाने पर धरपकड़ अभियान चलाते हुए बांग्लादेशी अवैध अप्रवासियों को गिरफ्तार कर लिया था।

फॉरेनर्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कर हिरासत में लिए गए अवैध अप्रवासियों को डिपोर्ट करने की तैयारी पुलिस द्वारा की जा रही है। पूरी कार्रवाई बंगलुरु पुलिस की क्राइम ब्रांच (सीसीबी, सिटी क्राइम ब्रांच) द्वारा की गई है।

इसके अलावा अवैध अप्रवासियों की समस्या से त्रस्त कर्नाटक सरकार ने और भी कई कदम उठाए हैं, जिनमें कर्नाटक में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स) की कवायद किए जाने की हिमायत और बंगलुरु शहर के लिए खुद की अलग एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) शामिल हैं। राज्य के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने इस आशय से घोषणा भी की थी। गौरतलब है कि कर्नाटक के पास पहले से ही एक एटीएस पूरे प्रदेश के लिए है।

कर्नाटक के गृह मंत्री बासवराज बोम्मई ने दावा किया था कि बंगलुरु और मैसूर शहर जिहादी गतिविधियों के केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने इन राज्यों में आतंकियों के स्लीपर सेल सक्रिय होने की बात कही थी। उन्होंने जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश संगठन का नाम भी लिया।

अपार्टमेंट सोसाइटियों के इस मौजूदा कदम को लेकर टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ही रिपोर्ट में यह ज़िक्र है कि बंगाली समुदाय के लोग भी भारतीय बंगाली और बांग्लादेशी में अंतर कर पाने में मुश्किल की बात को स्वीकार करते हैं। इसके अलावा कई सोसाइटियों ने अपनी तरफ से भी संदिग्ध बांग्लादेशियों के बारे में रिक्रूटमेंट एजेंसियों, महानगर पालिका और पुलिस को ईमेल किया है।

आतंकियों की भाषा बोल रहा है TIME में लिखने वाला आतिश, हिन्दुओं के लिए खुल कर उगल रहा है ज़हर

हिंदुओं के ख़िलाफ जहर उगलने का काम सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से होता आया है। लेकिन पिछले कुछ समय से ये स्थिति अपने चरम पर है। लेखक से लेकर पत्रकार और फिल्म निर्देशक से लेकर कलाकार तक की श्रेणी में ऐसा गिरोह है, जो वजह-बेवजह अपने हर मुद्दे में कोई न कोई एक ऐसा एँगल उजागर कर देता है, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हों। बीते दिनों ऐसे काम करने के लिए यूजर्स ने देवदत्त पटनायक को आड़े हाथों लिया था और अब बारी आतिश तासिर की है।

आतिश पेशे से लेखक है, न्यू यॉर्क टाइम्स जैसे अखबार में इसके लेख भी छपते रहते हैं। ऐसे में दिल्ली प्रदूषण को निशाना बनाते हुए एक बार फिर से इसने अपना जहर उगला है। और किसी भी विषय पर लिखने-बोलने का इसका मौलिक अधिकार भी है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि बातों ही बातों में प्रदूषण के बहाने आप अपनी कुँठा को निकालना शुरू कर दें और सरकार की आलोचना से गौमूत्र तक पहुँच जाएँ। लेकिन आतिश ने ठीक वैसा ही किया, जो एक हिंदूफोबिक करता आया है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर आतिश तासीर द्वारा एक ट्वीट रिट्वीट किया गया, जिसमें टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट का जिक्र था कि क्या अब प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय करीब आ जाएँगे। हालाँकि राहुल सिंह द्वारा शेयर किया गया ट्वीट एक सामान्य रिपोर्ट थी, जिस पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी थे। लेकिन आतिश ने उस पर न केवल सरकार के प्रति अपनी कुंठा निकाली बल्कि बहस के आखिर तक हिंदुओं को आहत करने से भी नहीं चूका।

सबसे पहले आतिश ने लिखा, “जिस समय मेरी टाइमलाइन जहरीली हवा की भयावह कहानियों से भरी हुई है, उस समय केवल एक भिखारी की कल्पना ही हो सकती है कि ये बेतुकी सरकार केवल उन चीजों को जोड़ने का प्लान कर रही है जो हकीकत में टूटे ही नहीं।”

अब चूँकि आतिश की यह कुंठा बिना किसी संदर्भ के एक साधारण से ट्वीट पर प्रतिक्रिया के रूप में आई तो सोशल मीडिया यूजर्स को भी उन्हें आईना दिखाने में समय नहीं लगा। डॉ विजय चौथाईवाले ने उन्हें इसका जवाब दिया और लिखा, “केवल आतिश तासिर जैसे जाहिल और घमंडी लोग ही कह सकते हैं कि भारत को एक नए आधुनिक संसद परिसर और सचिवालय की आवश्यकता नहीं है।”

बस फिर क्या था, आतिश को अंग-विशेष में मिर्ची लग गई। सारे तर्क-वितर्क छोड़ कर अपनी बात को जस्टिफाई करते-करते गौमूत्र पर उतर आया। उसने जवाब देते हुए लिखा कि जब तुम अपने लोकतंत्र को अजायबघर (म्यूजियम) में तब्दील कर फुरसत पा लो तो दुनिया के और भी पुराने पार्लियामेंट हाउस को, जैसे वेस्टमिंस्टर को गौमूत्र का अध्य्यन करने वाला संस्थान बनाने या फिर यूएस कैपिटोल को वैदिक काल में उड्डयन संबंधी संग्रहालय बनाने में अपनी सेवा देने के लिए तैयार रहो।

इसके जवाब में भाजपा नेता नंदिता ठाकुर ने आतिश की अच्छी क्लास ली। उन्होंने लिखा “ओये… हिंदुओं से डरने वाले पाकिस्तानी औलाद, जब तुम इस मामले में गौमूत्र को ले ही आए हो, तो मैं तुमसे सहमत हूँ कि वेस्टमिंस्टर को गौमूत्र पर अध्य्यन करने के लिए एक संस्थान में तब्दील कर देना चाहिए। कम से कम लोगों को कैंसर से बचाया जा सकेगा।” अपनी ट्वीट के साथ नंदिता ने एक न्यूजपेपर की कटिंग लगाई और कहा कि अहमद पटेल (कॉन्ग्रेसी नेता) से इसका अनुवाद करवा के पढ़ो।

इस ट्वीट के बाद तो आतिश पूरी बेहूदगी पर उतर आया। उल-जूलुल बातें करनी शुरू कर दी। जिसे देखकर अभिजीत अय्यर मित्रा ने तंज भरे अंदाज में कहा, “कितना नकारात्मक नजरिया है। तुम्हें तो इसका व्यवसायीकरण करना चाहिए। गौमूत्र के कॉकटेल का आविष्कार करो, इसे स्वास्थ्य के लिए अगली सबसे जरूरी चीज बताओ। फिर इसका पेटेंट करवा लो। पैसा, पैसा, पैसा।”

अभिजीत की प्रतिक्रिया पढ़कर तासिर बिलबिला गया और बिना वजह शेफाली वैद्य को टैग करते हुए भड़काने की कोशिश की। आतिश ने लिखा, “मैं इससे पूरी तरह सहमत हूँ। मैं शेफाली को एक लिंब (कोई अंग विशेष) दूँगा, फिर देखूँगा कि वो उसे गौमूत्र में कैसे डूबाती-नचाती हैं, बिलकुल गौमूत्र की क्लियोपैट्रा की तरह… या इसे जो भी समझ लो।”

हालाँकि इसके बाद शेफाली वैद्य और अन्य यूजर्स ने आतिश को जवाब दिए, लेकिन जिहादी मानसिकता वाले आतिश ने एक बार फिर साबित कर दिया कि एक निश्चित तबके का समर्थन करके आप खुद को तथाकथित बुद्धिजीवियों की श्रेणी में शुमार तो कर सकते हैं, लेकिन आपकी मानसिकता आपके घर से ही तय होती है। और आतिश में यह मानसिकता खूब दिखती है, जिसने उसे जहर उगलना और हिंदुओं से नफरत करना सिखाया है।

बता दें कि आज पॉल्यूशन को कोसने के नाम पर सरकार की नीतियों की आलोचन करते-करते गौमूत्र तक आ उतरे आतिश तासीर के पिता सलमान तासिर भी लगातार भारत के ख़िलाफ़ जहर उगलते थे। खुद आतिश तासीर इस बात की तस्दीक कर चुके हैं कि उसके वालिद और पाकिस्तानियों की तरह वह भी हिंदुस्तान से नफरत की ग्रंथि से ग्रस्त हैं। पुलवामा हमले के दौरान आतिश तासीर ने भारतीयों को गाय का पेशाब पीने वाला कहकर बुलाया था और कमलेश तिवारी की हत्या के बाद भी हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़काऊ टिप्पणी की थी।

न्यूड वीडियो वायरल होने के बाद Pak गायिका ने मनोरंजन की दुनिया को कहा अलविदा: PM मोदी को दी थी धमकी

पाकिस्तानी गायिका रबी पीरजादा ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया है। अपना न्यूड वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने ये क़दम उठाया है। पीरजादा अक्सर भारत-विरोधी बयानों और अजीबोगरीब हरकतों की वजह से सुर्ख़ियों में रहती हैं। उन्होंने साँप-मगरमच्छ के साथ वीडियो बना कर भारत पर हमले की धमकी दी थी। उसके बाद उन्होंने अपने बदन पर एक सुसाइड बेल्ट बाँध कर पीएम मोदी को आत्मघाती हमले की धमकी दी थी। रबी पीरजादा सलमान ख़ान पर युवाओं को अपराधी बनाने का आरोप भी लगा चुकी हैं। वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना अक्सर जर्मन तानाशाह हिटलर से करती हैं।

लेकिन अबकी उनके सुर्ख़ियों में आने का कारण बने उनके न्यूड सेक्स वीडियो, जिसके कारण उनकी ख़ूब फजीहत हुई। पाकिस्तान में कई लोगों ने रबी पीरजादा के समर्थन में अपनी-अपनी अर्धनग्न तस्वीरें पोस्ट की। इसमें कई पुरुष व महिलाएँ शामिल हैं। अब रबी पीरजादा ने इस विवाद के बाद एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। रबी पीरजादा ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने भूखे बच्चों को बचाने के लिए एक एनजीओ के आग्रह पर ये तस्वीरें खिंचवाई थी लेकिन इसका ग़लत इस्तेमाल हो रहा है।

रबी पीरजादा ने फ़ेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी में रिपोर्ट दर्ज करा कर अपनी न्यूड तस्वीरें और वीडियो वायरल होने को लेकर शिकायत दर्ज कराया है। शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) को रबी पीरजादा पाकिस्तान में ट्विटर पर काफी देर तक ट्रेंड होती रहीं। अधिकतर लोगों ने उनके वायरल फोटोज को लेकर उन्हें ट्रोल किया। जानवरों के साथ वीडियो बनाने के कारण उन्हें वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन विभाग की तरफ से नोटिस भी जारी किया गया है। लगातार विवादों में रहने के बाद पीरजादा ने मनोरंजन की दुनिया को अलविदा कह दिया है।

रबी पीरजादा ने उर्दू में ट्वीट कर इसकी घोषणा की। उन्होंने लिखा कि अल्लाह उनके पापों को क्षमा करें और उनकी आलोचना करने वाले लोग उनके प्रति अच्छा सोचें। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि वो शोबिज को अलविदा कह रही हैं। रबी पीरजादा को लेकर कई लोगों का मानना है कि पाकिस्तानी फ़ौज ने ही उनका वीडियो वायरल कर दिया क्योंकि उन्होंने फ़ौज की आलोचना की थी। लोगों ने इसके लिए पाकिस्तानी सेनाधिकारी आसिफ गफूर को जिम्मेदार ठहराया।

SC ने मुस्लिम महिलाओं की मस्जिद में एंट्री वाली याचिका पर कहा- 10 दिन बाद सुनेंगे, ‘एक अलग कारण’ है

सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में महिलाओं की एंट्री से सम्बंधित याचिका पर सुनवाई को 10 दिनों के लिए टाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई को अगले 10 दिनों तक स्थगित किया जाता है। इस मामले में अलग-अलग पक्ष हैं, जिनमें से कुछ ने रीजॉइंडर दायर करने के लिए 4 हफ़्तों तक का समय माँगा है। जस्टिस बोड़बे ने 10 दिनों के लिए सुनवाई स्थगित करने के पीछे कारण भी स्पष्ट किया। भावी मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि सुनवाई को आगे बढ़ाने का ‘एक अलग कारण’ है।

बता दें कि मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं की एंट्री एक ज्वलंत मुद्दा रही है। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा भी इस सम्बन्ध में याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट गई थी, जिस ख़ारिज कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा था कि जब मुस्लिम महिला आकर ऐसी कोई याचिका दायर करती है, तब सुप्रीम कोर्ट इसपर विचार करेगा। इस याचिका में मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं की एंट्री पर इस्लामिक प्रतिबन्ध को बराबरी के अधिकार के विरुद्ध बताया गया था। इसमें कहा गया था कि ये मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार से जवाब भी माँगा है। एक अन्य याचिका दायर की गई थी, जिसमें मुस्लिम महिलाओं पर मस्जिदों में लगी रोक को असंवैधानिक बताया गया था। कहा गया था कि ये मूलभूत अधिकारों, बराबरी का अधिकार और जेंडर जस्टिस के ख़िलाफ़ है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वो 5 नवम्बर तक इस समबन्ध में अपनी स्थिति स्पष्ट करे। कोर्ट ने इस सम्बन्ध में महिला विकास मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग को नोटिस भेज कर पूछा था।

दायर की गई याचिका में कहा गया है कि न सिर्फ़ मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में मुख्य द्वार से प्रवेश करने का अधिकार मिलना चाहिए, बल्कि उन्हें मुसल्ला (नमाज पढ़ने की जगह) में जाकर नमाज पढ़ने की इजाजत मिलनी चाहिए। याचिका में कहा गया है कि चूँकि भारत के मस्जिदों को सरकार से सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, इसीलिए सरकार को कहा जाना चाहिए कि वो मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं को प्रवेश करने के लिए निर्देशित करना चाहिए।

ऑटो सेक्टर में मंदी है और नहीं भी: ‘The Hindu’ ने 1 दिन में 2 विरोधाभासी ख़बरें चला कर पाठकों को बनाया पागल

राफेल पर लेख लिख-लिख कर विपक्ष को मुद्दा देने वाले एन राम के कारण ‘द हिन्दू’ की पहले ही काफ़ी किरकिरी हुई थी। राफेल की रट लगाते-लगाते कॉन्ग्रेस पार्टी की इतनी बुरी हार हुई कि ‘द हिन्दू’ ने इसपर लेख छापना लगभग बंद ही कर दिया। अब मीडिया संस्थान की नई करतूत सामने आई है। एक ही चीज को संस्थान ने अपने दो अलग-अलग अख़बारों में ‘घोड़ा’ भी कहा है और ‘चतुर’ भी कहा है। ख़ासकर जब ख़बर अर्थव्यवस्था से जुडी हुई हो तो डाटा को मनचाहे ढंग से प्रेजेंट कर अपना प्रोपेगंडा फैलाना आसान हो जाता है।

‘द हिन्दू’ ने कुछ ऐसा ही किया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में त्योहारों के कारण रौनक आई है, ऐसा ‘द हिन्दू’ का कहना है। त्योहारों के मौसम में ऑटोमोबाइल सेक्टर में रौनक नहीं आई है, ये भी ‘द हिन्दू’ का ही कहना है। कहने का मतलब है कि अख़बार की नज़र में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए खुशियाँ आई भी हैं और नहीं भी आई हैं। दो अलग-अलग ख़बरें वेबसाइट पर एक ही दिन प्रकाशित की गईं। दोनों ख़बरों को अख़बारों में भी एक ही दिन छापा गया। आइए, आप आपको पूरा माजरा जरा अच्छे से समझाते हैं ताकि आपको भी ‘द हिन्दू’ की ‘घोड़ा-चतुर’ पॉलिसी का ज्ञान हो।

‘बिजनेस लाइन’ ने शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) को ख़बर चलाई कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में ये त्योहारी सीजन कोई खुशियाँ लेकर नहीं आया है। इसमें कहा गया कि डोमेस्टिक मार्किट अक्टूबर में रेड जोन में रहा। इसमें हौंडा, महिंद्रा और टाटा मोटर्स को हुए घाटे का जिक्र किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि दोपहिया वाहनों की बिक्री में मंदी आ गई है। ठीक उसी दिन, ‘द हिन्दू’ ने ख़बर प्रकाशित की कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में ये त्योहारी सीजन खुशियाँ ही खुशियाँ लेकर आया है। इसमें बताया गया कि किस तरह मारुती सुजुकी ने बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की है। मारुती के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के हवाले से यह भी बताया गया है कि बाजार में सकारात्मक बदलाव आया है।

हैरत की बात तो यह है कि ‘बिजनेस लाइन’ और ‘द हिन्दू’, ये दोनों ही अख़बार एक ही कम्पनी द्वारा प्रकशित किया जाता है। दोनों ही अख़बार और वेबसाइट ‘कस्तूरी एंड संस’ के मालिकाना हक़ में है। ऐसे में, एक ही समय पर दो अलग-अलग विरोधाभासी हैडलाइन देकर ग्राहकों के दो अलग-अलग वर्गों को संतुष्ट करने की चाल में ‘द हिन्दू’ और ‘बिजनेस लाइन’ ने शायद यही एडिटोरिअल पॉलिसी बना रखी है। किसी चीज को एक अच्छा कहेगा तो दूसरा बुरा। एक में मंदी होगी तो दूसरे में अर्थव्यवस्था छलाँग मार रही होगी।

अयोध्या दहलाने की बड़ी साजिश: 7 पाकिस्तानी आतंकी नेपाल के रास्ते यूपी में घुसे, हाई अलर्ट

अगले 10 दिनों के भीतर राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने वाला है। ऐसे में, अयोध्या में बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का एक जत्था घुस गया है, जो राम मंदिर मामले के बीच दहशत फैलाना चाहता है। बता दें कि राम मंदिर मामले में अगस्त महीने में शुरू हुई नियमित सुनवाई अक्टूबर में ख़त्म हो गई थी। इस महीने सीजेआई रंजन गोगोई रिटायर होने वाले हैं और उससे पहले फ़ैसला आना तय है। सुनवाई ख़त्म होने के बाद 5 सदस्यीय पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था।

अयोध्या मामले की सुनवाई ख़त्म होने के बाद से विभिन्न ख़ुफ़िया एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल के रास्ते 7 आतंकवादी उत्तर प्रदेश में घुस चुके हैं। ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि ये सभी पाकिस्तानी आतंकवादी हैं, जिन्हें अयोध्या में आतंक फैलाने के लिए भेजा गया है। सम्भावना जताई जा रही है कि ये आतंकी अयोध्या, फ़ैजाबाद और गोरखपुर में छिपे हो सकते हैं। सात में से पाँच आतंकियों की पहचान भी हो गई है।

जिन 5 आतंकियों की पहचान हुई है, उनके नाम है– मोहम्मद याकूब, अबू हमजा, मोहम्मद शाहबाज, निसार अहमद और मोहम्मद कौमी चौधरी। ख़ुफ़िया विभाग सभी जानकारियों को जुटा रहा है और इन आतंकियों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए लगातार लगा हुआ है। सोमवार (नवंबर 4, 2019) को ख़ुफ़िया विभाग ने पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित नरोवाल में आतंकी कैम्पों का पता लगाया है। इन कैम्पों में आतंकियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह भी जानने लायक बात है कि जिस सीमावर्ती जिले में ये आतंकी जमे हुए हैं, करतापुर साहिब गुरुद्वारा भी वहीं पर स्थित है।

पंजाब में स्थित डेरा बाबा नानक साहिब और नरोवाल में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा को कनेक्ट करते हुए पाकिस्तान ने सिख श्रद्धालुओं को वहाँ दर्शन करने की अनुमति दे दी है। ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के सीमावर्ती जिलों में स्थित अंडरग्राउंड आतंकी कैम्पों में कई महिलाओं को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से आतंकी पहले से ही बौखलाए हुए हैं लेकिन सुरक्षा बलों की सक्रियता के कारण वो किसी आतंकी हमले में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद आतंकियों ने जम्मू कश्मीर में निर्दोष ट्रक ड्राइवरों व मजदूरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।