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MP में हड़पी OBC परिवार की जमीन, कर्नाटक में दलित कर्मचारी की आत्महत्या, झारखंड में जनजातीय समाज के पवित्र स्थल को बनाया कब्रिस्तान: कॉन्ग्रेस का ‘पिछड़ा प्रेम’

राहुल गाँधी आजकल बात-बात में जातिगत जनगणना की माँग करते हैं। बार-बार कहते हैं कि ‘90% जनसंख्या’ को व्यवस्था से बाहर रखा गया है। कहते हैं कि दलितों और जनजातीय समाज का मोदी सरकार में उत्पीड़न हो रहा है। कभी ये पूछते हैं कि केंद्रीय सचिवों में कितने OBC हैं, तो कभी इसी आड़ में मन में छिपी मुस्लिमों वाली बात भी निकल आती है। लेकिन, कॉन्ग्रेस पार्टी का असली चरित्र कुछ और है। आइए, जानते हैं कि SC, ST और OBC के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी का ताज़ा व्यवहार क्या रहा है।

सबसे पहले बात करते हैं कॉन्ग्रेस के OBC प्रेम की, इसके लिए हमें चलना पड़ेगा मध्य प्रदेश के छतरपुर। वहाँ हाल ही में दंगे भड़क गए। कारण – महाराष्ट्र में महंत रामगिरी महाराज के बयान से इन्हें दिक्कत थी। महाराष्ट्र के नासिक और छत्रपति संभाजी नगर में इसके लिए पहले से ही दंगे किए जा चुके थे। मध्य प्रदेश में भी मौलाना इरफ़ान चिश्ती ने वीडियो बना कर कहा कि विरोध प्रदर्शन में जो नहीं आएगा उसे ईद के जुलूस में शामिल होने का अधिकार भी नहीं होगा।

मध्य प्रदेश में दिखा कॉन्ग्रेस का ‘OBC-प्रेम’

इसमें नाम आता है कॉन्ग्रेस के जिला उपाध्यक्ष हाजी शहज़ाद अली का, जिसके नेतृत्व में इस्लामी भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और जम कर हिंसा की। प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है, ऐसे में दंगाई नेता के आलीशान घर पर बुलडोजर चला। हाजी शहज़ाद अली के बारे में पता चला कि कभी ठेला लगा कर पुराने कपड़े बेचने वाला व्यक्ति आज अरबपति है। उसके भाई पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वो खुद की शरिया अदालत लगाता था।

लेकिन, जानने वाली बात ये है कि हाजी शहज़ाद अली ने 20 करोड़ रुपए की जो हवेली बनाई, वो एक कुशवाहा परिवार की जमीन हड़प कर बनाई गई है। जिला प्रशासन के पास इसकी जाँच भी लंबित है। आरोप है कि उसने डर और अपना रुतबा दिखा कर ये जमीन हड़प ली। उसके दुबई कनेक्शन की जाँच हो रही है। उत्तर प्रदेश में कोइरी वर्ग में आने वाले काछी, कुशवाहा, शाक्य और मौर्य OBC वर्ग में आते हैं। कॉन्ग्रेस के एक मुस्लिम नेता ने ओबीसी समाज की जमीन हड़प हवेली खड़ी कर ली और कहीं कोई चर्चा नहीं?

अब सुनिए, उलटा कॉन्ग्रेस नेताओं ने उस नेता का समर्थन किया। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाजी शहज़ाद अली का अवैध घर ध्वस्त किए जाने को अमानवीय और अन्यायपूर्ण बता दिया। प्रियंका गाँधी ने इसे अदालत की अवमानना बताते हुए कहा कि किसी के घर से छत छीन लेना सही नहीं है। उन्होंने इसे बर्बरता करार दिया। उन्हें इस दौरान उस ओबीसी परिवार का दर्द दिखा, जिसकी जमीन हड़पी गई थी? कॉन्ग्रेस के लोकसभा व्हिप मोहम्मद जावेद ने इसे मुस्लिम-घृणा से जोड़ा।

कर्नाटक में देखिए कॉन्ग्रेस का ‘दलित-प्रेम’

हमने अभी कॉन्ग्रेस पार्टी का OBC-प्रेम देखा, आइए अब पार्टी के दलित-प्रेम की भी बात कर लेते हैं। कर्नाटक में सिद्दारमैया मुख्यमंत्री हैं और कॉन्ग्रेस का ही शासन है। वाल्मीकि समाज कई राज्यों में दलितों का एक अहम हिस्सा है। कर्नाटक में इसे ST में डाला गया है। ये काफी पिछड़ा समूह है, क्योंकि इसके अधिकतर लोग सफाईकर्मी हैं। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने से पहले एक तो स्थायी नागरिकता नहीं हासिल थी, ऊपर से इस समाज में पैदा होने वाला हर बच्चा अपने माथे पर ‘सफाईकर्मी’ का ठप्पा लिए पैदा होता था।

उन्होंने 1957 में पंजाब से लाकर बसाया गया था और जम्मू कश्मीर से संबंधित इस कानून के 1944 के बाद आए किसी भी शख्स को नागरिकता नहीं मिल सकती थी। वो न वोट दे सकते थे, न किसी सरकारी योजना का लाभ मिल सकता था और न उनके बच्चों को कोई छात्रवृत्ति। तहत खैर, बात करते हैं कर्नाटक की। वहाँ एक संस्था है – ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि शेड्यूल्ड ट्राइब्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’ (KMVSTDCL), जिसमें घोटाला हुआ। घोटाला करने वाला कौन था, कॉन्ग्रेस का मंत्री।

ट्रस्ट के एकाउंट्स सुपरिटेंडेंट P चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली संदिग्ध परिस्थितियों में। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में जनजातीय कल्याण मंत्री B नागेंद्र का नाम लिखा। बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर और अकाउंटेंट भी इस मामले में जेल में हैं। बी नागेंद्र को इस्तीफा देना पड़ा, CID को आत्महत्या की जाँच सौंपी गई। वो दलित समाज से थे। क्या उनकी संदिग्ध मौत को लेकर किसी कॉन्ग्रेस नेता ने आवाज़ उठाई? नहीं। कॉन्ग्रेस के मंत्री इस घोटाले में ED की गिरफ्त में हैं। दलित अधिकारी की मौत के बाद ही ये घोटाला खुला।

बताया जाता है कि ये पूरा घोटाला 187 करोड़ रुपए का है। मृत अधिकारी की पत्नी ने भी कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री B नागेंद्र पर ही आरोप लगाया। चंद्रशेखरन की पत्नी कविता का कहना है कि उनके पति को ईमानदार होने की कीमत चुकानी पड़ी। एक दलित महिला न्याय की माँग कर रही है, कॉन्ग्रेस सरकार नहीं सुन रही। उनका कहना है कि उन्हें SIT की जाँच पर भरोसा नहीं है, उल्टा उनके पति को ही फँसाया जा रहा है। उन्होंने CBI जाँच की माँग की है। क्या ‘दलित-प्रेम’ वाली कॉन्ग्रेस एक दलित महिला की पुकार सुनेगी? नहीं, वो सिर्फ भाषण देंगे।

कॉन्ग्रेस का जनजातीय-प्रेम भी देखिए

भारत में आज जनजातीय समाज की राष्ट्रपति हैं, वो भी एक महिला। ये बड़े सम्मान की बात है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए, क्योंकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े समूह की महिला देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर हैं। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और भाजपा के कारण संभव हुआ। कॉन्ग्रेस का ‘जनजातीय-प्रेम’ समझने के लिए चलते हैं झारखंड, जहाँ की एक चौथाई से भी अधिक जनसंख्या शेड्यूल्ड ट्राइब्स है। वहाँ झामुमो की सरकार है, हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं, कॉन्ग्रेस इस सरकार में शामिल है।

हाल ही में वहाँ एक घटना सामने आई। मामला जामताड़ा स्थित ‘पुरातन पतित’ नामक जगह का है। जनजातीय समाज के लिए ये एक पवित्र जगह थी, जहाँ वो पूजा-पाठ करते थे। स्थानीय मुस्लिमों ने उसे कब्रिस्तान बता दिया। रहमतुल्लाह नामक एक शख्स की मौत के बाद उसे वहाँ दफना भी दिया गया। पुलिस-प्रशासन ने भी जनजातीय समाज का साथ नहीं दिया। क्या किसी कॉन्ग्रेस नेता ने आवाज़ उठाई? नहीं। नाराज़ जनजातीय समाज ने विरोध किया, लेकिन पुलिस ने मुस्लिमों का ही फैसला माना।

झारखंड में धड़ल्ले से ‘लैंड जिहाद’ चल रहा है, जिसके तहत जनजातीय समाज की लड़कियों से शादी कर ली जाती है, फिर उसके नाम पर जमीनें खरीद ली जाती हैं उस समाज के लोगों से, फिर उस लड़की को पंचायत चुनाव में जिता कर जनप्रतिनिधि बना दिया जाता है और सत्ता की बागडोर मुस्लिमों के हाथ में चली जाती है। इनमें से कई बांग्लादेशी घुसपैठिए भी हैं। इस दिशा में कॉन्ग्रेस वाली गठबंधन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। यानी, वो जनजातीय समाज नहीं बल्कि मुस्लिमों की तरफ हैं, अवैध घुसपैठियों की तरफ हैं। पाकुड़ में भी ऐसा मामला सामने आया, भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने आवाज़ उठाई।

दलित, जनजातीय, OBC… कॉन्ग्रेस के लिए सिर्फ जुबान पर, दिल में ‘मुस्लिम’

इन घटनाओं से स्पष्ट पता चलता है कि सिर्फ मीडिया में चर्चा के लिए और हिन्दुओं को विभाजित करने के लिए दलित, जनजातीय और ओबीसी का रट्टा लगाया जाता है राहुल गाँधी सहित अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा, उनका असली उद्देश्य तो मुस्लिम तुष्टिकरण है। हमने देखा था कैसे मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में दंगों को रोकने के नाम UPA सरकार ऐसा कानून लेकर आ रही थी जिसके बाद हिंसा की स्थिति में सिर्फ हिन्दुओं को ही जेल होती। हिन्दू, यानी सारे हिन्दू। इसमें ओबीसी या SC/ST को इससे बाहर रखने का कोई प्रावधान नहीं था, सारे हिन्दू।

इसी तरह वक्फ बोर्ड देश का तीसरा सबसे बड़ा जमीन मालिक बन गया है। तमिलनाडु में तिरुचिपल्ली के श्रीरंगम तालुका में स्थित तिरुचेंदुरई गाँव में तो वक्फ बोर्ड ने पूरे के पूरे गाँव पर ही दावा ठोक दिया, जिस कारण गाँव वाले अपनी जमीन तक नहीं बेच पाए। जबकि वहाँ 1500 वर्ष पुराना मंदिर भी था, तब का जब इस्लाम का जन्म भी नहीं हुआ था। पटना के फतुहा में भी इसी तरह गाँव पर दावा ठोक दिया गया। वक्फ में संशोधन वाला बिल आया तो कॉन्ग्रेस इसके विरोध में थी। यानी, ये मुस्लिमों की तरफ ही हैं। बाकी सबके साथ तो छलावा कर रहे।

‘जो प्रदर्शन में नहीं आएगा, उसे ईद के जुलूस में भी शामिल होने का हक़ नहीं’: जिस मौलाना के वीडियो के बाद छतरपुर में हुए दंगे वो धराया, महंत को दी थी गाली

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बुधवार (21 अगस्त, 2024) को मुस्लिम भीड़ ने थाने पर हमला कर के कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने कई उपद्रवियों का जुलूस निकाल कर जेल भेजा और मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता हाजी शहजाद अली के घर पर बुलडोजर चलाया। अब इसी घटना में एक मौलाना का वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मौलाना को उन्मादी बयानबाजी करते हुए भीड़ को भड़काते देखा जा सकता है। मौलाना का नाम इरफ़ान चिश्ती बताया जा रहा है। मौलाना को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद मौलाना लोगों से माफ़ी माँगता नजर आया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, थाने पर हमला करने से एक दिन पहले मंगलवार (19 अगस्त) को ने एक वीडियो जारी किया था। उस वीडियो में मौलाना ने ज्यादा से ज्यादा तादाद में मुस्लिमों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया था। इसी वीडियो में मौलाना ने यह भी कहा था कि जो भी इस प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा उसे ईद-उल-मिलाद के जुलूस में भी शिरकत करने का कोई हक नहीं होगा। वीडियो में मौलाना ने यह भी कहा कि इस बार ज्ञापन नहीं दिया जाएगा बल्कि सीधे FIR दर्ज करवाई जाएगी। इरफ़ान चिश्ती ने वीडियो बनाने से 1 रात पहले उलेमाओं से हुई किसी मीटिंग का भी हवाला दिया।

वायरल वीडियो में सबको सलाम पेश करने के बाद इरफ़ान चिश्ती ने संत गिरिराज को मक्कार कहा। बोला, “कल नमाज़-ए-जोहर (जोहर की नमाज़) के बाद शहर की पूरी आवाम मस्तान शाह के मैदान में इकट्ठा हो और उस खिनजीर (सूअर) के नाम पर FIR दर्ज की जाए।” वीडियो में मौलाना ने भड़काऊ भाषण के आरोप में जेल काट रहे मुफ़्ती सलमान अज़हरी की शान में कसीदे भी गढ़े। बकौल मौलाना प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग अल्लाह के रसूल से सच्ची मोहब्बत और अपनी गवाही के लिए जाने जाएँगे।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने मौलाना इरफ़ान चिश्ती को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अदालत से मौलाना का 2 दिनों का कस्टडी रिमांड लिया है। रिमांड पर जाते हुए मौलाना को अपनी गलती याद आई। उसने मीडिया के आगे कबूल किया कि उसने जो किया और कहा वो गलत था। फिलहाल आरोपित मौलाना से पूछताछ की जा रही है। उसके जरिए पुलिस को इस हमले में शामिल कुछ अन्य उपद्रवियों के बारे में जानकारी मिलने का अनुमान है।

‘मदरसा नहीं चला तो सरकारी स्कूल भी नहीं चलेगा’: सरकारी स्कूल को साबिर हुसैन, जमशेर और मौलाना जहीरुद्दीन ने बना दिया मदरसा, बच्चों को देने लगे दीनी तालीम

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक सरकारी स्कूल में मदरसे वाली पढ़ाई कराए जाने का मामला सामने आया है। इस स्कूल की तरफ जाने वाले रास्ते को भी बाँस-बल्ली लगा कर रोक दिया गया था। इस मामले में एक मौलाना सहित कुल 3 लोगों को नामजद किया गया है। शुक्रवार (24 अगस्त, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है जिनके नाम मौलाना जहीरुद्दीन, जमशेर और साबिर हुसैन हैं। स्कूल के सहायक अध्यापक अमीन अहमद अंसारी को सस्पेंड कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सोनभद्र के थाना क्षेत्र कोन की है। यहाँ के क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) मेंबर सोमारू पटेल ने बताया कि ग्राम पंचायत बरवाखाड़ इलाके में बने प्राथमिक विद्यालय में पिछले 15 दिनों से छुट्टी है। आरोप है कि इस छुट्टी में बंद पड़े स्कूल की चाबी प्रिंसिपल ने मौलाना जहीरुद्दीन को दे दी। जमीरुद्दीन इस स्कूल में मदरसे की तर्ज़ पर मुस्लिम बच्चों को उर्दू सहित अन्य इस्लामी किताबें पढ़ाने लगा और दीनी तालीम देना शुरू कर दिया।

बताया जा रहा है कि जब इसकी जानकारी अन्य ग्रामीणों हुई तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। इस स्कूल के सहायक अध्यापक अमीन अंसारी हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने यहाँ की चाबी मौलाना को दे दी थी। सोमारू पटेल ने अमीन अंसारी को ऐसा करने से रोका तो आसपास के कुछ मुस्लिमों ने बाँस और बल्ली लगा कर स्कूल का रास्ता ही रोक दिया। आरोप है कि रास्ता रोकने वालों ने कहा कि अगर मदरसा नहीं चला तो परिषदीय स्कूल भी नहीं चलने दिया जाएगा। शुक्रवार (23 अगस्त 2024) को जब बच्चे स्कूल पहुँचे तो उन्हें रास्ता बंद मिला। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

मामले की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के सदस्य भी स्कूल पहुँचने लगे। सूचना पर पहुँची पुलिस ने रास्ते में लगाए गए अवरोध को हटवाया और फिर तहरीर ले कर जाँच शुरू कर दी। स्कूल में मदरसा चला रहे मौलाना जहीरुद्दीन के साथ रास्ते को रोकने के आरोप में साबिर हुसैन और जमशेर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 285 और 121 (1) के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं शिक्षा विभाग ने आरोपित सहायक अध्यापक अमीन अहमद अंसारी को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस और शिक्षा विभाग इस मामले की जाँच करवा रहा है।

कभी कपड़ों का ठेला लगाता था, फिर ₹20 करोड़ की हवेली में रहने लगा कॉन्ग्रेसी दंगाई हाजी अली शहजाद: लगाता था अपनी अदालत, भाई पर कई आपराधिक केस

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 21 अगस्त 2024 को मुस्लिम भीड़ ने पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था। हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस हमले का सरगना कॉन्ग्रेस नेता हाजी शहजाद अली था, जिसकी करोड़ों रुपए की हवेली और कारों पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। शहजाद अली कुछ साल पहले तक बेहद गरीब हुआ करता था और कपड़े की फेरी लगाता था।

हिंदू परिवार की जमीन पर बनी थी हवेली

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाजी शहजाद अली की जिस हवेली पर प्रशासन का बुलडोजर चला है, वहाँ की जमीन का मालिक कभी एक कोइरी परिवार हुआ करता था। आरोप है कि कई आपराधिक मुकदमों में नामजद हाजी शहजाद अली ने ये जमीन उसे डरा-धमका कर हासिल की थी। इन आरोपों की जाँच फिलहाल जिला प्रशासन करवा रहा है।

हाजी शहजाद अली पर हत्या के प्रयास, धमकी देने और जमीन हथियाने के कई आपराधिक केस पहले से चल रहे हैं। हाजी शहजाद अली के अपने तीन अन्य भाइयों के साथ मिलकर नेक्सस चला रहा था। इस गिरोह में उसका सबसे छोटा भाई फैयाज अली भी शामिल है। फयाज अली बी पुलिस की लिस्ट में एक रजिस्टर्ड अपराधी है। उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं।

लगाता था अपनी अदालत

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, हाजी शहजाद अली किसी समय अपनी खुद की अदालत लगाया करता था। इस अदालत को खानका का नाम दिया गया था। हाजी शहजाद ने इसके कई वीडियो खुद वायरल किए थे। इस अदालत में वह लोगों के आपसी झगड़े अपनी दबंगई से सुलझाता था। इसके लिए वह पैसे भी ऐंठता था।

सुलह समझौतों के मामलों में हाजी अली पीड़ित और आरोपित पक्षों से पैसे ऐंठा करता था। अब पुलिस के पास हाजी शहजाद और उसके भाइयों के अवैध कारनामों की तमाम शिकायतें आ रही हैं। इन सभी शिकायतों पर छतरपुर का जिला प्रशासन जाँच करवा रहा है। इन शिकायतों में करोड़ों रुपए की जमीन कौड़ियों के भाव खरीदना भी शामिल है।

कभी ठेले पर बेचता था कपड़े

हाजी शहजाद अली कोई खानदानी रईस नहीं है। लोग बताते हैं कि कुछ समय पहले तक वह फेरी लगाकर पुराने कपड़े बेचा करता था। स्थानीय लोगों को ये नहीं पता कि कपड़ों की फेरी लगाने वाला हाजी शहजाद इतने कम समय में अरबपति कैसे बन गया। शहजाद के पास कुछ अघोषित सम्पत्तियाँ होने की भी आशंका है।

फिलहाल जिला प्रशासन हाजी शहजाद की चल-अचल सम्पत्तियों की जाँच में जुटा है। इसके अलावा पुलिस पर हमले के कुछ अन्य आरोपितों पर रासुका और जिला बदर जैसी कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि हाजी शहजाद अली कॉन्ग्रेस का जिला उपाध्यक्ष है। मुस्लिमों के पैगंबर के कथित अपमान के नाम पर वह 21 अगस्त को सैकड़ों उपद्रवियों का नेतृत्व कर रहा था।

इस दौरान भीड़ ने उन्मादी नारे लगाए और पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया। इस मामले में पुलिस ने हाजी अली सहित 50 लोगों और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखी है। वीडियो फुटेज से कुछ संदिग्धों को देख कर उनकी धरपकड़ की जा रही है। कई आरोपितों के पास शस्त्र लाइसेंस थे जिनको निरस्त करने की भी कार्रवाई चल रही है।

‘बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने की थी साजिश’: ‘किसान आंदोलन’ पर बोलीं BJP सांसद कंगना रनौत- लटकी थी लाशें, हो रहे थे बलात्कार

बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा कि अगर देश का शीर्ष नेतृत्व को बेहद मजबूत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो किसान आंदोलन के दौरान पंजाब को भी बांग्लादेश बना दिया जाता। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रवी हिंसा फैला रहे थे। प्रदर्शन स्थल पर रेप और हत्याएँ हो रही थीं।

कंगना ने एक मीडिया हाउस दो दिए इंटरव्यू में कहा, “आज हमारा शीर्ष नेतृत्व कमजोर होता तो भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति हो सकती थी। यहाँ किसान आंदोलन के दौरान क्या हुआ, उसे सबने देखा। प्रोटेस्ट के नाम पर वायलेंस फैलाया गया। वहाँ रेप हो रहे थे। मारकर लाशों को लटकाया जा रहा था।” उन्होंने कहा कि उपद्रवियों ने बहुत लंबी योजना बना रखी थी।

अभिनेत्री ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले को सही ठहराया और कहा, “जब उस बिल को वापस लिया गया तो ये उपद्रवी चौंक गए, क्योंकि उनकी प्लानिंग तो बहुत लंबी थी। उन पर समय रहते कंट्रोल पा लिया गया, वरना वे कुछ भी कर सकते थे।” उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया, जहाँ ड्रग्स रैकेट और धर्मांतरण रैकेट सक्रिय हैं।

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “पंजाब में क्या हो रहा है, यह सारी दुनिया देख रही है। ‘उड़ता पंजाब’ फिल्म में वहाँ की रियलिटी भी दिखाई गई है। इस समय पंजाब में ड्रग्स माफिया, धर्म परिवर्तन गैंग और अलगाववादी खालिस्तान समर्थक खूब फल-फूल रहे हैं। वहाँ पर कुछ लोग हर वक्त कानून अपने हाथ में ले रहे हैं।”

महिला सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा महिलाओं के सपोर्ट में आवाज बुलंद की है। आज से 10 साल पहले आमिर खान जी के शो सत्यमेव जयते में मैंने फिल्मों में आइटम नंबर्स का खुला विरोध किया था। आइटम सॉन्ग में महिला को ऑब्जेक्टिफाई किया जाता है। एक महिला का शरीर सिर्फ मनोरंजन के लिए है? इससे समाज में गलत मैसेज जाता है।”

उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘रामलीला’ में आइटम सॉन्ग करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह, फराह खान ने भी अपनी फिल्म के लिए उन्हें कॉल किया था, लेकिन कंगना ने उन्हें भी मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मेरा वजूद मुझे यह सब करने की इजाजत नहीं देता, क्योंकि इसे मैं महिला के अपमान के तौर पर देखती हूँ।”

फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का उनसे खफा रहने के सवाल पर कंगना ने कहा, “लोगों को लगता है कि कंगना कुछ ज्यादा ही सच बोल देती है। मैंने इंडस्ट्री में फैले सेक्सिज्म, नेपोटिज्म और आइटम नंबर्स के खिलाफ हमेशा से ही बोला है। मीटू मूवमेंट के वक्त भी मैंने काफी लोगों के पोल खोले थे। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के वक्त भी मैंने काफी खुलासे किए, जिसकी वजह से काफी लोगों को मिर्ची लगी थी।”

किसान आंदोलन और पंजाब को लेकर कंगना रनौत द्वारा दिए गए बयान पर पंजाब के कॉन्ग्रेस नेता राजकुमार वेरका ने निशाना साधा है। वेरका ने कहा, “कंगना लगातार किसानों पर ऐसे बयान दे रही हैं। उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए और उन पर NSA लगाया जाए।” राजकुमार वेरका 2 बार कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। 2017 से 2022 तक पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। 

‘मियाँ मुस्लिमों से खाली कराओ इलाक़ा, वरना…’: गैंगरेप के बाद 30 संगठनों का सरकार को अल्टीमेटम, कॉन्ग्रेस MLA बलात्कारियों की जगह प्रदर्शनकारियों का कर रहे विरोध

असम के ढिंग में गुरुवार (22 अगस्त, 2024) को कक्षा 8 में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की का गैंगरेप हुआ था। इस गैंगरेप का आरोप मुस्लिम समुदाय के 3 लोगों पर लगा था। इस घटना के बाद अब प्रदेश भर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन प्रदर्शनों में शामिल लोगों ने मियाँ मुस्लिमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शन में शामिल कई संगठनों ने मियाँ मुस्लिमों (बांग्लादेशी घुसपैठियों) को ऊपरी असम खाली कर देने का अल्टीमेटम दिया है। इन प्रदर्शनकारियों ने मियाँ मुस्लिमों को समाज के लिए नासूर बताया है। वहीं कॉन्ग्रेस विधायक ने इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारी संगठनों को चैलेन्ज दे कर माहौल को और भड़का दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी और ऊपरी असम के 30 से अधिक संगठन ढिंग की रेप पीड़िता के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं। इन सभी ने एक स्वर में मियाँ मुसलमान कहे जाने वाले बांग्लादेशी मुस्लिमों को 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए इलाका छोड़ देने के लिए कहा है। ताई अहोम युवा परिषद नाम के संगठन ने कहा, “पूरी घटना मियाँ मुस्लिमों द्वारा की गई है। मियाँ मुसलमान अब असम के लिए नासूर बन गए हैं। निचले असम में भी कई मियाँ मुसलमान हैं। वे बलात्कार, डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों में शामिल हैं। इनसे लोग बेहद परेशान हैं।”

‘ताई अहोम युवा परिषद’ ने आगे कहा कि निचले असम जैसी घटनाएँ अब ऊपरी असम में भी हो रहीं हैं। परिषद ने सरकार को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है कि वो बांग्लादेशी घुसपैठियों यानी कि मिया मुस्लिमों को फ़ौरन बाहर खदेड़े। इस तय समय सीमा में कोई कदम नहीं उठाने पर ‘ताई अहोम युवा परिषद’ ने बल प्रयोग कर के खुद मिया मुस्लिमों को बाहर निकालने की घोषणा की है। अपने इस संकल्प को संगठन ने अंतिम शब्द बताया है जिसमे कोई समझौता होने की गुंजाईश नहीं है।

ताई अहोम युवा परिषद द्वारा उठाई गई मिया मुस्लिमों को बाहर करने की माँग को असम के कई अन्य संगठनों का भी समर्थन मिला है। इसमें असोमिया युवा मंच, असोमिया महिला मंच, बीर लचित सेना, ऑल असम आदिवासी छात्र संघ, कृषक मुक्ति संग्राम समिति, छात्र मुक्ति संग्राम समिति, असम सब्स आदिवासी छात्र संघ, गरिया मारिया देसी जातीय परिषद, चुटिया जातीय युवा सम्मेलन, ऑल असम चुटिया छात्र संघ, ऑल असम सोनोवाल कछारी छात्र संघ, ताई अहोम युवा परिषद, ऑल असम सोनोवाल कछारी छात्र संघ, ताई अहोम युवा परिषद ऑल मोरन छात्र संघ, और अहोम सेना आदि शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक की चुनौती

वहीं असम से कॉन्ग्रेस विधायक अब्दुर रशीद मंडल द्वारा मिया मुस्लिमों को निकालने का ऐलान कर रहे संगठनों को चुनौती दी गई है। उन्होंने चैलेन्ज दे कर कहा कि प्रदर्शनकारी ऊपरी असम से मियाँ मुसलमानों को नहीं निकाल पाएँगे। ढिंग की घटना की निंदा करते हुए अब्दुर रशीद ने आगे कहा कि कुछ लोगों की गलती के लिए सबको दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कॉन्ग्रेस विधायक का दावा है कि मियाँ मुस्लिम असम के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे कार्यों में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने ऐसे तनावपूर्ण हालातों के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों को जिम्मेदार बताया।

‘महिलाओं के प्रति अपराध अक्षम्य, अपराधियों के साथ-साथ मददगार भी नहीं बख्शे जाने चाहिए’: महाराष्ट्र में PM मोदी ने लखपति दीदियों की सफलता की बताई कहानी

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार (25 अगस्त 2024) को महाराष्ट्र के जलगाँव में ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम में शामिल हुए और 11 लाख लखपति दीदियों को सर्टिफिकेट दिया। इस दौरान पीएम ने इस स्व-सहायता समूहों को 5,000 करोड़ रुपए का ऋण जारी किया। प्रधानमंत्री ने सभा संबोधित करते हुए रेप की घटनाओं पर भी दुख व्यक्त किया और कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध अक्षम्य है।

प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के खिलाफ हो रही हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा, “आज देश का हर राज्य अपनी बेटियों की पीड़ा और गुस्से को समझ रहा है। मैं देश के हर राजनीतिक दल और राज्य सरकार से कहूँगा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध अक्षम्य है। दोषी कोई भी हो उसे बचना नहीं चाहिए। सरकारें आती जाती रहेंगी। नारी के सम्मान और गरिमा और उनके जीवन की रक्षा का दायित्व हमारा है।”

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर की रेप एवं हत्या और बदलापुर में बच्चियों के यौन शोषण पर देश उबल रहा है। इनका नाम लिए बिना पीएम ने कहा, “महिलाओं के खिलाफ अपराध को किसी भी रूप में मदद करने वाले बचने नहीं चाहिए। अस्पताल हो, स्कूल हो, दफ्तर हो या फिर पुलिस व्यवस्था… जिस स्तर पर लापरवाही हो, सबका हिसाब होना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों के लिए हम कानून को मजबूत और सख्त बना रहे हैं। पहले शिकायतें आती थीं कि एफआईआर दर्ज नहीं होती थी। हम बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लाए और इसमें कई संशोधन किए। अगर महिला थाने नहीं जाना चाहती है तो वह ई-एफआईआर (ऑनलाइन) दर्ज करा सकती है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “ई-एफआईआर में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं कर सकता। शादी के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध की शिकायतें आती थीं। हमने बीएनएस में संशोधन किए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ है।” उन्होंने कहा कि भारत की मातृशक्ति ने समाज और राष्ट्र के भविष्य को बनाने में हमेशा से बहुत बड़ा योगदान दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा सरकार में महिला के हित में हुए कार्यों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सरकार आज बेटियों के लिए हर सेक्टर को खोल रही है, जहाँ कभी उन पर पाबंदियाँ होती थीं। आज तीनों सेनाओं में महिला अफसर तैनात हो रही हैं। फाइटर पायलट बन रही हैं। गाँव में कृषि और डेयरी सेक्टर से लेकर स्टार्टअप्स क्रांति तक में बेटियाँ बिजनेस मैनेज कर रही हैं।

लखपति दीदी योजना को लेकर पीएम ने कहा, “लोकसभा चुनाव के दौरान मैं आपके बीच आया था। तब मैंने कहा था हमें 3 करोड़ बहनों को लखपति बनाना है, जो सेल्फ हेल्प ग्रुप का काम करती हैं। मैंने कहा था कि इनकी एक साल की कमाई 1 लाख रुपए से ज्यादा होगी। बीते दस साल में 1 करोड़ लखपति दीदी बनीं और बीते 2 महीने में 11 लाख नई लखपति दीदी बन गईं।”

इस योजना की सफलता के उत्साहवर्द्धक नतीजे मिलने की बात करते हुए पीएम ने कहा, “इस महीने 1 लाख से ज्यादा लखपति दीदी बनी हैं। इसके लिए महायुति सरकार ने बहुत मेहनत की है। महाराष्ट्र में एक से बढ़कर एक योजनाएँ चलाई जा रही हैं। लखपति दीदी बनाने का ये अभियान सिर्फ बहनों बेटियों की कमाई बढ़ाने का अभियान नहीं है। ये आने वाली पीढ़ियों को सशक्त करने का अभियान है।”

महिला मंडलों को सरकार द्वारा दिए गए प्रोत्साहन को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “साल 2014 तक 25,000 करोड़ रुपए से भी कम बैंक लोन सखी मंडलों को मिला था। वहीं, पिछले 10 साल में करीब 9 लाख करोड़ रुपए की मदद दी गई है। कहाँ 25 हजार करोड़ और कहां 9 लाख करोड़। इतना ही नहीं सरकार जो सीधी मदद देती है। उसका परिणाम मिला है।”

जनजातीय समाज के पवित्र स्थल को मुस्लिमों ने बना दिया कब्रिस्तान: जहाँ करते थे पूजा वहाँ रहमतुल्लाह को दफना दिया, पूर्व CM बोले – प्रशासन भी दे रहा साथ

झारखंड के जामताड़ा जिले में एक जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए मुस्लिम और जनजातीय समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए हैं। विवाद की वजह ‘पुरातन पतित’ नाम की जगह है। जनजातीय लोग इसे अपनी धार्मिक जमीन बता रहे हैं जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग इसे अपना कब्रिस्तान घोषित कर रहे हैं। मुस्लिम पक्ष द्वारा यहाँ पर एक शव को भी दफना दिया गया जिस से तनाव का माहौल बन गया। जनजातीय समुदाय ने पुलिस पर मुस्लिमों के पक्ष में कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। भाजपा ने इस विवाद की वजह हेमंत सोरेन सरकार की तुष्टिकरण की नीति बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला जामताड़ा के नारायणपुर थाना क्षेत्र में आने वाले पावन पतित नाम की जगह का है। शनिवार (24 अगस्त, 2024) को इसी क्षेत्र के शहरपुर पंचायत में रहने वाले गाँव पीठुआडीह के रहमतुल्लाह की मौत हो गई थी। रहमतुल्लाह का जनाजा ले कर मुस्लिम समुदाय पावन पतित जमीन की जमीन पर बढ़ चला। इसी जमीन पर रहमतुल्लाह को दफनाने की तैयारियाँ शुरू हो गईं। जैसे ही आसपास के जनजातीय लोगों को इसकी जानकारी हुई वो नाराज हो गए।

बताते चलें कि पावन पतित भूमि को जामताड़ा के जनजातीय लोग अपना धार्मिक स्थल मानते हैं। जैसे ही उन्हें अपने धार्मिक स्थल पर लाश दफनाने की तैयारियों का पता चला, वो एकजुट हो कर मौके पर पहुँच गए। उन्होंने शव दफनाने का विरोध किया तो दूसरी तरफ से भी तनातनी शुरू हो गई। माहौल को तनावपूर्ण देख कर मौके पर पुलिस बल पहुँच गया। पुलिस ने थोड़ी देर बातचीत के बाद मुस्लिमों का पक्ष लिया और पावन पतित की भूमि पर ही रहमतुल्लाह को दफना दिया गया।

स्थानीय जनजातीय समुदाय ने पुलिस की कार्रवाई को एकपक्षीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन भी मुस्लिम समुदाय का साथ दे रहा है। हालात तनावपूर्ण देखते हुए इलाके में पुलिस बल की सक्रियता बढ़ा दी गई है। वहीं झारखंड के भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस हरकत को ‘लैंड जिहाद’ का नाम दिया है। बाबूलाल मरांडी के मुताबिक, राज्य में झामुमो और कॉन्ग्रेस की मिलीजुली सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण कर रही है जिसका जवाब जनजातीय समाज चुनावों में देगा।

‘वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क हैं हम’: दलित महिला से कई बार रेप करने वाले रफीक को HC से जमानत नहीं, नौकरी का झाँसा देकर फाँसा था

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक शादीशुदा दलित महिला से रेप कर के उसे इस्लाम कबूल करवाने के आरोपित की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। आरोपित का नाम रफीक है। 33 वर्षीय रफीक की जमानत अर्जी पर उच्च न्यायालय ने यह फैसला 3 जुलाई, 2024 को सुनाया है। अपनी टिप्पणी में न्यायाधीश ने कहा कि वो समाज को संदेश देना चाहते हैं कि अदालतें वंचितों की रक्षा करने व जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सतर्क हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ बेंच में हुई। रफीक ने जिला अदालत से ख़ारिज होने के बाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। इस पर जस्टिस एस रचैया की कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की तमाम दलीलें काम नहीं आईं और आखिरकार रफीक की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी गई। अपनी टिप्पणी में न्यायाधीश ने आरोपित के अपराध को गंभीर श्रेणी का बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अदालत ने पीड़िता को गरीब और मासूम माना जो रफीक की साजिश का शिकार हुई।

निर्णय देते हुए की गई टिप्पणी में जस्टिस रचैया ने कहा कि समाज को यह संदेश जाना चाहिए कि अदालतें वंचितों के अधिकारों व जबरन धर्मांतरण जैसे अपराधों के खिलाफ सतर्क हैं। रफीक की तरफ से अधिवक्ता महंतेश एस हिरेमठ ने बहस की। वहीं सरकारी वकील प्रवीण वाई देवरेद्दियवर ने इस जमानत अर्जी का विरोध किया। पीड़िता की तरफ से सीनियर एडवोकेट एस आर हेगड़े ने बहस की।

क्या था मामला

बताते चलें कि रफीक पर आरोप है कि उसने नौकरी दिलाने के नाम पर पहले एक अनुसूचित जाति (SC वर्ग) की महिला से दोस्ती की और इसी बहाने उसे अपने साथ ले कर बेलगावी चला गया। बेलगावी में पीड़िता को एक कमरे में रखा गया। यहाँ रफीक ने पीड़िता से कई बार बलात्कार किया। पीड़िता शादीशुदा और 2 बच्चों की माँ थी जिसे कुछ दिनों बाद इस्लाम कबूल करने का दबाव दिया जाने लगा। कुछ दिनों बाद पीड़िता जैसे-तैसे रफीक के चंगुल से निकल कर भागने में कामयाब रही थी।

घर आ कर महिला ने अपने पति को सारी बात बताई थी। पीड़िता के पति ने रफीक को नामजद करते हुए पुलिस में FIR दर्ज की थी। यह FIR IPC की धाराओं के साथ SC/ST एक्ट व कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट टू फ्रीडम ऑफ़ रिलिजन एक्ट 2022 के तहत दर्ज हुई थी। रफीक को गिरफ्तार कर लिया गया था जिसकी जमानत जिला अदालत ने ख़ारिज कर दी थी। आखिरकार अब रफ़ीक की जमानत अर्जी हाईकोर्ट से भी ख़ारिज हो चुकी है।

10% से बढ़ा कर किया 14%, अब हो गया 18.5%… समझिए कैसे कर्मचारी नहीं मोदी सरकार उठाएगी पेंशन का भार: 23 लाख को UPS से फायदा, 10 बिंदुओं में समझें नई स्कीम

मोदी सरकार अब सरकारी कर्मचारियों के लिए UPS (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) लेकर आई है।केंद्रीय कैबिनेट ने इस निर्णय को मंजूरी भी दे दी है। इससे पहले NPS (न्यू पेंशन स्कीम) लागू कर दी गई थी, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार OPS (ओल्ड पेंशन स्कीम) लागू करने की ज़िद कर रही थी। इसके लिए सरकारी कर्मचारियों को भड़काया जा रहा था। ऐसे में मोदी सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है। OPS ने सरकारी खजाने पर भारी बोझ भी पड़ता है। आइए, 10 बिंदुओं में समझते हैं कि UPS है क्या।

पहला, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि सरकारी कर्मचारियों की तरफ से सबसे महत्वपूर्ण विषय था कि उन्हें एक निश्चित राशि चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने इसे वाजिब माँग बताते हुए कहा कि कई वित्तीय मॉडलों का अध्ययन कर के 50% Assured Pension की व्यवस्था की गई। रिटायरमेंट से पहले के 12 महीनों की औसत बेसिक Pay का आधा होगा। इसकी योग्यता सेवा में 25 वर्ष पूरे करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगी। 10-25 के बीच अनुपातिक पेंशन की व्यवस्था होगी।

दूसरा, कर्मचारियों और इस योजना का भारत नहीं डाला जाएगा। आज कर्मचारी 10% योगदान देते हैं और 10 वर्ष पहले तक सरकार भी 10% योगदान देती थी। मोदी सरकार ने 2019 में इसे 14% कर दिया, जो अब 18.5% हो जाएगा। तीसरा, कभी किसी कर्मचारियों की मौत हो जाए तो पति/पत्नी को फैमिली पेंशन मिलेगा। मौत से तुरंत पहले जो पेंशन थी, उसका 60% उसके पति अथवा पत्नी को मिलेगा। चौथा, न्यूनतम पेंशन की भी व्यवस्था की गई है।

ये एक बड़ा विषय था क्योंकि सेवा की अवधि कम होने की स्थिति में पेंशन में वित्तीय योगदान भी कम होता था और इस तरह पेंशन में पर्याप्त धनराशि नहीं मिल पाती थी। अब ऐसा नहीं होगा। इसीलिए, अब 10,000 रुपए की न्यूनतम Assured पेंशन की व्यवस्था की गई है। पाँचवाँ, महँगाई के साथ कर्मचारियों को भी फायदा मिलेगा। ‘ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स’ का इस्तेमाल कर के पेंशन के ऊपर इन्फैशन इंडेक्सेशन मिलेगा, जिसे DA की जगह DR कहा जाएगा।

छठा, इस योजना में Lump-Sum पेमेंट है, जो ग्रैच्युटी के अतिरिक्त होगा। Superannuation की स्थिति में ये धनराशि तय की गई है। हर 6 महीने की सेवा के लिए मासिक PA-DA को जोड़ कर जितना होगा उसका 10% दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अगर किसी की सेवा 30 वर्ष की है तो उसे 5 महीने का वेतन इसके तहत मिलेगा। सातवाँ, जो लोग रिटायर हो चुके हैं और NPS के तहत हैं वो भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। PPF रेट के ब्याज के साथ उन्हें इंटरेस्ट का पेमेंट एरियर के रूप में किया जाएगा।

8वाँ, कर्मचारी ये चुन सकेंगे कि वो NPS में रहना चाहते है या फिर UPS में। इस योजना का लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलेगा। नौवाँ, ये योजना 1 अप्रैल, 2025 से लागू हो जाएगी। केंद्र सरकार के करीब 23 लाख कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। अंतिम और दसवीं महत्वपूर्ण बात, राज्य सरकारें भी इसी आर्कटेक्चर को अपने कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल कर सकती है। राज्य सरकार के भी कर्मचारी अगर इसमें शामिल होते हैं तो करीब 90 लाख सरकारी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।