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₹50 हजार-1 लाख में बेचे गए राहुल गाँधी की प्रेस मीट के पास: कॉन्ग्रेस नेता ने लगाया गंभीर आरोप

कॉन्ग्रेस पार्टी से निलंबित नेता कराते आर त्यागराजन ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। त्यागराजन ने तमिलनाडु कॉन्ग्रेस कमिटी के मीडिया कोऑर्डिनेटर गोपन पर राहुल गाँधी के प्रेस मीट को 50,000 रुपए से 1,00,000 रुपए में बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ऐसा कैसे हो सकता है? ये सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक है और वो इसकी शिकायत पुलिस आयुक्त से करेंगे।

त्यागराजन को पार्टी में पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम का करीबी माना जाता था। उन्हें गुरुवार (जून 27, 2019) को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। पार्टी से निष्कासन पर कराते ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला। उन्होंने बताया कि आंतरिक बैठक में 7 लोग थे, सभी ने डीएमके के खिलाफ अपनी अस्वीकृति व्यक्त की, लेकिन केवल उन्हें बलि का बकरा बनाया गया और उनके शब्दों को मीडिया में प्रकाशित किया गया। साथ ही त्यागराजन ने ये भी आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी नोटिस के पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया।

कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने त्यागराजन के पार्टी से निष्कासन पर कहा कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस समिति ने तमिलनाडु कॉन्ग्रेस के महासचिव द्वारा त्यागराजन के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने और अनुशासन भंग करने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके आधार पर उन्हें तुरंत प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया गया। आंतरिक बैठक में कराते त्यागराजन ने प्रस्ताव दिया था कि कॉग्रेस पार्टी को अपने गठबंधन सहयोगी डीएमके के बिना आगामी स्थानीय निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ना चाहिए।

‘सासंद नुसरत सिंदूर-मंगलसूत्र पहने तो हराम, लेकिन हिन्दू महिलाओं का बुर्का उचित कैसे’

तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद नुसरत जहां रूही के हिंदू से विवाह करने पर देवबंद को ऐतराज है। यह कहते हुए कि मुस्लिम लड़कियों को केवल मुस्लिम लड़कों से ही शादी करनी चाहिए, देवबंद के मौलवियों ने नवनिर्वाचित सांसद नुसरत जहां के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी कर दिया है। 

मौलवी मुफ़्ती असद कासमी ने कहा, “जाँच के बाद, हमें पता चला कि उसने जैन धर्म में शादी की है, इस्लाम कहता है कि एक मुस्लिम केवल एक मुस्लिम से शादी कर सकता है। दूसरा, मैं यह कहना चाहता हूँ कि नुसरत जहां एक एक्टर हैं और ये सभी एक्टर धर्म की परवाह नहीं करते। वे वही करते हैं जो उन्हें करने का मन करता है। जैसा कि उन्होंने संसद में दिखा दिया।”

कासमी ने आगे कहा, “वो सिंदूर और मंगलसूत्र के साथ संसद में आईं, इसलिए इस बारे में बात करना समय की बर्बादी है। हम उनके जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। मैंने बस मीडिया की मदद से उन्हें बताया कि शरीयत क्या कहती है।”

देवबंद के इस फ़तवे के ख़िलाफ़ बीजेपी नेता साध्वी प्राची नुसरत के बचाव में आई हैं। उन्होंने मौलवी से कहा:

”अगर कोई मुस्लिम महिला हिंदू से शादी करती है और बिंदी, बिछिया, मंगलसूत्र पहनती है, तो मुस्लिम मौलवी उसे हराम कहते हैं। मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आता है, लेकिन कई मुस्लिम पुरुष हमारी हिंदू बेटियों को लव जिहाद के नाम पर फँसाते हैं और उनसे बुर्का पहनने को कहते हैं, तो यह हराम नहीं है। यह उनके लिए उचित है।”

बीजेपी नेता की टिप्पणी पर मुस्लिम मौलवियों ने उन्हें बेलगाम करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाएँ नियंत्रण (बेलागम) में नहीं रहतीं, वे देश में आग लगाने की कोशिश करती हैं। वे इस तरह के बयान से सिर्फ़ ज़हर उगलती हैं। वे इस राष्ट्र को विभाजित करना चाहती हैं। ऐसी महिलाओं को किसी भी धर्म का ज्ञान नहीं होता। साध्वी प्राची को सख़्त हिदायत देते हुए मौलवी ने कहा कि इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो प्रेम और शांति का संदेश देता है। जो कुछ नहीं जानता, उसे पहले उलेमा को पढ़ना चाहिए और फिर उसके बारे में बोलना चाहिए।

सांसद नुसरत जहां 25 जून को पहली बार संसद पहुँची थीं। उस दौरान उन्होंने सफेद और बैंगनी रंग की साड़ी पहनी थी, हाथों में मेहंदी, माँग में सिंदूर और माथे पर बिंदी थी। उन्होंने 19 जून को तुर्की के बोडरम शहर में निखिल जैन से शादी की। नुसरत जहां पश्चिम बंगाल के बसीरहाट से तृणमूल कॉन्ग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई हैं।

‘370 और 35-A पर मतदान करा लो, गद्दारों की पहचान हो जाएगी’

यूथ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और बेअंत सिंह की पंजाब सरकार में मंत्री रहे मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने मोदी सरकार से माँग की है कि चालू संसदीय सत्र में संविधान के अनुच्छेदों 370 और 35-A पर मतदान करा लिया जाए। इससे देश के गद्दारों की पहचान हो जाएगी। पाकिस्तान में फिर सर उठा रहे खालिस्तान मूवमेंट को लेकर उन्होंने कहा कि यह विदेश में बैठे मुट्ठी भर लोगों की साजिश है। बिट्टा आतंक-विरोधी संगठन ऑल इंडिया एंटी-टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष हैं।

‘कश्मीर को स्वर्ग बनाना है तो समूचे हिन्दुस्तानियों को वहाँ जमीन खरीदनी होगी’

बिट्टा ने 370 और 35-A के खात्मे की माँग करते हुए कहा कि जब संसद इन्हें रद्द कर दे तो उसके बाद कश्मीर घाटी को दोबारा जन्नत बनाने के लिए समूचे देश के लोगों को वहाँ जमीन खरीदनी चाहिए। बिट्टा ने कहा, “संसद का सत्र चल रहा है और सरकार को यह जानने के लिए मतदान कराना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को कौन-कौन रद्द कराना चाहते हैं। इससे राष्ट्र को राष्ट्रवादियों और गद्दारों के बारे में जानकारी मिलेगी।”

पीडीपी अध्यक्षा और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती पर निशाना साधते हुए बिट्टा ने कहा, “कुछ समय पहले एक ‘बड़ी’ कश्मीरी नेता ने कहा था कि अगर 370 को हटा दिया गया तो कश्मीर में भारतीय तिरंगे को उठाने वाला एक कंधा तक नहीं मिलेगा। एक बार कश्मीर को (370/35-A के प्रावधानों से) ‘आज़ादी’ मिल जाए तो हम घाटी में तिरंगा फहराएँगे। मैं अपनी (पंजाब में) ज़मीन बेच दूँगा और कश्मीर में बस जाऊँगा।”

बिट्टा ने कश्मीर में दहशतगर्दी के जल्दी ही खत्म हो जाने का भी विश्वास जताया। “पिछले चार सालों में पठानकोट पर वायु सेना के बेस पर हमले के अलावा देश में कोई दहशतगर्दी की घटना नहीं हुई है। कश्मीर के ज़मीनी हालत देख कर मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि कश्मीर से आतंकवाद एक वर्ष के भीतर ख़त्म हो जाएगा।”

‘पार्टियाँ विचारधारा के परे जाकर साथ आईं’

पंजाब के खालिस्तानी आतंकवाद की वापसी पर बिट्टा का कहना है कि यह केवल विदेश में बैठे मुट्ठी-भर लोगों की साजिश है, जिसे पंजाब के लोग ही कभी परवान नहीं चढ़ने देंगे। इसमें पाकिस्तान और आईएसआई का भी उन्होंने हाथ बताया। उन्होंने कहा, “हम कटिबद्ध हैं पाकिस्तान और आईएसआई के इस मामले में किसी भी प्रयास को निष्फल करने के लिए।” उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में शांति इसलिए है कि अपनी विचारधाराओं के विरोधों को परे रखकर राजनीतिक दल दहशतगर्दी को हराने के लिए साथ आए थे।

चंद्रबाबू नायडू को अब सिर्फ 2 हवलदार से ही चलाना होगा काम, 2019 में PM बनने का देखा था सपना

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। पहले तो मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने उनके आलीशान बंगले को तोड़ने का आदेश दिया और अब उनके परिवार की सुरक्षा कम करने का फैसला लिया है। जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार (जून 28, 2019) को नायडू की सुरक्षा में कटौती की है।

राज्य सरकार ने नायडू की सुरक्षा में तैनात मौजूदा दो मुख्य सुरक्षा अधिकारियों को हटा दिया है और साथ ही दो सशस्त्र रिजर्व निरीक्षकों के नेतृत्व में 15 सदस्यीय विशेष पुलिस दल को भी हटा दिया गया है। खबर के मुताबिक, नायडू को अब 4 कांस्टेबलों द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। हर शिफ्ट में 2 कांस्टेबल होंगे। हालाँकि, नायडू को अक्टूबर 2003 में तिरुमाला की तलहटी अलीपुरी में माओवादी हमले के बाद केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) कमांडो समेत जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा जारी रहेगी।

इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा अमरावती में नायडू के आवास और चित्तूर जिले में उनके मूल स्थान नरवरिपल्ले में सुरक्षा वापस ले ली गई है। उनके परिवार के सदस्यों के लिए सुरक्षा भी हाल ही में वापस ले लिया गया था और उनके बेटे नारा लोकेश को सुरक्षा के लिए सिर्फ दो कांस्टेबल दिए गए हैं। राज्य के गृह मंत्री मेकाथोती सुचरिता ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि इस तरह के फैसले में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। नायडू की सुरक्षा कम करने का निर्णय राज्य पुलिस विभाग की सुरक्षा समीक्षा समिति द्वारा लिया गया है।

टीडीपी के एक नेता ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि राज्य सरकार ने नायडू की सुरक्षा में कमी की है। उन्होंने कहा कि जब वो 2004 और 2014 के बीच विपक्ष की भूमिका में थे, तब भी तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने उन्हें एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एक पुलिस उपाधीक्षक और तीन आरक्षी निरीक्षकों के साथ सुरक्षा प्रदान की थी।

तेलुगु देशम पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य यनामला रामकृष्णुडु ने आरोप लगाया कि नायडू की सुरक्षा में कटौती करना स्पष्ट रुप से जगन की प्रतिशोध वाली राजनीति को दर्शाता है। रामकृष्णुडु ने कहा कि उनके पास बीज की कमी और सूखे की स्थिति की समीक्षा करने का कोई समय नहीं है। वो लोगों की समस्याओं पर फोकस करने की बजाए नायडू को अपमानित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

UP में 17 OBC जातियाँ SC में शामिल: आरक्षण देकर योगी सरकार ने बिगाड़ा सपा-बसपा का गणित

योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की 17 जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने का आधिकारिक आदेश दे दिया है। इस तरह से इन जातियों को आरक्षण देकर यूपी में सपा-बसपा के गणित को योगी आदित्यनाथ ने बिगाड़ दिया है।

बता दें कि बीते दो दशक से 17 अति पिछड़ी जातियों- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी और मछुआ को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिशें जारी थीं। सपा और बसपा सरकार में इसे चुनावी फायदे के लिए अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिश तो शुरू हुई पर उनका यह फैसला अंजाम तक नहीं पहुँचा। इनकी सरकारों में यह मुद्दा महज एक चुनावी हथकंडा बन कर रह जाता था।


यूपी की 17 जातियों के बारे में जारी शासनादेश

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि योगी सरकार हमेशा सबका साथ सबका विकास को ध्येय बना कर और हर वर्ग को साथ लेकर चल रही है। केशव प्रसाद मौर्य ने शनिवार को कहा कि 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने का फैसला सिर्फ बीजेपी ही कर सकती है। यह अखिलेश और मायावती के बस की बात नहीं थी। मौर्य ने यह भी कहा कि समाज में इन वर्गों को सहायता की जरूरत थी, यह समाज में पिछड़े लोग हैं। योगी सरकार का यह कदम उन्हें आगे ले जाने की दिशा में एक बड़ा मिल का पत्थर साबित होगी।

बता दें कि यूपी में योगी सरकार के इस कदम का बड़ा असर आने वाले चुनावों में देखने को मिलेगा। यूपी में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा और 403 विधानसभाओं में से 86 सीटें रिजर्व हैं। इनमें इन जातियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। जबकि, ओबीसी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं। इसका दुष्परिणाम जातिगत राजनीति करने वाली सपा-बसपा जैसी पार्टियों को भुगतना पड़ेगा। जो अभी तक मायावती या अखिलेश से उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन बाजी योगी सरकार ने अपने नाम कर ली।

ज़ाहिर सी बात है कि ऐसे में बीजेपी को इसका राजनीतिक लाभ मिलना स्वाभाविक है। जहाँ एक तरफ महागठबंधन या सपा-बसपा के गठजोड़ के बाद जो नाटक देखने को मिला उससे भी जनता के मन में सपा-बसपा के खिलाफ अविश्वास बढ़ा है। वहीं योगी सरकार के इस फैसले के बाद जनता का विश्वास बीजेपी की तरफ और भी बढ़ेगा।

गौरतलब है कि योगी सरकार ने अपने इस फैसले के बाद सभी जिलाधिकारियों को इन जातियों के परिवारों को प्रमाण दिए जाने का आदेश जारी कर दिया है। राज्यपाल राम नाइक ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिनियम 1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग कर के इसमें संशोधन किया है।

इसके लागू होते ही ये सभी जातियाँ अब अनुसूचित जातियों को मिलने वाली सभी लाभों की हक़दार होंगी। योगी सरकार के इस कदम के बड़े दूरगामी परिणाम सामने आने वाले हैं। जहाँ इससे इन जातियों के विकास को बल मिलेगा वहीं यूपी में बीजेपी आसानी से जातिगत राजनीति में सेंध लगाकर अपने जनाधार को और मजबूत करने में कामयाब होगी।

प्रियंका ने UP की कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल, पुलिस ने 2 वर्षों में 9225 अपराधियों के आँकड़े से कराया चुप

वैसे तो प्रियंका गाँधी वाड्रा कई मुद्दों पर मौन धारण किए रहती हैं, लेकिन जब उन्हें मोदी सरकार की आलोचना करनी होती है तब वो काफ़ी कड़ा रुख़ अख़्तियार करती नज़र आती हैं। ताज़ा समाचार यह है कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ की क़ानून-व्यवस्था के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है। 

आज उन्होंने ट्विटर पर यूपी पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए क्राइम न्यूज़ का एक कोलाज शेयर किया और लिखा, “पूरे उत्तर प्रदेश में अपराधी खुलेआम मनमानी करते घूम रहे हैं। एक के बाद एक अपराधिक घटनाएँ हो रही हैं। मगर उ.प्र. भाजपा सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही।” इसके आगे उन्होंने लिखा कि क्या उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराधियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है? 

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के इस आरोप को विनम्रता से न लेते हुए, उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उन्हें जवाब दिया।

यूपी पुलिस ने जवाब में लिखा कि गम्भीर अपराधों में यूपी पुलिस द्वारा अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है। पिछले 2 वर्षों में 9225 अपराधी गिरफ़्तार हुए और 81 मारे गए हैं। रासुका में प्रभावी कार्रवाई कर लगभग 2 अरब की सम्पत्ति ज़ब्त की गई है। डकैती, हत्या, लूट एवं अपहरण जैसी घटनाओं में अप्रत्याशित कमी आई है।

पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाईयों के संदर्भ में अपने अन्य ट्वीट में यूपी पुलिस ने लिखा कि प्रभावी कार्रवाई करने के फलस्वरूप अपराधों में 20-35% की कमी आई है। सभी सनसनीखेज अपराधों का यथासम्भव 48 घंटे में ख़ुलासा हुआ है। प्रभावशाली अपराधियों के विरुद्ध भी कठोर पुलिस कार्रवाई अमल में लाकर क़ानून का राज स्थापित किया गया है।

कॉन्ग्रेसी अहमद पटेल के करीबी ने किया PNB से भी बड़ा घोटाला, बैंकों को लगाया ₹15000 करोड़ का चूना

फर्जी कंपनियाँ बनाकर बैंकों को हजारों करोड़ रुपए का चूना लगाने वाले स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी के मालिक संदेसरा ब्रदर्स को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ईडी के अनुसार, संदेसरा स्कैम पंजाब नेशनल बैंक (PNB) स्कैम से भी बड़ा है।

ईडी द्वारा समाचार एजेंसी ANI को बताया गया है कि स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी लिमिटेड और संदेसरा ग्रुप के मुख्य प्रमोटर नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दिप्ती संदेसरा ने फर्जी कंपनियाँ बनाकर कई बैंकों को करीब
₹14,500 करोड़ का चूना लगाया। जबकि हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी ने पीएनबी बैंक में ₹11,400 करोड़ का घोटाला किया था।

भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से लिया था ₹9 हजार करोड़ का कर्ज

एसबीएल और प्रमोटरों के खिलाफ CBI ने अक्टूबर 2017 में धोखाधड़ी और 5 हजार 383 करोड़ के बैंक फ्रॉड का केस दर्ज किया था। इसके आधार पर ईडी ने भी मामला दर्ज किया था। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक ईडी की जाँच में पता चला कि संदेसरा ग्रुप की विदेशों में स्थित कंपनियों ने भी भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से 9 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

जाँच में यह भी पता चला है कि कर्ज की रकम तय उद्देश्य के बजाय दूसरे कामों में लगाई गई। कई भारतीय और विदेशी फर्मों में राशि का हेर-फेर किया गया। प्रमोटर्स ने भारतीय बैंकों के कर्ज की रकम नाईजीरिया के तेल कारोबार में लगाई और निजी इस्तेमाल भी किया।

गत बुधवार को ईडी ने संदेसरा ग्रुप की9778 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच की थीं। इनमें नाइजीरिया में ऑयल रिग्स, लंदन में एक जेट और आलीशान फ्लैट शामिल हैं। एसबीएल के प्रमोटर नितिन संदेसरा, चेतन संदेसरा और दीप्ति संदेसरा पहले ही विदेश भाग चुके हैं।

गाँधी परिवार के करीबी कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल के भी करीबी बताए जा रहे हैं संदेसरा ब्रदर्स

संदेसरा ब्रदर्स के कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी के राजनीतिक सलाहकार और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के करीबी होने का आरोप लगता रहा है। पटेल के बेटे फैजल पटेल और दामाद इरफान सिद्दीकी स्टर्लिंग बायोटेक में शामिल बताए जाते हैं। कंपनी का पता भी अहमद पटेल के आवास का बताया जाता है। कंपनी के सारे लेन-देन इसी पते से होते थे। ईडी ने अहमद पटेल के बेटे और दामाद को भी आरोपी बनाया था।

ईडी के सूत्रों की मानें तो संदेसरा ग्रुप में बड़ा भाई नितिन विदेश में कारोबार संभालता था, जबकि चेतन वडोदरा, मुंबई, दिल्ली और मसूरी के ऑफिस का कामकाज देखता था। कई नेताओं व आला IPS-IAS अफसरों पर धन खर्च कर और उनके सामाजिक समारोहों का खर्चा उठाकर उन्हें वह अपना चहेता बना लेता था।

कहाँ हैं संदेसरा बंधु, नहीं लगा पता

ईडी की जाँच के बाद से संदेसरा बंधु कहाँ हैं, यह पता नहीं चल सका है। ऐसे समय में जब सरकार नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटी है, संदेसरा बंधुओं का पता लगाना भी बड़ी चुनौती है।

AN-32 में मारे गए सैनिकों के पार्थिव शरीर लाने गई 12-सदस्यीय टीम खुद फँसी, राशन हो रहा खत्म

AN-32 हादसे में मारे गए सैनिकों के पार्थिव शरीर लाने गया 12-सदस्यीय बचाव दल खुद ही अपनी ज़िंदगी के लिए इस समय संघर्ष कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि वे खराब मौसम में एक पहाड़ी पर फँस गए हैं, जहाँ से उन्हें न तो वायु सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट कर सकती है और न ही वह खुद बारिश के कारण खतरनाक हो गए रास्ते पर पूरे दिन भर की जोखिम-भरी ट्रेकिंग कर के निकटतम गाँव तक पहुँच सकते हैं।

हालात ये हैं कि उनके पास राशन भी समाप्त होने वाली है और अपनी पोजीशन पर बने रहने पर उन्हें पहाड़ों की बारिश वाली ठंड, कीड़े-मकौड़ों और जहरीले साँपों का खतरा है। यह दल 3 जून को हुए AN-32 विमान हादसे में मारे गए वायु सैनिकों के पार्थिव शरीर लाने गया हुआ था।

दो शिकारी और एक पर्वतारोही हैं दल में शामिल

बचाव दल में नौ वायु सैनिकों के अलावा एक एवरेस्ट का पर्वतारोही और दो स्थानीय शिकारी भी शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार (जून 29, 2019) को बताया कि अरुणाचल प्रदेश के सियांग जनपद में 15 दिन पहले पहुँचे बचाव दल को एयरलिफ्ट करने के लिए सभी कोशिशें जारी हैं। हेलीकॉप्टरों को पास ही के आलो स्थित एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) पर लगातार स्टैंड-बाई पर रखा जा रहा है और ऑपरेशन की मॉनिटरिंग पश्चिमी सियांग से की जा रही है। दल के पास केवल एक सैटलाइट फ़ोन चालू हालत में है।

जिले के सूचना और जनसम्पर्क अधिकारी गिजुम ताली ने रक्षा मंत्रालय की बात की पुष्टि करते हुए यह भी जोड़ा है कि जो फोन चालू है, उसमें भी नेटवर्क बहुत ज्यादा नहीं आ रहा है। उन्हें नेटवर्क के लिए अधिक ऊँचे और खुले स्थान पर जाना पड़ता है, इस वजह से सम्पर्क तभी किया जा रहा है जब अति आवश्यक हो। इस समय बचाव दल परी आदि पहाड़ी की 12,000 फीट से ज्यादा की ऊँचाई की चोटी पर टेंट लगाए हुए है। बारिश की वजह से पहाड़ी से नीचे उतरना खतरनाक हो सकता है क्योंकि ज़मीन ज्यादा फिसलन भरी हो गई है। गिजुम ताली ने यह भी बताया कि उन्हें शनिवार या रविवार को मौसम में सुधार होने की उम्मीद के आशय वाली रिपोर्टें मिली हैं। मौसम साफ़ होते ही अविलम्ब बचाव-अभियान चालू हो जाएगा।

घटता राशन, करनी पड़ सकती है जानलेवा ट्रेकिंग

अधिकारी गिजुम ताली के अनुसार, हालाँकि सबसे बड़ी समस्या तेजी से घटता राशन है। 12 जून को हेलीकॉप्टर से क्रैश साइट पर उतरते समय बचाव दल के पास 15-20 दिनों का राशन था। लेकिन इस बारिश में पूर्व-निर्धारित हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्टिंग करना असम्भव है। अगर बारिश आज-कल (शनिवार-रविवार) में नहीं रुकी तो मामला बिगड़ सकता है। ताली ने बताया कि अगर बारिश नहीं रुकी और राशन खत्म हो गया और बचाव दल को कई पहाड़ों की ट्रेकिंग करते हुए नीचे निकटतम गाँव गाते तक जाने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। यह एक पूरे दिन भर का रास्ता है। ताली ने जोड़ा कि एक अच्छी बात यह है कि दल में शामिल दोनों शिकारी स्थानीय मौसम और भौगोलिक स्थिति से वाकिफ होने के अलावा दक्ष ट्रेकिंग गाइड भी हैं।

मेरठ पलायन: ‘सिर्फ प्रहलाद नगर नहीं, डर के कारण 30 कॉलनियों के हिंदू अपने मकान बेचने को मजबूर’

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मुस्लिम समुदाय की गुंडागर्दी के चलते प्रह्लाद नगर में बहुसंख्यक वर्ग के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। यहाँ से हिंदू परिवार पलायन करने को मजबूर हैं। दहशत की वजह से बहुसंख्यक समुदाय अपना मकान बेचकर वहाँ से पलायन करने को विवश हैं। यहाँ पर लगभग हर घर और दुकान के बाहर बिकाऊ होने का बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन पुलिस प्रशासन को मुस्लिमों से परेशान हिंदू परिवारों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा है। प्रशासन का कहना है कि हिंदू भय की वजह से पलायन नहीं कर रहे हैं।

मेरठ के एडीजी ने कहा कि जिला अधिकारियों ने इलाके में निरीक्षण किया है। प्रह्लाद नगर से लोगों का पलायन डर के कारण नहीं हुआ है। इलाके में ट्रैफिक, प्रदूषण और छेड़छाड़ की समस्याएँ हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ पर पुलिस-पिकेट स्थापित किया गया और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। एडीजी का कहना है कि मामले की जाँच की जा रही है। हालाँकि एडीजी साहब यह नहीं समझा पाए कि छेड़छाड़ की घटना से डर का माहौल बनता है या नहीं!

नवभारत टाइम्स द्वारा प्रकाशित की गई खबर का स्क्रीनशॉट

प्रह्लाद नगर इलाके में हिंदू परिवारों के पलायन की बात अधिकारियों द्वारा खारिज किए जाने का भाजपा नेताओं ने सख्त विरोध किया। शुक्रवार (जून 28, 2019) को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने प्रमुख सचिव गृह, एडीजी मेरठ, कमिश्नर, डीएम और एसएसपी को पत्र लिखकर उनके द्वारा किए गए दावों पर प्रश्‍नचिह्न खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक संप्रदाय विशेष के असामाजिक तत्‍वों द्वारा छेड़छाड़ और बाइक स्टंट करके खौफ का वातावरण बनाया जाता है। विरोध करने पर मारपीट होती है। वाजपेयी का आरोप है कि प्रहलाद नगर ही नहीं, मेरठ के चार थाना क्षेत्र- शहर के कोतवाली, देहलीगेट, लिसाड़ी गेट और नौचंदी थाना क्षेत्र के करीब 30 मोहल्‍लों से मुस्लिम संप्रदाय से डर कर हिंदू आबादी अपना मकान बेचकर जा चुकी है।

जानकारी के मुताबिक, मेरठ का माहौल इन दिनों ऐसा बना हुआ है कि सूरज निकलने के साथ ही मुस्लिम समुदाय के युवा बाइक पर तेज हॉर्न के साथ स्पीड से निकलते हैं और युवतियों पर कमेंट करते हैं, उनके साथ छेड़छाड़ करते हैं। ये यहाँ का दिनचर्या बन चुका है। इसी से परेशान होकर हिंदू आबादी अपने उस घर को बेचकर जाने को विवश हो गए हैं, जहाँ वो वर्षों से रह रहे थे।

दरअसल, प्रहलाद नगर कॉलोनी तीन तरफ से मुस्लिम समुदाय से घिरी हुई है। यहाँ पर देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान से 1947 से 1950 के बीच आए शरणार्थी रहते हैं। इस कॉलोनी के पीछे मोहल्ला इस्लामाबाद है, जिसकी मुख्य निकास हापुड़ रोड पर है। इन दोनों मोहल्‍लों के बीच 4 से 5 फुट की एक गली है। इसी गली से मुस्लिम समुदाय के लोग आकर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बदतमीजी करते हैं। विरोध करने पर मारपीट की जाती है और गोलियाँ भी चलाई जाती है। कॉलोनी के लोग इस विवादित गली पर गेट लगाने की माँग कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग गेट का विरोध कर रहे हैं। अब तक यहाँ से 200 हिंदू परिवारों के पलायन की खबर है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रह्लाद नगर से 125 परिवारों के पलायन की ख़बरें सामने आई थी। लोगों ने साफ-साफ कहा था कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा ऐसी परिस्थितियाँ पैदा की गईं कि वे पलायन को मजबूर हुए। मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँची। बूथ अध्यक्ष महेश मेहता ने नमो ऐप पर शिकायत की थी। जिसके बाद पीएमओ की तरफ से उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय को उचित क़दम उठाने को कहा गया।

सुषमा स्वराज ने छोड़ा सरकारी आवास, इससे पहले जेटली भी पेश कर चुके हैं नज़ीर

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को घोषणा की कि वह नई दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास 8, सफदरजंग लेन से बाहर आ गई हैं। सुषमा स्वराज ने इस बात की जानकारी भी दी कि अब वो पहले के पते या फोन नंबर पर उपलब्ध नहीं होंगी।

सुषमा स्वराज ने एक ट्वीट में कहा, “मैं अपने आधिकारिक आवास 8, सफदरजंग लेन, नई दिल्ली से बाहर आ गई हूँ। कृपया ध्यान दें कि अब मुझसे पहले के पते और फोन नंबर्स पर सम्पर्क नहीं किया जा सकेगा।”

सुषमा स्वराज ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और अपने स्वास्थ्य के कारण इस साल सरकार से बाहर होने का विकल्प चुना।

पिछले महीने पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के बाद, सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर एक भावनात्मक संदेश लिखा था, इसमें उन्होंने पाँच साल के लिए पद संभालने का अवसर देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया था।

अपने ट्वीट में, सुषमा स्वराज ने लिखा, “प्रधान मंत्री जी – आपने 5 वर्षों तक मुझे विदेश मंत्री के तौर पर देशवासियों और प्रवासी भारतीयों की सेवा करने का मौका दिया और पूरे कार्यकाल में व्यक्तिगत तौर पर भी बहुत सम्मान दिया। मैं आपके प्रति बहुत आभारी हूँ। हमारी सरकार बहुत यशस्विता से चले, प्रभु से मेरी यही प्रार्थना है।”

सुषमा स्वराज, सरकार और लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थीं। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने सरकार के शुरुआती महीनों में स्वराज को मोदी के लिए चुनौती के रूप में देखा।

हालाँकि, उन्होंने अपनी भूमिका में तालमेल बिठाया और पहली बार विदेश मंत्रालय को एक मानवीय चेहरा दिया। वो विदेश में कहीं भी फँसे किसी भी भारतीय के लिए संकटमोचक थीं। उन्होंने ज़रूरतमंदों को वीज़ा जारी करने और संकट में भारतीयों को राहत दिलाने जैसे मामूली मुद्दों को सुलझाने में भी व्यक्तिगत रुचि ली।

इससे पहले पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने भी अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया था। अपने प्राइवेट बंगले में शिफ्ट होने जा रहे अरुण जेटली ने अपने कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती की थी। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था कम कर दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपनी सरकारी गाड़ियाँ भी सरकार को वापस कर दी हैं।