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छत्तीसगढ़ में IED ब्लास्ट, एक कमांडेंट जख्मी: बंगाल में बम मिले और मणिपुर में फायरिंग, बिहार से SLR रायफल चोरी, लोकसभा चुनाव में कई जगह हिंसा

सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के मतदान के दौरान शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की कई घटनाएँ सामने आ रही हैं। पश्चिम बंगाल के साथ-साथ मणिपुर और छत्तीसगढ़ में भी हिंसा की खबर है। वहीं, बिहार के नवादा में बूथ संख्या 234 पर एक सिपाही की SLR रायफल और 20 गोलियाँ चोरी हो गईं। सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया है।

मणिपुर के इनर लोकसभा सीट के अंतर्गत बिष्णुपुर जिले के थमनपोकपी में एक मतदान केंद्र पर गोलीबारी हुई, जिसमें 3 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इम्फाल पूर्व के थोंगजू के एक बूथ पर EVM में तोड़फोड़ की खबर है। राज्य की दोनों लोकसभा सीटों- इनर मणिपुर और आउटर मणिपुर सीट पर आज वोटिंग हो रही है। अब आउटर सीट के हिंसा प्रभावित इलाकों के कुछ बूथ पर 26 अप्रैल को भी वोटिंग होगी।

मणिपुर में कुकी समुदाय के ग्रुप यंग कुकी ने चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। उन्होंने नारा लगाया कि ‘न्याय नहीं तो वोट भी नहीं‘। इस समूह से करीब 1000 लोग जुड़े हुए हैं। ग्रुप की सदस्य हटजल हॉकिप कहती हैं, “यंग कुकी कोई ऑर्गेनाइजेशन नहीं है और न ही ये किसी से जुड़ा है। कुकी युवाओं के अधिकारों की बात करता है। हम मणिपुर में बने हालात की वजह से इस चुनाव के खिलाफ हैं।”

वहीं, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के उसूर थाना इलाके के गलगम में अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL) सेल ब्लास्ट होने से एक जवान को चोट आई है। इससे 500 मीटर के फासले पर ही मतदान केंद्र है। घायल जवान को अस्पताल ले जाया गया है। उधर, भैरमगढ़ के चिहका गाँव में इलेक्शन ड्यूटी पर तैनात CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट IED ब्लास्ट में घायल हो गए हैं।

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार के चांदमारी इलाके में जमकर पथराव हुआ। इस दौरान कुछ लोग घायल भी हुए हैं। भाजपा के बूथ अध्यक्ष लाब सरकार के साथ मारपीट हुई है। बीजेपी नेता के सिर में चोट आई है। कूचबिहार के ही दिनहाटा में भाजपा कार्यकर्ता के घर के बाहर के बाहर बम मिला है। राज्य के तूफानगंज और दिनहाटा ब्लॉक के भेटागुड़ी में भी झड़प की भी खबर है। राजाखोरा क्षेत्र में तनाव है।

दिनहाटा इलाके में मिले बम का सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है। इसे देखकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई है। सोशल मीडिया पर सामने आ रही कूचबिहार की तस्वीरों को देखकर लगता है कि वहाँ वोटिंग वाले दिन माहौल ठीक नहीं है। जलपाईगुड़ी के डाबग्राम-फूलबाड़ी जैसे कुछ इलाकों में कुछ राजनीतिक दलों के अस्थायी कार्यालयों में आग लगा दी गई है।

लोग कह रहे हैं कि अगर ऐसा हाल रहा तो कौन वोट देने आएगा। एक वीडियो में दो ओर से पथराव होता दिख रहा है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं कि कूचबिहार के चांदमारी में भाजपा के बूथ अध्यक्ष लाब सरकार के साथ मारपीट भी हुई है जिसमें वो बुरी तरह घायल हो गए हैं। उनके सिर में गहरी चोट आई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वहीं, बारोकोडाली ग्राम पंचायत में भी हमला किया गया है। कहा जा रहा है कि सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक नेता पर हमला किया गया है। पार्टी के नेताओं ने इसको लेकर भाजपा पर आरोप लगाया है। उनके बूथ अध्यक्ष के नेतृत्व में सुबह मतदान केंद्र 226 और 227 पर पहुँचने से पहले तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हिंसा की।

जिस निजाम अशगर हाशमी ने उमेश का गला काटा, हाईकोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सजा रद्द कर दे दी बेल: गर्लफ्रेंड के भाई का मिला था शव

बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रेमिका के चचेरे भाई का सर काटकर मौत के घाट उतारने वाले निजाम असगर हाशमी की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है, साथ ही उसे जमानत भी दे दी है कि वो कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र होगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने हत्या में प्रयुक्त बाँके पर मिले खून के निशान वाली रिपोर्ट को भी नहीं माना और कहा कि निजाम असगर हाशमी करीब साढ़े 5 से ज्यादा समय जेल में बिताया है, इसलिए उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस श्याम सी चांडक की खंडपीठ ने की और 8 अप्रैल 2024 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि हत्या में प्रयोग किए गए बाँके पर इंसानी खून मिला। कोर्ट ने कहा, “अपराध में इस्तेमाल किया गया हथियार एक खाई में मिला, जिसमें घुटने तक पानी भरा हुआ था। इसके बावजूद फॉरेंसिक रिपोर्ट में उस हथियार पर इंसानी खून मिलने की बात कही गई है, जिसे हम खारिज करते हैं, क्योंकि PW2 की उपस्थिति में ऐसा होना संभव नहीं।” कोर्ट ने इस बात का भी लाभ असगर हाशमी को दिया कि वो CCTV फुटेज में भले ही उमेश के साथ दिखा था, लेकिन उमेश का शव तीन दिन बाद मिला था।

पुलिस ने जाँच के दौरान निजाम असगर हाशमी की निशानदेही पर एक नहर के पास बनी खाई से हत्या का हथियार सत्तूर यानी बाँका, मृतक का पैन कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 30 सितंबर 2023 को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इस मामले में हाशमी के वकीलों ने सजा पर रोक लगाने और हाशमी को जमानत पर रिहा करने की माँग करते हुए याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी सजा पर रोक लगा दी। इस मामले में हाई कोर्ट ने फॉरेंसिक रिपोर्ट खारिज कर दी और कहा कि उमेश और हाशमी एक साथ जब दिखे, उसके तीन दिन बाद शव मिला। इसकी जाँच की जरूरत है। वहीं. चूँकि हाशमी 21 जून 2018 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में है, इसलिए उसकी सजा इस केस की सुनवाई जारी रहने तक निलंबित की जाती है और 50 हजार के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश देती है।

कोर्ट ने कहा है कि जब तक मामला चलता रहेगा, तब तक हाशमी को जमानत प्राप्त रहेगी, लेकिन वो शर्तों का उल्लंघन करता है, तो जमानत निरस्त भी की जा सकती है। कोर्ट ने हाशमी को शुरू के एक साथ तक हर माह के पहले सोमवार को पुणे के कोंढावा पुलिस स्टेशन में हाजिरी देने के लिए कहा है, इसके बाद वो हर तीन माह पर पहले सोमवार को अपनी हाजिरी देगा। अगर 2 बार वो लगातार हाजिरी नहीं देता है, तो उसकी जमानत खारिज कर दी जाएगी।

गौरतलब है कि 19 जून 2018 को पुणे के कोंढावा में एक शव बरामद हुआ था। इस शव का सिर गायब था और शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था। डीएनए जाँच के बाद ये पता चला कि शव उमेश इंगले का था। उमेश इंगले की चचेरी बहन के साथ असगर हाशमी का संबंध था। उमेश पुणे के बिबावेवाड़ी में बालाजी फिटनेस क्लब अक्सर जाया गया था, लेकिन 16 जून 2018 को जिम से घर निकलने के बाद उमेश गायब हो गया था। एक व्यक्ति ने शाम के समय उमेश को हाशमी के साथ देखा था। सीसीटीवी फुटेज में भी दोनों करीब 7.50 बजे शाम को दिखे थे, इसके तीन दिन बाद उमेश का सिर कटा शव मिला था।

BJP कार्यकर्ता की हत्या में कॉन्ग्रेस MLA विनय कुलकर्णी की संलिप्तता के सबूत: कर्नाटक हाई कोर्ट ने 3 महीने के भीतर सुनवाई का दिया आदेश

कर्नाटक हाई कोर्ट ने भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौदर की हत्या के मामले में कॉन्ग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने से भी इनकार कर दिया है। यानी कॉन्ग्रेस विधायक के खिलाफ मामला चलेगा।

न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित ने कहा कि साल 2016 में विनय कुलकर्णी मंत्री थे। अप्रैल 2016 में आयोजित एक पंचायत बैठक में विवाद के बाद उन्होंने अपने करीबियों एवं अन्य आरोपियों के साथ भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौदर की हत्या की साजिश रची थी। अदालत ने लंबी सुनवाई पर टिप्पणी किया कि कुलकर्णी सहित अन्य आरोपित 2016 में हुई घटना के बाद से कई बार अदालतों का रुख कर चुके हैं।

कोर्ट ने कहा, “वर्षों बीत गए, लेकिन एक पत्ता भी नहीं हिला। लंबे समय तक चलने वाला आपराधिक मामला आपराधिक न्याय प्रशासन के हित में प्रतिकूल होगा। प्रत्येक मामले, विशेष रूप से इस तरह के मामले में ‘स्मृति धुंधली होने से पहले’ उसका निपटारा किया जाना चाहिए। इसलिए, मेरा मानना है कि इस मामले की सुनवाई युद्धस्तर पर होनी चाहिए।”

बता दें कि धारवाड़ जिला पंचायत के निर्वाचित सदस्य योगेश गौदर की जून 2016 में उनके जिम में हत्या कर दी गई थी। इस मामले की शुरुआत में कर्नाटक पुलिस ने जाँच की थी और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भाजपा सरकार ने साल 2019 में मामले को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया था।

कॉन्ग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को साल 2020 में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया और ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2023 में उनके खिलाफ आरोप तय किए। कुलकर्णी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि उन्हें हत्या से जोड़ने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सामग्री नहीं है। इसलिए, उनके खिलाफ कोई आरोप तय नहीं किया जा सकता।

हालाँकि, सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि कुलकर्णी के खिलाफ मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य और कई गवाहों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित है। उन्होंने यह भी दलील दी कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष दायर किए गए दस्तावेज़ अभियोजन पक्ष के मामले को पर्याप्त विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।

अदालत अभियोजन पक्ष के इस तर्क से सहमत हुई कि अपराध करने से पहले और बाद में आरोपित के आचरण से उसकी संलिप्तता का पता लगाया जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि कुछ अभियुक्त गौदर की हत्या से कुछ दिन पहले कुलकर्णी द्वारा व्यवस्था किए गए स्थान पर रुके थे। इतना ही नहीं, हत्या से पहले आरोपियों और कुलकर्णी के बीच फोन पर बात भी हुई थी।

इसके बाद कोर्ट ने इस तथ्य को खारिज कर दिया कि विनय कुलकर्णी को शस्त्र अधिनियम के तहत दंडनीय किसी भी अपराध से जोड़ने के लिए कोई सामग्री नहीं थी। इस दलील के संबंध में कि कुलकर्णी को कुछ दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे, जो आरोपपत्र का हिस्सा हैं, अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पत्र का हवाला दिया जिसमें दर्ज किया गया था कि आरोपपत्र की प्रति उनके वकील को प्राप्त हुई थी।

कॉन्ग्रेस शासन में कर्नाटक में जंगलराज, भाजपा नेता के घर में घुस 4 लोगों की हत्या, पुलिस के हाथ खाली

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस राज में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। राज्य के गडग जिले में नगरपालिका उपाध्यक्ष के घर में घुस कर चार लोगों की हत्या कर दी गई। नगर पालिका की उपाध्यक्ष भाजपा नेता हैं। उनके बेटे को मार दिया गया। इसके अलावा 3 और लोगों की उनके ही घर में रात में हत्या कर दी गई। मामले में कर्नाटक पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं।

जानकारी के अनुसार, गडग जिले की गडग-बेटागेरी नगर पालिका में शुक्रवार रात (18 अप्रैल, 2024) को दसरा ओनी इलाके में प्रकाश बकाले के घर में हमला हुआ। प्रकाश बकाले भाजपा नेता हैं और उनकी पत्नी गडग-बेटागेरी नगरपालिका की उपाध्यक्ष भी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हत्यारे उनके घर में रात में घुसे और प्रकाश के बेटे कार्तिक बकाले (27), परशुराम हडिमनी(55), लक्ष्मी हडिमनी (45) और आकांक्षा हडिमनी (16) की हत्या कर दी। बताया गया कि हडिमनी परिवार कार्तिक की शादी की तैयारियों में हिस्सा लेने आया था। यह बकाले परिवार के रिश्तेदार थे।

इन सभी की हत्या गोली मार कर की गई। बताया गया कि हत्यारे छत से घर में घुसे और लोगों को मारने लगे। पहले उन्होंने एक कमरे का शीशा तोड़ कर हडिमनी परिवार के तीन लोगों को मार दिया। इनकी हत्या गोली मार कर की गई। खटपट की आवाज सुन कर जब कार्तिक उस कमरे के पास पहुँचे तो हत्यारों ने उन्हें भी मार दिया।

इसके बाद हत्यारों ने प्रकाश बकाले और सुनन्दा बकाले के कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की। हालाँकि, वह इसमें सफल नहीं हुए। इस बीच प्रकाश बकाले ने पुलिस को सूचना दे दी। घटना के बाद हत्यारे भागने में सफल रहे। उन्होंने अपने हथियार एक नाले में फेंक दिए।

हत्यारों का पुलिस अभी तक पता नहीं लगा पाई है। गडग के पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया है। पुलिस का कहना है कि यह मामला डकैती का नहीं है क्योंकि मृतकों के शरीर से कोई भी गहने नहीं ले जाए गए। मामले की जाँच के लिए पाँच अधिकारीयों की टीम बनाई गई है। इस घटना के बाद कर्नाटक के मंत्री एच के पाटिल ने भी दौरा किया है।

इस जघन्य हत्याकांड के बाद से कर्नाटक की कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस राज वाले कर्नाटक में पिछले 24 घंटों में हत्या की कई वारदात सामने आई हैं।

‘इसमें कीटनाशक, जो सेवन कर रहे वो डॉक्टर के पास जाएँ’: सिंगापुर ने Everest के फिश करी मसाला को बाजार से हटाने का दिया आदेश, कहा – ये स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

सिंगापुर ने भारतीय खाद्य कंपनी Everest के फिश करी मसाला को अपने बाजार से वापस मँगा लिया है। इसे भारत से आयात किया जाता है। हालाँकि, अब सिंगापुर का कहना है कि इसमें कीटनाशक होने के कारण ये स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। बकौल सिंगापुर प्रशासन, एवरेस्ट के मछली मसाला में ईथीलीन ऑक्साइड (C₂H₄O) की मात्रा बहुत अधिक है, जो कि एक कीटनाशक है और खाद्य पदार्थों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

असल में हॉन्गकॉन्ग स्थित ‘सेंटर फॉर फ़ूड सेफ्टी’ ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके बाद ये फैसला लिया गया है। इसमें बताया गया है कि इस केमिकल की जितनी मात्रा डालने की अनुमति है, उससे कहीं अधिक मात्रा एवरेस्ट ने इस्तेमाल में लाया है। ‘सिंगापुर फ़ूड एजेंसी’ ने अपने बयान में लिखा है कि इस मसाले को भारत से आयात करने वाली कंपनी ‘Sp Muthiah & Sons Pte. Ltd’ को आदेश दिया गया है कि वो इस उत्पाद को वापस ले।

SFA ने कहा गया है कि उक्त केमिकल ईथीलीन ऑक्साइड का इस्तेमाल कृषि उत्पादों को कीट से बचाने के लिए किया जाता है, साथ ही माइक्रोबियल प्रसार रोकने के लिए भी इसको उपयोग में लाया जाता है। कहा गया है कि इसे निम्न मात्रा में लेने पर स्वास्थ्य पर अचानक से तो कोई खतरा नहीं है, लेकिन लगातार इसके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याएँ हो सकती हैं। सलाह दी गई है कि इस पदार्थ के जितना कम संपर्क में आएँ उतना बेहतर है।

साथ ही ‘सिंगापुर फ़ूड एजेंसी’ ने Everest के फिश करी मसाले खरीद चुके उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वो इसका इस्तेमाल न करें। साथ ही जो लोग इसका इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हें सलाह दी गई है कि वो चिकित्सकीय सलाह लें। उपभोक्ताओं को अधिक जानकारी के लिए वहाँ संपर्क करने की सलाह दी गई है, जहाँ से उन्होंने खरीदा है। गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को ये आदेश जारी किया गया। ये मसाले सामान्यतः 50 ग्राम के पैकेट में आता है।

त्रिपुरा में सबसे ज्यादा, लक्षद्वीप में सबसे कम… 102 सीटों पर 11 बजे तक हुई वोटिंग की पूरी डिटेल, जगह-जगह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

लोकसभा चुनाव की पहले चरण की वोटिंग में आज 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 102 सीटों पर मतदान हो रहा है। पीएम मोदी ने हर मतदाता से अपने वोट का इस्तेमाल करके नया रिकॉर्ड बनाने को कहा है। देश की बड़ी-बड़ी हस्तियाँ पोलिंग बूथ पर अपना वोट डालकर लोगों का उत्साह बढ़ा रही हैं।

आज सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक जारी रहने वाली है। फिलहाल, हर जगह मतदान को होते 5 घंटे बीत गए हैं। ऐसे में 11 बजे तक राज्यों में हुए कितने फीसद मतदान हुआ इसकी डिटेल्स आ गई हैं। त्रिपुरा इस लिस्ट में (34.54 फीसद वोट शेयर के साथ) सबसे ऊपर है। वहीं सबसे नीचे अभी लक्षद्वीप है जहाँ 16.33 फीसद वोट पड़े हैं।

मौजूदा जानकारी के अनुसार,

त्रिपुरा में सुबह 11 बजे तक 34.54% मतदान हुआ।
पश्चिम बंगाल में 33.56% वोट पड़े।
मेघायलय में 33.12% मतदान हुआ।
मणिपुर में सुबह 11 बजे तक 29.23% मतदान हुआ।
तमिलनाडु में सुबह 11 बजे तक 23.87% मतदान हुआ।
मिजोरम में सुबह 11 बजे तक 28.78% मतदान हुआ।
छत्तीसगढ़ में सुबह 11 बजे तक 28.12% मतदान हुआ
पुडुचेरी में सुबह 11 बजे तक 28.10% मतदान हुआ।
असम में सुबह 11 बजे तक 27.22% मतदान हुआ।
नागालैंड में सुबह 11 बजे तक 25.24% मतदान हुआ।
उत्तर प्रदेश में सुबह 11 बजे तक 25.20% मतदान हुआ।
उत्तराखंड में सुबह 11 बजे तक 24.83% मतदान हुआ।
तमिलनाडु में सुबह 11 बजे तक 23.87% मतदान हुआ।
जम्मू-कश्मीर में सुबह 11 बजे तक 22.60% मतदान हुआ।
राजस्थान में सुबह 11 बजे तक 22.59% मतदान हुआ।
अंडमान निकोबार में सुबह 11 बजे तक 21.82% मतदान हुआ
सिक्किम में सुबह 11 बजे तक 21.20% मतदान हुआ।
बिहार में सुबह 11 बजे तक 20.42% मतदान हुआ।
अरुणाचल प्रदेश में सुबह 11 बजे तक 20.13% मतदान हुआ।
महाराष्ट्र में सुबह 11 बजे तक 19.17% मतदान हुआ।
लक्षदीप में सुबह 11 बजे तक 16.33% मतदान हुआ

बता दें कि इस समय देश के 21 राज्यों में चल रहे चुनावों के मद्देनजर हर जगह सुरक्षा टाइट है। संवेदनशील जगहों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है। कुछ जगहों पर मतदाताओं वोट डालने में किसी को परेशानी न हो हो इसके लिए टीमें इलाके में गश्त कर रही हैं। कुछ राज्यों में मतदाताओं के लिए मोटरसाइकिल और साथ में घुड़सवार भी लगाए गए हैं।

‘वासुकि’ के इतिहास पर विज्ञान की मुहर! गुजरात में वैज्ञानिकों को मिला 4 करोड़ साल पुराना जीवाश्म, लेकिन सिर गायब: भारत से अफ्रीका पहुँचे थे 49 फ़ीट के ये साँप

आपने वासुकि नाग की कथा सुनी है? हमारे शास्त्रों में वासुकि की कथा है, जिसे रस्सी की तरह इस्तेमाल कर के देवताओं एवं दानवों ने मिल कर समुद्र मंथन किया था। वासुकि नाग को भगवान शिव ने अपने गले में स्थान दिया। अब गुजरात में खुदाई में कुछ ऐसा मिला है, जो इस तरह के विशालकाय जीवों के अस्तित्व की पुष्टि करता है। ऐसे साँपों के जीवाश्म कच्छ में खुदाई के दौरान प्राप्त हुए हैं। ये अब तक का सबसे बड़ा साँप है, जिसका जीवाश्म प्राप्त हुआ है। इसकी लंबाई 11-15 मीटर थी। इसकी गोलाई 17 इंच थी।

ये 28 डिग्री सेल्सियस के औसत तापमान पर पनपता था। इसे ‘वासुकि इंडिकस’ नाम दिया गया है। IIT रुड़की के वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान इसका पता लगाया है। इस खोज से न सिर्फ प्राणियों के इवोल्यूशन का पता चला है बल्कि प्राचीन सरीसृपों से भारत के ताल्लुक का भी पता चलता है। ‘वासुकि’ साँपों का जन्म मूल रूप से भारत में हुआ और यूरेशिया के माध्यम से ये उत्तरी अफ्रीका तक पहुँचे। इन्हें गोंडवाना साँपों की श्रेणी में डाला गया है। ये शोध-पत्र ‘Nature’ मैगजीन में भी प्रकाशित हुआ है।

IIT रुड़की के ‘डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंसेंज’ के अध्यक्ष सुनील वाजपेयी ने बताया कि इन साँपों की लंबाई 36 फ़ीट से लेकर 49.22 फ़ीट होती थी। ये कोलंबिया के टाइटेनोबोआ से भी बड़ा है, जो डायनासोर के काल में पाया जाता था और जिसे अब तक का सबसे बड़ा साँप माना गया है। ‘वासुकि इंडिकस’ धीमे-धीमे चलता था, घात लगा कर शिकार पर हमला करता था और इसकी चाल-ढाल एनाकोंडा की तरह थी। कच्छ के पनान्ध्रो गाँव में भूरे कोयले के खादानों से इसके जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। ये कछुए, व्हेल और मगरमच्छ की प्राचीन प्रजातियों को खाता रहा होगा। ये लगभग 12,000 वर्ष पहले विलुप्त हुआ।

ये खोज हमें आदिनूतन (Eocene) युग तक लेकर जाती है, यानी 5.60 से 3.39 करोड़ वर्ष पूर्व तक। वैज्ञानिकों ने 27 ऐसे अस्थिखंड प्राप्त किए हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। ये जीवाश्म 2005 में ही मिले थे लेकिन अन्य प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता के कारण इस पर गहन अध्ययन नहीं हुआ था। पहले सबको लगा था कि ये मगरमच्छ का है, लेकिन दोबारा अध्ययन होने के बाद ये इतिहास में दर्ज हो गया। बता दें कि इसी तरह राजस्थान के जैसलमेर में शाकाहारी डायनासोर की खोज हुई थी। ये 16.70 करोड़ वर्ष पहले अस्तित्व में था।

हालाँकि, अब तक साँप का सिर नहीं मिला है। वैज्ञानिकों ने अंदाज़ा लगाया है कि ये अपने सिर को किसी ऊँचे स्थान पर टिकाने के बाद अपने बाकी के शरीर को चारों ओर लपेट लेता रहा होगा। ये कुछ उसी तरह का है, जैसा ‘जंगलबुक’ का विशालकाय साँप। ये दलदली जमीन पर किसी ट्रेन की तरह विचरण करता था। इसे ‘मैडसोइड’ सर्प-प्रजाति के अंतर्गत डाला गया है। इसकी रीढ़ की हड्डी का सबसे बड़ा हिस्सा 4 इंच का होता था। ये ज़हरीला नहीं होता था।

Uber के लिए हिन्दू महिला का नाम ही अवैध, ‘स्वास्तिक’ को जोड़ दिया नाजी से, नाम बदलने की रख दी शर्त: 6 महीने के बाद माँगी माफी

ऑस्ट्रेलिया में एक हिन्दू महिला का स्वास्तिक नाम होने के चलते उबर कम्पनी ने सेवाएँ देने से मना कर दिया। उबर ने इस नाम को अवैध बताया। उबर ने स्वास्तिक नाम को नाजी निशान हेकेनक्रूज बताया और हिन्दू महिला को सुविधाएँ देने से मना किया। यह तब हुआ जब सैकड़ों बार यह स्पष्ट हो चुका है हिन्दू स्वास्तिक, घृणा वाले हेकेनक्रेज से पूरी तरह अलग है। उबर ने इस मामले में बाद में माफ़ी भी माँगी है।

जानकारी के अनुसार, फिजी की मूल निवासी स्वस्तिका चंद्रा के साथ यह घटना ऑस्ट्रेलिया में हुई। अक्टूबर 2023 में जब वह उबर पर खाना आर्डर कर रही थीं तो उनसे नाम बदलने को कहा गया। उनका नाम उबर को हिंसक लगा और उबर ने उनको अपने प्लेटफार्म से प्रतिबंधित कर दिया।

स्वास्तिका चन्द्रा को उबर ने बताया कि स्वास्तिक जैसा निशान जर्मनी का तानाशाह हिटलर और उसकी नाजी पार्टी करती थी इसलिए स्वास्तिका नाम को अनुमति नहीं दी जा सकती। उबर ने चन्द्रा पर एप यूज करने के लिए नाम बदलने की शर्त रख दी।

स्वास्तिका चन्द्रा ने बताया कि वह फिजी में जन्मी हैं और उनके जानने वालों में ही स्वास्तिक नाम के लोग हैं। उनको इस नाम से इससे पहले कभी समस्या नहीं हुई। यहाँ तक कि ऑस्ट्रेलिया में उन्हें अपने दस्तावेज तैयार करवाने में भी कोई दिक्कत नहीं हुई। यहाँ भी उनके नाम को लेकर कोई प्रश्न नहीं उठाए गए।

स्वास्तिक चंद्रा ने इस बात पर गुस्सा जाहिर किया कि हिटलर से पहले स्वास्तिक के चिन्ह का हजारों साल से हिन्दुओं ने उपयोग किया है और फिर भी कम्पनियाँ इन्हें एक मानती हैं। स्वास्तिक चंद्रा ने इस घटना के कारण अपना नाम बदलने से भी इनकार किया।

इस घटना के कड़े विरोध के कारण उबर ने माफ़ी मांग ली है और स्वस्तिक को उनके नाम के साथ ही अपने प्लेटफार्म के उपयोग की अनुमति दी है। इस मुहिम में स्वास्तिक चंद्रा को ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी हिन्दू संस्था, एक यहूदी संस्था और कानूनी अधिकारियों की मदद लेनी पड़ी।

अलग-अलग हैं स्वास्तिक और नाजी निशान ‘हेकेनक्रेज या हूक्ड क्रॉस’

स्वास्तिक पर यह बवाल कोई नया नहीं है। पश्चिमी देशों में नासमझी के चलते हिन्दू पवित्र चिन्ह को ईसाईयत के हूक्ड क्रॉस या हेकेनक्रेज, जिसका इस्तेमाल हिटलर करता था, समझा जाता है। इस बेवकूफी में मात्र सामान्य जन ही नहीं बल्कि बड़े बड़े मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। स्वास्तिक जहाँ पूरी तरीके से सीधा बना होता है और इसके कोने हल्का सा मोड जाते हैं, वहीं हूक्ड क्रॉस एकदम सीधा ना होकर 45 अंश पर बाएँ तरफ को मोड़ा हुआ होता है। स्वास्तिक के भीतर बिंदियाँ भी होती हैं, हूक्ड क्रॉस में यह नहीं होती।

इसके अलावा स्वास्तिक शब्द का निर्माण ‘सु’ और ‘अस्ति’ से मिलकर हुआ है। इसका अर्थ होता है कि ‘अच्छा होना’। दूसरी तरफ हूक्ड क्रॉस या हेकेनक्रेज हिटलर के नाजी जर्मनी में लगाया जाने वाला निशान था। इसका हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है। हिटलर इस निशान का इस्तेमाल यहूदियों को आतंकित करने के लिए करता था। दोनों चिन्हों में अंतर को कई बार स्पष्ट किया जा चुका है। कई पश्चिमी देशों में हेकेनक्रेज पर प्रतिबंध है लेकिन स्वास्तिक पर नहीं।

हालाँकि, पश्चिमी मीडिया संस्थान हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए लगातार नाजी समर्थकों का हूक्ड क्रॉस स्वास्तिक बताया जाता रहा है। सितम्बर, 2022 में एक हत्यारे ने रूस में कई बच्चों की हत्या कर दी थी। उसने यही क्रॉस अपनी टीशर्ट पर बनाया हुआ था। इसे समाचार संस्थान रायटर्स ने क्रॉस ना बता कर स्वास्तिक बताया। इसी तरह अन्य कई बार भी ऐसे ही प्रयास किए गए। इसकी वजह से हिन्दुओं को पश्चिमी देशों में घृणा का भी शिकार होना पड़ा है।

‘दो राजकुमारों की शूटिंग फिर शुरू हो गई है’ : PM मोदी ने कॉन्ग्रेस-सपा को घेरा, बोले- अमरोहा की एक ही थाप, फिर मोदी सरकार

उत्तर प्रदेश के अमरोहा में विशाल जनसभा के बीच आज (19 अप्रैल 2024) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने सभी मतदाताओं, खासकर युवाओं से अपने अधिकार का उपयोग करने की अपील की। अमरोहा की जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा अमरोहा की एक ही थाप है- कमल छाप! और अमरोहा का एक ही स्वर है – फिर एक बार मोदी सरकार।

पीएम ने कहा, “अमरोहा केवल ढोलक ही नहीं, देश का डंका भी बजाता है। क्रिकेट वर्ल्ड कप में भाई मोहम्मद शामी ने जो कमाल किया, वो पूरी दुनिया ने देखा है। खेलों में शानदार प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार ने उन्हें अर्जुन अवार्ड दिया है और योगी जी की सरकार यहाँ के युवाओं के लिए स्टेडियम भी बनवा रही है।”

उन्होंने 2024 के चुनावों को देश के भविष्य का चुनाव बताया और कहा कि बीजेपी गाँव, गरीब के लिए बड़े विजन और बड़े लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रही है, लेकिन INDI गठबंधन के लोगों की सारी शक्ति गाँव, देहात को पिछड़ा बनाने में लगती है। इस मानसिकता का सबसे बड़ा नुकसान अमरोहा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों को उठाना पड़ा है।

उन्होंने कॉन्ग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा, यूपी में एक बार फिर दो शहजादों की जोड़ी की फिल्म की शूटिंग चल रही है जिसे लोग पहले ही नकार चुके हैं। हर बार ये लोग परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की टोकरी उठाकर यूपी की जनता से वोट माँगने निकल पड़ते हैं। अपने इस अभियान में ये लोग हमारी आस्था पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। यहाँ से जो कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी हैं, उन्हें तो भारत माता की जय बोलने में भी परेशानी होती है।

उन्होंने कहा, “आज जब पूरा देश राममय है, तब समाजवादी पार्टी के लोग रामभक्ति करने वालों को सार्वजनिक रूप से पाखंडी कहते दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि INDI गठबंधन वाले सनातन से घृणा करते हैं। अभी मैं द्वारका गया और समुद्र में नीचे जाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की। लेकिन कॉन्ग्रेस के शहजादे कहते हैं कि समुद्र के नीचे पूजा करने योग्य कुछ है ही नहीं। हमारी हजारों वर्ष की आस्था और भक्ति को ये लोग सिर्फ वोटबैंक के लिए खारिज कर रहे हैं।”

वह बोले- “बिहार और उत्तर प्रदेश में अपने आप को यदुवंशी कहने वाले नेताओं से मैं पूछना चाहता हूँ कि आप भगवान श्रीकृष्ण और द्वारका का अपमान करने वालों के साथ कैसे समझौता कर सकते हो।” उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के इसी खेल ने यूपी को और खासकर हमारे पश्चिमी यूपी को दंगों की आग में जलाया है यहाँ के लोग गुंडाराज को नहीं भुला सकते।

‘हम अलग-अलग समुदाय से, तुम्हारे साथ नहीं बना सकती संबंध’: कॉन्ग्रेस नेता ने बताया फयाज ने उनकी बेटी को क्यों मारा, कर्नाटक में हिन्दू संगठनों का प्रदर्शन

कर्नाटक के हुबली में कॉन्ग्रेस के कार्पोरेटर निरंजन हिरेमठ की 23 वर्षीय बेटी नेहा की फयाज नाम के युवक ने हत्या कर दी। CCTV फुटेज में देखा गया कि फयाज ने नेहा पर कई बार चाकू से वार किया। वो कॉलेज में उसके साथ ही पढ़ता था। गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को हुए इस हत्याकांड में फयाज को गिरफ्तार कर लिया गया है। नेहा ‘मास्टर्स इन कम्प्यूटर एप्लीकेशंस (MCA)’ की फर्स्ट ईयर की छात्रा थी। मृतका और आरोपित, दोनों ही स्थानीय BVB कॉलेज में पढ़ते थे। हत्या से 5 मिनट पहले ही नेहा की माँ गीता ने उससे बात की थी, वो उसे लेने कॉलेज भी आई थी।

नेहा के पिता ने इस हत्याकांड के संबंध में जानकारी देते हुए बताया, “सुबह के 8 बजे से मेरी बेटी का क्लास था। शाम को साढ़े 4 बजे जैसे ही क्लास खत्म कर के जैसे ही बाहर आई, किसी अनजान व्यक्ति ने आकर 30 सेकेण्ड में 7-8 बार चाकू घोंपा, जिस कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वो नेहा का सीनियर था, उसने प्रोपोज किया था लेकिन मेरी बेटी ने उसका प्रपोजल रिजेक्ट कर दिया। उसे ऐसी चीजें पसंद नहीं थीं, वो दूर रहती है, इसीलिए उसने इनकार कर दिया।”

मृतका के पिता निरंजन हिरेमठ ने बताया कि उनकी बेटी ने उक्त युवक को कड़े शब्दों में स्पष्ट कह दिया था कि हम अलग-अलग समुदाय के हैं, तुम्हारे साथ संबंध नहीं बढ़ा सकते। विद्यानगर पुलिस का कहना है कि उसने 1 घंटे के भीतर हत्यारे को गिरफ्तार करने में सफलता पाई। पुलिस का कहना है कि फयाज ने नेहा की हत्या की, क्योंकि वो उसे नज़रअंदाज़ कर रही थी। पीठ और गर्दन पर चाकू घोंपा गया। KIMS अस्पताल में उसे ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद और केंद्रीय संसदीय मामलों, कोयला एवं खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि कॉन्ग्रेस सरकार में राज्य की कानून-व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने हत्यारे के लिए कड़ी सज़ा की माँग की। वहीं छात्र संगठन ABVP ने हुबली और धारवाड़ में बंद का आह्वान किया है। मटर रोड्स स्थित श्मशान में नेहा का अंतिम संस्कार किया जाएगा। फयाज बेलागावी के सवदत्ती का रहने वाला है। KLE टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से BCA करने के दौरान नेहा हिरेमठ और फयाज की जान-पहचान हुई थी।

पुलिस का कहना है कि फयाज ने नेहा के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप बनाने की कोशिश कई बार की। नेहा के परिजनों ने फयाज को चेताया भी था और उसे दूर रहने को कहा था। उसकी हरकतों के कारण नेहा कई दिनों तक कॉलेज भी नहीं जा पाई थी। फिर वो MCA की परीक्षाएँ देने के लिए कॉलेज आ रही थी। हिन्दू संगठनों ने जिले के वकीलों से निवेदन किया है कि वो फयाज का केस न लड़ें। विद्यानगर पुलिस थाने के सामने भी विरोध प्रदर्शन किया गया।