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50+ देश, 800+ कलाकार, 1200+ स्टॉल: 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला की हुई शूरूआत, लोकल से ग्लोबल होने पर रहेगा जोर

सूरजकुंड मेला केवल कला और स्वाद का संगम नहीं, बल्कि 'लोकल टू ग्लोबल' के संकल्प के साथ भारतीय शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच देने और विश्व बंधुत्व को मजबूत करने का एक सुनहरा उत्सव है।

हरियाणा के फरीदाबाद में शनिवार (31 जनवरी 2026) से विश्व प्रसिद्ध 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले की शानदार शुरुआत हो गई है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इस भव्य महोत्सव का उद्घाटन किया, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी शरीक हुए।

15 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस मेले की इस बार की थीम ‘Local to Global’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य हमारे स्थानीय कारीगरों की कला को पूरी दुनिया के सामने पेश करना है। उत्तर प्रदेश और मेघालय इस साल के ‘थीम स्टेट’ हैं, जबकि मिस्र ‘पार्टनर नेशन’ के तौर पर अपनी प्राचीन संस्कृति का जादू बिखेरेगा।

लोकल से ग्लोबल की ओर बढ़ते कदम और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

इस बार सूरजकुंड मेला अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार है। पिछले सालों के मुकाबले इस बार 50 से अधिक देशों के करीब 800 कलाकार और शिल्पकार हिस्सा ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश और मेघालय के स्टॉल्स पर आपको वहाँ की पारंपरिक लोक कला और हथकरघा का बेहतरीन काम देखने को मिलेगा।

वहीं, मिस्र अपनी वास्तुकला और प्राचीन कलाकृतियों से पर्यटकों का मन मोहेगा। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा करने का एक बड़ा जरिया भी बन गया है।

हस्तशिल्प, लजीज व्यंजन और ‘मेला साथी’ ऐप की सुविधा

मेला परिसर में 1200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ लकड़ी, मिट्टी, धातु और पत्थर से बनी खूबसूरत कलाकृतियाँ बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। स्वाद के शौकीनों के लिए इस बार यूनिसेफ (UNICEF) की मदद से उत्तर प्रदेश के खास लजीज व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं।

पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘मेला साथी’ (Mela Sathi) नाम का एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जिसकी मदद से आप किसी भी स्टॉल की लोकेशन आसानी से खोज सकते हैं और मेले का पूरा आनंद उठा सकते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और सितारों से सजी सांस्कृतिक शामें

मनोरंजन के लिए इस बार कैलाश खेर, गुरदास मान और सलमान अली जैसे दिग्गज कलाकार अपनी सुरीली आवाज से समाँ बांधेंगे। हरियाणा की मिट्टी से जुड़े पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूँज भी हर शाम सुनाई देगी।

मेले के लिए करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से बुनियादी ढाँचे को और मजबूत किया गया है, जिसमें नए हाट और मनोरंजन क्षेत्र शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए खास पार्किंग व्यवस्था व रूट डायवर्जन भी किया गया है।

सुरक्षा और ट्रैफिक के पुख्ता इंतजाम

मेले के सफल आयोजन के लिए बुनियादी ढाँचे पर करीब 7 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जिसमें 127 नए हाट और मनोरंजन क्षेत्र का निर्माण शामिल है। सुरक्षा के लिए पूरे परिसर में भारी संख्या में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए फरीदाबाद में 31 जनवरी से 15 फरवरी तक भारी वाहनों की ‘नो-एंट्री’ रहेगी। पर्यटकों के लिए ईरोज सिटी, हेलीपैड और लेकवुड सिटी में पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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