भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकियों पर ‘एयर स्ट्राइक’ करने के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान के हर एक वार का भारत की तरफ से मुँहतोड़ जवाब दिया गया। अब घबराए पाकिस्तान ने लाइन ऑफ कण्ट्रोल के पास सेना की तैनाती बढ़ा दी है। भारतीय वायु सेना से थर्राए पाक ने सीमा के पास सेना, बख़्तरबबंद वाहन और हाथियों की खेप पहुँचानी शुरू कर दी है। ‘टाइम्स नाउ’ ने गुप्त सूत्रों के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान अपनी सीमा पर रक्षा कतार को मजबूत करने में लगा हुआ है। इतना ही नहीं, पाकिस्तानी फ़ौज का एक जत्था बहावलपुर पहुँच कर वहाँ डेरा जमाए हुए है।
A week after Indian air strikes on Jaish terror camps, the Pakistan government has ordered the movement of additional troops and heavy weaponry to the international border and the Line of Control.@deepduttajourno with the details | #PakSpookedpic.twitter.com/3KUdVJAz5A
सियालकोट सेक्टर में पाकिस्तान ने अतिरिक्त सेना बल की तैनाती की है। सियालकोट में नियमित ब्लैकआउट हो रहे हैं। सशस्त्र बलों ने लाहौर हवाई अड्डे को अपनी कड़ी निगरानी में ले रखा है। इसके अलावा मुल्तान से बहावलपुर भरी संख्या में सैनिक भेजे गए हैं। बता दें कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अज़हर बहावलपुर का ही निवासी है। सेना के एक काफिले को कराची से खोकरपुर की तरफ जाते देखा गया है। सेना की एक टुकड़ी के हैदराबाद से मीरपुर जाने की भी ख़बर आई है।
#Karachi#Bahawalpur on high alert against #India attack; #Pakistan picked up on joint #India#Israel attack plan, they backed off after #Pakistan warned of retaliation; India wont try another airstrike but we fear ground attacks, terrorist hits: PM Khan in briefing to TV anchors
पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रडारों की सक्रियता में भी वृद्धि की है। फॉरवर्ड क्षेत्र के अस्पतालों को किसी भी आपात स्थिति ने निपटने हेतु तैयार रहने को कहा गया है। ज़रूरत पड़ने पर घायल सैनिकों को भर्ती कराने के लिए बेड्स आरक्षित रखने को कहा गया है। लड़ाकू विमान लगातार अभ्यास कर रहे हैं। इतना ही नहीं, स्थानीय प्रशासन ने सीमा पर रहने वाले नागरिकों को पीछे हटने को भी कहा है। सीमा को खाली कराने की कोशिशें जारी है। नरेंद्र मोदी के घर में घुस कर मारने के ताज़ा बयानों से भी पाकिस्तान सकते में है।
कुल मिला कर देखें तो ताज़ा एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को भारत की शक्ति का एहसास हो गया है और वह किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहता। पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिरा कर भारत ने यह भी बता दिया घर में घुस कर सक्षम है और किसी भी प्रकार की जवाबी कार्रवाई को विफल कर अपनी रक्षा भी कर सकता है। पाकिस्तान के कई ड्रोन सीमा पर ही मार गिराए गए हैं। इन सभी कारणों से पाकिस्तान काफ़ी सतर्कता बारात रहा है। पहले से ही अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहे पाक को ईरान ने भी सर्जिकल स्ट्राइक करने की धमकी दी है।
कर्नाटक के एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता चर्चा में हैं। नाम है – बेलुर गोपालकृष्णन। उन्होंने एक समारोह में अपने समर्थकों से पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या का अह्वान किया है। कर्नाटक भाजपा के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से कांग्रेस नेता का वीडियो ट्वीट किया गया है।
Belur Gopalakrishna, a Congress leader in a official party function calls for assassination of democratically elected PM Sri @narendramodi ji.
कर्नाटक भाजपा ने ट्वीट में कहा है कि देश के पीएम की हत्या के लिए उकसाना राष्ट्र के लिए खतरा है। उन्होंने गृहमंत्रालय और बेंगलुरु पुलिस से तुरंत कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है।
Well @RahulGandhi we remember you saying you don’t endorse hate politics but now that your own party leader has openly called for assassination of democratically elected PM of this Nation would you act on him ?
एक अन्य ट्वीट में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को भी निशाना बनाते हुए पूछा गया, “राहुल गांधी हम आपको याद कराना चाहते हैं कि आपने कभी कहा था कि आप नफरत की राजनीति का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन अब जब आपकी ही पार्टी के नेता ने खुले तौर पर लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए इस राष्ट्र के पीएम की हत्या का आह्वान किया है तो क्या आप उन पर कार्रवाई करेंगे? यदि आप स्पष्ट रूप से कार्रवाई नहीं करते हैं तो इसका मतलब है कि आप अपने नेता के शब्दों का समर्थन करते हैं?
दिलचस्प बात यह है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद बेलुर गोपालकृष्णन भाजपा छोड़कर कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए थे। कॉन्ग्रेस में शामिल होने पर उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह एक झूठी पार्टी है। पार्टी में ईमानदार लोगों की कोई कद्र नहीं।
माकपा नेता नरसैया एडम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ क्या कर दी, उन्हें पार्टी की केंद्रीय समिति से निलंबित कर दिया गया। केन्द्रीय समिति कम्युनिस्ट पार्टी की निर्णय लेने वाली एक प्रमुख समिति होती है।
दरअसल माकपा के पूर्व विधायक नरसैया एडम ने जनवरी में सोलापुर जिले में एक आवास परियोजना को मंजूरी देने के लिए मोदी और फडणवीस की सराहना की थी। इसके साथ ही उन्होंने दोबारा मोदी को प्रधानमंत्री बनने के लिए शुभकामना भी दी थी। एडम राज्य विधानसभा में इसी क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे।
एडम को निलंबित किए जाने के मामले पर पार्टी के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसी तारीफ पार्टी की नीति के खिलाफ है। ऐसे में उन्हें तीन महीने के लिए पार्टी की केन्द्रीय समिति से निलंबित करने का निर्णय लिया गया है। हालाँकि अभी तक इस पर एडम की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आपको बता दें कि एडम का निलंबन 3 महीने के लिए किया गया है। उनका तीन महीने का निलंबन लोकसभा चुनावों के बाद ही समाप्त हो पाएगा। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक एडम पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी के काफी करीबी हैं, लेकिन पार्टी का विरोधी धड़ा यह चाहता था कि एडम को प्रादेशिक सचिव के पद से हटाया जाए। उन्हें हटाया जाना बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। हालाँकि पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता का नाम दिया है, लेकिन इस निलंबन का असर लोकसभा चुनावों तक देखा जा सकता है। पार्टी की बैठकों में अब उन्हें जून या जुलाई में ही हिस्सा लेने का मौका मिल पाएगा, तब तक लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके होंगे।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित खुल्ताबाद से एटीएस ने एक डॉक्टर को गिरफ़्तार किया है। उसे आतंकवादियों के संपर्क में होने के कारण गिरफ़्तार किया गया। आतंक निरोधक दस्ते को शक है कि उक्त डॉक्टर जम्मू कश्मीर के आतंकवादियों के संपर्क में था। उस से पिछले तीन दिनों पूछताछ जारी है। अधिकारियों ने आरोपित डॉक्टर की पहचान उजागर नहीं की है। उस पर आतंकवादियों को वित्तीय मदद देने में शामिल होने का संदेह है। उसके सुरक्षा बलों को धोखे से भोजन और पानी में ज़हर देने की साज़िश में शामिल होने का भी संदेह है। इसके अलावा, उसके मुंब्रा और औरंगाबाद से हाल ही में गिरफ्तार किए गए नौ संदिग्ध आतंकवादियों के संपर्क में होने का भी संदेह है।
ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हाल ही में पाकिस्तानी आर्मी इंटेलिजेंस (MI) और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की ख़तरनाक योजना के बारे में चेतावनी जारी की थी, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों को दिए जाने वाले भोजन में ज़हर मिलाया जाने वाला था। महाराष्ट्र एटीएस ने जनवरी में आईएसआईएस आतंकी समूह से जुड़े 9 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया था। एटीएस के अधिकारियों ने मुंब्रा के एक नाबालिग किशोर के साथ मज़हर शेख, जुम्मन खुटुपद, सलमान ख़ान, फरहाद अंसारी को गिरफ्तार किया था, जबकि मोहम्मद मोहसिन सिराजुल्लाह खान, मोहम्मद तौकीउल्लाह सिराज खान, काजी सरफराज और मशहूद इस्लाम उर्फ तारेख को औरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया था।
अधिकारियों ने विस्फोटकों के बजाय आरोपितों के पास से हाइड्रोजन पेरोक्साइड, ज़हरीला पाउडर और एसिड बरामद किया था। मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, राजनीतिक रैलियाँ, धार्मिक कार्यक्रम और प्रसिद्ध हस्तियों की शादियाँ उनकी लक्षित सूची में शामिल थीं। यानी ये आतंकी इन कार्यक्रमों को निशाना बना सकते थे। बता दें कि इस साल जनवरी में कई ताबड़तोड़ छापों के बाद महाराष्ट्र एटीएस ने मुंब्रा और ठाणे से 5 और औरंगाबाद से 4 व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया था। सभी संदिग्ध आतंकी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), बेंगलुरु के लिए कार्य करते थे।
ये सभी आरोपित शिक्षित हैं और इस्लामिक स्टेट (ISIS) से भी इनके सम्बन्ध होने की बात सामने आई है। उसके पास से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, सिम कार्ड्स वगैरह सहित कई चीजें बरामद हुई थी। उसके बाद से ख़ुफ़िया विभाग लगातार ऐसी गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए है।
पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बाद पाकिस्तानी नौसेना ने मंगलवार (मार्च 05, 2019) को दावा किया कि उसने अपने देश के जलक्षेत्र में घुसने की एक भारतीय पनडुब्बी की कोशिश को नाकाम कर दिया है। पाकिस्तान की नौसेना ने मीडिया के साथ एक फुटेज भी शेयर किया, जिसे उसने असली बताया है। इस में दिख रहा है कि यह फुटेज 4 मार्च को रात 08.35 PM पर बनाई गई है। इस संबंध में पाकिस्तान का कहना है कि शांति की नीति के मद्दनेजर भारतीय पनडुब्बी को निशाना नहीं बनाया गया।
पाकिस्तान द्वारा जारी किया गया ‘भ्रामक’ वीडियो
हालाँकि, आतंकवाद जैसे विषयों पर हमेशा मासूम बने रहने वाले पाकिस्तान पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लाम्बा ने आज सुबह ही ट्विटर पर जानकारी देते हुए बताया कि पाकिस्तान के आतंकवादी लगातार समुद्र के जरिए भारत में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं।
“We also have reports of terrorists being trained to carry out attacks through various modus operandi including through the medium of sea”, says Navy Chief Admiral Sunil Lanba at the Indo-Pacific Regional Dialogue @CNBCTV18News@indiannavy
साथ ही शांति के ‘पुरस्कार’ की ओर बढ़ रहे पाकिस्तान ने कहा कि भारत को इस घटना से सीख लेनी चाहिए और ‘शांति की ओर आगे बढ़ना चाहिए’। इस कहानी पर पाकिस्तान की नौसेना ने कहा है कि वह अपने जलक्षेत्र की रक्षा करने के लिए सदैव तत्पर है और किसी भी प्रकार की आक्रामकता का पूरी ताकत के साथ जवाब देने में सक्षम है।
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी हमले में भारत के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के भीतर बालाकोट में जैश के शिविर को निशाना बनाया था जिसमें 300 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने का दावा किया गया है। इसके अगले दिन पाकिस्तान और भारत के बीच हुए हवाई संघर्ष में मिग 21 गिर गया था और उसके पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को पाकिस्तान ने हिरासत में ले लिया था। उन्हें शुक्रवार को भारत को सौंपा गया था। इसके बाद से भारत के बीच लगातार गरमा-गर्मी का माहौल है।
‘द प्रिंट’ को केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल से दिक्कतें हैं। समाचार पोर्टल को गोयल से एक नहीं बल्कि कई दिक्कतें हैं। प्रिंट ने रूही तिवारी का लिखा एक लेख छापा है, जिसमे कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का उनके मातहत अधिकारियों के प्रति रवैया सही नहीं है। इसके लिए कोयला मंत्रालय के पूर्व केंद्रीय सचिव अनिल स्वरूप की पुस्तक ‘Not Just A Civil Servant’ का हवाला दिया गया है। बकौल प्रिंट, इस पुस्तक में कहा गया है कि पीयूष गोयल का मंत्रालय के अधिकारियों के प्रति रवैया बेस्वादु है, वे अपने मंत्रालय के अधिकारियों पर चिल्लाते हैं।
‘द प्रिंट’ का जबरदस्ती किया गया हिटजॉब
इस लेख का शीर्षक दिया गया है कि आईएएस अधिकारी पीयूष गोयल के फैन नहीं हैं। यह अजीब है, क्योंकि कोई नेता मंत्रालय में अधिकारियों को फैन बनाने नहीं जाता बल्कि जनता के लिए कार्य करने जाता है। वह ‘पीयूष गोयल’ हैं, ‘यो यो हनी सिंह’ नहीं, जो रैप कर के बाबुओं को अपना फैन बनाएँ। मजे की बात तो यह कि इस पुस्तक में पीयूष गोयल का कहीं भी नाम नहीं लिया गया है लेकिन चूँकि अक्टूबर 2014 से नवंबर 2016 तक स्वरूप कोयला मंत्रालय में कार्यरत थे और उसी दौरान पीयूष गोयल ही कोयला मंत्रालय संभाल रहे थे, इसीलिए प्रिंट ने गोयल को निशाने पर रखा। अन्य अधिकारियों ने भी प्रिंट की इस ‘खोज’ की ‘तस्दीक़’ की। बकौल प्रिंट, स्वरूप ने अपनी पुस्तक में लिखा है:
“जब मैं कोयला मंत्रालय में था तब एक मंत्री अधिकारियों पर चिल्लाया करते थे। मैंने उनसे कहा कि ‘आप लोगों के सामने इस तरह मेरे संयुक्त सचिव पर नहीं चिल्ला सकते। अगर आपको उनको डाँटना ही है तो आप उन्हें अपने कक्ष में बुला कर ऐसा कर सकते हैं। अगर आप ऐसे ही अधिकारियों पर चिल्लाते रहे तो मैं प्रधानमंत्री के पास जाकर अपने तबादले के लिए निवेदन करूँगा।’ इसके बाद उन्होंने मेरे सामने अधिकारियों को डाँटना बंद कर दिया लेकिन अन्य जगहों पर वे ऐसा करते रहे।”
एक अधिकारी ने ‘द प्रिंट’ को बताया कि तीन महीने तक कार्यवाहक वित्त मंत्री का प्रभार सँभालने के दौरान भी उनके अधिकारियों के साथ झगड़े होते थे। गोयल ने अधिकारियों की आपत्ति को दरकिनार करते हुए जीएसटी दर को कम करने का प्रस्ताव किया। अधिकारियों ने जीएसटी रेट कम नहीं करने की सलाह दी, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया। इसीलिए प्रिंट ने गोयल को अधिकारियों के साथ अशिष्ट व्यवहार करने वाला बताया है।
कैसे मोदी के आते ही ख़त्म हुआ बाबू कल्चर
जैसा कि किसी से छिपा नहीं है, जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने थे तब मंत्रालयों की स्थिति ऐसी थी कि वहाँ अधिकारीगण का ही राज चलता था। एक ताक़तवर प्रधानमंत्री वक़्त की ज़रूरत था, न सिर्फ़ जनता के लिए बल्कि सरकारी बाबुओं को नियंत्रित करने के लिए। ब्यूरोक्रेसी की तो हालत यह रही है कि ख़ुद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार किसी ग़रीब को 1 रुपया भेजती है तो उसके पास मात्र 15 पैसे ही पहुँच पाते हैं। डॉक्टर मनमोहन सिंह के कार्यकाल में उनके ही मंत्रियों पर उनका पूरा नियंत्रण नहीं रहता था, ऐसे में सरकारी बाबुओं व उच्चाधिकारियों का कहना ही क्या। मोदी के रूप में एक शक्तिशाली पीएम के आने के बाद यह कल्चर बदला।
मोदी के पीएम बनने के लगभग एक महीने बाद जून 2014 में हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि मंत्रालयों के अधिकारियों के वर्किंग कल्चर में प्रत्यक्ष बदलाव आया है। मोदी के आने के बाद उन पर काम करने का दबाव बढ़ा, पीएम की एनर्जी के आगे फीका पड़ने का डर बढ़ा और अधिकारी समय पर दफ्तर पहुँचने लगे। इस रिपोर्ट में पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी ने बताया था कि वे अब सिर्फ़ समय पर ऑफिस ही नहीं आते बल्कि एक समय-सीमा के भीतर फाइलों का तुरंत निपटारा भी करते हैं। इसके लिए उन्हें देर तक बैठना पड़ता है।
Print – IAS officers are not happy with Piyush Goel. Public – but why ? Print – because he asks them to do work.. Public – for whom.. Print – for you.. Public – then what’s the issue ?
— The Frustrated Indian (@FrustIndian) March 5, 2019
मोदी के सत्ता सँभालने के बाद लम्बे और सुस्त लंच ब्रेक पर जाने वाले बाबू डेस्क पर ही जल्दी-जल्दी खाने लगे। नियमित बैठकों का दौर चल पड़ा और प्रत्येक योजनाओं पर अधिकारियों की राय ली जाने लगी। इसके बाद अधिकारियों के पास होम-वर्क कर के आने के सिवाय और कोई चारा ही नहीं बचा। अगर मुखिया सख़्त है तो सरकार भी सही से चलती है। ऐसे में मोदी के मंत्रियों ने भी ऐसे बाबुओं पर शिकंजा कसा और उन्हें जनहित के कार्य में लगाया, तो दिक्कत क्या है? उनके काम-काज के तरीके सही हुए हैं, इसमें भी बुराई खोजना कहाँ तक उचित है?
गोयल ने GST दर घटाने का प्रस्ताव अपने लिए लाया था क्या?
‘द प्रिंट’ ने कहा है कि पीयूष गोयल जीएसटी दर में कटौती के लिए अड़ गए और अधिकारियों की एक न सुनी। यह जनता के लिए खुश होने वाली बात है। जैसा कि उसी रिपोर्ट में बताया गया है, ऐसे किसी भी प्रस्ताव के लिए एक सप्ताह पहले सर्कुलर जारी करना होता है लेकिन गोयल ने बैठक में इसे तुरंत प्रस्तावित किया। यह सरकार, जनता व सिस्टम- तीनों के लिए ही अच्छे संकेत हैं। यह दिखता है कि मोदी कैबिनेट के मंत्री किस तरह से कार्य करते हैं। अगर जनहित से जुड़े मुद्दों पर सर्कुलर जारी करने, उस पर अमल करने और उसे ज़मीन पर उतारने में महीनों की बजाय कुछ मिनट्स ही लग रहे हैं, तो दिक्कत क्या है?
Because IAS officers keep sitting on files. And @PiyushGoyal gets them moving. Seen it personally as a railways reporter. He’s been the most proactive minister. https://t.co/3dhPZuoPwQ
सरकार का सीधा सन्देश है कि अब बाबूगिरी नहीं चलेगी। अब फाइल इस मंत्रालय से उस मंत्रालय धूल नहीं फाकेंगे बल्कि उन पर तुरंत निर्णय होगा। वैसे भी, पीएम मोदी त्वरित कार्रवाई में विश्वास रखते हैं और अधिकारीगण भी अब समझ गए हैं कि जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीर है, सचेत है और त्वरित कार्रवाई में भरोसा रखती है। हमें ‘द प्रिंट’ को धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि पीयूष गोयल को नकारात्मक दिखाने के चक्कर में उसने अनजाने में मोदी सरकार के एक अच्छे पहलू को उजागर कर दिया। सरकार ने अधिकारियों को अनुशासित करने के लिए एक बेंचमार्क सेट किया, उसके परिणाम अब दिख रहे हैं।
मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही आईएएस अधिकारियों को उनकी संपत्ति सार्वजनिक करने को कहा। पीएम मोदी ने सबसे पहले अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे कर पीएमओ के अन्य अधिकारियों को भी इसके लिए प्रेरित किया। भ्रष्टाचार और आलस से पीड़ित ब्यूरोक्रेसी में अमूल-चूल बदलाव यूँ ही संभव नहीं हुआ है, इसके लिए पीएम ने स्वयं उदाहरण साबित किया है। मोदी सरकार ने बाबुओं का परफॉरमेंस ट्रैक करने से लेकर ‘अंडर-अचीवर’ अधिकारियों पर कार्रवाई करने तक- हर तरफ से अफसरशाही पर वार किया। 2017 की शुरुआत में सरकार ने कई सुस्त अधिकारियों को समय-पूर्व सेवानिवृत्ति दे कर साफ़-साफ़ सन्देश दे दिया कि अगर पद पर बने रहना है तो ऊर्जावान बन कर कार्य करना पड़ेगा।
यूनिवर्सिटी की नौकरियों में SC-ST और ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने के नए तरीके ’13 पॉइंट रोस्टर’ को लेकर विरोध जारी है। मंगलवार (मार्च 05, 2019) को भी देश भर में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और SC-ST संगठनों ने साथ मिलकर ‘भारत बंद’ बुलाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पुराने ‘200 पॉइंट रोस्टर सिस्टम’ लागू करने को लेकर मानव संसाधन मंत्रालय (MHRD) और UGC द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन को 22 जनवरी को ही खारिज कर दिया था। बाद में सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी, जिसे कोर्ट ने 28 फरवरी को खारिज कर दिया था।
क्या है 13 पॉइंट रोस्टर सिस्टम?
अगर आप किसी ऑफिस में काम करते हैं तो ‘रोस्टर’ शब्द आपके लिए नया नहीं होगा। आपको किस दिन, किस शिफ़्ट में जाना है और किस दिन घर पर आराम फ़रमाना है, ये इस रोस्टर से ही तय होता है। लेकिन बीते कुछ हफ़्तों से ये शब्द सड़कों पर भी सुनने को मिला और सदन की बैठकों में भी। 13 पॉइंट रोस्टर को लेकर SC, ST और OBC वर्ग सरकार से ख़ासा नाराज़ है। उनकी माँग है कि सरकार इसमें हस्तक्षेप करके इसमें बदलाव लाए।
दरअसल, 13 पॉइंट रोस्टर वो प्रणाली है, जिससे विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्तियाँ की जानी हैं। हालाँकि इसके विरोध में कई सप्ताह से अध्यापकों का एक बड़ा वर्ग प्रदर्शन कर रहा है, जिसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा है सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी और अगर याचिका पर भी फ़ैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो वह अध्यादेश या क़ानून लेकर आएगी।
आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार को लेना होगा बड़ा निर्णय
7 मार्च, बुधवार को मोदी सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक में इस मामले पर अध्यादेश ला सकती है, क्योंकि इसके बाद लोकसभा चुनाव की घोषणा होनी है। इससे पहले ही पीएम मोदी को इस मसले पर निर्णय लेना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के 22 जनवरी, 2019 के आदेश को पलटते हुए अध्यादेश लाया जाए या नहीं। हालाँकि, मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर लगातार कह रहे हैं कि ज़रूरत पड़ी तो सरकार अध्यादेश लाकर 13 पॉइंट रोस्टर सिस्टम को रद्द कर देगी।
आरक्षण के विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन बनाना चाहेगा मंत्रालय
इस बारे में सरकार एक अध्यादेश ला सकती है कि विश्वविद्यालयों में विभाग के आधार पर नहीं, बल्कि संस्थान की कुल सीटों के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए। अंतिम कैबिनेट बैठक में सरकार कई महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है। इस बैठक में ही सरकार उच्च शिक्षण संस्थाओं में सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण प्रदान करने के लिए 10% आरक्षण को लागू करने के लिए ₹4,000 करोड़ का अतिरिक्ति फंड आवंटित कर सकती है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती को भारतीय वायु सेना द्वारा किए गए एयर स्ट्राइक से तो समस्या थी ही, अब उन्हें ‘जय हिंद’ बोलने से भी दिक्कत होने लगी है।
पहले उन्होंने एयर स्ट्राइक को लेकर बयान दिया था कि एयर स्ट्राइक पर सवाल करने वाले को देशद्रोही बताना गलत और चौंकाने वाला है। अब महबूबा ने एयर इंडिया के जय हिंद बोलने वाले आदेश पर तंज कसा है।
दरअसल बात यह है कि एयर इंडिया की तरफ से एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा गया है कि तत्काल प्रभाव से सभी क्रू मेंबर्स और कॉकपिट क्रू को हर उड़ान की घोषणा करने के बाद पूरे जोश के साथ ‘जय हिंद’ बोलना होगा। एयर इंडिया के इस निर्देश के बाद महबूबा ने ट्वीट के जरिए इसकी आलोचना की है। महबूबा ने अपने ट्वीट में लिखा है कि “आश्चर्य है कि ऐसे वक्त में जब आम चुनाव होने वाले हैं, देशभक्ति के जोश ने आसमान तक को नहीं छोड़ा है।”
Little surprise that with General Elections around the corner, the josh of patriotism hasn’t even spared the skies. https://t.co/AyVvEPDU3u
एयर इंडिया के मौजूदा चेयरमैन और एमडी अश्विनी लोहनी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान मई 2016 को भी सभी पायलटों के लिए यह एडवाइजरी जारी की थी। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा एडवाइजरी देश के माहौल को ध्यान में रखते हुए स्टाफ के लिए एक रिमाइंडर है। लोहानी ने मई 2016 में अपने कर्मचारियों को एक चिट्ठी में लिखकर कहा था कि विमान के कैप्टन को पूरी यात्रा के दौरान अपने यात्रियों के साथ जुड़ना चाहिए और पहले एड्रेस के अंत में ‘जय हिंद’ शब्द का इस्तेमाल एक जबरदस्त प्रभाव डालेगा।
कॉन्ग्रेस की ओर से गठबंधन को न कहने पर भड़के केजरीवाल ने कहा, “जिस समय पूरा देश मोदी-शाह की जोड़ी को हटाने में लगा है, कॉन्ग्रेस बीजेपी की मदद कर रही है। दिल्ली कॉन्ग्रेस-बीजेपी गठबंधन के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार है।”
At a time when the whole country wants to defeat Modi- Shah duo, Cong is helping BJP by splitting anti-BJP vote. Rumours r that Cong has some secret understanding wid BJP. Delhi is ready to fight against Cong-BJP alliance. People will defeat this unholy alliance. https://t.co/JUsYMjxCxy
कॉन्ग्रेस से गठबंधन के लिए गिड़गिड़ाने और भाजपा को हराने के लिए किसी भी हद तक जाने का दावा करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। आजकल लगातार ख़बरें आ रही थीं कि कॉन्ग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ तालमेल करने का निर्णय ले लिया है और दिल्ली में लोकसभा की 7 सीटों में से 3-3 सीटों पर दोनों पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी। लेकिन शीला दीक्षित ने इन ख़बरों का खंडन करते हुए कहा है कि कॉन्ग्रेस आम आदमी पार्टी से कोई गठबंधन करने को तैयार नहीं है।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने आम आदमी पार्टी के साथ किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह बात कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मिलने के बाद कही है। दरअसल, राहुल गाँधी ने मंगलवार को कॉन्ग्रेस की दिल्ली यूनिट के नेताओं के साथ गठबंधन पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी। दोपहर 12 बजे से इनके घर एक बैठक होनी थी। माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इस गठबंधन के लिए तैयार था, लेकिन पार्टी की दिल्ली यूनिट इसके पक्ष में नहीं थी। यही वजह है कि राहुल गाँधी को बीच में आना पड़ा।
गठबंधन की उम्मीद लगाए AAP का कॉन्ग्रेस से गठबंधन की अफवाहों की पुष्टि इस बात से भी होती दिखी है, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से अब तक 6 पर ही अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था। लेकिन ऐसा लग रहा है कि अरविन्द केजरीवाल का इंतजार अब इंतजार ही रहने वाला है। कॉन्ग्रेस के दिल्ली यूनिट के नेता पहले से ही AAP से गठबंधन के पक्ष में नहीं थे। इससे पहले खबर थी कि AAP ने कॉन्ग्रेस को गठबंधन के लिए फॉर्मूला सुझाया था, फॉर्मूला के तहत AAP चाहती थी कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी 6 सीटों पर लड़े और कॉन्ग्रेस सिर्फ 1 पर।
सोमवार को देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व काफी धूमधाम से मनाया गया। मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन भक्तगण भगवान शिव की आराधना करते हैं और साथ ही उनकी बारात भी निकालते हैं।
इसी अवसर पर सोमवार को रायबरेली के ऊंचाहार में भगवान शिव की बारात निकाली गई, जिसका वहाँ के समुदाय विशेष के लोगों ने विरोध किया। विरोध इतना ज्यादा बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ और बारात दूसरे रास्ते से निकाली गई।
दरअसल शिवरात्रि के मौके पर ऊंचाहार में तकरीबन एक दशक से शिव जी की बरात निकाली जा रही है। मगर पिछले वर्ष किन्हीं कारणों से शिव जी की बरात नहीं निकाली गई थी।
दशकों से यहाँ पर बरात के लिए झाकियाँ सजकर नगर के दर्जी मुहल्ला होते हुए महादेवन मुहल्ले पहुँचती रही हैं। इसी प्रथा के अनुरूप सोमवार को भी झांकियाँ महादेवन शिव मंदिर जा रही थी। मगर झाँकी जैसे ही राजमार्ग पर मुड़ी, तभी एक समुदाय के कुछ लोग सामने आ गए और रास्ता रोक लिया। साथ में कोतवाल बृज मोहन भी थे। मामले को बढ़ता देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और रास्ता बदलने को कहा।
इस बात पर बहस भी तेज हो गई। पुलिस की इस बात पर नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता इस बात पर अड़ गए कि हम हमेशा इसी रास्ते से गए हैं, तो हम रास्ता क्यों बदलें और अगर हमें रोका गया तो ये बारात नहीं निकलेगी।
इसके बाद उन्हें काफी समझाया गया और फिर यह तय हुआ कि झांकियाँ इस रास्ते से नहीं जाएगी। इस रास्ते से लोग केवल पैदल जा सकते हैं। वो भी बिना जयकारा लगाए। उसके बाद झाँकियों को दूसरे रास्ते से मंदिर तक ले जाया गया। इस मामले पर कोतवाल बृजमोहन ने बताया कि शिव जी की बारात शांतिपूर्ण ढँग से निकाली गई।