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हिस्ट्रीशीटर को दी मानद डॉक्टरेट की डिग्री, हत्या के चल रहे हैं 3 मामले

कर्नाटक के विजयपुरा के निवासी उस समय हैरत में पड़ गए जब उन्हें पता चला कि उनके जिले के एक हिस्ट्रीशीटर को इंडोनेशिया के एक विश्वविद्यालय ने मानद डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित किया है।

इंडो​नेशिया के कानून एवं मानवाधिकार मंत्रालय के तहत पंजीकृत एएसआईएएन यूनिवर्सिटी ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए महादेव साहूकार भैरागौंड को मानद उपाधि से सम्मानित किया। भैरागौंड भैरवनाथ शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष हैं। बताया जाता है कि यह संस्था 1,500 ग़रीब छात्रों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करती है।

ग़ौरतलब है कि भैरागौंड पर 6 मामले दर्ज हैं। इनमे 3 हत्या के और एक हत्या की कोशिश से जुड़ा है। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत दो और अवैध बालू खनन का एक मामला भी उसके खिलाफ चल रहा है। सारे मामले चाडचन पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं। फ़िलहाल, हत्या के एक मामले में वह ज़मानत पर बाहर है। यह मामला 2017 में दर्ज किया गया था। जब न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने विश्वविद्यालय से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया।

सोनिया गॉंधी हाजिर हो: लाइब्रेरी की इमारत हड़पने पर केस दर्ज, अदालत ने जारी किया समन

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी एक और कानूनी मुश्किल में फॅंस गईं हैं। उन पर पंजाब के बठिंडा की अदालत में केस दर्ज किया गया है। मामला पंजाब में लाइब्रेरी की जगह पर जोनल दफ्तर खोलने से जुड़ा है। बठिंडा कोर्ट ने इस मामले में उन्हें और पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ समेत अन्य आरोपितों को समन जारी करते हुए 6 तारीख को पेश होने का आदेश दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बठिंडा निवासी और सिविल लाइन क्लब के पूर्व प्रधान जगजीत सिंह धालीवाल एवं शिवदेव सिंह ने इस संबंध में कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस द्वारा एक निजी क्लब में मालवा कॉन्ग्रेस भवन खोले जाने के खिलाफ स्थाई रोक लगाने की माँग की थी।

इस याचिका में कहा गया था कि सिविल लाइन क्लब में गुरुनानक लाइब्रेरी 1971 में बनी थी और 1977 में इसके पास स्पोर्ट्स हाल एवं सिविल लाइन क्लब बनाया गया था। लेकिन अब गुरुनानक देव लाइब्रेरी एवं सिविल लाइन क्लब की इमारत पर कुछ कॉन्ग्रेसियों ने कब्जा कर लिया है।

इस याचिका में आरोप था कि कुछ लोग यहाँ कॉन्ग्रेस का जोनल दफ्तर बनाना चाहते हैं। जिसके लिए 2 सितंबर को यहाँ आधारशिला रखी जाएगी। लेकिन अब ताजा जानकारी के अनुसार इस याचिका पर शनिवार को सोनिया गाँधी एवं सुनील जाखड़ सहित 12 लोगों को समन जारी किए गए हैं और मामले की सुनवाई की तारीख 6 सितंबर तय की गई है।

मनमोहन सिंह की नीति से बढ़ी बीमारी: हर साल मरती हैं 1000 गायें, आज भी सॅंभले तो 1000 साल में खत्म होगा मर्ज

कहते हैं अति सर्वत्र वर्जयेत। यानी कोई भी चीज अत्यधिक हो तो उसके नतीजे बेहद भयंकर होते हैं। अब प्लास्टिक कचरे का ही मसला ले लीजिए। इसका इस्तेमाल बढ़ते-बढ़ते उस स्तर पर पहुॅंच गया है जिससे हमारी पारिस्थितिकी का संतुलन ही चरमरा गया है।

भारत में वैसे प्लास्टिक की आमद 60 के दशक में हुई। पर इसके चलन ने जोर पकड़ा खुली अर्थव्यवस्था के आगमन से। भारत के बाजार को खोलने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जाता है। उनके वित्त मंत्री रहते ही 1990 के दशक में देश में खुली अर्थव्यवस्था का दौर आया। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरा पैदा करने की बीमारी भी बढ़ती गई। नतीजतन, खुली अर्थव्यवस्था से पहले देश में जहॉं सालाना 9 लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन हो रहा था, वह आज करीब 94.6 लाख टन तक पहुँच चुका है।

एक शोध के मुताबिक भारत में सालाना 94.6 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इसका 40 प्रतिशत प्लास्टिक इकट्ठा ही नहीं होता, जबकि 43 प्रतिशत प्लास्टिक का उपयोग पैकेजिंग के लिए होता है।

इसी साल 19 जुलाई को लोकसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्ययन का जिक्र किया था। इसके हवाले से उन्होंने बताया कि इस देश के मुख्य शहरों में रोजाना करीब 4059 टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है। इस कचरे का भंडार लगाने वाले प्रमुख शहरों में दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और बेंगलुरु शुमार हैं। राज्यमंत्री ने बताया कि देश में हर रोज 25,940 टन प्लास्टिक कूड़ा पैदा करता है। यह अनुमान देश के केवल 60 प्रमुख शहरों से जुटाए गए आँकड़ों पर ही आधारित है।

प्लास्टिक के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात जो जानने वाली है वो ये कि इससे बना एक बैग पूर्ण रूप से नष्ट होने में 1000 वर्षों का समय लेता है। अपने इस लंबे जीवन में न तो वह सड़ता है और न गलता है। अमूमन इसके अधिकतर अंश का इस्तेमाल रिसाइकलिंग के लिए भी नहीं हो पाता है। नतीजा ये होता है कि हानिकारक पदार्थों से निर्मित प्लास्टिक पर्यावरण में मौजूद जीव-जंतुओं के लिए अभिशाप बन जाता है और काल बनकर उनकी जान लेने लगता है।

आँकड़ो की मानें तो भारत में हर साल 1000 गायें प्लास्टिक के सेवन के कारण मरती हैं। समंदर में प्लास्टिक के कचड़े से सालाना 1 मिलियन समुद्री जीव-जंतु मर जाते हैं। 1 मिलियन यानी 10 लाख। ये वैश्विक आँकडा है। जिसकी पुष्टि यूनेस्को ने की है।

प्लास्टिक, बैनिंग
प्लास्टिक से होने वाला नुकसान तस्वीरों में साफ़ है

अब भी भ्रम का चादर न हटा हो तो इस घटना पर गौर करिए। कुछ महीने पहले फिलीपींस में एक शार्क खून की उल्टियाँ करते करते मर गई। जाँच हुई तो पता चला वो भूख से तड़प कर मरी है। अब सवाल उठेगा भूख से तड़पकर? तो हाँ, भूख से तड़पकर उस शार्क की मौत हुई।  जाँच में उसके पेट से लगभग 88 पाउंड यानी 40 किलो प्लास्टिक मिला। इसी प्लास्टिक ने उसकी जान ली।

प्लास्टिक फँसने के कारण ही समुद्र की सबसे विशालकाय जीव के पेट में सूजन आई और वो चाहकर भी कुछ खा पी नहीं पाई। नतीजा सिर्फ़ मौत। उस शार्क जैसे अनेकों समुद्री जीव इससे भी भयानक परिस्थिति में मरते हैं। लेकिन फिर भी मनुष्य अपनी आदतों से बाज नहीं आता। जानकारी के मुताबिक दुनिया भर के समुद्र में इस समय 100 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक मौजूद है। जो न केवल जीव-जंतुओं के लिए घातक साबित हो रहा है, बल्कि बड़े स्तर पर जल, थल और वायु को भी दूषित कर रहा है। लेकिन इसे वहाँ तक पहुँचाने वाले लोग कौन हैं? हम और सिर्फ़ हम।

हम चाहते न चाहते हुए भी प्लास्टिक का इस्तेमाल अपने जीवन में धड़ल्ले से करते हैं, अगर हम अपनी ओर से ऐसा करने से बचते हैं तो बाजार हमसे ऐसा करवाता है। कपड़े के थैले को प्लास्टिक बैग से रिप्लेस कर दिया जाता है, दूध की डोलची प्लास्टिक थैली में तब्दील हो जाती है। हर चीज को मिनिमाइज करके छोटे-छोटे प्लास्टिक रैपर्स में बदल दिया जाता है और दिन पर दिन इसे रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली महत्तवपूर्ण वस्तु बना दिया जाता है। 

हालाँकि, प्लास्टिक का निर्माण सेल्लूलोज, कोल, प्राकृतिक गैस, नमक और कच्चे तेल जैसे  प्राकृतिक उत्पादों से ही होता है, लेकिन भी फिर भी इसकी गैर-जैविक (non biodegradable) प्रकृति के कारण ये किन्ही भी मायनों में पर्यावरण के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। एक बार के लिए संभव है इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर या तोड़कर छिन्न-भिन्न कर दिया जाए लेकिन पर्यावरण को नुकसान किए बिना इसको नष्ट करना न मुमकिन है। इससे निकलने वाले जहरीले पदार्थ जैसे डायऑक्सिन, विनाइल क्लोराइड, एथिलीन डाइक्लोराइड, सीसा, कैडमियम आदि उस खाने और बोतल के पानी में भी घुलते हैं, जिसका हम नियमित तौर से उपयोग करते हैं। प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन हमारे पीने के पानी और खाने को प्रभावित करते हैं, जिससे  कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। कई रिसर्च भी इस बात का प्रमाण दे चुके हैं।

प्लास्टिक की उपयोगिता को किन्हीं भी हालातों में जस्टिफाई नहीं किया जा सकता। क्योंकि वास्तविकता में अब भारत या दुनिया का कोई भी देश इस स्थिति में है ही नहीं। इसके विकल्प ढूँढना अब हमारे लिए चुनाव की बात नहीं है, बल्कि खुद के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए बहुत बड़ी जरूरत है। एक शोध के अनुसार अगर समय रहते अभी भी रोकथाम नहीं हुई तो 2050 तक समुद्रों में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगी।

पानी की बोतलों से लेकर, चिप्स, बिस्कुट के पैकेट तक इस समय समुद्र और पर्यावरण को दूषित करने का काम कर रहे हैं। और ऐसे में हमारे लिए शर्म की बात ये है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावा करता है कि दुनियाभर से समुद्र में फेंके जाने वाले कूड़े का 60 प्रतिशत हम भारतीयों द्वारा डंप किया जाता हैं। सोचिए हमारी स्थिति क्या है? हम इसके कारण, प्रभाव और रोकथाम सबसे वाकिफ़ हैं। लेकिन फिर भी हम खुद में सुधार नहीं कर पा रहे, हम जानते है कि अपनी लापरवाहियों से हम पारिस्थितिकी और अपनी भावी पीढ़ी को अंधकार में झोंक रहे हैं। लेकिन फिर भी हम इस विषय कठोर कदम उठाने से बचते हैं।

इन्हीं परिस्थितियों को सुधारने के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में प्लास्टिक के सिंगल यूज़ को बंद करने का आह्वान किया। उन्होंने 25 अगस्त को भी मन की बात के जरिए अपने इस प्रण को दोहराया और सबको साफ इशारा कर दिया कि इस बार वह प्लास्टिक के कारण पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले कदमो में कोताही नहीं बरतने वाले। उन्होंने प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ युद्ध छेड़ने का ऐलान किया। जिसके बाद माना जा रहा है कि दिल्ली समेत देश भर में जल्द ही प्लास्टिक के सिंगल इस्तेमाल पर बैन होगा।

प्लास्टिक के बिना जीवन मुश्किल भले लगे, लेकिन असंभव नहीं है। भारत के कई राज्यों ने इस इस दिशा में कदम उठाकर कामयाबी हासिल भी की है। 1998 में सिक्किम पहला राज्य था जिसने डिस्पोसेबल प्लास्टिक बैग और प्लास्टिक बोटल को बैन करने के लिए कदम उठाया और प्लास्टिक बैग फ्री राज्य होने का तमगा हासिल किया।

इसके बाद आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड ने भी प्लास्टिक बैन पर कदम उठाए। दिल्ली में भी साल 2017 में इसे लेकर फैसला आया लेकिन पूर्ण रूप से कार्यान्वित नहीं हो पाया। लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा इस विषय पर एक बार दोबारा जिक्र छेड़ने के बाद ये मुद्दा गर्माया हुआ है और पिछले एक हफ्ते से लगातार खबरे आ रही हैं कि बड़ी-बड़ी कंपनियाँ और उत्तरप्रदेश जैसे राज्य इस विषय पर तत्काल प्रभाव से एक्शन ले रहे हैं। दिल्ली की दुकानों पर भी उनके आह्वान का असर देखने को मिल रहा है। अब देखना है कि 2 अक्टूबर से हम इस रास्ते कितने प्रभावी तरीके से आगे बढ़ पाते हैं।

माले में कश्मीर राग अलाप बेइज्जत हुआ पाक, भारत ने पूर्वी पाकिस्तान का नरसंहार याद दिला लगाई लताड़

यूॅं तो कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपगेंडा को दुनिया में कोई भाव नहीं मिल रहा फिर भी पड़ोसी मुल्क अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा। उसने रविवार (सितंबर 1, 2019) को मालदीव की राजधानी माले में दक्षिण एशिया की संसदों के अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के दौरान भी कश्मीर राग अलापने की कोशिश की। लेकिन, भारत ने पूर्वी पाकिस्तान के नरसंहार और आतंकियों को पनाह देने की उसकी हरकत उजागर कर उसकी बोलती बंद कर दी।

भारत ने आतंकवाद को मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों को मदद बंद करनी चाहिए। मालदीव में दोनों देशों के बीच बहस की शुरुआत पाकिस्तानी नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी के बयान से हुई। सतत विकास लक्ष्य पर चर्चा के दौरान उन्होंने कश्मीर का मसला उठाने की कोशिश की ।

भारत ने फौरन नियमों का हवाला दिया जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने सूरी को भारतीय प्रतिनिधि एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को बोलने देने के लिए कहा। लेकिन सूरी ने इसे अनसुना कर दिया, जिसे लेकर हंगामा हुआ।

भारत के आंतरिक मामले को उठाने और मंच का राजनीतिक इस्तेमाल करने की मंशा को लेकर हरिवंश ने पाकिस्तान की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, “हम भारत के आंतरिक मामले को इस मंच पर उठाए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हैं। इस सम्मेलन के मुख्य विषय के दायरे से बाहर के मुद्दे उठा कर पाक इस मंच को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए जरूरी है कि वह सीमा पार आतंकवाद को सभी तरह का समर्थन बंद करे। पाकिस्तानी सीनेटर कुर्रातुलैन मारी ने कहा कि महिलाओं एवं युवाओं के लिए एसडीजी मानवाधिकारों के बगैर हासिल नहीं किया जा सकता।

इस पर, हरिवंश ने पलटवार करते हुए कहा कि अपने ही लोगों का नरसंहार करने वाले देश (पाक) को मानवाधिकारों के मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “दुनिया जानती है कि कैसे पाकिस्तान ने अपने ही देश के एक हिस्से में नरसंहार किया, जिसे अब स्वतंत्र बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है…मैं पूछना चाहता हूँ कि इस देश को इस देश को मानवाधिकार से जुडे़ मुद्दों को उठाने का क्या अधिकार है?”

इसके बाद उपसभापति ने कश्मीर मुद्दे पर बोलना शुरू किया और पाकिस्तान की बखिया उधेड़ दी। उन्होंने कहा, “चूँकि इन्होंने कश्मीर के मानवाधिकारों का मुद्दा उठाया, इसलिए मैं बताना चाहूँगा कि पाकिस्तान ने कश्मीर के हमारे हिस्से पर कब्जा किया हुआ है, जिसे pok के रूप में जाना जाता है। “

PAK: हिंदू लड़की को अगवा कर धर्म परिवर्तन किया, इमरान खान के कार्यकर्ता के घर बंधक है पीड़िता

पाकिस्तान में 19 साल की लड़की को अगवा कर आतंकी हाफिज सईद के शागिर्द से निकाह कराए जाने के बाद अब एक हिंदू लड़की को अगवा करने का मामला सामने आया है। रेणुका कुमारी को 29 अगस्त को सिंध प्रांत के सुक्कुर स्थित उसके कॉलेज से अगवा कर जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। बताया जाता है कि लड़की को सियालकोट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के कार्यकर्ता मिर्जा दिलावर बेग के घर पर रखा गया है।

ऑल पाकिस्तान हिंदू पंचायत ने फेसबुक पोस्ट कर इस घटना की जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि लड़की सुक्कुर के इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की बीबीए की छात्रा है। इस पोस्ट के मुताबिक बीते दो महीने में पाकिस्तान में इस तरह की यह तीसरी घटना है।

फेसबुक पर लड़की के लापता होने की FIR कॉपी शेयर की गई है।

हालॉंकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में लड़की के भाई विनेश के हवाले से दावा किया गया है कि उसकी बहन अपने सहपाठी बाबर अमान के साथ रिलेशनशिप में थी। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि रेणुका को भी जबरन उसी तरह इस्लाम कबूल करवाया गया है जैसे पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के साथ होता रहा है। पुलिस इस मामले में अमान के भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

इससे पहले पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा तंबी साहिब के एक ग्रन्थि (सिख पुजारी) की 19 साल की बेटी को गुंडों ने उसके घर से उठा लिया था। इसके बाद जबरन इस्लाम क़बूल करवाकर उसका निकाह हाफ़िज सईद के आतंकी संगठन के जमात-उद-दावा के मोहम्मद हसन से करवा दिया गया था।

यह मामला सामने आने के बाद एक वीडियो जारी कर दावा किया गया कि लड़की ने अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल किया है। बाद में लड़की के घर लौटने की भी खबर आई थी जिसका उसके भाई ने खंडन किया था।

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाने का सिलसिला पुराना है। ऐसे ज्यादातर मामलों में पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। बीते दिनों खबर आई थी कि इसके कारण पाकिस्तान में सिखों की आबादी 15 साल में 40 हजार से घटकर 8 हजार हो गई है।

हिन्दुओं को बार-बार नीचा दिखाओ, क्योंकि वे हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाएँगे…रत्ती भर भी नहीं

दुनिया में जितने भी ब्रांड्स हैं, सबको अपना व्यापार चलना है। हाँ, व्यापार व कारोबार का रूप अलग हो जाता है। कारोबार चलाने के लिए मैनेजमेंट क्षेत्र से कई लोग हायर किए जाते हैं जो कम्पनी के प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए नई-नई रणनीतियाँ बनाते रहते हैं। ‘एक पर एक फ्री’ से लेकर ‘मुफ्त में कंघी, साबुन’ तक, कम्पनियाँ अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए तरह-तरह की रणनीति बनाती रही हैं। लेकिन, अब माल बेचने का एक नया चलन चला है। पर्व-त्योहारों पर बुरा हिन्दू और अच्छा ‘शांतिप्रिय’ पेश करने का चलन। नैतिकता के भारी डोज़ के साथ माल बेचने का चलन।

कुछ उदाहरण देखते हैं। हाल में सोशल मीडिया पर रेड लेबल चाय के एक ऐड को लेकर आपत्ति जताई गई। इसमें एक हिन्दू श्रद्धालु गणेश जी की मूर्ति ख़रीदने के लिए मुस्लिम मूर्तिकार के पास जाता है। न तो दर्शकों और न ही उस व्यक्ति को पता होता है कि मूर्तिकार का मज़हब क्या है? लेकिन, हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड को यही तो हाइलाइट करना है। मज़हब। मूर्तिकार का मज़हब। जैसा कि दिखाया गया है, गणेश पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने धर्म के बारे में, गणेश जी के बारे में, उनके मूषक के बारे में जानकारियाँ नहीं होतीं।

वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम मूर्तिकार को सब पता होता है। उसके ज्ञान पर हिन्दू व्यक्ति को आश्चर्य होता है। लेकिन, तभी वह समय आ जाता है जब वीडियो में जो दिखाना है, वह दिखता है। अजान का समय होता है और वह बूढा मुस्लिम मूर्तिकार इस्लाम वाली स्कल कैप लगा लेता है, जिसे देख कर ‘असहिष्णु’ हिन्दू ग्राहक चौंक जाता है। वह बिना मूर्ति ख़रीदे वापस जाने लगता है क्योंकि हिन्दू तो असहिष्णु होते हैं न? वे मुस्लिम मूर्तिकार से पूजा के लिए मूर्ति क्यों ख़रीदेंगे? बस, यहीं पर कम्पनी का प्रोपगेंडा सफल हो जाता है। इस ऐड का वीडियो यहाँ है:

रेड लेबल चाय का ऐड जो सितम्बर 2018 में आया

फिर हिन्दू ग्राहक को अहसास होता है कि वह ग़लत था और वह अपनी ‘असहिष्णुता’ त्याग मूर्ति ख़रीद लेता है। क्या आप भी ऐसे हैं? क्या आप भी फूल-मालाएँ, पूजा के सामान से लेकर अगरबत्ती और दीपक ख़रीदने दुकानों पर निकलते हैं तो आपको भी दुकानदार का धर्म और मज़हब जानने की उत्सुकता रहती है? अगर आप बिहार से हैं तो क्या आप छठ से पहले बाजार में ऊँख और गागर निम्बू ख़रीदने जाते हैं तो क्या उस भीड़-भाड़ में आपको इससे मतलब होता है कि बेचने वाला/ वाली मुस्लिम है या ईसाई? नहीं न।

तो फिर आपको ऐसा क्यों दिखाया जा रहा है? ये कम्पनियाँ आपको आपकी किस ग़लती का एहसास करा रही हैं? आपको किस बात के लिए प्रायश्चित करने को कह रही है? रेड लेबल के ऐड में वो हिन्दू ग्राहक, जो कम्पनी के हिसाब से आपका प्रतिनिधि है, एक बूढ़े मुस्लिम को सामने देखते ही वहाँ से भागने क्यों लगता है? अगर हिन्दू कोई भी व्यवसाय कर रहा है तो वह पैसे के लिए करता है, लेकिन एक मुस्लिम कोई कारोबार कर रहा है तो वह इबादत क्यों है? इसका जवाब जानने से पहले कुछ और उदाहरण देखने पड़ेंगे।

रेड लेबल का एक और ऐड आया था। अगर आपको नहीं याद है तो याद कीजिए। उस दौरान प्रयागराज में कुम्भ चल रहा था और वह वीडियो भी कुम्भ के इर्द-गिर्द ही था। इसमें दिखाया गया था कि कुम्भ के मेले में लोग इसलिए जाते हैं ताकि वे अपने वृद्ध पिता को वहीं छोड़ आ सकें। ध्यान दीजिए, हज के दौरान ऐसा कभी नहीं होता। कुम्भ के दौरान ही होता है। इसी तरह ‘असहिष्णुता’ भी गणेश चतुर्थी के दौरान ही आती है, मुहर्रम के दौरान नहीं। कुम्भ वाले वीडियो में भी नालायक हिन्दू श्रद्धालु को अपनी ग़लती का एहसास होता है और वह अपने पिता को वापस ले आता है।

आपलोगों में से कइयों ने कुम्भ के दौरान पवित्र स्नान किया होगा। पूजा-पाठ किया होगा। कइयों ने अपने माता-पिता, सगे-सम्बन्धियों व मित्रों के साथ कुम्भ-स्नान किया होगा। बस एक सवाल है आप सभी से। आप में से कितनों ने अपने माता-पिता को कुम्भ में धक्का दे दिया? आप में से कितनों ने कुम्भ की योजना इसलिए बनाई ताकि घर के बुजुर्गों को वहाँ पर छोड़ कर आ सकें और फिर चैन की ज़िंदगी जी सकें? कुम्भ वाले वीडियो में, जो बेटा है, जो कम्पनी के हिसाब से आपका प्रतिनिधित्व करता है, उसे श्रद्धा या पूजा-पाठ से कुछ लेना-देना नहीं होता। उसे बस अपने बूढ़े बाप को धोखे से त्यागना है। वीडियो देखें:

आप कुम्भ क्यों जाते हैं? घर के बुजुर्गों को धोखे से त्यागने के लिए?

पहला वाला वीडियो सितम्बर 2018 में आया। या तो हिन्दुओं ने विरोध-प्रदर्शन नहीं किया या फिर उनके विरोध का कोई असर ही नहीं हुआ और 6 महीने बाद ही मार्च 2019 में उसी प्रकार का वीडियो बना कर हिन्दुओं को नीचा दिखाया गया। इसके कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है हिंदुस्तान यूनिलिवर विरोध करने वाले हिन्दुओं को अशिक्षित मानती है। या फिर हो सकता है कि कम्पनी को लगता हो चंद लोग विरोध कर के भी क्या उखाड़ लेंगे। या यह भी हो सकता है कि कम्पनी ने हिन्दू ग्राहकों को ग्रांटेड लिया हो- उन्हें जूते से मारो फिर भी प्रोडक्ट तो हमारा ही ख़रीदेंगे।

कुम्भ जैसे सफल आयोजन, जो जनसँख्या, व्यवस्था और भागीदारी के हिसाब से संसार में सबसे अव्वल है- उसकी बदनामी कर अपना प्रोडक्ट बेचना कहाँ तक उचित है? हिन्दुओं की मानसरोवर यात्रा से जम्मू-कश्मीर के मुस्लिमों को रोज़गार मिलता है, जो पहाड़ी चढ़ने के लिए लाठियों से लेकर भोजन तक बेचते हैं। वे इंतज़ार करते हैं यात्रा का ताकि उनकी कमाई हो। वो इबादत के लिए नहीं, पेट के लिए ऐसा करते हैं। कितने हिन्दू हैं जो उनसे चीजें ख़रीदने से मना कर देते हैं?

यह आजकल का नया चलन है। हमने सर्फ एक्सेल का ऐड भी देखा था। उसमें एक हिन्दू लड़की एक मुस्लिम लड़के को नमाज पढ़ने के लिए ले जाती है। अपने मुस्लिम मित्र को ‘होली के दाग’ और रंगों से बचाते हुए वह ऐसा करती है। हिन्दुओं के बाद अब मुस्लिमों से भी सवाल पूछा जा सकता है। कितने मुस्लिम ऐसे हैं जो होली के दिन डर के मारे नमाज पढ़ने नहीं जा सकते? एक हिन्दू लड़की को हस्तक्षेप करना होता है तब वो ‘बेचारा’ मुस्लिम लड़का नमाज़ पढ़ने जा पाता है। होली ‘दागों’ वाला त्योहार है और नमाज पवित्र इबादत है। ये वीडियो भी देखें:

होली ‘दागदार’ लेकिन नमाज ‘पवित्र’

उपर्युक्त वीडियो फ़रवरी 2019 में आया था। सितम्बर 2018, फ़रवरी 2019 और फिर मार्च 2019- दिखाता है कि हिंदुस्तान यूनिलिवर को हिन्दुओं की भावनाओं, विरोध और विचारों से घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता। रत्ती भर भी नहीं। अगर ऐसा होता तो हिन्दुओं की भावनाओं का अपमान करने, उन्हें ‘असहिष्णु’ दिखाने और होली को ‘दागदार’ बताने की हिमाकत वह 6 महीने में 3 बार नहीं करते। यही वो सारे वीडियोज हैं, जिससे मैक्डोनाल्ड्स को मुस्लिम हितों को ध्यान में रखते हुए केवल ‘हलाल मीट’ उपलब्ध कराने को विवश कर देते हैं।

ऐसा नहीं है कि मुस्लिम त्योहारों को लेकर ऐड नहीं बनाए जाते। वीडियो बनते हैं। ख़ूब बनाते हैं। रमजान के समय भी सर्फ एक्सेल का वीडियो बना था। उस दौरान उनके मज़हबी भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। रमजान के दाग बुरे नहीं होते। रमजान के कारण किसी हिन्दू को अपने घर से निकलने में परेशानी नहीं होती। रमजान के दौरान कोई बेटा अपने बाप को भीड़ में नहीं छोड़ देता। रमजान के दौरान ताजिया बनाने वाले को हिन्दू देख कर कोई मुस्लिम भागता नहीं। क्यों? क्योंकि वह सहिष्णु है। यह सब तो होली और कुम्भ में होता है न। कितना सम्मान करते हैं न ये हमारा, हमारे धर्म का और हमारे त्योहारों का?

इन सबका जवाब यह है कि हिन्दू समाज आज अपनी ही संस्कृति, दर्शन और इतिहास का मज़ाक बनाने वालों का पोषक बना हुआ है। जरा सोचिए कि वेटिकन में यीशु को लेकर ऐसा कोई वीडियो बनता है तो क्या होगा? सऊदी में पैगम्बर मुहम्मद को लेकर कुछ इस प्रकार का वीडियो बना तो क्या होगा? सऊदी और वेटिकन छोड़िए, दुनिया के किसी भी प्रान्त में ऐसा हुआ तो क्या होगा? भारत में मुहम्मद पर टिप्पणी करने पर कमलेश तिवारी को जेल होती है। चार्ली हैब्दो में पैगम्बर को लेकर कार्टून भर छप जाने से 12 लोगों को मार डाला जाता है। केरल में पादरी के यौन-शोषण पर इनामी कार्टून बनाने वाले को मिले पुरस्कार पर पुनर्विचार करने को मजबूर होना पड़ता है।

यह क्या दिखाता है? सहिष्णु कौन। अपने मज़हब, पैगम्बर और समाज पर एक टिप्पणी भर से जानें ले लेने वाले सहिष्णु। अपने पैगम्बर पर टिप्पणी भर से किसी व्यक्ति को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में भी जेल भिजवा देने वाले सहिष्णु। अपने बलात्कार आरोपित पादरी के ख़िलाफ़ कार्टून भर बन जाने से सरकार को हिला डालने वाले सहिष्णु। और हाँ, असहिष्णु कौन? अपने त्योहार को ‘दागदार’ बताने वालों का प्रोडक्ट ख़रीदने वाला असहिष्णु। ख़ुद की इमेज ‘असहिष्णु’ दिखाए जाने के बावजूद ट्विटर पर चूँ भर कर चुप हो जाने वाला असहिष्णु। ख़ुद को बुजुर्गों को भगा देने वाला नालायक वंश बताने पर भी सिर्फ़ देखते रहने वाला असहिष्णु।

भोपाल में कराटे खिलाड़ी के साथ बलात्कार के आरोप में कोच फुजैल अली गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार में नेशनल कराटे प्लेयर के साथ बलात्कार का मामला सामने आया है। बलात्कार का आरोप कराटे के कोच फुजैल अली पर लगा है। फुजैल पर आरोप है कि उसने शादी का झाँसा देकर कराटे प्लेयर के साथ रेप किया। पीड़िता की शिकायत पर भोपाल के कमला नगर थाने में रेप का मुकदमा दर्ज कर कोच को हिरासत में ले लिया गया है।

दरअसल, ये घटना 4 महीने पहले की है। तब पीड़िता नेपाल कराटे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गई थी। उसी दौरान उसकी दोस्ती फुजैल अली से हुई थी। जिसके बाद दोनों के बीच में लगातार बातें होने लगी। कुछ दिन बाद फुजैल अली ने उससे शादी का वादा किया और फिर भोपाल के न्यू मार्केट इलाके में बने एक फ्लैट में ले जाकर उसके साथ रेप किया। पीड़िता ने जब इसका विरोध किया तो आरोपित फुजैल ने उसे यह कहकर चुप करा दिया कि वह उससे शादी करना चाहता है।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपित फुजैल अली इसके बाद शादी का झाँसा देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। और जब 26 अगस्त 2019 को उसने फुजैल से शादी की बात की, तो वह मुकर गया और बोला कि वह उससे शादी नहीं करना चाहता।

पीड़िता ने बताया कि जब उसने शादी का दबाव बनाया तो फुजैल ने उसे धमकाते हुए कहा कि वह उसे जानता नहीं है। साथ ही पीड़ित खिलाड़ी का आरोप है कि फुजैल ने उसके घरवालों को मारने की भी धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने जहाँगीराबाद थाने में माता-पिता के साथ जाकर आरोपित फुजैल के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कराया। फिलहाल, पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘दिग्विजय सिंह को खुद सबूत पेश करना चाहिए’ – कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता से झाड़ा पल्ला

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का बीजेपी और ISI पर दिए बयान से कॉन्ग्रेस ने पल्ला झाड़ लिया है। दिग्विजय ने बजरंग दल के तार ISI से जुड़े होने की बात कही थी। कॉन्ग्रेस पार्टी उनके इस बयान के समर्थन में नज़र नहीं आ रही है। कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पीएल पुनिया ने यह साफ़ कर दिया है कि यह दिग्विजय सिंह के व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं और अगर उन्हें ऐसा लगता है कि तो उन्हें इस सन्दर्भ में सबूत पेश करने चाहिए।

दिग्विजय सिंह के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक सोहन सोलंकी ने दिग्विजय के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने तक की चेतावनी दे डाली है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वो उनके इस बयान की कड़ी निंदा करते हैं और उनके (दिग्विजय) दावों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि बजरंग दल के कार्यकर्ता देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकते।

बजरंग दल के सन्दर्भ में सोलंकी ने कहा कि यह देश में सबसे बड़ा युवा संगठन है और इससे देशभर के क़रीब 40 लाख युवा जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह इस बात को समझने में असमर्थ हैं क्योंकि उनके दिल में हिंदू-विरोधी मानसिकता वर्षों से जमी हुई है।

दरअसल, दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा था कि बीजेपी और बजरंग दल के लोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से पैसा लेते हैं। साथ ही कहा था कि ISI के लिए जासूसी मजहब विशेष वाले कम और दूसरे धर्म वाले ज़्यादा कर रहे हैं।

इसके जवाब में शिवराज सिंह ने ट्वीट किया,

“दिग्विजय सिंह जानबूझकर ऐसी बयानबाज़ी करते हैं। वह और उनके नेता पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं। उनकी विश्वसनीयता बची नहीं है। मैं उनके बयान को इसलिए गंभीरता से नहीं लेता, क्योंकि सारा देश संघ और भाजपा की देशभक्ति से परिचित है, हमें दिग्विजय सिंह के प्रमाण की ज़रूरत नहीं है। दिग्विजय सिंह, ओसामा जी और हाफीज़ जी कहने वाले नेता हैं। वह विवादित बयान इसलिए देते हैं, ताकि सुर्खियों में बने रहें। वे और उनके नेता जो पाकिस्तान चाहता है, वो बोलते हैं। ऐसे नेता को मैं गंभीरता से नहीं लेता और न देश लेता है।”

बिजली जाने की वजह से 25 मिनट तक लिफ्ट में फँसे रहे पोप, दमकलकर्मियों ने निकाला

वेटिकन में बिजली जाने से पोप फ्रांसिस 25 मिनट तक लिफ्ट में फँसे रहे। स्थिति ऐसी हो गई कि उन्हें लिफ्ट से निकालने के लिए दमकलकर्मियों को बुलाना पड़ा। लिफ्ट से सकुशल निकाले जाने के बाद ईसाईयों के सर्वोच्च धर्मगुरु ने दमकलकर्मियों का आभार जताया। रविवार (सितम्बर 1, 2019) को सेंट पीटर्स स्क्वायर में अपने साप्ताहिक भाषण के दौरान पॉप ने आपबीती सुनाई।

पोप ने बिल्डिंग के अन्य लोगों को भी दमकलकर्मियों का धन्यवाद करने को कहा। बताया जा रहा है कि बजली जाने की वजह से लिफ्ट 25 मिनट तक रुकी रही। इस कारण पोप भी कार्यक्रम में देरी से पहुँचे। मुस्कुराते हुए पोप ने वहाँ मौजूद लोगों से देरी के लिए माफ़ी माँगी।

पोप ने यह भी बताया कि वेटिकन में आजकल बिजली की समस्या चल रही है। 83 वर्षीय पोप कैथोलिक चर्च के शीर्ष पादरी हैं और वेटिकन के शासक भी हैं।

कश्मीरी नेता ही कश्मीरियों की जान के दुश्मन, हमने झेला है: कश्मीर के कॉन्ग्रेसी नेता सलमान निज़ामी

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निज़ामी ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर एक बार फिर से पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया है। जहाँ कॉन्ग्रेस आलाकमान, गुलाम नबी आज़ाद, अधीर रंजन चौधरी जैसे नेता मोदी सरकार को घेरने में लगे हैं, वहीं निज़ामी ने केंद्र को अप्रत्यक्ष रूप से क्लीन चिट देते हुए कश्मीर के ही स्थानीय नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया है। इस बार उनके निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती हैं।

लाशों का गिनाया हिसाब

निज़ामी ने केंद्र/राष्ट्रपति शासन और मुफ़्ती-अब्दुल्ला शासन के समय हुई बड़ी अशान्तियों में मारे गए लोगों की संख्या की तुलना की है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “उमर अब्दुल्ला के समय फैली अशांति में 200 लोग मारे गए, महबूबा मुफ़्ती के समय फैली अशांति में 260 लोग मारे गए, 2019 की अशांति में शून्य मारे गए।”

निज़ामी आगे लिखते हैं, “स्थानीय नेता कश्मीर के असली शत्रु हैं, ताकत के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। हमने अनुभव किया है, हमने झेला है। अब आत्मविवेचन का समय है।”

“पूरे हिंदुस्तान में किसी ने कश्मीरी मुस्लिमों को हाथ भी नहीं लगाया”

इसके पहले भी सलमान निज़ामी ने कश्मीरियों को आईना दिखाया था। जम्मू-कश्मीर से 370 के पर कुतरने और इसे कट्टरपंथियों के बीच जिहादी मानसिकता को बढ़ावा दे रहे लोगों द्वारा ‘हिन्दू सरकार की गुंडागर्दी’ के रूप में दिखाने की कोशिशों के बीच निज़ामी ने ट्वीट कर इस तथ्य की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया कि जहाँ बाकी पूरे देश में कश्मीरी मुस्लिम सुरक्षित हैं, वहीं खुद कश्मीर में 370 खत्म होने के बाद से दो बेग़ुनाह मुस्लिमों को जान से मारा जा चुका है।