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खानदानी सेलेब्स के पाँव पर लोटने वाली मीडिया को कंगना ने दिखाया आइना, इस बेचैनी का कारण क्या?

मनोरंजन इंडस्ट्री को कवर करने वाले पत्रकारों ने एक नया गिल्ड या यूँ कह लीजिए, गिरोह बनाया है। अब से कोई भी सेलिब्रिटी इनसे टेढ़ी बात करता है तो ये गिल्ड इसका विरोध करेगा और निर्णय लेगा कि पत्रकारों को आगे क्या करना है? सवाल है कि इन सब की ज़रूरत क्यों आन पड़ी? इसका जवाब है कि जिस तरह एक व्यक्ति ने देश की मुख्यधारा की मीडिया में हलचल मचा रखी है और उसके विरोध में लिखने के लिए आम लूटपाट की घटनाओं को भी भाजपा, हिंदुत्व और ब्रह्मणवाद से जोड़ा जाता है, ठीक उसी तरह एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी कोई है, जिसने मीडिया की हिपोक्रिसी पर नकेल कस दी है। एक ऐसी महिला ने मीडिया को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है, जो बॉलीवुड की खानदानी परिपाटी से नहीं आती।

कई बात खानदानी सेलेब्रिटीज के आगे दंडवत होने वाला मीडिया आज एक महिला के आगे बेबस नज़र आ रहा है। एक सुदूर पहाड़ी राज्य के कस्बे में जन्मी कंगना रनौत ने बॉलीवुड में अपनी बुलंदी का झंडा ऐसा गाड़ा है कि आज वह अकेले अपने दम पर किसी भी फ़िल्म को हिट कराने की ताक़त रखती है। वह अपने दम पर ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 150 करोड़ रुपए तक पहुँचा सकती हैं और ‘मणिकर्णिका’ को 100 करोड़ रुपए तक पहुँचा सकती हैं। यह सब मीडिया को खल रहा है क्योंकि कंगना नेपोटिज्म पर सवाल खड़े करती हैं। वह बनी-बनाई राह से जुदा चलती हैं।

ऐसा नहीं है कि कंगना की सारी फ़िल्में अच्छी होती हैं। इस पर बहस हो सकती है कि उनकी कौन-सी फ़िल्म अच्छी थी और कौन सी बुरी? किस फ़िल्म में क्या अच्छे थी और क्या बुराई, इस पर बात करने का सबको हक़ है। कंगना ने उस पत्रकार ने क्या पूछा था? उन्होंने बस पूछा था कि एक फ़िल्म की समीक्षा करते समय इसके लिए किसी अभिनेत्री को हिंसाप्रिय या जिन्गोइस्टिक कैसे ठहराया जा सकता है? उन्होंने पूछा था कि उनके साथ वैन में बैठ कर खाना खाने और मैसेज भेजने वाले पत्रकार सामने मित्र और पीछे दुश्मन होने का दिखावा क्यों करते हैं? बस इतनी सी बात पर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का मीडिया भड़क गया।

यहाँ हम इस घटनाक्रम पर चर्चा करेंगे लेकिन सबसे पहले मीडिया से सवाल है कि जब बॉलीवुड के खानदानी सेलेब्स ने पत्रकारों, कैमरामैन और समीक्षकों के साथ दुर्व्यवहार किया, तब उन्हें गिल्ड बनाने की ज़रूरत क्यों नहीं महसूस हुई? क्योंकि अगर स्तर की बात करें तो कंगना ने तो सिर्फ़ 2-4 शब्द ही बोले थे, जबकि कई सेलेब्स ने पत्रकारों की पिटाई तक भी की, तब मीडिया को उनकी सुरक्षा की चिंता क्यों नहीं सताई? क्या खानदानी हीरो और हीरोइन का विरोध करने से मीडिया का ही घाटा है? क्या मीडिया अगर इन सेलेब्स के सीरियल दुर्व्यवहारों का विरोध करने लगे तो उसका दाना-पानी बंद हो जाएगा? आइए एक नज़र ऐसी घटनाओं पर डालते हैं।

मुंबई के चेम्बूर में स्थित आरके स्टूडियो कभी पूरी इंडस्ट्री का मुख्यालय हुआ करता था। राज कपूर से इसका गहराने नाता होने के कारण अब भी मीडिया वहाँ जुटता है। इसी तरह 2016 में गणेश विसर्जन के दौरान भी यहाँ मीडिया का मेला लगा था। यहाँ वरिष्ठ अभिनेताओं ऋषि कपूर व उनके भाई रणधीर कपूर ने पत्रकारों के साथ वैसा ही व्यवहार किया, जैसा लोग गली के आवारा कुत्तों के साथ करते हैं। पत्रकारों को थप्पड़ मारा गया, उन्हें धक्का देकर बाहर निकला गया। यहाँ तक कि एक वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक को भी बॉडीगार्ड्स ने धकेल दिया। भरी बारिश में कपूर भाइयों के हाथों ज़लील होने वाले पत्रकारों के पक्ष में क्या गिरोह विशेष एक हुआ?

शायद मीडिया को इस बात का डर होगा कि कल को रणबीर की शादी होगी तो उसे फुटेज कहाँ से मिलेगा? मीडिया अगर कपूर खानदान के विरुद्ध जाता है तो वो करिश्मा कपूर के वैवाहिक जीवन से जुड़ी चटपटी ख़बरें कहाँ से आएँगी? इसी वर्ष जून में एक टीवी पत्रकार ने सलमान ख़ान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। ख़ान पर आरोप है कि उन्होंने उस पत्रकार को गाली दी, धमकी दी और दुर्व्यवहार किया। तब मीडिया को एकता बनाए रखने की क्यों नहीं सूझी? राजीव मसंद और अन्य समीक्षकों ने इस पर क्या कुछ बोला? नहीं। इसी तरह एक कार्यक्रम के दौरान फोटोग्राफर्स और ख़ान के बॉडीगार्ड्स के बीच लड़ाई हुई। आहत कैमरा पर्सन्स ने सलमान को बैन किया।

क्या बॉलीवुड को कवर करने वाले पत्रकारों ने तब किसी गिरोह को बनाने की घोषणा की? सलमान ने पत्रकारों को साफ़-साफ़ कहा कि उन्होंने जैसा व्यवहार किया, अगर वो ख़ुद वहाँ उपस्थित रहते तो पत्रकारों के साथ न जाने क्या होता। प्रतिबन्ध का मज़ाक उड़ाते हुए सलमान ने कहा कि वो कुछ दिनों बाद घुटने के बल बैठ कर फोटोग्राफर्स से निवेदन करेंगे कि उनका करियर डूबने से बचा लें। इतना सब कुछ होने के बावजूद कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया। या तो वो फोटोग्राफर्स गिरोह विशेष के किसी काम के नहीं थे या फिर सलमान का विरोध उन पर भारी पड़ सकता था। उन्हें ख़ूब पता है कि ऐसा कर के सलमान के नए लुक्स में पिक्स लेने का मौका वो गँवा सकते हैं।

इसी तरह जब जया बच्चन के सामने पत्रकार ऐश्वर्या राय से बात कर रहे थे तब जया ने उन्हें कड़ी डाँट पिलाई। जया ने पत्रकारों से कहा, “क्या ऐश्वर्या-ऐश्वया बुला रहे हो, तुम्हारे क्लास में पढ़ती है क्या?” जया बच्चन को ये बात अखर रही थी कि पत्रकार उनकी बहू ऐश्वर्या राय को पहले नाम से क्यों सम्बोधित कर रहे हैं? इसी तरह जया बच्चन ने एक बार एक पत्रकार के माइक को धक्का दे दिया। लेकिन, ये सब बस एंटरटेनमेंट शो में एक छोटी सी चटपटी ख़बर बन कर रह गई। कंगना के मामले में ऐसा नहीं है। कंगना बॉलीवुड की इलीट वर्ग के विपरीत अधिकतर हिंदी में बात करती हैं और पत्रकारों को ख़ुश रखने के लिए फ़िल्में नहीं बनातीं। वह गिरोह विशेष की पसंददीदा विषय नहीं चुनतीं।

इसी तरह 2012 में जब ईशा देओल की शादी के दौरान मीडिया ने धर्मेद्र से उनके दोनों बेटों की अनुपस्थिति के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “आप बकवास मत कीजिए।” लेकिन, यह आई-गई बात थी। अगर इस चीज को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है तो फिर कंगना वाले मुद्दे पर इतना हाय-तौबा मचाने की क्या ज़रूरत है? कंगना ने तो बस मीडिया को एक आइना दिखाया है, बाकियों ने तो समय-समय पर पत्रकारों को ‘उनकी औकात दिखाने’ का काम किया है। आज प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट गिल्ड एक पेज पर खड़े हैं, सिर्फ़ कंगना को बॉयकॉट करने के लिए। आख़िर एक महिला ने ऐसा क्या कर दिया कि इतने बड़े-बड़े संगठनों की नींद उड़ गई है?

एक पत्रकार ने जब दीपिका पादुकोण के बारे में कुछ लिखा, तो रणवीर को उस पर गुस्सा आ गया। उन्होंने कहा कि अगर वो पत्रकार उनके सामने आ गया तो उसके साथ मारपीट की नौबत न आ जाए, इसके लिए उन्हें ख़ुद पर कड़ा नियंत्रण रखना पड़ेगा। उन्होंने अप्रैल 2015 में कहा था कि वो उस पत्रकार से बहुत ही ज्यादा गुस्सा हैं। रणवीर की इस ‘फिजिकल असॉल्ट’ वाली बात के ऊपर पत्रकारों का ख़ून ठंडा बना रहा, उबला नहीं। लेकिन, कंगना ने कुछ सवाल क्या पूछ दिए, पूरे गिरोह में खलबली मच गई। चड्डियाँ कितनी बार बदली जाती हैं और उनका रंग क्या होता है, अगर मीडिया ने यह दिखाने और फ़िल्मों में फ़र्ज़ी विचारधारा ढूँढने की कोशिश न की होती तो शायद आज उनकी बेइज्जती की नौबत ही नहीं आती।

जो भी हो, एक सेल्फ-मेड अभिनेत्री ने मीडिया को बता दिया है कि दो अलग-अलग लोगों के मामले में सिर्फ़ इसीलिए दोहरा रवैया नहीं चलेगा क्योंकि एक खानदानी परिवार से आता है और एक ने गाँव-कस्बों से आकर इंडस्ट्री में अपना पाँव जमाया है। कंगना के सवालों का अब भी जवाब देना पड़ेगा मीडिया को- ये फ़िल्मों में ब्राह्मणवाद और मर्दवाद जैसी चीजें ढूँढना कब बंद करोगे? आज एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ने एक गिरोह बनाया है, एडिटर्स गिल्ड के रूप में मुख्यधारा की मीडिया में ऐसा एक गिरोह पहले से ही सक्रिय है जो बंगाल में पत्रकारों की पिटाई पर तो चुप रहता है लेकिन कहीं किसी भाजपा शासित राज्य में कोई पत्रकार गिरफ़्तार भी हो जाए तो इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाता है।

कंगना रनौत के साथ मीडिया ज्यादतियाँ कर रहा है। देश के हर मुद्दों को लेकर उनसे ज़बरदस्ती बयान देने को कहा जाता है और उनके बयान गिरोह विशेष की राय से मिलते जुलते नहीं हैं, इसीलिए उनको निशाना बनाया जाता है। खानदानी सेलेब्स के पैरों पर लोटने वाली मीडिया को एक महिला ने ऐसा आइना दिखाया है कि औपचारिक रूप से एक गिरोह का गठन करने की नौबत आ गई है। शायद यही टाँग खींचने की परम्परा का दुष्परिणाम है कि बॉलीवुड में सुदूर शहरों से आए हुए उतने अभिनेता नहीं हैं जितने खानदानी और नेपोटिज्म से आए अभिनेता-अभिनेत्री हैं। या तो मीडिया अपना रवैया बदले नहीं तो कंगना जैसी और भी आएँगी। अब देश की महिलाएँ जवाब देना जानती हैं, चाहे वो किसी भी क्षेत्र में हों।

₹10000 करोड़ की ज़मीन की हेराफेरी: प्रयागराज के ईसाई संगठनों द्वारा ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’

प्रयागराज में इंडियन चर्च ट्रस्टीज, डायसिस ऑफ लखनऊ के अंतर्गत आने वाली 100 अरब रुपए की ज़मीन को धोखाधड़ी के जरिए बेचने का मामला सामने आया है। इतनी बड़ी क़ीमत वाली ज़मीन को बेचने के बाद रुपए का बंदरबाँट भी कर लिया गया। ये ज़मीनें सिविल लाइन्स के अधीन थीं। फ़र्ज़ी काग़ज़ात और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर सौ अरब रुपए की ज़मीन को दूसरे संस्थानों को बेच डाला गया। इस मामले में सम्बंधित संगठनों ने मामला दर्ज कराया है, जिसमें बिशप समेत 16 लोगों पर मुक़दमा दर्ज किया गया है।

इन संस्थाओं की सम्पत्तियाँ पहले भी विवादों में रही हैं और इस बार बिशप जॉन अगेस्ट्रिन ने मुक़दमा दर्ज कराया है। जिन लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है, उनमें कई बड़े पदाधिकारी और अज्ञात भी शामिल हैं। आरोपितों में एक बिशप पीटर बलदेव भी शामिल है। इन लोगों ने फ़र्ज़ी सोसाइटी और फेक दस्तावेज बना कर ज़मीन बेचने के मामले में हेराफेरी की।

प्रयागराज के शहरी व देहाती इलाक़ों में ईसाई संगठनों की अरबों की ज़मीनें हैं। इससे पहले ऐसे कई मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें एक संस्था के अंतर्गत दूसरी संस्था बनाई गई और फिर ज़मीन का बंदरबाँट किया गया। संस्थाओं को ज़मीन ट्रांसफर कर के कुछ वर्षों बाद उन्हें बेच दिया जाता था। इससे पहले जॉन अगेस्ट्रिन सोसाइटी के नाम पर भी करोड़ों का घोटाला किया गया था। इसी तरह छात्रावास के नाम पर भी करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया।

प्रयागराज के ईसाई प्राइवेट स्कूलों व ईसाई संगठनों के पदाधिकारियों पर ज़मीन घोटाले व हेराफेरी से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। ईसाई संस्थाएँ इन मामलों में आपस में ही लड़ रही हैं और एक-दूसरे पर ही मुक़दमा दर्ज करा रही हैं। कीडगंज में एक ईसाई कम्पाउंड की ज़मीन को एक बिल्डर को बेच डाला गया था। इस मामले में एक बुजुर्ग ने फाँसी भी लगा ली थी। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि उन्हें ज़मीन खाली करने को मजबूर किया जा रहा है।

बिशप अगेस्ट्रिन ने कहा है कि यह खेल देश भर में चल रहा है, जहाँ ईसाई संगठन और उनके पदाधिकारी फ़र्ज़ी संगठन बना-बना कर ज़मीन की हेराफेरी कर रहे हैं। प्रयागराज ज़मीन घोटाले को उन्होंने देश का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। यह खेल कई दशकों से चल रहा है। 1971 में ही फ़र्ज़ी संगठन बनाया गया था और 1991 में फ़र्ज़ी पदाधिकारी बन कर ज़मीनें इधर-उधर ट्रांसफर की गई थीं।

सेक्स चेंज करवाने पर मिलेंगे ₹1.5 लाख रुपए: किन्नरों पर मेहरबान हुई बिहार सरकार

बिहार सरकार ने सेक्स बदलवाने पर वित्तीय मदद देने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने किन्नर कल्याण बोर्ड का भी गठन किया है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि किन्नरों के हितों की रक्षा हर हाल में किए जाएगी। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा, “किन्नर हमारे समाज के ही अंग हैं। अगर कोई व्यक्ति सेक्स परिवर्तित कराता है तो बिहार सरकार डेढ़ लाख रुपए वित्तीय मदद के रूप में देगी।

पटना के प्रेमचंद रंगशाला में आयोजित किन्नर महोत्सव को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति किन्नरों को किराए पर मकान देने से इनकार करता है, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ देने में भेदभाव करता है, इसके अलावा इनके अधिकारों का हनन करता है, तो उन्हें छह माह से लेकर दो साल तक की सज़ा दी जा सकती है।” राज्य सरकार द्वारा नवगठित बोर्ड अन्य राज्यों में किन्नरों को मिल रही सुविधाओं का अध्ययन करेगा। इसके बाद बिहार के किन्नरों को सुविधाएँ देने के लिए योजनाएँ बनाई जाएँगी।

कार्यक्रम के मंच पर किन्नरों ने अपनी कलाकारी दिखाई। कई राज्यों से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। उद्योग मंत्री श्याम रजक ने इस महोत्सव को किन्नरों को आत्मबल देने वाला कार्यक्रम बताया। किन्नर महोत्सव 2016 से ही प्रत्येक वर्ष आयोजित किया जाता रहा है। कला एवं संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार ने किन्नरों को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बताया।

उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा किन्नर महोत्सव को लेकर साझा की गई जानकारियाँ

बता दें कि इंसेफ्लाइटिस के कारण राज्य में 150 से भी अधिक बच्चों की मौत हो गई है और केंद्र से लेकर राज्य स्तर के नेताओं द्वारा दौरे करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नज़र नहीं आया। इसके अलावा गर्मी में लू के कारण भी 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण लोगों के निशाने पर आई बिहार सरकार ने बाढ़ को लेकर भी ज़रूरी इंतजाम नहीं किए हैं। बिहार के कई जिलों में पानी भर चुका है और जल-निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण कई इलाक़े जलमग्न हो चुके हैं।

24 सेकंड का Video वायरल: CRPF जवानों ने 14 साल की नगीना को नदी में डूबने से बचाया

केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) के जवानों की बहादुरी के क़िस्से तो हम आए दिन सुनते रहते हैं। देश की सुरक्षा में तो ये जवान मुस्तैदी के साथ खड़े ही रहते हैं, लेकिन मुश्किल में फँसे किसी शख़्स की जान बचाने में भी ये जवान अपने क़दम पीछे नहीं लेते। अपने अदम्य साहस का परिचय कराने की एक ऐसी ही घटना जम्मू-कश्मीर के बारामूला से सामने आई है। ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया गया है जिसमें एक लड़की को नदी में डूबने से बचाने के लिए वहाँ मौजूद जवानों ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी और लड़की को सही-सलामत बचा लिया।

14 साल की नगीना नाम की लड़की को CRPF कॉन्स्टेबल्स एमजी नायडू और नल्ला उपेंद्र द्वारा (बारामूला, जम्मू-कश्मीर) में नदी में डूबने से बचाया गया। जवानों की इस बहादुरी के लिए CRPF के महानिदेशक द्वारा 176 बटालियन के एमजी नायडू और उपेन्द्र को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है।

ख़बर के अनुसार, सोमवार (15 जुलाई) को दोपहर के समय नगीना बारामुला ज़िले के चनपोरा कुंजर टंगमर्ग गई थी। वहाँ नदी के तट पर वो कपड़े धो रही थी तभी अचानक उसका पाँव फ़िसल गया और वो नदी की तेज़ धाराओं के साथ बहने लगी। इस दौरान वो ज़ोर-ज़ोर से मदद के लिए चिल्लाने लगी। तभी वहाँ ड्यूटी पर तैनात CRPF के जवानों ने उसकी आवाज़ सुनी। उन्होंने बिना देरी किए नगीना को बचाने के लिए नदी में छलाँग लगा दी। 

लड़की की पहचान नगरोटा (जम्मू-कश्मीर) के मोहम्मद शरीफ़ की बेटी नगीना के रूप में हुई। नगीना को बचाए जाने के बाद, CRPF के जवानों ने उसे इलाज के लिए तुरंत उप-ज़िला अस्पताल टंगमर्ग में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ डॉक्टर्स ने उसकी स्थिति स्थिर बताई। नगीना के परिजनों ने सभी जवानों के तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।

‘सुनने की आदत डालिए ओवैसी साहब, डरा नहीं रहा हूँ लेकिन आपको सुनना पड़ेगा’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में असदुद्दीन ओवैसी के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए उन्हें बुरी तरह झिड़का। दरअसल, आज संसद में एनआईए संशोधन विधेयक पर चर्चा चल रही थी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह खड़े होकर इसी विषय पर बोल रहे थे। इसी दौरान हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने खड़े होकर विरोध करना शुरू कर दिया। बागपत सांसद सत्यपाल सिंह यह कह रहे थे कि आतंकवादी घटनाओं को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे अनुभवी सत्यपाल सिंह ने कहा कि जबकि मुंबई ने भी आतंकवाद ख़ूब झेला है परंतु वहाँ भी इसे राजनीतिक चश्मे से देखा गया। हैदराबाद धमाकों के बारे में बात करते हुए सिंह ने याद दिलाया कि जब पुलिस ने अल्पसंख्यक समुदाय के आरोपितों को पकड़ा, तब सीधे मुख्यमंत्री ने कमिश्नर को धमकी दी कि ऐसा करने से उनकी नौकरी चली जाएगी। इसी बात से ओवैसी नाराज़ नज़र आए।

ओवैसी के रवैये को देखते हुए भाजपा अध्यक्ष शाह खड़े हुए और उन्होंने ओवैसी को सुनने की आदत डालने की सलाह दी। अमित शाह ने कहा, “जब राजा साहब बोल रहे थे, तब क्यों नहीं खड़े हुए? हम शांति से सुनते हैं। सुनने की आदत डालिए ओवैसी साहब, आपको सुनना पड़ेगा।” बाद में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मैं किसी को डरा नहीं रहा हूँ।

शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि समान विषय पर नीलगिरि के सांसद ए राजा ने भी अपनी बातें रखी और भाजपा नेता सत्यपाल सिंह भी उसी विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने सलाह दी कि जब कोई अपनी बात रख रहा हो तो उसके बीच में नहीं बोला जाना चाहिए।

शैम्पेन खुलते ही टीम छोड़ भागे इंग्लैंड के खिलाड़ी आदिल राशिद और मोईन अली, इमाम ने ली चुटकी

कल रात इंग्लैण्ड के विश्व कप जीतने के बाद उनके जश्न में कुछ ऐसा हुआ जो एक ही साथ हास्यास्पद भी था और आधुनिक समाज, प्रगतिशील मूल्यों के बीच गहराई तक पैवस्त इस्लामी रूढ़िवाद का जीता-जागता सबूत भी। और इस घटना के सांकेतिक महत्व का अंदाज़ा इस चीज़ से लगाया जा सकता है कि इमाम तौहीदी भी इस पर टिप्पणी करने से खुद को नहीं रोक पाए।

शैम्पेन से भागे क्रिकेटर

यह तो आम जानकारी है कि इस्लाम में मदिरा को हराम मानते हैं। इस मजहब के बहुत से अनुयायी इसके सेवन से अपने मज़हबी आग्रह के चलते बचते भी हैं। लेकिन ब्रिटिश क्रिकेट टीम के खिलाड़ी मोईन अली और आदिल राशिद इस आग्रह को एक ही नहीं, कई कदम आगे ले गए। जब उनके साथी खिलाड़ी बेयरस्टॉ और प्लंकेट जीत की ख़ुशी मनाते हुए शैम्पेन उड़ाने लगे तो दोनों शैम्पेन के स्पर्श से भी बचने के लिए गिरते-पड़ते दूर भागते नज़र आए।

इमाम ने ली चुटकी

इस्लाम और इस्लामी समाज के कट्टरपंथ से लड़ने के लिए जाने जाने वाले ईरानी-ऑस्ट्रेलियाई इमाम मोहम्मद तौहीदी ने भी इस पर चुटकी ली। इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि इसको देखने के बाद उनकी हँसी रोके नहीं रुक रही है।

इस्लामी मामलों के ‘जानकार’ शराब को लेकर एकमत हैं। उनका मानना है कि यह शैतान का काम है। वे AIDS के पीछे की वजह भी शराब ही बताते हैं। यही वजह है कि कट्टर इस्लामी अनुयायी शराब से दूर रहते हैं। मोईन अली और आदिल रशीद का भागना भी इसी ओर इशारा कर रहा है।

ठग ईसा खान ने पुलिस को कहा- ‘नौकरी करने से ज्यादा ठगी में आता है मजा, इसलिए करता हूँ’

कभी सुना है आपने कि कोई ठग पकड़े जाने पर पुलिस के सामने कहे कि उसे नौकरी करने से ज्यादा ठगी में मजा आता है। अगर नहीं, तो पलवल निवासी (28) ईसा खान की बात सुनिए, जिसने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अपने अपराधों का कारण उससे मिलने वाले मजे को बताया है।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार पलवल निवासी ईसा खान को ओखला इंडस्ट्रियल पुलिस ने 7 जुलाई को ओखला इलाके से गिरफ्तार किया। जहाँ जाँच में उसके पास से 30 हजार रुपए, ठगी के पैसों से खरीदे गए दो महंगे फोन और 20 एटीएम बरामद हुए। जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने किसी प्रकार की सफाई देने की बजाए बोला कि उसे नौकरी या कोई और काम करने की बजाए ठगी से कमाई करने में मजा आता है, इसलिए वो इसे करता है। जानकारी के मुताबिक ईसा खान पिछले साल भी गिरफ्तार हो चुका है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

खबर के मुताबिक पुलिस ने बताया कि पिछली 4 जुलाई को तेहखंड निवासी एक महिला ने ठगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला ने अपनी शिकायत में बताया था कि एटीएम से पैसे निकालते वक्त उसका एटीएम काम नहीं कर रहा था तो पीछे खड़े युवक ने उसे मदद ऑफर की, लेकिन फिर भी एटीएम से कैश नहीं निकला। इसलिए वो घर वापस आ गई। लेकिन घर पहुँचते ही उसके पास कार्ड से 30 हजार के ट्रांजैक्शन का मैसेज आया और थोड़ी देर बाद 42 हजार से अधिक की शॉपिंग का मैसेज आ गया।

महिला ने जब बैंक ग्राहक सेवा केंद्र से बात की तो मालूम चला कि पैसे उनके एटीएम कार्ड से ही निकाले गए हैं, जब महिला ने अपना एटीएम कार्ड चेक किया थो पता चला आरोपित युवक ने उसका कार्ड ही बदल दिया था।

ठगी के इस मामले की खबर मिलते ही ओखला पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज खँगाली गई और आरोपित की पहचान ईसा खान के रूप में हुई। 7 जुलाई को वह पकड़ा गया, जिसके बाद पता चला कि ठगी के लिए वो मदद के बहाने ट्रांजैक्शन के दौरान पिन नंबर देख लेता था, और फिर कार्ड चुराकर उसे इस्तेमाल करता था। बता दें ईसा खान ठगी करने के लिए पलवल से 80 किलोमीटर की दूरी तय करके दिल्ली आता था और काम पूरा करके दोबारा ईएमयू से वापस लौट जाता था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया और ईसा खान पकड़ा गया।

बाइक नहीं मिली तो निकाह के 24 घंटे के भीतर तीन तलाक़, दामाद ने ससुर को दी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में दहेज़ के कारण एक शादी मात्र 24 घंटे के भीतर टूट गई। युवक ने शादी के एक दिन के भीतर अपनी पत्नी को तीन तलाक दे दिया। घरवाले चौथे की रस्म की तैयारी में लगे थे, तभी अचानक से उन्हें नवविवाहिता को तीन तलाक दिए जाने की ख़बर मिली, जिसके बाद खलबली मच गई। वधू पक्ष ने लड़के वालों के ख़िलाफ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। नाराज़ लड़की के पिता ने अपनी बेटी के साथ ससुराल वालों द्वारा इस तरह का व्यवहार किए जाने को लेकर अपनी व्यथा स्थानीय पुलिस को बताई

फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के हसनपुर टांडा की रहने वाली रुखसाना बानो का निकाह जहाँगीपुर थाना क्षेत्र में आने वाले सादीपुर गाँव निवासी शाहे आलम के साथ हुआ। निकाह की रस्म 13 जुलाई को पूरी की गई। निकाह के सबकुछ ठीक-ठाक था और लड़की की विदाई भी अच्छी तरह से संपन्न हो गई। असली नाटक इसके बाद शुरू हुआ। रुखसाना के ससुराल से उसके पिता कुतुबुद्दीन को फोन आया कि उनकी बेटी की तबियत काफ़ी ख़राब है, जिसके बाद वह भागे-भागे वहाँ पहुँचे।

जब वह अपनी बेटी के ससुराल पहुँचे तो रुखसाना अपने पिता को देखते ही रोने लगी और ससुराल वालों द्वारा दहेज़ में मोटरसाइकिल के लिए प्रताड़ित किए जाने की बात कही। रुखसाना ने अपने पिता को बताया कि उसके पति व ससुराल के अन्य परिजन दहेज के लिए उसे परेशान कर रहे हैं। जब कुतुबुद्दीन ने अपना दामाद शाहे आलम को समझाना शुरू किया तो उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई।

इसके बाद गुस्साए शाहे आलम ने अपनी बीवी रुखसाना को तीन तलाक दे दिया। ऐसा उसने तीन बार ज़ोर से ‘तलाक-तलाक-तलाक’ बोल किया। साथ ही शाहे आलम ने अपनी बीवी को तुरंत घर से निकल जाने को कहा। ख़बरों के अनुसार, रुखसाना का रो-रो कर बुरा हाल है और शादी के तुरंत बाद तलाक़ के सदमे से वह अभी तक नहीं उबरी हैं।

दैनिक जागरण के बाराबंकी संस्करण में छपी ख़बर

पुलिस ने इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। पुलिस ने बताया कि दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कर आगे की जाँच की जा रही है। सीओ अरविन्द कुमार वर्मा ने आश्वासन दिया कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कठोरतम कार्रवाई होगी।

‘कपिल सिब्बल की पत्नी महिला कर्मचारियों को “कुतिया” या “Bitch” बुलाती थीं’

बीते दिनों तिरंगा टीवी के कुछ पूर्व कर्मचारियों के नौकरी से निकाले जाने वाले दावे के बाद कपिल सिब्बल सोशल मीडिया पर सवालों के घेरे में आ गए थे। पूर्व कर्मचारियों का आरोप था कि कपिल सिब्बल के तिरंगा चैनल ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के, बिना कम्पंशेटरी सैलरी दिए नौकरी से निकाल दिया है। जिस कारण इन लोगों ने सोशल मीडिया पर कपिल सिब्बल से इंसाफ़ की गुहार भी लगाई। लेकिन लगता है कि कपिल सिब्बल के कानों में इसकी जूँ तक नहीं रेंगी। तभी तो मीडिया जगत की ‘वरिष्ठ’ पत्रकार और तिरंगा टीवी की मुख्य चेहरा रह चुकीं बरखा दत्त भी आज इन कर्मचारियों की ही भाषा बोलने लगीं।

अपने ट्विट्स के जरिए बरखा दत्त ने आज सोशल मीडिया पर कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी की हकीकत को खोल कर रख दिया। बरखा दत्त ने अपने ट्विटर पर कपिल सिब्बल को निशाना बनाते हुए लिखा कि वे और उनकी पत्नी द्वारा चलाए जा रहे तिरंगा टीवी में भयावह स्थिति है। यहाँ 200 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना 6 महीने की सैलरी दिए निकाल दिया गया है। उनका कपिल सिब्बल को लेकर कहना है कि एक व्यक्ति जो जनता के बीच में खुद को बिलकुल साफ़ दिखाता है, वो पत्रकारों के साथ घिनौना बर्ताव कर रहा है।

बरखा के ट्वीट में उन्होंने बताया कि तिरंगा टीवी में काम करने वाले अधिकतर लोग यहाँ अच्छी नौकरी के ऑफर ठुकराकर या फिर जमी-जमाई नौकरी छोड़कर आए थे, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि कपिल सिब्बल ने आश्वासन दिया था कि चैनल को कम से कम 2 साल तक चलाया जाएगा। लेकिन जब कर्मचारियों को निकाला गया तो न कपिल सिब्बल ने स्टाफ से बात की और न ही उनकी पत्नी ने। बल्कि सभी लाइव प्रोग्रामिंग को 48 घंटों के लिए रद्द कर दिया गया।

कपिल सिब्बल की पत्नी के रवैये को बरखा ने आधार बनाकर कहा कि मीट फैक्टरी चलाने वाली कपिल सिब्बल की पत्नी तिरंगा TV के ऑफिस में चिल्लाकर कहती थीं कि उन्होंने मजदूरों को एक पैसा दिए बिना फैक्टरी बंद कर दी थी तो ये पत्रकार कौन होते हैं 6 महीने की सैलरी माँगने वाले!

बरखा ने इस मामले को शर्मनाक बताते हुए लिखा है कि कपिल सिब्बल हर दिन करोड़ो रुपए कमाते हैं, लेकिन कंपनी नॉर्म के मुताबिक वो 200 कर्मचारियों को उनका 6 या फिर कम से कम 3 महीने का वेतन नहीं दे सकते हैं। वह 200 से अधिक जिंदगियों को बर्बाद कर रहे हैं।

‘वरिष्ठ’ महिला पत्रकार बरखा का कहना है कि कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी कर्मचारियों से चैनल के ठप्प हो जाने के पीछे प्रधानमंत्री मोदी को वजह बताते हैं। जबकि ये बिलकुल झूठ है, भारत सरकार ने कुछ नहीं किया है। इन पति-पत्नी ने स्टाफ़ से मिलने की कोशिश तक नहीं की और चैनल बंद करके लंदन चले गए, जिस कारण मैं इन्हें माल्या बुलाने पर मजबूर हूँ।

अपने ट्वीट में बरखा ने ये भी बताया है, “स्टाफ के अधिकारों के लिए लड़ने पर मुझे मानहानि की धमकी दी गई और कपिल सिब्बल की तुलना माल्या से करने पर मुझे ‘मेरे ईमेल वापस लेने’ का भी आदेश दिया गया है, लेकिन मैंने इससे मना कर दिया है। मै तिरंगा टीवी के पत्रकारों के समर्थन में हूँ और उन्हें कानूनी रूप से लड़ने में मदद करूँगी।”

अपने ट्वीट में बरखा ने इस बात की भी जानकारी दी है कि कपिल सिब्बल की पत्नी महिला कर्मचारियों को “कुतिया” या “बिच” बुलाती थीं। इस संबंध में उन्होंने महिला आयोग को भी टैग कर उनका ध्यान इस बात पर दिलाया है। साथ ही इतनी घिनौनी बात को साबित करने के लिए यह भी कहा है कि इस संबंध में उनके पास हस्ताक्षर किए हुए हलफनामे भी हैं।

गौरतलब है कि बरखा ने कपिल सिब्बल और उनकी पत्नी से जुड़ी हकीकतों को पर्दाफाश करने के साथ-साथ अपने ट्वीट के जरिए मीडिया से संबंधी लोगों से कपिल सिब्बल के ख़िलाफ़ आवाज उठाने की माँग की है ताकि उन कर्मचारियों को इंसाफ़ मिल सके, जिन्हें सिर्फ एक महीने की सैलरी देकर संस्थान से निकाल दिया गया।

ऐसे पागल कुत्तों के लिए क़ानून कब बनेगा: हिंदू-विरोधी TikTok वीडियो पर चैंपियन रेसलर योगेश्वर दत्त को आया गुस्सा

2012 के लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक, 2014 में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में गोल्ड पदक जीत कर अपनी उपलब्धि के जरिए कई बार देश का नाम रौशन करने वाले रेसलर योगेश्वर दत्त ने वायरल हो रहे एक टिक-टॉक वीडियो पर ट्वीट किया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “ऐसे पागल कुत्तों के लिए क़ानून कब बनेगा अगर अभी इनका अच्छे से इलाज नहीं हुआ तो आने वाले कुछ सालों में देश के हालात बहुत बिगड़ने वाले हैं। समय रहते हालात को ठीक करना बहुत ज़रूरी है।”

कृपया ध्यान दें: नीचे के वीडियो में गालियाँ हैं, बहुत गंदी गालियाँ हैं। भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

दरअसल, योगेश्वर दत्त ने मधुपूर्णिमा किश्वर के द्वारा ट्वीट किए गए एक वीडियो पर ये लिखा है। इस वीडियो में दो लड़के खुद को तबरेज अंसारी का ‘भाई’ और समर्थक बताते हुए हिंदुओं को गालियाँ दे रहे हैं। ये गालियाँ इतनी गंदी और भद्दी हैं कि उसे लिखा जाना संभव नहीं और शायद उचित भी नहीं है। गंदी-गंदी गालियों के साथ वो हिंदुओं को धमकी देते हुए कहते हैं, “भले ही सरकार तुम्हारी है, लेकिन हुकूमत हमारा चलता है। हमारी वजह से तुम्हारा हिंदुस्तान बसा हुआ है। तुम कितना भी कुछ कर लो, पलड़ा हम मुस्लिमों का ही भारी है और अगर हम अपने पर आ गए, तो तुम्हारे घर के बच्चों को भी नहीं छोड़ेंगे।”

योगेश्वर दत्त जैसे महान और सम्मानित खिलाड़ी के द्वारा किसी के लिए ‘पागल कुत्ता’ लिखना अजीब लगता है और उन्हें ये शोभा भी नहीं देता है। हालाँकि, इस बात की समझ उन्हें भी है, मगर इतना सम्मानित इंसान अगर इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है तो निश्चित ही इसके पीछे बड़ी वजह है। वीडियो को देखने के बाद यह समझना आसान है कि कोई क्यों इतने गुस्से में इस तरह की भाषा लिखने को मजबूर हुआ! उनके ट्वीट के शब्दों से साफ जाहिर हो रहा है कि उनके भीतर इन जैसे अराजक तत्वों को लेकर इतना ज्यादा गुस्सा और आक्रोश भरा हुआ है कि वो खुद को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने के लिए रोक नहीं सके।

मधुपूर्णिमा किश्वर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को टैग करते हुए ये वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा है कि  इस तरह की घटिया मानसिकता भारत में मदरसा में प्रशिक्षित किए गए समुदाय विशेष के बीच आम बात है। किश्वर का कहना है कि लड़कों ने जो कुछ भी कहा है, वो सीधे सीधे भाजपा और आरएसएस के नेताओं को संबोधित किया गया है। मजहब विशेष के इन दो लड़कों का मानना है कि उनका जन्म हिंदुओं पर शासन करने के लिए ही हुआ है। किश्वर ने इस वीडियो की तरफ प्रधानमंत्री का ध्यान दिलाने की कोशिश की, ताकि वो इस पर संज्ञान ले सकें।