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कोलकाता-बदलापुर पर उबाल के बीच ‘चौरंग’ की चर्चा, छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में महिलाओं का था सुरक्षा कवच: जानिए इसके बारे में सब कुछ

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित RG Kar मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और क्रूर तरीके से हत्या की घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। खासकर मेडिकल फिल्ड के लोग पूरे भारत में सड़क पर उतरे हुए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद इसकी वारदात की जघन्यता का पता चला, जिसके बाद बलात्कारियों और हत्यारों को कड़ी सज़ा देने की माँग हो रही है। इसी बीच महाराष्ट्र के बदलापुर में भी यौन शोषण की एक घटना सामने आई।

पश्चिम बंगाल में कोलकाता पुलिस पीड़ित परिवार के लिए न्याय माँगने वालों को ही नोटिस भेजने लगी, गुंडों ने अस्पताल में घुस कर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की पिटाई की, CM ममता बनर्जी जो कि राज्य की गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री भी हैं उन्होंने एक रैली निकाली, TMC नेताओं ने मुख्यमंत्री की आलोचना करने वालों को धमकाया और अब राकेश टिकट व श्याम मीरा सिंह जैसे लोग कह रहे हैं कि घटना को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। महाराष्ट्र वाली घटना में उधर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

चौरंग सज़ा को लेकर रितेश देशमुख का ‘X’ पोस्ट

इसी बीच अभिनेता रितेश देशमुख ने ‘X’ पर कुछ ऐसा पोस्ट किया है जो चर्चा का विषय बन रहा है। उन्होंने लिखा कि एक अभिभावक के रूप में वो पूरी तरह निराश हैं, दुःखी हैं और गुस्से से भरे हुए हैं। स्कूल के पुरुष सफाई कर्मचारी द्वारा 4 वर्ष की दो लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय को घर की तरह ही सुरक्षित स्थान माना जाता है, ऐसे में इस राक्षस को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। हालाँकि, इसके बाद उन्होंने जो लिखा वो गौर करने लायक़ है।

दिवंगत पूर्व CM विलासराव के बेटे रितेश देशमुख का कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ऐसे अपराधों में दोषियों को वो सज़ा देते थे जिनके वो हक़दार होते थे – चौरंग। अभिनेता ने माँग की कि अब इस सज़ा को वापस अमल में लाए आने की ज़रूरत है। कमेंट्स में भी लोगों ने उनका समर्थन किया। छत्रपति शिवाजी महाराज अपनी न्यायप्रियता और जन-भावनाओं के अनुरूप कार्य करने के लिए जाने जाते थे। आइए, ऐसे में जानते हैं कि ये ‘चौरंग’ सज़ा आखिर होता क्या है।

कृष्णाजी अनंत द्वारा लिखे गए ‘सभासद बखर’ में भी इस सज़ा की चर्चा है। इसे सन् 1697 में लिखा गया था। चूँकि वो छत्रपति शिवाजी महाराज के समकालीन थे, इसीलिए उनके द्वारा लिखे को हम मूल स्रोत के रूप में ले सकते हैं। उन्होंने बताया है कि कैसे शिवाजी एक आदर्श राजा थे, जो न्याय करने के लिए लोकप्रिय थे और अपने शासन में कानून का राज स्थापित करने के लिए प्रयासरत थे। इसमें सबसे कड़ी सज़ाओं में ‘चौरंग’ का जिक्र है। विश्वासघात, धोखाधड़ी या फिर विरोधी राज्य के लिए जासूसी में ये सज़ा दी जाती थी।

क्या थी ‘चौरंग’ सज़ा, उस समय क्यों थी ज़रूरी

खासकर के मराठा साम्राज्य के विरुद्ध जो लोग विश्वासघात या जासूसी करते थे उन्हें ये सज़ा दी जाती थी। आइए, अब जानते हैं कि इस सज़ा की प्रक्रिया क्या थी। इसमें अपराधी के हाथ और पाँव को अलग-अलग दिशा में 4 घोड़ों के साथ बाँध दिया जाता था। फिर उन घोड़ों को अलग-अलग दिशा में दौड़ने का आदेश दिया जाता था। स्पष्ट है, दो हाथ और दो पाँव अलग-अलग दिशा में बँधे होंगे और खींचे जाएँगे तो किसी का भी शरीर कई टुकड़ों में फट जाएगा। यही थी ‘चौरंग’ सज़ा।

चूँकि वो समय निरंतर युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता का था, कई राज्य सिर्फ इसीलिए तबाह हो गए क्योंकि किसी गद्दार ने सारे भेद जाकर दुश्मन को बता दिए। ऐसे में खासकर राज्य के साथ विश्वासघात को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता था। इसका सीधा अर्थ है कि हिंदवी साम्राज्य के पहले छत्रपति एक ऐसे राजा थे जो दयावान भी थे लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कड़ी सज़ा देने से भी नहीं हिचकते थे। अधिकारियों, जनता और दरबार में अनुशासन बनाए रखने के लिए उस समय इस तरह की सज़ा की ज़रूरत भी होती थी।

औरंगज़ेब के शासन वाला विशाल मुग़ल साम्राज्य और बगल में बीजापुर सल्तनत – शिवाजी महाराज के लिए सैन्य क्षमता के प्रदर्शन के साथ-साथ आंतरिक दुश्मनों को नेस्तनाबूत करना भी आवश्यक था। और शिवाजी का साम्राज्य तो नया-नया था, बड़ी मुश्किल से वो राजा बने थे और राज्याभिषेक के बाद सरदारों से मान्यता प्राप्त की थी। उनके समय जॉन फ्रायर नाम का एक ब्रिटिश शख्स भी भारत घूमने आया था, उसने भी मराठा साम्राज्य में दी जाने वाली कड़ी सज़ाओं का जिक्र किया है।

अक्सर उनके लोग अलग महिलाओं को बंदी बना कर लाते थे तो शिवाजी उन्हें रिहा करने का आदेश देते थे, साथ ही जो बहादुर बंदी उनकी सत्ता को स्वीकार करते थे उन्हें वो उपहार वगैरह भी देते थे। महिलाओं-बच्चों के अलावा जो आम लोग होते थे, उन्हें भी वो जाने देते थे। छत्रपति शिवाजी महाराज का अपनी सेना को स्पष्ट आदेश था कि महिलाओं-बच्चों और आम लोगों को गिरफ्तार न किया जाए, ब्राह्मणों को परेशान न किया जाए। लालमहल में जब शिवाजी ने मुग़ल सूबेदार शाइस्ता खान पर हमला किया था, तब भी उन्होंने महिलाओं पर हाथ नहीं उठाया।

न्यायप्रिय राजा थे छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज माँ भवानी के भक्त थे, एक बार स्वप्न के बाद उन्होंने संगमरमर से माँ भवानी का मंदिर बनवाया। प्रतापगढ़ की पहाड़ी पर ये मंदिर आज भी है। माँ भवानी की प्रतिमा के लिए उन्होंने खजाने खोल दिए और कीमती आभूषण बनवाए। प्राचीन हिन्दू साहित्य और परंपरा के हिसाब से ही शिवाजी के शासनकाल की न्याय पद्धति चलती थी। राजा के दरबार को ‘हज़ार मजलिस’ कहा जाता था। उन्हें नौसेना के गठन का भी श्रेय दिया जाता है, उस समय पुर्तगाल, फ्रांस और ब्रिटेन समुद्र में ख़ासे सक्रिय थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज गुरु समर्थ रामदास के अनुयायी थे, जो हनुमान जी के भक्त थे। छत्रपति शिवाजी महाराज का सार्वजनिक जीवन मात्र 19 वर्ष की उम्र में सन् 1646 में तोराना के किले पर नियंत्रण के साथ शुरू हुआ था, और अगले 34 वर्षों तक ये अनवरत चलता रहा। छत्रपति शिवाजी महाराज बिना हिंसा के सबको एक करना चाहते थे, लेकिन बीजापुर सल्तनत ने उनके पिता को धोखे से बंदी बना लिया था, उन पर कई हमले किए। शिवाजी के पास जब कल्याण के नवाब की बहू को बंदी बना कर पेश किया गया था तो उन्होंने उन्हें ससम्मान वापस भेजा।

एक बार पुणे के राँझे गाँव के एक पाटिल ने एक स्त्री का बलात्कार किया। शिवाजी ने दोनों पक्षों को दरबार में सुनवाई के लिए बुलाया तो आरोप सही पाए। उन्होंने तत्काल अपराधी के हाथ-पाँव तोड़ डाले जाने की सज़ा सुनाई। छत्रपति शिवाजी महाराज ने जब अपना अभियान शुरू किया था तो न उनके पास राज्य था और न थी सेना। वहाँ से उन्होंने सन् 1674 में राज्याभिषेक तक की यात्रा तय की। आज फिर उनके उनके शासनकाल को याद किया जा रहा है, जहाँ अत्याचारियों के लिए कोई जगह नहीं थी।

जज का काम फैसला देना, उपदेश देना नहीं: जानिए क्यों ‘दो मिनट का मजा’ पर घिरी कलकत्ता हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों बदला फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर काबू रखने की सलाह दी गई थी। मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीश का काम निर्णय लेना है, उपदेश देना नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणी आपत्तिजनक, अप्रासंगिक, उपदेशात्मक और अनुचित थी। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस निर्णय से गलत संकेत गया है।

दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन की पीठ ने 18 अक्टूबर 2023 को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किशोर लड़कियों को यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचना चाहिए। इसके साथ ही नाबालिग से रेप के दोषी युवक को बरी कर दिया। बकौल कोर्टस युवक का पीड़िता के साथ ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ थे।

कलकत्ता हाई कोर्ट की टिप्पणी का ‘किशोरों की निजता के अधिकार के संबंध में’ शीर्षक से सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने सुनवाई की। मंगलवार (20 अगस्त 2021) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और उनकी टिप्पणियों पर असहमति जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “न्यायालय के निर्णय में न्यायाधीश की विभिन्न विषयों पर व्यक्तिगत राय शामिल नहीं हो सकती। इसी तरह, न्यायालय द्वारा परामर्श क्षेत्राधिकार का प्रयोग पक्षों को सलाह देकर नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश को किसी मामले का निर्णय करना होता है, उपदेश नहीं देना होता। निर्णय में अप्रासंगिक और अनावश्यक सामग्री शामिल नहीं हो सकती।”

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा, “निर्णय सरल भाषा में होना चाहिए और बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। संक्षिप्तता गुणवत्तापूर्ण निर्णय की पहचान है। हमें याद रखना चाहिए कि निर्णय न तो कोई थीसिस है और न ही साहित्य का कोई टुकड़ा। हालाँकि, हम पाते हैं कि विवादित निर्णय में न्यायाधीश की व्यक्तिगत राय, युवा पीढ़ी को सलाह और विधायिका को सलाह शामिल है।”

निर्णय लिखने में किस बात का ध्यान रखें कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी विवाद को तय करने के लिए ‘पूरी तरह अप्रासंगिक’ और ‘चौंकाने वाली’ है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अपील में दोषसिद्धि के आदेश पर विचार करते समय न्यायालयों के निर्णय में निम्नलिखित बातें शामिल होनी चाहिए:

(i) मामले के तथ्यों का संक्षिप्त विवरण, (ii) अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य की प्रकृति, यदि कोई हो, (iii) पक्षों द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्क, (iv) साक्ष्य के पुनर्मूल्यांकन पर आधारित विश्लेषण और (v) अभियुक्त के अपराध की पुष्टि करने या अभियुक्त को बरी करने के कारण।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलीय न्यायालय को मौखिक और दस्तावेजी, दोनों तरह के साक्ष्यों की जाँच करनी चाहिए और उनका पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए। इसके बाद अपीलीय न्यायालय को अभियोजन पक्ष के साक्ष्य को स्वीकार करने या अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पर अविश्वास करने के कारणों को दर्ज करना चाहिए। न्यायालय को यह तय करने के लिए कारण दर्ज करने चाहिए कि अभियुक्त के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले में यदि दोषसिद्धि हो जाती है तो न्यायालय को सजा की वैधता और पर्याप्तता से निपटना होगा। ऐसे मामले में सजा की वैधता और पर्याप्तता पर कारणों के साथ एक निष्कर्ष दर्ज किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करने के पीछे का ये उद्देश्य है कि जिसके पक्ष में या जिसके विपक्ष में निर्णय दिया या है, उन्हें पता चले कि ऐसा क्यों किया गया। इसलिए निर्णय साधारण भाषा में होनी चाहिए और ठोस तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।

पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता

इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले को गलत और परेशान करने वाला बताया था। शीर्ष अदालत स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई कर रही है। 4 जनवरी 2024 को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले की वैधता पर सवाल उठाते हुए टिप्पणियों को ‘समस्याग्रस्त’ बताया।

पिछली सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के कुछ हिस्सों को बेहद आपत्तिजनक और अनुचित था। साथ ही कहा था कि न्यायाधीशों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने निजी विचार रखें या भाषण दें। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का पूरी तरह उल्लंघन है।

पिछली सुनवाई के दौरान ही शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इसके खिलाफ अपील दायर करने को लेकर जवाब माँगा था। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस अपील के साथ स्वत: संज्ञान की कार्यवाही को जोड़ने के लिए भी कहा है।

क्या है मामला?

हाई कोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन ने 18 अक्टूबर 2023 को नाबालिग लड़की से रेप के दोषी एक युवक को बरी कर दिया था। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि किशोर लड़कियों को यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचना चाहिए। इसके साथ ही नाबालिग से रेप के दोषी युवक को बरी कर दिया। युवक का पीड़िता के साथ ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ थे।

इतना ही नहीं, कलकत्ता हाई कोर्ट की पीठ ने इस तरह के मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की थी। 16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के बीच सहमति से सेक्स की स्थिति में इसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया था। हाई कोर्ट ने कम उम्र में यौन संबंधों को लेकर किशोरों को नसीहत भी दी थी। 

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा था, “प्रमुख एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन है, जो मुख्य रूप से पुरुषों में वृषण (Testicle) और महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) से और पुरुषों और महिलाओं दोनों में अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Glands) से थोड़ी मात्रा में स्रावित होता है। हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड्स टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं, जो मुख्य रूप से (पुरुषों में) सेक्स या कामेच्छा के लिए जिम्मेदार होता है।

हाई कोर्ट ने आगे कहा था, “इसका अस्तित्व शरीर में है। इसलिए जब संबंधित ग्रंथि उत्तेजना से सक्रिय हो जाती है, तो यौन इच्छा जागृत होती है। लेकिन संबंधित जिम्मेदार ग्रंथि का सक्रिय होना स्वचालित नहीं है। क्योंकि इसे हमारी दृष्टि, श्रवण, कामुक सामग्री पढ़ने और विपरीत लिंग के साथ बातचीत से उत्तेजना की आवश्यकता होती है। यौन इच्छा हमारी अपनी क्रियाओं से जागृत होता है।”

हाई कोर्ट ने कहा था, “किशोरों में सेक्स सामान्य है लेकिन यौन इच्छा या ऐसी इच्छा की उत्तेजना व्यक्ति, पुरुष या महिला के कुछ कार्यों पर निर्भर होती है। इसलिए यौन इच्छा बिल्कुल भी सामान्य और आदर्श नहीं है। अगर हम कुछ क्रियाएँ बंद कर देते हैं तो यौन इच्छा की उत्तेजना सामान्य नहीं रह जाती, जैसा कि हमारी चर्चा में कहा गया है।”

इस दौरान अदालत ने किशोरों को सेक्स की शिक्षा देने पर भी जोर दिया। कहा कि इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। माता-पिता पहले शिक्षक होने चाहिए। बच्चों, खासकर लड़कियों को बैड टच, अश्लील इशारों के बारे में बताना आवश्यक है। कम उम्र में सेक्स से स्वास्थ्य और बच्चे पैदा करने की क्षमता पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के बारे में बताया जाना चाहिए।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था, “हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है, क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।”

हाई कोर्ट ने कहा था यह प्रत्येक महिला का कर्तव्य/दायित्व है कि वे अपने शरीर की रक्षा करें। अपनी गरिमा और आत्म-सम्मान की रक्षा करें। लैंगिक बाधाओं को परे रख अपने सम्पूर्ण विकास के लिए प्रयास करें। यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखें, क्योंकि समाज की नजरों में वे तब हार जाती हैं, जब मुश्किल से दो मिनट के यौन सुख का आनंद लेने के लिए तैयार हो जाती हैं। अपने शरीर की सीमाओं और उसकी निजता के अधिकार की रक्षा करें।

वहीं किशोर पुरुषों के लिए हाई कोर्ट ने कहा था, ”किसी युवा लड़की या महिला के उपरोक्त कर्तव्यों का सम्मान करना एक किशोर पुरुष का कर्तव्य है और उसे अपने दिमाग को एक महिला, उसकी मूल्यों, उसकी गरिमा, गोपनीयता और उसकी शारीरिक सीमाओं का सम्मान करना चाहिए।”

बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए एक साथ खड़े हुए चारों शंकराचार्य: कहा- जमीन और सुरक्षा दे भारत सरकार, भोजन की व्यवस्था हम करेंगे

शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा लगातार हमले किए जा रहे हैं। ऐसे में देश के चारों शंकराचार्यों ने हिंदू विरोधी हिंसा की निंदा की है। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले पर चिंता जताई और माँग की कि इसे तुरंत रोका जाए।

निश्चलानंद सरस्वती ने कहा, “शांति स्थापित करके ही सब कुछ सुलझाया जा सकता है। हिंदू शांतिप्रिय लोग हैं और जब हिंदू सुरक्षित होंगे, तो देश सुरक्षित होगा। बांग्लादेश में इस तरह की हिंसा चीन की साजिश है। चीन में मस्जिदों को नष्ट किया जा रहा है और मुसलमानों को देश से निकाला जा रहा है। अब चीन भारत को अस्थिर करने के लिए बांग्लादेश का इस्तेमाल कर रहा है। अगर बांग्लादेश यह बात नहीं समझ पाया, तो आने वाले दिनों में उसका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।”

इस बीच, द्वारका शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत और बांग्लादेश की सरकारों को हिंदुओं की दुर्दशा पर मिलकर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले 50 सालों से जो (हिंदुओं पर अत्याचार) हो रहा है वह ठीक नहीं है। उनका क्या दोष है? उन्हें चुन-चुनकर क्यों मारा जा रहा है? मंदिर क्यों तोड़े जा रहे हैं? इस समस्या का समाधान जल्द ही निकाला जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक दिन ऐसा भी आएगा, कि दुनिया के किसी भी हिस्से में हिंदुओं पर अत्याचार होगा और कोई उनकी मदद करने वाला नहीं होगा।”

सदानंद सरस्वती ने भारतीय मुसलमानों से यह भी कहा कि वे इस पर विचार करें कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या और उन पर टारगेटेड हमले कौन कर रहा है? द्वारका शंकराचार्य ने कहा, “बांग्लादेश में अभी भी करीब 1.25 करोड़ हिंदू हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद वो ऐसी विकट परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। भारत में मुसलमानों को भी इस पर विचार करना चाहिए कि वहाँ हत्याएँ कौन कर रहा है।”

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के बाद, कांची शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने अशांति से प्रभावित देश में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के लिए विशेष प्रार्थना की है । उन्होंने बांग्लादेश में शांति, सुरक्षा और स्थिरता का आह्वान किया। उन्होंने हिंदुओं और शक्तिपीठ ढाकेश्वरी मंदिर सहित विभिन्न ऐतिहासिक हिंदू मंदिरों के अस्तित्व पर जोर दिया।

इस बीच, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भारत सरकार से बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों के हमले का शिकार हो रहे हिंदुओं को बचाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया। बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ एकजुटता जताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने जोर देकर कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी देश में उत्पीड़न का सामना कर रहे हिंदुओं का हिंदुओं की भूमि भारत में स्वागत हो।

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा की जानी चाहिए। बांग्लादेश सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत में हजारों बांग्लादेशी रहते हैं। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह उन्हें ज़मीन और सुरक्षा मुहैया कराए। हम उनके भोजन और अन्य ज़रूरतों का ध्यान रखेंगे और सरकार पर बोझ नहीं आने देंगे।”

कोलकाता के जिस मेडिकल कॉलेज में डाक्टर का रेप-मर्डर, वहाँ से बांग्लादेश होती थी तस्करी, लाशों को बेचने वाले रैकेट में संदीप घोष भी: RG Kar अस्पताल के पूर्व अधिकारी का दावा

पश्चिम बंगाल के आरजी कर अस्पातल के विवादों में आने के बाद अब इस अस्पताल और इसके पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं। मीडिया में दावा किया जा रहा है कि संदीप घोष की संलिप्ता कई सारी अवैध गतिविधियों में थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार संदीप घोष को लेकर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डिप्टी सुप्रीटेंडेंट अख्तर अली ने दावा किया कि संदीप घोष तो अस्पताल से बायोमेडिकल वेस्ट और मेडिकल सप्लाई की तस्करी बांग्लादेश में भी करते थे। अख्तर अली का दावा है कि साल 2023 में उन्होंने इस बात की चिंता राज्य सतर्कता आयोग के समक्ष उठाई थी। जाँच में वह दोषी भी पाए गए लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बीवी को बेरहमी से पीटा, पड़ोसी आज तक नहीं भूले

इंडिया टुडे की एक अन्य मीडिया रिपोर्ट बताती है कि आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल अपनी पत्नी को बेरहमी से मारने के कारण भी बदनाम हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार संदीप घोष पहले बारासाट में रहते थे। वहीं के पड़ोसी ने इंडिया टुडे को बताया कि कैसे 12 साल पहले जब संदीप ने अपनी पत्नी को उस समय बुरी तरह पीटा था जब उसकी सिजेरियन हुए 14 दिन ही हुए थे।

रिपोर्ट में खुद को संदीप का पूर्व पड़ोसी बताने वाला शख्स कहता है, “एक बार मेरे और घोष के बीच बहस हुई थी। उनका व्यवहार हमेशा खराब रहता था। बाद में मुझे पता चला कि वह एक डॉक्टर थे। यहाँ रहने के दौरान एक घटना हुई जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी को इतनी बुरी तरह पीटा कि उनके सिजेरियन टांके फट गए और उन्हें खून बहने लगा। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि इसे पारिवारिक मामला माना गया, लेकिन जब मामला बहुत गंभीर हो गया तो सभी ने विरोध करना शुरू कर दिया।”

इसी तरह एक अन्य पड़ोसी ने भी बताया, “घोष यहाँ बहुत कम समय के लिए रहा और फिर उसने अपना घर बेच दिया। इसी घर में उसने अपनी पत्नी को पीटा था। जब यह घटना हुई तो पूरा इलाका बाहर इकट्ठा हो गया। मुझे ठीक से याद नहीं है कि यह उसकी गर्भावस्था के दौरान हुआ था या बच्चे के जन्म के तुरंत बाद, लेकिन यह एक चौंकाने वाली घटना थी।”

गौरतलब है कि आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के रेप और हत्या के मामले में घोष को 12 अगस्त को रिजाइन देना पड़ा था। बाद में सीबीआई ने उनसे पूछताछ शुरू की और संदीप से जुड़े विवाद सामने आते रहे। बांग्लादेश में तस्करी, बीवी से मारपीट के अलावा संदीप घोष पर जून 2023 में भ्रष्टाचार का आरोप लगा था। उस समय उन्हें वित्तीय गड़बड़ी के आरोप में मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर किया गया था। हालाँकि बाद में दोबारा उनका आरजी कर अस्पताल में कार्यभार मिल गया।

अस्पताल में हुई रहस्यमयी मौतें, देह व्यापार का भी दावा

बता दें कि जिस तरह आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल का नाम पहली बार विवादों से नहीं जुड़ा, उसी तरह इस अस्पताल का नाम भी विवादों में पहली बार नहीं आया है। कहा जा रहा है कि इस अस्पताल मेंपहले भी रहस्यमयी मौते हुई हैं। कभी यहाँ मेडिकल प्रोफेशनल मारे गए तो कभी प्रोफेसर और कभी हाउस स्टाफ।

  • 25 अगस्त, 2001 को ऐसी एक घटना हुई थी जब चौथे वर्ष के छात्र सौमित्र विश्वास को छात्रावास के कमरे में ही फंदे से मृत लटका हुआ पाया गया था। उनकी मौत को भी प्रशासन ने आत्महत्या बताया था, लेकिन तब भी हॉस्टल में अश्लील फिल्मों के निर्माण की बात उड़ी थी। अरोमिता दास और अमित बाला नामक उसके 2 सहपाठियों की गिरफ़्तारी के बावजूद ये मामला अनसुलझा रहा, जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट ने CID जाँच का आदेश दिया था
  • 5 फरवरी, 2003 को अरिजीत दत्ता नामक हाउस स्टाफ ने आत्महत्या की थी। बताया गया कि उसने पहले खुद को हाथ में एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया, फिर कलाई की नस काट ली और फिर छत से कूद गया। वो बीरभूम के सिउरी के रहने वाले थे। न कोई सुसाइड नोट मिला, न आत्महत्या का कारण पता चला।
  • घटना के कुछ ही दिन बाद 16 फरवरी को प्रवीण गुप्ता ने आत्महत्या का प्रयास किया। हरियाणा के प्रवीण मानिकतल्ला स्थित लालमोहन हॉस्टल में रहते थे, उन्होंने अपनी दोनों कलाई की नस काटने का प्रयास किया था। प्रवीण के पिता ने बेटे के किसी बात से परेशान होने की बात कही थी, वहीं पुलिस ने प्रेम-प्रसंग बता कर कहा कि उसने अपनी प्रेमिका को सुसाइड नोट भेजा था। हालाँकि, उसके साथियों ने उसे कभी अवसादग्रस्त नहीं पाया।
  • 24 अक्टूबर, 2016 को 52 वर्षीय मेडिसिन के प्रोफेसर गौतम पाल का सड़ा-गला शव दक्षिणी दमदम स्थित उनके किराए के घर से बरामद हुआ था। दरवाजा अंदर से बंद था तो हार्ट अटैक से अचानक मौत की बात कह पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया।
  • कोरोना महामारी के दौरान स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा पौलमी साहा की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस ने अस्पताल की छठी मंजिल से कूद कर आत्महत्या की बात कही, सहपाठियों ने उसके अवसाद में होने की बात कही थी। आज तक ये भी रहस्य है।

इन रहस्यमयी मौतों के अलावा इस अस्पताल में देह-व्यापार का धंधा चलने से लेकर यहाँ ड्रग्स तस्करों तक के सक्रिय रहने की बातें होती रही हैं… अब इन बातों की सच्चाई क्या है जाहिर सी बात है ये जाँच के बाद ही सामने आ पाएगा, लेकिन सवाल तो उठता है कि अगर एक राज्य में किसी अस्पताल से जुड़ी इतनी गड़बड़ घोटालों को लेकर खुलासे हो रहे हैं तो फिर जाँच क्यों नहीं हुई। क्यों संदीप घोष को मुर्शिदाबाद से दोबारा आरजीकर अस्पताल में अपनी नौकरी वापस मिल गई, क्यों बार-बार ट्रांसफर होते-होते रह गया।

4 महीने से अश्लील वीडियो दिखा रहा था टीचर, 6 छात्राओं की शिकायत के बाद खुला मामला: महाराष्ट्र के अकोला की घटना, बोलीं पीड़िताएँ- गंदे वीडियो दिखा छूता था

महाराष्ट्र के बदलापुर में दो बच्चियों के साथ यौन दुराचार के बाद अकोला जिले में भी एक शिक्षक पर अपनी छात्राओं के साथ यौन शोषण का आरोप लगा है। अकोला के एक स्कूल में पढ़ने वाली 6 बच्चियों ने अपने शिक्षक पर गलत तरीके से छूने और गंदे वीडियो दिखाने का आरोप लगाया है। आरोपित शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अकोला जिले के काजीखेड़ में स्थित एक सरकारी स्कूल में यह घटना हुई है। उराल थाने में दर्ज करवाई गई FIR में बताया गया है बच्चियों का यह शोषण पिछले 4 महीने से जारी था। उनका शिक्षक प्रमोद सरदार उन्हें अश्लील वीडियो दिखाता था और उन्हें गलत तरीके से छूता था।

बताया गया है कि बच्चियों ने बाल संरक्षण हेल्पलाइन में शिकायत की थी। इसके बाद बाल संरक्षण आयोग के कुछ सदस्यों ने मंगलवार (20 अगस्त, 2024) को स्कूल का दौरा किया। इसके बाद सदस्यों ने बच्चियों से बात की और फिर इस मामले में FIR दर्ज की। पुलिस ने शिक्षक के विरुद्ध POCSO और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।

इस मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक ने कहा है कि उन्हें पहले से इस मामले में कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि स्कूल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसके बाद यह खुलासा हुआ। पुलिस अब आगे इस मामले में जाँच कर रही है। पीड़ित बच्चियों के बयान भी दर्ज कर लिए गए हैं।

अकोला से पहले महाराष्ट्र के ही बदलापुर से दो बच्चियों के साथ यौन दुराचार की घटना सामने आई। यौन दुराचार की यह घटना 13 अगस्त, 2024 को सुबह 9 बजे के आसपास हुई। यहाँ किंडरगार्टन में पढ़ने वाली दो बच्चियों, जिनकी उम्र 3 और 4 वर्ष है, उनके साथ यौन दुराचार हुआ।

दोनों बच्चियाँ स्कूल का टॉयलेट इस्तेमाल करने गई थीं। यहाँ स्कूल के ही एक कर्मचारी ने दोनों बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया। एक बच्ची ने बताया कि उसके कपड़े उतारे गए। दोनों बच्चियाँ इस कारण डर गईं। इनमें से एक बच्ची ने अपने परिजनों से निजी अंगों में दर्द की शिकायत की। बच्ची ने पूछे जाने पर बताया कि स्कूल के एक ही कर्मचारी उसके साथ दुराचार किया है।

इनमें से एक बच्ची के मेडिकल टेस्ट में हायमन भंग होने की बात भी सामने आई है। बच्चियाँ इस आरोपित को ‘दादा’ कहती थीं। मामले के सामने आने के बाद दोनों बच्चियों के परिजनों ने आरोपित के विरुद्ध POSCO समेत कई धाराओं में FIR दर्ज करवाई है।

बांग्लादेश में अब हिंदू सरकारी कर्मचारियों को बनाया जा रहा निशाना: कहीं टीचरों को कमरे में बंद कर लिखवाया इस्तीफा, कहीं घेरकर रिजाइन पर करवाए साइन

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनने के बाद हिंदुओं पर अत्याचार समाप्त नहीं हुए हैं। उलटा अब वहाँ उन हिंदुओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया गया है जो संस्थानों में कार्यरत है और सालों से अपनी सेवा उस संस्थान को देते आए हैं। इस क्रम में कहीं खुद मुस्लिम छात्र अपने टीचर को परेशान करके उनसे इस्तीफा लिखवा रहे हैं तो कहीं सरकारी अधिकारी से हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। कारण सिर्फ एक है- इन लोगों की धार्मिक पहचान।

20 अगस्त को बांग्लादेश में इस्कॉन के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने एक्स पर जानकारी दी कि कैसे गौतम चंद्र पाल नाम के हिंदू शिक्षक को इस घृणा का शिकार होना पड़ा। गौतम अजीमपुर सरकारी कॉलेज के सबसे बेहतरीन कैमेस्ट्री टीचरों में से एक थे, लेकिन मुस्लिम छात्रों ने उनपर दबाव देकर उनसे इस्तीफा ले लिया। तस्वीर में देखा जा सकता है कि गौतम को इर्द-गिर्द टीचरों ने घेरा हुआ है।

19 अगस्त को इसी तरह से सोनाली रानी दास नाम की हिंदू महिला पर दबाव बनाया गया था कि वो होली रेड क्रिसेंट नर्सिंग कॉलेज में अपनी असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी को छोड़ दें।

ऑपइंडिया ने जब इस मामला बांग्लादेश की एक स्कूल टीचर से बात की तो उन्होंने बताया कि कैसे मुस्लिम छात्रों ने उन्हें इस्तीफे के लिए मजबूर किया। इसके लिए छात्रों ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया था। महिला टीचर दर्द साझा करते हुए कहती हैं- “मुझे यकीन नहीं होता कि मेरे छात्रों ने मेरे साथ ऐसा किया। मैंने कई छात्रों को पढ़ाया वो मेरे साथ अब भी संपर्क में हैं। लेकिन जो हुआ उस पर विश्वास नहीं होता। ये लोग हमें नहीं छोड़गे।”

55 साल की महिला टीचर ने बताया कि उनकी स्थिति ये कर दी गई थी कि उन्होंने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी। इसके अलावा वो बच्चे उन्हें काफिर और मलाऊ जैसे शब्द कहकर बुला रहे थे।

18 अगस्त को इस्लामी कट्टरपंथी छात्रों ने हिंदू शिक्षक खुखू रानी बिस्वास का घेराव कर लिया था। खुकू रानी बिस्वास जेसोर नर्सिंग इंस्टीट्यूट की इंचार्ज थीं। उन्हें कट्टरपंथी छात्रों द्वारा उनके दफ़्तर में पाँच घंटे तक घेरे रखा था। इस दौरान बस उनसे उनके इस्तीफे की माँग हो रही थी।

इसी तरह, 18 अगस्त को एक्स यूजर @VladAdiReturns ने विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों के कुछ अन्य हिंदू शिक्षाविदों और शिक्षकों की एक लिस्ट साझा की, जो बांग्लादेश में इस्लामवादियों के निरंतर उत्पीड़न के शिकार हुए हैं। इसमें मशहूर गायक सुबीर नंदी की बेटी का भी जिक्र है जिन्हें भारत जाने को कहा गया है।

पोस्ट में बताया गया कि खुलना इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति मिहिर रंजन हलदर को 12 अगस्त को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। इसी तरह, चांदपुर के पूरनबाजार डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल रतन कुमार मजूमदार को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।

एक्स यूजर ने यह भी बताया कि कैसे बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में सेताबगंज सरकारी कॉलेज के मुस्लिम छात्र भी प्रिंसिपल सुबोध चंद्र रॉय और उनके कार्यालय कर्मचारी निर्मल चंद्र रॉय के इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।

14 अगस्त को कुछ मुस्लिम छात्रों ने एक हिंदू प्रोफेसर सौमित्र शेखर को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। सौमित्र शेखर बांग्लादेश के मोयमोंसिंघा जिले में काजी नजरुल इस्लाम विश्वविद्यालय के कुलपति थे।

एक्स यूजर @Chellaney की एक अन्य पोस्ट में बताया कि कैसे मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने 363 नगरपालिका महापौरों, 60 जिला परिषदों और 493 उपजिला अध्यक्षों को उनके पदों से हटा दिया है।

मालूम हो कि बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के नाम पर भड़की हिंसा में हिंदुओं को निशाना चुन चुनकर बनाया गया था। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं के घर में घुसकर तोड़फोड़ की थी और सामान लूट ले गए थे। इसके अलावा मंदिरों में जाकर वहाँ मूर्तियों को खंडित करने का काम भी हुआ था। साथ ही साथ दुकानों से ताला तोड़कर सामान लूटे गए थे।

जिन्होंने आतंकी कसाब को दिलाई फाँसी, अब वही बदलापुर की बच्चियों को दिलाएँगे न्याय: जिनको स्कूल में कहती थीं ‘दादा’, उसने ही कपड़े खोल किया दुराचार

महाराष्ट्र के ठाणे जिला के बदलापुर में दो बच्चियों से यौन दुराचार के मामले में अब पैरवी देश के प्रख्यात वकील उज्ज्वल निकम करेंगे। वह आरोपित को कड़ी सजा दिलवाने के लिए पीड़ितों का पक्ष सरकार की तरफ से रखेंगे। उन्हें महाराष्ट्र की NDA सरकार ने यह काम सौंपा है। इस बीच बच्चियों से यौन दुराचार की घटना को लेकर लोगों का गुस्सा नहीं थम रहा है। आक्रोशित लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, इस बीच उन्होंने रेल भी रोक दी, इसके बाद 200 से अधिक व्यक्तियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।

बदलापुर यौन दुराचार घटना की घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने ऐलान किया है कि इस मामले में को फ़ास्टट्रैक कोर्ट में जाया जाएगा। साथ ही उन्होंने ऐलान किया है कि इस मामले में विशेष पब्लिक प्रासीक्यूटर के तौर पर वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम को नियुक्त किया गया है। उज्जवल निकम ने 26/11 मुंबई हमलों के आतंकी अजमल कसाब के खिलाफ भी पैरवी की थी और उसे फांसी की सजा दिलवाने में कामयाब रहे थे।

उज्जवल निकम ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रया दी है। उन्होंने कहा, “मेरी उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने बात हुई है और उन्होंने मौखिक रूप से मुझे इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रासीक्यूटर बनने को कहा था, मैंने इस पर हामी भर दी है। हालाँकि, मुझे अभी इस संबंध में सरकारी आदेश का इन्तजार है। जल्द ही सरकारी जाँच एजेंसी इस मामले में चार्जशीट दायर करेगी और इसके बाद मेरा रोल चालू होगा। मुझे उम्मीद है मामला जल्द ही परिणाम तक पहुँचेगा।”

बदलापुर में हुए यौन दुराचार मामले में पुलिस ने FIR दर्ज करके अपनी कार्रवाई चालू कर दी है। इस मामले में FIR से कई जानकारियाँ सामने आई हैं। बताया गया है कि बच्चियों के साथ यौन दुराचार की यह घटना 13 अगस्त, 2024 को सुबह 9 बजे के आसपास हुई। यहाँ किंडरगार्टन में पढ़ने वाली दो बच्चियों, जिनकी उम्र 3 और 4 वर्ष है, उनके साथ यौन दुराचार हुआ। दोनों बच्चियाँ स्कूल का टॉयलेट इस्तेमाल करने गई थीं। यहाँ स्कूल के ही एक कर्मचारी ने दोनों बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया। एक बच्ची ने बताया कि उसके कपड़े उतारे गए।

दोनों बच्चियाँ इस कारण डर गईं। इनमें से एक बच्ची ने अपने परिजनों से निजी अंगों में दर्द की शिकायत की। बच्ची ने पूछे जाने पर बताया कि स्कूल के एक ही कर्मचारी उसके साथ दुराचार किया है। इनमें से एक बच्ची के मेडिकल टेस्ट में हायमन भंग होने की बात भी सामने आई है। बच्चियाँ इस आरोपित को ‘दादा’ कहती थीं। मामले के सामने आने के बाद दोनों बच्चियों के परिजनों ने आरोपित के विरुद्ध POSCO समेत कई धाराओं में FIR दर्ज करवाई है।

बच्चियों से यौन दुराचार के आरोपित का नाम अक्षय शिंदे है। वह इस स्कूल में हाल ही में नौकरी पर रखा गया था। उसने 1 अगस्त, 2024 से ही स्कूल में काम करना चालू किया था। वह स्कूल में सफाईकर्मी के तौर पर काम करता था। उसे अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, उसकी गिरफ्तारी के बाद भी लोग आक्रोशित हैं। बच्ची के साथ यौन दुराचार की खबर के बाद एक भीड़ ने उस स्कूल में भी तोड़फोड़ की और पत्थर बरसाए। उन्होंने आरोपित को फांसी देने की माँग की।

मामले में आक्रोशित लोगों ने बदलापुर रेलवे स्टेशन पर पटरियाँ भी जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों की बड़ी भीड़ रेल पटरियों पर मंगलवार (20 अगस्त, 2024) के दिन लगभग 10 घंटे तक बैठी रही। इस दौरान ट्रेनों का संचालन रुक गया। बाद में इन लोगों ने रेल पटरियाँ खाली की। बदलापुर में हुए प्रदर्शन मामले में एक FIR दर्ज की है, इसमें 300 लोगों को आरोपित बनाया गया है। मामले में 40 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है, इन्हें कोर्ट में पेश किया जाना है।

झाड़-फूँक के बहाने घर में घुसा मौलवी नसरू, पहले दबाए स्तन फिर कमरे में खींचा: बुलंदशहर की घटना, रईस ने भी वाल्मिकी समाज की युवती को सड़क पर दबोचा

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के एक ही इलाके में मुस्लिम समुदाय के आरोपितों द्वारा दलित उत्पीड़न के 2 अलग-अलग मामले सामने आए हैं। पहले मामले में नसरु नाम के एक मौलवी ने झाड़-फूँक करवाने गई एक वंचित समाज की महिला से अश्लील हरकतें की। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरे मामले में रईस नाम के आरोपित ने अनुसूचित जाति की एक महिला को बदनीयती से पकड़ कर किस करने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले में भी केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

जाटव समुदाय की महिला से मौलवी की अश्लील हरकतें

पहला मामला बुलंदशहर जिले के थानाक्षेत्र जहाँगीराबाद का है। यहाँ शनिवार (17 अगस्त 2024) को जाटव समाज के एक व्यक्ति ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि उनकी शादीशुदा बेटी अक्सर बीमार रहा करती थी। रक्षाबंधन में वो अपने मायके आई थी। किसी की सलाह पर महिला का पिता ने चचराई मोड़ के पास झाड़-फूँक करवाने मौलवी नसरु को अपनी समस्या बताई। शनिवार की दोपहर लगभग 2 बजे नसरु मौलवी खुद ही पीड़िता के मायके पहुँच गया। तब घर में पीड़िता का पिता मौजूद नहीं था।

शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी गैर-मौजूदगी में ही मौलवी नसरू पीड़िता का हाथ देखने लगा। थोड़ी ही देर में मौलवी पीड़िता के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया और उसे बाहों में भर लिया। इसके बाद मौलवी पीड़िता को पकड़कर जबरन एक कमरे में ले जाने लगा। इसी बीच वहाँ पीड़िता की बुआ पहुँच गई। बुआ को देखकर पीड़िता की भी हिम्मत बँधी और वो मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगी। शोरगुल सुन कर आसपास के लोग जमा हो गए।

लोगों ने भाग रहे मौलवी को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया। शिकायत कॉपी में पीड़ित पिता ने मौलवी नसरु पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वहीं पुलिस ने मौलवी को गिरफ्तार करके उस पर SC/ST एक्ट के साथ BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 75 के तहत कार्रवाई की है। मामले की जाँच डिप्टी एसपी अनूपशहर कर रहे हैं। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

वाल्मीकि समाज की महिला से रईस की बदनीयती

दूसरा मामला भी बुलंदशहर के जहाँगीराबाद थानाक्षेत्र से ही है। यहाँ रविवार (18 अगस्त 2024) को वाल्मीकि समाज की एक महिला ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में पीड़िता ने बताया कि रविवार की सुबह वह कुछ काम से बाहर निकली थी, तभी रईस नाम का एक युवक रास्ते में मिला। रईस ने पीड़िता को बदनीयती से दबोच लिया और किस करने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने आरोपित की इस हरकत का विरोध किया और खुद को जैसे-तैसे रईस के चंगुल से बचाया। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

शिकायत के मुताबिक अपने बचाव में पीड़िता के कपड़े भी फट गए। पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे लिखा, “अगर मैं वाल्मीकि समाज से नहीं होती तो यह (रईस) मेरे साथ ऐसा कृत्य नहीं करता।” आरोप है कि रईस पीड़िता के साथ पहले भी ऐसी हरकतें कर चुका है। आरोपित को बेहद शातिर किस्म का बताते हुए पीड़िता ने पुलिस से कड़ी कार्र्रवाई की आशा जताई है। पुलिस ने इस शिकायत पर रईस को नामजद करते हुए SC/ST एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75 और 76 के तहत FIR दर्ज कर ली है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

युवराज सिंह पर बन रही मूवी… लेकिन ‘धोनी ने जानबूझ कर हरवाया था वर्ल्ड कप’ का वीडियो हो रहा वायरल: पूछ रहे नेटिजेंस – कौन करेगा माही का रोल

भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के क्रिकेट करियर और उनकी कैंसर से लड़ाई में जीत पर एक बायोपिक फिल्म बनने जा रही है। इसके लिए T-सीरिज और सचिन तेंदुलकर पर मूवी बनाने वाले प्रोड्यूसर मिल कर बना रहे हैं। इस बीच इस मूवी को लेकर नेटिजेंस ने कई प्रश्न उठाए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रिकेटर युवराज सिंह के जीवन पर फिल्म बनाने टी सीरिज के भूषण कुमार और 200 नॉट आउट के रवि भागचंदका साथ आए हैं। इस फिल्म में युवराज और बाकी लोगों का रोल कौन करेगा, इस पर अभी काम चल रहा है। फिल्म का डायरेक्टर भी अभी तय किया जाना था।

भूषण कुमार ने NDTV को इस बारे में बताया, “युवराज सिंह का जीवन दृढ़ता, विजय और जुनून की एक कहानी है। एक होनहार क्रिकेटर से लेकर क्रिकेट हीरो और फिर असल जिंदगी में भी हीरो बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। मैं एक ऐसी कहानी लाने को लेकर रोमांचित हूँ जिसे बड़े परदे पर सुनाया ही जाना चाहिए।”

युवराज सिंह ने कहा, “मेरी कहानी भूषण जी और रवि द्वारा दुनिया भर में मेरे लाखों प्रशंसकों को दिखाई जाएगी, इस पर मैं काफी सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। क्रिकेट मेरा सबसे बड़ा प्यार और ताकत का स्रोत रहा है। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म दूसरों को अपनी चुनौतियों से उबरने और जुनून के साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।”

युवराज सिंह पर बनाई जाने वाली इस फिल्म में उनके क्रिकेट करियर की शुरुआत, उनके डेब्यू, उनके 2007 के प्रदर्शन और फिर कैंसर से जूझने के साथ ही उनकी वापसी को भी दर्शाया जाएगा। फिल्म में उनके 2007 में 6 छक्कों वाले प्रदर्शन को दिखाया जाएगा।

वहीं युवराज सिंह पर बायोपिक फिल्म बनने की खबर के बाद नेटिजेंस ने सोशल मीडिया पर कई सवाल पूछने चालू कर दिए हैं। ऐसे ही एक यूजर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक युवराज सिंह के पिता और पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह का एक वीडियो डाला है।

इस वीडियो में योगराज सिंह 2019 विश्व कप सेमी फाइनल में हार को लेकर पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर आरोप लगा रहे हैं। योगराज सिंह इस वीडियो में आरोप लगाते हैं कि 2015 का वर्ल्ड कप धोनी ने जान बूझ कर हरवाया है। योगराज सिंह ने आरोप लगाया कि धोनी 2011 के वर्ल्डकप जीत को बड़ा बनाए रखना चाहते थे इसलिए उन्होंने ऐसा किया।

इससे पहले भी योगराज सिंह ने धोनी पर युवराज सिंह को क्रिकेट टीम में मौके ना देने का आरोप लगाया था। योगराज सिंह का आरोप था कि युवराज सिंह की सेहत अच्छी होने बावजूद उन्हें टीम में जगह नहीं दी गई क्योंकि धोनी ऐसा नहीं चाहते थे। इन्हीं बातों को लेकर अब नेटिजेंस पूछ रहे हैं कि क्या इन्हें भी युवराज पर बनने वाली फिल्म में शामिल किया जाएगा।

‘जैसे रेप हुआ, आपका भी करेंगे’: कोलकाता की डॉक्टर के लिए न्याय माँगने पर हिरोइन मिमी चकवर्ती को धमकी, RG Kar अस्पताल के स्टाफ को भी गुंडों ने धमकाया था

पश्चिम बंगाल के आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ ड्यूटी के वक्त हुई वीभत्सता के खिलाफ आवाज उठाने पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की पूर्व सांसद मिमी चक्रवर्ती को रेप की धमकियाँ मिल रही हैं। इससे पहले अस्पताल की महिला स्टाफ को भी ऐसे ही बलात्कार के नाम पर धमकाया गया था।

मिमी चक्रवर्ती ने बताया है कि कोलकाता रेप और मर्डर केस को लेकर विरोध प्रदर्शन के पोस्ट करने पर उन्हें बलात्कार की धमकियाँ दी गईं। साथ ही उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर अभद्र मैसेज भेज रहे हैं।

मिमी ने अपने एक्स प्लेटफॉर्म पर इंस्टाग्राम पर आ रही धमकियों के स्क्रीनशॉट साझा किए। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “और हम महिलाओं के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं, हैं न? ये उनके कुछ उदाहरण हैं। जहाँ भीड़ में नकाब पहने जहरीले पुरुषों की तरफ से रेप की धमकियों को सामान्य बना दिया गया है, जो कहते हैं कि वे महिलाओं के साथ खड़े हैं। कौन सी परवरिश और शिक्षा इसकी इजाजत देती है?”

उल्लेखनीय है कि आरजी कर अस्पताल में 9 अगस्त को लेडी डॉक्टर की लाश मिली थी। पहले कहा गया कि उन्होंने सुसाइड की है। हालाँकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि डॉक्टर की रेप के बाद हत्या की गई है। घटना की जानकारी होने पर सैंकड़ों लोग सड़कों पर न्याय माँगने आ गए।

देखते-देखते बड़ा प्रदर्शन हुआ, मगर इस बीच इन आवाजों को रोकने के लिए आरजी कर अस्पताल में उपद्रवी घुस आए। इस दौरान मारपीट, तोड़फोड़ हुई।

साथ ही वहाँ महिला स्टाफ को भी धमकाते हुए कहा गया कि अगर उन्होंने आवाज उठाई तो उनका भी रेप किया जाएगा। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि स्टाफ मीडिया को बता रहा है कि उपद्रवियों ने उनसे कहा था- “जैसे रेप हुआ, आप लोगों का भी करेंगे।”