Thursday, May 28, 2020
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‘इस्लामिक देशों के मुकाबले भारत के मुसलमान भाग्यशाली, कर सकते हैं किसी भी इस्लामी परंपरा की उपासना’

“इस्लामी देशों के मुसलमानों के मुकाबले भारत में मुसलमान अधिक भाग्यशाली हैं, क्योंकि भारत में वे किसी भी इस्लामी परंपरा में पूजा कर सकते हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

पद्म भूषण से सम्मानित और दो दशकों तक बीबीसी दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख रहे पत्रकार और लेखक मार्क टली का कहना है कि इस्लामिक देशों के मुकाबले भारत में मुसलमान “अधिक भाग्यशाली” हैं, क्योंकि यहाँ वे किसी भी इस्लामिक परंपरा की उपासना कर सकते हैं।

एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में, जहाँ वो रहते हैं, वहाँ तब्लीगी जमात का मुख्यालय है और वे बेहद “सख्त और रूढ़िवादी” हैं। उन्होंने कहा कि उसके ठीक बगल में सूफी परंपरा का केंद्र है, जहाँ लोग निजामुद्दीन औलिया के मकबरे की पूजा करते हैं और कव्वालियाँ गाते हैं।

द इक्वेटर लाइन पत्रिका के ताजा अंक में टली के हवाले से लिखा गया है, “भारत की सहिष्णुता की भावना उसकी ताकत है, जिससे विभिन्न धर्मों के लिए साथ-साथ मिलजुल कर रहने का सद्भावपूर्ण माहौल बनता है।”

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टली के मुताबिक भारत अनूठा है और ये सभी धर्मों का घर है। उन्होंने कहा, “भारत में आध्यात्मिकता है। इस्लामी देशों के मुसलमानों के मुकाबले भारत में मुसलमान अधिक भाग्यशाली हैं, क्योंकि भारत में वे किसी भी इस्लामी परंपरा में पूजा या उपासना कर सकते हैं।”

पत्रिका के इसी अंक में ब्रिटेन के टिम ग्रांडेज का भी एक लेख है, जो 32 साल पहले कोलकाता में एक बैंकिंग अधिकारी के रूप में आए थे। बाद में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और झुग्गी-बस्तियों के बच्चों के लिए काम करने लगे। उन्होंने एक धर्मार्थ संस्था फ्यूचर होप भी बनाई है।

ग्रांडेज ने लिखा है कि उन्होंने यहाँ के इन बच्चों से बहुत कुछ सीखा है। जैसे किसी पर विश्वास करना, किसी की देखभाल करना, अवसर, प्रतिबद्धता और सहिष्णुता के मूल्य को जानने के साथ ही दूसरों से बात करना और उनकी भी बात सुनना सीखा। इसके अलावा, उन्होंने इन बच्चों से ये भी सीखा कि एक गिलास को आधा भरा हुआ देखना है, न कि आधा खाली देखना।

गौरतलब है कि हाल ही में मार्क टली ने कॉन्ग्रेस की ‘धर्मनिरपेक्षता’ पर सवाल उठाते हुए हिन्दुओं की उपेक्षा के लिए उसकी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय संदर्भों में धर्मनिरपेक्षता उपयुक्त शब्द नहीं है। धर्मनिरपेक्षता में सभी धर्मों के प्रति शत्रुता का भाव है या फिर उदासीनता का। भारतीय न तो धर्म के प्रति शत्रुता रखते हैं और न ही उदासीन हैं। उन्होंने हिन्दू धर्म के संदर्भ में कहा था कि यह धर्म सहिष्णु होने और अन्य धर्म का स्वागत करने पर गर्व करता है, जो कि भारत के इतिहास पर गर्व करने वाली बात है।

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