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‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ के डायरेक्टर गायब, कंगना रनौत ने ने ममता बनर्जी से माँगी मदद, आखिरी पोस्ट हुई वायरल, लिखा था – ‘बहुत दबाव में हूँ’

बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा 14 अगस्त से लापता हैं। उनकी फिल्म ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ रिलीज होने वाली है। उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने बुलाया था, जहाँ वो 14 अगस्त को गए थे। उसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। उनके दोनों फोन भी बंद आ रहे हैं। डायरेक्टर की पत्नी ने किसी अनहोनी की आशंका के मद्देनजर लखनऊ के गोमती नगर पुलिस थाने F.I.R दर्ज कराई है। सनोज मिश्रा की पत्नी मदद के कई लिए कई लोगों से गुहार लगा चुकी हैं। इस मामले में उन्होंने कंगना रनौत से भी मदद की अपील की, जिसके बाद कंगना रनौत ने ममता बनर्जी से मदद माँगी है।

कंगना रनौत ने सनोज मिश्रा की फोटो शेयर करते हुए बताया कि बंगाल सरकार ने फिल्म ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ के ट्रेलर रिलीज के बाद सनोज के खिलाफ केस दर्ज किया था। उन्होंने आगे बताया कि 14 अगस्त को इस मामले की सुनवाई के लिए सनोज कोलकाता गए थे, जिसके बाद से वे लापता हैं।

सनोज की पत्नी ने कंगना से मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद कंगना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और सनोज मिश्रा को सुरक्षित खोजा जाए। बताया जा रहा है कि कंगना रनौत ने इस मामले में गृह मंत्रालय से भी बात की है।

कंगना रनौत की इंस्टाग्राम स्टोरी

‘राम की जन्मभूमि’ और ‘गांधीगिरी’ जैसी फिल्मों के निर्देशन से इंडस्ट्री में पहचान बनाने वाले डायरेक्टर के गायब होने के बाद अब उनका आखिर इंस्टाग्राम पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने साथ कुछ गलत होने के डर जाहिर किया था। आखिरी पोस्ट में एक वीडियो के साथ नोट भी साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, “मित्रों आप सबसे क्षमा प्रार्थी हूं , आज मेरा जन्मदिन था इस अवसर पर पर अपनी ३० अगस्त को रिलीज होने वाली फिल्म के लिए आशीर्वाद लेने अपनी टीम के साथ चित्रकूट आया था जगत गुरु स्वामी राम भद्राचार्य जी ने फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया और जब उनको पता चला कि आज मेरा जन्मदिन हैं उन्होंने सभा के बाद विशेष पूजा अपने कक्ष में रखी।”

उन्होंने आगे लिखा, “मैं इस फिल्म को लेकर सरकार के दबाव और दमनकारी नीति का शिकार होकर टूट चुका हूँ, मैने आपसे कभी भी नकारात्मक बाते नहीं की होंगी लेकिन मैं बहुत प्रोब्लम में हूँ, मेरे साथ कभी भी कुछ भी हो सकता … मैं आपके बधाई संदेशों के जवाब नहीं दे पाया यही कारण है की मैं हर तरफ से दबाव में हूँ।”

जानकारी के मुताबिक, फिल्म ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ बनाने के बाद डायरेक्टर सनोज मिश्रा की मुश्किलें बढ़ गईं। ‘द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल’ का ट्रेलर रिलीज होने के बाद विवाद शुरू हुआ था। पश्चिम बंगाल में हिंसा को दर्शाने वाली इस फिल्म की खूब आलोचना हुई थी। जिसकी वजह से पिछले डेढ़ साल से उन्हें लगातार धमकियाँ मिलने लगी थी। इस बीच जब डायरेक्टर अपनी इस फिल्म के प्रमोशन और रीलीजिंग की तैयारियों में देशभर में घूम रहे थे और इस प्रोजेक्ट में काफी व्यस्त थे। तब उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस की तरफ से इसी केस के सिलसिले में मिलने के लिए कोलकाता बुलाया गया। जिसके बाद 14 अगस्त को सनोज मिश्रा पुलिस से मिलने के लिए कोलकाता गए थे और फिर गायब हो गए।

OBC समाज की नाबालिग लड़की पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाल रहा था फिरोज, खेतों में गई तो पकड़ कर रेप की कोशिश: कौशांबी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में 19 अगस्त को फिरोज खान नाम के एक शख्स ने इस्लाम कबूल नहीं करने पर OBC समाज की एक नाबालिग हिन्दू लड़की से रेप किया। पीड़िता के परिजन जब इसकी शिकायत लेकर आरोपित के घर गए तो उसके अम्मी और अब्बा ने उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दीं और हत्या की धमकी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज करके आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना कौशाम्बी के थाना क्षेत्र मंझनपुर की है। ऑपइंडिया के पास मौजूद शिकायत की कॉपी के अनुसार, पीड़ित परिवार ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि सोमवार की सुबह 6 बजे उनकी 16 वर्षीया बेटी शौच के लिए खेतों में गई थी। गाँव का रहने वाला फ़िरोज़ वहाँ घात लगाकर बैठा था। उसने पीड़िता को दबोच लिया और रेप करने का प्रयास किया। पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपित ने उसे धमकी दी।

फिरोज ने नाबालिग पीड़िता के गुप्तांग में उंगली डाल दी। इसके बाद पीड़िता चिल्लाई तो आसपास के लोग वहाँ जुटने लगे। लोगों को आता देखकर फ़िरोज़ वहाँ से भाग निकला। पीड़िता रोते हुए अपने घर पहुँची और परिजनों को सारी बात बताई। शिकायत में आगे कहा गया है कि फ़िरोज़ लम्बे समय से पीड़िता को प्रताड़ित कर रहा था। वह पीड़िता पर इस्लाम कबूल करके मुस्लिम बन जाने का दबाव बनाता रहा है।

पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि उन्होंने फ़िरोज़ की करतूतों की शिकायत पहले भी उसके घर पर की है। हालाँकि, इस उलाहना का फ़िरोज़ पर कोई असर नहीं पड़ा। उलटे फ़िरोज़ की अम्मी नाज़मा बेगम और उसके अब्बा मोहम्मद रज़ा ने पीड़ितों से कहा, “साले भाग जाओ नहीं तो जान से मार देंगे।” पीड़िता के पिता ने तहरीर के अंत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65 (1), 352 और 351 (2) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट एवं उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने सोमवार (19 अक्टूबर 2024) को फ़िरोज़ को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। इस मामले में आगे की जाँच की जा रही है।

SFI से जुड़े वामपंथी संगठन पर TISS ने लगाया बैन, कहा – ये पैदा कर रहा विभाजन: राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के कारण निकाला गया था छात्र

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) मुंबई ने 19 अगस्त को छात्र संगठन प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम (PSF) पर बैन लगा दिया। यह संगठन वामपंथी विचारधारा वाले स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़ा हुआ है। PSF पर बैन लगाने के लिए जारी किए गए अपने नोटिस में TISS ने कहा कि यह छात्रों को गुमराह कर रहा है और संस्थान को बदनाम कर रहा है। इससे पहले, अप्रैल में TISS ने पीएचडी छात्र और PSF सदस्य रामदास प्रीति शिवनंदन को बार-बार गलत आचरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए बैन कर दिया था।

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम पर बैन लगाने वाले नोटिस पर रजिस्ट्रार प्रोफेसर अनिल सुतार ने हस्ताक्षर किए हैं। TISS ने PSF को अपने परिसर में एक “अनधिकृत और अवैध मंच” कहते हुए उस पर छात्रों को गुमराह करने, संस्थान के कामकाज में बाधा डालने, छात्रों और शिक्षकों के बीच विभाजन पैदा करने और संस्थान को बदनाम करने का आरोप लगाया।

नोटिस में लिखा है, “यह समूह ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है, जो संस्थान के कामों में बाधा डालती हैं, संस्थान को बदनाम करती हैं, हमारे समुदाय के सदस्यों को नीचा दिखाती हैं और छात्रों और शिक्षकों के बीच विभाजन पैदा करती हैं। यह देखा गया है कि यह समूह छात्रों को उनकी शैक्षणिक गतिविधियों और परिसर में सामंजस्यपूर्ण जीवन से गुमराह, विचलित और गुमराह कर रहा है।”

टीआईएसएस द्वारा जारी नोटिस

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने PSF सदस्यों को परिसर में किसी भी कार्यक्रम का आयोजन करने या उसमें भाग लेने पर बैन लगा दिया है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर वो ऐसा करते हैं, तो संस्थान इसमें तुरंत हस्तक्षेप करेगा और फिर उसके नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। TISS ने छात्रों से PSF सदस्यों के साथ किसी भी तरह के संपर्क की सूचना कैंपस सिक्योरिटी को देने के लिए कहा है, जो इस मामले को गोपनीयता के साथ संभालेगी।

TISS ने कहा है कि संस्थान सुरक्षित और सहयोगी शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। TISS ने कहा, “कोई भी छात्र या संकाय सदस्य समूह की बाँटने वाली विचारधाराओं का समर्थन, सहयोग या प्रचार करते हुए पाया गया तो संस्थान की नीतियों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

देश विरोधी गतिविधियों के लिए PSF सदस्य हुआ था बैन

टीआईएसएस में पीएचडी कैंडिडेट रामदास प्रीनी शिवनंदन को 18 अप्रैल को “बार-बार गलत आचरण और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों” के लिए दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। ये निलंबन केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ एक विरोध मार्च में उनकी भागीदारी के बाद किया गया, जिसे संस्थान ने अनुशासन का उल्लंघन माना। रामदास पर टीआईएसएस परिसरों में जाने से भी बैन लगा दिया गया।

रामदास के खिलाफ विवादास्पद डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग और बिना अनमुति के लिए कार्यक्रमों के आयोजन जैसे कार्यों को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्य रामदास पर संस्थान के संसाधनों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने का आरोप है, जिसके बारे में प्रशासन का दावा है कि इससे संस्थान की प्रतिष्ठा धूमिल होती है।

पीएसएफ का विवादास्पद इतिहास

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, PSF के सदस्यों ने बैन के समय पर आशर्य जताया, क्योंकि वो टीआईएसएस चांसलर को हस्ताक्षर वाला पत्र सौंपने वाले थे। वो बैन के खिलाफ अपील करने के लिए प्लानिंग कर ही रहे थे कि उन पर बैन लगाने की घोषणा कर दी गई। बता दें कि पीएसएफ कई बार विवादों में पहले भी रहा है। जनवरी 2023 में पीएसएफ ने भारत सरकार द्वारा डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगाए जाने के बावजूद TISS परिसर में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री “भारत: मोदी प्रश्न” की स्क्रीनिंग की थी।

मार्च 2023 में PSF ने निदेशक के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और दावा किया कि प्रशासन ने उन्हें हर्ष मंदर और JNUSU अध्यक्ष आइशी घोष द्वारा भगत सिंह मेमोरियल लेक्चर (BSML) आयोजित करने की अनुमति नहीं दी। नवंबर 2023 में पीएसएफ ने TISS एंट्रेस प्रोसेस में लाए गए बदलावों का विरोध किया, जहाँ TISS ने अपना एंट्रेस टेस्ट बंद कर दिया और कहा कि यहाँ एडमिशन CUET के आधार पर होंगे।

ऑपइंडिया ने सोशल मीडिया पर PSF के इतिहास को खंगाला और पाया कि संगठन ने लगातार “फिलिस्तीनी मुद्दे” का समर्थन किया है और इजरायल विरोधी सामग्री पोस्ट की। एक पोस्ट में उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और विवादास्पद नारे का इस्तेमाल किया “नदी से समुद्र तक, फिलिस्तीन आज़ाद होगा” जो नक्शे से इजरायल को मिटाने की बात करता है। यह पोस्ट हमास द्वारा इजरायल पर किए गए क्रूर आतंकवादी हमले के ठीक पाँच दिन बाद आया था जिसमें 1,300 इजरायली और विदेशी मारे गए थे।

एक अन्य पोस्ट में पीएसएफ ने न्यूज़क्लिक के प्रबीर पुरकायस्थ के साथ एकजुटता जताई, जिस पर भारत विरोधी गतिविधियों के लिए चीन से कथित रूप से धन लेने के आरोप में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस ने न्यूज़क्लिक के संस्थापक और संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती को 3 अक्टूबर 2023 को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने उसी दिन न्यूज़क्लिक के दफ़्तर पर छापा मारा और उसे सील कर दिया, जिसमें भारत की आलोचना करने वाले नैरेटिव फैलाने के लिए चीन से विदेशी फंडिंग से जुड़े मामले शामिल थे।

फोटो साभार: Insta/PSF

अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर छात्रों और कर्मचारियों के लिए आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) पर टीआईएसएस प्रशासन द्वारा जारी परिपत्र के खिलाफ छह छात्र संगठनों द्वारा जारी किए गए बयान में पीएसएफ भी शामिल था। पीएसएफ एक दशक से अधिक समय से कैंपस में सक्रिय था। पीएसएफ के सदस्य स्टूडेंट यूनियन के उपाध्यक्ष सहित कई छात्र संघ पदों पर कार्य कर चुके हैं।

यह समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया जा चुका है। मूल समाचार पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

न 4 साल की बच्ची बची, न 63 साल की वृद्धा… योनि में ही नहीं सिमटी है एक महिला का अस्तित्व: केवल कानून से नहीं होगी नारी सुरक्षा, समाज को भी बदलना होगा

बीते दिनों बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप-मर्डर मामले के कारण पूरे देश भर में आक्रोश है। लोग महिलाओं के अधिकारों से लेकर उनकी आजादी की बात कर रहे हैं, उस पर चिंता जता रहे हैं। कहीं कानून सख्त करने की माँग हो रही है तो कही दोषियों पर त्वरित कार्रवाई को कहा जा रहा है। बंगाल से लेकर दिल्ली तक में लोग सड़कों पर है। ऐसा लग रहा है मानो हर कोई लड़कियों को आजाद देखना चाहता है, उनके खिलाफ कुछ भी गलत होते देखना उन्हें बर्दाश्त नहीं है…। जाहिर है हर लड़की समाज को इसी तरह अपने साथ खड़े हुए देखना चाहती है लेकिन अजीब बात ये जो अभी रेप की घटनाओं के विरुद्ध रोष दिखा रहा है उस समाज में बलात्कार की घटनाएँ होना अब भी बंद नहीं हैं।

9 अगस्त 2024 को बंगाल से लेडी डॉक्टर से रेप और मर्डर का मामला उठा था और उसके बाद सोशल मीडिया पर हर जगह उनके लिए इंसाफ की गुहार लगी। घटना ने इंसानियत को ऐसे झकझोरा कि हर किसी को 2012 में निर्भया के साथ हुई वीभत्सता की याद आ गई। तुलना करते हुए कहा जाने लगा कि इतने साल बीत गए लेकिन समाज के हालात बिलकुल नहीं बदले हैं। आज भी जब बलात्कार का मुद्दा हर जगह गरमाया हुआ है उस समय भी किसी किसी जगह कहीं महिला को कोई हैवान अपना निशाना रहा है। न छोटी बच्ची को छोड़ा जा रहा है न ही बुजुर्ग महिला को। मौका मिलते ही लड़कियों को दबोचा जा रहा है और फिर वहशियत की हर हद पार हो रही है।

बहुत पीछे न जाएँ और ये सोचें कि 9 अगस्त की घटना के बाद तो जैसे विरोध हो रहा है उससे इन घटनाओं में कमी आई होगी तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। हर रोज दरिंदगी की नई सीमा तय होती है। बदलापुर से आज एक शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। चार साल की दो बच्चियों का यौन शोषण उनके ही स्कूल के सफाईकर्मी ने किया। बच्चियाँ उस सफाईकर्मी को ‘दादा’ कहती थीं, उन्हें अपना परिचित समझती थीं, लेकिन उस जानने वाले ने उनके साथ क्या किया। मौका मिलते ही कपड़े उतारकर उनके निजी अंगों को छूने का काम किया, उनका शोषण किया। इस घटना से कुछ दिन पहले 16 अगस्त 2024 राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड रीको थाना क्षेत्र में एक 63 वर्षीय महिला का घर में घुसकर सामूहिक रेप किया गया था। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि आरोपित घर में घुसे तो लूटपाट के लिहाज से थे लेकिन महिला को देख उन्होंने उसके साथ बारी-बारी रेप कर लिया।

एक बार इन घटनाओं को सोचकर देखिए… एक मामले में छोटी बच्चियाँ पीड़िता हैं और दूसरे में बुजुर्ग महिला। आम इंसान के मन में इन दोनों ही वर्ग के लिए अलग-अलग भाव होते हैं। बच्चियों को देख दुलार आता है और बुजुर्ग को देख सम्मान का… लेकिन वहीं एक बलात्कारी को इनमें न छोटी बच्ची दिखती है न बुजुर्ग अवस्था, उन्हें सिर्फ योनि दिखाई देती है। वो लड़कियों को निशाना चलती सड़क पर भी बना सकता है और बंद कमरे में भी रेप के बाद उन्हें मार भी सकता है। ऐसे में हमारे द्वारा सिर्फ ये अपेक्षा किया जाना कि कानून सख्त होने से चीजें बेहतर होंगी सरासर हमारी भूल है।

आपको याद होगा 2012 में निर्भया के साथ हुई वीभत्सता को देख कानून सख्त करने का काम हुआ था, लेकिन नतीजा क्या हुआ… घटनाएँ खत्म हो गई? बलात्कारी इंसान बन गए? महिलाएँ सुरक्षित हो गईं? नहीं… इनमें से कुछ नहीं हुआ। आज भी कोई भी अखबार उठाकर पढ़ना शुरू करिए बलात्कार की खबरें फ्रंट पेज से मिलना शुरू हो जाएँगी….। न ये सब 2012 के बाद बंद हुआ है और न ही आने वाले समय में होगा। स्थिति में सुधार तब तक नहीं हो सकता जब तक दूषित मानसिकता पर प्रहार नहीं किया जाएगा और सक्रियता से ऐसे मामलों में पकड़े गए अपराधियों को सजा नहीं मिलेगी।

अभी के हाल ऐसे हैं कि अपराधी अपराध करने के बाद ही निश्चिंत हो जाता है कि वो या तो केस को गुमराह कर देगा और नहीं कर पाया तो उसपर 10-20 साल का समय तो रहेगा ही…सबसे ताजा मामला अजमेर सेक्स स्कैंडल का लेते हैं। 90 के दशक में इस स्कैंडल के कारण कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हुई ये किसी से छिपा नहीं है। बावजूद इसके इस मामले में निर्णय आने में 32 साल से ज्यादा लग गए...। इसी तरह निर्भया मामला। दोषियों को 8 साल बाद फाँसी हुई थी।

दुखद बात ये है कि वो मामले हैं जिन्हें मीडिया ने खूब तूल देकर गौर करवाया गया तब जाकर पीड़िताओं को इंसाफ मिलने में इतना समय लग गया, तो सोचकर देखिए उन पीड़िताओं को क्या इंसाफ मिलता होगा जिनके केस को गुमराह कर दिया जाता है, जिनके चरित्र पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं, जिनकी शिकायत कार्रवाई की जगह उनपर ही लांछन लगा दिया जाता है और मुँह बंद करने की बात कहकर उन्हें वापस उसी अंधकार भरे समाज में रहने को छोड़ दिया जाता है।

आज सोशल मीडिया पर उठती आधी आवाजें सिर्फ ट्रेंड के दबाव में हैं। उन्हें न अपराध से मतलब है, न अपराध का असर समाज पर क्या होता है इससे, न पीड़िता के दर्द से… चूँकि अगर ऐसा होता तो बीते सालों में घटनाओं का ग्राफ बढ़ने की बजाय नीचे जरूर आता है। इनके लिए बंगाल रेप जैसी घटनाएँ सिर्फ ट्रेंड का मसला है जो आज चल रहा है इसलिए बोल रहे हैं कल को कोई और मामला होगा तो इसे भूलकर उसपर बोलने लगेंगे।

शर्म की बात है कि हम उस समाज का हिस्सा हैं जहाँ न छोटी बच्ची सुरक्षित है, न स्कूल-कॉलेज जाती लड़किाँ और न घर में अकेले रहने वाली बुजुर्ग… महिलाओं पर यौन दुराचार के मामले पहले भी बढ़ रहे थे और आगे भी बढ़ेंगे… कारण हमारी ऐसे मामलों को हैंडल करने की अप्रोच है, ढीला रवैया है और घृणित मानिकता है।

रात भर रेप करता रहा डॉक्टर शाहनवाज, भागती तो जहर का इंजेक्शन लगा कर देता हत्या: मुरादाबाद की दलित नर्स ने सुनाई आपबीती, हॉस्पिटल सील

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 17 अगस्त 2024 को रेप की शिकार दलित समाज की नर्स ने कहा है कि डॉक्टर शाहनवाज ने धमकी देकर उसके साथ रात भर रेप किया था। उसने कहा कि अगर वह भागने की कोशिश करती तो उसकी हत्या कर दी जाती। इसलिए उसने सुबह होने का इंतजार किया था। पीड़िता का कहना है कि आरोपितों के परिजन केस वापस लेने के लिए उस पर दबाव डाल रहे हैं।

बता दें कि इस मामले में रेप के आरोपित डॉक्टर शाहनवाज और उसका देने वाले अस्पताल के स्टाफ जुनैद एवं महिला स्टाफ मेहनाज को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। वहीं, मुरादाबाद के CMO ने अस्पताल का पंजीकरण रद्द कर दिया है। साथ ही प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया है। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने अस्पताल पर बुलडोजर चलाने और डॉक्टरी के लाइसेंस निरस्त करने की माँग की है।

अमर उजाला के मुताबिक, पीड़िता ने रोते हुए बताया कि अगर वो घटना की रात विरोध करती तो आरोपित उसकी हत्या कर देते। लड़की ने यह भी बताया कि उसे यह डर था कि आरोपित कहीं उसे जहर का इंजेक्शन ना दे दें। इसी वजह से वह सुबह होने का इंतज़ार किया और अपने घर जाकर सारी बात बताई। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

जाटव समाज की पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि यह दबाव जेल भेजे गए आरोपितों के परिवार वालों और रिश्तेदारों की तरफ से डाला जा रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपितों के रिश्तेदार और परिजन पीड़िता के घर पहुँच गए थे। हालाँकि, लड़की के परिजनों ने किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया। इस बात की सूचना जिले के सीनियर अधिकारियों को तुरंत दी गई।

विहिप द्वारा जारी पत्र

शिकायत मिलते ही पीड़िता के घर पर पुलिस की तैनाती कर दी गई है। पीड़िता का मकान मुरादाबाद के थाना क्षेत्र डिलारी में पड़ता है, जबकि घटनास्थल ठाकुरद्वारा इलाके में है। जिस ABM अस्पताल की ये घटना है, वह एक किराए के मकान में चल रहा था। जाँच में अस्पताल मानकों पर खरा नहीं पाया गया। आखिरकार प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया है।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, शाहनवाज खुद को ABM हॉस्पिटल नाम के इस अस्पताल का डायरेक्टर बताता है। आरोपित डॉक्टर शाहनवाज शादीशुदा और 2 बच्चों का अब्बा है। वारदात के समय उसकी बीवी मायके गई हुई थी। घटना के बाद मेडिकल टीम स्थानीय पुलिस के साथ अस्पताल में पहुँची और अस्पताल के कागजात चेक किए।

अब इस मामले में विश्व हिन्दू परिषद भी आगे आया है। VHP ने मंगलवार (20 अगस्त 2024) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम से इस संबंध में अपनी माँगों को लेकर एक पत्र जारी किया है। पत्र में मुख्य आरोपित शाहनवाज के घर की कुर्की करने और फिर उस पर बुलडोजर चलवाने की माँग की गई है।

इतना ही नहीं, विश्व हिंदू परिषद ने जिस ABM हॉस्पिटल में 20 साल की नर्स से रेप किया गया, उसके सभी डॉक्टरों के लाइसेंस निरस्त करने, उन्हें कहीं भी प्रैक्टिस से आजीवन प्रतिबंधित करने और रेपिस्ट को फाँसी की सजा देने की माँग की गई है। पत्र में ऐसी घटनाओं को हिन्दू लड़कियों को चिन्हित करके अंजाम देने के आरोप लगाए गए हैं।

CM ऑफिस में रोज खाते थे 993 अंडा पफ, जगन मोहन के राज में ₹3.6 करोड़ इसी एक चीज पर हुए खर्च: वाईएसआर कॉन्ग्रेस ने दावों को बताया झूठा, TDP बता रही स्कैंडल

आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से लगातार TDP पूर्ववर्ती जगन मोहन रेड्डी की सरकार के खर्चे खंगाल रही है। TDP जगन सरकार पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाती आई है। अब CM जगन के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय के ₹3.6 करोड़ का खर्चा अंडा पफ पर करने का मामला सामने आया है। YSRCP ने इन खबरों को नकारा है जबकि TDP लगातार अपने हमले बढ़ाती जा रही है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, TDP ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने 2019-24 के बीच हर साल औसतन 72 लाख के अंडा पफ खा डाले। यह खर्चा पाँच साल में ₹3.6 करोड़ पहुँच गया। आरोप है कि CM कार्यालय में पाँच साल में 18 लाख अंडा पफ खाए गए। यानी प्रतिदिन CM कार्यालय में 993 अंडा पफ खाए जा रहे थे। जगन मोहन सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों को ‘एग पफ स्कैंडल’ का नाम दिया गया है।

इस कथित अंडा पफ घोटाले के सामने आने के बाद सत्तारूढ़ TDP और YSRCP के बीच जंग भी चालू हो गई है। YSRCP ने अंडा पफ सम्बन्धित इन खबरों को झूठ बताया है। YSRCP ने इन खबरों का खंडन करते हुए एक ट्वीट किया है। YSRCP ने लिखा कि TDP जानबूझ कर जगन मोहन रेड्डी पर कीचड़ उछाल रही है।

YSRCP ने यह भी कहा है कि घोटाले की बात पूरी तरह झूठ है और अगर इसको सिद्ध नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। YSRCP ने आरोप लगाया कि 2014-19 के बीच चन्द्रबाबू नायडू और उनके बेटे नारा लोकेश के चाय नाश्ते पर ही ₹8.5 करोड़ खर्च हुए।

वहीं TDP लगातार जगन मोहन रेड्डी पर हमले बोल रही है। TDP का आरोप है कि ना सिर्फ अंडा पफ पर बल्कि अन्य कार्यों में भी जगन मोहन रेड्डी सरकार में पैसा पानी की तरह बहाया गया। TDP ने YSRCP से पूछा है कि ₹500 करोड़ का महल किसने बनवाया था और किसने ₹700 करोड़ की मूर्तियाँ लगवाई थी। TDP ने अन्य कई खर्चे के आरोप YSRCP पर जड़े हैं।

हालाँकि, अभी इस घोटाले को लेकर कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है। हालाँकि, फिर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। गौरतलब है कि हाल ही में आंध्र प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में NDA गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की थी और पाँच वर्षों से सत्ता में काबिज YSRCP को बाहर कर दिया था। सत्ता में आने के बाद से लगातार TDP सरकार जगन मोहन रेड्डी की सरकार के दौरान हुई कथित अनियमितताओं को लेकर जाँच कर रही है।

रेप के बाद जन्म दिया मरा हुआ बच्चा, न्याय के लिए पीड़िता ने नहीं की शादी: अजमेर सेक्स स्कैंडल में ऐसे आया 32 साल बाद फैसला, बदबू मारते कंडोम भी बने सबूत

राजस्थान के अजमेर में 100 से अधिक लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार करने वालों में से 6 दोषियों को पॉक्सो अदालत ने उम्रकैद और 5-5 लाख रुपए की सज़ा सुनाई है। 32 वर्षों तक मामले की सुनवाई होना पुलिस के लिए ख़ासा मुश्किल था, क्योंकि सबूत और गवाह सहेज कर रखने होते हैं। कई पीड़िताओं ने तो अपना घर और गाँव तक छोड़ दिया था। वहीं सबूत के रूप में रखे गए बिस्तर और कंडोम बदबू मारने लगे थे। नाते-रिश्तेदारों की मदद से पीड़ितों को खोजा गया।

फिर उन्हें गवाही देने के लिए मनाना भी बड़ा कार्य था। कई फिर से इन घटनाओं को याद नहीं करना चाहती थीं और इससे दूर ही रहना चाहती थीं। फ़िलहाल विजय सिंह राठौड़ 2020 से इस मामले के अभियोजक हैं, उनसे पहले 12 अभियोजक बदल चुके हैं। अभियोजन पक्ष सिर्फ 16 पीड़िताओं को ही गवाही के लिए मना सका। इनमें से भी 13 ने रसूखदार आरोपितों के डर से अपने बयान बदल दिए। पुलिस ने कंडोम, कैमरे, डायरी, बिस्तर कैसेट्स, कपड़े और अन्य वस्तुएँ भी सबूत के रूप में सहेज कर रखा था।

इस मामले में 4 बार सुनवाई चली, ऐसे में हर बार सबूतों को अदालत में पेश करना पड़ा। नफीस चिश्ती, नसीम उर्फ ​​टार्जन, सलीम चिश्ती, इकबाल भाटी, सोहेल गनी और सईद जमीर हुसैन को इस मामले में सज़ा सुनाया गया है। अधिकतर लड़कियों की उम्र 11 से 20 वर्ष के बीच थी जो स्कूल-कॉलेज जाती थीं। एक फार्महाउस में बुला कर उनके साथ दरिंदगी की जाती थी। उनकी तस्वीरें क्लिक कर ली जाती थीं, जो शहर भर में फ़ैल गई थीं। इन्हीं तस्वीरों के सहारे लड़की को सहेलियों को लाने के लिए कहा जाता था।

इस मामले में कुल 18 आरोपित थे जिनमें से पहली चार्जशीट में 12 का नाम था। नसीम उर्फ़ टार्जन 1994 में फरार हो गया था। ज़हूर चिश्ती एक लड़के के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का दोषी पाया गया था। उसका मामला दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था। 2007 में उसे आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। एक आरोपित ने आत्महत्या कर ली थी। 8 आरोपितों को 1998 में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। फारूख चिश्ती को सिजोफ्रेनिया होने की वजह से अलग अदालत में उसका मुकदमा चलाया गया था।

अलमास नाम का आरोपित अब तक फरार है। इन 6 के खिलाफ अलग से मुकदमा चलाया गया, क्योंकि जब 12 के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी तब इनके खिलाफ जाँच लंबित रखी गई थी। पीड़िताओं में से एक की उम्र उस समय 17 साल थी। वो डिबेट्स में अच्छी थी, राजनीति में आना चाहती थी। अनवर चिश्ती ने उसे कॉन्ग्रेस में शामिल कराने का लालच दिया और फार्महाउस बुलाया। फिर ब्लैकमेल और गैंगरेप का खेल शुरू हुआ। मात्र 3 पीड़िताएँ ही ऐसी थीं, जो न्याय के लिए लड़ीं।

इनमें से एक पीड़िता को तो उनके पिता साथ लेकर कोर्ट आते-जाते थे। कोरोना महामारी के दौरान पुलिस ने इन पीड़िताओं को ट्रैक कर उनके बयान दर्ज कराने शुरू किए। एक पीड़िता ने न्याय की लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने के लिए अब तक शादी नहीं की, न ही शहर छोड़ा। आरोपितों को लेकर उसके बयान महत्वपूर्ण साबित हुए। पीड़िता ने कोर्ट में आरोपितों की शिनाख्त की, बताया कि कैसे उसकी बहन का रेप करने की धमकी दी गई, एक बार वो गर्भवती भी हो गई। गर्भपात के बावजूद डिलीवरी हुई लेकिन बच्चा मृत निकला।

एक कहानी दरगाह बाजार के पास रह रहने वाले पिता-पुत्र की भी है। पहले तो वो अजमेर छोड़ चुके थे और गवाही देने के लिए तैयार नहीं थे। पुलिस ने नाम उजागर न होने का भरोसा दिलाया तो वो तैयार हुए। उन्हें छिपा कर कोर्ट लाया जाता था। एक पीड़िता की पंजाब में शादी हुई, भाई न गवाही दिलाने से मना कर दिया। कुछ परिजन पुलिसकर्मियों से कह देते थे कि पीड़िता मर चुकी है। पुलिस ने काउंसिलिंग का भी सहारा लिया। पीड़िताओं को टेलीफोन-गैस सिलिंडर देने का लालच देकर भी फँसाया जाता था।

‘भारत को प्यार चाहिए तो बांग्लादेश को सौंप दे शेख हसीना’: खालिदा जिया का शागिर्द दे रहा गीदड़भभकी, पूर्व मंत्री दीपू मोनी पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने किया हमला

बांग्लादेश में हिंदू और शेख हसीना सरकार की पार्टी के लोग और सरकार में शामिल रहे बड़े चेहरों को इस्लामिक कट्टरपंथी किस तरह से निशाना बना रहे हैं कि वहाँ पुलिस हिरासत में होने के बावजूद हिंदू महिला मंत्री दीपू मोनी को लोगों ने जमकर पीटा। यही नहीं, उनके साथ ही हिरासत में लिए गए एक अन्य पूर्व मंत्री आरिफ खान जॉय को भी जमकर पीटा गया। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ, बावजूद उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों से कोई बचा नहीं पाया। वहीं, दूसरी तरफ शेख हसीना की कट्टर प्रतिद्वंदी खालिदा जिया के एक करीबी ने भारत सरकार को धमकाने की कोशिश की है, साथ ही कहा है कि शेख हसीना को बांग्लादेश के हवाले कर दिया जाए।

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 जुलाई 2024 को ढाका के मोहम्मदपुर में किराना दुकान चलाने वाले अबू सईद की प्रदर्शन के दौरान पुलिस वालों की गोली से मौत हो गई थी। इस मामले में शेख हसीना सरकार में समाज कल्याण मंत्री रही दीपू मोनी और पूर्व उप-खेल मंत्री आरिफ खान जॉय को भी गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि शुरुआती एफआईआर में दोनों का नाम ही नहीं था। इसके बावजूद दीपू मोनी को न सिर्फ गिरफ्तार किया गया, बल्कि कोर्ट में भी पेश किया गया। उसकी पेशी के दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हमला बोल दिया, जिसमें वो घायल भी हो गईं।

इस मामले की सुनवाई के बाद ढाका के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुल्तान सोहाग उद्दीन ने दीपू मोनी को चार दिन और जॉय को पाँच दिन की रिमांड पर भी भेज दिया। इस दौरान कोर्ट रूम में इस्लामिक कट्टरपंथी इनके लिए फाँसी की माँग करते हुए नारे लगाते दिखे। इस दौरान सेना, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के सदस्य और अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को कोर्ट में तैनात किया गया था, लेकिन हमलावरों से वो बचा नहीं पाए।

इस केस में 13 अगस्त को मोहम्मदपुर क्षेत्र के निवासी आमिर हमजा शातिल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और छह अन्य के खिलाफ ढाका में हत्या का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में दीपू मोनी और आरिफ खान जॉय का नाम प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार दिखाया गया। यह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ दर्ज किया गया पहला मामला भी है, जब उन्होंने 5 अगस्त को बड़े पैमाने पर विद्रोह के बीच इस्तीफा देकर भारत चली गयी थीं।

अन्य आरोपितों में अवामी लीग के महासचिव और सड़क राजमार्ग एवं पुल मंत्री ओबैदुल कादर, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमाँ खान, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल मामून, पूर्व डीबी (ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस) प्रमुख हारुन ओर रशीद, पूर्व डीएमपी आयुक्त हबीबुर रहमान और पूर्व डीएमपी संयुक्त आयुक्त बिप्लब कुमार सरकार शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में कई शीर्ष पुलिस अधिकारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों को भी आरोपित बनाया गया।

भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा जिया का करीबी

जिस मामले में शेख हसीना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उस मामले में मुकदमा चलाने के लिए खालिदा जिया के करीबी और बीएनपी नेता फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भारत को धमकाने की कोशिश की है। बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा, “हमारी भारत से अपील है कि वह शेख हसीना को कानूनी तरीके से बांग्लादेश सरकार को सौंप दे। बांग्लादेश की जनता ने उनके मुकदमे का फैसला सुना दिया है। उन्हें उस मुकदमे का सामना करने दें।”

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, आलमगीर ने कहा कि शेख हसीना को शरण देकर भारत ने ठीक नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शेख हसीना भारत में रहकर बांग्लादेश में हुई क्रांति को विफल करने के लिए साजिशें रच रही हैं। शेख हसीना को लेकर उन्होंने कहा, “मैं यह बात दृढ़ता से कह रहा हूँ और हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि भारत को बांग्लादेश के लोगों के दुश्मन (शेख हसीना) को पनाह देकर ज्यादा प्यार मिल सकता है, जिसे देश से भागना पड़ा था।”

बता दें कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद शेख हसीना ने भारत में शरण ली है। उनके खिलाफ बांग्लादेश में कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं। यही नहीं, उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर हत्या भी हुई है। इन सबके बीच, उन्होंने 5 अगस्त को बांग्लादेश का प्रधानमंत्री पद छोड़ कर भारत में शरण लिया था। माना जा रहा है कि वो किसी तीसरे देश जा सकती हैं।

हिन्दुओं पर हमला किया इस्लामी भीड़ ने, दोष भारत को दे रहा जर्मन मीडिया DW: हिन्दू विरोधी हिंसा को फर्जी साबित करने में जुटा, कह रहा – ये राजनीतिक

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता तख्तापलट में छिनने के बाद से लगातार इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दू समुदाय को निशाना बना रहे हैं। बड़ी संख्या में उनके घरों पर हमले किए गए हैं। उनके मंदिरों को नष्ट किया गया है और साथ ही कुछ के साथ बर्बरता भी हुई है। इन सब के बावजूद विदेशी वामपंथी मीडिया डायचे वेले (DW) इस्लामी कट्टरपंथियों के पापों को धुलने में लगा है। वह हिन्दुओं पर अत्याचारों के दावों को फर्जी साबित करने में जुट गया है। उसने भी बाकी विदेशी मीडिया संस्थाओं की राह पर चलते हुए इन हमलों को राजनीतिक बताने का प्रयास किया है।

सोमवार (19 अगस्त, 2024) को DW ने एक वीडियो प्रकाशित किया। वीडियो में बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमलों को दबाने का प्रयास किया गया और भारतीय मीडिया पर फर्जी जानकारी फ़ैलाने का आरोप लगाया। यह वीडियो 2 मिनट 29 सेकंड का है।

DW ने अपनी रिपोर्ट में बांग्लादेश के जेशोर में हजरत गरीब शाह मजार शरीफ पर आगजनी के हमले का हवाला दिया, जिसे कथित तौर पर सोशल मीडिया पर एक हिंदू मंदिर पर हमले के रूप में साझा किया गया था। DW ने बताया, “इस वीडियो में, बांग्लादेश में एक हिंदू मंदिर कथित तौर पर जल रहा है। इस वीडियो को 280,000 से अधिक बार देखा जा चुका है, लेकिन यह फर्जी है। बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर जलाए गए हिंदू मंदिरों या घरों के वीडियो हजारों बार साझा किए गए और देखे गए। यहाँ ऐसे हमले हो रहे हैं, लेकिन सारे सच नहीं हैं।”

हिन्दुओं पर हो रहे हमलों को आगे और झुठलाने के लिए DW ने एक कथित विशेषज्ञ की राय भी ले ली। थॉमस कीन नाम के इस विशेषज्ञ ने दावा किया कि यह हमले धार्मिक आधार पर हुए, यह स्पष्ट नहीं है। कीन ने कहा कि यह हमले भारत में धार्मिक रूप से प्रेरित बताए गए हैं, लेकिन ऐसा साफ़ तौर पर है नहीं।

DW ने इसके बाद हमलों पर लीपापोती को लेकर एक और लतीफा छोड़ा। DW ने भी अन्य विदेशी मीडिया संस्थानों की तरह हिन्दुओं पर हमले का कारण धार्मिक ना बता कर उन्हें राजनीति के कारण पीड़ित बताने का प्रयास किया है। DW का दावा है कि हिन्दू इसलिए बांग्लादेश में निशाने पर लिए जा रहे हैं क्योंकि शेख हसीना को हिन्दुओं के संरक्षक के तौर पर देखा जाता था।

DW ने लिखा, “विशेषज्ञों के अनुसार, कई घटनाएँ पहले सता में रही अवामी लीग के खिलाफ राजनीति से प्रेरित थीं इसके अलावा कानून व्यवस्था ना होने के कारण हमले हुए। वहीं दूसरी ओर, बांग्लादेश में लगभग 8% हिंदू हैं, जो मुस्लिम देश में अल्पसंख्यक हैं। पूर्व प्रधानमंत्री की अवामी लीग को हिंदुओं जैसे अल्पसंख्यक समुदायों के मुख्य संरक्षक के रूप में देखा गया है।”

दिलचस्प बात यह है कि डीडब्ल्यू न्यूज़ ने इस तथ्य को नज़रअंदाज़ कर दिया कि बांग्लादेश की 91% आबादी मुसलमानों की है (जिनमें से ज़्यादातर सुन्नी हैं)। बांग्लादेश में इस्लामी मौलाना अक्सर मज़ारों पर आने वाले लोगों का मज़ाक उड़ाते हुए देखे जाते हैं, जो उन्हें ‘काफ़िर’ हिंदुओं के समान बताते हैं। ऐसे में यह कोई अजीब बात नहीं कि यहाँ इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने हज़रत गरीब शाह मज़ार शरीफ़ में आग लगा दी। कट्टरपंथी भारतीय उपमहाद्वीप में शिया, सूफ़ी, हज़ारा और अहमदिया से धार्मिक स्थलों पर हमला करने के लिए जाने जाते हैं।

हिन्दुओं पर हमलों पर पर्दा डालने के बाद DW भारत पर दोष मढ़ने लगता है। DW का दावा है कि भारत में बांग्लादेश के मुद्दे पर इसलिए ज्यादा बात हुई क्योंकि मोदी सरकार और शेख हसीना के रिश्ते अच्छे थे। DW ने कहा कि बांग्लादेश में सत्ता बदलने को भारत ने खतरे के तौर पर देखा इसलिए उसने इन खबरों को चलने दिया। DW पूरी रिपोर्ट में इस्लामी कट्टरपंथियों का नाम लेने में शर्माता रहा। हालाँकि, उसने हिन्दुओं और उनकी आवाज उठाने वालों को कठघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

पहले भी विदेशी मीडिया करता रहा है प्रपंच

DW हिन्दुओं के खिलाफ हो रही हिंसा को नकारने वाला कोई पहला विदेशी मीडिया संस्थान नहीं है। इससे पहले अल जजीरा, BBC, न्यूयॉर्क टाइम्स, द न्यूयॉर्कर और ABC भी ऐसे प्रयास कर चुके हैं। इन सभी की लाइन यही है कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले राजनीतिक कारणों से हो रहे हैं और इन हमलों में बढ़ोतरी इसलिए हुई है क्योंकि भारत में हिन्दुओं की प्रताड़ना की खबरें दिखाई जा रही हैं। इससे पहले BBC, अल जजीरा, ABC यही दावा कर चुका है कि हिन्दू राजनीतिक कारण से निशाने पर हैं।

हाल ही में अमेरिकी पत्रिका द न्यूयॉर्कर ने अपनी हिन्दू घृणा का नया कीर्तिमान बनाते हुए एक और नया शिगूफा भी छोड़ा था। द न्यूयॉर्कर का दावा था कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हमले इसलिए हो रहे हैं क्योंकि भारत एक हिन्दू बहुल राष्ट्र है। इसके अलावा द न्यूयॉर्कर के लिए हमले की जिम्मेदार भारत में एक कथित हिन्दू राष्ट्रवादी सरकार होना भी था। हालाँकि, इन सब के बीच हिन्दुओं पर हमले को मानते हुए द न्यूयॉर्कर ने यह मानने से इनकार कर दिया कि BNP और इस्लामी कट्टरपंथी हिन्दुओं पर हमले के लिए जिम्मेदार हैं।

द न्यूयॉर्कर मात्र यहीं नहीं रुका बल्कि उसने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हिंसा की खबरों को भाजपा भारत के भीतर हवा दे रही है। उसने इसके पीछे तर्क दिया कि भाजपा इसलिए यह कर रही हैं क्योंकि कथित तौर पर भारत में उसका समर्थन कम हो रहा है। न्यूयॉर्कर भारत, दक्षिणपंथ, भाजपा और भारतीय मीडिया सभी को इस हिंसा के पीछे दोषी बताता रहा लेकिन उसकी हिम्मत यह नहीं हुई कि वह इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा को उजागर करे।

यह विदेशी मीडिया ही कर सकता है कि भारत में किसी सड़क हादसे में मारे जाने वाले मुस्लिम की मौत को भी वह मुस्लिमों पर अत्याचार के रूप में पेश कर दे, लेकिन बांग्लादेश में हिन्दुओं का मारा जाना और उनके मंदिरों पर हमला होना उसे बड़ी बात नहीं लगता। इस पर वह लीपापोती करने का प्रयास करता है।

जिस नाबालिग से नवाब यादव ने किया रेप, उसकी बुआ भी गिरफ्तार: बयान से पलटने पर सपा नेता के भाई ने पैसे का दिया था लालच, दोनों में थे शारीरिक संबंध

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में नाबालिग लड़की से रेप के आरोपित समाजवादी पार्टी के दबंग नेता नवाब सिंह यादव से जुड़ी महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। महिला पीड़िता की बुआ है और जिस वक्त नवाब यादव ने उसके साथ रेप किया, उस वक्त महिला वहाँ मौजूद थी। इसके बावजूद उसने अपने भतीजी की मदद नहीं की। बकौल पुलिस, पीड़िता की बुआ और नवाब के बीच पहले से ही शारीरिक संबंध थे।

पुलिस के अनुसार, घटना के दिन नवाब यादव ने महिला को फोन किया तो उसने बताया कि वह अपनी भतीजी के साथ लखनऊ में है। इसके बाद नवाब ने नाबालिग को भी अपने साथ लेकर उसके कॉलेज परिसर में आने को कहा था। कॉलेज परिसर में नवाब ने नाबालिग से रेप किया। पीड़िता के मेडिकल में इसकी पुष्टि हुई है। मेडिकल के आधार पर पुलिस ने इस केस में और धाराएँ जोड़ दी हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 11 अगस्त 2024 की रात को हुए इस घटनाक्रम में अब कन्नौज पुलिस ने पीड़िता की बुआ को भी आरोपित बनाया है। आरोप है कि पीड़िता के साथ जब नवाब रेप कर रहा था, उस समय नाबालिग ने शोर मचाया था। हालाँकि, उसकी बुआ ने मदद नहीं की। बता दें कि पिछले कुछ समय से पीड़िता की बुआ फरार चल रही थी। 21 अगस्त की सुबह 5 बजे उसे गिरफ्तार किया गया है।

पूछताछ में पीड़िता की बुआ ने बताया कि उसने नवाब यादव को अपनी भतीजी के साथ लखनऊ में होने की जानकारी दी थी। इसके बाद नवाब ने पीड़िता को अपने कॉलेज में लाने के लिए कहा था। पीड़िता की बुआ ने यह भी बताया कि वो और नवाब यादव पिछले 5-6 साल से एक-दूसरे के सम्पर्क में थे। इस दौरान दोनों में शारीरिक संबंध भी थे।

पुलिस की पूछताछ में लड़की की बुआ ने यह भी बताया कि लड़की के मेडिकल के दौरान नवाब यादव के भाई ने लालच दिया था कि यदि वह अपने बयान से पलट जाए और मेडिकल ना हो तो वह पैसे देगा।पीड़िता और उसकी बुआ से कहा गया कि वो इस मामले में किसी का नाम ना बताएँ, जिससे जाँच को भटकाया जा सके। नवाब के भाई ने कुछ अन्य लोगों का नाम लेने का भी दबाव बनाया था।

पुलिस का मानना है कि शुरू में नाबालिग की बुआ ने जाँच में सहयोग किया, लेकिन बाद में वो गुमराह करने लगी थी। पीड़िता के माता-पिता भी उसकी हरकतों को संदिग्ध बता रहे थे। इस बीच पीड़िता के माता-पिता ने बेटी के मेडिकल टेस्ट की अनुमति दे दी। मेडिकल में पीड़िता के साथ रेप की पुष्टि हुई है। अब इस केस में पुलिस ने रेप की धारा भी जोड़ दी है।

पुलिस अधीक्षक कन्नौज के मुताबिक, हर पहलू की गहराई से जाँच की जा रही है। बता दें कि 11-12 अगस्त की रात में पीड़िता ने कॉल करके पुलिस से मदद माँगी थी। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने नवाब यादव को उसके कॉलेज से गिरफ्तार कर लिया था। स्थानीय लोगों द्वारा नवाब को समाजवादी पार्टी का नेेता बताया जा रहा है। हालाँकि, सपा ने पत्र जारी करके उसके सपा से जुड़े होने का खंडन किया है।