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ख़ारिज हुई 15 साल की लड़की से निकाह करने वाले मुस्लिम शख्स की बेल अर्जी, हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट को माना सही: इस्लामी कानून का हवाला देकर ठहरा रहा था जायज

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से निकाह करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति की अग्रिम जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। 15 साल की लड़की से निकाह करने वाले आरोपित ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से सही ठहराने की कोशिश की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपित पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई जायज है क्योंकि उसने जून 2023 में 18 साल से कम उम्र की लड़की से निकाह किया है। यह फैसला मंगलवार (2 अप्रैल, 2024) को सुनाया गया है।

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस हरप्रीत कौर की बेंच में हुई। आरोपित ने जून 2023 को 15 साल की एक लड़की से निकाह किया था। तब लड़की के पिता ने आरोपित पर FIR दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता के पिता ने आरोपित पर अपनी बेटी को घर से बोलेरो वाहन में अपहरण कर के ले जाने का आरोप भी लगाया था। पुलिस ने यह FIR अपहरण और IPC की अन्य धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया था।

फरवरी 2024 में पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया था। तब पीड़िता का मजिस्ट्रेट के आगे 164 का बयान हुआ था। पीड़िता ने अपने माता-पिता के साथ घर जाने से इनकार कर दिया था। आखिरकार लड़की की उम्र देखते हुए उसे पंजाब सरकार के चिल्ड्रन होम में भेज दिया गया। पढ़ाई के कागजातों में लड़की की जन्मतिथि 2008 निकली। हालाँकि अपने बचाव में आरोपित ने पीड़िता का एक निजी डायगोनस्टिक सेंटर से मेडिकल परीक्षण भी करवाया था। इस रिपोर्ट के हवाले उसने पीड़िता के बालिग होने का भी दावा किया था।

तब से आरोपित फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है। इसी गिफ्तारी से बचने के लिए आरोपित ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। 2 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई। आरोपित ने अपना वकील मोहम्मद सलीम को किया था। सरकार की तरफ से एडवोकेट हिमानी अरोड़ा ने बहस की। लड़की के पिता ने भी बिक्रमजीत सिंह को अपना निजी वकील बना कर खड़ा किया और आरोपित की जमानत अर्जी का विरोध किया।

एडवोकेट मोहम्मद सलीम ने उस केस का जिक्र करना चाहा जिसमें कभी पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने ही मुस्लिम लड़की के वयस्क हो जाने पर उसे निकाह की छूट दी थी। साथ ही उन्होंने आरोपित की तरफ से 15 साल की लड़की की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक जायज करार दिया। दोनों पक्षों की बहस सुन कर आखिरकार न्यायमूर्ति हरप्रीत कौर ने अपना फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपित को अग्रिम जमानत जैसी राहत देने से साफ़ इंकार कर दिया।

अपने फैसले में अदालत ने साफ कहा कि लड़की की उम्र 15 साल होने की वजह से आरोपित पर पॉक्सो एक्ट की धारा के तहत हुई कार्रवाई जायज है। लड़की की उम्र के सबूत के तौर पर भी कोर्ट ने पीड़िता के पिता द्वारा पेश किए गए पढ़ाई के सर्टिफिकेट को सही माना है। आरोपित द्वारा प्राइवेट डायगोनस्टिक संस्थान द्वारा पेश किए गए मेडिकल रिपोर्ट को अदालत ने विचार करने योग्य नहीं माना।

‘शहजादे को वायनाड में भी दिख रहा संकट, मतदान बाद तलाशेंगे सुरक्षित सीट’: महाराष्ट्र में PM मोदी ने पूछा- CAA न होता तो हमारे सिख भाई-बहनों का क्या होता?

लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण का मतदान खत्म हो चुका है। अगले चरण का मतदान 26 अप्रैल 2024 को है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र के नाँदेड़ में शनिवार (20 अप्रैल 2024) को एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने CAA की जरूरत बताई और कॉन्ग्रेस एवं राहुल गाँधी पर जमकर हमला बोला।

कॉन्ग्रेस पर हमला पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वोटर भी देख रहे हैं कि कैसे INDI अलायंस के लोग अपने स्वार्थ में, अपने भ्रष्टाचार को बचाने के लिए एक साथ आए हैं।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस जो भी दावे करे, लेकिन सच्चाई यही है कि चुनाव की घोषणा से पहले से ही उसके नेता हार मान चुके हैं। इसीलिए लोकसभा में जीत कर जो कुछ नेता आते थे, वो इस बार राज्यसभा के रास्ते जाकर बैठ गए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “INDI अलायंस वालों को इस चुनाव में लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर सीटों पर इनके नेता प्रचार करने ही नहीं जा रहे। कॉन्ग्रेस के शहजादे को भी वायनाड में संकट दिख रहा है। शहजादे और उनकी टोली 26 अप्रैल को वायनाड में वोटिंग का इंतजार कर रही है। जैसे ही वहाँ वोटिंग पूरी हो जाएगी, वे शहजादे के लिए एक और सुरक्षित सीट घोषित करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस का ये परिवार आजादी के बाद पहली बार खुद कॉन्ग्रेस को ही वोट नहीं देगा, क्योंकि जहाँ वो रहते हैं वहाँ कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार ही नहीं है। जिस परिवार के भरोसे कॉन्ग्रेस चलती है, वो परिवार खुद कॉन्ग्रेस को वोट नहीं दे पाएगा।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी गरीब, दलित, वंचित, मजदूर, किसान के विकास के सामने हमेशा दीवार बनकर खड़ी रही है।

कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा महाराष्ट्र के इलाकों की उपेक्षा करने की बात कहते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस ने दशकों तक महाराष्ट्र और खासकर विदर्भ एवं मराठवाड़ा के विकास का दम घोंटने का काम किया है। कॉन्ग्रेस के रवैये के कारण यहाँ किसान गरीब होते गए। उद्योगों से जुड़ी संभावनाएँ खत्म होती चली गईं। लाखों युवाओं को पलायन करना पड़ा।”

एनडीए सरकार के कामों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “करतारपुर साहिब कॉरिडोर का काम पूरा होने के बाद लाखों श्रद्धालुओं को वहाँ दर्शन में मदद मिल रही है। हुजूर साहिब और हेमकुंड साहिब के दरबार तक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजाम करना हो… NDA सरकार ने सिख परंपरा से जुड़े हर तीर्थ के विकास के लिए पूरी शक्ति और भक्ति से काम किया है।”

सिख धर्म के गुरुओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “खालसा पंथ की गुरु परंपरा और गुरु गोबिंद सिंह की सीख हमारी सरकार के लिए प्रेरणा रही है। हमारी सरकार को गुरु नानक देव जी का 550वाँ प्रकाशोत्सव मनाने का… गुरु तेगबहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व मनाने का… गुरु गोबिंद सिंह का 350वाँ प्रकाश पर्व मनाने का सौभाग्य मिला।”

सिख समुदाय को लेकर उन्होंने आगे कहा, “ये हमारी सरकार है जो बँटवारे के पीड़ितों के लिए CAA लेकर आई है। CAA न होता तो हमारे सिख भाई-बहनों का क्या होता? उनका क्या गुनाह है? लेकिन कॉन्ग्रेस इसका भी विरोध कर रही है। ऐसा लगता है कि 1984 का बदला कॉन्ग्रेस सिखों से अब तक ले रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज परभणी के 12 लाख से ज्यादा गरीबों को बिना भेदभाव मुफ्त राशन मिल रहा है, ताकि उनके घर का चूल्हा जलता रहे और ये सुविधा आने वाले 5 वर्षों में भी जारी रहेगी। आज परभणी में 17 जनऔषधि केंद्रों से सभी को 80% छूट पर दवाएँ मिल रही हैं। यहाँ बिना भेदभाव सवा लाख से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिया गया है।”

पिता कह रहे ‘लव जिहाद’ फिर भी ख़ारिज कर रही कॉन्ग्रेस सरकार: फयाज की करतूत CM सिद्धारमैया के लिए ‘निजी वजह’, मारी गई लड़की का ही हो रहा चरित्र हनन

कर्नाटक के हुबली में नेहा नाम की कॉलेज स्टूडेंट की सरेआम चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी जाती है। हत्या को अंजाम देने वाला फैयाज पिछले साल तक नेहा के साथ ही पढ़ता था। वो नेहा का पहले दोस्त था, लेकिन नेहा ने आगे किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने नेहा की सरेराह हत्या कर दी। इस मामले को नेहा के पिता, जो कॉन्ग्रेस के नेता भी हैं, उन्होंने लव जिहाद बताते हुए लोगों से अपने बच्चों को लेकर सावधान रहने की अपील की है, तो दूसरी तरफ कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम, जिसमें मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री से लेकर राज्य की टॉप लीडरशिप है, वो फैयाज को लव जेहाद का आरोपित बताने की जगह ‘निजी मामला’ बताने में जुट गए हैं और पीड़ित नेहा का ही चरित्र हनन करने की कोशिश कर रहे हैं।

फैयाज के हाथों मारी गई नेहा के पिता और कॉन्ग्रेस नेता तथा मौजूदा पार्षद निरंजन हिरेमठ जोर देकर कह रहे हैं कि उनकी बेटी लव जिहाद की शिकार हुई है। उन्होंने कहा है कि देश में लव जिहाद तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि वह बच कर रहें। उन्होंने अपनी बेटी के मामले में पूछा कि ये ‘लव जिहाद नहीं तो और क्या है?’

नेहा की माँ गीता द्वारा दी गई शिकायत से यह भी पता चलता है कि नेहा के पिता ने चार महीने पहले हत्यारे फैयाज से बात की थी और उससे कहा था कि वह उनकी बेटी से शादी के लिए संपर्क न करें क्योंकि वह पढ़ना चाहती है। अपनी शिकायत में नेहा की माँ ने यह भी खुलासा किया कि नेहा ने अपने माता-पिता को बताया था कि फैयाज ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने उसका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

मृतका नेहा के पिता ने मीडिया से कह़ा, “मुझे लगता है कि लव जिहाद तेजी से फ़ैल रहा है और माताओं बहनों को संभल कर बाहर जाना होगा। मेरे एक ही बेटा बेटी थे। यह मेरी आँखों की तरह थे। अब मेरी हालत खराब है। मैं सभी माताओं से अपील करता हूँ कि अगर आपकी बेटी कॉलेज जाती है तो उसके साथ जाइए और इस बात को पक्का कीजिए कि कोई उसका पीछा ना कर रहा हो।हमारे साथ जो हुआ किसी के साथ ना हो। आसपास की स्थिति बहुत खराब है। मैं राज्य सरकार समेत अन्य सभी नेताओं से इस मामले में कड़ा एक्शन लेने की माँग करता हूँ।”

जहाँ नेहा के पिता ने इस मामले को लव जिहाद बताया है तो वहीं राज्य के गृह मंत्री और उनकी ही पार्टी के नेता जी परमेश्वरा ने कहा है कि यह मामला लव जिहाद का नहीं है। उन्होंने मीडिया को बताया, “शायद फयाज ने नेहा को चाकू इसलिए मार दिया क्योंकि उसे लगता था कि नेहा किसी और से शादी कर लेगी। अभी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं मालूम है। लेकिन इस मामले में दोंनो तरफ ही लोग जुड़े हुए थे इसलिए यह लव जिहाद का मामला नहीं है।”

यही नहीं, पूरा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ही फैयाज को ‘आम कातिल’ बताते हुए ‘लव जिहाद’ को क्लीन-चिट देने में जुट गया है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ‘लव जिहाद’ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह हत्या निजी कारणों से की गई है और राज्य में कानून व्यवस्था बिल्कुल दुरुस्त है। मुख्यमंत्री, गृहमंत्री के साथ ही उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी वही राह पकड़ी और लव जिहाद की जगह बीजेपी पर आरोप मढ़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बीजेपी कर्नाटक में राज्यपाल शासन लाना चाहती है, इसलिए ये नाटक कर रही है।

इस बीच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार (20 अप्रैल 2024) को कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वरा के घर का घेराव किया। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री पर इस मामले को हल्के में लेने का आरोप लगाया है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि कर्नाटक के हुबली में गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को फयाज नाम के एक युवक ने नेहा नाम की हिन्दू युवती की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। वह नेहा का पहले इन्तजार कर रहा था और जब वह कॉलेज से बाहर आई तो उसने चाकुओं से हमला कर दिया। नेहा की इस हमले में मौत हो गई। फयाज को इस हमले के बाद पकड़ लिया गया है।

बताया जा रहा है कि फयाज युवती पर उसके साथ रिलेशनशिप में आने का दबाव बना रहा था और लड़की ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में फयाज उसका महीनों पीछा करता था। घटना वाले दिन जब नेहा उसके सामने आई तो उसने उसके गले पर वार किए, जो बताते हैं कि उसकी मंशा नेहा को जान से ही मारने की थी।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया है कि फयाज अपने दोस्तों से बोलते हुए फिरता था कि जिस लड़की ने उसका ऑफर ठुकराया है वो उसे खत्म कर देगा। मामले के बारे में बताते हैं सिटी पुलिस कमिशनर रेणुका एस सुकुमार ने कहा वे दोनों (पिछले साल तक) बीसीए साथ में पढ़ रहे थे। लेकिन, बीसीए के बाद नेहा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फयाज ने छोड़ दी।

गोपाल स्वामी, जगदीश्वर… खालसा फ़ौज के 200 साल पुराने हथियार पर भगवान विष्णु का मंत्र, खालिस्तानी प्रोपेगंडा को ध्वस्त करती है गुरु अर्जुन देव जी की रचना

सोशल मीडिया पर सिख इतिहास के विशेषज्ञ पुनीत साहनी ने एक तस्वीर शेयर की है। उन्होंने बताया कि ये सिखों की खालसा फ़ौज का हथियार है, जिसे चक्कर कहते हैं। ये लगभग 200 वर्ष पुराना है। साथ ही इस पर सोने से एक मंत्र अंकित है, जो गुरु अर्जुन देव द्वारा रचित है। इसे ‘रक्षा मंत्र’ कहा जाता है, अर्थात रक्षा के लिए इसमें प्रार्थना की गई है। ये सहस्कृति भाषा में रचित है, जो संस्कृत का ही एक रूप है। गुरु नानक देव जी ने इसका इस्तेमाल शुरू किया था।

पुनीत साहनी ने बताया कि इस मंत्र में भगवान विष्णु से प्रार्थना की गई है। बता दें कि खालिस्तानी अक्सर हिन्दुओं और सिखों को विभाजित करने में लगे रहते हैं। वो सिख धर्म को सनातन का हिस्सा नहीं मानते और इसे हिन्दू विरोधी बता कर प्रचारित करने में लगे रहते हैं। जबकि सच्चाई ये है कि सिखों के सभी गुरु हिन्दू देवी-देवताओं की उपासना करते थे। गुरु गोविन्द सिंह माँ दुर्गा की पूजा करते थे, उन्होंने रामकथा भी लिखी। उक्त चक्कर पर अंकित मंत्र है:

सिर मस्तक रख्या पारब्रहमं हस्त काया रख्या परमेस्वरह॥
आतम रख्या गोपाल सुआमी धन चरण रख्या जगदीस्वरह॥
सरब रख्या गुर दयालह भै दूख बिनासनह॥
भगति वछल अनाथ नाथे सरणि नानक पुरख अचुतह ॥५२॥

ये मंत्र सिखों की सबसे पवित्र पुस्तक गुरु ग्रन्थ साहिब में लिखा हुआ है। इसका अर्थ है – “सिर, माथा, हाथ, शरीर, जीवात्मा, पैर, धन-पदार्थ -जीवों की हर तरह से रक्षा करने वाला परमब्रह्म परमेश्वर गोपाल, स्वामी, जगदीश्वर, सबसे बड़ा दया का घर परमात्मा ही है। वही सारे दुःखों का नाश करने वाला है। हे नानक! वह प्रभु निआसरों का आसरा है, भक्ति को प्यार करने वाला है। उस अविनाशी सर्व-व्यापक प्रभु का आसरा ले।” बता दें कि गोपाल और जगदीश्वर भगवान श्रीकृष्ण/विष्णु को कहा जाता है।

‘विष्णु सहस्रनाम’ में भगवान विष्णु के जो नाम दर्ज हैं, उन्हीं का यहाँ इस्तेमाल किया गया है। इस इतिहास को जानने के बाद लोगों ने लिखा कि खालिस्तानी अपनी जड़ों को नकार तो सकते हैं, उन्हें मिटा नहीं सकते। हालाँकि, पुनीत साहनी का मानना है कि ये सब खालिस्तानी गुरुद्वारों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये बिलकुल उन पाकिस्तानियों की तरह है जिन्हें न सिर्फ अपने इतिहास को नकारना, बल्कि मिटाना भी सिखाया जाता है।

‘आज पुलिस ने बचा लिया… साले कुम्हार जान से खत्म कर देंगे‘ – नूहं में जुबैर सहित मुस्लिम भीड़ ने फाड़े हिन्दू महिलाओं के कपड़े, धर्म परिवर्तन और गाँव छोड़ने की भी धमकी

हरियाणा के नूहं जिले में एक हिन्दू परिवार पर मुस्लिम वर्ग के कुछ लोगों द्वारा हमले की खबर है। यहाँ OBC समुदाय से आने वाले संतराम ने इदरीस, जुनैद, जुबैर, अख़लाक़, ज़फ़र, अकरम, शमीम, जावेद, अयूब व एक अन्य पर हमले की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। हमलावरों में साहुनी और रवीना नाम की 2 महिलाएँ भी शामिल हैं। इन सभी पर संतराम की दुकान को लूटने और उनके परिवार की औरतों को भी पीटने और दुर्व्यवहार का आरोप है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि उन पर गाँव से पलायन करने और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाय जाता है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना की शुरुआत मंगलवार (16 अप्रैल 2024) को हुई थी।

यह घटना थानाक्षेत्र पिनगवां की है। यहाँ के रनियाला पटाकपुर में संतराम अपने परिवार के साथ रहते हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल को रात लगभग 10:30 पर रमेशचंद की अखलाक, जुबैर और नाहिद ने घर में घुस कर पिटाई की थी। इस दौरान तीनों आरोपितों ने हाथ में तमंचा लेकर रमेशचंद को गोली मारने की भी धमकी दी थी। रमेशचंद ने इसकी शिकायत पिनगवां थाने में 17 अप्रैल को दर्ज करवाई थी। इस शिकायत पर इसी दिन शाम लगभग 7 बजे गाँव में जाँच-पड़ताल के लिए पुलिस गई थी।

बताया जा रहा है कि जुबैर और उसके साथी रमेशचंद द्वारा पुलिस बुलाए जाने से नाराज रहने लगे थे। रमेशचंद के परिवार के ही सदस्य संतराम हैं, जो परचून की दुकान चलाते हैं। पुलिस के लौटने के बाद 17 अप्रैल को ही इदरीस पीड़ित संतराम की दुकान में अपने कुछ साथियों के साथ लाठी-डंडे लेकर घुस गया। उसने संतराम को देखते हुए कहा, “साले कुम्हार को जान से खत्म कर देते हैं।” इदरीस के ललकारते ही वसीम, अकरम और जावेद भी रमेशचंद, संतराम और राजेश पर हमलावर हो गए।

हमलावरों ने पीड़ितों पर लाठी-डंडे चलाए। इस हमले में पीड़ितों के सिर, हाथ और पीठ में चोटें आईं। संतराम को घायल देख कर हमलावरों के परिजनों ने उनकी दुकान में लूटपाट शुरू कर दी। इस लूटपाट में वसीम के साथ अखलाख और साहुनी नाम की एक महिला भी बताई जा रही है। पीड़ित के गल्ले से लगभग 23 हजार रुपए निकाल लिए गए। जब संतराम के घर की औरतों ने हमलावरों को रोकना चाहा तो उनके साथ भी छेड़खानी की गई। जुनैद ने तो एक हिन्दू महिला के कपड़े तक फाड़ डाले।

पीड़ित परिवार का एक सदस्य मोबाइल से इस हमले को रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहा था। हमलावरों में शामिल इदरीस ने मोबाइल छीन कर तोड़ डाला। शोरगुल सुन कर गाँव के तमाम लोगों की भीड़ जमा हो गई। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी पहुँच गई। पुलिस को आता देख कर हमलावर भागने लगे। जाते-जाते उन्होंने कहा, “आज तो पुलिस ने बचा लिया। आइंदा मौका मिला तो जान से खत्म कर देंगे।” हमलावरों में नामजद इदरीस, जुनैद, जुबैर, अखलाक, जफर, अकरम, शमीम, रबीना, जावेद, अयूब, साहुनी और वसीम के अलावा 25-30 अन्य अज्ञात लोग भी बताए गए हैं।

हमलावरों में अकरम नाम का व्यक्ति 31 जुलाई 2023 को बंटी नाम के व्यक्ति की मिल में आग लगाने का भी आरोपित बताया गया है। पीड़ित परिवार ने खुद को शिकायत के अंत में बेहद डरा हुआ बताया है। उन्होंने भविष्य में भी खुद पर हमले की आशंका जताई है। संतराम की शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि उन लोगों पर गाँव से भागने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है। संतराम ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अपने जान-माल की रक्षा की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया को पीड़ित परिवार ने कुछ वीडियो भी भेजे हैं। इस वीडियो में दुकान में तोड़फोड़ दिख रही है। अन्य तस्वीरों में कुछ घायलों को देखा जा सकता है, जो संतराम के परिजन बताए जा रहे हैं। एक वीडियो में पीड़ित परिवार के लोग एक जगह जमा हुए हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए अपनी जान-माल की गुहार लगाई है।

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता संतराम से बात की। संतराम ने हमें बताया कि उनका गाँव मुस्लिम बाहुल्य है, जहाँ हिन्दुओं के महज 4-5 घर हैं। अपने घर से 3 लोगों के घायल होने की जानकारी देते हुए संतराम ने कहा कि वो अभी रोहतक के अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।

ऑपइंडिया ने पिनगवां के थाना प्रभारी से अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी माँगी। SHO पिनगवां ने बताया कि मामले में FIR दर्ज करके 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव पर कई तरह के प्रतिबंध, इतिहास में पहली बार आतिशबाजी पर भी रोक: केरल की वामपंथी सरकार के खिलाफ हिंदुओं में भारी गुस्सा

केरल के त्रिशूर शहर में प्रसिद्ध वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में आयोजित होने वाले ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव में शुक्रवार-शनिवार (19-20 अप्रैल 2024) की रात हजारों लोग शामिल हुए। हालाँकि, केरल की वामपंथी सरकार ने यहाँ भारी पुलिस बल भेजकर यहाँ कई तरह प्रतिबंध लगा दिए। त्योहार की रात में होने वाली आतिशबाजी पर रोक लगा दी गई। इसके कारण इस त्योहार के इतिहास में पहली बार आतिशबाजी दिन में करनी पड़ी। इसके कारण हिंदुओं में भारी गुस्सा है।

यहाँ आतिशबाजी से पहले स्वराज दौर में कई प्रतिबंध लगाए जाने के कारण तिरुवंबडी देवास्वोम के सदस्यों की पुलिस के साथ बहस हो गई। इसके बाद देवास्वोम अधिकारी ने पूरम कार्यवाही बंद कर दी। तिरुवंबडी मंदिर में केवल एक हाथी की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाज सादे तरीके से आयोजित की गई। जो आतिशबाजी सुबह 3 बजे निर्धारित थी, वह सुबह 7 बजे हुई। यही नहीं, पुलिस पर हिंदुओं के साथ अभद्रता करने का आरोप भी लगा है।

दरअसल, मंदिर प्रशासन एवं आयोजन समिति के साथ पुलिस का किसी तरह का कोई समन्वय नहीं था। जारी किए गए पासों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी। उत्सव के दौरान पुलिस के भारी हस्तक्षेप के कारण थिरिवाम्बडी मंदिर में सुबह की पूजा के दौरान हंगामा मच गया। हाथी जुलूस के दौरान भी तनाव बढ़ गया। परमेक्कावु मंदिर में भी इसी तरह की घटनाएँ सामने आईं। पुलिस ने पूरम परिसर में अचानक रस्सी के बैरिकेड लगा दिए, जिससे पूरम आयोजक नाराज हो गए।

पैरामेक्कविल खंड के जुलूस को भी पुलिस बैरिकेड्स का सामना करना पड़ा। केवल एक हाथी और मेले में आने वालों कुछ लोगों ही वहाँ गुजरने की अनुमति दी गई। पूरम आतिशबाजी के लिए लगाए गए बैरिकेड्स के कारण कल रात के जुलूस के दौरान संगीतकारों और हाथियों को रोक दिया गया था। तिरुवम्बदी देवास्वोम ने नादुविलाल जंक्शन के पूरम पंथाल में लाइटें बंद करके इसका विरोध प्रदर्शन किया, जो इतिहास में पहली बार हुआ। दरअसल, पुलिस कमिश्नर ने यहाँ कड़े प्रतिबंध लगाए गए।

केरल के एक हिंदू संगठन के प्रमुख प्रतीश विश्वनाथ ने कहा, “केरल की कम्युनिस्ट सरकार का ऐतिहासिक त्रिशूरपूरम उत्सव में हस्तक्षेप करने का विवादास्पद निर्णय विभाजनकारी राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू त्योहारों का फायदा उठाने का एक और उदाहरण प्रतीत होता है। पूज्य ‘कुदामट्टम’ समारोह के दौरान श्रीराम और रामलला के प्रदर्शन में तिरुवमपडी और परमेक्कव देवास्वोम्स की भागीदारी को भीड़ से अपार तालियाँ और उत्साहपूर्ण समर्थन मिला।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदुओं की सांस्कृतिक एकता का यह प्रदर्शन वामपंथी और कॉन्ग्रेस दोनों गुटों को परेशान करने वाला लग रहा था, जिसके कारण राज्य सरकार को बहुप्रतीक्षित आतिशबाजी प्रदर्शन को अचानक रोकना पड़ा। परंपरा और सांस्कृतिक उत्सव के प्रति इस घोर उपेक्षा ने हजारों समर्पित दर्शकों को हतोत्साहित और निराश कर दिया, जो संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के लिए हिंदुओं के पवित्र कार्यक्रमों का उपयोग करने की परेशान करने वाली प्रवृत्ति को रेखांकित करता है। अब बहुत हो गया है!”

बता दें कि त्रिशूर पूरम उत्सव का सबसे रंगीन कार्यक्रम कुदामट्टम है। यह अनुष्ठान में 15 हाथियों की दो पंक्तियाँ आमने-सामने खड़ी रहती हैं। इस दौरान एक के बाद एक नवीन रूप से डिजाइन किए गए छतरियों को प्रदर्शित किया जाता है। यह त्योहार तिरुवंबडी और परमेक्कावु मंदिरों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिद्वंद्विता और सौहार्द्र का प्रतीक है।

इस सालाना उत्सव को आमतौर पर राज्य के सभी मंदिर त्योहारों की जननी के रूप में जाना जाता है। इसमें 30 सजे-धजे हाथियों को परामेक्कावु और तिरुवम्बडी मंदिर में सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार परेड के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े किया जाता है। परेड करने वाले हाथियों को अधिकारियों की ओर से फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। 

बच्चा अगर पोर्न देखे तो अपराध नहीं भी… लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल अपराध: बाल अश्लील कंटेंट डाउनलोड के मामले में CJI चंद्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करना और देखना POCSO अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत अपराध नहीं है। इसके साथ ही आरोपित के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द कर दिया था।

इस मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा, “बहस पूरी हो गई, फैसला सुरक्षित रखा गया।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस जारी कर इस मामले में केंद्र सरकार से भी उसका पक्ष माँगा है। इस मामले में दो NGO ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, “उसके मोबाइल पर कुछ चाइल्ड पॉर्न था..आपको कैसे पता चला कि उसके पास था।” इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, “टिप गृह मंत्रालय से जिला पुलिस को आती है। इसे एक विदेशी संगठन द्वारा स्कैन किया जाता है, जो बाल पोर्न के ऐसे इंटरनेट डाउनलोड को ट्रैक करता है। शख्स दो साल से चाइल्ड पोर्नोग्राफी देख रहा था।”

इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “उन्होंने साइट पर वीडियो अपलोड किया था या उन्हें किसी तीसरे पक्ष ने वीडियो मुहैया कराया था? अगर उसे अपने दोस्त से मिला है तो क्या हम कह सकते हैं कि उसने वीडियो अपलोड किया है.. यह कानून का एक साफ-सुथरा सवाल है कि क्या ऐसा कृत्य POCSO के तहत अपराध हैं?”

सीजीआई चंद्रचूड़ ने कहा, “किसी को (पोर्नोग्राफी) सिर्फ अपने व्हाट्सएप इनबॉक्स पर रिसीव करना कोई अपराध नहीं है। वीडियो की प्राप्ति धारा 15 का उल्लंघन नहीं है, लेकिन यदि आप इसे देखना जारी रखते हैं और इसे शेयर करने का इरादा रखते हैं तो यह इस धारा का उल्लंघन है।”

दोनों NGO की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने तर्क दिया, “यह उसके (आरोपित के) पास है।” इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “आपको उनसे क्या करने की उम्मीद थी कि उन्हें इसे हटा देना चाहिए था? तथ्य यह है कि उन्होंने 2 साल तक इसे नहीं हटाया। यह एक अपराध है?”

बाल यौन शोषण से संबंधित कानून POCSO अधिनियम के प्रावधानों का अवलोकन करते हुए सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ ने कहा, “(पोर्नोग्राफी को) साझा करने या प्रसारित करने का इरादा होना चाहिए। यह परीक्षण का मामला है।” इसके बाद वकील फुल्का ने कनाडा के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, “जिस क्षण आरोपित के पास आ जाता है, उसके बाद यह उसकी जिम्मेदारी हो जाती है।”

वहीं, NCPCR की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरुपमा चतुर्वेदी ने कहा, “तीन अलग-अलग खंड हैं। समस्या यह है कि वे (उच्च न्यायालय) बच्चों के इस्तेमाल के बजाय बच्चों द्वारा पोर्न देखने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पूरी तरह से तथ्यों का गलत इस्तेमाल है।” इस पर CJI ने कहा, “हाँ, बच्चे का पोर्नोग्राफी देखना अपराध नहीं हो सकता है, लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल अपराध है।”

क्या कहा था मद्रास हाई कोर्ट ने?

दरअसल, मद्रास उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी 2024 को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और IT (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के तहत अपराध नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा था कि पॉर्नोग्राफी के लिए बच्चे का इस्तेमाल किया जाता है, तभी पॉक्सो के तहत मामला बनेगा।

केरल हाईकोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश N आनंद वेंकटेश ने कहा था कि इसमें IT एक्ट के तहत मामला तभी चलेगा, जब आरोपित ने कंटेंट बनाया हो, प्रकाशित किया हो और उसे दूसरों को भेजा हो। बता दें कि इस मामले में 28 साल के एक व्यक्ति पर चाइल्ड पॉर्न को डाउनलोड करने और उसे देखने पर पुलिस ने उस पर पॉक्सो और आईटी एक्ट लगाया था। 

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपित ने बिना किसी पर कोई प्रभाव डाले, यह सब प्राइवेट में किया। जज ने कहा कि जिस क्षण वो कंटेंट को बाँटने या सार्वजनिक रूप से दिखाने लगता, तब इन एक्ट्स के तहत धाराएँ लगाई जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि धूम्रपान और शराब पीने की तरह मौजूदा पीढ़ी के लिए पॉर्न देखना भी एक आदत बन गई है।

जज ने कहा था कि इसके लिए सज़ा सुनना समाधान नहीं हो सकता। ‘Gen Z’ इस गंभीर समस्या से जूझ रही है और इसके लिए उन्हें सज़ा देने की बजाए समाज को उन्हें सही सलाह, शिक्षा और काउंसिलिंग करनी चाहिए ताकि वो इस आदत से छुटकारा पाएँ। कोर्ट ने कहा था कि आजकल के किशोर गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ एक बटन टच करने पर चीजें बिना किसी सेंसर के पहुँच रही हैं।

चाइल्ड पॉर्न को लेकर कानून

भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़े कड़े कानून हैं। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी इंटरनेट पर सर्च करना, फोटो या वीडियो बनाना, डाउनलोड करना, उसे देखना और उसे साझा करना कानून अपराध है। ऐसे अपराध में 7 साल तक की सजा का प्रावधान और जुर्माना या दोनों है। यह POCSO ऐक्ट की धारा 14 और 15 तथा IT ऐक्ट की धारा 67B के तहत कानून जुर्म है।

POCSO Act 2012 के धारा 14 और 15 में कहा गया है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के लिए किसी भी बच्चे का इस्तेमाल करने पर 7 साल की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, IT एक्ट की धारा 67B के अनुसार, चाइल्ड न्यूड कंटेंट रखना, ब्राउज करना, डाउनलोड करना, एडवर्टाइज करना, प्रमोट करना और शेयर करना गैरकानूनी है।

पॉक्सो ऐक्ट की धारा 15 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक से जुड़ा कोई भी मैटेरियल साझा करने, प्रकाशित करने या दिखाने के उद्देश्य से अपने पास रखता है और उसे डिलीट नहीं करता है तो उस कम-से-कम पाँच की सख्त सजा हो सकती है। यदि ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल कमर्शियल उद्देश्य के लिए किया जाता है तो 7 साल तक की सजा हो सकती है।

इतना ही नहीं, भारतीय दण्ड संहिता 1860 (IPC) की धारा 354, 354A, 354B, 354C और 376AB में बाल यौन उत्पीड़न एवं अन्य अपराधों के लिए सजा है। बाल अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019 में बाल यौन उत्पीड़न और बाल अश्लीलता अपराध है। चाइल्ड लेबर (बैन) अधिनियम 2016 में बाल श्रम के साथ-साथ बाल यौन उत्पीड़न और बाल अश्लीलता को कानून जुर्म घोषित किया गया है।

मोहम्मद जमालुद्दीन और राजीव मुखर्जी सस्पेंड, रामनवमी पर जब पश्चिम बंगाल में हो रही थी हिंसा… तब ये दोनों पुलिस अधिकारी थे लापरवाह: चला चुनाव आयोग का चाबुक

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा पर बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने मुर्शिदाबाद पुलिस के 2 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों पर शक्तिपुर और बेलदाणा इलाके में हुई हिंसा पर प्रभावी ढंग से काबू न कर पाने का आरोप है। निलंबित हुए पुलिस अधिकारियों के नाम मोहम्मद जमालुद्दीन और राजीव मुखर्जी हैं। आयोग ने यह कार्रवाई शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को की है। भाजपा ने भी इस हिंसा को प्रशासनिक लापरवाही बताया था और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की थी।

भारत निर्वाचन आयोग के सचिव राकेश कुमार ने इस कार्रवाई का पत्र 19 अप्रैल को जारी किया है। पत्र पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सम्बोधित है। राकेश कुमार ने इस पत्र में 17 अप्रैल 2024 को हुई हिंसा का जिक्र किया है। इस हिंसा के एक दिन बाद 18 अप्रैल को भारत निर्वाचन आयोग ने पूरे मामले की आख्या तलब की थी। इस आख्या में बताया गया था कि शक्तिपुर और बेलदाणा इलाके के थाना प्रभारी अपने इलाकों में हिंसा रोकने में नाकाम रहे। पत्र में इन दोनों थानाक्षेत्रों के इंचार्जों को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया है।

जिन 2 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम राजीव मुखर्जी और मोहम्मद जलालुद्दीन हैं। दोनों सब इंस्पेक्टर रैंक के पुलिसकर्मी हैं। निलंबन की अवधि में दोनों थाना प्रभारी पुलिस मुख्यालय से अटैच रहेंगे। इन दोनों थाना प्रभारियों को उनके सीनियरों द्वारा चार्जशीट भी थमाने का निर्देश दिया गया है।

शक्तिपुर और बेलदाणा थाने में नए प्रभारियों की नियुक्ति करने के लिए 3 सक्षम अधिकारियों का पैनल बनाने के लिए कहा गया है। अपने इस आदेश पर अनुपालन के लिए पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग को 20 अप्रैल (शनिवार) सुबह 11 बजे तक का समय दिया गया है।

गाली दे कर फोन छीन रहे थे राजीव मुखर्जी

17 अप्रैल को हुई हिंसा के दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी (अब सस्पेंड) राजीव मुखर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में कई पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान हिंसा को काबू करने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कोई व्यक्ति मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। सब इंस्पेक्टर राजीव मुखर्जी ने झपट्टा मार कर उस व्यक्ति के फोन को छीन लिया था। आरोप लगाया था कि इस दौरान थाना प्रभारी ने गालियाँ भी बकी थीं।

गौरतलब है कि 17 अप्रैल को रामनवमी शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के रेजीनगर इलाके में हिंसा भड़क गई थी। छतों से शोभायात्रा पर पत्थर बरसाए गए थे। हिंसा के दौरान बमबाजी भी हुई थी। पथराव की चपेट में आ कर लगभग 19 लोग घायल हो गए थे। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

भाजपा ने हिंसा का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगाया है। वहीं TMC ने हिंसा की वजह भाजपा को बता डाला था। फिलहाल पुलिस इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच कर रही है।

‘PM मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा, संविधान में बदलाव का कोई इरादा नहीं’: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- ‘सेक्युलर’ शब्द हटाने की भी जरूरत नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी की गारंटी पर पूरे देश को भरोसा है। इसलिए मोदी 3.0 सरकार आ रही है। अमित शाह ने कहा कि बीजेपी 370+ और एनडीए 400+ सीटों पर प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने पिछले 10 साल में देश को भ्रष्टाचार के गर्त से बाहर निकाला है। देश की सभी विपक्षी पार्टियाँ मिलकर भी पीएम मोदी के ऊपर 25 पैसे तक का भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकती।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तो देश पूरी तरह विकसित और आत्मनिर्भर होगा, इस चुनाव में देश की जनता इस संकल्प को पूरा करने के लिए फिर से पीएम पर भरोसा जताएगी। पीएम मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा है। उन्होंने कहा कि दूरबीन लेकर भी हमें एंटी इन्कमबेंसी नजर नहीं आ रही है। एनडीए इस चुनाव में 400 सीटों से ज्यादा जीतेगा।

अमित शाह ने आज तक से खास बातचीत में कहा कि पीएम मोदी जमीन से उठकर बड़े नेता बने हैं और नेता के नेतृत्व में ही पार्टी आगे बढ़ती है। नेता के पास विजन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना से हम यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात कर रहे हैं और इसे लागू करने का वक्त आ गया है। उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू कर दिया है। हम पूरे देश में यूसीसी लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने यूसीसी के मुद्दे को अपने संकल्प पत्र में भी रखा है। गृह मंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती है। क्या आज देश शरिया या पर्सनल लॉ के आधार पर चलेगा? उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में पर्सनल लॉ नहीं है, यहाँ तक कि मुस्लिम देशों में भी। ऐसे में जमाने के साथ ही भारत को भी आगे बढ़ना होगा।

बीजेपी संविधान को बदलने वाली है, इस सवाल पर गृह मंत्री ने कहा कि हम 10 साल से बहुमत में हैं, लेकिन हमने इसका उपयोग आर्टिकल 370 को हटाने में किया। सीएए लाने में किया। ट्रिपल तलाक हटाने में किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस दावा करती है कि बीजेपी आरक्षण खत्म कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। न हम ऐसा करेंगे, न कॉन्ग्रेस को करने देंगे। उन्होंने कहा कि संविधान से सेकुलर शब्द भी हटाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी हम सीएए लेकर आए हैं, ये प्रक्रिया बहुत लंबी है, लेकिन नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस पर बाद में बहस होगी। ये हमारे घोषणा पत्र में अभी शामिल नहीं है।

गृह मंत्री ने इस दौरान कहा कि पीएम मोदी ने जीएसटी लागू की, 370 खत्म की, राममंदिर का उद्घाटन हुआ, ट्रिपल तलाक खत्म हुआ, वन रैंक वन पेंशन लागू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों ने कोरोना से देश को बचाया। हमने जो काम करेंगे, उनका जिक्र हमने संकल्प पत्र में किया है। कॉन्ग्रेस सिर्फ गरीबी हटाओ का नारा देती थी, पीएम मोदी ने देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाल लिया।

‘मस्जिद’ की चाबियाँ सरकार के पास रहेंगी: जलगाँव के पांडववाड़ा मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका, मंदिरों में हिंदुओं को जाने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को एक मामले में फैसला सुनाया कि जलगाँव के एरंडोल तालुका के एक ‘मस्जिद’ की चाबियाँ नगरपालिका परिषद के पास रहेंगी। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने यह भी साफ कर दिया कि स्थानीय परिषद सुबह नमाज शुरू होने से कुछ देर पहले गेट खोलने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करेगी, जो नमाज होने तक इसे खुला रखेगा।

जस्टिस सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट कमेटी की दायर अपील को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कमेटी को मस्जिद की चाबियाँ 13 अप्रैल 2024 तक परिषद को सौंपने के लिए कहा था। इसके अलावा, कोर्ट ने फैसला कहा है कि अगले आदेश तक मस्जिद परिसर का नियंत्रण वक्फ बोर्ड या याचिकाकर्ता द्वारा किया जाएगा।

अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, “पूरे परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार की चाबी नगर परिषद के पास रहेगी। मस्जिद परिसर के संबंध में यथास्थिति रहेगी और यह अगले आदेश तक वक्फ बोर्ड या याचिकाकर्ता सोसायटी के नियंत्रण में रहेगा। इसके साथ ही मंदिरों या स्मारकों का प्रवेश या निकास में किसी तरह का रोक नहीं रहेगा और सभी धर्म के लोगों को बिना किसी परेशानी के दर्शन करने की अनुमति होगी।”

मामले की पृष्ठभूमि

ऑपइंडिया ने पिछले साल जुलाई महीने में इस मामले के बारे में विस्तार से रिपोर्ट की थी। 16 जुलाई 2023 को प्रशासन ने सदियों पुरानी विवादित मस्जिद को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया था। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत एक आदेश जारी किया, जिसमें राज्य पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित परिसर में प्रार्थना पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया था।

कलेक्टर ने क्षेत्र में पुलिस तैनाती का भी निर्देश दिया था और स्थानीय प्रशासन को ‘विवादित मस्जिद’ का प्रभार लेने के लिए कहा था। इसके बाद विवादित मस्जिद के ढाँचे की देखभाल करने वाली जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट कमेटी ने नमाज अता करने के लिए परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के कलेक्टर के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट के औरंगाबाद बेंच में याचिका दायर की थी।

जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष अल्ताफ खान ने याचिका में दावा किया गया था कि कलेक्टर ने 11 जुलाई 2023 को ‘मनमाना और अवैध’ आदेश पारित किया था, जिसमें ट्रस्ट को विवादित ‘मस्जिद’ की चाबियाँ एरंडोल नगरपालिका परिषद के प्रमुख अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया था। तब हाई कोर्ट ने कलेक्टर के निर्देश पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था।

पांडववाड़ा संघर्ष समिति संपत्ति की बहाली की कर रही माँग

पांडववाड़ा संघर्ष समिति के शिकायतकर्ता प्रसाद मधुसूदन दंडवते ने ऑपइंडिया को इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी। दंडवते ने कहा था, “वहाँ करीब 4-5 मुस्लिम रोजाना नमाज पढ़ते हैं। अब उन्हें अनुमति दे दी गई है, लेकिन हिंदू समुदाय के सदस्य भी पांडववाड़ा के परिसर में जा सकते हैं, जिस पर मस्जिद ट्रस्ट ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।”

इससे पहले यह बताया गया था कि कैसे महाराष्ट्र के जलगाँव जिले के एरंडोल क्षेत्र में पांडववाड़ा को एक मस्जिद में बदल दिया गया था। यह कहानी तब शुरू हुई, जब दंडवते ने जिला प्रशासन से शिकायत की कि मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से एक हिंदू पूजास्थल पर किया गया है और इसे अधिकारियों द्वारा अपने कब्जे में ले लिया जाना चाहिए।

मस्जिद ट्रस्ट ने किया अवैध निर्माण

पांडववाड़ा संघर्ष समिति की शिकायत के अनुसार, ट्रस्ट ने परिसर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और 800-1000 साल पुराने पांडववाड़ा में कई बदलाव किए हैं, जो आज राज्य पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित है। ट्रस्ट ने पांडववाड़ा में बिजली, पंखे, सीमेंट के दरवाजे और पानी के कनेक्शन लगाए।

दंडवते ने कहा, “मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए नमाज से पहले हाथ धोने के लिए वुज़ुखाना का अवैध निर्माण किया है। उन्हें यह अनुमति किसने दी?” उन्होंने कहा था कि पांडववाड़ा के आसपास के हिंदू प्रतीक और संरचना को जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट द्वारा नष्ट कर दिया गया है। इसी ट्रस्ट ने यहाँ पर अवैध रूप से अतिक्रमण करके यहाँ मस्जिद का ढाँचा तैयार किया है।

संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन और अदालत से इस निर्माण के खिलाफ शिकायत की थी और माँग की है कि पांडववाड़ा में किए गए सभी अवैध निर्माण और लगाए गए अतिरिक्त चीजों को हटाई जाए। समिति ने संपत्ति को प्राधिकरण द्वारा अपने कब्जे में लेने और इसकी आयु निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक मूल्यांकन की भी माँग की है।

क्या है पांडववाड़ा?

जलगाँव जिले के एरंडोल क्षेत्र में स्थित पांडववाड़ा को लेकर कहा जाता है कि पांडवों ने अपने निर्वासन के कुछ साल यहाँ एरंडोल क्षेत्र में बिताए थे। यहाँ बनीं हिंदू और जैन मंदिर जैसी संरचनाएँ 800-1000 साल पुरानी हैं। हिंदुओं की गंभीर उदासीनता के कारण 125 साल पहले मुस्लिमों ने धीरे-धीरे यहाँ अतिक्रमण करना शुरू कर दिया और इसे वक्फ संपत्ति बताकर एक मस्जिद बनवा दिया।

हिंदू जनजागृति समिति (एचजेएस) और पांडववाड़ा संघर्ष समिति जैसे हिंदू समूह पांडववाड़ा को वक्फ बोर्ड की घुसपैठ से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विवादित मस्जिद के अस्तित्व के कम से कम 100 साल पुराने रिकॉर्ड हैं, जबकि पांडववाड़ा (जैन और हिंदू मंदिरों की शैली में निर्मित) की प्रमुख इमारतें 800 से 1000 साल पुरानी हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर को नष्ट करके किया गया है। इस मंदिर का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में भी है। इसके अलावा, वक्फ समिति स्थानीय लोक कथाओं और ग्रंथों में वर्णित पांडववाड़ा की हिंदू संस्कृति को बर्बाद करने के लिए विवादित मस्जिद का निर्माण करने के लिए काम कर रही थी।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)