भारत सरकार द्वारा आर्टिकल 370 पर लिए फैसले के बाद अमेरिका में रह रहे कश्मीरी पंडितों ने अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी करने के फैसले का स्वागत करते हुए अमेरिका में रैली निकाली।
उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने का फैसला किया था। जिसके बाद अमेरिका में रह रहे कश्मीरी पंडितों द्वारा अटलांटा में सीएनएन मुख्यालय के समक्ष रैली निकाली गई।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कश्मीरी मूल के अटलांटा निवासी और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन एसोसिएशन (एनएफआईए) के पूर्व अध्यक्ष सुभाष राजदान ने बताया कि अनुच्छेद 370 में इन संशोधनों की आवश्यकता थी, क्योंकि इसके कारण लगभग सभी कश्मीरी अल्पसंख्यकों (जैसे शिया, दलित, गुर्जर, कश्मीरी पंडित, कश्मीरी सिखों) के साथ हद से ज्यादा भेदभाव हो रहा था। लेकिन अब उन्हें कानून के समक्ष बराबरी का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि इस रैली के माध्यम से कश्मीरी पंडितों ने अपने पलायन और वापस अपनी मातृभूमि पर लौटने की तड़प को जगजाहिर किया। कभी उन्हें बढ़ते अतिवाद के कारण घाटी छोड़ना पड़ा था।
इस बीच, लैंसेट पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. रिचर्ड होर्टन को लिखे एक पत्र में कश्मीरी-मूल के प्रवासी चिकित्सकों ने कहा है कि 17 अगस्त को प्रकाशित उनकी हालिया राय में कई प्रासंगिक तथ्यों की अनदेखी की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय शो ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ में नज़र आए थे। 12 अगस्त को प्रीमियर हुए इस एपिसोड में वे शो के होस्ट और विख्यात सर्वाइवल इंस्ट्रक्टर बेयर ग्रिल्स के साथ दिखे थे। इस एपिसोड की शूटिंग जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में हुई थी। पीएम मोदी शो में हिंदी में बात करते हुए दिखे थे, वहीं बेयर ग्रिल्स उनकी बातों का अंग्रेजी में जवाब दे रहे थे। इसी तरह ग्रिल्स द्वारा अंग्रेजी में पूछे गए सवालों का जवाब पीएम हिंदी में दे रहे थे और बेयर ग्रिल्स उसे समझ भी रहे थे।
इस एपिसोड के ऑन एयर होने के बाद ही सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या इसमें काफ़ी एडिटिंग की गई है ताकि ऐसा दिखे कि बेयर ग्रिल्स हिंदी समझ रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना था कि इस एपिसोड को कई फेज में शूट किया गया और हर सीन को एक से ज्यादा बार शूट किया गया ताकि दोनों के बीच हुई बातचीत बिना भाषा के बाधा के सही से सिखाई जा सके। एक ऐसा वर्ग भी था जिसका मानना था कि शो का स्क्रिप्ट पहले ही लिख लिया गया था, जिसमें पीएम को हिंदी बोलना था और बेयर ग्रिल्स को अंग्रेजी में बात करनी थी।
हालाँकि, अब इन सबसे पर्दा उठ गया है। ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इसका खुलासा किया है। पीएम से भी इस सम्बन्ध में सवाल पूछे गए कि उनके और बेयर ग्रिल्स के बीच 2 भाषाओं में धाराप्रवाह बातचीत कैसे संभव हुई? पीएम ने बताया कि शो के होस्ट बेयर ग्रिल्स के कान में एक कॉर्डलेस इंस्ट्रूमेंट लगा हुआ था, जिसकी मदद से वह पीएम मोदी द्वारा हिंदी में कही गई हर बात को अंग्रेजी में सुन रहे थे। आसान शब्दों में समझें तो एक छोटा सा बिना तार वाला उपकरण उनके कान में लगा हुआ था। यह उपकरण उसी समय पीएम मोदी द्वारा हिंदी में कही गई बातों को अंग्रेजी में अनुवाद कर रहा था।
मुझे आशा है कि ‘Man Vs Wild’ कार्यक्रम भारत का सन्देश, भारत की परंपरा, भारत के संस्कार यात्रा में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, इन सारी बातों से विश्व को परिचित कराने में ये episode बहुत मदद करेगा ऐसा मेरा पक्का विश्वास बन गया है: PM #MannKiBaatpic.twitter.com/9mHTPeBM3d
यही कारण था कि बेयर ग्रिल्स पीएम मोदी की हर बात को समझ रहे थे और बातचीत की प्रक्रिया धाराप्रवाह चलती रही। इस शो ने दुनियाभर में रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की। 36.9 लाख इम्प्रेशन और 61 लाख ट्यून-इन के साथ रात 9 से 10 बजे की समयावधि में यह इन्फोटेन्मेंट जेनर का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो बन गया। पीएम मोदी ने भी स्वीकार किया कि इस शो के माध्यम से उन्हें दुनिया भर के युवाओं तक अपनी बात पहुँचाने में मदद मिली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित 200 साल पुराने कृष्ण मंदिर श्रीनाथ जी मंदिर के पूजन कार्यक्रम में हिस्सा लेने के साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना पर 42 लाख डॉलर की लागत आएगी। प्रधानमंत्री ने यहाँ पर भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। परियोजना का शुभारंभ करने के बाद पीएम मोदी फ्रांस में G-7 सम्मेंलन में भाग लेने के लिए रवाना हो गए।
Bahrain: Prime Minister Narendra Modi offered prayers at Shreenathji Temple in Manama, today. pic.twitter.com/J7GzKS08cb
बता दें कि, इस कृष्ण मंदिर का निर्माण 1817 में हुआ था। मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए उसके पुनर्निर्माण का फैसला किया गया है। 45 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में तीन मंजिला भवन के साथ मंदिर का नवीनीकरण किया जा रहा है। मंदिर से लगा एक नॉलेज सेंटर और संग्रहालय भी होगा। इस्लामिक देश बहरीन में बना यह कृष्ण मंदिर खाड़ी क्षेत्र का सबसे पुराना हिन्दू मंदिर है।
Bahrain: Prime Minister Narendra Modi interacted with the Indian community in Shreenathji Temple in Manama, earlier today. pic.twitter.com/B2FB5SDW95
बहरीन में यह मंदिर भारतीयों सहित विदेशियों के भी आकर्षण का केंद्र है। भारतीय यहाँ भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए पहुँचते हैं, वहीं इसकी कलाकृति के भी काफी चर्चे हैं। पुनर्निर्माण के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं और सैलानियों की संख्या में भी वृद्धि की पूरी संभावना है। अब इस मंदिर में 80 फीसदी हिस्से में श्रद्धालु घूम सकेंगे और भगवान कृष्ण की प्राचीन प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की बहरीन की यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस देश की यात्रा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। पीएम मोदी को यूएई में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया गया था। प्रधानमंत्री ने यहाँ पर रुपे कार्ड भी लॉन्च किया था।
इस्लामिक बैंक के नाम पर हुए आईएमए पोंजी घोटाले से नौकरशाहों और राजनेताओं का रिश्ता गहराता ही जा रहा है। बताया जा रहा है कि घोटाले के मुख्य आरोपी मंसूर अली खान ने कर्नाटक के एक पूर्व मुख्यमंत्री को पैसा भिजवाने की बात कही है। 40 हजार से ज्यादा लोगों का इस घोटाले में पैसा डूबा है। सीबीआई मामले की पड़ताल कर रही है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एसआईटी को दिए बयान में खान ने कहा है कि उसने 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक के पूर्व सीएम को पैसे भिजवाए थे। रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री का नाम नहीं बताया गया है। लेकिन, कयास लगाए जा रहे हैं कि मंसूर जिस पूर्व सीएम की बात कर रहा है वह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया हो सकते हैं। उनकी कैबिनेट में शामिल रहे रोशन बेग से इस मामले में पूछताछ भी हो चुकी है।
सीबीआई से पहले इस मामले में की SIT ही जाँच कर रही थी। सीबीआई अब इस मामले में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री, बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त समेत 13 ब्यूरोक्रेट्स और राजनेताओं से पूछताछ कर सकती है।
एसआईटी फिलहाल चश्मदीदों और आरोपियों के बयान संकलित कर रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में 15-20,000 पन्नों की चार्जशीट नौ सितंबर तक दाखिल हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य आरोपित और आईएमए के निदेशक मोहम्मद मंसूर अली खान ने एसआईटी को दिए बयान में दावा किया कि उसने 2018 के चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री और बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त को पैसे भिजवाए थे।
जाँच अधिकारी ने बताया है कि मंसूर के मुताबिक उसने पूर्व मुख्यमंत्री को तीन लोगों के जरिए 5 करोड़ रुपए भिजवाए थे। अधिकारी का कहना है कि मंसूर ने पूछताछ में कुछ और राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स का नाम भी लिए हैं। जिसपर जाँच होगी। बहरहाल, मंसूर के सभी दावों पर टिप्पणी करते हुए अधिकारी का कहना है कि खान एक आरोपित है और वह कुछ भी दावा कर सरते हैं, इसलिए उसके बयानों को सत्यापित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा है कि मामले से संबंधित सभी सबूत और बयान सीबीआई को दिए जाएँगे, जिसके लिए फिलहाल एसआईटी की टीम उन्हें संकलित कर रही है। बयान और शिकायत मिलाकर पूरा मामला 20 हजार पन्नों के आसपास का है।
खान ने अपने बयानों में एक भाजपा नेता को पैसे देने का भी दावा किया हैं, हालाँकि, जिसपर सीबीआई द्वारा जाँच होना बाकी हैं। इसके अलावा आईएमए घोटाले के आरोपित मंसूर ने अपने देश से भागने पर सफाई दी है कि बेंगलुरु का एक आईपीएस ऑफिसर उनसे 25 करोड़ रुपए की माँग कर रहा था इसलिए वह यहाँ से भागे थे। खान का ये भी दावा है कि उसने कई टेलीवीजन चैनलों को करोड़ों रुपए दिए हैं।
पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर अयोध्या मामले के दूसरे समुदाय के पक्षकार इकबाल अंसारी ने सवाल उठाया है। इकबाल अंसारी ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस से पूछा है कि देश मे कई जगह मसले हैं, वहाँ उनके नेता कभी क्यों नहीं जाते हैं। अंसारी ने राहुल गाँधी से दो टूक पूछा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ जाकर राजनीति क्यों नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ही कश्मीर में धारा 370 लागू किया था और पार्टी के नेता 70 साल तक राजनीति कर अपना लाभ लेते रहे हैं।
इकबाल अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धारा 370 हटाकर देश में एक कानून का राज स्थापित किया है। धारा 370 के खत्म होने से कश्मीर के लोगों का भला हुआ है। राहुल और कॉन्ग्रेस को देश की चिंता है, तो पाकिस्तान जाकर मसले को हल करें या फिर अन्य जगहों पर जाकर मसले को हल करें, लेकिन कश्मीर पर कॉन्ग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहिए।
अंसारी ने भारतीय मुस्लिमों की तुलना वीर अब्दुल हमीद से करते हुए कहा कि देश के मुस्लिम वतन के लिए पाकिस्तान से लड़ने को तैयार है। पाकिस्तान हमेशा भारत से मुँह की खाता रहा है। वहीं, कॉन्ग्रेस कश्मीर पर राजनीति कर रही है। देश के हिन्दू-मुस्लिम सिख व ईसाई अमन चाहते हैं। कॉन्ग्रेस ने कश्मीर पर राजनीति कर हमेशा फायदा उठाया है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस अगर कश्मीर जाना चाहती है, तो जाए, लेकिन कश्मीर पर राजनीति न करे, क्योंकि कॉन्ग्रेसियों की राजनीति अब हिन्दुस्तान से खत्म होने वाली है और खत्म हो जाएगी।”
गौरतलब है कि, शनिवार (अगस्त 24, 2019) को राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता श्रीनगर पहुँचे थे। हालाँकि, इन राजनेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे।
मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है कानून-व्यवस्था की स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। इससे आहत जम्मू-कश्मीर में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के एक जवान ने मध्यप्रदेश सरकार को पान सिंह तोमर बनने की धमकी दी है।
अमित सिंह नामक जवान ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा है, “मेरे साथ और मेरे भाई के साथ न्याय करें। नया पान सिंह तोमर बनने के लिए मुझे बंदूक चलाने की ट्रेनिंग लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”
अमित सिंह के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट
दरअसल, अमित सिंह का कहना है कि मध्यप्रदेश में रह रहे उनके परिवार के साथ कुछ दिन पहले मारपीट हुई थी। जिसमें उनके छोटे भाई ने अपनी आँख की 80 फीसद रोशनी गवां दी। लेकिन फिर भी प्रदेश के अधिकारियों ने इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया। इसलिए अब वह इस मामले में प्रशासन से फिर इंसाफ़ की गुहार लगा रहे हैं।
पूरा मामला
अमित सिंह की मानें तो 16 अगस्त को मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के इंदिरा सागर बाँध के पास उनका परिवार एमपी टूरिज्म के जल पर्यटन स्थल हनुवंतिया टापू पर पिकनिक मनाने गया था। जहाँ बच्चों की दूध की बोतलें और बिस्कुट अंदर ले जाने की बात पर उनके परिवार की निजी सुरक्षा गार्ड से झड़प हो गई। जिसके बाद बात बढ़ती गई और गार्ड ने उनके परिवार पर ईंट, लाठी और बियर की बोतल से हमला कर दिया। इसी हमले में उनके भाई अतुल की आँख की 80 फीसद रोशनी चली गई। साथ ही छोटे भाई विपुल के पैर में भी फ्रैक्चर हो गया। उनका दावा है कि ये घटना पर्यटन विभाग के कर्मचारियों के सामने हुई है।
मीडिया खबरों की मानें तो अमित सिंह के छोटे भाई विपुल ने बताया कि अतुल की आँख की रोशनी वापस लाने के लिए उन्हें चेन्नई ले जाकर इलाज कराने को कहा जा रहा है। उनका आरोप है कि हमले के बाद पुलिस ने उनकी मदद नहीं की बल्कि केवल 2 गार्ड्स, 15 अज्ञात गार्ड्स और नाविकों के ख़िलाफ़ सामान्य आईपीसी की धाराओं के अंतर्गत अपमानजनक व्यवहार, शारीरिक प्रताड़ना और आपराधिक धमकी के तहत मामला दर्ज किया। विपुल की मानें तो भाई की आँखों में गंभीर चोटें आने के बाद भी पुलिस ने उनकी शिकायत पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज नहीं किया।
पीड़ितों पर हमलावरों ने करवाई शिकायत दर्ज
बता दें कि हमले के बाद शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा, “सुरक्षा गार्ड एक सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस के नेता के करीबी रिश्तेदार द्वारा चलाए जा रहे सुरक्षा एजेंसी से था, इसलिए पुलिस ने भी हमारे खिलाफ हमला करने वालों और हमारी बहनों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों की शिकायत पर समान आईपीसी की धाराओं में हमारे खिलाफ मामला दर्ज किया।”
पुलिस का पक्ष
इस मामले की पुष्टि करते हुए मुंडी पुलिस स्टेशन के प्रभारी अमित पवार ने बताया, “दोनों समूह एक-दूसरे के साथ भिड़ गए थे, इस दौरान परिवार के सदस्यों में से एक की आँख पर गंभीर घाव हो गए। चूंकि मुंडी (खंडवा) में सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में डॉक्टरों ने शुरू में इसे साधारण चोट माना, इसलिए इस मामले में हमने आईपीसी की सामान्य धाराएँ दर्ज की। एक बार जब हमें इंदौर में डॉक्टरों से नई मेडिको लीगल रिपोर्ट मिल जाती है, तो हम एफआईआर में और भी धाराएँ जोड़ देंगे”
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद पूरी वादी में माहौल तेजी से बदला है। पाबंदियों में ढिलाई देने के बाद सामान्य जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। प्रदेश में बदलाव का बयार साफ तौर देखने को मिल रहा है। अब यहाँ के हालात बिल्कुल बदल गए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अब कश्मीर की मस्जिदों में जिहादी नारे नहीं लगते। मस्जिदों में अब सिर्फ खुदा की इबादत होती है। अलगाववादियों की धमकियों और फतवों के खिलाफ भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। कल तक उनके इशारे पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ती थी, अब उनके फरमानों पर आम कश्मीरी कान ही नहीं दे रहे हैं। अब मस्जिदों से ने तो दुकानें बंद रखने का एलान हो रहा है, न ही पथराव का। हालाँकि, मस्जिद के लाउडस्पीकर से लोगों को भड़काने के एक-दो प्रयास हुए, लेकिन वहाँ मौजूद अन्य नमाजियों ने ऐसे तत्वों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
कश्मीर में पहले मस्जिदों का इस्तेमाल सियासत करने के लिए, राष्ट्रविरोधी भावनाओं को भड़काने के लिए और आतंकियों द्वारा जिहाद के प्रति उकसाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब कश्मीर की जनता इनके खिलाफ मुखर होकर सामने आ रही है। कट्टरपंथी गिलानी हों, उदारवादी मीरवाइज मौलवी उमर फारूक हो, यासीन मलिक हो या फिर पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस, सभी ने मजहब का सहारा लेकर अपनी सियासत चमकाने की कोशिश की। कश्मीर रेंज के पूर्व आइजी के हवाले से दैनिक जागरण ने बताया है कि अब मस्जिदों के लाउडस्पीकर जहर फैलाने का काम नहीं कर रहे हैं। अख़बार में छपी खबर के अनुसार, बटमालू स्थित मस्जिद के बाहर खड़े मोहम्मद यूसुफ ने कहा, लोग पहले भी हिंसा की बातें पसंद नहीं करते थे। आजादी और जिहाद का नारा देने वालों ने लोगों को डराकर रखा था।
इसके साथ ही, जिहाद के नाम पर बंदूक उठाने वाले आतंकी भी अब मुख्यधारा में लौटने की ख्वाहिश रखते हैं। श्रीनगर के रहने वाले एक पूर्व आतंकी सैफुल्ला (कोड नाम) का कहना है कि जो हुआ, सही हुआ। अगर यह 1947 में हो गया होता तो आज शायद वो संसद या एसेंबली में होते। उन्होंने कहा कि ब्लैकमेल और मजहब की सियासत के कारण ही उनके जैसे कई युवाओं ने राह भटक कर बंदूक उठा ली और कुछ अब भी उठा रहे हैं। बता दें कि, बाबर बदर (सईद फिरदौस), बिलाल लोधी, उसमान मजीद, इमरान राही, जफर अकबर फतेह आदि कई ऐसे पूर्व आतंकी हैं, जो मुख्यधारा में वापस आना चाहते हैं।
वहीं, केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में विकास को लेकर बैठक की और संबंधित मंत्रालय को इसकी जिम्मेदारी भी सौंप दी है। साथ ही, केंद्र सरकार ने राज्य के दो प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं से परदे के पीछे संवाद की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ केंद्र के प्रतिनिधिमंडल ने अलग-अलग मुलाकात की है।
मौका कोई भी हो कॉन्ग्रेसी अपनी कुंठा नहीं छिपा पाते। उनकी भाषा पाकिस्तानियों और देश के कथित ‘अमनपसंद’ लिबरलों से हर बार मिल ही जाती है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरुण जेटली की मौत पर भी ऐसा ही दिखा।
एक तरफ कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी ने निधन पर दुख जताते हुए जेटली की पत्नी को पत्र लिखा, जिसमें उनकी बौद्धिकता और दलगत राजनीति से इतर मित्रता के कसीदे पढ़े गए हैं। दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड में शब्दों की चाशनी में लिपटे संस्मरण में जेटली को असफल वित्त मंत्री बताया गया है। इतना ही एक अनाम टीवी जर्नलिस्ट के हवाले से उन्हें चुगली करने वाला शख्स भी बताया गया है।
नेशनल हेराल्ड के घटिया और बकवास लेख में कहा गया है कि जेटली हमेशा एक “असफल वित्त मंत्री” के रूप में याद किया जाएँगे। कहा गया है कि उनकी एकमात्र उपलब्धि ‘दक्षिणपंथ’ का एक बेहतरीन प्रवक्ता होना है।
अब जेटली की पत्नी को लिखे गए सोनिया गॉंधी के पत्र के शब्दों पर गौर करे। सोनिया ने लिखा है, “मुझे आपके पति अरुण जेटली जी के असामयिक निधन के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ है। जेटली जी वह व्यक्ति थे जिनके दलगत राजनीति से इतर जीवन के हर तबके में मित्र और चाहने वाले थे।” साथ ही कहा है, “कैबिनेट मंत्री, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के वकील के तौर पर उनकी बौद्धिक क्षमता, योग्यता और संवाद कौशल सर्वविदित है।” पत्र में कहा गया है, “जेटली जी ने बीमारी से अंतिम दम तक लड़ाई लड़ी। उनका जाना इस मायने में और भी दुखद है कि उन्हें अभी सार्वजनिक जीवन बहुत योगदान देना था।”
लेकिन, नेशनल हेराल्ड ने जेटली को ‘देश की असफलता’ के लिए जिम्मेदार बताया है। लिखा है, “बतौर वित्त मंत्री, भले ही जेटली को हमेशा देश को असफल बनाने और मोदी के आगे आत्मसमर्पण करके एक ही रात में नोटबंदी करने के फैसले को लेकर याद किया जाएगा, लेकिन फिर भी उन्हें हमेशा वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कुशल समझा जाएगा। ”
लेख में लिखा गया है कि जेटली ने अपने विरोधियों से ज्यादा प्रंशसक अर्जित किए थे। उन्होंने अपने ‘आकर्षण और वाकपटुता’ से हमेशा अपने विरोधाभासों को संतुलित किया था।
Congress mouthpiece’s obituary on Arun Jaitley is the worst in recent memory and an absolute disgrace https://t.co/Ac6ROaYfQr
श्रद्धांजलि देने के इस नए अंदाज में नेशनल हेराल्ड ने जेटली की योग्यता और प्रतिबद्धता को पूर्ण रूप से नकारते हुए उनकी 2014 में वित्त मंत्री की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। लिखा है, “कहा जाता है कि 2002 दंगों के बाद कानूनी जंजालों में फँसे नरेंद्र मोदी को अरुण जेटली ने ही बचाया था। इसलिए, 2014 में उन्हें वित्त मंत्री एहसान चुकाने के लिए मोदी ने बनाया।”
एक अनाम टीवी पत्रकार के हवाले से लिखा गया है कि जेटली को चुगली करना बहुत पसंद था। उन्हें इस लेख के जरिए भगवाधारियों में आधा लिबरल बताया गया और इसी एंगल से पूरे लेख की हेडलाइन बनाई गई, ताकि अंदर परोसे गए गंद को लोग दरकिनार कर दें। विरोधाभासों में संतुलन की राजनीति करने वालों में जेटली का नाम लेते हुए नेशनल हेराल्ड ने इस लेख में खुद को बचाए रखने का हर दूसरी लाइन में प्रयास किया, लेकिन कुंठा तो एक शब्द से ही दिख जाती है। चतुराई से जेटली को गौ-गोबर की राजनीति से दूर रहने वाला भी बताया है।
किसी दिवंगत आत्मा पर लिखे इस लेख को शायद ओछी मानसिकता का एक बेहतरीन उदाहरण बनाकर आने वाले समय में पेश किया जा सकेगा। क्योंकि जिस तरह पाकिस्तान के लोगों ने अरुण जेटली और सुषमा स्वराज की मृत्यु पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया है, वैसे ही भारत में मौजूद इन तथाकथित लिबरल और नेशनल हेराल्ड जैसे अखबारों ने भी अपने इन लेखों से प्रखर राजनेता और कुशल रणनीतिकार का मजाक बनाया है।
श्रीलंका के रास्ते भारत में छह लश्कर आतंकियों की घुसपैठ की खुफिया रिपोर्ट के बाद चार संदिग्ध हिरासत में लिए गए हैं। इनमें से एक महिला भी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तमिलनाडु के कोयंबटूर और केरल के कोच्चि से दो-दो लोगों को पकड़ा गया है। इनसे पूछताछ की जा रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक केरल पुलिस ने 2 दिन पहले लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। अब कोयंबटूर पुलिस ने 2 और संदिग्धों के उससे संबंध रखने के में हिरासत में लिया है।
Coimbatore: Following terror alert in the city, Special Investigation Team (SIT) has taken 2 persons for inquiry, after they were suspected of having links with a person arrested by Kerala Police 2 days ago for being involved with Lashkar-e-Taiba. More details awaited. #TamilNadupic.twitter.com/WGHLV0ROn2
वहीं, कोच्चि की एक अदालत परिसर से पुलिस ने शनिवार को आतंकी संगठनों से संबंध रखने के संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान अब्दुल रहीम के तौर पर हुई है। एक महिला भी हिरासत में ली गई है। मलयालम समाचार चैनलों ने एक वीडियो प्रसारित किया है जिसमें पुलिस संदिग्ध व्यक्ति को जिला अदालत परिसर से ले जा रही है।
संदिग्ध के वकील ने एक चैनल को बताया कि वह त्रिशूर जिले के कोदुन्गल्लुर का रहने वाला है। दो दिन पहले ही वह बहरीन से लौटा था। वकील के मुताबिक संदिग्ध अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए एक याचिका दायर करने अदालत आया था, क्योंकि इस तरह की खबरें थीं कि उसका संबंध लश्कर के उन सदस्यों से है जो श्रीलंका के रास्ते तमिलनाडु में घुसे हैं। वकील का दावा है कि संदिग्ध का इससे कोई लेना-देना नहीं है। कोई उसके पहचान पत्र का गलत इस्तेमाल कर उसे फँसा रहा है।
गौरतलब है कि, लश्कर के 6 आतंकवादियों के तमिलनाडु में घुसने को लेकर खुफिया एजेंसियों की चेतावनी के बाद कोयंबटूर समेत पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था। इन आतंकियों में 1 पाकिस्तानी और 5 श्रीलंकाई तमिल शामिल हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने श्रीलंका के रास्ते तमिलनाडु में घुसने वाले आतंकवादियों के वेश बदलकर दाखिल होने की बात भी कही थी। कहा गया था कि ये सभी आतंकवादी मुस्लिम हैं, लेकिन हिंदुओं की वेशभूषा में ये भारत में घुसे हैं। इन्होंने तिलक और भभूत लगा रखा है।
आपसे हमारी उम्मीदें बहुत ज्यादा नहीं हैं। खासकर, जब भारतीय परंपराओं की बात हो। लेकिन, गुजरात चुनाव के दौरान जब आपको मंदिर-मंदिर प्रदक्षिणा करते देखा और पता चला कि आप जनेऊधारी ब्राह्मण हैं, तब से यह उम्मीद रहती है कि दाएँ-बाएँ वाले के टिप्स के असर से परंपराओं के नाम पर नौटंकी ठीक कर लेंगे। इसलिए उम्मीद थी कि आप आज जम्मू-कश्मीर नहीं जाएँगे, क्योंकि धीरे-धीरे हालात सामान्य करने में जुटे वहाँ के प्रशासन ने आपसे नहीं आने की अपील की थी।
उम्मीदों का एक कारण यह भी था कि आप विपक्ष के जिन चेहरों को साथ लेकर श्रीनगर जाने वाले थे, उनमें एक ‘भूरा बाल साफ करो’ का नारा देने वाली पार्टी के झा नामजीवी सांसद भी थे।
न्योता मिलना और उसे कबूल करना बड़प्पन है। लेकिन, न्योता देने वाले को यह अधिकार होता है कि परिस्थितियों के हिसाब से वह इसे कैंसिल कर आपको सूचना दे दें। उम्मीद की जाती है कि मेहमान भी मेजबान की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहे कोई नहीं जी, अगली बार आएँगे।
मिथिला में भोज देने से पहले बिझो की परंपरा है। सबको पता होता है कि फलाने घर में चुल्हा जल रहा है, व्यंजन बन रहा है और भोग लगाने का न्योता भी है। लेकिन, लोग बिझो का इंतजार करते हैं। यानी जब तक कोई आकर खाने के लिए चलने को न कहे लोग नहीं पहुॅंचते। सुबह से भोज की प्रतीक्षा कर रहे लोग बिझो न होने पर खाने नहीं जाते। सोचा था कि दाएँ-बाएँ खड़े झा जी आपके कान में बिझो वाला गप्प फूंक देंगे और आप इशारा समझ ठीकठाक अभिनय इस बार भी कर लेंगे। ठीक वैसे ही जैसे गुजरात में आप कथित तौर पर आप गहलोत के इशारों पर कर रहे थे।
पता नहीं झा जी को दाएँ-बाएँ में बहुत दूर कर दिया या फिर संभव है दिल्ली में बैठ उच्च सदन की सदस्यता हासिल करने के चक्कर में वे भी परंपरा भूल गए होंगे।
यह सही है कि जम्मू-कश्मीर के हालात पर आपकी अनर्गल टिप्पणियों के बाद वहॉं के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि वे विमान भेजेंगे और आप अपनी नजरों से देख लीजिए। आपका भी बड़प्पन कहा कि विमान भेजने की जरूरत नहीं। हमें लगा कि कश्मीर में पूर्वजों की गलती का प्रायश्चित करने का जो मौका आपको राज्यपाल ने दिया है, उसका आप सदुपयोग कर प्रायश्चित करेंगे। शायद राज्यपाल को भी यही उम्मीद रही होगी कि आप राजनीति छोड़ राज्य के हालात सामान्य बनाने में मदद करेंगे। जैसा आज आपको श्रीनगर एयरपोर्ट से बैरंग लौटाने के बाद उन्होंने दोहराया भी है।
आपसे इस उम्मीद का एक कारण यह भी था कि आपकी पार्टी के भीतर ही आर्टिकल 370 पर कुछ नेता पार्टी स्टैंड से अलग राय रख रहे हैं। इनमें से कुछ आपके बेहद करीबी भी माने जाते हैं।
पर आप ठहरे कॉन्ग्रेसी। वो भी गॉंधी-नेहरू परिवार से। प्रायश्चित तो आप से होना न था। इसलिए पहले विपक्षी एकता के नाम पर आपने दाएँ-बाएँ खड़े करने के लिए फौज जुटाई। फिर सोचा श्रीनगर पहुॅंच भी वही झूठ फैलाएँगे जो आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से देश भर में घूम-घूम कर फैला रहे। आपके इस झूठ पर पाकिस्तान छोड़ कोई लहोलोहाट भी नहीं हो रहा। यह भी उम्मीद रही होगी कि अपने पूर्वजों की तरह आप भी कश्मीरी अवाम गुमराह कर पाएँगे।
जम्मू-कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य करने में जुटे प्रशासन को आपकी नीयत के इस खोट का पता लगते देर न लगी। इसलिए, आने से पहले ही कह दिया नो एंट्री। पर आप बाप-दादा की नाकामियों के कब्र पर न जाएँ ऐसा कैसे हो सकता। यह जानते हुए भी कि श्रीनगर एयरपोर्ट से ही लौटाए जा सकते हैं, आपने दिल्ली से उड़ान भरी। हुआ वही जो होना था। लेकिन, इससे आपको एक और झूठ बोलने का मौका तो मिला। और आप यही चाहते भी थे।
दिल्ली लौटते ही आपने देर भी नहीं लगाई। कहा, “मुझे राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर आने का न्योता दिया था। मैंने उसे स्वीकार किया। उन्होंने कहा था कि सब कुछ सामान्य है। उन्होंने कहा था कि वो मेरे लिए एक हवाई जहाज भेजेंगे। मैंने विमान लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन उनके निमंत्रण को स्वीकार कर कहा था कि मैं वहां आऊँगा। मैं विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं के साथ वहॉं गया था। हम लोगों से मिलना चाहते थे। वे किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं यह जानना चाहते थे। हमें एयरपोर्ट से आगे जाने की इजाजत नहीं दी गई। हमारे साथ गए मीडिया के कुछ लोगों को पीटा भी गया। यह स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य नहीं है।”
श्रीनगर एयरपोर्ट से ही बैरंग लौटे
हम सबको, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को भी आपसे यही उम्मीद थी। एक बार फिर से सबको सही साबित करने के लिए धन्यवाद।
लेकिन, हमारा नहीं तो कम से कम उनका तो ख्याल करिए, जो आपसे हर बाद उम्मीद लगा लेते हैं, पहले से भी किसी बड़े चमत्कार की और आप हर बार, बार-बार, पिछली बार से भी ज्यादा वीभत्स तरीके से उस सपने को चीर-फाड़ देते हैं।