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अनुपम कुमार सिंह

भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

सोनिया गाँधी का ‘काला कानून’: आज ताहिर हुसैन जैसे दंगाई आज़ाद और जेल में होते दिल्ली के पीड़ित हिन्दू

यदि व​ह बिल कानून बन जाता तो आज ताहिर हुसैन पुलिस के शिकंजे में नहीं होता। उलटा दिवंगत आईबी ऑफिसर अंकित शर्मा के परिवार पर ही कार्रवाई हो रही होती। फ़ारूक़ फैसल गिरफ़्तार नहीं होता, उलटा प्राचीन हनुमान मंदिर की रक्षा के लिए जान हथेली पर रखने वाले हिन्दू ही जेल में होते।

जीभ काटी, आँखें फोड़ी, नाखून उखाड़े, सर काट कर कुत्तों को खिलाया: छत्रपति संभाजी महाराज को मिली इस्लाम कबूल न करने की सज़ा

छत्रपति संभाजी महाराज के शरीर के अंग काट लिए जाते थे और रात भर तड़पने के लिए छोड़ दिया जाता था। फिर भी उन्होंने इस्लाम कबूल नहीं किया।

50 साल पहले पिता को देने पड़े थे ₹101, ₹5 में ही हो जाएगा बेटे का काम: तब अटल थे, आज मोदी हैं

माधवराव सिंधिया जब जनसंघ के सदस्य बने थे, तब उनकी उम्र मात्र 25 साल थी। बाद में वे कॉन्ग्रेसी हो गए। आज जैसे कॉन्ग्रेस में उनके बेटे को दरकिनार किया गया है, ऐसा कभी उनके साथ भी हुआ था। तब 1993 में उन्होंने 'मध्य प्रदेश विकास कॉन्ग्रेस' बनाई थी।

नीरज प्रजापति के लिए ऑपइंडिया ने जुटाए ₹32 लाख: CAA समर्थन रैली में मुस्लिम भीड़ ने मार डाला था

नीरज प्रजापति की एक 9 साल की बेटी है और 3 वर्ष का बेटा है, जिनकी शिक्षा-दीक्षा और भरण-पोषण हेतु लोगों द्वारा सहयोग स्वरूप दी गई राशि का अहम योगदान होगा। पीड़ित परिवार ने जनता के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है। ऑपइंडिया भी आप सभी का धन्यवाद करता है।

दंगाइयों का डर ऐसा: पति लहूलुहान सड़क पर पड़ा था, पत्नी लगाती रही गुहार लेकिन कोई न आया

कविता ने मुश्किल वक्त में भी हौसला नहीं छोड़ा। फिर भी अपना सुहाग नहीं बचा पाई। उसके सास-ससुर तो इतने डरे हुए हैं कि श्मशान घाट से ही गॉंव लौट गए। शिव विहार के उस घर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए जहॉं उनका लाडला रहता था।

‘उनके’ डर से बच्चों के साथ घर में दुबके रहते हैं, रात भर नींद नहीं आती: महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द – ग्राउंड रिपोर्ट

ये महिलाएँ हैं दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों की। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि वो पल-पल दंगाई भीड़ के डर के साए में जी रही हैं। महिलाओं ने अपना दुःखड़ा सुनाते हुए कहा कि समुदाय विशेष के लोग आकर उनके घरों को आग के हवाले करने की धमकी देते हैं।

मेरे भाई को जिहाद ने मारा है, एक-एक मस्जिदों व मदरसों की तलाशी ली जाए: दलित दिनेश के भाई

अपने दो छोटे-छोटे बच्चों के लिए दूध लेने निकले दिनेश को मजहबी भीड़ ने मार डाला। उनके भाई ने कहा कि पुलिस हिन्दुओं के पास से एक चाकू मिलने पर भी कार्रवाई करती है, जबकि मुस्लिम घर-घर में हथियार रखते हैं। उन्होंने एक-एक मुस्लिम के घरों की तलाशी लेने की माँग की।

कपिल मिश्रा के बयान से पहले ही दंगाई भीड़ ने शुरू कर दिए थे दंगे: ‘Live Video’ से खुलासा

जितने बड़े स्तर की तैयारी इस्लामी कट्टरवादियों ने की थी, वो 1 दिन में हो ही नहीं सकती। अब देखिए 23 फ़रवरी का वो लाइव वीडियो, जो बताता है कि कपिल मिश्रा के बयान से पहले ही दंगाई भीड़ ने दंगे शुरू कर दिए थे। ये वीडियो है इसका सबसे बड़ा सबूत।