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सेना की वर्दी में आए थे आतंकी, लोग एक दूसरे को कुचलते हुए भागे: मॉस्को हमले के प्रत्यक्षदर्शी ने बताया भयावह मंजर, अब तक 93 की मौत

मॉस्को आईएस हमले में करीब सौ लोगों की जान जा चुकी है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि जब आतंकी अंधाधुँध फायरिंग कर रहे थे, तो लोग एक-दूसरे के ऊपर से चढ़कर भाग रहे थे। रूस की राजधानी मॉस्को के बाहरी शहर में स्थित क्रॉकस सिटी हाल में आयोजित कॉन्सर्ट के दौरान आईएसआईएस-के के आतंकियों ने हमला कर दिया। उस समय कॉन्सर्ट में 6200 लोग मौजूद थे। बताया जा रहा है कि जब मशहूर बैंड ‘पिकनिक’ अपनी प्रस्तुति देने ही वाला था, तभी ये हमला किया गया। इस हमले के प्रत्यक्षदर्शियों ने भयावह हालात के बारे में बताया है।

आईएसआईएस-के ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले के समय क्रॉकस सिटी हाल में मौजूद रहे प्रत्यक्षदर्शी एलेक्सी ने कहा, “जैसे ही गोलीबारी शुरू हुई मुझे एहसास हुआ कि यह आतंकवादी हमला हो सकता है।” एक पत्रकार ने दावा किया कि हमलावरों ने सुरक्षा बलों की वर्दी में क्रोकस सिटी हॉल में प्रवेश किया और अंधाधुंध गोलीबारी की। आतंकियों ने विस्फोटक से हॉल में धमाका भी किया, जिससे वहाँ आग लग गई।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “अचानक से हमारे पीछे से धमाके और गोलीबारी की आवाज आने लगी। मुझे नहीं पता था कि क्या हुआ है। गोलीबारी की आवाज आते ही लोगों में भगगड़ मच गई। सभी लोग दौड़कर एस्केलेटर की ओर भागे। हर कोई चिल्ला रहा था, हर कोई दौड़ रहा था।”

बता दें कि मॉस्को के पास क्रोकस सिटी हॉल में कॉन्सर्ट पर हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट-खोरासान(ISIS-K) ने ली है। इस हमले में अब तक 93 लोगों की मौत हो चुकी है, तो 140 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

रूस ने गोलीबारी की घटना को आतंकवादी हमला करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह एक आतंकवादी हमला है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस घृणित अपराध की निंदा करनी चाहिए। मॉस्को के मेयर ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हमले के बाद मॉस्को में होने वाले सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने मॉस्को में हुए आतंकी हमले को भयानक बताया। हालाँकि उन्होंने कहा कि इस हमले का यूक्रेन युद्ध से संबंधि होने का तत्काल कोई संकेत नहीं है। अमेरिका ने ये भी कहा कि इस हमले के बारे में 15 दिन पहले ही चेतावनी दी गई थी। अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की प्रवक्ता एडरीन वॉटसन ने कहा, “इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी सरकार के पास मॉस्को में एक सुनियोजित आतंकी हमले की सूचना थी, जिसमें कॉन्सर्ट जैसे भारी भीड़ वाली जगहें निशानें पर थीं।” हालाँकि रूस ने इसे प्रोपेगेंडा कहकर खारिज कर दिया था।

केजरीवाल की गिरफ्तारी जर्मनी को चुभी, कहा- वे निष्पक्ष सुनवाई के हकदार: भारत ने लगाई क्लास, कहा- यह हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप

दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर जर्मनी ने कहा कि उसने चुनाव से पहले विपक्ष के एक बड़े चेहरे की गिरफ्तारी का संज्ञान लिया है। उसने कहा कि केजरीवाल को निष्पक्ष और सही ट्रायल मिलना चाहिए। जर्मनी के विदेश मंत्रालय की इस टिप्पणी पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है और इसे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया है।

जर्मनी के विदेश मंत्रालय के इस बयान पर भारत ने आपत्ति जताई है और दिल्ली स्थित जर्मनी के डिप्टी हेड जॉर्ज एनजवीर को तलब किया है। भारत ने उनसे कहा कि जर्मनी भारत के आतंरिक मामलों में दखलंदाजी न करे। भारत ने कहा कि जिस तरह भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों में कानून अपना काम करता है, इस मामले में भी कानून अपना काम करेगा। पक्षपातपूर्ण धारणाएँ बनाना गलत है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी करते हुए कहा, “नई दिल्ली में जर्मन मिशन के उप प्रमुख को बुलाकर हमारे आंतरिक मामलों पर उनके विदेश मंत्रालय की ओर से की गई टिप्पणी पर भारत के कड़े विरोध से अवगत कराया गया है। हम ऐसी टिप्पणियों को हमारी न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने के रूप में देखते हैं।”

दरअसल, अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद जर्मनी पहला देश है जिसने बयान दिया है। जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत में विपक्ष के एक बड़े राजनीतिक चेहरे को चुनाव से कुछ दिन पहले गिरफ्तार कर लिया गया है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहा है। इस मामले को जर्मनी की सरकार ने संज्ञान में लिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हम उन मानकों में विश्वास रखते हैं और उम्मीद करते हैं कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और बुनियादी लोकतांत्रिक मूल्य से संबंधित सिद्धांत भी इस केस में मामले में लागू किए जाएँगे। अरविंद केजरीवाल निष्पक्ष सुनवाई के हकदार है। बिना किसी प्रतिबंध के उन्हें सभी कानूनी रास्तों के उपयोग का हक मिलना चाहिए।”

जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा था कि जब तक दोष साबित न हो तब तक किसी भी शख्स का निर्दोष मानने के कानूनी सिद्धांत का पालन होना चाहिए। इस सिद्धांत को अरविंद केजरीवाल पर भी लागू किया जाए, यानी जब तक उनका दोष साबित न हो तब तक उन्हें निर्दोष माना जाए।

दरअसल, जर्मनी अपनी भाषा को वैश्विक पटल पर लाने के लिए लगातार कैंपेन चलाता रहा है। साल 2022 में दिल्ली सरकार के बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन और जर्मनी के गोएथे इंस्टिट्यूट के साथ एक साझेदारी हुई थी। इसके तहत दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जर्मन भाषा की पढ़ाई शुरू हुई। इस पर दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और जर्मनी के राजदूत वॉल्टर जे लिंडनेर ने हस्ताक्षर किए थे।

बताते चलें कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर दुनिया भर की मीडिया अपना एजेंडा चलाने में लग गई है। इस मामले में अमेरिकी मीडिया हाउस वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, ‘विरोधियों पर कार्रवाई में तेजी के बीच भारत ने दिल्ली के CM को गिरफ्तार किया’। वहीं, CNN ने अपने मेन पेज की हेडलाइन में लिखा, ‘चुनाव से पहले दिल्ली के CM गिरफ्तार, विपक्ष ने इसे साजिश बताया’।

BBC ने भी केजरीवाल की गिरफ्तारी को अपने मेन पेज पर जगह दी है। बीबीसी ने लिखा है कि भारत में विपक्ष के नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है। कतर के मीडिया हाउस अल जजीरा ने तो ‘मरा हुआ लोकतंत्र‘ नाम से हेडलाइन में लिखा कि पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद CBI और ED द्वारा दायर 95% मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं। 

तिहाड़ में तुम्हारा स्वागत है बॉस… केजरीवाल को सुकेश चंद्रशेकर ने लिखा खत, कहा- इसने 10 घोटाले किए, 4 का मैं गवाह हूँ

ठगी के आरोप में जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। 5 पेज की इस चिट्ठी में सुकेश ने मुख्यमंत्री केजरीवाल का तिहाड़ जेल में स्वागत किया है। महाठग ने आम आदमी पार्टी पर व्यंग कसते हुए उन्हें भ्रष्टाचार में लिप्त बताया। अंत में कानून की जीत होने का दावा करते हुए सुकेश ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को नए भारत की ताकत का उदाहरण बताया है। यह चिट्ठी शुक्रवार (22 मार्च 2024) को लिखी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तिहाड़ जेल से भेजी गई अपनी चिट्ठी में सुकेश ने अरविंद केजरीवाल को सम्बोधित किया। उनने लिखा, “अरविंद केजरीवाल, सबसे पहले तो मैं आपका स्वागत करता हूँ। तिहाड़ क्लब का बॉस। आपकी कट्टर ईमानदारी के सभी जुमले और नाटक खत्म हो चुके हैं। मैं बहुत सौभाग्यशाली हूँ कि मेरे जन्मदिन से 3 दिन पहले आप गिरफ्तार हुए हैं। आपकी पार्टी के सारे भ्रष्टाचार सामने आ गए। आपकी पार्टी को आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ेगा। हमेशा की तरह सत्य की जीत होती है।”

अपनी चिट्ठी में सुकेश ने आगे अरविंद केजरीवाल पर तंज किया है। उन्होंने लिखा, “आपकी गिरफ्तारी मेरे लिए जन्मदिन का बेस्ट गिफ्ट है। आपको पता नहीं था कि सच्चाई ज्यादा देर तह छुप नहीं सकती है। मैं खुश हूँ कि मेरे 3 भाई अब तिहाड़ क्लब चलाने के लिए यहाँ हैं।” इन 3 लोगों को सुकेश ने A,B और C कैटेगरी में बाँटा है। इसमें A का मतलब अरविंद केजरीवाल, B का अर्थ मनीष सिसोदिया और C का तात्पर्य सुरेंद्र जैन से है। सुकेश का यह भी दावा है कि केजरीवाल के भ्रष्टाचार खुल कर आगे आने वाले हैं।

चिट्ठी में सुकेश चंद्रशेखर ने कहा है कि मुख्यमंत्री रहने के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कम से कम 10 घोटाले किए हैं। इसमें से सुकेश ने 4 घोटालों का चश्मदीद तो खुद को ही बताया है और उसके सबूत होने का भी दावा किया है। सुकेश ने आगे लिखा, “दिल्ली के गरीबों को लूटा है। मैं तुम्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दूँगा। यहाँ तक कि तुम्हारे खिलाफ सरकारी गवाह भी बना दूँगा। दिल्ली एक्ससाइज मामला तो बस एक शुरुआत है।” वर्तमान समय को रामराज्य बताते हुए सुकेश ने आगे लिखा कि भगवान राम ने अरविंद केजरीवाल को सजा दी है।

चिट्ठी में सुकेश ने आम आदमी पार्टी को दुनिया की सबसे भ्रष्ट पार्टी बताया है। उन्होंने दावा किया है कि कई जेल अधिकारी अरविंद केजरीवाल की कठपुतली जैसे हैं। हालाँकि बावजूद इसके सुकेश का दावा है कि वो अरविंद केजरीवाल को बेनकाब करेंगे भले ही बाद में कोई उनसे इसका बदला ही कोई क्यों न ले। अंत में सुकेश ने केजरीवाल से पूछा कि तुम अब क्या हो। सुकेश ने यही तमाम दावे जेल से पेशी के दौरान आने पर मीडिया को भी दिए हैं।

टॉयलेट में हिंदू छात्रा का Video बनाने के केस में 3 मुस्लिम लड़कियों के खिलाफ चार्जशीट, सबूत मिटाने के लिए वीडियो किए थे डिलीट: उडुपी के कॉलेज का है मामला

कर्नाटक के उडुपी जिले में पिछले साल एक मामला सामने आया था, जहाँ की तीन मुस्लिम लड़कियों पर हिंदू छात्राओं की वीडियो रिकॉर्डिंग का आरोप लगा था। इस मामले के आठ माह बीत जाने के बाद अब कर्नाटक की सीआईडी ने चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें नेत्र ज्योति कॉलेज के प्रिंसिपल और तीनों मुस्लिम छात्राओं शबानाज, अल्फिया और अलीमथ उल सफा के नाम हैं।

सीआईडी अधिकारी ने बताया कि हमने फोन से अन्य फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए और जाँच के दौरान लड़कियों ने भी अपराध कबूल कर लिया। इनके आधार पर हमने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर किया। सीआईडी की जाँच में ये बात साबित हुई है कि शबानाज, अल्फिया और अलीमथ उल सफा ने हिंदू सहपाठी का वीडियो बनाने के लिए मोबाइल फोन को शौचालय में रखा था, लेकिन मामला बढ़ जाने के बाद उन्होंने सबूत मिटाने के लिए वो वीडियो डिलीट कर दिया। ये चार्जशीट सीआईडी की डिप्टी एसपी अंजू माला की तरफ से दाखिल की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में तीनों लड़कियों ने माफीनामा भी लिखा था। उन्होंने कथित तौर पर बताया था कि वो किसी और का वीडियो बनाना चाहती थी, लेकिन किसी और का बन गया। इस मामले में माफीनामे की भी जाँच की गई है, जिसकी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने पुष्टि की और बताया कि पत्र की लिखावट आरोपितों की लिखावट से ही मिलता है। हालाँकि सीआईडी ने कहा कि इस मामले में कोई ‘सांप्रदायिक’ एंगल नहीं था।

इस मामले में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सीआईडी ​​अधिकारी ने बताया , “हमने फोन से अन्य फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए और जाँच के दौरान लड़कियों ने भी अपराध कबूल कर लिया। इनके आधार पर हमने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर किया।” एक अन्य अधिकारी ने न्यूज18 से कहा, “लड़कियों ने दावा किया कि उन्होंने मनोरंजन के लिए ऐसा किया, लेकिन यह एक दंडनीय अपराध है।”

एक अन्य अधिकारी ने बताया है कि ये वीडियो किसी के पास भेजा नहीं जा सका, क्योंकि बवाल होते ही उन्होंने तुरंत वीडियो को डिलीट कर दिया। अभी उस वीडियो को रिकवर भी नहीं किया जा सका है। इस मामले में अब सीआईडी ने शबनाज, अल्फिया और अलीमथ उल सफा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 204 (गुप्त रूप से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करना), 509 (किसी भी महिला की गरिमा का अपमान करने का इरादा) और सूचना की धारा 66 ई के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है। बता दें कि इस मामले में सभी को पिछले साल ही जमानत मिल गई थी।

जिसने 2 हिंदू बच्चों को रेता वह साजिद गाँव के मुस्लिमों के लिए- ‘सीधा, नेक, शरीफ’… दादी बोली- जावेद बेकसूर, वह तो घर के पास मिट्टी खोद रहा था

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में गुरुवार (19 मार्च 2024) को 2 हिन्दू बच्चों की गला रेत कर निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। इस हमले में तीसरा बच्चा घायल हो गया था। पुलिस ने इस मामले में 20 मार्च को आरोपित साजिद को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था वहीं फरार चल रहे 25 हजार के इनामी जावेद को इसी दिन बरेली से दबोच लिया गया था। दोनों हमलावर सगे भाई ही हैं। ऑपइंडिया इनके बारे में जानकारी जुटाने इनके गाँव तक गया जहाँ बातचीत के दौरान जावेद-साजिद के परिवार वालों ने और आसपास वाले लोगों ने पत्रकारों और आम लोगों को भ्रमित करने की हर सम्भव कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 मार्च 2024 को जावेद को बदायूँ के चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। यहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस उससे और अन्य लोगों से पूछताछ के जरिए ये जानने में जुटी है कि आखिर दोनों हिंदू बच्चों की इतनी निर्ममता से की गई हत्या के पीछे मुख्य कारण क्या था। घटना के 4 दिन बीत जाने के बाद भी इस सवाल का जवाब इसलिए नहीं मिल पाया है क्योंकि जावेद और उसके परिजन लगातार अपने अलग-अलग बयान देकर पुलिस, मीडिया और आमजन को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

बुजुर्ग दादी तक के दावे पुलिस के बयान से अलग

ऑपइंडिया की टीम 21 मार्च को साजिद के गाँव में पहुँची थी। यहाँ हमें साजिद की दादी मिलीं जिनकी उम्र लगभग 70 साल है। साजिद की दादी ने हमें देखते ही खुद के खानदानी परिवार से होने और जावेद की बेगुनाही की बातें करनी शुरू कर दीं। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय जावेद मौके पर था ही नहीं और वो घर के पास मिट्टी खोद रहा था। हमें घर से सटी वो जगह भी दिखाई गई जहाँ मिट्टी खुदी हुई थी। जावेद की दादी के अलावा गाँव मुज़फ्फर ने भी यही बात दोहराई। रुखसाना ने तो जावेद और यहाँ तक कि साजिद की शान में कसीदे तक गढ़ने शुरू कर दिए। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि बच्चों की हत्या होने के बाद घर पर फोन आया। तब जावेद अपने भाई साजिद की खोज-खबर लेने गाँव से बदायूँ शहर गया था।

हालाँकि FIR की कॉपी और IG राकेश कुमार सिंह के बयान से साजिद की कथित खानदानी दादी, मुज़फ्फर और रुखसाना की पोल खुल गई। FIR कॉपी, मृतक बच्चों की माँ और पुलिस के बयान में यह दावा किया गया है कि घटना के समय जावेद घर के नीचे मौजूद था। ऑपइंडिया ने मृतकों के मोहल्ले में भी स्थानीय लोगों से बातें की तो उन्होंने बताया कि दोनों साजिद और जावेद दोनों ही कत्ल से पहले और बाद में एक साथ देखे गए थे। इसमें सबसे सनसनीखेज दावा यह था कि रात 10 बजे तक दुकान खोल कर रखने वाले और जावेद ने घटना के दिन लगभग 1 बजे ही शटर गिरा दिए थे।

रोजा था तो रोटी क्यों माँगी ?

इसके बाद दादी ने दावा किया कि साजिद ने 5 बजे के करीब अपनी बीवी से रोटी माँगी थी जबकि जावेद ने पुलिस को दी जानकारी में खुद बताया कि वो दोनों रोजा रखे हुए थे। इसके अलावा जैसा कि साजिद की दादी दावा करती है कि उसकी बीवी घर पर थी और कहीं से फोन आने के बाद साजिद ने उससे खाना माँगा था, वो दावा भी झूठा लगता है क्योंकि आज तक ने एक रिपोर्ट में साजिद की बीवी तक पहुँचकर उनसे बात की थी।

उस रिपोर्ट में सना और उसकी अम्मी ने दावा किया था कि वो घटना से 15 दिन पहले से अपने मायके में है। ऐसे में न तो बदायूँ में और न साजिद के गाँव सखानू में सना और साजिद के साथ होने की बात साबित होती है… तो फिर सोचने की बात है कि दादी ने ऐसा क्यों कहा? क्या ये सारे बयान बनावटी हैं?

तुरंत घटनास्थल पर कैसे पहुँच गया जावेद

जावेद और उसके घर वालों का दावा है कि मिट्टी खोदने के दौरान उसे अपने भाई के झगड़े की सूचना मिली तो वो बाइक से भाग कर गाँव से बदायूँ शहर गया। मगर, ऑपइंडिया ने पाया कि जावेद के गाँव से घटनास्थल तक पहुँचने में लगभग 35-40 मिनट का समय लगता है। अगर परिवार की बातें सहीं हैं तो फिर जावेद फौरन कैसे अपने गाँव से बदायूँ घटनास्थल पर पहुँच गया जैसा कि उसने खुद बताया है।

खुद जावेद ने कहा है कि उसने अपने भाई को जब छत से खून से सने हाथ लेकर उतरते देखा तो वो वहाँ से भाग गया। इसके अलावा कहीं कहीं मौजूद जानकारी के अनुसार उसने ये भी कहा है कि वो घटना की जानकारी होने पर तुरंत घटनास्थल पर आया था और फिर भीड़ जमा देखकर वहाँ से भागा था।

जो कभी मिले नहीं वो भी ले रहे अच्छाई की गारंटी

परिजनों के अलावा साजिद के गाँव सखानू में एक शाहनवाज नाम का शख्स मिला। शाहजवाज से जब दोनों लड़कों की जानकारी हमने माँगी तो उन्होंने जावेद और साजिद को निहायत नेक और शरीफ बताया। हमने पूछा कि वो कितनी बार इन दोनों से मिल चुके हैं। जवाब में उन्होंने कहा, “एक बार भी नहीं।” हालाँकि शाहनवाज हमें यह नहीं बता पाए कि उनके द्वारा किस आधार पर साजिद और जावेद को शरीफ बोला जा रहा है। सिर्फ उन्होंने उनको शरीफ बताया और अपनी बात वही बात कहते रहे। इसी तरह मुजफ्फर ने साजिद को सीधा-सादा बताया और रुखसाना ने तो दो कदम आगे बढकर यह भी कहा कि वह औरतों और बच्चों की कदर करता था।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे के आतंकियों की पहचान: ISIS के शिवमोगा मॉड्यूल से जुड़े हैं मुसाविर हुसैन शाज़िब और अब्दुल माथेरन ताहा, दोनों पर पहले से ₹3-3 लाख का इनाम

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के रामेश्वर कैफे में हुए ब्लास्ट के आरोपित की पहचान कर ली गई है। इसकी पहचान मुसाविर हुसैन शाज़िब के रूप में हुई है और इसी कैफे में IED रखा था। इतना ही नहीं, शाजिब के साथ देने वाले आतंकी की भी पहचान कर ली गई है। उसका नाम अब्दुल माथेरन ताहा है। दोनों कर्नाटक के शिवमोगा जिले के तीर्थहल्ली के निवासी हैं और ISIS के शिवमोगा मॉड्यूल से जुड़े हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दोनों के ऊपर 3-3 लाख रुपए का इनाम रखा है। दोनों कर्नाटक में साल 2020 में हुई एक आतंकी घटना में वॉन्टेड हैं। दोनों ने 1 मार्च 2024 को बेंगलुरु के रामेश्वर कैफे में IED ब्लास्ट किया था, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे। हालाँकि, यह ब्लास्ट बहुत शक्तिशाली नहीं था, लेकिन इसके कारण अफरा-तफरी मच गई थी।

आरोपितों की पहचान के लिए NIA ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले थे। इन सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध अलग-अलग वेश-भूषा में नजर आए थे। तस्वीरों में आतंकी कभी टोपी पहने तो कभी मास्क लगाए नजर आया था। उसकी बस में यात्रा की तस्वीरें भी सामने आई थीं। NIA ने संदिग्ध की एक तस्वीर जारी करते हुए जानकारी देने वाले को 10 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी।

एनआईए के सूत्रों ने विस्फोट से पहले उनके मूवमेंट की जाँच की और पाया कि दोनों चेन्नई के ट्रिप्लीकेन में एक लॉज में रुके थे और विस्फोट के बाद फिर से चेन्नई लौट आए थे। आरोपितों का आखिरी ठिकाना आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में पाया गया है, जिसकी सीमा तमिलनाडु राज्य से लगती है। शाजिब की पहचान उसकी टोपी से की गई है।

जाँच से पता चला कि शाजिब और ताहा ने चेन्नई के मायलापुर के एक मॉल से टोपी हासिल की थी और ट्रिप्लिकेन में ठहरे थे। इससे पहले, जाँचकर्ताओं ने संदिग्ध के कई सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए थे, लेकिन टोपी के कारण उसकी पहचान छिपी रही। हालाँकि, टोपी पर अंकित नंबर के आधार पर NIA ने इसकी जानकारी हासिल की और पता चला कि इसे जनवरी में एक मॉल से खऱीदा गया था।

जाँच के दौरान पता चला कि यह टोपी सीमित संस्करण की थी और इसे दक्षिणी राज्यों में लगभग 400 लोगों को बेचा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, “खरीदारी के दिन मॉल के सीसीटीवी फुटेज में कर्नाटक के तीर्थहल्ली के निवासी शाजिब और ताहा दिखे। दोनों आंध्र प्रदेश जाने से पहले फर्जी आईडी का उपयोग करके जनवरी और फरवरी में ट्रिप्लिकेन में एक लॉज में रुके थे।”

एनआईए के अधिकारियों ने इस टोपी को बेंगलुरु में घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर एक शौचालय से बरामद किया था। इस टोपी पर मिले बालों के नमूने इकट्ठे किए गए और उसकी फोरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया गया था। इसके बाद एनआईए ने शाजिब के निकटतम परिवार के सदस्यों के डीएनए से बाल के डीएनए का मिलान किया तो मिल गया। इसके बाद उसकी पहचान हुई।

शिक्षक भर्ती घोटाला केस में ममता बनर्जी के मंत्री के घर ED का छापा, ₹40 लाख की नकदी बरामद: दावा- नहीं बता पाए इतना रुपया कहाँ से आया

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के कैबिनेट मंत्री चंद्र नाथ सिन्हा के घर पर ईडी की छापेमारी हुई है, जिसमें 40 लाख की रकम बरामद हुई है। चंद्र नाथ सिन्हा का नाम एक आरोपित की डायरी से मिला था, जिसके बाद ये छापेमारी की गई। मंत्री इस 40 लाख की रकम का स्रोत नहीं बता पाए। ईडी ने ये छापेमारी शुक्रवार (22 मार्च 2024) को की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार टीएमसी यूथ विंग के नेता कुंतल घोष के पास से एक रजिस्टर मिला था, उस रजिस्टर में चंद्र नाथ सिन्हा का नाम मिला था। कुंतल घोष को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

ईडी सूत्रों के हवाले से पता चला है कि चंद्र नाथ सिन्हा के बीरभूम जिले में स्थित बोलपुर के घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। ये छापेमारी शुक्रवार को सुबह से लेकर रात करीब 10.30 बजे तक चली। ईडी की टीम सुबह 9 बजे ही चंद्र नाथ सिन्हा के ठिकाने पर पहुँच गई थी। बताया जा रहा है कि चंद्र नाथ सिन्हा का मोबाइल फोन भी ईडी ने जब्त कर लिया है। इस छापेमारी के दौरान ही ईडी को 40 लाख की रकम भी मिली, जिसके स्रोत के बारे में सिन्हा कोई जानकारी नहीं दे पाए।

व्यापारी प्रसन्ना रॉय भी गिरफ्तार

इससे पहले, बुधवार (20 मार्च 2024) को टीएमसी से जुड़े बिजनेसमैन प्रसन्ना रॉय को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। प्रसन्ना से ईडी की टीम ने करीब 11 घंटों तक कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पूछताछ की थी और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया। प्रसन्ना पिछले साल भी गिरफ्तार हुए थे। तब सीबीआई ने प्रसन्ना की गिरफ्तारी की थी, जिसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। हालाँकि अब वो एक बार फिर से गिरफ्तार हो चुके हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई जाँच

बता दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये जाँच शुरू हुई थी, जिसकी कमान ईडी और सीबीआई दोनों ही संभाल रही हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में अब तक कई नामी लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी शामिल हैं।

‘…जेल से चलाऊँगा अपनी सरकार’: CM केजरीवाल के खिलाफ HC में याचिका दायर, AAP के एक और MLA के घर ED ने छापा मारा

शराब घोटाले में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को राउज एवेन्‍यू कोर्ट ने शुक्रवार (22 मार्च 2024) को 7 दिन की रिमांड पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हवाले कर दिया। इस कोर्ट में पेशी के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जरूरी हुआ तो वे जेल से सरकार चलाएँगे। वहीं, उन्हें पद से हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “जब प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी मेरे आवास पर आए तो मैं अपने माता-पिता के साथ बैठा था। दुर्भाग्य से मुझे ले जाने से पहले मैं उनका आशीर्वाद नहीं ले सके, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने मेरे साथ सम्मानजनक व्यवहार किया। अगर जरूरत पड़ी तो मैं जेल से भी दिल्ली सरकार चलाऊँगा।”

हालाँकि, केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस का यह अधिकारी आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को भी गिरफ्तार करने में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें अदालत में सुनवाई के लिए लाया जा रहा था, तब दिल्ली पुलिस के ACP रैंक के एक अधिकारी ने उनके साथ दर्रव्यवहार किया।

वहीं, आम आदमी पार्टी के एक और विधायक गुलाब सिंह यादव के आवास पर शनिवार (23 मार्च 2024) को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने छापा मारा। हालाँकि, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने ये स्पष्ट नहीं किया कि दिल्ली विधायक के घर पर छापेमारी का आबकारी नीति मामले से संबंधित है या नहीं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जेल से सरकार चलाने की बात कहने के बाद इस पर राजनीति तेज हो गई है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट में उनके खिलाफ याचिका भी दाखिल की गई है। खुद को किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता कहने वाले सुरजीत सिंह यादव ने अपनी जनहित याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी उन्हें सार्वजनिक पद पर बने रहने के अयोग्य बनाती है।

उन्होंने दावा किया है कि घोटाले में फँसे मुख्यमंत्री को पद बने रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी कानून की उचित प्रक्रिया में बाधा डालती है, बल्कि राज्य की संवैधानिक मशीनरी को भी कमजोर करती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 का भी हवाला दिया गया है।

दूसरी तरफ, जेल से सरकार चलाने के बयान पर भाजपा ने केजरीवाल पर हमला बोला है। दिल्ली भाजपा ने शनिवार (23 मार्च 2024) को कहा कि जेल के अंदर से सरकार नहीं चलाई जाती है। जेल से अंदर से सिर्फ ‘गिरोह’ चलते हैं। मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली के लोग केजरीवाल की गिरफ्तारी का जश्न मना रहे हैं और मिठाइयाँ बाँट रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने दिल्ली को बदहाली के कगार पर पहुँचाने के लिए अपनी जान दे दी है। दिल्ली के लोग उनसे बहुत नाराज हैं और इसीलिए उनकी गिरफ्तारी के बाद मिठाइयाँ बाँटी गईं। उनकी सरकार ने दिल्ली में कोई काम नहीं किया है और केवल लूट कर अपनी जेबें भरी हैं। केजरीवाल ने दिल्ली को लूट लिया है।” उन्होंने केजरीवाल से इस्तीफे की माँग की है।

भारत को ₹3352 करोड़ लौटाने की बारी आई तो टूटी मालदीव की हेकड़ी, माँगी मोहलत: राष्ट्रपति मुइज्जु बोले- न छोड़ें साथ, हमारी मुश्किल बढ़ जाएगी

चीन के मानसिक गुलाम मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अब कहा है कि देश में विकास कार्यों के लिए निकटतम सहयोगी भारत से उन्हें काफी उम्मीदें हैं। कुछ समय पहले यही मुइज्जू मालदीव से भारतीय सेना को हटाने पर अड़ा हुआ था। भारत को भी अपनी सेना हटानी पड़ी और उन्हें गैर-सैनिक कर्मियों से बदलना पड़ा था। बता दें कि पिछले साल के आखिर तक मालदीव पर भारत का लगभग 400.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 35 अरब रुपये) बकाया था। इसे चुकाने के लिए मुइज्जू ने भारत से समय माँगा है।

मालदीव के राष्ट्रपति पद को संभालने के कुछ समय बाद ही उसे अपने देश की हैसियत का अंदाजा लग गया। चीन ने उसे आर्थिक मदद तो दी, लेकिन कर्ज के जाल में भी फँसा दिया। ऐसे में अब मालदीव्स घुटने पर आ गया है। मालदीव के राष्ट्रपति ने लोकल मीडिया से बातचीत में कहा है कि भारत मालदीव को सहायता प्रदान करने में अग्रणी देश रहा है। इसके साथ ही मालदीव पर भारतीय कर्जे को चुकाने के लिए भी उसने मोहलत माँगी है। बता दें कि मालदीव पर भारत का भी काफी कर्ज है, जिसकी किश्त उसे पिछले साल के आखिर तक चुकाया था। इस किस्त की रकम 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा की है, जिसके लिए वो अब भारत से समय माँग रहा है और राहत देने की गुजारिश कर रहा है।

मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव पर जो कर्ज है, वो काफी ज्यादा है। हम भारत से कर्जों को चुकाने के लिए राहत देने की माँग करने वाले हैं। भारत जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, वो रुकनी नहीं चाहिए, वर्ना देश की दिक्कतें बढ़ जाएँगी। मुइज्जूों ने कहा, “हमें जो परिस्थितियाँ विरासत में मिली हैं, उसमें लोन की रकम काफी ज्यादा है। इतना कि मालदीव की कुल अर्थव्यवस्था से भी अधिक। भारत के लोन को चुकाने के लिए हमें और अधिक समय लगेगा।”

गौरतलब है कि मोहम्मद मुइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है। उसने अपने चुनावी अभियान के दौरान ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था। उसने राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के प्रति सख्त रुख अपनाया और भारत को मालदीव से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की माँग की थी। हालाँकि बाद में सैनिकों की जगह असैनिक कर्मचारियों को भेजने पर सहमति बन गई।

मालदीव से जुड़ा एक और विवाद सामने आया था, जिसमें मुइज्जू की चीन यात्रा के समय मालदीव्स के मंत्रियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थी, जिसके बाद भारतीय नागरिकों ने मालदीव्स का बहिष्कार कर दिया था। इस अभियान की वजह से मालदीव की अर्थव्यवस्था को भी झटका लगा, जिसकी वजह से भारतीय पर्यटकों ने मालदीव की बुकिंग्स तक कैंसिल करा दी। इसके बाद मालदीव्स की सरकार को भारतीयों से माफी माँगनी पड़ी थी।

TMC की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा के कई ठिकानों पर CBI की छापेमारी, उनके पिता के आवास पर भी पहुँची जाँच एजेंसी: पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में कार्रवाई

तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शनिवार (23 मार्च 2024) को उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की। CBI ने ये कार्रवाई भ्रष्टाचार रोधी संस्था लोकपाल के निर्देशों पर की है। इससे पहले सीबीआई ने गुरुवार (21 मार्च 2024) को महुआ पर केस दर्ज किया था।

सीबीआई की यह कार्रवाई कैश फॉर क्वेरी मामले से जुड़ा है। एजेंसी महुआ मोइत्रा के कोलकाता समेत कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। दिल्ली से गई सीबीआई की एक टीम महुआ मोइत्रा के पिता के दक्षिण कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित उनके फ्लैट पर पहुँची है और उसकी तलाशी ले रही है।

महुआ के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाए थे। इसकी प्रारंभिक जाँच के बाद लोकपाल ने सीबीआई को निर्देश जारी किए। लोकपाल ने CBI को इस मामले के सभी पहलुओं की जाँच करके 6 महीने में रिपोर्ट देने को कहा है। दुबे ने आरोप लगाया था कि महुआ ने उद्योगपति गौतम अडानी पर हमला करने के लिए व्यवासायी दर्शन हीरानंदानी के कहने पर लोकसभा में सवाल पूछे थे।

न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी, सदस्य अर्चना रामसुंदरम और महेंद्र सिंह की लोकपाल पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एक सांसद के रूप में महुआ मोइत्रा के खिलाफ लगाए गए आरोप ठोस सबूत पर आधारित हैं और ये आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। लोकपाल की पीठ ने कहा कि इस बारे में सच का पता लगाने के लिए गहन जाँच की आवश्यकता है।

बता दें कि महुआ ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। पिछले साल दिसंबर में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने अपने निष्कासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हालाँकि, उन्हें राहत नहीं मिली। वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है।