Home Blog Page 591

ST समाज का ‘प्रार्थना घर’ के नाम पर चर्च का उद्धाटन, बिशप के साथ कॉन्ग्रेस MLA भी थे: हिंदू संगठनों ने किया हनुमान चालीसा पाठ तो भागे

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक चर्च का उद्धाटन कार्यक्रम हिंदू संगठनों के विरोध के बाद रद्द करना पड़ा है। कथित तौर पर जनजातीय समाज (ST) के लिए प्रार्थना घर बनाने के नाम पर चर्च का उद्घाटन किया जा रहा था। इसके अलावा राज्य के रायगढ़ में भी ईसाई धर्मांतरण को लेकर बवाल हुआ। यहाँ प्रार्थना सभा के नाम पर महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर के रतनपुर स्थित जनजातीय बहुल गाँव बंगलाभाठा में मंगलवार (6 नवंबर 2024) को प्रार्थना घर के उद्घाटन नाम पर लोगों का जमावड़ा किया गया। इसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। कार्यक्रम में बिशप डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ के सुषमा कुमार के साथ कॉन्ग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित थे।

जब हिन्दू संगठनों को चर्च के उद्धाटन की जानकारी मिली तो वे भी मौके पर पहुँच गए। उद्घाटन का विरोध करते हुए उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया। बवाल के बाद आयोजकों को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। भाजपा नेता प्रबल प्रताप जूदेव ने कॉन्ग्रेस नेता पर धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

हिंदू संगठनों के विरोध का नेतृत्व जूदेव ही कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक प्रार्थना सभा के नाम पर माता महामाई की धर्मनगरी को धर्मान्तरण नगरी बनाने पर तुले हुए हैं। उन्होंने प्रशासन पर भी जनजातीय समुदाय के धर्मान्तरण की साजिशों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की सूचना मिलते ही फ़ौरन ही मौके पर पुलिस बल पहुँचा। पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया। हालत तनावपूर्ण होता देख कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। वहीं रायगढ़ में धर्मांतरण पर हुए बवाल के बाद कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष अनिल शुक्ला ने कहा है कि राज्य में जब से बीजेपी की सत्ता आई है, धर्म परिवर्तन जैसे मामलों में इजाफा हुआ है।

माता सीता, द्रौपदी, राजा प्रियवद… छठी मैया की उपासना की पौराणिक कथाओं के बारे में जानिए: जीवन में संयम, शुद्धता और आत्म-नियंत्रण की भावना भी जागृत करता है लोकपर्व

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में एक ऐसा पर्व है जो न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक एकता और सामाजिक समरसता का भी अद्वितीय उदाहरण है। यह पर्व है – छठ पूजा। भोजपुरी क्षेत्र में इस पर्व की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसे ‘लोक आस्था का पर्व’ कहा जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मईया की आराधना के रूप में मनाया जाता है और 15 करोड़ से अधिक विश्व भर में फैले मैथली, मगध, बंगाली, भोजपुरी, भारतीय प्रवासी और नेपाली समाज के लिए यह आस्था का मुख्य केंद्र है।

छठ पर्व, जिसे छठी पूजा या षष्ठी पूजा भी कहा जाता है, कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू पर्व है। सूर्य की आराधना के इस अनोखे लोकपर्व का विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में व्यापक आयोजन होता है। इनके अलावा भारत के विभिन्न क्षेत्रों में और नेपाल, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, साउथ अफ़्रीका और फ़िजी जैसे देशों में भी मनाया जाता है।

यह पर्व एकमात्र ऐसा त्योहार है जो वैदिक काल से निरंतर प्रचलित है और अब यह बिहार की संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुका है। यह पर्व बिहार की वैदिक आर्य संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है और ऋग्वेद में वर्णित सूर्य एवं उषा पूजन की आर्य परंपरा के अनुरूप मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य देवता, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मईया को समर्पित है, जिन्हें देवी पार्वती के छठे रूप और भगवान सूर्य की बहन के रूप में पूजा जाता है।

पर्यावरणविदों का भी मानना है कि अन्य कई सनातनी त्योहारों पर पर्यावरण विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन छठ पर्व सबसे अधिक पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्योहारों में से एक है। जहाँ आज अधिकांश त्योहारों का व्यवसायीकरण हो चुका है, वहीं छठ पर्व में मौसमी फलों और घर पर बनी मिठाइयों, विशेष रूप से ठेकुआ, का प्रयोग होता है, न कि मिष्ठान भंडार की मिठाइयों या चॉकलेट का।

छठ पूजा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व

छठ पूजा की जड़ें प्राचीन वैदिक काल से जुड़ी हुई हैं। सूर्य उपासना का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है, जिसमें सूर्य को जीवनदायिनी ऊर्जा का स्रोत माना गया है। कहते हैं कि इस पूजा की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। एक कथा के अनुसार, जब पांडवों ने अपना राज्य खो दिया था, तब द्रौपदी ने सूर्य देव की उपासना की थी ताकि उनके परिवार को कठिनाइयों से मुक्ति मिले। इसके परिणामस्वरूप पांडवों को समृद्धि और विजय प्राप्त हुई।

पुराणों की कथा: एक कथा के अनुसार, राजा प्रियवद संतान सुख से वंचित थे। महर्षि कश्यप ने उनकी यह व्यथा सुनकर पुत्र प्राप्ति के लिए एक यज्ञ करवाया और यज्ञ की आहुति से प्राप्त खीर राजा की पत्नी मालिनी को दी। खीर के प्रभाव से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ, लेकिन वह मृत जन्मा। पुत्र के वियोग में दुखी होकर राजा प्रियवद श्मशान में अपने प्राण त्यागने का संकल्प लेने लगे। तभी ब्रह्माजी की मानस कन्या, देवी देवसेना, प्रकट हुईं और उन्होंने कहा, “हे राजन्, मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं, इसलिए मुझे षष्ठी कहा जाता है। आप मेरी पूजा करें और अन्य लोगों को भी इस पूजा के लिए प्रेरित करें।” राजा ने पुत्र प्राप्ति की कामना से देवी षष्ठी का व्रत किया, जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन संपन्न हुई थी।

राम-सीता की कथा: एक और प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान राम और माता सीता 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे, तब उन्होंने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य देव और छठी मईया की पूजा की। इस पूजा के परिणामस्वरूप अयोध्या के लोग सुखी और समृद्ध हुए। यह परंपरा तब से आज तक चली आ रही है।

कर्ण की कथा: महाभारत के महान योद्धा कर्ण, जिन्हें सूर्य पुत्र के रूप में जाना जाता था, अपनी शक्ति और पराक्रम के लिए प्रतिदिन सूर्य देव की आराधना करते थे। उनका यह तप और सूर्य के प्रति समर्पण छठ पूजा के महत्व को और भी गहराई से दर्शाता है।

भोजपुरी समाज में छठ पूजा का महत्व

भोजपुरी भाषी समाज के लिए छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। भारत के बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, और झारखंड के साथ-साथ नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी इस पर्व की धूम रहती है। यही नहीं, विश्व के विभिन्न हिस्सों में बसे भोजपुरिया समुदाय – चाहे वह अमेरिका हो, ब्रिटेन हो, या खाड़ी देश – अपने परंपरागत ढंग से इस पर्व को उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं।

छठ पूजा के दौरान समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ आकर इस पर्व को मनाते हैं। इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की धार्मिक असमानता नहीं होती। सभी एक समान श्रद्धा के साथ गंगा, कोसी, गंडक, या अन्य किसी नदी या जलाशय के किनारे एकत्र होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

छठ पूजा के अनुष्ठान और विधियाँ

छठ पूजा चार दिनों का पर्व है, जिसमें व्रती (व्रत रखने वाले व्यक्ति) अत्यंत कठोर नियमों का पालन करते हैं। प्रत्येक अनुष्ठान का अपना एक विशेष महत्व होता है और ये सभी अनुष्ठान आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या का प्रतीक माने जाते हैं।

पहला दिन – नहाय-खाय: छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय से होती है। व्रती इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं और शुद्ध शाकाहारी भोजन करते हैं। इस भोजन में आमतौर पर कद्दू-भात और चने की दाल होती है, जिसे मिट्टी के चूल्हे पर पकाया जाता है।

दूसरा दिन – खरना: पंचमी के दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को पूजा कर प्रसाद के रूप में गुड़ की खीर, रोटी और फल ग्रहण करते हैं। खरना का प्रसाद व्रती के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य: छठ के तीसरे दिन, यानी षष्ठी के दिन, व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। व्रती अपने परिवार और समुदाय के लोगों के साथ जल में खड़े होकर सूर्य को प्रसाद और अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस समय घाटों पर छठ के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं, जो इस पूजा के सौंदर्य को और भी बढ़ा देते हैं।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य: छठ पूजा के अंतिम दिन सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह अर्घ्य जीवन में नए सवेरे, आशा और नई ऊर्जा का प्रतीक है। अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना उपवास तोड़ते हैं और प्रसाद का वितरण करते हैं।

सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान

छठ पूजा का महत्व सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अतुलनीय है। यह पर्व समाज में सामूहिकता और एकता का प्रतीक है। घाटों की सफाई, प्रसाद का वितरण और पूरी पूजा प्रक्रिया में सामूहिक सहयोग समाज के हर वर्ग को एक साथ जोड़ता है। छठ पूजा के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीत भोजपुरी संस्कृति के धरोहर हैं। ये गीत न केवल भक्ति भावना को जागृत करते हैं, बल्कि छठ पूजा के महत्व और मूल्यों को भी दर्शाते हैं।

छठ पूजा और आधुनिकता

समय के साथ आधुनिकता ने हमारे जीवन में प्रवेश किया है, परंतु छठ पूजा की पवित्रता और परंपराओं में कोई कमी नहीं आई है। आज भी शहरों में, चाहे वह दिल्ली हो, मुंबई हो या कोई अन्य महानगर, छठ पूजा उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। लोग कृत्रिम तालाब और जलाशयों का निर्माण करते हैं ताकि शहरों में भी इस पूजा का आयोजन हो सके।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जो जीवन में संयम, शुद्धता, और आत्म-नियंत्रण की भावना को जागृत करता है। यह हमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का संदेश देता है। यह पर्व भोजपुरिया समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और गौरव का प्रतीक है।

छठ पूजा सूर्य देवता, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मईया को समर्पित है, जिन्हें देवी पार्वती के छठे रूप और भगवान सूर्य की बहन के रूप में पूजा जाता है। पर्यावरणविदों का भी मानना है कि अन्य कई सनातनी त्योहारों पर पर्यावरण विरोधी होने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन छठ पर्व सबसे अधिक पर्यावरण-अनुकूल हिंदू त्योहारों में से एक है। जहां आज अधिकांश त्योहारों का व्यवसायीकरण हो चुका है, वहीं छठ पर्व में मौसमी फलों और घर पर बनी मिठाइयों, विशेष रूप से ठेकुआ, का प्रयोग होता है, न कि मिष्ठान भंडार की मिठाइयों या चॉकलेट का।

आइए, हम इस पर्व की महिमा को सहेजें और इसे पूरे विश्व में फैलाकर मानवता के कल्याण के लिए प्रेरणा स्रोत बनाएं। छठ पूजा हमें यह सिखाती है कि सामूहिकता और श्रद्धा में एक अद्वितीय शक्ति होती है, जो हमारे जीवन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करती है।

पत्नी-बेटी और 2 बेटे को वाराणसी के करोड़पति कारोबारी ने मार डाला, घर से 10 KM दूर खुद की भी लाश मिली: अब परिवार में बची केवल वृद्ध माँ जो ठीक से बोल-चल भी नहीं सकतीं

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और 3 बच्चों की हत्या के बाद खुद को भी गोली मारकर सुसाइड ली है। घटना सोमवार (4 अक्टूबर 2024) की है। माँ छोड़कर पूरे परिवार सहित खुद को को खत्म कर देने वाला राजेंद्र गुप्ता एक कारोबारी था। उसके परिवार में पहले भी पिता और भाई सहित 5 हत्याएँ हो चुकी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में इसे पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में तांत्रिक के इशारे पर की गई हरकत बताया जा रहा है। फ़िलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है। घटना वाराणसी के थाना क्षेत्र भेलूपुर की है। यहाँ के भदैनी इलाके में 45 वर्षीय राजेंद्र गुप्ता अपने परिवार के साथ रहता था।

उसके परिवार में 42 वर्षीया पत्नी नीलू और 16 साल की बेटी गौरांगी के अलावा 20 और 15 साल के 2 बेटे नवेंद्र और सुवेंद्र थे। मंगलवार (5 नवंबर) की सुबह घर की नौकरानी रेनू काम के लिए वहाँ गई। उसने काफी देर तक बेल बजाया, फिर भी किसी ने दरवाजा नहीं खोला। रेनू ने धक्का देकर गेट खोला तो अंदर खून फैला हुआ था और नीलू, गौरांगी, नवेंद्र और सुवेंद्र की लाश पड़ी थी।

रेनू इस घर में पिछले 5 साल से काम कर रही थी। सोमवार की शाम 6:30 पर वह खाना बनाकर राजेंद्र के घर से लौटी थी, तब उसे सब कुछ सामान्य लगा था। रेनू ने इसकी सूचना पड़ोसियों को दी। सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुँची। मृतकों को गोली मारी गई थी। काफी खोजबीन के बाद राजेंद्र गुप्ता का कहीं पता नहीं चला।

इसी घर से मिला था राजेंद्र गुप्ता का शव

पुलिस ने राजेंद्र गुप्ता का पता लगाने के लिए उसकी मोबाइल को ट्रेस करना शुरू कर दिया। मोबाइल के लोकेश के आधार पर पुलिस 10 किलोमीटर दूर वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र स्थित एक गाँव मीरपुर लठिया के एक निर्माणाधीन मकान में पहुँची। वहाँ राजेंद्र गुप्ता की लाश पड़ी हुई थी। लाश के पास पिस्टल भी मिला।

अभी तक यही माना जा रहा है कि राजेंद्र ने अपनी कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर लिया है। फ़िलहाल सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इधर पुलिस हत्या के कारणों की पड़ताल में जुट गई है। वहीं, घर में राजेंद्र गुप्ता की माँ जिंदा बची है। वह काफी वृद्ध हैं। उम्र अधिक होने की वजह से वे हिल-डुल पाने में असमर्थ हैं। 

तांत्रिक पर शक

इस सामूहिक नरसंहार को लेकर अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अमर उजाला सहित कई मीडिया संस्थानों में इसे किसी तांत्रिक के कहने पर राजेंद्र द्वारा किया या नरसंहार बताया जा रहा है। दावा किया गया है कि किसी तांत्रिक ने राजेंद्र को बताया था कि उसकी पत्नी नीलू गुप्ता उनके कारोबार में बाधा है।

कहा जा रहा है कि तांत्रिक की बात सुनकर राजेंद्र गुप्ता दूसरी शादी के चक्कर में पड़ गया था। इस बात को लेकर पति-पत्नी के बीच आए दिन झगड़ा होता रहता था। फ़िलहाल पुलिस इसकी सत्यता की पुष्टि में जुटी है। साथ ही उस तांत्रिक की भी तलाश कर रही है, जिसके इशारे पर इतने बडे़ नरसंहार को अंजाम दिया गया।

बेहद समृद्ध था राजेंद्र गुप्ता का परिवार

राजेंद्र गुप्ता का परिवार काफी समृद्ध था। राजेंद्र के पास वाराणसी में कुल 4 घर हैं, जिनमें 2 घर तो ऐसे हैं, जिसमें कमरों की संख्या लगभग 50 है। राजेंद्र ने इन कमरों को किराए पर दे रखा था, जिसका मासिक किराया लाखों रुपयों में आता था। इसके अलावा राजेंद्र के पास 100 से ज्यादा रिक्शे हैं। इन रिक्शों से उसे लाखों रुपए महीने में आमदनी होती थी।

इन सभी के अतिरिक्त राजेंद्र गुप्ता के पास देशी शराब के ठेके हैं। इन ठेकों पर बिक्री भी काफी अच्छी है, जिसे से प्रतिदिन हजारों रुपयों की कमाई होती है। राजेंद्र का बेटा नवेंद्र बेंगलुरु में एक मल्टीनेशनल कम्पनी में जॉब करता था। वह दीपावली की छुट्टी पर घर आया था। गौरांगी और सुवेंद्र वाराणसी के प्रतिष्ठित स्कूल डीपीएस में पढ़ते थे। घर में छठ मनाने की तैयारियाँ चल रही थीं।

घर में पहले भी हो चुकी हैं 5 हत्याएँ, राजेंद्र था आरोपित

नीलू गुप्ता राजेंद्र की दूसरी बीवी थी। राजेंद्र के परिवार में पहले भी 5 कत्ल हो चुके हैं। ये कत्ल राजेंद्र के पिता, भाई, पहली पत्नी और 2 गार्ड के हुए थे। 20 साल पहले एक गार्ड की हत्या में राजेंद्र जेल भी गया था। माना यह भी जा रहा है कि भाई, पिता और पहली पत्नी की हत्या में भी राजेंद्र का हाथ था। फ़िलहाल पुलिस उसके पुराने आपराधिक जीवन की भी पड़ताल कर रही है।

जिस ईमान खलीफ का मुक्का खाकर रोने लगी थी महिला बॉक्सर, वह मेडिकल जाँच में निकली ‘मर्द’: मानने को तैयार नहीं थी ओलंपिक कमेटी, जीता था गोल्ड

पेरिस ओलंपिक 2024 के दौरान अपने जेंडर को लेकर खबरों में आया अल्जीरिया का ट्रांस बॉक्सर ईमान खलीफ फिर चर्चा में है। कथिततौर पर उससे जुड़ी एक रिपोर्ट लीक हुई है जिसका ड्राफ्ट क्रेमलिन-बाइसिट्र अस्पताल के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है।

बताया जा रहा है कि इस रिपोर्ट में दावा है कि ईमान असल में अब भी पुरुष ही है। ये मेडिकल रिपोर्ट खुलासा करती है कि इमान के शरीर में महिलाओं के अंग (जैसे यूटरस) गायब और पुरुषों वाले कई अंग पाए गए हैं, जिसमें आंतरिक अंडकोष और XY गुणसूत्र शामिल हैं।

कहा जा रहा है कि यह स्थिति 5-अल्फा रिडक्टेस अपर्याप्तता नामक विकार से संबंधित हो सकती है, जो यौन विकास का एक विकार है और आमतौर पर जैविक पुरुषों में पाया जाता है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर माँग उठ रही है कि ईमान से उसका ओलंपिक पदक वापस लिया जाए। भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इस संबंध में ट्वीट ईमान से गोल्ड वापस लेने की माँग की है। उनके अलावा अन्य यूजर्स भी ईमान की तमाम वीडियो शेयर करके सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कोई बताए कि ईमान कहाँ से महिला लगता है।

गौरतलब है कि पेरिस ओलंपिक के वक्त इटली की महिला बॉक्सर एंजेला कैरिनी से ईमान के मैच के बाद उसकी ताकत देखते हुए उसके जेंडर पर सवाल खड़े हुए थे। हालाँकि ओलंपिक कमेटी इस मुद्दे पर विचार करने को तैयार नहीं थी। 46 सेकेंड में खत्म हुए मैच के बाद एंजेला ने बताया था कि ईमान ने उन्हें इतनी तेज मुक्का मारा कि उन्हें कभी किसी महिला से ऐसा मुक्का नहीं पड़ा।

दिल्ली के सिंहासन पर बैठे अंतिम हिंदू सम्राट, जिन्होंने गोहत्या पर लगा दिया था प्रतिबंध: सरकारी कागजों में जहाँ उनका समाधि-स्थल, वहाँ दरगाह का कब्जा

भारत की धरती वीरों की जननी है। इन्हीं में से एक महावीर थे हेमू। इन्हें हेमचंद्र विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है। विक्रमादित्य एक उपाधि है, जिसे देश के हिंदू शासक धारण करते आए हैं। हेमू दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले अंतिम हिन्दू सम्राट थे। वे अद्वितीय योद्धा एवं कुशल रणनीतिकार थे। उन्हें मध्ययुग का नेपोलियन कहा जाता है। आज 5 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि है।

हेमू का जन्म 1501 ईस्वी में राजस्थान के अलवर क्षेत्र में राजगढ़ के निकट माछेरी ग्राम में के एक साधारण परिवार में हुआ था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि हेमू बिहार के सासाराम के रहने वाले थे। साधारण परिवार में जन्म लेकर एक व्यापारी से वजीर (प्रधानमंत्री) और सेनापति होते हुए उन्होंने दिल्ली के ताज तक का सफर उन्होंने अपने पराक्रम से हासिल किया।

हेमू ने अपने जीवन में 22 लड़ाइयाँ लड़ीं और विजयी रहे। आगे चलकर उन्होंने ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि धारण की। हेमू का उद्भव ऐसे समय में हुआ, जब हिंदुस्तान में मुगल एवं अफगान दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। वे दिल्ली की सत्ता हासिल करने में सफल रहे, लेकिन यह अधिक समय तक कायम नहीं रही। भारतीय इतिहास की यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

हेमू की कहानी शुरू होती है व्यापार से। उनका परिवार किराने का काम करता था। हेमू जब बड़े हुए तो वे भी अपने परिवार के व्यवसाय शामिल हो गए। अकबर के जीवनीकार अबुल फ़ज़ल ने उन्हें फेरीवाला कहा है, जो रेवाड़ी की गलियों में नमक बेचा करते थे। उन दिनों ईरान-इराक से दिल्ली के मार्ग पर रिवाड़ी महत्वपूर्ण नगर था। उन्होंने शेरशाह की सेना को रसद और जरूरी सामग्री पहुँचानी शुरू कर दी थी।

हेमू में युद्ध में काम आने वाले शोरा भी बेचने लगे थे। इसके कारण वे शेरशाह सूरी के बेटे इस्लाम शाह की नजर में आ गए। आगे चलकर वे शेरशाह के विश्वासपात्र बन गए। शेरशाह की 22 मई 1545 को मौत हो गई। उसके बाद इस्लाम शाह ने हेमू को शानाये मण्डी, दरोगा-ए-डाक चौकी तथा प्रमुख सेनापति के साथ-साथ अपना सलाहकार बना दिया। यह स्थान ब्रह्मजीत गौड़ नाम के एक ब्राह्मण को हासिल था।

सन 1552 में इस्लाम शाह की मौत हो गई। इस्लाम शाह की मौत के बाद उसके दो साल के बेटे फिरोज खान को शासक बनाया गया, लेकिन उसके मामा मुबारक शाह उर्फ आदिल शाह ने उसकी हत्या कर दी। भोग-विलास में डूबे आदिल शाह के समय हर तरफ अराजकता फैल गई। इसके बाद आदिल शाह ने हेमू को प्रधानमंत्री तथा अफगान सेना का मुख्य सेनापति बना दिया।

इस बीच बाबर का बेटा हुमायूँ 1555 में भारत लौटा और दिल्ली पर हमला कर दिया। आदिल शाह ने हेमू को लड़ाई के लिए भेजा और खुद चुनार भाग गया। अब सूरी वंश का चार भागों में बँट गया था, जिसका एक हिस्सा आदिल शाह के अंतर्गत था। 26 जनवरी 1556 को हुमायूँ की मौत हो गई और अकबर को गद्दी मिली। उस समय अकबर की उम्र 13 साल थी। बैरम खाँ को उसका अभिभावक नियुक्त किया गया।

हेमू ने इसे एक महत्वपूर्ण मौका माना। उन्होंने आगरा के मुगल गवर्नर इसकंदर खाँ उजबेग को पराजित किया शहर को कब्जे में ले लिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रूख किया। दिल्ली का मुगल गवर्नर तारीफ बेग खाँ अत्यधिक घबराकर बैरम खाँ से सेना भेजने का आग्रह किया। सेनापति पीर मोहम्मद शेरवानी के नेतृत्व में आई मुगल सेना को हेमू ने 6 अक्तूबर 1556 को तुगलकाबाद में बुरी तरह परास्त किया।

इस तरह 7 अक्तूबर 1556 को हेमू ने दिल्ली सिंहासन पर कब्जा कर लिया। इस तरह से एक भारत के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। उनका दिल्ली के पुराने किले, जिसे पांडव निर्मित किला कहा जाता है, में राज्याभिषेक हुआ। दिल्ली की गद्दी बैठते ही उन्होंने कई घोषणाएँ कीं, जिनमें से एक गोहत्या पर प्रतिबंध भी था।

सम्राट के रूप में हेमचंद्र ने घोषणा की कि उनके राज्य में गोहत्या पर प्रतिबंध होगा और जो इस आज्ञा का पालन नहीं करेगा, उसका सिर काट लिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने दूसरी घोषणा भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों को हटाने की की। उन्होंने शासन प्रशासन से लेकर वाणिज्य तक, हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए। अब हेमू का अगला लक्ष्य मुगलों और अफगानों को भारत से खदेड़ने का था। उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी।

दिल्ली में हार का समाचार सुनकर बैरम खाँ बौखला गया। उस समय पंजाब के जालंधर में बैरम ख़ाँ अकबर के साथ था। अकबर वापस काबुल जाना चाहता था, लेकिन बैरम खाँ इस हार को पचा नहीं पा रहा था। हार की जानकारी देने टारडी ख़ाँ दिल्ली से भाग कर अकबर के ख़ेमें में गया तो बैरम खाँ ने उसका सिर काट दिया। बैरम खाँ ने कहा कि इससे लोगों को सबक मिलेगा कि युद्ध से भागने का क्या अंजाम होता है।

उधर हेमू को पता चला कि बैरम खाँ हमले की योजना बना है तो उन्होंने अपनी तोपें पानीपत की तरफ भेज दीं। बैरम ख़ाँ ने भी अली क़ुली शैबानी के नेतृत्व में 10,000 सेना पानीपत की भेज दिया। हेमू की सेना में 30,000 अनुभवी घुड़सवार और 500 से 1500 के बीच हाथी थे। हाथियों की सूढ़ों में तलवारें और बरछे बँधे हुए थे और उनकी पीठ पर युद्ध कौशल में पारंगत तीरंदाज़ सवार थे।

6 नवंबर 1556 की पानीपत की दूसरी लड़ाई के नाम से मशहूर इस लड़ाई में सिर में कोई कवच नहीं पहना था। वे हाथी पर बैठकर सेना का लगातार जोश बढ़ा रहे थे। यह लड़ाई बहुत भयंकर थी। क्षत्रियों के नेतृत्व में यह हेमू के हमले से मुगल सेना बिखर गई थी। बदायूँनी ने अपनी किताब ‘मुंतख़ब-उत-त्वारीख़’ में इसका जिक्र किया था। हेमू अपनी जीत के करीब थे।

इस बीच क़ुली शैबानी के सैनिक हेमू की सेना पर लगातार तीरों की बौछार कर रहे थे। इन्हीं में से एक तीर उनकी आँख में जा धँसा। हरबंस मुखिया अपनी किताब ‘द मुग़ल्स ऑफ़ इंडिया’ में मोहम्मद क़ासिम फ़ेरिश्ता के हवाले से लिखते हैं कि तीर लगने पर भी हेमू ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी आँख तीर निकाला और रूमाल से ढ़क कर लड़ना जारी रखा।

हालाँकि, अत्यधिक खून बहने के कारण हेमू बेहोश होकर अपनी हाथी के हौदे में गिर गए। इस बीच क़ुली शैबानी ने बिना महावत के एक हाथी को घूमते हुए देखा तो उसने एक व्यक्ति को उस पर चढ़कर देखने के लिए कहा। जब वह व्यक्ति हाथी पर चढ़कर देखा तो उसमें एक व्यक्ति बेहोश दिखा। वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि हेमू थे। इसके बाद शैबानी उस हाथी को हाँक कर अकबर के पास ले गया।

इसकी जानकरी मिलते ही हेमू की सेना के हताशा छा गई और मुगल सेना खुशियाँ मनाने लगी। उधर, हेमू को जंजीरों से बाँधकर अकबर के सामने पेश किया। बैरम खाँ ने अपनी तलवार से हेमू का सिर काट दिया। उनका सिर काबुल भेजा गया और धड़ को दिल्ली दरवाजे पर लटका दिया गया। हेमू के पुराने घर माछेरी पर आक्रमण कर लूटमार की गई। उनके 80 वर्षीय पिता पूरनदास के साथ-साथ कई रिश्तेदारों को इस्लाम में धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा गया।

जब सम्राट हेमचंद्र के परिजन और रिश्तेदार नहीं माने तो उनका कत्ल कर दिया गया। इससे एक मीनार बनाई गई। इस मीनार की पेंटिंग अकबरनामा में भी है। इस तरह हेमू एक शूरवीर की तरह युद्ध क्षेत्र में वीरगति को प्राप्त हो गए और 29 दिन के उनके शासन का अंत हो गया। विन्सेंट ए स्मिथ अकबर की जीवनी में लिखते हैं, “क्षत्रिय (राजपूत) नहीं होने के बावजूद हेमू ने युद्ध के मैदान पर आखिरी साँस ली।”

सम्राट हेमचंद्र की समाधि वक्फ बोर्ड के पास

हरियाणा के पानीपत में जहाँ हेमू का सिर काटा गया था, वहाँ एक समाधि बना दी गई। सौदापुर गाँव में स्थित हेमू की यह समाधि सदियों तक उपेक्षित रही। इस बीच प्रवासी मुस्लिमों ने वहाँ एक दरगाह बना दिया। सन 1990 तक यह जगह भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के पास थी। सन 1990 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने समाधि वक्फ बोर्ड को दे दिया।  

जिस जगह सम्राट हेमू की समाधि है, वह पूरा क्षेत्र 10 एकड़ का है। चौटाला ने उन सारी जमीनों को वक्फ को दे दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय हरियाणा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मेवात क्षेत्र के एक मुस्लिम विधायक थे। उस विधायक पर कुछ लोगों से पैसे लेकर सम्राट हेमचंद्र की समाधि पर अतिक्रमण की अनुमति देने के आरोप लगे थे। इसको लेकर दोनों समुदायों में विवाद चल रहा है।

CTET की परीक्षा में 60% भी नहीं नंबर, फिर भी बने सरकारी मास्टर: बिहार में शिक्षकों की बहाली में घोटाला, 4000 फर्जी मिले… 24 हजार की नौकरी पर खतरा

बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के ऐसे वीडियो आए दिन वायरल होते रहते हैं जो उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं। अब शिक्षा विभाग की जाँच से जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, उससे लगता है कि ये शिक्षक फर्जीवाड़े के उस्ताद हैं। इस जाँच में करीब 4000 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं।

लगभग 24000 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनके कई प्रमाण-पत्र पहली जाँच में फर्जी पाए गए हैं। इनके दस्तावेजों की दोबारा से जाँच होगी। वैसे जाँच के दायरे में करीब 42 हजार वे शिक्षक हैं जिनकी काउंसलिंग नहीं हो पाई है।

रिपोर्टों के अनुसार जो 4000 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं, उनमें से करीब 80 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने CTET की परीक्षा में तय मापदंड से कम नंबर पाने के बावजूद नौकरी हासिल कर ली थी। CTET की परीक्षा में कम से कम 60% नंबर हासिल करना अनिवार्य था।

इसके अलावा 20% ने दिव्यांगता, जाति, निवास, खेल सहित अन्य प्रमाण पत्र फर्जी पेश किए थे। अब इन शिक्षकों के खिलाफ सरकार कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इनसे दिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 से 13 सितंबर के बीच सक्षमता परीक्षा पास कर चुके कुल 1, 87,000 अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग होनी थी। लेकिन 42000 शिक्षकों की काउंसिलिंग नहीं हो पाई। इनमें से 3000 काउंसिलिंग के दौरान गैर हाजिर थे। 10,000 शिक्षकों का बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं हो पाया था। अब इन सभी की काउंसिलिंग छठ के बाद होगी।

जिन 24 हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा बताया जा रहा है, शुरुआती जाँच में उनके दस्तावेजों में भी विसंगतियाँ मिली हैं। इनके प्रमाण पत्रों की दोबारा जाँच की जाएगी। इस दौरान फर्जीवाड़ा मिलने पर इन्हें बर्खास्त कर इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक योगेंद्र सिंह ने बताया है कि सभी शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जाँच के बाद सभी रिकॉर्ड सर्विस बुक में दर्ज किए जाएँगे। फिर डिजिटल सर्विस बुक बनाकर इसे ऑनलाइन कर दिया जाएगा।

इसके अलावा सीतामढ़ी जिले में जाँच के दौरान 7 शिक्षक फर्जी पाए गए हैं। इन शिक्षकों पर जालसाजी करने और सबूत मिटाने जैसे आरोपों के तहत केस दर्ज किया गया है। जाँच के दौरान इन शिक्षकों द्वारा लगाए गए प्रमाण पत्रों में गंभीर खामियाँ मिली थी। सत्यापन के लिए अधिकारियों ने इन्हे कई बार नोटिस दे कर अपने ओरिजनल प्रमाण पत्रों को जमा करने के लिए कहा था। लेकिन बार-बार रिमाइंडर के बावजूद इन शिक्षकों ने अपने कागजात जमा नहीं किए थे।

इंजीनियरों को सैलरी के नाम पर ‘चूरन’, करोड़ों में CEO का पैकेज: जो IT कंपनी कुछ महीने पहले तक थी मीम मेटेरियल, वहाँ 13000 पुराने कर्मचारी वापस लौटे

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब आईटी कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) सोशल मीडिया में मीम मेटेरियल बनी हुई थी। कैंपस हायरिंग में इंजीनियरों को महज 2.5 लाख सालाना पैकेज ऑफर करने के बाद उस पर चुटकुले बन रहे थे। वहीं कंपनी के सीईओ करोड़ों का पैकेज ले रहे थे। लेकिन अब लगता है कि इस कंपनी के दिन बदल चुके हैं।

13000 पुराने कर्मचारियों ने पिछले कुछ महीनों में कॉग्निजेंट में वापसी की है। सीईओ रवि कुमार की प्रशंसा हो रही है। कंपनी में ग्रोथ देखने को मिल रही है। ऐसा लगता है कि चुनौतियों से पार पाकर वह स्थिरता की ओर लौट गई है। 3800 कर्मचारियों को तो कंपनी ने तीसरी तिमाही में ही जोड़ा है।

कंपनी के तीसरी तिमाही में बेहतर होते परिणामों को देख रवि कहते हैं, “हमारी आस-पास चर्चा बहुत अधिक है… आप लिंक्डइन ट्रैफिक भी देख सकते हैं जो कंपनी के बारे में बात कर रहे हैं। कंपनी का जादू वापस चल गया है। जो पहले कॉग्निजेंट में काम कर चुके हैं और अब वापस आना चाहते हैं, हम अगले साल से बड़े पैमाने पर कैंपस में भी जा रहे हैं।”

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी जतिन दलाल ने कहा कि कंपनी अपनी भर्ती जारी रखने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप इस तिमाही में वॉल्यूम वृद्धि को देखें तो यह निरंतर वृद्धि में 3.5 फीसदी है। अगर हम हर तिमाही में रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज कर रहे हैं तो हमें बाजार से शीर्ष प्रतिभाओं तक पहुंचने और उन्हें नियुक्त करने की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेकर खुद को बेहतर बनाने में प्रयासरत है। जब कंपनी के सीईओ से पूछा गया कि एआई कैसे उनके बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट परअसर डालता है तो उन्होंने बताया कि चूँकि एआई एक अनूठी प्रोद्योगिकी है इसलिए ये अलग-अलग सेगमेंट में कार्यों को प्रभावित करती है।

जानकारी के अनुसार कॉग्निजेंट में प्रतिवर्ष 2 मिलियन लाइन का कोड एआई एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म द्वारा लिखा जाता है। कुमार ने यह बताते हुए माना कि भविष्य एआई का असर कुछ नौकरियों पर पड़ सकता है, लेकिन उनके अनुसार इससे और अवसर पैदा होंगे क्योंकि हर प्रक्रिया में एआई एजेंट होंगे, और जब वे एजेंट मानवीय प्रयासों को स्वचालित करेंगे, तो नौकरियाँ पैदा होंगी।

बता दें कि कंपनी ने पिछले साल के अंत में AI और GenAI में बिलियन डॉलर से अधिक निवेश की घोषण की थी और उसके बाद पता चला था कि उनके पास 225 प्रोजेक्ट काम करने को थे। अब कंपनी ने तीसरी तिमाही में 5 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया जो कि पिछले साल की तुलना में 3% ज्यादा है।

छिंदवाड़ा के गणेश मंदिर में घुस मूर्तियों को तोड़ने लगा मोहम्मद तौफीक, रोकने पर महिला को दी जान से मारने की धमकी: हैदराबाद के मंदिर में भी तोड़फोड़

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और हैदराबाद से मंदिरों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने जाँच कर रही है। छिंदवाड़ा में मोहम्मद तौफीक को पकड़ा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव वार्ड नंबर 7-8 में मौजूद भगवान गणेश का मंदिर आसपास के हिन्दुओं की श्रद्धा का केंद्र है। रविवार (3 नवंबर 2024) को मोहम्मद तौफीक इस मंदिर में घुस गया। उसने मूर्तियों को तोडना शुरू कर दिया। घटना की चश्मदीद एक बुजुर्ग महिला ने जब तौफीक को रोका तो उन्हें जान से मार डालने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने शोर मचा कर मोहल्ले वालों को जमा किया।

बुजुर्ग महिला की आवाज सुन आसपास के लोग जमा हुए। उन्होंने मोहम्मद तौफीक को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। हिन्दू संगठनों ने घटना में एक अन्य युवक के शामिल होने का आरोप लगाया है। तौफीक का चालान कर दिया गया है। दूसरे आरोपित की संलिप्तता के आरोपों की जाँच चल रही है। विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल ने इस घटना पर आक्रोश जताते हुए सोमवार (4 नवंबर) को बंद रखा। स्थानीय व्यापारियों ने इसका समर्थन करते हुए दुकानें बंद रखी।

हैदरबाद में भी मंदिर बना निशाना

छिंदवाड़ा की ही तरह हैदराबाद में भी एक हिन्दू मंदिर को निशाना बनाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना शमशाबाद के एयरपोर्ट कॉलोनी की है। मंगलवार (5 नवंबर) की सुबह जब श्रद्धालु पूजा-पाठ करने पहुँचे तो उन्होंने मंदिर को क्षतिग्रस्त हालात में पाया। मूर्तियों को तोड़ कर बिखेर दिया गया था। इस घटना से स्थानीय हिन्दुओं में रोष फ़ैल गया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। स्थानीय लोगों को समझाबुझा कर शांत किया। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आंध्र प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विष्णु वर्धन रेड्डी ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस देश में हिन्दू बहुसंख्यक हैं, वहाँ कॉन्ग्रेस शासित राज्य में ऐसी घटनाएँ हो रही हैं।

ऑपइंडिया के डोजियर के बाद Wikipedia को भारत सरकार का नोटिस, ‘राजनीतिक पूर्वाग्रह’ से ग्रसित बताया: हाई कोर्ट ने खुद को ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहने पर प्लेटफार्म से पूछे सवाल

ऑपइंडिया द्वारा विकिपीडिया के भारत विरोधी रुख पर विस्तृत डोजियर जारी करने के कुछ दिनों बाद भारत सरकार ने इस विदेशी प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने ANI को सरकार का प्रोपेगेंडा टूल बताने के मामले में विकिपीडिया को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि उसे खुद को विश्वकोश नहीं कहना चाहिए।

सरकार द्वारा जारी नोटिस में विकिपीडिया पर प्रदर्शित बड़े पैमाने पर अशुद्धियों और पूर्वाग्रह के कई उदाहरणों को उजागर किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि लोगों के एक छोटे समूह के पास प्लेटफॉर्म के कंटेंट का संपादकीय नियंत्रण है। सरकार ने पूछा कि विकिपीडिया को मध्यस्थ के बजाय प्रकाशक के रूप में क्यों नहीं माना जाना चाहिए।

ऑपइंडिया ने विकिपीडिया द्वारा गलत सूचना परोसने और भारत के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित पूर्वाग्रह पर एक विस्तृत डोजियर जारी किया है। इस इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है। ऑपइंडिया के शोध में पता चला है कि विकिपीडिया ने मुट्ठी भर लोगों को असीमित शक्तियाँ दे रखी हैं, जिन्हें ‘प्रशासक’ कहा जाता है।

पूरी दुनिया में विकिपीडिया के केवल 435 सक्रिय प्रशासक हैं। इन प्रशासकों के पास संपादकों पर प्रतिबंध लगाने, स्रोतों को ब्लैकलिस्ट करने, योगदानकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने और लेखों पर किए जाने वाले संपादनों को वापस लेने का निर्णय लेने की शक्ति है।

ऑपइंडिया द्वारा डोजियर जारी करने के तुरंत बाद एक अन्य वामपंथी प्लेटफॉर्म फेसबुक ने डोजियर को प्रतिबंधित कर दिया, ताकि इसके दर्शकों की संख्या सीमित हो सके। फेसबुक पर अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने और एक खास विचारधारा के राजनीतिक हित को आगे बढ़ाने के कई आरोप हैं।

ANI को ‘सरकार का प्रोपेंगेडा टूल’ बताने पर कोर्ट में विकिपीडिया

वहीं, भारतीय मीडिया एजेंसी ANI को विकिपीडिया की वेबसाइट पर सरकार का प्रोपेगेंडा टूल बताने के मामले में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार (1 नवंबर) को एएनआई के बारे में विकी पेज पर किए गए अपमानजनक संपादनों को हटाने की माँग में बाधा डालने के लिए आड़े आने पर कड़ी फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि विकिपीडिया को अपमानजनक संपादनों का बचाव करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वह केवल मध्यस्थ होने का दावा करता है। जज ने कहा, “यदि आप मध्यस्थ हैं तो आपको क्यों परेशानी हो रही है? यदि किसी और ने संपादन किया है और वह बिना किसी आधार के है तो उसे हटा दिया जाता है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “यदि आप केवल एक प्लेटफॉर्म हैं और किसी और ने उन पर चीजें लिखी हैं, लेकिन वे अदालत में आने के लिए तैयार नहीं हैं तो मुझे आपकी बात क्यों सुननी चाहिए। मैं केवल यह देखूँगा कि आपके विश्वकोश में दी गई राय सही तस्वीर पेश नहीं करती है, क्योंकि लेख (हाइपरलिंक स्रोत) का सही प्रतिनिधित्व नहीं है।”

कोर्ट ने कहा कि यह ‘परेशान करने वाला’ है कि विकिपीडिया खुद को एक विश्वकोश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि वह दावा करता है कि वह इस मंच पर लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। जज ने एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका जैसे प्रकाशन का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्वकोश आमतौर पर प्रामाणिकता के साथ आते हैं।

कोर्ट ने पूछा, “विश्वकोश कहने के बाद क्या आप यह कह सकते हैं कि आप एक्स-वाई द्वारा मेरे विश्वकोश पर कही गई बातों का बिना इसकी सामग्री की पुष्टि किए मैं इसका समर्थन नहीं करता। ‘विकिपीडिया, मुक्त विश्वकोश’ यह आपका पहला वाक्य है, इससे आपका क्या मतलब है?”

आगरा के जिस पार्क से ताजमहल को निहारते थे सैलानी, उसकी 6 बीघा जमीन एक किसान ने ट्रैक्टर से जोत दी; बाड़ लगा प्रवेश किया प्रतिबंधित: जानिए क्यों

आगरा के ताजमहल के पास स्थित 11 सीढ़ी पार्क विवादों के घेरे में है। इस जगह से सैलानी सूर्यास्त के समय ताजमहल को निहारा करते हैं। एक स्थानीय किसान ने इस पार्क के एक बड़े हिस्से को निजी जमीन बताते हुए ट्रैक्टर से जोत दिया है। साथ ही बाड़ लगाकर सैलानियों का प्रवेश भी प्रतिबंधित कर दिया है।

इस किसान का नाम मुन्ना लाल है। उनका कहना है कि पार्क के अंदर 6 बीघा जमीन उनकी निजी भूमि है। इसको लेकर वे लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने और इस पर अधिकार हासिल करने का भी दावा कर रहे हैं। आगरा की कमिश्नर ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 11 सीढ़ी पार्क की जमीन पर दावा करने वाले किसान मुन्ना लाल, कछपुरा के नगला देवजीत गाँव के मूल निवासी हैं। कथित तौर पर इस पार्क की करीब 6 बीघा जमीन पर कभी मुन्ना लाल के चाचा और पिता खेती किया करते थे। जमीन के कागजातों पर भी उन्ही के नाम हैं। साल 1976 की सीलिंग में यह जमीन मुन्ना लाल के परिवार के हाथ से निकल गई। इसके बाद जमीन वापस पाने के लिए मुन्ना लाल ने 40 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

मुन्ना लाल का कहना है कि साल 1998 और 2020 के जिला न्यायालय के दस्तावेजों में इस जमीन का ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप उनके पक्ष में दर्ज हुआ। साल 2020 में SDM ने भी इस जमीन पर मुन्ना लाल के स्वामित्व की पुष्टि की थी। साथ ही यह जमीन रेवेन्यू रिकॉर्ड में भी अपने नाम पर दर्ज होने का वे दावा कर रहे हैं।

मुन्ना लाल का कहना है कि इस जमीन पर उनके स्वामित्व का अदालती आदेश है। उन्होंने ट्रैक्टर से पार्क में अपने कथित हिस्से को न सिर्फ जुतवा डाला है, बल्कि उसकी घेराबंदी भी कर दी है। इस क्षेत्र में अब आम लोगों का आना-जाना प्रतिबंधित है। आगरा की कमिश्नर ऋतु माहेश्वरी का कहना है कि जमीन आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) के अधीन आती है। इस पार्क की देखरेख का भी जिम्मा ADA का है। उन्होंने मुन्ना लाल के दावों की जाँच के आदेश जारी किए हैं। बताते चलें कि साल इसी पार्क में साल 2023 में ताज महोत्सव का आयोजन हुआ था। यहीं 1997 में ग्रीक संगीतकार यन्नी का कॉन्सर्ट भी हुआ था।