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‘आज पुलिस ने बचा लिया… साले कुम्हार जान से खत्म कर देंगे‘ – नूहं में जुबैर सहित मुस्लिम भीड़ ने फाड़े हिन्दू महिलाओं के कपड़े, धर्म परिवर्तन और गाँव छोड़ने की भी धमकी

हरियाणा के नूहं जिले में एक हिन्दू परिवार पर मुस्लिम वर्ग के कुछ लोगों द्वारा हमले की खबर है। यहाँ OBC समुदाय से आने वाले संतराम ने इदरीस, जुनैद, जुबैर, अख़लाक़, ज़फ़र, अकरम, शमीम, जावेद, अयूब व एक अन्य पर हमले की रिपोर्ट दर्ज करवाई है। हमलावरों में साहुनी और रवीना नाम की 2 महिलाएँ भी शामिल हैं। इन सभी पर संतराम की दुकान को लूटने और उनके परिवार की औरतों को भी पीटने और दुर्व्यवहार का आरोप है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि उन पर गाँव से पलायन करने और इस्लाम कबूलने का दबाव बनाय जाता है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना की शुरुआत मंगलवार (16 अप्रैल 2024) को हुई थी।

यह घटना थानाक्षेत्र पिनगवां की है। यहाँ के रनियाला पटाकपुर में संतराम अपने परिवार के साथ रहते हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल को रात लगभग 10:30 पर रमेशचंद की अखलाक, जुबैर और नाहिद ने घर में घुस कर पिटाई की थी। इस दौरान तीनों आरोपितों ने हाथ में तमंचा लेकर रमेशचंद को गोली मारने की भी धमकी दी थी। रमेशचंद ने इसकी शिकायत पिनगवां थाने में 17 अप्रैल को दर्ज करवाई थी। इस शिकायत पर इसी दिन शाम लगभग 7 बजे गाँव में जाँच-पड़ताल के लिए पुलिस गई थी।

बताया जा रहा है कि जुबैर और उसके साथी रमेशचंद द्वारा पुलिस बुलाए जाने से नाराज रहने लगे थे। रमेशचंद के परिवार के ही सदस्य संतराम हैं, जो परचून की दुकान चलाते हैं। पुलिस के लौटने के बाद 17 अप्रैल को ही इदरीस पीड़ित संतराम की दुकान में अपने कुछ साथियों के साथ लाठी-डंडे लेकर घुस गया। उसने संतराम को देखते हुए कहा, “साले कुम्हार को जान से खत्म कर देते हैं।” इदरीस के ललकारते ही वसीम, अकरम और जावेद भी रमेशचंद, संतराम और राजेश पर हमलावर हो गए।

हमलावरों ने पीड़ितों पर लाठी-डंडे चलाए। इस हमले में पीड़ितों के सिर, हाथ और पीठ में चोटें आईं। संतराम को घायल देख कर हमलावरों के परिजनों ने उनकी दुकान में लूटपाट शुरू कर दी। इस लूटपाट में वसीम के साथ अखलाख और साहुनी नाम की एक महिला भी बताई जा रही है। पीड़ित के गल्ले से लगभग 23 हजार रुपए निकाल लिए गए। जब संतराम के घर की औरतों ने हमलावरों को रोकना चाहा तो उनके साथ भी छेड़खानी की गई। जुनैद ने तो एक हिन्दू महिला के कपड़े तक फाड़ डाले।

पीड़ित परिवार का एक सदस्य मोबाइल से इस हमले को रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहा था। हमलावरों में शामिल इदरीस ने मोबाइल छीन कर तोड़ डाला। शोरगुल सुन कर गाँव के तमाम लोगों की भीड़ जमा हो गई। हंगामे की सूचना पर पुलिस भी पहुँच गई। पुलिस को आता देख कर हमलावर भागने लगे। जाते-जाते उन्होंने कहा, “आज तो पुलिस ने बचा लिया। आइंदा मौका मिला तो जान से खत्म कर देंगे।” हमलावरों में नामजद इदरीस, जुनैद, जुबैर, अखलाक, जफर, अकरम, शमीम, रबीना, जावेद, अयूब, साहुनी और वसीम के अलावा 25-30 अन्य अज्ञात लोग भी बताए गए हैं।

हमलावरों में अकरम नाम का व्यक्ति 31 जुलाई 2023 को बंटी नाम के व्यक्ति की मिल में आग लगाने का भी आरोपित बताया गया है। पीड़ित परिवार ने खुद को शिकायत के अंत में बेहद डरा हुआ बताया है। उन्होंने भविष्य में भी खुद पर हमले की आशंका जताई है। संतराम की शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि उन लोगों पर गाँव से भागने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता है। संतराम ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अपने जान-माल की रक्षा की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया को पीड़ित परिवार ने कुछ वीडियो भी भेजे हैं। इस वीडियो में दुकान में तोड़फोड़ दिख रही है। अन्य तस्वीरों में कुछ घायलों को देखा जा सकता है, जो संतराम के परिजन बताए जा रहे हैं। एक वीडियो में पीड़ित परिवार के लोग एक जगह जमा हुए हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए अपनी जान-माल की गुहार लगाई है।

ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता संतराम से बात की। संतराम ने हमें बताया कि उनका गाँव मुस्लिम बाहुल्य है, जहाँ हिन्दुओं के महज 4-5 घर हैं। अपने घर से 3 लोगों के घायल होने की जानकारी देते हुए संतराम ने कहा कि वो अभी रोहतक के अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं।

ऑपइंडिया ने पिनगवां के थाना प्रभारी से अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी माँगी। SHO पिनगवां ने बताया कि मामले में FIR दर्ज करके 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव पर कई तरह के प्रतिबंध, इतिहास में पहली बार आतिशबाजी पर भी रोक: केरल की वामपंथी सरकार के खिलाफ हिंदुओं में भारी गुस्सा

केरल के त्रिशूर शहर में प्रसिद्ध वडक्कुनाथन (शिव) मंदिर में आयोजित होने वाले ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव में शुक्रवार-शनिवार (19-20 अप्रैल 2024) की रात हजारों लोग शामिल हुए। हालाँकि, केरल की वामपंथी सरकार ने यहाँ भारी पुलिस बल भेजकर यहाँ कई तरह प्रतिबंध लगा दिए। त्योहार की रात में होने वाली आतिशबाजी पर रोक लगा दी गई। इसके कारण इस त्योहार के इतिहास में पहली बार आतिशबाजी दिन में करनी पड़ी। इसके कारण हिंदुओं में भारी गुस्सा है।

यहाँ आतिशबाजी से पहले स्वराज दौर में कई प्रतिबंध लगाए जाने के कारण तिरुवंबडी देवास्वोम के सदस्यों की पुलिस के साथ बहस हो गई। इसके बाद देवास्वोम अधिकारी ने पूरम कार्यवाही बंद कर दी। तिरुवंबडी मंदिर में केवल एक हाथी की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाज सादे तरीके से आयोजित की गई। जो आतिशबाजी सुबह 3 बजे निर्धारित थी, वह सुबह 7 बजे हुई। यही नहीं, पुलिस पर हिंदुओं के साथ अभद्रता करने का आरोप भी लगा है।

दरअसल, मंदिर प्रशासन एवं आयोजन समिति के साथ पुलिस का किसी तरह का कोई समन्वय नहीं था। जारी किए गए पासों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी। उत्सव के दौरान पुलिस के भारी हस्तक्षेप के कारण थिरिवाम्बडी मंदिर में सुबह की पूजा के दौरान हंगामा मच गया। हाथी जुलूस के दौरान भी तनाव बढ़ गया। परमेक्कावु मंदिर में भी इसी तरह की घटनाएँ सामने आईं। पुलिस ने पूरम परिसर में अचानक रस्सी के बैरिकेड लगा दिए, जिससे पूरम आयोजक नाराज हो गए।

पैरामेक्कविल खंड के जुलूस को भी पुलिस बैरिकेड्स का सामना करना पड़ा। केवल एक हाथी और मेले में आने वालों कुछ लोगों ही वहाँ गुजरने की अनुमति दी गई। पूरम आतिशबाजी के लिए लगाए गए बैरिकेड्स के कारण कल रात के जुलूस के दौरान संगीतकारों और हाथियों को रोक दिया गया था। तिरुवम्बदी देवास्वोम ने नादुविलाल जंक्शन के पूरम पंथाल में लाइटें बंद करके इसका विरोध प्रदर्शन किया, जो इतिहास में पहली बार हुआ। दरअसल, पुलिस कमिश्नर ने यहाँ कड़े प्रतिबंध लगाए गए।

केरल के एक हिंदू संगठन के प्रमुख प्रतीश विश्वनाथ ने कहा, “केरल की कम्युनिस्ट सरकार का ऐतिहासिक त्रिशूरपूरम उत्सव में हस्तक्षेप करने का विवादास्पद निर्णय विभाजनकारी राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू त्योहारों का फायदा उठाने का एक और उदाहरण प्रतीत होता है। पूज्य ‘कुदामट्टम’ समारोह के दौरान श्रीराम और रामलला के प्रदर्शन में तिरुवमपडी और परमेक्कव देवास्वोम्स की भागीदारी को भीड़ से अपार तालियाँ और उत्साहपूर्ण समर्थन मिला।”

उन्होंने आगे कहा, “हिंदुओं की सांस्कृतिक एकता का यह प्रदर्शन वामपंथी और कॉन्ग्रेस दोनों गुटों को परेशान करने वाला लग रहा था, जिसके कारण राज्य सरकार को बहुप्रतीक्षित आतिशबाजी प्रदर्शन को अचानक रोकना पड़ा। परंपरा और सांस्कृतिक उत्सव के प्रति इस घोर उपेक्षा ने हजारों समर्पित दर्शकों को हतोत्साहित और निराश कर दिया, जो संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के लिए हिंदुओं के पवित्र कार्यक्रमों का उपयोग करने की परेशान करने वाली प्रवृत्ति को रेखांकित करता है। अब बहुत हो गया है!”

बता दें कि त्रिशूर पूरम उत्सव का सबसे रंगीन कार्यक्रम कुदामट्टम है। यह अनुष्ठान में 15 हाथियों की दो पंक्तियाँ आमने-सामने खड़ी रहती हैं। इस दौरान एक के बाद एक नवीन रूप से डिजाइन किए गए छतरियों को प्रदर्शित किया जाता है। यह त्योहार तिरुवंबडी और परमेक्कावु मंदिरों के बीच मैत्रीपूर्ण प्रतिद्वंद्विता और सौहार्द्र का प्रतीक है।

इस सालाना उत्सव को आमतौर पर राज्य के सभी मंदिर त्योहारों की जननी के रूप में जाना जाता है। इसमें 30 सजे-धजे हाथियों को परामेक्कावु और तिरुवम्बडी मंदिर में सदियों पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार परेड के लिए एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े किया जाता है। परेड करने वाले हाथियों को अधिकारियों की ओर से फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। 

बच्चा अगर पोर्न देखे तो अपराध नहीं भी… लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल अपराध: बाल अश्लील कंटेंट डाउनलोड के मामले में CJI चंद्रचूड़

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मद्रास हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करना और देखना POCSO अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत अपराध नहीं है। इसके साथ ही आरोपित के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द कर दिया था।

इस मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा, “बहस पूरी हो गई, फैसला सुरक्षित रखा गया।” इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक नोटिस जारी कर इस मामले में केंद्र सरकार से भी उसका पक्ष माँगा है। इस मामले में दो NGO ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा, “उसके मोबाइल पर कुछ चाइल्ड पॉर्न था..आपको कैसे पता चला कि उसके पास था।” इस पर याचिकाकर्ता ने कहा, “टिप गृह मंत्रालय से जिला पुलिस को आती है। इसे एक विदेशी संगठन द्वारा स्कैन किया जाता है, जो बाल पोर्न के ऐसे इंटरनेट डाउनलोड को ट्रैक करता है। शख्स दो साल से चाइल्ड पोर्नोग्राफी देख रहा था।”

इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “उन्होंने साइट पर वीडियो अपलोड किया था या उन्हें किसी तीसरे पक्ष ने वीडियो मुहैया कराया था? अगर उसे अपने दोस्त से मिला है तो क्या हम कह सकते हैं कि उसने वीडियो अपलोड किया है.. यह कानून का एक साफ-सुथरा सवाल है कि क्या ऐसा कृत्य POCSO के तहत अपराध हैं?”

सीजीआई चंद्रचूड़ ने कहा, “किसी को (पोर्नोग्राफी) सिर्फ अपने व्हाट्सएप इनबॉक्स पर रिसीव करना कोई अपराध नहीं है। वीडियो की प्राप्ति धारा 15 का उल्लंघन नहीं है, लेकिन यदि आप इसे देखना जारी रखते हैं और इसे शेयर करने का इरादा रखते हैं तो यह इस धारा का उल्लंघन है।”

दोनों NGO की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने तर्क दिया, “यह उसके (आरोपित के) पास है।” इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “आपको उनसे क्या करने की उम्मीद थी कि उन्हें इसे हटा देना चाहिए था? तथ्य यह है कि उन्होंने 2 साल तक इसे नहीं हटाया। यह एक अपराध है?”

बाल यौन शोषण से संबंधित कानून POCSO अधिनियम के प्रावधानों का अवलोकन करते हुए सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ ने कहा, “(पोर्नोग्राफी को) साझा करने या प्रसारित करने का इरादा होना चाहिए। यह परीक्षण का मामला है।” इसके बाद वकील फुल्का ने कनाडा के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा, “जिस क्षण आरोपित के पास आ जाता है, उसके बाद यह उसकी जिम्मेदारी हो जाती है।”

वहीं, NCPCR की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता स्वरुपमा चतुर्वेदी ने कहा, “तीन अलग-अलग खंड हैं। समस्या यह है कि वे (उच्च न्यायालय) बच्चों के इस्तेमाल के बजाय बच्चों द्वारा पोर्न देखने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो पूरी तरह से तथ्यों का गलत इस्तेमाल है।” इस पर CJI ने कहा, “हाँ, बच्चे का पोर्नोग्राफी देखना अपराध नहीं हो सकता है, लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल अपराध है।”

क्या कहा था मद्रास हाई कोर्ट ने?

दरअसल, मद्रास उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी 2024 को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और IT (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के तहत अपराध नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा था कि पॉर्नोग्राफी के लिए बच्चे का इस्तेमाल किया जाता है, तभी पॉक्सो के तहत मामला बनेगा।

केरल हाईकोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश N आनंद वेंकटेश ने कहा था कि इसमें IT एक्ट के तहत मामला तभी चलेगा, जब आरोपित ने कंटेंट बनाया हो, प्रकाशित किया हो और उसे दूसरों को भेजा हो। बता दें कि इस मामले में 28 साल के एक व्यक्ति पर चाइल्ड पॉर्न को डाउनलोड करने और उसे देखने पर पुलिस ने उस पर पॉक्सो और आईटी एक्ट लगाया था। 

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि आरोपित ने बिना किसी पर कोई प्रभाव डाले, यह सब प्राइवेट में किया। जज ने कहा कि जिस क्षण वो कंटेंट को बाँटने या सार्वजनिक रूप से दिखाने लगता, तब इन एक्ट्स के तहत धाराएँ लगाई जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने कहा था कि धूम्रपान और शराब पीने की तरह मौजूदा पीढ़ी के लिए पॉर्न देखना भी एक आदत बन गई है।

जज ने कहा था कि इसके लिए सज़ा सुनना समाधान नहीं हो सकता। ‘Gen Z’ इस गंभीर समस्या से जूझ रही है और इसके लिए उन्हें सज़ा देने की बजाए समाज को उन्हें सही सलाह, शिक्षा और काउंसिलिंग करनी चाहिए ताकि वो इस आदत से छुटकारा पाएँ। कोर्ट ने कहा था कि आजकल के किशोर गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ एक बटन टच करने पर चीजें बिना किसी सेंसर के पहुँच रही हैं।

चाइल्ड पॉर्न को लेकर कानून

भारत में चाइल्ड पॉर्नोग्राफी से जुड़े कड़े कानून हैं। चाइल्ड पॉर्नोग्राफी इंटरनेट पर सर्च करना, फोटो या वीडियो बनाना, डाउनलोड करना, उसे देखना और उसे साझा करना कानून अपराध है। ऐसे अपराध में 7 साल तक की सजा का प्रावधान और जुर्माना या दोनों है। यह POCSO ऐक्ट की धारा 14 और 15 तथा IT ऐक्ट की धारा 67B के तहत कानून जुर्म है।

POCSO Act 2012 के धारा 14 और 15 में कहा गया है कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के लिए किसी भी बच्चे का इस्तेमाल करने पर 7 साल की कैद और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, IT एक्ट की धारा 67B के अनुसार, चाइल्ड न्यूड कंटेंट रखना, ब्राउज करना, डाउनलोड करना, एडवर्टाइज करना, प्रमोट करना और शेयर करना गैरकानूनी है।

पॉक्सो ऐक्ट की धारा 15 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति चाइल्ड पॉर्नोग्राफिक से जुड़ा कोई भी मैटेरियल साझा करने, प्रकाशित करने या दिखाने के उद्देश्य से अपने पास रखता है और उसे डिलीट नहीं करता है तो उस कम-से-कम पाँच की सख्त सजा हो सकती है। यदि ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल कमर्शियल उद्देश्य के लिए किया जाता है तो 7 साल तक की सजा हो सकती है।

इतना ही नहीं, भारतीय दण्ड संहिता 1860 (IPC) की धारा 354, 354A, 354B, 354C और 376AB में बाल यौन उत्पीड़न एवं अन्य अपराधों के लिए सजा है। बाल अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019 में बाल यौन उत्पीड़न और बाल अश्लीलता अपराध है। चाइल्ड लेबर (बैन) अधिनियम 2016 में बाल श्रम के साथ-साथ बाल यौन उत्पीड़न और बाल अश्लीलता को कानून जुर्म घोषित किया गया है।

मोहम्मद जमालुद्दीन और राजीव मुखर्जी सस्पेंड, रामनवमी पर जब पश्चिम बंगाल में हो रही थी हिंसा… तब ये दोनों पुलिस अधिकारी थे लापरवाह: चला चुनाव आयोग का चाबुक

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर हुई हिंसा पर बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने मुर्शिदाबाद पुलिस के 2 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन दोनों पर शक्तिपुर और बेलदाणा इलाके में हुई हिंसा पर प्रभावी ढंग से काबू न कर पाने का आरोप है। निलंबित हुए पुलिस अधिकारियों के नाम मोहम्मद जमालुद्दीन और राजीव मुखर्जी हैं। आयोग ने यह कार्रवाई शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को की है। भाजपा ने भी इस हिंसा को प्रशासनिक लापरवाही बताया था और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की थी।

भारत निर्वाचन आयोग के सचिव राकेश कुमार ने इस कार्रवाई का पत्र 19 अप्रैल को जारी किया है। पत्र पश्चिम बंगाल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सम्बोधित है। राकेश कुमार ने इस पत्र में 17 अप्रैल 2024 को हुई हिंसा का जिक्र किया है। इस हिंसा के एक दिन बाद 18 अप्रैल को भारत निर्वाचन आयोग ने पूरे मामले की आख्या तलब की थी। इस आख्या में बताया गया था कि शक्तिपुर और बेलदाणा इलाके के थाना प्रभारी अपने इलाकों में हिंसा रोकने में नाकाम रहे। पत्र में इन दोनों थानाक्षेत्रों के इंचार्जों को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया है।

जिन 2 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है, उनके नाम राजीव मुखर्जी और मोहम्मद जलालुद्दीन हैं। दोनों सब इंस्पेक्टर रैंक के पुलिसकर्मी हैं। निलंबन की अवधि में दोनों थाना प्रभारी पुलिस मुख्यालय से अटैच रहेंगे। इन दोनों थाना प्रभारियों को उनके सीनियरों द्वारा चार्जशीट भी थमाने का निर्देश दिया गया है।

शक्तिपुर और बेलदाणा थाने में नए प्रभारियों की नियुक्ति करने के लिए 3 सक्षम अधिकारियों का पैनल बनाने के लिए कहा गया है। अपने इस आदेश पर अनुपालन के लिए पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग को 20 अप्रैल (शनिवार) सुबह 11 बजे तक का समय दिया गया है।

गाली दे कर फोन छीन रहे थे राजीव मुखर्जी

17 अप्रैल को हुई हिंसा के दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी (अब सस्पेंड) राजीव मुखर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में कई पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान हिंसा को काबू करने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कोई व्यक्ति मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड कर रहा था। सब इंस्पेक्टर राजीव मुखर्जी ने झपट्टा मार कर उस व्यक्ति के फोन को छीन लिया था। आरोप लगाया था कि इस दौरान थाना प्रभारी ने गालियाँ भी बकी थीं।

गौरतलब है कि 17 अप्रैल को रामनवमी शोभायात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के रेजीनगर इलाके में हिंसा भड़क गई थी। छतों से शोभायात्रा पर पत्थर बरसाए गए थे। हिंसा के दौरान बमबाजी भी हुई थी। पथराव की चपेट में आ कर लगभग 19 लोग घायल हो गए थे। घायलों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

भाजपा ने हिंसा का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगाया है। वहीं TMC ने हिंसा की वजह भाजपा को बता डाला था। फिलहाल पुलिस इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच कर रही है।

‘PM मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा, संविधान में बदलाव का कोई इरादा नहीं’: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- ‘सेक्युलर’ शब्द हटाने की भी जरूरत नहीं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी की गारंटी पर पूरे देश को भरोसा है। इसलिए मोदी 3.0 सरकार आ रही है। अमित शाह ने कहा कि बीजेपी 370+ और एनडीए 400+ सीटों पर प्रचंड बहुमत के साथ तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने पिछले 10 साल में देश को भ्रष्टाचार के गर्त से बाहर निकाला है। देश की सभी विपक्षी पार्टियाँ मिलकर भी पीएम मोदी के ऊपर 25 पैसे तक का भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा सकती।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि जब आजादी के 100 साल पूरे होंगे तो देश पूरी तरह विकसित और आत्मनिर्भर होगा, इस चुनाव में देश की जनता इस संकल्प को पूरा करने के लिए फिर से पीएम पर भरोसा जताएगी। पीएम मोदी की गारंटी पर देश को भरोसा है। उन्होंने कहा कि दूरबीन लेकर भी हमें एंटी इन्कमबेंसी नजर नहीं आ रही है। एनडीए इस चुनाव में 400 सीटों से ज्यादा जीतेगा।

अमित शाह ने आज तक से खास बातचीत में कहा कि पीएम मोदी जमीन से उठकर बड़े नेता बने हैं और नेता के नेतृत्व में ही पार्टी आगे बढ़ती है। नेता के पास विजन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनसंघ की स्थापना से हम यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात कर रहे हैं और इसे लागू करने का वक्त आ गया है। उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू कर दिया है। हम पूरे देश में यूसीसी लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने यूसीसी के मुद्दे को अपने संकल्प पत्र में भी रखा है। गृह मंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती है। क्या आज देश शरिया या पर्सनल लॉ के आधार पर चलेगा? उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में पर्सनल लॉ नहीं है, यहाँ तक कि मुस्लिम देशों में भी। ऐसे में जमाने के साथ ही भारत को भी आगे बढ़ना होगा।

बीजेपी संविधान को बदलने वाली है, इस सवाल पर गृह मंत्री ने कहा कि हम 10 साल से बहुमत में हैं, लेकिन हमने इसका उपयोग आर्टिकल 370 को हटाने में किया। सीएए लाने में किया। ट्रिपल तलाक हटाने में किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस दावा करती है कि बीजेपी आरक्षण खत्म कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। न हम ऐसा करेंगे, न कॉन्ग्रेस को करने देंगे। उन्होंने कहा कि संविधान से सेकुलर शब्द भी हटाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अभी हम सीएए लेकर आए हैं, ये प्रक्रिया बहुत लंबी है, लेकिन नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस पर बाद में बहस होगी। ये हमारे घोषणा पत्र में अभी शामिल नहीं है।

गृह मंत्री ने इस दौरान कहा कि पीएम मोदी ने जीएसटी लागू की, 370 खत्म की, राममंदिर का उद्घाटन हुआ, ट्रिपल तलाक खत्म हुआ, वन रैंक वन पेंशन लागू की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों ने कोरोना से देश को बचाया। हमने जो काम करेंगे, उनका जिक्र हमने संकल्प पत्र में किया है। कॉन्ग्रेस सिर्फ गरीबी हटाओ का नारा देती थी, पीएम मोदी ने देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाल लिया।

‘मस्जिद’ की चाबियाँ सरकार के पास रहेंगी: जलगाँव के पांडववाड़ा मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका, मंदिरों में हिंदुओं को जाने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को एक मामले में फैसला सुनाया कि जलगाँव के एरंडोल तालुका के एक ‘मस्जिद’ की चाबियाँ नगरपालिका परिषद के पास रहेंगी। इसके साथ ही शीर्ष न्यायालय ने यह भी साफ कर दिया कि स्थानीय परिषद सुबह नमाज शुरू होने से कुछ देर पहले गेट खोलने के लिए एक अधिकारी नियुक्त करेगी, जो नमाज होने तक इसे खुला रखेगा।

जस्टिस सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट कमेटी की दायर अपील को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कमेटी को मस्जिद की चाबियाँ 13 अप्रैल 2024 तक परिषद को सौंपने के लिए कहा था। इसके अलावा, कोर्ट ने फैसला कहा है कि अगले आदेश तक मस्जिद परिसर का नियंत्रण वक्फ बोर्ड या याचिकाकर्ता द्वारा किया जाएगा।

अपने आदेश में कोर्ट ने कहा, “पूरे परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार की चाबी नगर परिषद के पास रहेगी। मस्जिद परिसर के संबंध में यथास्थिति रहेगी और यह अगले आदेश तक वक्फ बोर्ड या याचिकाकर्ता सोसायटी के नियंत्रण में रहेगा। इसके साथ ही मंदिरों या स्मारकों का प्रवेश या निकास में किसी तरह का रोक नहीं रहेगा और सभी धर्म के लोगों को बिना किसी परेशानी के दर्शन करने की अनुमति होगी।”

मामले की पृष्ठभूमि

ऑपइंडिया ने पिछले साल जुलाई महीने में इस मामले के बारे में विस्तार से रिपोर्ट की थी। 16 जुलाई 2023 को प्रशासन ने सदियों पुरानी विवादित मस्जिद को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया था। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत एक आदेश जारी किया, जिसमें राज्य पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित परिसर में प्रार्थना पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया गया था।

कलेक्टर ने क्षेत्र में पुलिस तैनाती का भी निर्देश दिया था और स्थानीय प्रशासन को ‘विवादित मस्जिद’ का प्रभार लेने के लिए कहा था। इसके बाद विवादित मस्जिद के ढाँचे की देखभाल करने वाली जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट कमेटी ने नमाज अता करने के लिए परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के कलेक्टर के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट के औरंगाबाद बेंच में याचिका दायर की थी।

जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष अल्ताफ खान ने याचिका में दावा किया गया था कि कलेक्टर ने 11 जुलाई 2023 को ‘मनमाना और अवैध’ आदेश पारित किया था, जिसमें ट्रस्ट को विवादित ‘मस्जिद’ की चाबियाँ एरंडोल नगरपालिका परिषद के प्रमुख अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया था। तब हाई कोर्ट ने कलेक्टर के निर्देश पर स्थगन आदेश जारी कर दिया था।

पांडववाड़ा संघर्ष समिति संपत्ति की बहाली की कर रही माँग

पांडववाड़ा संघर्ष समिति के शिकायतकर्ता प्रसाद मधुसूदन दंडवते ने ऑपइंडिया को इस घटनाक्रम की पुष्टि की थी। दंडवते ने कहा था, “वहाँ करीब 4-5 मुस्लिम रोजाना नमाज पढ़ते हैं। अब उन्हें अनुमति दे दी गई है, लेकिन हिंदू समुदाय के सदस्य भी पांडववाड़ा के परिसर में जा सकते हैं, जिस पर मस्जिद ट्रस्ट ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।”

इससे पहले यह बताया गया था कि कैसे महाराष्ट्र के जलगाँव जिले के एरंडोल क्षेत्र में पांडववाड़ा को एक मस्जिद में बदल दिया गया था। यह कहानी तब शुरू हुई, जब दंडवते ने जिला प्रशासन से शिकायत की कि मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से एक हिंदू पूजास्थल पर किया गया है और इसे अधिकारियों द्वारा अपने कब्जे में ले लिया जाना चाहिए।

मस्जिद ट्रस्ट ने किया अवैध निर्माण

पांडववाड़ा संघर्ष समिति की शिकायत के अनुसार, ट्रस्ट ने परिसर पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और 800-1000 साल पुराने पांडववाड़ा में कई बदलाव किए हैं, जो आज राज्य पुरातत्व विभाग के तहत संरक्षित है। ट्रस्ट ने पांडववाड़ा में बिजली, पंखे, सीमेंट के दरवाजे और पानी के कनेक्शन लगाए।

दंडवते ने कहा, “मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए नमाज से पहले हाथ धोने के लिए वुज़ुखाना का अवैध निर्माण किया है। उन्हें यह अनुमति किसने दी?” उन्होंने कहा था कि पांडववाड़ा के आसपास के हिंदू प्रतीक और संरचना को जुम्मा मस्जिद ट्रस्ट द्वारा नष्ट कर दिया गया है। इसी ट्रस्ट ने यहाँ पर अवैध रूप से अतिक्रमण करके यहाँ मस्जिद का ढाँचा तैयार किया है।

संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन और अदालत से इस निर्माण के खिलाफ शिकायत की थी और माँग की है कि पांडववाड़ा में किए गए सभी अवैध निर्माण और लगाए गए अतिरिक्त चीजों को हटाई जाए। समिति ने संपत्ति को प्राधिकरण द्वारा अपने कब्जे में लेने और इसकी आयु निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक मूल्यांकन की भी माँग की है।

क्या है पांडववाड़ा?

जलगाँव जिले के एरंडोल क्षेत्र में स्थित पांडववाड़ा को लेकर कहा जाता है कि पांडवों ने अपने निर्वासन के कुछ साल यहाँ एरंडोल क्षेत्र में बिताए थे। यहाँ बनीं हिंदू और जैन मंदिर जैसी संरचनाएँ 800-1000 साल पुरानी हैं। हिंदुओं की गंभीर उदासीनता के कारण 125 साल पहले मुस्लिमों ने धीरे-धीरे यहाँ अतिक्रमण करना शुरू कर दिया और इसे वक्फ संपत्ति बताकर एक मस्जिद बनवा दिया।

हिंदू जनजागृति समिति (एचजेएस) और पांडववाड़ा संघर्ष समिति जैसे हिंदू समूह पांडववाड़ा को वक्फ बोर्ड की घुसपैठ से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विवादित मस्जिद के अस्तित्व के कम से कम 100 साल पुराने रिकॉर्ड हैं, जबकि पांडववाड़ा (जैन और हिंदू मंदिरों की शैली में निर्मित) की प्रमुख इमारतें 800 से 1000 साल पुरानी हैं।

हिंदू संगठनों का कहना है कि मस्जिद का निर्माण एक हिंदू मंदिर को नष्ट करके किया गया है। इस मंदिर का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में भी है। इसके अलावा, वक्फ समिति स्थानीय लोक कथाओं और ग्रंथों में वर्णित पांडववाड़ा की हिंदू संस्कृति को बर्बाद करने के लिए विवादित मस्जिद का निर्माण करने के लिए काम कर रही थी।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)

लोकसभा चुनाव 2024: पहले चरण में 60+ प्रतिशत मतदान, हिंसा के बीच सबसे अधिक 77.57% बंगाल में वोटिंग, 1625 प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद

लोकसभा चुनाव 2024 में पहले चरण का मतदान पूरा हो गया है। देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों औसतन 60.03 प्रतिशत मतदान हुआ है। पहले चरण में कुल 102 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें शाम 5 बजे तक 59.7 प्रतिशत औसत मतदान हुआ था। दोपहर 3 बजे तक ये आँकड़ा 49.9 प्रतिशत का था।

राज्यों के हिसाब से मतदान का प्रतिशत

चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण के मतदान में राज्यों के हिसाब से 102 सीटों पर शाम 7 बजे तक कुल 60.03% मतदान हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश में 57.61 प्रतिशत, उत्तराखंड में 53.64 प्रतिशत, बिहार में 47.49 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 63.41 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 65.08 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 63.33 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 55.29 प्रतिशत, मणिपुर में 68.62 प्रतिशत, मेघालय में 70.26 प्रतिशत, मिजोरम में 54.18 प्रतिशत, नगालैंड में 56.77 प्रतिशत, अंडमान निकोबार में 56.87 प्रतिशत, अरुणाचल प्रदेश में 65.46 प्रतिशत, असम में 71.38 प्रतिशत, लक्षद्वीप में 59.02 प्रतिशत, पुडुचेरी में 73.25 प्रतिसत, राजस्थान में 50.95 प्रतिशत, सिक्किम में 68.06 प्रतिशत, तमिलनाडु में 62.19 प्रतिशत, त्रिपुरा में 79.90 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 77.57 प्रतिशत मतदान हुआ है।

21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदान समाप्त

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों, अरुणाचल प्रदेश की 2, असम की 14, बिहार की चार, छत्तीसगढ़ की 11, मध्य प्रदेश छह सीट, महाराष्ट्र की पाँच, मणिपुर की दो सीट, मेघालय की सभी दो सीट, मिजोरम की एक, सिक्किम की एक, नगालैंड की एक, राजस्थान की 12, तमिलनाडु की सभी 39, त्रिपुरा की एक सीट, लक्षद्वीप की इकलौती, पुडुचेरी की इकलौती सीट, उत्तराखंड की सभी पाँच, पश्चिम बंगाल की तीन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की इकलौती सीट और जम्मू-कश्मीर की एक लोकसभा सीट पर मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई।

बता दें कि लोकसभा चुनाव के पहले दौर में कुल 1625 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला हो चुका है और ये ईवीएम में कैद हो चुका है। इन उम्मीदवारों में 1491 पुरुष और 134 महिला उम्मीदवार हैं। पहले चरण के लिए 8 केंद्रीय मंत्रियों, 2 पूर्व सीएम और एक पूर्व राज्यपाल की किस्मत भी ईवीएम में कैद हो चुकी है। इस चरण के प्रमुख उम्मीदवारों में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, सर्बानंद सोनोवाल और भूपेन्द्र यादव, कांग्रेस के गौरव गोगोई, और द्रमुक की कनिमोई शामिल हैं। पिछले चुनाव में यूपीए ने इन 102 सीटों में से 45 और एनडीए ने 41 सीटें जीती थीं। लोकसभा चुनाव के पहले फेज के साथ ही अरुणाचल प्रदेश की 60 विधानसभा सीटों और सिक्किम की 32 सीटों पर भी मतदान कराया गया है।

सात चरण में हो रहा लोकसभा चुनाव

गौरतलब है कि 19 अप्रैल को लोकसभा की 102 सीटों पर मतदान हो चुका है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, लोकसभा चुनाव सात चरण में होंगे। दूसरे चरण के तहत 26 अप्रैल को 89, तीसरे चरण के तहत 7 मई को 94, चौथे चरण के तहत 13 मई को 96, पाँचवें चरण के तहत 20 मई को 49, छठे चरण के तहत 25 मई को 57 और सातवें चरण के तहत 1 जून को लोकसभा की 57 सीटों पर मतदान होगा। नतीजों की घोषणा 4 जून को होगी।

‘जानबूझकर हिंदुओं को किया टारगेट’: भगवान शिव पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले ओवैस खान को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत

सोशल मीडिया पर भगवान शिव का अपमान करने वाला आरोपित ओवैस खान इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँच गया। उसे कोर्ट से अपील की कि उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला खारिज किया जाए, लेकिन 19 अप्रैल 2024 को मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे कोई राहत देने से इनकार कर दिया और कहा कि उसने ‘जान बूझकर धार्मिक अपमान किया’, इसलिए उसे कोई राहत नहीं जा सकती।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच ने विविध समुदायों की धार्मिक मान्यताओं की गरिमा को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “न्यायपालिका द्वारा यह स्पष्ट संदेश भेजना अनिवार्य है कि इस तरह के आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसा करने वालों को उचित कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।”

हाई कोर्ट ने कहा कि धार्मिक विश्वास सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति दूसरे धर्म को अपमानित करता है, तो ये धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता का “गंभीर अपमान” है। कोर्ट ने कहा कि आरोपित ओवैस खान ने ‘धार्मिक मान्यताओं’ की उपेक्षा की, जो हमारे बहुधर्मी समाज के हिसाब से गलत है। इसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा, “अपमानजनक बयान पोस्ट करके आवेदक का आचरण न केवल प्रभावित समुदाय की धार्मिक भावनाओं का अपमान है, बल्कि हमारे लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों को भी कमजोर करता है। एक समुदाय की मान्यताओं का मज़ाक उड़ाकर और उनकी तुलना सांसारिक वस्तुओं से करके, आरोपी ने लाखों लोगों की गहरी आस्थाओं और भावनाओं को अनदेखा किया।”

बता दें कि ओवैस खान ने सोशल मीडिया पर हिंदू समाज, भगवान शिव का मजाक उड़ाया था और अपमान जनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। उसने सड़क के डिवाइडर की तुलना शिवलिंग से की थी और हिंदुओं का मजाक उड़ाया था। इस मामले में उसके खिलाफ 2 सितंबर 2022 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। 13 जनवरी 2023 को उसे ट्रायल कोर्ट ने समन भेजा था, जिसके बाद उसने हाई कोर्ट में अपील की थी और अपने खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने की अपील की थी। उसके वकील ने बहाना बनाया और कहा कि उसका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था, ऐसे में किसी अन्य ने वो आपत्तिजनक पोस्ट किए। यही नहीं, उसकी तरफ से दलील दिया गया कि वो पोस्ट किसी की धार्मिक भावनाओं को नुकसान नहीं पहुँचाते।

इस मामले में कोर्ट ने कहा कि ओवैस खान द्वारा जानबूझकर शिवलिंग की अपमानजनक तस्वीर प्रकाशित करना और अपमानजनक भाषा के लहजे से पता चलता है कि उसका उद्देश्य एक विशिष्ट समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना था। कोर्ट ने कहा, “इस तरह की कार्रवाइयों को केवल राय की अभिव्यक्ति के रूप में माफ नहीं किया जा सकता है, बल्कि उन्हें इस रूप में पहचाना जाना चाहिए कि वे क्या हैं।” इस मामले में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए, 295-ए और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम की धारा 6 के तहत केस दर्ज किया गया है।

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सिगरेट से दागा और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाए: YouTuber रोहित का आरोप- PM मोदी की तारीफ में गाने बनाए, इसलिए मुस्लिमों ने पीटा; पुलिस बोली- जाँच करेंगे

कर्नाटक के मैसूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर रोहित को कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों ने बुरी तरह से पीटा है। इतना ही नहीं, उसके ऊपर बीयर डाला गया और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया। युवक का आरोप है कि उसके साथ ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उसने पीएम मोदी की तारीफ में एक वीडियो बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित मैसूर के मेल्लाहल्ली गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में एक गाना कंपोज किया था। इस गाने को उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउस के पास एक युवक को दिखाया। इस दौरान कुछ लोगों ने गाने पर आपत्ति जताई और फिर उनकी पिटाई कर दी। उनके ऊपर बीयर डालने की बात भी कही जा रही है।

रोहित का कहना है कि जिन लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उन्होंने उनसे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद‘ और ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाने के लिए भी मजबूर किया। इस घटना के दौरान नजराबाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने इस घटना की जाँच की बात कही है।

रोहित का कहना है, “मैंने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में एक गाना जारी किया था। मैं अपने चैनल का लिंक साझा कर रहा था और सभी को इसे सब्सक्राइब करने के लिए कह रहा था। इसी दौरान एक लड़का सरकारी गेस्ट हाउस के पास से निकला। मुझे नहीं पता था कि वह मुस्लिम है। मैंने उनसे गाना देखने, इसे शेयर करने और चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए कहा।”

रोहित ने आगे बताया, “उन्होंने इसे देखा और कहा कि यह अच्छा है। उन्होंने मुझसे कहा कि वह मुझे अपने दोस्तों से मिलवाने के लिए अंदर ले जाएगा, ताकि इसे साझा किया जा सके। जैसे ही मैं कमरे में दाखिल हुआ, उसी दौरान एक लड़के ने मेरा मुँह बंद कर दिया और पीछे से हाथ पकड़ लिए।”

अपने आरोपों में रोहित ने आगे बताया, “उन्होंने पीएम मोदी पर गाना बनाने के लिए मुझे गालियाँ देनी शुरू कर दीं। उसके मुझसे पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने को कहा। उन्होंने मेरे हाथ से भगवान राम की फोटो छीनकर उसके साथ अभद्रता भी की। इसके बाद मेरे सिर पर बीयर डाल दी और सिगरेट से मेरे हाथ जलाए। उन्होंने मुझे पीटा भी।”

मैसुरु के पुलिस कमिश्नर रमेश ने कहा, “शख्स ने केवल दावे किए हैं। हम इनकी पुष्टि करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकारी गेस्ट हाउस में CCTV कैमरे लगे हैं। उन CCTV कैमरों के फुटेज की जाँच की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जाँच के बाद आगे की जानकारी साझा की जाएगी।”

कौन थी वो राष्ट्रभक्त तिकड़ी, जो अंग्रेज कलक्टर ‘पंडित जैक्सन’ का वध कर फाँसी पर झूल गई: नासिक का वो केस, जिसने सावरकर भाइयों को पहुँचाया कालापानी

तारीख : 21 दिसंबर 1909, जगह : विजयानंद थिएटर, नासिक। शाम का समय और संगीत शारदा मंडली द्वारा नाटक का मंचन। इस नाटक का मंचन किया जा रहा था नासिक के कलेक्टर अर्थर मेसन टिप्पेट्स जैक्सन (ए.एम.टी. जैक्सन) को विदाई देने के लिए। इस नाटक के मंचन के दौरान ही अनंत लक्ष्मण कन्हेरे ने नासिक के कलेक्टर ए.एम.टी. जैक्सन के सीने में 4 गोलियाँ उतार दी। अनंत लक्ष्मण कन्हेरे के साथ ही बैकअप के तौर पर कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे भी थे। अगर अनंत जैक्सन को नहीं मार पाते, तो ये काम कृष्णजी गोपाल कर्वे करते और वो भी चूक जाते तो विनायक नारायण देशपांडे। हालाँकि अनंत लक्ष्मण कन्हेरे चूके नहीं।

इस बात का जिक्र अब क्यों?

अनंत लक्ष्मण कन्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे को आज ही की तारीख यानी 19 अप्रैल 1910 को फाँसी पर लटका दिया गया था। इन तीनों ही क्रांतिकारियों की उम्र उस समय 18 से 20 वर्ष के बीच थी। इन तीनों को कितने लोग जानते हैं? महाराष्ट्र में जरूर अनंत लक्ष्मण कन्हेरे के बारे में लोगों को जानकारी है, लेकिन पूरे भारत में? इसीलिए उपरोक्त जानकारी दी गई। आज (19 अप्रैल) को तीनों हुतात्माओं का बलिदान दिवस है। इन तीनों हुतात्माओं के शरीर को उनके परिजनों को देने की जगह जेल में ही जला दिया गया और अवशेषों (अस्थियों) थाणे के पास में ही समंदर में फेंक दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि विद्रोह की ज्वाला भड़कने की जगह विद्रोहियों की मन में अंग्रेजी हुकूमत का खौफ कायम रहे।

ये पूरा मामला नासिक षड्यंत्र केस के नाम से जाना जाता है। इस केस में कुल अभिनव भारत सोसायटी के 27 सदस्यों को सजा सुनाई गई, जिसमें कई लोगों को कालेपानी की सजा भी शामिल है। इसी केस को आधार बनाकर वीर सावरकर को अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर बनाए गए सेल्यूलर जेल में कालेपानी की सजा के लिए भेजा गया था। इसी मामले में वीर सावरकर के बड़े भाई गणेश सावरकर को भी कालेपानी की सजा हुई थी। यही नहीं, इस केस में शंकर रामचंद्र सोमण, वामन उर्फ दाजी नरायण और गणेश बालाजीवैद्य को भी कालेपानी की सजा हुई।

अभिनव भारत का क्या था रोल?

अभिनव भारत सोसायटी की स्थापना वीर सावरकर और उनके भाई गणेश सावरकर ने नासिक में मित्र मेला के रूप में साल 1899 में की थी। तब वीर सावरकर खुद छात्र थे। साल 1904 में मित्र मेला का नाम बदलकर अभिनव भारत कर दिया गया था। वीर सावरकार साल 1906 में लंदन चले गए और एक ब्रांच वहाँ भी खुली। वीर सावरकर ने लंदन से 20 पिस्टल भेजे थे, उन्हीं में से एक पिस्टल का इस्तेमाल अनंत लक्ष्मण कन्हेरे ने नासिक के कलेक्टर ए.एम.टी. जैक्सन का वध करने के लिए किया था।

कौन था ए.एम.टी. जैक्सन? क्यों क्रांतिकारियों ने किया वध?

ए.एम.टी. जैक्सन का वध जब हुआ, तब उसकी उम्र 47 वर्ष थी। वो संस्कृत और मराठी का भी जानकार था। उसे पंडित जैक्सन भी कहा जाने लगा था, क्योंकि वो दावा करता था कि वो पिछले जन्म में हिंदू संत था और इस जन्म में वो क्रिश्चियन है। वो सनातन परंपरा के खिलाफ षड्यंत्र कारी बातें करता था और लोगों के बीच आराम से घुलमिल जाता था। उसे स्थानीय स्तर पर पसंद भी किया जाता था, क्योंकि उसने स्वयं को कुछ इस तरह से पेश किया था कि वो लोगों का उद्धार कर रहा है। उसकी जहरीली नीतियों की वजह से अभिनव भारत सोसायटी से जुड़े क्रांतिकारियों ने उसके वध की योजना बनाई थी।

इन तीनों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ युद्ध को अंजाम दिया। उन्होंने सनातन को बचाने के लिए भी ये कदम उठाया, क्योंकि उस समय जैक्सन भारी मात्रा में नासिक में धर्मांतरण कर रहा था। उसका कोई विरोध नहीं करता था। उसे इन कामों के लिए प्रमोशन मिला और उसे बॉम्बे का कमिश्नर बनाया गया था। उसने गणेश सावरकर की गिरफ्तारी के बाद उन्हें कालेपानी की सजा दिलवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी, इसलिए भी क्रांतिकारियों के निशाने पर था। इन क्रांतिकारियों ने जैक्सन को मारने के बाद जहर खाकर या खुद को गोली मारकर खत्म करने का फैसला भी किया था, लेकिन इस हमले के बाद वो तुरंत पकड़ लिए गए और स्वयं को खत्म करने का मौका नहीं मिल पाया।

खैर, अनंत लक्ष्मण कन्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे को जितना सम्मान मिलना चाहिए था, वो तो नहीं मिला। क्यों नहीं मिला? क्योंकि इससे कम्युनिष्टों और कॉन्ग्रेसियों को दिक्कत हो जाती। महज 18-20 साल के इन बलिदानियों ने जो योगदान दिया, वो बाकियों पर भारी पड़ जाती। अब जब नरेंद्र मोदी सरकार ने आजादी के 75 वर्ष के मौके पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया है, तो ऐसे भूल-बिसार दिए गए अनन्य बलिदानियों की कथा भी सामने आ रही है। इन शहीदों को शत् शत् नमन