फ़वाद ने ट्वीट में लिखा, "मोदी जनता का निराशाजनक शो। लाखों रुपए खर्च करने के बाद ये लोग केवल यूएसए, कनाडा और दूसरी जगहों से लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं। लेकिन यह दिखाता है कि पैसों से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता।" इसके साथ उन्होंने #ModiInHouston हैशटैग का भी इस्तेमाल किया।
"भारतीय मूल के लोग अमेरिका के हर सेक्टर में काम कर रहे हैं, यहाँ तक कि सेना में भी। भारत एक असाधारण देश है और वहाँ की जनता भी बहुत अच्छी है। हम दोनों का संविधान 'We The People' से शुरू होता है और दोनों को ही ब्रिटिश से आज़ादी मिली।"
इमरान ख़ान सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल प्लेन से अमेरिका पहुँचे। फिर भी इमरान ख़ान के लिए रेड कार्पेट नहीं बिछा। वहीं पीएम मोदी के लिए यह तो बिछा ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
ऐसा पहली बार हो रहा है जब विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता एक साथ किसी रैली को सम्बोधित कर रहे हैं। आप भी बनिए इस ऐतिहासिक पल का गवाह। 'Howdy Modi' में अमेरिका के कई नेता भी शामिल हो रहे हैं। ह्यूस्टन में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं।
"बँटवारा मज़हब के आधार पर हुआ। गाँधी और अम्बेडकर नहीं चाहते थे कि भारत के टुकड़े हों, लेकिन कुछ सांप्रदायिक नेताओं ने देश का विभाजन कर दिया। मजहब के आधार पर गठित पाकिस्तान की यह हालत हो गई कि 1971 आते-आते बांग्लादेश उससे अलग हो गया।"
समाजवादी पार्टी विधायक नाहिद हसन पर धोखाधड़ी, जानलेवा हमला करने, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और अभद्रता करने समेत कई मामले दर्ज हैं। विधायक के मोहल्ले को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। डीएम और एसपी ने शहर में पैदल मार्च किया। दिल्ली और लखनऊ भी पुलिस टीमें भेजी गई हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल मुस्लिमों के दो से अधिक बच्चे होने का आधार भी ग़लत है। अदालत ने कहा कि इस मामले में 21 याचिकाकर्ताओं में से सभी ने दो से अधिक बच्चे होने की बात स्वीकार की है। जबकि इनमें केवल एक मुस्लिम है, वह भी एक महिला।
"यहाँ तब्लीगी जमात के बेहद "सख्त और रूढ़िवादी" भी बड़े आराम से रहते हैं। यहाँ सूफी परंपरा का केंद्र भी है, जहाँ लोग मकबरे की पूजा करते हैं और कव्वालियाँ गाते हैं। भारत में सहिष्णुता की भावना है।"