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#MeToo में फँसा कपिल सिब्बल का तिरंगा टीवी, सीनियर एडिटर पर अभद्र संदेश भेजने का आरोप

कपिल सिब्बल के तिरंगा टीवी से जुड़े विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं। बरखा दत्त के उनकी पत्नी पर गाली-गलौज का आरोप लगाने और पत्रकारों को आनन-फानन में निकाले जाने की खबरों के बीच उनके चैनल के एक सीनियर प्रोड्यूसर पर एक महिला जर्नलिस्ट ने अभद्र संदेश वॉट्सऍप पर भेजने का आरोप लगाया है।

ट्विटर पर अपलोड किए स्क्रीनशॉट

हिमांशी गुप्ता नामक लड़की के अकाउंट से अपलोड स्क्रीनशॉट्स में सुरेश कुमार पर अश्लील संदेश भेजने और यौन प्रताड़ना करने का आरोप लगाया गया है। हिमांशी के मुताबिक, सुरेश कुमार तिरंगा टीवी में सीनियर प्रोड्यूसर हैं। हिमांशी का यह भी कहना है कि वह उन्हें लगातार फोन कर प्रताड़ित कर रहे हैं।

हिमांशी गुप्ता ने आरोपी की लिंक्डइन प्रोफाइल और तस्वीर भी साथ में पोस्ट की है।

इन चैटों से यह भी साफ है कि हिमांशी संदेशों को अनुचित बताते हुए सुरेश से ऐसा न करने का आग्रह करती हैं। उसके बाद, हिमांशी के मुताबिक, वह शुरू में तो रुक गए लेकिन बाद में फिर संदेश भेजना शुरू कर दिया।

ऋचा भारती को नहीं बाँटनी होगी कुरान की प्रतियाँ, राँची कोर्ट ने वापस लिया फैसला

राँची की अदालत ने ऋचा भारती वाले मामले में दिया गया ‘कुरान बाँटने’ वाला आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने यह निर्णय इस केस की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन अधिकारी के निवेदन पर लिया। बता दें कि सोशल मीडिया पर ऋचा भारती द्वारा की गई ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ को लेकर राँची की अदालत ने उन्हें अजीबोगरीब शर्त लगा कर जमानत दी थी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा था कि ऋचा को 15 दिनों के भीतर कुरान शरीफ की पाँच प्रतियाँ बाँटनी होंगी।

राँची अदालत का नया आदेश, वापस लिया पुराना आदेश

ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा था कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है? अब राँची की अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया है।

राँची के वकीलों ने भी इस निर्णय का विरोध किया। देश के कई अन्य वकीलों ने भी ऋचा को मदद की पेशकश की थी। उनके घर के बाहर हिन्दू संगठनों नेताओं की लाइन लगी रही व कई लोगों ने ऋचा के पिता को फोन कर अपना समर्तहन जताया। अब तमाम विरोधों के बाद राँची की अदालत ने अपना निर्णय वापस ले लिया है।

देश की इंच-इंच ज़मीन से घुसपैठियों को निकाल बाहर करेंगे: अमित शाह का जावेद अली को जवाब

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि सभी घुसपैठियों और अवैध अप्रवासियों की पहचान कर उन्हें देश से निकाला जाएगा। सपा संसद जावेद अली ख़ान के सवाल का जवाब देते हुए शाह ने ये बात कही।

अली ने पूछा था कि क्या एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है? राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा:

“एनआरसी अभी जो असम के अंदर है, वो असम अकॉर्ड का ही एक भाग है। अगर सबने राष्ट्रपति महोदय का भाषण सुना होगा या भाजपा का घोषणा-पत्र पढ़ा होगा, उन्हें पता होना चाहिए कि हम देश के एक-एक इंच ज़मीन से घुसपैठियों को चिह्नित कर अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार निर्वासित करने वाले हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को घुसपैठियों के प्रति सख्त रुख के कारण विरोधी अक्सर निशाने पर लेते रहे हैं। सरकार ने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को कहा था कि घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए वह बहुआयामी तरीकों पर काम कर रही है। सीमा पर फेंसिंग कराने, फ्लड लाइट्स लगवाने, सीमा पर अच्छी सड़कें बनवाने और आउटपोस्ट्स स्थापित करने सम्बन्धी कई निर्णय लिए गए हैं।

गृह मंत्रालय ने बताया कि सीमा की सुरक्षा करने वाले फोर्सेज को नियमित चेकिंग करने, चेकपोस्ट लगा कर जायजा लेने और गश्ती में तेज़ी लाने को कहा गया है, ताकि घुसपैठियों को दाखिल होने से रोका जा सके। भारतीय सीमा पर पहाड़ और नदियाँ होने के कारण घुसपैठिए इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हैं और सुरक्षा बलों को चकमा देने में कामयाब होते हैं।

RSS और उससे जुड़े 18 संगठनों पर नीतीश की नजर, पदाधिकारियों की कुंडली तैयार कर रही पुलिस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों पर नीतीश कुमार की अगुआई वाली बिहार सरकार ने नजर गड़ा रखी है। इन संगठनों के पदाधिकारियों की कुंडली तैयार करने का काम पुलिस को दिया गया था। बीते साल जारी की गई एक चिट्ठी के अब सार्वजनिक होने से मामला सामने आया है।

पुलिस अधिकारियों को भेजी गई इस चिट्ठी में आरएसएस और उससे जुड़े 18 अन्य संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में जानकारियाँ माँगी गई है। पटना विशेष शाखा के एसपी ने सभी डीएसपी को यह पत्र भेजते हुए जानकारियाँ जुटाने को कहा था।

पत्र में संघ और उससे सम्बद्ध 18 अन्य संगठनों के सभी पदाधिकारियों के नाम, पता, फोन नंबर और व्यवसाय से सम्बंधित जानकारियाँ जुटा कर भेजने को कहा गया है। हालाँकि, नीतीश सरकार आरएसएस, बजरंग दल, हिन्दू युवा वाहिनी, दुर्गा वाहिनी और हिन्दू महासभा सहित इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में सारे डिटेल्स क्यों निकलवा रही है, इस बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।

28 मई 2019 को भेजी गई इस चिट्ठी में सारी जानकारियाँ पुलिस उपाधीक्षकों को एक सप्ताह के अंदर भेजने को कहा गया है। कहा जा रहा है कि स्पेशल ब्रांच गुप्त रूप से सीधा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सारे विवरण समय-समय पर देता है, ऐसे में संभव है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ही लिया गया हो। वैसे भी अभी बिहार गठबंधन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। वांछित भागीदारी नहीं मिलने पर जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुई थी। बाद में जब नीतीश ने बिहार में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया तो उसमे भाजपा को जगह नहीं दी।

2016 में ‘संघ मुक्त भारत’ की बात कर चुके नीतीश कुमार के इस क़दम को लेकर भी भाजपा नेताओं की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। इंसेफ्लाइटिस, गर्मी और बाढ़ के कारण इस साल सैकड़ों मौतों का गवाह बन चुके बिहार में नीतीश के इस ‘ऑपरेशन संघ परिवार’ के पीछे क्या कारण हैं, यह तो वक़्त ही बताएगा।

‘मंदिर तोड़ने वालों को वेद बॉंटने और कावड़ लाने का आदेश सुनाओ’

ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत देने का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली साध्वी प्राची ने कहा है कि इस फैसले से ऐसा लगता है जैसे फतवा जारी किया गया हो।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि यदि जज ऋचा भारती को कुरान बाँटने का फैसला सुना सकते हैं तो जिन लोगों ने दिल्ली समेत कई राज्यों में मंदिर तोड़ने का काम किया है, उन्हें राम नाम का पटका गले में डाल कर कावड़ लाने का आदेश भी सुनाया जाए।

उन्होंने कहा कि ऋचा भारती के मामले में जैसा आदेश दिया गया उससे लगता है कि यह फैसला हिन्दुस्तान में नहीं बल्कि सीरिया में सुनाया गया हो। ऐसा लगता है कि हिन्दुस्तान में देश विरोधी गैंग सक्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शांति चाहिए और शांति के लिए इस तरह के फैसले का हवाला दिया जा रहा हो तो जज को कुरान के बजाए वेद बॉंटने का आदेश देना चाहिए था।

कांवड़ लाने पर वाले समुदाय विशेष की आस्था पर सवाल उठाते हुए साध्वी ने कहा कि यह महज दिखावा होता है। यदि जज किसी समुदाय विशेष को कांवड़ लाने का आदेश दे तो वह इसे कभी नहीं मानेंगे। उनके फैसले को साजिश करार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर मंगलवार (जुलाई 17, 2019) को राँची की एक अदालत ने ग्रेजुएशन की छात्रा ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत दी थी। ऋचा ने इस फैसले को मानने से इनकार किया है। इसके बाद से सोशल मीडिया में इस मसले पर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग जहॉं ऋचा के स्टैंड की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग जज के फैसले का बचाव।

रामायण पढ़ने पर जाकिर और समीर ने दिलशेर को पीटा, दोनों को मिली बिना शर्त जमानत

आपको याद होगा कि अलीगढ़ के शाहजमल क्षेत्र से मुस्लिम व्यक्ति के साथ मार-पिटाई का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। खबर के अनुसार, यहाँ 55 साल के मुस्लिम व्यक्ति को उसके समुदाय के कुछ युवकों ने घर में घुसकर सिर्फ़ इसलिए पीटा था क्योंकि वह अपने घर में बैठकर हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक ‘रामायण’ और ‘गीता’ पढ़ रहा था। ताज़ा सूचना के अनुसार, दोनों ही आरोपितों को अदालत द्वारा बिना शर्त जमानत दे दी गई है।

इस घटना के बारे में स्थानीय पुलिस का कहना था कि दिलशेर नाम का मुस्लिम व्यक्ति एक फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। गुरुवार (जुलाई 4, 2019) की सुबह 9 बजे वह अपने काम से लौटने के बाद घर पर बैठकर गीता पढ़ रहा था कि तभी समीर, जाकिर और कुछ अन्य युवक घर में घुसे और दिलशेर से मारपीट करने लगे। इसके बाद उन युवकों ने दिलशेर से ‘गीता’ और ‘रामायण’ छीनी और अपने साथ ले गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये बातें भी पता चलीं कि समीर और जाकिर ने धार्मिक ग्रंथों को फाड़ने की भी कोशिश की। दिलशेर ने बमुश्किल उन लोगों से अपनी और परिवार की जान बचाई थी। कट्टरपंथी हमलावर जाते-जाते आगे से गीता-रामायण न पढ़ने की चेतावनी देते हुए, जान से मारने की धमकी देकर भी गए थे।

दिलशेर के मुताबिक वह इन हिन्दू धर्म ग्रंथों को पिछले 38 साल से पढ़ रहें है। वह कहते हैं, “मैं एक मुस्लिम हूँ लेकिन मेरा मजहब मुझे दूसरे धर्मों की कोई और पाक किताब पढ़ने से नहीं रोकता।“

एसपी सिटी अभिषेक ने आश्वासन दिया था कि मामले की जाँच चल रही है और आरोपितों के ख़िलाफ़ जल्द ही कार्रवाई होगी। इस मामले में आरोपित जाकिर, समीर समेत अज्ञात युवकों के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 298 (धार्मिक भावनाएँ आहत करना), 323 (मार-पीट और चोट पहुँचाना), 452 (गलत इरादों से घर में घुसपैठ), 504 (शांतिभंग की कोशिश) और 506 (आपराधिक कृत्य) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था।

लड़कियॉं मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेंगी तो लड़के खुद सुधर जाएँगे: कॉन्ग्रेस विधायक

गुजरात में ठाकोर समुदाय के एक तुगलकी फरमान का कॉन्ग्रेस विधायक जेनीबेन ठाकोर ने समर्थन किया है। इस फरमान के मुताबिक अविवाहित लड़कियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर उनके मॉं-बाप पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। जेनीबेन ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि इस पाबंदी से लड़के अपने-आप सुधर जाएँगे। उन्होंने अंतरजातीय विवाह पर रोक का भी समर्थन किया है।

क्षत्रिय ठाकोर समुदाय ने बनासकांठा जिले के जिगोल गॉंव में 14 जुलाई को हुई बैठक में यह फरमान जारी किया था। बैठक में तय किया गया कि इस फैसले को नहीं मानना अपराध होगा और ऐसा करने वाली लड़कियों के मॉं-बाप पर जुर्माना लगाया जाएगा।

हालॉंकि बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव में कानूनी पचड़े से बचने के लिए ‘अंतरजातीय विवाह’ को लेकर बेहद सरल शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कहा गया है,“ जो लड़की समुदाय को नीचा दिखाएगी,उसकी जिम्मेदारी उसके परिवार और माता-पिता की होगी। उन पर 1.5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।”

जेनीबेन ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि लड़कियॉं अपने मॉं-बाप के साथ रहती हैं, इसलिए आसानी से उन पर पाबंदी लगाई जा सकती है।

वैसे, यह पहला मौका नहीं जब जेनीबेन ने विवादित बयान दिया है। पिछले साल किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने उनकी दुर्दशा के लिए भाजपा नेताओं की हत्या की बात कही थी।

कुरान बाँटने वाला आदेश सही, ऋचा को इस्लाम समझने का मौक़ा मिलेगा: एडवोकेट जनरल, झारखण्ड

सोशल मीडिया पर ऋचा भारती द्वारा की गई ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ को लेकर राँची की अदालत ने उन्हें अजीबोगरीब शर्त लगा कर जमानत दी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि ऋचा को 15 दिनों के भीतर कुरानशरीफ की पाँच प्रतियाँ बाँटनी होंगी। ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है?

अब झारखण्ड के एडवोकेट जनरल ने राँची अदालत के जज मनीष कुमार सिंह द्वारा सुनाए गए निर्णय का स्वागत किया है। एडवोकेट जनरल अजित कुमार ने कहा कि अदालत ने जो निर्णय दिया है और जो भी लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें इस आदेश के पीछे का औचित्य समझने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक समरसता को बनाए रखना लोगों की जिम्मेदारी है, इसीलिए कोर्ट का कुरान बाँटने वाला आदेश बिलकुल सही है। एडवोकेट जनरल अजीत कुमार ने कहा कि अदालत के इस आदेश के बाद ऋचा को इस्लाम के बारे में बहुत कुछ समझने को मिलेगा।

अजीत कुमार ने कहा कि इससे ऋचा को अच्छा सबक सीखने को मिलेगा और वह भविष्य में कभी आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करेंगी। उधर ऋचा हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं और हिन्दू संगठनों के नेता लगातार उनके घर पहुँच रहे हैं। ऋचा का कहना है कि उन्होंने तो कोई टिप्पणी भी नहीं की थी बल्कि किसी और का पोस्ट शेयर किया था। ऋचा की दलील है कि वह पोस्ट रोहिंग्या को लेकर था ण कि भारत में रह रहे समुदाय विशेष को लेकर।

टाइम्स नाउ से बात करते हुए एडवोकेट जनरल ने कहा कि अदालत का निर्णय भारतीय क़ानून के मुताबिक है। उधर राँची के कई वकील ने भी जस्टिस मनीष कुमार सिंह के इस निर्णय के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। राँची विमंस कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा ऋचा को पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी का भी साथ मिला है।

उत्तराखंड के 3 युवकों पर गुरुग्राम में ‘जानलेवा’ हमला: 2 की मौत, एक की हालत गंभीर

नौकरी के लिए उत्तराखंड से गुरुग्राम आए 3 लड़कों के साथ गंभीर मारपीट की घटना सामने आई है। इस कथित जानलेवा हमले में 2 युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य एक युवक गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है।

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले से तीन लड़के दिल्ली में रोजगार के उद्देश्य से आए थे। वो एक होटल में काम भी कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, 14 जुलाई की रात उन पर जानलेवा हमला हुआ है। इस हमले में 2 युवकों की मौत हो गई और एक युवक गंभीर रूप से घायल है।

इस प्रकरण पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से बातचीत करते हुए मामले की जाँच करने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।

सोशल मीडिया पर ये खबर तेजी से फैल रही है और बताया जा रहा है कि घटना के बाद से गुरुग्राम के उद्योग विहार फेज-1, डुंडाहेड़ा थाने में उत्तराखंड के कई लोग मौजूद हैं। हँगामा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। लोगों का आरोप है कि तीनों लड़कों पर जानलेवा हमला किया गया है और पुलिस इस मामले को एक्सीडेंट का केस बताकर टालने का प्रयास कर रही है।

कथित हमले को लेकर मृतक युवकों के गाँव में शोक व्याप्त है। गुरुग्राम पुलिस के मुताबिक, पौड़ी गढ़वाल के कुठ गाँव निवासी रमेश सिंह (23 वर्ष), कठूड़ गाँव निवासी वीर सिंह (22 वर्ष) और सलोन गाँव निवासी नरेंद्र सिंह गुरुग्राम में एमजीएफ मॉल स्थित एंपायर क्लब में बतौर कुक की नौकरी करते थे। सोमवार सुबह तीनों युवक सरहौल बॉर्डर के पास से गुजर रहे थे, तभी किसी तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। दुर्घटना में रमेश सिंह और वीर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई जबकि नरेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। हालाँकि, मृतकों के परिजनों का कहना है कि पुलिस इसे सड़क हादसे का नाम देकर टालने का प्रयास कर रही है।

वहीं, उत्तराखंड के समाजसेवी रोशन रतूड़ी का कहना है, “होटल में काम करने वाले तीनों लड़के 14 जुलाई रात को काम ख़त्म करने के बाद अपने कमरे पर जा रहे थे। तभी उन पर अचानक हमला किया गया, जिसमें से दो उतराखंडी भाईयों की दर्दनाक मौत हो गई है, और एक भाई अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। तीनों लड़के पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हैं।”

“हाफिज सईद की गिरफ्तारी पर दुनिया को मूर्ख बना रहा है पाकिस्तान”

पाकिस्तान ने 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 26/11 मामले के पब्लिक प्रोसिक्यूटर उज्जवल निकम ने इसे पाकिस्तान की नौटंकी करार देते हुए कहा है कि हाफिज की गिरफ्तारी पर वह दुनिया को मूर्ख बना रहा है।

लश्कर-ए-तय्यबा का संस्थापक हाफिज जमात-उद-दावा का भी सरगना है। वह फलाह-ए-इंसानियत नाम से भी एक संगठन चलाता है। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।

निकम का कहना है, “अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान दुनिया को धोखा दे रहा है। देखना होगा पाकिस्तान हाफिज के खिलाफ कोर्ट में कितना सबूत करता है और उसे कितनी सजा होगी। नहीं तो मैं इसे एक ड्रामा ही कहूंगा।”

पीटीआई ने पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि हाफिज को बुधवार को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के आतंकरोधी विभाग ने गिरफ्तार किया। एक आतंकरोधी कोर्ट के सामने पेश होने के लिए लाहौर से गुजरांवाला जाते वक्त उसकी गिरफ्तारी हुई। न्यायिक हिरासत में उसे कड़ी सुरक्षा वाले कोट लखपत जेल में रखा गया है।

हाफिज और उसके 12 साथियों पर इसी महीने आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने को लेकर मामला दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े करीब 23 मामले दर्ज हैं। हालॉंकि पाकिस्तान के अतीत को देखते हुए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान ने पहले भी हाफिज को गिरफ्तार किया है। लेकिन, कभी अदालत में उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए। नतीजतन, उसे हर बार जमानत मिल जाती है।

अमेरिका के वैश्विक आतंकी सूची में शामिल हाफिज पर एक करोड़ डॉलर का इनाम है। अमेरिका ने उसे 2012 में इस सूची में शामिल किया था। माना जा रहा है कि उसके खिलाफ ताजा कार्रवाई पाकिस्तान ने अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए की है। पाकिस्तान पर फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स से ब्लैक लिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है।