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ऑपइंडिया स्टाफ़

कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

हमारे हवाले करो पाकिस्तान में छिपे बैठे जिहादी, बेहतरी इसी में है: विदेश मंत्री जयशंकर

जयशंकर ने एक बार फिर दोहराया कि भारत के राष्ट्रवाद को पाश्चात्य नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। राष्ट्रीयता देश तय करता है, आस्था, जाति या भाषा नहीं।

₹100 करोड़ की टैक्स फाइल खुली: मुश्किल में सोनिया-राहुल, नेशनल हेराल्ड से जुड़ा है मामला

NCP: मामले में गड़बड़ियाँ भले ही दिख रहीं हों, लेकिन फिर भी अदालत में आपराधिक केस का फैसला आने तक राहुल गाँधी को दोषी नहीं कहा जाना चाहिए।

‘शराब’ पीने की वजह से पृथ्वीराज चौहान, प्रताप के क़िले में अब चमगादड़ें ब्याही जा रही: कॉन्ग्रेस MLA

"विधायक द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द बहुत ही अपमानजनक हैं और अगर विधायक इन शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं माँगते हैं, तो उनकी जीभ काट दी जाएगी।"

‘इमारत में गुंबद तो मस्जिद, लंबी-सीधी तो चर्च और अगर गंदी मूर्तियाँ/गुड़ियाँ हैं तो वह एक मंदिर’

थिरुमावलवन इससे पहले भी हिन्दुओं की आलोचना कर चुके हैं और बाद में वो अपने बयान से पलट जाते हैं। हालाँकि, चिदंबरम सांसद ने कथित तौर पर अपने भाषण पर ख़ेद व्यक्त किया है, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनसे सार्वजनिक माफ़ी की माँग की है।

डील पक्की: 50-50 के लिए एनडीए छोड़ने वाली शिव सेना के 16/42 मंत्री, एनसीपी 14, कॉन्ग्रेस 12

शिवसेना को मुस्लिमों को पाँच प्रतिशत आरक्षण देने वाली योजना के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसे पूर्व में कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा शुरू किया गया था।

‘दुर्घटना’ में हुई महात्मा गाँधी की मौत: ओडिशा के सरकारी बुकलेट में दावा, नवीन पटनायक से माफी की माँग

सरकार ने बच्चों को गुमराह करने की यह ‘कोशिश जानबूझकर’ की है। उन्होंने कहा, ‘‘चालाकी से असत्य बताया गया है। मुख्यमंत्री को इस बड़ी भूल के लिए माफी माँगनी चाहिए।’’

मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने और सावरकर के लिए भारत रत्न की माँग छोड़ने को तैयार शिवसेना: रिपोर्ट्स

बताया जा रहा है कि शिवसेना ने एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के लिए मुस्लिमों को महाराष्ट्र में 5% आरक्षण देने की बात पर हाँ कर दिया है और अपने कट्टर हिदुत्व का त्याग करने को भी तैयार हो गई है।

1200 साल बाद 12 नवंबर को सबसे बड़े मुस्लिम देश में हिन्दुओं ने किया शिव का अभिषेक

यह अभिषेक मातरम नामक हिन्दू साम्राज्य के स्वर्ण काल का भी परिचायक है। उस समय के हिन्दू तावुर अगुंग नामक एक अनुष्ठान करते थे, जिसके बारे में वे मानते थे कि इससे मनुष्यों के साथ समस्त ब्रह्माण्ड को ही पवित्र किया जाता है।