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अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

‘खाना बनाकर रखना’ कह कर घर से निकला था मुकेश, जिंदा जलाने की खबर आई: ‘किसानों’ के टेंट या गुंडई का अड्डा?

किसानों के नाम पर सड़क पर कब्जा जमाने वाले कौन हैं? इनके टेंट नशे और गुंडई के अड्डे हैं? मुकेश की विधवा के सवालों का मिलेगा जवाब?

ब्राह्मण होने के कारण जलाया गया ग्राम कसार का मुकेश? पत्नी ने कहा- उनको सजा नहीं हुई तो वहीं पेट्रोल छिड़ककर मरूँगी

शराब, हुड़दंग, छेड़खानी... किसी आंदोलन की पहचान हो सकते हैं? कसार के ग्रामीणों की मानें तो कथित किसान आंदोलन इसी के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है।

ई चीटिंग है, बात तोता दिखाने की थी-तोते उड़ाने की नहीं: देश का पप्पू

सबको फ्री वैक्सीन और 80 करोड़ को दीवाली तक फ्री अनाज! देश के पप्पू से रहा न गया, प्रधानसेवक को चिट्ठी लिख डायरेक्ट चेतावनी दी है।

महारानी की रानी भारती ‘काटती’ है, बिहार की राबड़ी देवी ‘कागजी’ थी… फिर हंगामा क्यों बरपा

काश राबड़ी देवी, महारानी की रानी भारती जैसे काटतीं। तब बिहार को वह भोगना नहीं पड़ता, जिसकी यादें आज भी उसे सिहरा देती हैं।

डॉ. सैयद फैजान अहमद, बीमारी इधर है-आप किधर हैं: बंगाल के बुजुर्ग डॉक्टर मुखोपाध्याय हों या असम के सेनापति, हमलावर वही हैं

असम में डॉक्टर पर हमला करने वालों के नाम सामने आने के बाद से इस विवाद में कट्टरपंथी स्वामी रामदेव को घुसेड़ने की कोशिश में लगे हैं।

इंदिरा गाँधी के ‘गुरु’ चाहते थे गिरा दी जाए संसद, ‘नई संसद अंधविश्वास का नतीजा’ से पहले भी आई थी एक थ्योरी

सेंट्रल विस्टा पर प्रोपेगेंडा के बीच एक तथ्य यह भी है कि कभी अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर मोटे अक्षरों में संसद को गिरा देने का वादा किया गया था।

7 साल बाद PM मोदी यहाँ हैं… नेहरू, इंदिरा, मनमोहन कहाँ थे

नेता और राजनेता के बीच का फर्क ही मोदी की बतौर प्रधानमंत्री सात साल की यात्रा है। यह उन्हें अपने पूर्ववर्तियों से कहीं आगे खड़ा करती है।

सवाल: 60 साल में कॉन्ग्रेस ने क्या किया, जवाब: AIIMS की ‘चोरी’

कॉन्ग्रेस ने 60 सालों में क्या किया? जवाब है, वाजपेयी की दृष्टि से पैदा एम्स और कुछ निजी कंपनियाँ। यह हम नहीं कह रहे। कॉन्ग्रेस के ही एक नेता ने बताया है।