स्व-घोषित 'उदारवादियों' और लिबरपंथियों का यह रेगुलर पैटर्न बन गया है। ये किसी भी भाजपा नेता की मृत्यु के बाद जश्न मनाते हैं। संवेदना, संस्कृति, जीवन-मरण जैसे शब्द इनकी डिक्शनरी में मानो है ही नहीं। अगर होता तो शायद ये वो नहीं होते, जो आज ये बन चुके हैं!
राहुल गॉंधी और अन्य विपक्षी नेताओं से राज्यपाल ने कहा है, "अब उनकी यहॉं कोई जरूरत नहीं है। उनकी जरूरत तब थी जब उनके साथी संसद में बोल रहे थे। यदि वे यहॉं आकर माहौल बिगाड़ना और दिल्ली में बोले गए झूठ को ही दोहराना चाहते हैं तो यह सही नहीं है।"
"मेरी हत्या हो सकती है। मरना तो वैसे भी है। शायद हत्या ही मेरी नियति में है। इसके लिए एफसीसी और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा। मैं यहाँ कॉन्वेंट में रहूँगी। मैंने पुलिस से सुरक्षा भी माँगी है। लेकिन उन्होंने अब तक कुछ नहीं किया है।”
कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका में हस्तक्षेप की मॉंग। 16 अगस्त को CJI की अगुवाई वाली पीठ ने भसीन की याचिका पर सुनवाई को दो हफ्ते के लिए टाल दिया था और कहा था कि सरकार को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस से रवाना होने के बाद ट्वीट करके बताया कि उनका फ्रांस दौरा काफी सफल रहा। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनो देशों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई। यह बातचीत आपसी सहयोग को बढ़ाएगी और नए मौके देगी।
राहुल गाँधी समेत सभी विपक्षी राजनेताओं को श्रीनगर एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे।
तीनों बैंक कर्मचारियों के ख़िलाफ़ PNB की एक शाखा के उप सर्कल प्रमुख ने पांच अप्रैल 2017 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि आरोपियों ने दो बार ग़लत रिकॉर्ड बनाया है, जो डिपॉजिटर द्वारा भरे गए असली वाउचर से मेल नहीं खा रहे थे।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अपने बयान में कहा था कि ऐसे वक्त में जब सरकार लोगों को सीमा पार आतंकवाद के खतरे से बचाने की कोशिश कर रही है तब वरिष्ठ राजनेताओं की ओर से आम जनजीवन को पटरी पर लाने में बाधा डालने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। अगर वो इलाके का दौरा करेंगे, तो उन पाबंदियों का भी उल्लंघन करेंगे, जो अब भी कई इलाकों में लागू है।