जेम्स बॉन्ड भी जुड़ेंगे ‘प्रियंका सेना’ से, अत्याधुनिक पिंक गैजेट्स से ‘लैस’ है यह सचल दस्ता

पिंक लिबास में रंगी इस सेना का अवतरण युवाओं में जोश भर देना वाला होगा। फ़रवरी के महीने में युवा सिर्फ़ 'बजरंग सेना' और 'हिन्दू राष्ट्र सेना' जैसे कट्टर दलों के नाम ही सुनते आए थे, ऐसे में उनके सामने अब प्रियंका सेना का ‘क्यूट ऑप्शन’ भी आ गया है।

24 घंटे पति के साथ खड़ी रहने वाली रॉबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा आज से मिशन उत्तर प्रदेश पर हैं। मीडिया गिरोहों में फ़िल्म सिटी नोएडा से लेकर ग्रेटर कैलाश तक ख़ुशी की लहर देखी जा सकती है। ख़ुद कॉन्ग्रेस ने नहीं सोचा था कि चिरयुवा राहुल गाँधी की नेतृत्व क्षमता को नकारने से सारा कॉन्ग्रेस दल इस तरह जश्न मनाएगा।

आत्मबोध ऐसा शब्द है जो किसी भी उम्र, वर्ग और राजनीतिक दल में स्वीकार्य और ‘हाइली डिज़ायरेबल’ चीज है। लेकिन ऐसा तो नहीं हो सकता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी, जो अनुभव की धनी है, उसे अपने नेतृत्व को लेकर आत्मबोध न रहा हो। यानी स्पष्ट है कि कॉन्ग्रेस का मुख्य मर्म आत्मबोध नहीं बल्कि निर्णय ले पाने की असमर्थता है।

तो अब कॉन्ग्रेस निर्णय ले पाने की इस असमर्थता से पार पा चुकी है। राहुल गाँधी को बैकफुट पर डाल कर अब उसने जो सबसे ऐतिहासिक निर्णय लिया है वो है ‘प्रियंका सेना’ के गठन का।

अत्याधुनिक गैजेट्स और उपकरणों से ‘लैस’ है प्रियंका सेना

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ऐसे में, जब कि फ़रवरी का महीना चल रहा है और हर ओर बागों में बहार ही बहार है, पिंक लिबास में रंगी इस सेना का अवतरण युवाओं में जोश भर देना वाला निर्णय साबित हो सकता है। जहाँ अब तक फ़रवरी के महीने युवा सिर्फ़ ‘बजरंग सेना’ और ‘हिन्दू राष्ट्र सेना’ जैसे कट्टर दलों के नाम ही सुनते आए थे, ऐसे में उनके सामने अब एक प्रियंका सेना का ‘क्यूट ऑप्शन’ भी आ गया है। उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि जिस तरह की अत्याधुनिक सुविधाओं से ‘लैस’ यह प्रियंका सेना है, इसमें जेम्स बॉन्ड और IMF टीम भी अप्प्लाई करने वाली है।    

पिंक मेट्रो के बाद पिंक सेना

युवाओं के मन में उमड़-घुमड़कर सवाल फूट रहे हैं। जैसे, क्या अब इस पिंक रंग के चलते रणवीर सिंह भी प्रियंका सेना में शामिल होंगे? क्या हर दूसरे दिन नाराज़ गर्लफ्रेंड को मनाने के लिए ‘पिंक पिलो’ और ‘पिंक टेड्डी बिअर’ ख़रीदने के लिए पिंक लाइन मेट्रो से सरोजिनी नगर का सफर करने वाले युवाओं को यह सेना अपनी भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण देगी?

‘जनेऊ’ के बाद ‘सेना’ भी कहीं कॉन्ग्रेस का मास्टरस्ट्रोक तो नहीं?

कॉन्ग्रेस पिछले चार साल में जितनी ‘हिंदूवादी पार्टी’ बनकर उभरी है, उतना अन्य कोई दल आज़ादी के इतने सालों में नहीं हो सका है। अध्यक्ष श्री राहुल गाँधी गले में जनेऊ पहनकर घूम रहे हैं, मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमल नाथ भी कट्टर नव-गौ-भक्त बनकर उभर रहे हैं। इसी तरह से चुनावी मौसम में ‘सेनाओं’ के योगदान को देखते हुए अब कॉन्ग्रेस भी मैदान में उतर रही है, जिसका पहला सचल दस्ता आज सबके सामने आ चुका है।

सही खेल रहे हैं आप, कम्प्यूटर जी लॉक कर दीजिए

चौंकाने वाली बात यह है कि ‘सेना’, ‘दल’ और गौ-भक्त’ अब तक सिर्फ़ दक्षिणपंथियों के ही विशेषण हुआ करते थे, लेकिन अगर अब कॉन्ग्रेस भी ‘सेना’ और ‘दल’ के मुद्दों पर मोर्चा संभालने लगे तो स्टारबक्स में बैठकर, की-बोर्ड पटककर ‘गौ-भक्तों’ की जानकारी सार्वजनिक कर रहा आदर्श-लिबरल नामक क्रान्तिजीव तो सड़क पर ही आ जाएगा। क्या कॉन्ग्रेस उन लोगों के विचारों का सम्मान नहीं करती है, जो उसको लेकर सत्संगी माहौल बनाता है?

भाई साहब, किस लाइन में आ गए आप ?

‘प्रियंका सेना’ के कार्यकर्ताओं ने जो टीशर्ट पहनी है, उस पर लिखा है, ‘देश के सम्मान में प्रियंका जी मैदान में, मान भी देंगे, सम्मान भी देंगे, वक़्त पड़ेगा तो जान भी देंगे।’ अरे भाई साहब, ये मरने-मारने वाले जुनूनी काम तो आपके अनुसार दक्षिणपंथियों के नारे हुआ करते थे! आपका परिचय तो सत्संग है, आतँकवादियों और पत्थरबाज़ों की रिहाई में सुकून ढूँढना है, चाहे वो अफ़ज़ल गुरू हो या फिर फ़ारुक़ डार हो। इस तरह की सेना आपको शोभा नहीं देती है।

यह आदर्श लिबरल नामक जीव सोशल मीडिया से लेकर घरेलू चर्चा और शादी में जूता चुराई की रश्म तक में मौक़ा ढूँढते ही भाजपा और ख़ासकर हिन्दुओं को ‘ओल्ड स्कूल थिंग’ बताता फिरता है। वो तो मानता है कि ‘सेना’ शब्द गँवारपन का प्रतीक है। यह आदर्श सतसंगी गिरोह कहता है कि विशेष कारणों से ‘पिंक कलर’ चुनना या बोलना आपको ‘Sexist’ और ‘मिसोजेनिस्ट’ बनाता है। फिर भी कॉन्ग्रेस अपने भक्तों का दमन करते हुए लगातार ब्राह्मणवाद से लेकर ‘सेनावाद’ की ओर बढ़ती ही जा रही है।

यह गिरोह मोहल्ले के ग़रीब बच्चों के साथ फ़ोटो खींचकर सोशल मीडिया पर तो ख़ूब डालता है, लेकिन जनजाति की तुलना मोर से करने में कोताही नहीं बरतता है। अब जबकि कॉन्ग्रेस ‘पिंक प्रियंका सेना’ का आविष्कार कर चुका है, तो फिर ऐसे में ये आदर्श-लिबरल समूह किसे नीचा दिखाएगा? कॉन्ग्रेस ने इन आदर्श-लिबरलों का मुँह बंद करने के लिए प्रियंका सेना नाम का मास्टरस्ट्रोक खेलकर बड़ी बढ़त बना ली है। क्योंकि वो जानता है कि ये ‘बतोले लिबरल’ की-बोर्ड सेना से ज़्यादा कुछ नहीं है, ये वोट देने लाइन पर नहीं खड़ी होती है, न ही इसे राशन की कतारों में खड़ा होना पड़ता है।

प्रियंका सेना द्वारा ‘पिंक रंग’ को महिलाओं का रंग बताकर महिला सशक्तिकरण की ओर कॉन्ग्रेस ने बड़ा क़दम उठा लिया है। अभी देखना ये है कि पति के साथ हर वक़्त खड़े रहने का दावा करने वाली यह पार्टी इस ‘पिंक रंग सेना’ के साथ कब तक खड़ी रहती है। तब तक नाश्ते में प्रियंका गाँधी और डिनर में इंदिरा गाँधी की तस्वीरें दिखने वाले जादूगर मीडिया को देखते रहिए।

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