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आधी-अधूरी इमारतें, बैंको का डूबता पैसा, सीमा पर फँसते ट्रक: मोदी सरकार ने GST-RERA जैसे सुधारों से बदल दी तस्वीरें

1991 में भारत बदलना चालू हुआ। खराब आर्थिक स्थिति की वजह भारत को अपना बाजार विश्व के लिए खोलना पड़ा। इन्हें आर्थिक सुधार कहा गया। आर्थिक सुधार की गति को देख कर कहा गया, “आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया को कभी भी वापस बदला नहीं जा सकता” (The process of economic reforms is irreversible)। सुधारों की भी अपनी गति और साथ ही दुर्गति होती है। ऐसा ही हुआ। पीवी नरसिंह राव के समय में शुरू हुआ बदलाव का यह रथ 2014 तक आते-आते लगभग रुक गया।

देश में कई मोर्चों पर गड़बड़ियाँ होना चालू हुई। आर्थिक तरक्की के साथ ही गड़बड़ियाँ भी चालू हुईं। देश के बड़े शहरों में ऊँची ऊँची बिल्डिंग बनना चालू हुई, इनमें से बड़ी संख्या मात्र ढाँचा बन कर रह गईं, इनके लिए पैसा देने वाले लोग सड़कों पर आ गए।

बैंकों से कर्जा लेकर भाग जाने और ना लौटाने के कारण उनकी हालत खराब हो गई। देश का कर ढाँचा बिगड़ गया। हर राज्य में अलग-अलग तरह के टैक्स आ गए, इससे आम आदमी टैक्स के जाल में फंस गया। आर्थिक तरक्की की रफ़्तार को जारी रखने के लिए बाहर की कम्पनियों को प्रोत्साहन देने वाली कोई भी योजनाएँ नहीं लाईं गईं।

इस मकड़जाल के चलते देश की रफ़्तार धीमी पड़ने लगी। आर्थिक ढाँचा चरमराने लगा और भारत को विश्व की पाँच सबसे पस्त हालत अर्थव्यवस्थाओं में गिना गया। 2014 में देश में कॉन्ग्रेस की सत्ता पलट गई। भ्रष्टाचार विरोधी लहर और अपनी पॉपुलैरिटी की लहर पर सवार होकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पूर्ण बहुमत वाली सरकार में प्रधानमंत्री बने।

मोदी सरकार के 10 वर्ष लगभग पूरे हो चुके हैं, देश में आम चुनावों का माहौल है। राजनीतिक दल अपने अपने हिसाब से अपना प्रचार कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस कुछ नई योजनाओं के आठ इस रण में उतरी है जिनमे वामपंथ की साफ़ छाप दिखती है, भाजपा अपने काम गिना रही है। आर्थिक सुधार के मोर्चे पर देखा जाए तो मोदी सरकार ने कई बदलाव देश में किए हैं।

GST: मकड़जाल जाल खत्म, एक देश एक टैक्स

मोदी सरकार के सबसे बड़े बदलावों में सबसे ऊपर वस्तु एवं सेवा कर (GST) का ही नाम रखा जाना चाहिए। देश की आजादी के लगभग 55 वर्ष बाद लाया गया यह कानून देश में टैक्स के मकडजाल को सुलझा रहा है। GST से पहले देश में केन्द्र स्तर पर केन्द्रीय बिक्री कर, एक्साइज ड्यूटी, सेवा कर और अन्य कई कर लगाए जाते थे, राज्यस्तर पर भी मनोरंजन कर, लॉटरी, और लग्जरी कर जैसे टैक्स लगते थे। इनके अपने अलग अलग विभाग थे। यदि किसी वस्तु पर एक से अधिक टैक्स लगता तो करदाता को उन विभागों के चक्कर काटने होते।

GST से पहले माल की आवाजाही भी बड़ी समस्या थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, GST लाए जाने से पहले माल लाने ले जाने वाला एक ट्रक अपना 20% समय मात्र राज्यों के चेकपॉइंट पर ही बिता देता था। टैक्स चुकाना भी एक समस्या थी क्योंकि या भी बड़े पैमाने पर ऑफलाइन तरीके से होता था। GST से यह तस्वीर बदली है।

1 जुलाई 2017 को लाए गए GST में 17 अलग-अलग तरह के करों को समाहित कर दिया गया। GST के लिए एक एकीकृत पोर्टल भी लाया गया। यहाँ आसानी ने GST जमा किया जा सकता था। GST के कारण सरकार को भी बम्पर कमाई होना चालू हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार को ₹20.18 लाख करोड़ की कमाई हुई। इसकी तुलना अगर GST से पहले के समय से की जाए तो यह 2016-17 के दौरान मात्र ₹3.19 लाख करोड़ था। यानी GST के बाद इसमें लगभग 6 गुने की वृद्धि हुई है।

सरकारी बैंकों का एकीकरण

मोदी सरकार जब सत्ता में आई थी तब देश के सरकारी बैंक बुरी हालत में थे। अधिकांश बैंकों को हर वर्ष केंद्र सरकार से पैसा लेकर काम चलाना पड़ता था। बैंकों द्वारा दिए गए कर्जे का बड़ा हिस्सा NPA हो गया था। सरकारी बैंकों की संख्या बड़ी होने के कारण इनका प्रबन्धन भी मुश्किल हो रहा था और अलग अलग जगह पूँजी होने के कारण यह एक बड़ा निर्णय भी नहीं ले पाते थे। मोदी सरकार ने इन्हें एकीकृत करने का निर्णय लिया। मोदी सरकार ने योजना बनाई कि यदि देश में कुछ ही बड़े बैंक हों तो उनका प्रशासन और नियमन आसान होगा।

मोदी सरकार ने देश के 27 सरकारी बैंकों को कम करके 12 करने की योजना चालू की। यह संख्या वर्तमान में 12 है, इसका सबसे आखिरी चरण 2020 में पूरा हुआ था। सरकार की योजना है कि इन्हें अब केवल 4 पर ही लाया जाए। सरकार इन सभी बैंकों को विश्व स्तरीय बैंक बनाना चाहती है। बैंकों में सुधार का परिणाम है कि बीते दो वर्षों के बजट में केंद्र सरकार को इन्हें चलाने के लिए नई पूँजी नहीं देनी पड़ी है। बैंकों का NPA भी कम हो कर 3% हो चुका है। यह 2018 में 11% से ऊपर था।

RERA- घर का सपना पूरा

मोदी सरकार द्वारा किए गए बड़े आर्थिक सुधार में से एक RERA भी है। रियल एस्टेट क्षेत्र में स्पष्ट नियमन लाने वाला यह क़ानून लाखों भारतीयों को घर दिलाने में सफल रहा है। RERA कानून के पहले बिल्डरों की बेईमानियाँ चरम पर थी।

बड़े प्रोजेक्ट्स में अपना फ्लैट खरीदने वाले लोग जीवन भर की कमाई उन बिल्डर को देते थे, कभी कभार घर मिल जाता था। कई मामलों में बिल्डर या तो दिवालिया हो जाता था, मकान देने की तारीख आगे बढ़ाता था या फिर जानबूझ कर उनका पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगाता था। इससे शहरों में आधे तैयार ढांचों की तस्वीरों से अखबार पटा रहता था।

2016 में मोदी सरकार द्वारा पास किया गया RERA कानून इन सभी गडबडियों पर रोक लगाता है। RERA के अंतर्गत मकान खरीदने वाले लोगों से मिला 70% पैसा बिल्डर को अलग खाते में रखना होता है। किसी मकान की लंबाई चौड़ाई क्या होगी, इसका निर्धारण भी अब सामान्य तरीके से होता है। यह पहले अलग अलग बिल्डर के आधार पर होता था। यह भी नियम लाया गया है कि बिल्डर किसी भी ग्राहक से 10% से अधिक राशि पहले ही नहीं माँग सकता। ऐसे में इस क्षेत्र में पारदर्शिता आई है और लोगों को अपना घर भी समय से मिल रहा है।

PLI योजना: ताकि विश्व भारत में बनाए

देश में आर्थिक सुधार के अलावा मोदी सरकार ने यह भी प्रयास किया है कि भारत में ज्यादा से ज्यादा निर्माण हो और साथ विदेशी निवेश भी आए। मोदी सरकार ने देश में निर्माण करने वाली कम्पनियों को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के जरिए बढ़ाने की योजना तैयार की है। वह उत्पाद, जो भारत में नहीं बनते, उनके क्षेत्र में निर्माण पर मोदी सरकार इन कम्पनियों को 4-6% की सब्सिडी दे रही है। इस PLI का असर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के क्षेत्र में देखने को मिला है।

वर्तमान में देश में उपयोग होने वाले लगभग 97% स्मार्टफ़ोन भारत में ही बन रहे हैं। एप्पल जैसी बड़ी कम्पनी भी भारत में आकर अब आईफोन बना रही है और विश्व में भी पहुँचा रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में बिकने वाला हर सातवाँ आइफोन अब भारत में बना हुआ है। एप्पल ने 14 बिलियन डॉलर (₹1.1 लाख करोड़ से अधिक) के आइफोन भारत में वर्ष 2023-24 में बनाए। भारत का 2023-24 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी 20 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.7 लाख करोड़) पार होने वाला है।

इसके अलावा भी कई मूलभूत सुधार हैं जो कि मोदी सरकार ने किए हैं। यह सुधार आर्थिक तरक्की में तेजी लाने में काफी सहायक रहे हैं।

‘कवासी लखमा जीतोड़ (जीतेगा), नरेंद्र मोदी ढोलतोर (मरेगा)’: कॉन्ग्रेस उम्मीदवार ने PM के लिए दिखाई घृणा, BJP बोली- ये छत्तीसगढ़ के राहुल गाँधी

लोकसभा चुनाव 2024 में पहले चरण का मतदान अभी हुआ नहीं है, लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं की बयानबाजियाँ दिन-प्रतिदिन निचले स्तर को छू रही हैं। छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस के नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत पीएम मोदी का गला घोंटने की बात कही, तो अब बस्तर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कवासी लखमा ‘नरेंद्र मोदी मरेगा’ कह रहे हैं। उनके इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बस्तर लोकसभा सीट से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कवासी लखमा ग्रामीणों को गोंडी बोली में संबोधित कर रहे हैं, जिसमें वो कहते दिख रहे हैं, “कवासी लखमा जीतोड़, नरेंद्र मोदी ढोलतोर” यानी कवासी लखमा जीतेगा और नरेंद्र मोदी मरेगा, खेल खत्म, राम-राम।

कवासी लखमा के इस वीडियो को शेयर करते हुए नरायनपुर के बीजेपी विधायक और छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री केदार कश्यप ने जोरदार हमला बोला, उन्होंने एक्स पर लिखा, “‘छत्तीसगढ़ का राहुल गाँधी उर्फ कवासी लखमा’ कॉन्ग्रेस पार्टी में नेता नहीं नमूने भरे पड़े हैं। मोदी जी के उपर कॉन्ग्रेसियों का प्रहार करना और जनता का मोदी जी पर सत्कार करना बढ़ता रहेगा। कॉन्ग्रेसियों को समझ आ गया है कि कॉन्ग्रेस पार्टी मरणासन्न अवस्था पर है। 4 जून को कॉन्ग्रेस पार्टी का अंतिम संस्कार किया जाएगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित, कवासी लखमा चुनाव प्रचार के लिए बीजापुर जिले के कुटरू गए थे। दिनभर प्रचार के बाद वे शाम को जिला मुख्यालय लौट रहे थे। इसी बीच नैमेड गाँव में उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत करने चौपाल लगाई थी। इसी दौरान उन्होंने हल्के फुल्के अंदाज में कहा ‘कवासी लखमा जीतोड़, नरेंद्र मोदी ढोलतोर, खेल खत्म राम-राम।’ ये वीडियो दो दिन पुराना बताया जा रहा है।

कवासी लखमा पहले भी अपने बयान को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। कवासी लखमा का एक और वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें वे कुटरू में ही ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहते दिख रहे थे कि, टीन खदान से पुलिस को तीर-धनुष मारकर भगाओ।

संदेशखाली यौन उत्पीड़न की जाँच करेगी CBI, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश; खुद करेगी निगरानी: कहा- 15 दिन में इलाके में लगे CCTV-स्ट्रीट लाइट

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली मामले की जाँच अपनी निगरानी में CBI से करवाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, टीएमसी के पूर्व नेता शाहजहाँ शेख पर संदेशखाली की महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने, जमीन कब्जाने और जबरन वसूली जैसे कई आरोप हैं। इस मामले में छीछालेदर होने के बाद बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ शेख, शिबू हाजरा और उत्तम सरदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 

दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस शिवज्ञानम और जस्टिस हिरण्मय भट्टाचार्य की बेंच ने संदेशखाली की घटना से जुड़ी 5 जनहित याचिकाओं पर बुधवार (10 अप्रैल 2024) को सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने कहा कि कोर्ट की निगरानी में मामले की CBI जाँच होगी। CBI अपनी जाँच रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपेगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई 2024 को होगी।

संदेशखाली मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर वकील आलोक श्रीवास्तव ने कहा, “कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा आज एक ऐतिहासिक आदेश दिया गया है। संदेशखाली यौन उत्पीड़न, बलात्कार और अन्य मामलों में हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जाँच के लिए एक आदेश अभी सुनाया गया है।”

वकील ने आगे कहा, “जमीन हड़पने के मामले और ईडी पर हमले के मामले में पहले से ही सीबीआई जाँच चल रही है। हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को सीबीआई अधिकारियों और संदेशखाली के पीड़ितों को पर्याप्त सुविधाएँ और सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो को मछली पालन के लिए कृषि भूमि के अवैध रूपांतरण पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। जाँच एजेंसी एक पोर्टल भी लेकर आई है, जहाँ लोग अपनी शिकायत या बयान दर्ज करा सकते हैं। सभी गवाहों को सुरक्षा देने की बात भी कही गई है।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि 15 दिनों के अंदर संदेशखाली के इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाये जाने चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि जरूरत के हिसाब से वहाँ एलईडी आदि लगाए जाने चाहिए। इन सबका खर्च बंगाल सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस पूरे मामले की निगरानी करेगा।

वकील ने श्रीवास्तव ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर करने जा रहा हूँ, क्योंकि मुझे यकीन है कि पश्चिम बंगाल सरकार इस आदेश को चुनौती दे सकती है जैसा कि उसने ईडी पर हमले के मामले में किया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी चुनौती वाली याचिका को खारिज कर दिया था।”

हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार CBI जाँच पर रोक नहीं लगा पाएगी। दरअसल, राज्य से जुड़े किसी भी मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI द्वारा जाँच के लिए राज्य सरकार से अनुमति लेनी होती है। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इसकी जरूरत नहीं होगी।

रिहाना के ‘सेक्सी नन’ लुक से भड़के ईसाई, कहा- हिजाब में ये करके दिखाओ: इस्लामी आयतों के इस्तेमाल पर माँग चुकी हैं माफी

हॉलीवुड की मशहूर सिंगर रिहाना के एक फोटोशूट पर बवाल हो गया है। इस शूट में रिहाना ‘सेक्सी नन’ का लुक रखकर अपनी बॉडी रिवील कर रही हैं। देखा जा सकता है कि वो अपने हाथ से शर्ट नीचे करके क्लीवेज दिखा रही हैं, और अपनी ब्रेस्ट दबा रही हैं।

तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद ईसाई लोग इस पर आपत्ति जता रहे हैं। सिंगर से पूछा जा रहा है कि आखिर उन्होंने ऐसी घिनौनी हरकत अपने मजहब को लेकर क्यों नहीं की? ईसाइयों की भावनाओं को क्यों ठेंस पहुँचाया?

रिहाना द्वारा शेयर वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रिया देखें तो ईसाइयों की नाराजगी साफ देखने को मिलेगी। यूजर्स बोल रहे हैं कि जितना अपमान रिहाना ने नन की ड्रेस पहनकर ईसाई धर्म का किया है, ऐसा वो हिजाब पहनकर इस्लाम के साथ नहीं कर सकतीं। यूजर्स के मुताबिक रिहाना अच्छे से जानती हैं कि अगर उन्होंने ऐसा कुछ किया तो उनका हाल क्या होगा।

बता दें कि ईसाई यूजर्स का हिजाब और इस्लाम को लेकर ऐसा कहना इसलिए है क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी पहले भी रिहाना को ट्रोल कर चुके हैं। ज्यादा पुरानी बात नहीं है, साल 2020 में रिहाना को एक गलती के लिए दुनिया भर के इस्लामवादियों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। सिंगर को माहौल देखकर अंजाम पता था शायद इसलिए उन्होंने बिन देर किए अपनी गलती पर माफी भी माँग ली थी।

दरअसल, उस समय एक लॉन्जरी फैशन शो के दौरान रिहाना के साथ जो गाना चलवाया गया था उसमें इस्लामिक आयतों का प्रयोग था। बाद में इसे जानने के बाद जगह-जगह से मुस्लिमों ने इसका विरोध किया था। बात इतनी बढ़ गई थी कि रिहाना ने मुस्लिम समाज से माफी माँगी थी। रिहाना ने कहा था कि उन्हें इस गाने के बारे में जानकारी नहीं थी। बस ये ऑनलाइन मिला तो उन्होंने इसका इस्तेमाल कर लिया।

मालूम हो कि एक ओर जहाँ इस्लामवादियों से रिहाना माफी माँगने के लिए फ्रंट पर रहती हैं, मस्जिद जाना होता है तो शरीर का हर अंग ढकते हुए हिजाब पहनती हैं, वही रिहाना जब बात दूसरे धर्मों के सम्मान की होती हैं, तो उनके पैर खुद पीछे हो जाते हैं। उन्होंने सिर्फ ईसाई धर्म का अपमान नहीं किया है, 2021 में रिहाना टॉपलेस होकर गले में भगवान गणेश का लॉकेट पहनकर सामने आई थीं, हिंदुओं ने इस पर खूब आपत्ति जताई थी, मगर उन्होंने अपने किए की कोई माफी तक नहीं माँगी थी।

तोते ने की NDA प्रत्याशी की जीत की भविष्यवाणी तो वन विभाग ने जंगल में उड़ा दिया, तमिलनाडु पुलिस ने मालिक को हिरासत में लिया: भाई को भी पकड़ कर छोड़ा

तमिलनाडु में एक तोते द्वारा NDA गठबंधन के प्रत्याशी की जीत की भविष्यवाणी करने पर उसके मालिक ज्योतिषी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। ज्योतिषी का नाम सेल्वराज है जिसे कुछ देर बाद चेतावनी दे कर छोड़ दिया गया है। वन विभाग भी अब तोते के मालिक पर जुर्माना ठोंकने की तैयारी में है। सेल्वराज के पालतू तोते ने कुड्डालोर निर्वाचन क्षेत्र से NDA गठबंधन के प्रत्याशी की जीत की भविष्यवाणी की थी। ज्योतिषी को दोबारा तोता न पालने की भी चेतावनी दी गई है। PMK ने इस कार्रवाई के बाद DMK पर निशाना साधा है और इसे हार की हताशा करार दिया है। घटना रविवार (7 अप्रैल, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कोड्डालोर जिले की है। यहाँ से NDA गठबंधन में शामिल पट्टाली मक्कल काची (PMK) पार्टी से फिल्म डायरेक्टर थंकर बचन लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार हैं। रविवार को वो अपने साथियों के साथ चुनाव प्रचार कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्थित एक मंदिर में दर्शन किए। दर्शन के बाद जब वो मंदिर से बाहर आ रहे थे तो उन्हें सीढ़ियों के पास एक ज्योतिषी दिखा जिसका नाम सेल्वराज बताया जा रहा है। ज्योतिषी मंदिर के बाहर तोते से लोगों के भविष्य बताने का दावा कर रहा था।

थंकर बचन थोड़ी देर के लिए ज्योतिषी के पास रुके। उन्होंने तोते से अपना भविष्य पूछा। ज्योतिषी ने तोते को बाहर निकाला और बाहर रखे तमाम कार्ड में से एक को चुनने के लिए कहा। तोते ने जो कार्ड उठाया उसमें मंदिर के देवता की फोटो छपी थी। इस कार्ड के आधार पर ज्योतिषी सेल्वराज ने थंकर बचन को चुनाव में उनकी ही जीत होने का संकेत बताया। थंकर बचन ने ख़ुशी में तोते को केला खिलाया। उनके सहयोगियों ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया था जो कुछ देर बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

बताया जा रहा है कि वीडियो वायरल होने के कुछ देर बाद तोते मालिक के पास पुलिस पहुँच गई। ज्योतिषी सेल्वराज और उनके भाई को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सेल्वराज की तलाशी ली गई तो उनके पास कुछ तोते और मिले। इन सभी तोतों को वन विभाग की टीम ने अपने कब्ज़े में ले कर जंगल में ले जा कर छोड़ दिया। बाद में पुलिस ने दोबारा तोतों को कैद में न रखने की चेतावनी देते हुए सेल्वराज और उनके भाई श्रीनिवासन को छोड़ दिया। हालाँकि, वन विभाग अब ज्योतिषी पर जुर्माना ठोंकने की तैयारी में है। वन विभाग के रेंजर जे रमेश ने बताया कि आरोपित पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक जुर्माने की यह राशि 10 हजार रुपए तक हो सकती है। PMK पार्टी ने इस पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने इसे संभावित हार न सहन होने पर DMK की हताशा बताया है। उन्होंने आगे कहा, “जो DMK सरकार तोते की भविष्यवाणी तक नहीं सह पाई उसका आगे क्या हाल होगा।”

किरण खेर-रीता बहुगुणा को आराम, अफजाल से भिड़ेंगे पारसनाथ-पवन सिंह की जगह अहूलवालिया: BJP की 10वीं लिस्ट में 9 नाम

भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 9 उम्मीदवारों वाली अपनी 10वीं सूची जारी कर दी है। इस सूची में बलिया, गाजीपुर, आसनसोल, मैनपुरी, इलाहाबाद, चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय किए गए हैं। भाजपा ने बलिया से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह बेटे नीरज शेखर को मैदान में उतारा है। वहीं, इलाहाबाद से केसरी नाथ त्रिपाठी के बेटे नीरज त्रिपाठी को टिकट मिला है।

बलिया सीट से भाजपा ने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में वीरेंद्र सिंह मस्त को उम्मीदवार बनाया था। इस बार उनका टिकट काटकर नीरज शेखर को मैदान में उतारा गया है। वहीं, इलाहाबाद सीट से सांसद रही रीता बहुगुणा जोशी का भी इस बार टिकट काट दिया गया है। उन्होंने पिछली बार अपने बेटे के लिए टिकट माँगा था। हालाँकि, पार्टी ने नीरज त्रिपाठी को टिकट दिया है।

भाजपा ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल लोकसभा सीट से एसएस अहलुवालिया को टिकट दिया है। इस सीट के लिए भाजपा ने पहले भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार पवन सिंह को टिकट दिया था। हालाँकि, पवन सिंह ने उस दौरान अपना नाम वापस ले लिया था। अहलुवालिया साल 2019 में दुर्गापुर से और 2014 में दार्जिलिंग सीट से चुनवा जीतकर सांसद बने थे। वे केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं।

यूपी के मैनपुरी में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी डिंपल यादव के खिलाफ भाजपा ने जयवीर सिंह ठाकुर को मैदान में उतारा है। पिछले लोकसभा चुनावों में पार्टी ने यहाँ से प्रेम सिंह शाक्य को टिकट दिया था। वहीं, जबकि SC के आरक्षित कौशाम्बी सीट से विनोद सोनकर और मछलीशहर से बीपी सरोज को पार्टी ने एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है।

इलाहाबाद से सटे फूलपुर से पार्टी ने प्रवीण पटेल को मैदान में उतारा है। पिछले लोकसभा चुनावों में यहाँ से केशरी देवी पटेल को टिकट मिला था। गाजीपुर से पार्टी ने पारसनाथ राय को मैदान में उतारा है। पिछली बार यहाँ से मनोज सिन्हा चुनाव जीते थे। वे फिलहाल जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हैं।

वहीं, चंडीगढ़ से इस बार बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर की अभिनेत्री पत्नी किरण खेर के बजाय संजय टंडन को टिकट दिया गया है। किरण खेर को कैंसर बताया जाता है। स्वास्थ्य कारणों से वह राजनीति से अलग होना चाहती थीं। इसको देखते हुए पार्टी ने उम्मीदवार को बदलते हुए संजय टंडन को टिकट दिया है।

बता दें कि भाजपा ने अब तक 413 प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। वहीं, अभी भी कुछ ऐसी सीटें हैं, जहाँ के लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं हुई है। इनमें सबसे प्रमुख सीट उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट है। इस सीट से भाजपा के ब्रिजभूषण शरण सिंह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।

चर्च में पादरी ने बेटे-बेटी के साथ मिल कर 3 साल की बच्ची को मार डाला, ‘भूत उतारने’ के लिए पीट रहे थे: असीम शक्तियों का दावा, कोर्ट सुनाएगा फैसला

अमेरिका में एक पादरी ने अपनी बेटी और बेटे के साथ मिलकर अपनी 3 साल की नातिन को मार डाला। वो कथित तौर पर बच्ची के ऊपर से ‘शैतान’ के असर को खत्म करने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान कई घंटों की पिटाई और प्रताड़ना से बच्ची की मौत हो गई।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में 3 साल की बच्ची की ‘शैतान’ के नाम पर पीट कर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोप बच्ची की माँ, मामा और नाना पर है। बच्ची का नाना चर्च में पादरी था और उसका दावा है कि उसके पास ‘हीलिंग’ की ईश्वरीय शक्तियाँ है। वो आत्माओं से संवाद कर सकता है। वो ‘चंगाई’ के माध्यम से मानव का कल्याण करता है। बच्ची के ऊपर से ‘शैतान’ का असर खत्म करने के लिए चर्च में ही वीभत्स हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया और कुछ घंटों के बाद हत्यारे बच्ची के शव को वहींं छोड़कर भाग निकले, जब उन्हें लगा कि बच्ची मर चुकी है और ‘वापस’ नहीं आ सकती।

क्रोन24 की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलिफोर्निया के सैन जोसे चर्च में 24 सितंबर 2021 को बत्या कर दी गई थी। बच्ची का नाम एरेली नाओगी प्रॉक्टर था। सैंटा क्लारा काउंटी की डेपुटी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रेबेकाह वीजे ने इस मामले में पूरी रिपोर्ट तैयार की है, जिसपर लगातार सुनवाई चल रही है। इस मामले में अभी आरोप तय नहीं हो पाए हैं, जबकि बच्ची की माँ, मामा और नाना, तीनों को ही अलग-अलग समय पर गिरफ्तार किया जा चुका है। अब 10 मई 2024 को कोर्ट फैसला लेगी कि इस मामले में हत्या का केस चलाया जाए या नहीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जज हैनले शे की कोर्ट में चल रही बहस में बताया गया है कि हत्यारों के नाम क्लॉडिया हर्नांडेज, मामा रेने ‘आरोन’ हर्नांडेज सैंटोस और नाना रेने ट्रिगुएरोस हर्नांडेज है। उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया है और कहा कि वो बच्ची पर हावी हो चुके ‘शैतान’ को भगाने का प्रयास कर रहे थे। रेने ट्रिगुएरोस हर्नांडेज खुद पादरी है और उसने दावा किया है कि उसके पास ‘हीलिंग पॉवर’ हैं।

बच्ची अरेली को जब ‘शैतान’ की गिरफ्त से ‘आजाद’ कराया जा रहा था, तब उसने खुद को बचाने के लिए काफी संघर्ष किया था और मरने से पहले अपनी माँ को ‘आई लव यू’ भी बोला था। 50 पन्नों के अभियोग पत्र में ये बातें विस्तार से लिखी है। इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते हुए बच्ची की 25 वर्षीय माँ ने बताया कि उसकी बेटी पर शैतान का कब्जा था। उसकी आँखें बदली हुई थी और वो पूरी तरह से अलग दिख रही थी।

ये लोग सुबह 7 बजे के आसपास बच्ची को लेकर चर्च में गए थे। जहाँ बच्ची के नेता रेने ने बतौर पादरी एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया और करीब 12.20 बजे दोपहर में शैतार की पिटाई कई। इस दौरान बच्ची को ‘सुपरमैन’ की तरह टाँग दिया गया। बच्ची की पिटाई के दौरान उल्टी हुई और उसने दम तोड़ दिया। शाम को करीब 6 बजे उन लोगों ने बच्ची को चर्च में ही छोड़ दिया और फरार हो गए। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में पता चला कि पिटाई की वजह से बच्ची के मस्तिष्क में सूजन, फेफड़ों में खून, गर्दन की चोटें और उसके मुंह के अंदर घावों सहित कई भयानक चोटें आईं।

इस मामले में तीनों ने खुद को हत्या का दोषी मानने से इनकार कर दिया। बच्ची के मामा ने कहा कि बच्ची ईश्वर द्वारा भेजी गई उपहार थी, जिसे उसने वापस ले ले लिया। वहीं, बच्ची की माँ ने कहा कि उसे अभी भी लगता है कि अरेली के ऊपर शैतान का साया था, वो अरेली की आत्मा को अपने साथ ले गया।

नवरात्रि में देवी माँ के मंदिर में तोड़फोड़, लिख दिया XXX: चूल्हे पर मांसाहार पकाए जाने की आशंका, स्कूल कैम्पस में स्थित है धर्मस्थल

ताज़ा अपडेट: बिहार पुलिस ने इस मामले में छानबीन के बाद बयान जारी किया है। पुलिस ने कहा है कि 13-15 वर्ष के 6 नाबालिग बच्चों स्कूल से मध्याह्न भोजन की सामग्री खिड़की से घुस कर चुरा कर बेची थी और बदले में पास की दुकान से मैगी नूडल्स खरीद कर खाए थे। बकौल बिहार पुलिस, मंदिर में ही मैगी बनाई गई थी। वो बचा-खुचा सामान वहीं छोड़ कर चले गए थे। अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी देते हुए बिहार पुलिस ने कहा है कि समुदाय विशेष के लोगों द्वारा ये कृत्य किए जाने की चर्चा झूठ निकली।

बिहार के अररिया जिले में सांप्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ एक धर्मस्थल में हुई तोड़फोड़ के बाद 2 समुदाय आमने-सामने आ गए हैं। हालात तनावपूर्ण देखते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना रविवार (7 अप्रैल, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अररिया के फुलकाहा थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव पंचायत भंगही में एक सरकारी स्कूल है। इसे भोंड़हर मध्य विद्यालय नाम से जाना जाता है। स्कूल के कैम्पस में एक मंदिर है जहाँ लोग पूजा-पाठ करते हैं। मंगलवार को यहाँ के एक मंदिर में तोड़फोड़ का आरोप लगा कर हिन्दू समुदाय विरोध प्रदर्शन करने लगा। थोड़ी देर बाद दूसरे पक्ष के लोग भी जमा होने लगे जिस से हालात तनावपूर्ण हो गए। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में लोगों के बीच प्रशासनिक अधिकारी मौजूद दिख रहे हैं।

ऑपइंडिया ने भोंड़हर गाँव के ही एक स्थानीय निवासी से बात की। मंदिर भगवती माता का है जहाँ हिन्दू समाज नवरात्रि में पूजा-पाठ करता है। हमें बताया गया कि घटना रविवार को तब घटित हुई है जब स्कूल बंद था। इस दौरान कोई व्यक्ति अंदर घुसा और मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। मंदिर परिसर में चूल्हा जला कर कुछ पका कर खाया भी गया है। आशंका जताई गई कि धर्मस्थल में माँसाहार भी हुआ हो। मंदिर परिसर में XXX भी लिख दिया गया था जिसे पोंछ दिया गया है।

तोड़फोड़ की भनक ग्रामीणों को मंगलवार को लग पाई। अपना नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीण ने उम्मीद जताई है कि पुलिस आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करेगी।

मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुँचा। भीड़ को तितर-बितर कर के हालात को सामान्य करने के प्रयास किए जाने लगे। दोनों पक्षों के वरिष्ठ लोगों को समझा कर हालत को काबू किया गया। हिन्दू पक्ष ने मंदिर में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की माँग के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अररिया पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच और आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। बिहार पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान देने की भी अपील जारी की है। गाँव में पुलिस बल कैम्प कर रहा है।

‘हम अंधे नहीं हैं, आपके साथ उदारता नहीं दिखाएँगे’: सुप्रीम कोर्ट को बाबा रामदेव और बालकृष्ण की माफी नहीं कबूल, पतंजलि के विज्ञापन का है मामला

पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन को लेकर सुप्रीम कोर्ट बुधवार (10 अप्रैल 2024) को सुनवाई के दौरान योगगुरु रामदेव और बालकृष्ण पर भड़क गया। भ्रामक विज्ञापन को लेकर बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर बना शर्त माँगी, लेकिन शीर्ष न्यायालय ने माफी से संंबंधित इस याचिका को एक बार फिर से खारिज करते हुए कहा कि ‘हम अंधे नहीं हैं’ और वह इस मामले में ‘उदार नहीं होना चाहता’।

सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोेर्ट की न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह की पीठ ने कहा, “माफी कागज पर है। यह बेहद खराब हालात है। हम इसे स्वीकार करने से इनकार करते हैं। हम इसे वचन का जानबूझकर उल्लंघन मानते हैं।” अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले में केंद्र के जवाब से संतुष्ट नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हमारे आदेश की 3-3 बार अनदेखी की गई। अब नतीजा भुगताना होगा।

कार्यवाही की शुरुआत में पीठ ने कहा कि रामदेव और बालकृष्ण ने पहले मीडिया से माफी माँगी। न्यायमूर्ति कोहली ने कहा, “जब तक मामला अदालत में नहीं आया, अवमाननाकर्ताओं ने हमें हलफनामा भेजना उचित नहीं समझा। उन्होंने इसे पहले मीडिया को भेजा। कल शाम 7.30 बजे तक यह हमारे लिए अपलोड नहीं किया गया था। वे स्पष्ट रूप से प्रचार में विश्वास करते हैं। यह हलफनामे में धोखाधड़ी है।”

पतंजलि संस्थापकों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह रजिस्ट्री की ओर से नहीं बोल सकते और माफी माँगी जा चुकी है। जैसे ही उन्होंने हलफनामे पढ़े न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, “आप हलफनामे को धोखा दे रहे हैं। इसे किसने तैयार किया? मैं आश्चर्यचकित हूँ।” इसके बाद रोहतगी ने कहा कि एक चूक हुई, जिस पर अदालत ने कहा कि ‘बहुत छोटा शब्द’ है।

न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने पूछा कि क्या माफ़ी दिल से माँगी गई है। इस पर रोहतगी ने उत्तर दिया, “और क्या कहने की ज़रूरत है, माई लॉर्ड्स। वह पेशेवर वादी नहीं हैं। लोग जीवन में गलतियाँ करते हैं!” पीठ ने कहा, “हमारे आदेश के बाद भी? हम इस मामले में इतना उदार नहीं होना चाहते।” अदालत ने कहा कि इसको लेकर समाज में एक संदेश जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, “यह सिर्फ एक FMCG के बारे में नहीं है, बल्कि कानून का उल्लंघन है। राज्य प्राधिकरण को दिए गए अपने जवाब को देखिए कि उन्होंने आपसे पीछे हटने के लिए कहा तो आपने कहा कि हाई कोर्ट ने कहा है कि हमारे खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। हम इसे आपके आचरण का हिस्सा बना रहे हैं।”

इसके बाद अदालत ने उत्तराखंड सरकार की ओर रुख किया और सवाल किया कि लाइसेंसिंग निरीक्षकों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने यह भी कहा कि तीन अधिकारियों को एक साथ निलंबित कर दिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, “2021 में मंत्रालय ने एक भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ उत्तराखंड लाइसेंसिंग प्राधिकरण को लिखा था। जवाब में कंपनी ने लाइसेंसिंग प्राधिकरण को जवाब दिया।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हालाँकि, प्राधिकरण ने कंपनी को चेतावनी देकर छोड़ दिया। 1954 के अधिनियम में चेतावनी का प्रावधान नहीं है और ना ही अपराध को कम करने का प्रावधान नहीं है। ऐसा 6 बार हुआ और लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर चुप रहे। उनकी ओर से कोई रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई गई। बाद में नियुक्त व्यक्ति ने भी यही व्यवहार किया। उन सभी तीन अधिकारियों को अभी निलंबित किया जाना चाहिए।”

बता दें कि मंगलवार (9 अप्रैल 2024) को भी रामदेव और बालकृष्ण ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी माँगी थी। इससे पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने दोनों पर जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने रामदेव से कहा था कि वे खुद को कानून से ऊपर ना समझें। कानून की महिमा सबसे ऊपर है।

कुएँ में गिर गई बिल्ली, बचाने के लिए एक-एक कर कूदे परिवार के लोग: जहरीली गैस से 5 की मौत, 1 जिंदा बाहर आया

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में मंगलवार (9 अप्रैल 2024) को बड़ा हादसा हो गया। खबर है कि वहाँ कुएँ में गिरी एक बिल्ली को बचाने के चक्कर में पाँच लोगों ने अपनी जान गँवा दी। घटना जिले के नेवासा ब्लॉक के वकाडी गाँव की है।

बताया जा रहा है कि बिल्ली पालतू थी, इसलिए उसे बचाने के लिए परिवार के लोग कुएँ में चले गए। उन्हें नहीं पता था कि सूखे गाँव में जहरीली गैस फैली हुई थी। इस कारण जो भी शख्स नीचे उतरा, वह ऊपर नहीं आ सका। इसके बाद परिवार के अन्य लोग उन्हें देखने नीचे गए तो वो भी ऊपर नहीं आ सके।

घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। अहमदनगर जिला प्रशासन की बचाव टीम को मौके पर भेजा गया। आनन-फानन में सूखे कुएँ से परिवार के शवों को बाहर निकाला गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नेवासा पुलिस स्टेशन के थाना इंचार्ज धनंजय जाधव ने कहा कि शवों को निकालने का काम बुधवार रात 12.30 बजे तक जारी रहा। इनमें एक शव तो रात 11 बजे तक निकाल लिया गया था लेकिन बाकी शवों को निकालने में डेढ़ घंटे से ज्यादा का समय लगा।

पुलिस ने बताया कि कुएँ में जाने वाले लोगों में से एक विजय मानिक बचा लिया गया है। उसकी हालत स्थिर है। वहीं कुएँ में उतरे अन्य लोगों के लिए ऑक्सीजन पहुँचाने का काम हुआ था और अंदर जहरीली गैस निकालने के लिए सूखे कुएँ में दो बड़े सक्शन पंप लगाए गए थे, बाहर एंबुलेंस भी थी, बावजूद इतने प्रयासों के जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बारे में सुनने के बाद लोग हैरान है। कोई इसमें कुएँ में जाने वाले लोगों की गलती बता रहा है तो कोई प्रशासन की।