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‘₹5 लाख दो या मुस्लिम बनो’: तालिब ने राकेश बनकर दलित लड़़की को फँसाया, रेप का अश्लील वीडियो बनाकर करने लगा ब्लैकमेल

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले से एक दलित लड़की के साथ लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ तालिब खाँ नाम के युवक ने अपना नाम राकेश रखकर पहले पीड़िता को प्यार के झाँसे में लिया, फिर उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान तालिब ने पीड़िता की अश्लील वीडियो बनाकर उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

आरोप है कि इस्लाम नहीं कबूलने की पर 22 साल के तालिब ने पीड़िता से 5 लाख रुपए की माँग की थी। आखिरकार इस मामले में तंग आकर लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तालिब के खिलाफ FIR दर्ज कर ली और रविवार (7 अप्रैल 2024) को उसे गिरफ्तार कर लिया।

यह मामला शाहजहाँपुर जिले के थाना क्षेत्र सिंधौली का है। यहाँ शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) के एक दलित लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उसके पिता की मृत्यु 10 साल पहले ही हो चुकी है। लगभग 2 साल पहले उसे एक युवक मिला, जिसने अपना नाम राकेश बताया था।

राकेश ने थोड़े समय की बातचीत में पीड़िता से दोस्ती कर ली। इसके बाद दोनों आपस में बातें करने लगे और फिर दोनों मिलने-जुलने लगे। इस दौरान आरोपित ने पीड़िता से रेप भी किया। इसी बीच राकेश ने पीड़िता के साथ कुछ व्यक्तिगत तस्वीरें भी खींच लीं। लगभग 4 माह पहले लड़की को पता चला कि जिसे वो राकेश समझ रही है वो असल में लखीमपुर खीरी जिले का रहने वाला तालिब खाँ है।

सच्चाई जानकर वो तालिब से दूरी बनाने लगी। अपनी पोल खुल जाने के बाद तालिब पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। जब पीड़िता ने इससे मना किया तो उसकी तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी देने लगे। तालिब ने पीड़िता को बदनाम करके कहीं भी शादी लायक न छोड़ने जैसी बातें भी कहीं।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पीड़िता द्वारा तालिब खान से ऐसा न करने की मिन्नतें की गईं। हालाँकि तालिब का दिल नहीं पसीजा। उलटे वो पीड़िता से 5 लाख रुपए की डिमांड करने लगा। अपनी शिकायत में लड़की ने तालिब खाँ पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है।

पुलिस ने 22 वर्षीय तालिब खाँ पर FIR दर्ज कर के उसकी तलाश शुरू कर दी। उस पर IPC की धारा 384, 376 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट में कार्रवाई की गई है। रविवार (7 अप्रैल) को तालिब को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई कर रही है।

फूलों की वर्षा, शास्त्रीय नृत्य, नादस्वरम की गूँज, पौराणिक पात्रों की वेशभूषा में लोग… चेन्नई में ब्लॉकबस्टर रहा PM मोदी का रोडशो, महिलाओं-बच्चों में दिखा उत्साह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लो कसभा चुनाव 2024 से पहले अपना पहला इंटरव्यू एक तमिल चैनल ‘Thanthi TV’ को दिया था। अब उन्होंने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में रोडशो किया। कुछ दिनों पहले पीएम मोदी सालेम भी पहुँचे थे, जहाँ वो दिवंगत भाजपा नेता ऑडिटर रमेश को श्रद्धांजलि देते समय भावुक हो गए थे। 52 वर्षीय ऑडिटर रमेश को 19 जुलाई, 2013 को उनके घर में घुस कर मुस्लिमों ने मार डाला था। अब चेन्नई में पीएम मोदी के रोडशो में मंगलवार (9 अप्रैल, 2024) को भारी भीड़ उमड़ी।

इस दौरान तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और कोयम्बटूर से भाजपा के सांसद प्रत्याशी K अन्नामलाई भी मौजूद थे। सड़क के दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। लोगों ने स्वागत में उनके ऊपर पुष्पवर्षा की। कई लोग पौराणिक पात्रों के रूप में सज-धज कर पहुँचे थे, महिलाओं बच्चों को लेकर आई थीं और भाजपा कार्यकर्ता पार्टी के झंडों के साथ मौजूद थे। ये यात्रा चेन्नई के पॉण्डी बाजार होकर भी गुजरी। पीएम मोदी ने काशी-तमिल संगम और सौराष्ट्र-तमिल संगम के जरिए तमिल संस्कृति का प्रचार-प्रसार करवाया।

कई महिला कलाकार इस दौरान नृत्य करती हुई भी दिखीं। पीएम मोदी ने चोल राजवंश के राजदंड ‘सेंगोल’ को सम्मान देते हुए उसे नई संसद की लोकसभा में स्थापित किया, जिसका इस्तेमाल आज़ादी के दौरान सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में किया गया था और फिर कॉन्ग्रेसी सरकारें इसे भूल गई थीं। तमिलनाडु में भाजपा इस बार AIADMK के साथ गठबंधन में नहीं है और 9 छोटे-छोटे राजनीतिक दलों के साथ वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है।

चेन्नई में पीएम मोदी के रोडशो के दौरान कई कलाकार शास्त्रीय वाद्ययंत्र नादस्वरम बजाते हुए भी दिखे। पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और मध्य प्रदेश के बालाघाट में रैलियाँ कर के चेन्नई रोडशो के लिए पहुँचे थे। इस दौरान सेन्ट्रल चेन्नई से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व राज्यपाल तमिलसाई सुन्दरराजन भी उनके साथ मौजूद थीं। हाल में भाजपा अध्यक्ष JP नड्डा के अलावा राजनाथ सिंह, हरदीप सिंह पुरी और अनुराग सिंह ठाकुर भी तमिलनाडु का दौरा कर चुके हैं।

कोयम्बटूर और नीलगिरि सीटों को भाजपा 1998 और 99 में जीत चुकी है। विरुधुनगर से दिवंगत अभिनेता शरतकुमार की पत्नी राधिका भाजपा के टिकट पर लड़ रही हैं। चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2 किलोमीटर लंबा रोडशो पनगल पार्क से लेकर टेनाम्पेट तक चला। लगभग 45 मिनट तक वो जनता के बीच रहे। अगले ही दिन वेल्लोर और मेट्टुपलायनम में उनकी रैली होनी है। 12 अप्रैल के बाद पीएम मोदी फिर से तमिलनाडु का दौरा करेंगे।

छत्तीसगढ़ में ITBP ने जमींदोज किया नक्सलियों का ‘स्मारक’, टीलेनुमा आकृति पर लाल झंडा लगाकर घोषित करते थे अपना इलाका

भारतीय सुरक्षाबलों ने कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में आतंकवाद एवं अलगाववाद की कमर तोड़ने के बाद मध्य भारत में नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार शुरू कर दिया है। भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की बटालियन ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों के उस निशान को तोड़ दिया, जिसे वे अपने इलाके के तौर पर दर्शाते थे। मंलगवार (9 अप्रैल 2024) को हुई इस कार्रवाई का ITBP ने वीडियो भी बनाया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

छत्तीसगढ़ ITBP ने इस कार्रवाई को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। ITBP ने लिखा, “53वीं वाहिनी ने कस्‍तूरमेटा क्षेत्र, नारायणपुर (छत्तीसगढ़) के ईकपाड इलाके में वामपंथी उग्रवादियों के एक स्‍मारक को ध्‍वस्‍त किया।” शेयर किए गए वीडियो और तस्वीरों में लाल रंग के पक्के स्मारक पर कुछ जवान चढ़े दिख रहे हैं। इनके हाथों में हथौड़ी, गैंती, फावड़ा व अन्य औजार हैं। थोड़े समय के बाद ही यह स्मारक मलबे में तब्दील हो जाता है।

ऑपइंडिया ने इन स्मारकों के बारे में नक्सल क्षेत्र में तैनात CRPF के एक सीनियर अधिकारी से बात की। उन्होंने हमें बताया कि लगभग एक दशक पहले ऐसे स्मारक छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में हजारों की तादाद में हुआ करते थे। इन स्मारकों को वामपंथी अपने इलाके का प्रतीक के तौर पर बनवाते थे। इन स्मारकों के ऊपर नक्सली अपना लाल झंडा फहरा कर रखते थे।

अधिकारी ने आगे बताया कि धीरे-धीरे नक्सलियों का दमन हुआ और स्मारक भी खत्म होते चले गए। वर्तमान में ऐसे स्मारक न के बराबर हैं। उनका कहना है कि सुरक्षाबलों का मूवमेंट आगे बढ़ रहा है और जल्द ही ऐसे स्मारकों की तादाद शून्य हो जाएगी। अधिकारी ने इसके लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जागरूकता और सोच में बदलाव को प्रमुख कारण बताया।

गौरतलब है कि इसी सप्ताह CRPF के जवानों ने छत्तीसगढ़ के लाखापाल क्षेत्र में आने वाले गाँव केरलापेंडा में 23 साल से बंद पड़े एक मंदिर की साफ़-सफाई के बाद वहाँ पूजा-अर्चना शुरू करवाई है। तब ग्रामीणों ने बताया था कि कभी वहाँ श्रद्धालुओं का मेला लगता था, लेकिन नक्सलियों की वजह से धीरे-धीरे मेला बंद हो गया और मंदिर जर्जर होता चला गया।

एकता का गला रेता, समोसे में बीफ, कंडोम, पत्थर और गुटखा डाल कर खिलाया, आरफा खानम शेरवानी को दिक्कत – हमारे कौम वालों का नाम क्यों छापा? खुद हिन्दुओं को बताती हैं गुंडा

मीडिया का एक बड़ा वर्ग चाहता है कि किसी भी अपराध में अगर अपराधी मुस्लिम है तो उसकी पहचान छिपा ली जाए, किसी को उसका नाम या उसके मजहब के बारे में पता न चलने पाए। तभी तो मुस्लिमों द्वारा की जाने वाली हर हिंसा के बाद अपराधियों को ‘बेचारा’ साबित करने की कोशिश की जाती है और बताया जाता है कि आखिर वो ये सब करने को क्यों ‘मजबूर’ हुआ। इसी गिरोह की एक सदस्य हैं आरफा खानम शेरवानी नाम की, जो सोमोसे में कंडोम परोसने और हत्या जैसे मुद्दे पर अपराधियों की पहचान छिपाना चाहती हैं।

आगे बढ़ने से पहले 2 घटनाओं का जिक्र करते हैं। पहली घटना है महाराष्ट्र के पुणे की जहाँ रहीम शेख, अजहर शेख, मजहर शेख, फिरोज शेख और विक्की शेख ने समोसे में गुटखा, पत्थर और कंडोम डाल कर लोगों को खिला दिया। असल में एक कंपनी में समोसे की सप्लाई का कॉन्ट्रेक्ट उनसे छीन कर किसी और को दे दिया गया था, इसीलिए बदला निकालने के लिए उन्होंने ऐसा किया। जिस नई कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट मिला था, उन्हें बदनाम करना उनकी मंशा थी। नई कंपनी में अपने कर्मचारियों को प्लांट कर के ये सब करवाया गया।

दूसरी घटना है पंजाब के मोहाली की, जहाँ मुरादाबाद निवासी अनस कुरैशी ने अपनी प्रेमिका एकता की गला दबा कर हत्या कर दी। दोनों 4 वर्षों से रिलेशनशिप में थे। पड़ोसियों ने घर में जाकर देखा तो एकता का शव बिस्तर के नीचे खून से लथपथ पड़ा हुआ था। CCTV में देखा जा सकता है कि अनस कुरैशी रात के ढाई बजे घर में घुसता है एकता के आने कुछ देर बाद, तड़के सुबह 5 बजे निकल लेता है। एकता का परिवार उस समय जागरण में गया हुआ था। धारदार हथियार से गर्दन की दाहिनी तरफ वार कर के हत्या की गई थी।

अब आप बताइए, पहली घटना में शेखों के नाम या दूसरी घटना में अनस कुरैशी का नाम अगर कोई मीडिया संस्थान अपनी खबर में लिखता है तो इसमें उसकी क्या गलती है? अगर अपराध अब्दुल ने किया है तो क्या उसका नाम बदल कर ‘रमेश’ कर दिया जाए? वैसे भी नाम बदल कर हिन्दू युवतियों को फँसाने और फिर उनकी हत्या करने वाले ‘लव जिहादियों’ की संख्या कम नहीं है। आखिर मुस्लिम अपराधियों के प्रति इतनी दया दिखाए जाने की अपेक्षा क्यों रखी जाती है?

अब यहाँ सीन में आती हैं आरफा खानम शेरवानी। सीनियर एडिटर हैं ‘The Wire’ में, इसी से अंदाज़ा लगा लीजिए कि कितनी विश्वसनीय हैं। उन्हें अक्सर अपनी फोटोशॉप्ड तस्वीरें पोस्ट करने के लिए भी जाना जाता है। खैर, आरफा खानम शेरवानी ने उपर्युक्त दोनों खबरों का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “भारत के 2 मुख्य समाचारपत्र TOI (टाइम्स ऑफ इंडिया) और HT (हिंदुस्तान टाइम्स) ने कैसे 2 अलग-अलग अपराधों को बेशर्मी से मुस्लिमों को निशाना बनाते हुए कवर किया है।”

आरफा खानम शेरवानी ने आगे लिखा कि भारत के मुख्यधारा की मीडिया ही यहाँ की ‘रवांडा रेडियो’ है, दक्षिणपंथी कचरे नहीं। ‘रवांडा रेडियो’ वहाँ की सरकारी मीडिया एजेंसी है, जिस पर कई बार फर्जी खबरें फैलाने और घृणा का प्रसार करने के आरोप लगे हैं। ‘न्यूजलॉन्ड्री’ ने भी जून 2020 में एक लंबा-चौड़ा लेख लिख कर भारतीय मीडिया की तुलना ‘रवांडा रेडियो’ से की थी। यानी, भारत, जहाँ सैकड़ों मीडिया संस्थान हैं, वो इन चंद लोगों के हिसाब से खबरें चलाएँ – यही इनकी इच्छा है।

आप देखिए, आरफा खानम शेरवानी को दिक्कत अपराध करने वाले से नहीं है, दिक्कत इससे है कि मीडिया उस अपराध को कवर क्यों कर रहा है। आरफा खानम शेरवानी इस दौरान गुजरात के वड़ोदरा की एक खबर का जिक्र करना भूल गईं, जो इनसे मिलता-जुलता है। वहाँ युसूफ शेख समोसे में गोमांस भर कर बेचा करता था। इस मामले में 6 गिरफ्तार हुए हैं। अब इस मामले में भी आरफा खानम शेरवानी को लिख देना चाहिए कि युसूफ शेख का नाम मत लो, उसको ‘रामप्रसाद’ लिखो।

एकता नाम की जिस हिन्दू महिला का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया, उसके लिए आरफा के मन में कोई सहानुभूति नहीं है। इस हत्याकांड से उन्हें कोई समस्या नहीं है। समस्या है इससे कि हत्यारे का नाम क्यों लिख दिया गया। लोगों को पता कैसे चल गया कि ये ‘लव जिहाद’ है और हत्यारा मुस्लिम है। इन्हीं लोगों का पहले मीडिया में वर्चस्व था, जब बड़े-बड़े अख़बार भी मुस्लिमों के अपराध को ‘समुदाय विशेष’ लिख-लिख कर ढँकते थे। हिन्दुओं के मामले में आज तक कभी ऐसा नहीं लिखा गया।

वैसे आरफा खानम शेरवानी का ‘द वायर’ पहली खबर को इस तरह कवर कर सकता है – “हिन्दुओं ने समोसे में कंडोम, पत्थर और गुटखा भर कर खाया, फिर भी तानाशाही भाजपा सरकार ने मुस्लिमों को गिरफ्तार किया।” दूसरी खबर की हेडलाइन कुछ ऐसी हो सकती है, “महिला की लाश मिली, उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया गया – मोदी के भारत में प्रेम का गला घोंटा जा रहा है।” और हाँ, ये वही आरफा खानम शेरवानी हैं जो जब तक रोज हिन्दुओं को 10 बार गाली नहीं देती हैं तब तक उनका भोजन नहीं पचता है।

सोचिए, आरफा खानम शेरवानी ने उस CAA को ‘हिंदुत्व नागरिकता’ बताए जाने का समर्थन किया, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारत में शरण एवं नागरिकता मिल रही है। कोई उनसे पूछे कि इसमें हिंदुत्व कहाँ से आ गया? उन्होंने कहा था कि कंगना रनौत जैसी सेलेब्रिटीज को ‘हिंदुत्व हीरोज’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। वो PM नरेंद्र मोदी को ‘हिंदुत्व राजनीति’ से जोड़ चुकी हैं। अयोध्या में बाबरी विध्वंस करने वालों को वो ‘हिंदुत्व भीड़’ कह कर संबोधित कर चुकी हैं।

यहाँ कहाँ चला जाता है आरफा खानम शेरवानी का ज्ञान? वो किसी इफ्तार पार्टी में हिस्सा लेती हैं तब भी हिंदुत्व को गाली देती हैं। हिन्दू धर्म की तुलना तालिबान से कर चुकी हैं। गाय के हत्यारों पर NSA लगाए जाने पर भी हिंदुत्व को गाली देती हैं। वामपंथी इतिहासकारों की पोल खोलने वालों को वो ‘हिंदुत्व इतिहासकार’ बता चुकी हैं। आरफा खानम शेरवानी भले मुस्लिम हैं, लेकिन हिन्दुओं को ही हिंदुइज्म और हिंदुत्व का अंतर समझाती हैं। हिंदुत्व को फासीवादी भी बता चुकी हैं।

मतलब, आरफा खानम शेरवानी बिना किसी बात के 100 बार हिन्दू धर्म को गाली दे तो ठीक, लेकिन समोसे में कंडोल, पत्थर और गुटखा डाल कर खिलाने वालों या फिर एक हिन्दू महिला के बेरहमी से कत्ल कर देने वाले का नाम तक लिख दिया जाए न्यूज़ रिपोर्ट में तो उन्हें आपत्ति है कि किसी की इस्लामी पहचान क्यों उजागर की जा रही है। 110 करोड़ हिन्दुओं के देश में रोज हिन्दू धर्म को गाली देकर भी आरफा खानम शेरवानी सुरक्षित हैं, फिर भी वो हिन्दुओं को गुंडा बताती हैं।

हुसैनी समोसा सेंटर में बीफ सप्लाई करने वाला इमरान कुरैशी गिरफ्तार, मीट एक्सपोर्ट कंपनी में कर चुका है काम: वडोदरा पुलिस ने घर से दबोचा

गुजरात के वडोदरा में सोमवार (8 अप्रैल 2024) को समोसे में गोमांस भरकर बेचे जाने के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित इमरान यूसुफ कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले पुलिस ने शनिवार (6 अप्रैल 2024) को 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। हालाँकि, इमरान फरार होने में कामयाब हो गया था। इस मामले में पुलिस ने कुल 7 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर किया था।

इमरान पर समोसे में भरे जा रहे गोमांस को सप्लाई करने का आरोप है। पुलिस मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई में जुटी है। दाहोद का निवासी इमरान युसूफ कुरैशी फिलहाल आनंद जिले के भालेज में रहता है। इमरान के साथ उसकी बीवी और अम्मी भी रहती हैं। वह पहले एक मीट एक्सपोर्ट की एक कम्पनी में काम कर चुका है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाद में इमरान वडोदरा जिले में मांस काटकर बेचने वालों के साथ काम करने लगा। यहीं पर उसकी मुलाक़ात अन्य आरोपितों से हुई थी। समोसे के कारोबार में ज्यादा फायदा कमाने के लिए इमरान ने ही आरोपितों को सस्ते दाम पर मांस बेचने की पेशकश की थी। आरोपितों को इमरान की सलाह पसंद आ गई।

इमरान अन्य आरोपितों को समोसे में भरने के लिए मांस सप्लाई करते हुए उनके लाभ में अपना हिस्सा लेने लगा। जिस कमरे में मांस को रखा जाता था, उसे फ्रीजर जैसा बना दिया गया था। इन आरोपितों के पास कारोबार करने का कोई वैध लाइसेंस भी नहीं था। चिपवाड इलाके में एक किराए की बिल्डिंग में ये सभी 5वीं मंजिल पर गोमांस भर के समोसे सप्लाई कर रहे थे।

दरअसल, एक पशु कार्यकर्ता ने पुलिस को सूचना दी थी कि हुसैनी समोसा नाम के दुकान पर बीफ (गोमांस) वाले समोसे मिलते हैं। उसने यह भी कहा कि उस दुकान पर कहीं भी नहीं लिखा है कि यहाँ मीट वाले समोसे मिलते हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शनिवार (6 अप्रैल 2024) को पुलिस ने ‘हुसैनी समोसा सेंटर’ नाम की इस दुकान पर दबिश दी।

दबिश के दौरान कुल 300 किलोग्राम गोमांस जब्त हुआ। इसके अलावा 152 किलो समोसे बनाने के सामान भी सीज किए गए। ये समोसे शहर की तमाम दुकानों पर बेच दिए जाते थे। यहाँ से उन्हें दुकानदार तल करके ग्राहकों को खिलाया करते थे। पुलिस ने लगभग 49,000 रुपए की लागत की कटोरियाँ और मशीनें भी कब्ज़े में लीं हैं।

पुदबिश के दौरान यूसुफ शेख, नईम शेख, हनीफ भठियारा, दिलावर पठान, मोइन हब्दाल और मोबिन शेख पकड़े लिए गए। इसके 2 दिन के बाद इमरान को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया। FSL की जाँच में ये साफ हो गया है कि समोसा में इस्तेमाल होने वाला मीट बीफ (गोमांस) ही है। फिलहाल पुलिस मामले में जाँच और जरूरी कार्रवाई कर रही है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी में लगी सभी गाड़ियों में लगेगा GPS, गड़बड़ी पर तलब होंगे ड्राइवर-अधिकारी: चुनाव आयोग के अधिकारी बदले

लोकसभा चुनाव के दौरान बंगाल में चुनाव से जुड़ी हर गाड़ी में GPS सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने आदेश जारी कर दिए हैं। इन गाड़ियों की आयोग निगरानी करेगा। चुनाव आयोग ने बंगाल में एक चुनाव अधिकारी का भी तबादला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयोग ने आदेश दिया है कि बंगाल में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी हर गाड़ी में GPS लगाया जाए। इसमें वह गाड़ियाँ भी शामिल हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को पोलिंग स्टेशन तक ले जाया जाना है। इसके अलावा अन्य अधिकारीयों एवं कर्मचारियों की गाड़ियों में भी GPS लगेगा।

चुनाव आयोग ने यह आदेश चुनाव अधिकारियों को भेज दिया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह गाड़ियों में लगे इन GPS से EVM की गतिविधि पर नजर रखेगा। चुनाव आयोग मतगणना सामग्री बाँटने वाले केन्द्रों से लेकर पोलिंग बूथ तक यह गतिविधि जाँचेगा। कोई भी गड़बड़ी होने पर चुनाव अधिकारी और ड्राईवर को तलब किया जाएगा।

चुनाव आयोग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, “GPS ट्रैकिंग प्रणाली का उपयोग चुनाव से एक दिन पहले वितरण/फैलाव केंद्र और प्राप्ति केंद्र (डीसीआरसी) से मतदान केंद्र तक ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक मतदाता मशीन) और अन्य मतदान सामग्री की आवाजाही की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा कि कोई मतदान के बाद स्ट्रांग रूम में लाते समय कोई छेड़छाड़ ना हो।”

गौरतलब है कि चुनाव आयोग चुनाव के समय EVM, मतदान कर्मचारियों और अन्य सामग्रियों को मतगणना केन्द्रों से पोलिंग बूथ तक पहुँचाने के लिए बड़ी संख्या में गाड़ियों का उपयोग करता है। इनमें से अधिकांश गाड़ियाँ किराए पर ली जाती हैं। चुनाव प्रक्रिया के बाद इन गाड़ियों को लौटा दिया जाता है। अब इन्हीं गाड़ियों में आयोग GPS ट्रैकर लगाएगा।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में एक चुनाव अधिकारी का तबादला करने का भी निर्णय लिया है। चुनाव आयोग ने बंगाल के संयुक्त चुनाव अधिकारी राहुल नाथ को चुनाव आयोग से हटा दिया है। उनकी जगह पर अर्नब चैटर्जी को संयुक्त चुनाव अधिकारी बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में सभी सात चरणों में चुनाव होगा। इसकी शुरुआत 19 अप्रैल से होगी और अंतिम चरण 1 जून को है। इसके नतीजे 4 जून, 2024 को आने हैं। पश्चिम बंगाल में मुख्य लड़ाई TMC और भाजपा के बीच में है।

बालाघाट की जमीन से महाकाल के ‘भक्त’ ने जनता को किया नमन, कहा- मौज करने के लिए पैदा नहीं हुआ मोदी, मेहनत करता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव 2024 का प्रचार जोर-शोर से कर रहे हैं। एक-एक दिन में वे कई-कई रैलियों में हिस्सा ले रहे हैं। पीएम मोदी मंगलवार (9 अप्रैल 2024) को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के बाद मध्य प्रदेश के बालाघाट पहुँचे और जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा।

जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जो लोग अपनी तिजोरियाँ भरने राजनीति में आए हैं वे मोदी को धमकी न दें। मोदी तो अपनी कमाई भी देश सेवा में लगा देने की आदत रखता है। मोदी मौज करने के लिए पैदा नहीं हुआ है। मोदी मेहनत करता हैं, क्योंकि उसके लक्ष्य बहुत बड़े हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैंने देश विरोधी ताकतों को अंजाम तक पहुँचाने के लिए सीखा है। हम इन गीदड़भभकियों से नहीं डरते हैं। इंडी गठबंधन के लोग मोदी से चिढ़े हुए हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर ये लोग मोदी को गाली देते हैं। मोदी या तो महाकाल के सामने झुकता है या फिर जनता जनार्दन के सामने।”

उन्होंने कहा कि भाजपा ने अब तक जो विकास के कार्य किए हैं, वो तो फुलझड़ी है। अभी तो विकास के रॉकेट को और भी ऊँचाई पर लेकर जाना है। पीएम मोदी ने कहा कि अभी तो ये ट्रेलर है। असली दीपावली मननी तो अभी बाकी है। ये चुनाव नए भारत के निर्माण के मिशन है। ये विकसित भारत, विकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को नई उर्जा देने वाला चुनाव है।

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जब देश में पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ीं, तब कॉन्ग्रेस ने उन्हें हराने के लिए पूरी ताकत लगा दी। कॉन्ग्रेस ने कभी आदिवासी विरासत का सम्मान तक नहीं किया। गोविंद गुरु जैसे क्रांतिकारी को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा तक नहीं दिया। कॉन्ग्रेस आजादी का श्रेय ​किसी आदिवासी को नहीं, अपने शाही परिवार को देना चाहती है।”

उन्होंने कहा, “आजादी के बाद दशकों तक कॉन्ग्रेस बहुत ही पुरानी सोच पर चली। एक तो उनके मन में आजादी के आंदोलन का अहंकार भरा पड़ा था और सामान्य लोगों ने जो आजादी के आंदोलन में त्याग किया, तपस्या की और बलिदान दिया, उसे सत्ता में आते ही कॉन्ग्रेस ने नकार दिया। एक छोटे से परिवार का कुनबा हावी हो गया और उसी की सोच देश को पिछड़ेपन की ओर धकेलती गई।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कभी कॉन्ग्रेस सरकार अपनी शिकायतें लेकर दूसरे देशों के पास जाती रहती थी, लेकिन आज वक्त बदल चुका है। दुनिया के बड़े-बड़े देश, आपस में युद्ध कर रहे देश… भारत से अपने मुद्दों पर बात करने के लिए आते हैं। अपने देश का ये रुतबा देखकर हर देशवासी का रुतबा बुलंद हो जाता है।”

तमिलनाडु में पोल्ट्री फार्म में 15 घंटे चला रेड, आयकर विभाग को ₹32 करोड़ मिले: वोटरों को बाँटने के लिए पैसे रखे जाने का अंदेशा

लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर से करोड़ों रुपए बरामद हुए हैं। मामला पोल्लाची हैचरी का है। वहाँ चुनाव से कुछ दिन पूर्व आयकर विभाग ने रेड मारकर 32 करोड़ रुपए जब्त किए हैं।

सूत्रों के आई खबर में बताया जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग ने एक पोल्ट्री फार्म में छापा मारकर ये रकम जब्त की है। पैसे ज्यादा होने के कारण उन्हें तीन बक्सों में भरकर इसे लाना पड़ा। अब इस मामले में आगे की जाँच जारी है।

खबरों के अनुसार आईटी अधिकारी ने सोमवार सुबह (8 अप्रैल 2024) पोल्लाची में वेंकटेशा कॉलोनी में छापा मारा। रेड करीबन 15 घंटे चली और रकम 32 करोड़ जब्त हुई। छापेमारी के बाद बैंक स्टाफ को भी उस जगह पर बुलाया गया।

अनुमान है कि शायद ये पैसा इसलिए इकट्ठा किया गया हुआ था ताकि उसे वोटर्स में बाँटा जा सके। अब आईटी विभाग के साथ निर्वाचन आयोग के अधिकारी भी इसकी जाँच कर रहे हैं। अभी तक यही सामने आया है कि इस फर्म को अरुण मुरुगन और श्रवण मुरुगन द्वारा पोल्लाची में चलाया जा रहा है। इसकी कई अन्य ब्रांच राज्य भर में फैली हुई हैं।

बता दें कि इससे पहले तमिलनाडु में ही मतदाताओं को रिश्वत देने की शिकायत पर आयकर विभाग ने कार्रवाई करते हुए 4 करोड़ रुपए की नकदी को बरामद किया था। चुनाव आयोग को बताया गया था कि मतदाताओं को बाँटने के लिए कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में नकदी जुटाई गई है।

इस टिप पर कोंडीतोप और ओटेरी समेत पाँच जगहों पर 30 से अधिक आईटी अधिकारियों ने छापा मारा। इस दौरान चार करोड़ की नकदी मिली। इनमें 2.60 करोड़ चेन्नई से, सेनम से 70 लाख रुपए, तिरुचि से 55 लाख रुपए और वाहन जाँच से करीब 40 लाख रुपए पकड़े गए थे।

अब्बा की कब्र पर फातिहा पढ़ेगा मुख्तार अंसारी का बेटा अब्बास, सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत: 2 दिन परिवार से मेल-मुलाकात को भी दिया, 13 अप्रैल को लौटेगा जेल

सुप्रीम कोर्ट ने मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को अपने अब्बा के अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कासगंज जेल में बंद अब्बास अंसारी को 9 से 12 अप्रैल तक मुख़्तार के अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति दी गई है। 13 अप्रैल को अब्बास अंसारी को फिर से कासगंज जेल में दाखिल होना होगा। इस दौरान अब्बास अंसारी को मीडिया से दूर रहने की नसीहत दी गई है। अब्बास की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने मंगलवार (9 अप्रैल, 2024) को बहस की है।

हाईकोर्ट से याचिका ख़ारिज होने के बाद अब्बास ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। ‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, इस याचिका पर जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई की है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से असिस्टेंट एटॉर्नी जनरल गरिमा प्रसाद ने इस याचिका का विरोध किया। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने अब्बास अंसारी के लिए 4 दिनों की अंतरिम जमानत माँगी। इस समय में सिब्बल ने मऊ से कासगंज आने-जाने के समय को भी जोड़ा था। अपनी दलील में उन्होंने अब्बास के अब्बा की मौत संदिग्ध हालातों में भी होना बताया है।

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश असिस्टेंट एटॉर्नी जनरल गरिमा प्रसाद ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अब्बास अंसारी एक गैंगस्टर है जो अपने खिलाफ लंबित 4 अलग-अगल FIR में अंतरिम जमानत माँग रहा है। AAG ने तो यहाँ तक भी कहा कि अंतरिम राहत की माँग का फातिहा से कोई लेना-देना नहीं है, असलियत में अब्बास का मकसद सिर्फ जमानत पाना है। गरिमा प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब्बास पर कुल 11 गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं ऐसे में उसको राहत देना उचित नहीं होगा।

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असिस्टेंट एटॉर्नी जनरल ने आगे कहा कि अब्बास अंसारी ने चित्रकूट जेल में भी रहते हुए अपनी गैंग तैयार कर ली थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि अब्बास आने वाले कुछ इस्लामी त्योहारों के लिए अंतरिम जमानत चाह रहा हो। उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए गरिमा प्रसाद ने यह भी बताया कि जेल से बाहर निकलने पर अब्बास अंसारी गवाहों को धमका कर केस को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

अपने आदेश में अदालत ने बताया कि अब्बास अंसारी बुधवार (10 अप्रैल, 2024) को अपने घर जा कर फातिहा पढ़ सकते हैं। इसी के साथ अब्बास को 11 और 12 तारीख़ को भी घर पर अपने परिजनों के साथ समय बिताने की छूट दे दी गई है। 13 तारीख को नियमानुसार अब्बास अंसारी को एक बार फिर से कासगंज जेल में दाखिल होना है। जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि अब्बास को आज ही यानी मंगलवार (9 अप्रैल) को ही जेल से निकाल कर उनके घर ले जाने की अनुमति दी जाती है। बताते चलें कि अब्बास के अब्बा मुख़्तार अंसारी की 28 मार्च 2024 को बाँदा जिले में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।

कॉन्ग्रेस राज में लड़ाकू विमान खरीदने तक को नहीं थे पैसे, मोदी राज में ₹88000 करोड़ का निर्यात: भारत के हथियारों की ग्लोबल डिमांड, स्वदेशी से सशक्त हुआ रक्षा सेक्टर

भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। सबसे बड़ी आबादी वाले देश की सुरक्षा का दायित्व भी बड़ा है। इस सुरक्षा के लिए सैनिकों के साथ ही हथियारों की बड़ी जरूरत होती है। भारत आजादी के बाद से ही अपने हथियारों के लिए रूस, फ़्रांस, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर रहा है।

भारतीय सुरक्षाबलों की सामान्य सी बंदूक से लेकर लड़ाकू विमान तक बाहर से आते रहे हैं। विदेशों पर ऐसी निर्भरता रही है कि हम विश्व के सबसे हथियारों के खरीददार रहे हैं। 2014 से पहले देश के रक्षा मंत्री ने खुद माना था कि हमारे पास हथियार खरीदने का पैसा नहीं है। CAG की रिपोर्ट ने बताया था कि मार्च 2013 में देश के पास 10 दिन युद्ध लड़ने का भी गोला बारूद नहीं था।

बीते कुछ सालों से यह तस्वीर बदलने लगी है। अब भारत की सेनाएँ जहाँ भारत में बने तमाम हथियार उपयोग में ला रही हैं तो यह विदेशों में भी जा रहे हैं। देश का रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ गया है। विदेशों से कम्पनियाँ आकर भारत में निर्माण कर रही हैं। देश के अंदर भी कई नई कम्पनियाँ खुल रही हैं जो कि रक्षा उत्पाद बना रही हैं। वर्षों से लटके रक्षा प्रोजेक्ट भी रफ़्तार पकड़ने लगे हैं। सेनाएँ भी अब भारत में बने उत्पादों पर भरोसा दिखा रही हैं। मोदी सरकार ने साफ़ कर दिया है कि देश में बने रक्षा उत्पाद ही अब सेनाओं के हाथ में दिए जाएँगे।

UPA सरकार के मुकाबले 22 गुना बढ़ा निर्यात

बीते 10 वर्षों में भारत के रक्षा उत्पादों के निर्यात में 22 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी इसलिए हुई हैं क्योंकि देश में अब अच्छी गुणवत्ता के रक्षा उत्पाद बन रहे हैं। आर्मेनिया, बांग्लादेश और फिलिपिन्स जैसे देश भारत से बड़ी मात्रा में रक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं। आँकड़ों पर अगर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि UPA सरकार के सत्ता में रहते समय 10 वर्षों में (2004-14) तक कुल ₹4312 करोड़ का रक्षा निर्यात देश ने किया।

मोदी सरकार में यह स्थिति पूरी तरह बदल गई। मोदी सरकार के दस सालों के आँकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2014-24 के बीच ₹88,319 करोड़ के रक्षा निर्यात हुए हैं। 2023-24 में ही देश का रक्षा निर्यात ₹21,083 करोड़ रहा। यह 2022-23 में ₹15,920 करोड़ था। यानी एक वर्ष में ही इसमें 32.5% की वृद्धि हुई। इसमें भी बड़ी बात यह है कि इन रक्षा निर्यातों में 60% सरकारी रक्षा निर्माण संस्थानों का था। यानी ₹12,000 करोड़ से अधिक का निर्यात सरकारी रक्षा संस्थानों ने किए।

(चित्र BG साभार: @AdithyaKM_/X)

SIPRI की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत का विश्व के रक्षा निर्यातों में अब 10% से अधिक हिस्सा है। 10 वर्षों पहले यह नगण्य था। भारत ने आर्मेनिया को एयर डिफेन्स सिस्टम, ATAGS (तोपें), पिनाका राकेट सिस्टम और स्वाति राडार समेत तमाम रक्षा उत्पाद बेंचे हैं। भारत, फिलिपीन्स को ब्रह्मोस मिसाइल भी बेंची हैं। इसके अलावा भी कई देशों को भारत ने महत्वपूर्ण रक्षा उत्पाद बेचे हैं। बांग्लादेश भारत से लगातार रक्षा उत्पाद खरीदता रहा है। यानी मोदी सरकार के भारत सिर्फ हथियार आयात नहीं बल्कि निर्यात भी कर रहा है।

अब देश में ही बन रहे विदेशी हथियार भी, आत्मनिर्भर पर जोर

भारत की रक्षा निर्माण कम्पनियाँ जहाँ बीते 10 वर्षों में काफी आगे बढ़ी हैं तो वहीं विदेशी कम्पनियाँ भी आकर भारत में ही निर्माण कर रही हैं। अब देश के अंदर विश्व की कई बड़ी कम्पनियाँ अपने हथियार बना रही हैं। इजरायल की IWI जहाँ PLR कम्पनी के साथ मिलकर देश में बंदूकें बना रही है तो वहीं कोरिया की कम्पनी L&T के साथ मिलकर होवित्ज़र तोपें बना रही है। एयरबस भी गुजरात वड़ोदरा में वायु सेना के लिए C-295 विमान का निर्माण कर रही है। अडानी के साथ मिलकर इजरायली IAI भारत में ड्रोन बना रही है।

सेना को ज्यादा से ज्यादा भारत में निर्मित हथियार मिलें, इसके लिए मोदी सरकार ने भी कदम उठाए हैं। मोदी सरकार के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने उन रक्षा सामानों की सूचियाँ जारी करना चालू किया है जिन्हें सिर्फ भारतीय निर्माताओं से ही खरीदा जाना है। रक्षा मंत्रालय अब तक पाँच ऐसी सूचियाँ जारी कर चुका है। इनमें 500 रक्षा सामान शामिल किए गए हैं। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण तकनीकी सामान भी शामिल किए हैं।

नए स्टार्टअप को भी मिल रहा मौक़ा, सेना के जवान डिजाइन कर रहे हथियार

भारत में रक्षा सामग्री के निर्माण के लिए मात्र बड़ी और सरकारी कम्पनियाँ ही नहीं बल्कि नए स्टार्टअप को भी मौक़ा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 2018 में IDEX स्कीम चालू की थी। इसके अंतर्गत नए डिफेन्स स्टार्टअप को सरकार एक प्रोजेक्ट के लिए ₹50 करोड़ का अनुदान दिया जाता है। इससे युवा भी रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आ रहे हैं। हाल ही में IDEX के अंतर्गत रक्षा मंत्रालय ने ₹200 करोड़ का एक सौदा किया था। दो कम्पनियों को इसके अंतर्गत ड्रोन बनाने का आर्डर दिया गया था।

युवा शक्ति को बढ़ावा देने के कारण अब सेना के भीतर से भी काफी नई डिजाइन बन रही हैं। भारतीय थल सेना के अफसर प्रताप बनसोड ने एक मशीन पिस्टल (ASMI) बनाई है। भारतीय सेना इसे खरीदने भी जा रही है। भारतीय सेना ने 550 ASMI खरीदने का निर्णय लिया है। यह पूरी तरीके से भारत में ही निर्मित है और विदेशी मशीन पिस्टल से सस्ती भी है।

सालों से अटके थे जो प्रोजेक्ट, अब देश की रक्षा में

मोदी सरकार में दशकों से लंबित रक्षा प्रोजेक्ट को भी रफ़्तार मिली है। जो रक्षा प्रोजेक्ट 1980 के दशक में चालू किए गए थे, वह मोदी सरकार के आने के बाद धरातल पर उतर पाए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस है। LCA तेजस को 1980 के दशक में सरकार की मंजूरी मिली थी, जबकि इसकी पहली सफल उड़ान 2001 में वाजपेयी सरकार के दौरान हुई। इसके बाद यह प्रोजेक्ट कछुए की चाल से चलता रहा।

मोदी सरकार के अंतर्गत इस प्रोजेक्ट ने रफ़्तार पकड़ी और 2015 में पहली बार तेजस को वायु सेना में शामिल किया गया। वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास लगभग 40 तेजस विमान हैं जबकि उसने लगभग 200 तेजस विमानों का आर्डर हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को दे रखा है। तेजस की तरह ही भारतीय वायु सेना में हाल ही में प्रचंड लड़ाकू हेलीकाप्टर भी शामिल किए गए हैं। यह भी लम्बे समय से लटके हुए हुए थे। इसके अलावा सेना ने 550 अर्जुन मार्क-1 बनाने का ऑर्डर दिया है।

देश के पास अब अब स्वनिर्मित एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत है। इसको भी मुख्यतः मोदी सरकार के अंतर्गत ही बनाया गया है। इसको पीएम मोदी ने अगस्त 2022 में देश को समर्पित किया था। 45000 टन विस्थापन वाला यह कैरियर लम्बे समय से बन रहा था।

मोदी सरकार ने कई लम्बे समय से लटके रक्षा सौदों को भी अंतिम रूप देकर सेना के हाथ मजबूत किए हैं। इनमें सबसे बड़ा उदाहरण वायु सेना के लिए खरीदे 36 राफेल जेट्स का है। वायु सेना को लम्बे समय से नए पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत थी। मोदी सरकार ने फ्रांस से डील करके यह विमान खरीदे। इसके अलावा मोदी सरकार ने एयर फ़ोर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए चिनूक और अपाचे जैसे हेलिकॉप्टर खरीदे हैं। मोदी सरकार ने देश की सीमा पर खड़े रहने वाले जवानों के लिए सिग सार कम्पनी की राइफल खरीदी हैं।

नए प्रोजेक्ट पर काम चालू

भारतीय सेनाओं को सबसे नई तकनीक मिले, इसके लिए भी काम चल रहा है। हाल ही में मोदी सरकार ने पाँचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए मंजूरी दी है। इसकी पहली उड़ान 2030 तक होने की आशा है। इसी के साथ ही नौसेना के लिए नई पनडुब्बियों को लेकर भी काम चल रहा है। थल सेना के लिए नया हल्का टैंक बनाया जा रहा है। इसका उपयोग चीन के खिलाफ मुख्यतः किया जाना है। कई अन्य मिसाइलों पर भी काम चल रहा है। इनमें से कई का सफलतापूर्वक परीक्षण हो चुका है।