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भूटान में PM मोदी ने किया ‘माताओं और बच्चों’ के लिए अस्पताल का उद्घाटन, भारत सरकार ने दिया निर्माण का पूरा फंड: शिलापट पर दिखेगा तिरंगा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान की 2 दिवसीय यात्रा यादगार रहेगी। शुक्रवार (22 मार्च 2024) को पीएम थिम्पू के पारो एयरपोर्ट पहुँचे थे। यहाँ भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने ‘बड़ा भाई’ कहकर उनकी अगुवानी की। हवाई अड्डे से थिम्पू के 45 किलोमीटर लम्बे मार्ग को भारत और भूटान के झंडों से सजाया गया था। वहीं सड़क के दोनों तरफ भूटानी लोग भी खड़े थे जो पीएम का अभिवादन कर रहे थे।

इस यात्रा के दौरान PM मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ और पीएम मोदी ने थिम्पू में ग्यालत्सुएन जेत्सुन पेमा वांगचुक मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का उद्घाटन किया। खास बात यह है कि इस अस्पताल को बनाने में पूरा पैसा भारत द्वारा लगाया है। पीएम मोदी ने ‘ग्यालत्सुएन जेत्सुन पेमा वांगचुक मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल’ का उद्घाटन करके अस्पताल का दौरा भी किया। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने PM मोदी को वहाँ के स्ट्रक्चर और सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। अस्पताल के शिलापट पर एक तरफ भारत और दूसरी तरफ भूटान का झंडा लगा हुआ है।

इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने नरेंद्र मोदी को ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित किया। PM मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष हैं। यह सम्मान मिलने पर ख़ुशी जताते हुए मोदी ने भूटान नरेश को धन्यवाद किया है। खुद को मिले इस सम्मान को प्रधानमंत्री मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया है।

बता दें कि मुताबिक भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को ‘प्रथम पड़ोसी की नीति’ करार दिया है। मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच नियमित और हाई लेवल वैचारिक आदान-प्रदान की परम्परा बताया। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भी नरेंद्र मोदी की यात्रा पर बेहद उत्साह दिखाया है। अपने X हैंडल पर उन्होंने PM मोदी को ‘बड़े भाई’ कह कर लिखा, “आपका स्वागत है।” वहीं PM मोदी भी इस यात्रा के दौरान बेहद खुश दिखे। इस अवसर पर उन्होंने दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद जताई।

इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने नरेंद्र मोदी को ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित किया। PM मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष हैं। यह सम्मान मिलने पर ख़ुशी जताते हुए मोदी ने भूटान नरेश को धन्यवाद किया है। खुद को मिले इस सम्मान को प्रधानमंत्री मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया है। बताते चलें कि पहले यह यात्रा 21 और 22 मार्च को होनी थी लेकिन भूटान में खराब मौसम के चलते समय में थोड़ा बदलाव करना पड़ा था।

‘बहरों को सुनाने के लिए ऊँची आवाज़ की ज़रूरत’: ब्रिटिश सरकार को नाकों चने चबवा दिए थे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु, शहीद दिवस पर देश कर रहा नमन

भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के दो मुखर स्वर थे, एक अहिंसक आंदोलन तो दूसरा सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन। सन् 1857 से लेकर 1947 तक भारतीय स्वतंत्रता हेतु जितने भी प्रयत्न हुए, उनमें क्रांतिकारियों का आंदोलन सर्वाधिक प्रेरणादायक रहा।

भारत को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र विद्रोह की एक अखण्ड परम्परा रही है। भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना के साथ ही सशस्त्र विद्रोह का आरम्भ हो गया था। वस्तुतः क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का गौरवशाली स्वर्ण युग ही था। अपनी मातृभूमि की सेवा, उसके लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने की जो भावना उस दौर में प्रस्फुटित हुई, आज उसका नितांत अभाव हो गया है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात आधुनिक नेताओं ने भारत के सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन को प्रायः दबाते हुए उसे इतिहास में कम महत्व दिया और कई स्थानों पर उसे विकृत भी किया गया। स्वराज्य उपरान्त यह सिद्ध करने की चेष्टा की गई कि हमें स्वतंत्रता केवल कॉन्ग्रेस के अहिंसात्मक आंदोलन के माध्यम से मिली है। इस नए विकृत इतिहास में स्वाधीनता के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले, सर्वस्व समर्पित करने वाले असंख्य क्रांतिकारियों, अमर हुतात्माओं की पूर्ण रूप से उपेक्षा की गई।

23 मार्च 1931 का दिन भारतीय इतिहास में अत्यन्त ही हृदयविदारक घटना के रुप में याद किया जाता है। ये वही काला दिन है, जब क्रूर अंग्रेज़ी हुक़ूमत ने मात्र 23 वर्षीय भगत सिंह और सुखदेव थापर तथा 22 वर्षीय शिवराम हरि राजगुरु को राष्ट्रप्रेम के अपराध में फाँसी दे दी और आज़ादी के ये मतवाले सदा के लिए अमर हो गए।

लाला लाजपत राय की हत्या का प्रतिशोध

सन् 1927 में काकोरी कांड के सिलसिले में भगत सिंह ने अपना नाम बदलकर ‘विद्रोही’ नाम से एक लेख लिखा था, जिसके कारण उन्हें पहली बार गिरफ़्तार किया गया था। लाहौर में दशहरे के मेले में बम विस्फोट का आरोप भी उन पर लगाया गया था। बाद में अच्छे व्यवहार के कारण उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था।

उसी वर्ष जब साइमन कमीशन भारत आया तो लाला लाजपत राय ने उसका पुरजोर विरोध किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एसपी जेए स्कॉट ने निर्दोष भीड़ पर लाठीचार्ज करने का आदेश दे दिया। उसने दूर से ही लाला लाजपत राय को देख लिया। उसने उन पर बेंत बरसाना शुरू कर दिया और तब तक बेंत चलाता रहा, जब तक वो लहूलुहान होकर ज़मीन पर नहीं गिर गए। लाला जी ने घोर पीड़ा में भी दहाड़ते हुए कहा था:

“हमारे ऊपर चलाई गई हर लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में ठोकी गई कील साबित होगी।”

उनकी शहादत से समूचा भारतवर्ष आहत और आक्रोशित था। भगत सिंह जैसे तमाम क्रांतिकारी लाला जी को अपना आदर्श मानते थे और वे चुप नहीं बैठने वाले थे। 10 दिसंबर 1928 को भगवती चरण वोहरा की पत्नी दुर्गा देवी की अध्यक्षता में देश भर के क्रांतिकारियों की लाहौर में एक बैठक हुई। इसमें यह तय हुआ कि लाला जी की मौत का बदला लिया जाएगा।

सैंडर्स की हत्या

योजना अनुसार भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद और जयगोपाल स्कॉट को मारने के अभियान में निकल पड़े। स्कॉट की कार का नंबर 6728 था। उसके थाने पहुँचने की सूचना देने की ज़िम्मेदारी जय गोपाल को सौंपी गई। उन्होंने स्कॉट को पहले कभी नहीं देखा था। उस दिन स्कॉट छुट्टी पर था। थाने से बाहर आ रहे असिस्टेंट एसपी जेपी सैंडर्स को उन्होंने स्कॉट समझ लिया।

इसके बाद जय गोपाल ने अपने साथियों को हमले का संकेत दे दिया। राजगुरू ने अपनी जर्मन माउज़र पिस्टल से असिस्टेंट एसपी जेपी सैंडर्स पर गोली चला दी। भगत सिंह चिल्लाते ही रह गए, ‘नहीं, नहीं, नहीं… ये स्कॉट नहीं हैं’, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। जब सैंडर्स गिरा तो भगत सिंह ने भी उस पर कुछ गोलियाँ दाग दीं।

स्वतंत्रता सेनानी शिव वर्मा अपनी किताब ‘रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ फ़ेलो रिवोल्यूशनरीज़’ में लिखते हैं, “जब भगत सिंह और राजगुरू सैंडर्स को मारने के बाद भाग रहे थे तो एक हेड कॉन्सटेबल चानन सिंह उनका पीछा करने लगा। जब आज़ाद के चिल्लाने पर भी वो नहीं रुका तो राजगुरु ने उसे भी गोली मार दी।”

अगले दिन शहर की दीवारों पर लाल स्याही से बने पोस्टर चिपके पाए गए, जिन पर लिखा था, “सैंडर्स इज़ डेड। लाला लाजपत राय इज़ एवेंज्ड।”

बहरों को सुनाने के लिए सेंट्रल असेंबली में धमाका

आगरा में ही भगत सिंह और उनके साथियों की एक बैठक हुई, जिसमें सैंडर्स को मारे जाने के परिणाम पर बड़ी बहस हुई। सबका मानना था कि इस हत्या का वो असर नहीं हुआ, जिसकी वो सब उम्मीद कर रहे थे। उनको उम्मीद थी कि इससे डरकर बड़ी संख्या में अंग्रेज़ भारत छोड़ देंगे।

उन्हीं दिनों असेंबली में दो बिलों पर विचार किया जाना था। एक था ‘पब्लिक सेफ़्टी बिल’, जिसमें सरकार को बिना मुक़दमा चलाए किसी को भी गिरफ़्तार करने का अधिकार दिया गया था। दूसरा था ‘ट्रेड डिस्प्युट बिल’, जिसमें श्रमिक संगठनों को हड़ताल करने की मनाही हो गई थी।

जिस दिन ये बिल पेश किए जाने थे यानी 8 अप्रैल को, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ख़ाकी कमीज़ और शॉर्ट्स पहने हुए सेंट्रल असेंबली की दर्शक दीर्घा में पहुँच गए। उस समय असेंबली में कई बड़े नेता- जैसे कि विट्ठलभाई पटेल, मोहम्मद अली जिन्ना और मोतीलाल नेहरू मौजूद थे।

भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास

कुलदीप नैयर लिखते हैं, भगत सिंह ने बहुत सावधानी से उस जगह बम लुढ़काया जहाँ एसेंबली का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। जैसे ही बम फटा पूरे हॉल में अँधेरा छा गया। बटुकेश्वर दत्त ने दूसरा बम फेंका। तभी दर्शक दीर्घे से असेंबली में कागज़ के पैम्फ़लेट उड़ने लगे। उन पैम्फ़लेटों पर लिखा था, “बहरों को सुनाने के लिए ऊँची आवाज़ की ज़रूरत होती है।”

इस दौरान असेंबली के सदस्यों को ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ और ‘लॉन्ग लिव प्रोलिटेरियट’ के नारे सुनाई दिए। बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने वहाँ से भागने की कोशिश नहीं की, जैसा कि पहले से तय था, उन्होंने अपने-आप को गिरफ़्तार करवाया। वहीं पर भगत सिंह ने अपनी वो पिस्टल सरेंडर की, जिससे उन्होंने सैंडर्स की हत्या की थी।

भगत सिंह को पता था कि ये पिस्टल सैंडर्स की हत्या में उनके शामिल होने की सबसे बड़ी सबूत होगी। दोनों को अलग-अलग थानों में ले जाया गया। भगत सिंह को मुख्य थाने और बटुकेश्वर दत्ते को चाँदनी चौक के थाने पर लाया गया। इसका उद्देश्य था कि दोनों से अलग-अलग पूछताछ की जाए, ताकि सच का पता लगाया जा सके।

एसेंबली में बम फेंकने के लिए भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सज़ा मिली। वहीं, सैंडर्स की हत्या के लिए भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फाँसी की सज़ा सुनाई गई। इन तीनों क्रांतिकारियों को 23 मार्च 1931 को वर्तमान में पाकिस्तान स्थित लाहौर सेंट्रल जेल में शाम 7 बजकर 33 मिनट पर फाँसी दे दी गई। इसके साथ ही ये क्रांतिकारी सदा के लिए अमर हो गए।

‘ईसाइयों की सभा में हमने किया हमला, सैंकड़ों मार दिए’: मॉस्को में हुए आतंकी अटैक की इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली जिम्मेदारी, 62 मरे, 145 घायल

मॉस्को में इस्लामिक स्टेट के आतंकी हमले में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 145 लोग बुरी तरह से घायल बताए जा रहे हैं। इस आतंकी हमले के समय हाल में करीब 6200 लोग मौजूद थे। ये हमला रूस के मशहूर रॉक बैंक ‘पिकनिक’ की प्रस्तुति के समय हुआ, जब हाल खचाखच भरा हुआ था। रूस की राजधानी में हुए आतंकी हमले की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निंदा की है।

रॉक बैंड प्रोग्राम में जुटे थे लोग, आतंकियों ने बरसाई अंधाधुँध गोलियाँ

रूसी समाचार सेवा TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आतंकी हमला मॉस्को ओ-ब्लास्ट के क्रास्नोगोर्स्क (Krasnogorsk) में स्थित क्रॉकस सिटी हाल (Crocus City Hall) में हुआ। उस समय सोवियत रूस के जमाने के फेमस म्यूजिक बैंड ‘पिकनिक’ का कार्यक्रम चल रहा था। मौके पर 6200 से अधिक लोग मौजूद थे। ये बैंड मंच पर प्रस्तुति देने के लिए पहुँच ही रहा था कि हाल में चारों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। रूसी सेना की ड्रेस में आए हमलावरों ने हर तरफ गोलीबारी की।

इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आतंकी हमले से हर तरफ चीख पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। गोलीबारी के समय बच्चों का एक बड़ा ग्रुप भी वहाँ मौजूद था। बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में अब तक 62 लोगों की मौत हो गई है, तो 145 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इस हमले की वजह से हाल में आग भी लग गई, जिसे बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है। हालाँकि अब रूस के सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को कंट्रोल में ले लिया है।

आईएस ने ली हमले की जिम्मेदारी

आतंकी संगठन आईएसआईएस ने हमले की जिम्मेदारी ली है कहा है कि उसके लड़ाकों ने ईसाइयों की भारी भीड़ पर हमला किया। आईएसआईएस से जुड़ी समाचार एजेंसी अमाक की ओर से टेलीग्राम पर जारी किए बयान में बताया गया, “हमारे लड़ाकों ने रूस की राजधानी मॉस्को के बाहरी इलाके में ईसाइयों की बड़ी सभा पर हमला बोला था, जिसमें कई लोग मारे गए, कई जख्मी हुए और उस जगह भारी विनाश भी हुआ.” हालाँकि, आईएसआईएस की ओर से इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है।

रूस के साथ खड़ा है भारत

मॉस्को में हुए आतंकी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निंदा की है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “हम मास्को में हुए जघन्य आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं। हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। दुख की इस घड़ी में भारत रूसी संघ की सरकार और लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंसर्ट पर हमले के दौरान आतंकियों ने रूसी सेना की वर्दी पहन रखी थी। उन्होंने हॉल में धमाका भी किया, जिसकी वजह से हाल के अंदर एक छत भी टूट गई। इस हमले के दौरान कई तरफ से आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। ये आतंकी हमला ऐसे समय में हुआ है जब व्लादिमीर पुतिन ने हाल में हुए राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है और रूस के राष्ट्रपति के रूप में लगातार 5वाँ कार्यकाल संभालने जा रहे हैं। वहीं, वो यूक्रेन के साथ भी लंबे समय से युद्ध में है।

अटारी बॉर्डर से मुलेठी में छिपाकर हीरोइन की तस्करी मामले में 2 और गिरफ्तार, एनआईए ने जाँच के बाद पंजाब और दिल्ली से दो को पकड़ा, 700 करोड़ की ड्रग्स हुई थी बरामद

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार (22 मार्च 2024) को अटारी ड्रग जब्ती मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें कुल 102 किलोग्राम से अधिक हेरोइन की बरामदगी और जब्ती शामिल थी। ये हेरोइन अप्रैल 2022 में लिकोरिस जड़ों (मुलेठी) की एक खेप में छिपाकर देश में तस्करी कर लाई गई थी, लेकिन सीमा पर इसे पकड़ लिया गया था।

अब तक कुल पाँच आरोपित गिरफ्तार

एनआईए ने इस मामले में जिन दो लोगों को पकड़ा है, उनकी पहचान फिरोजपुर (पंजाब) के दीपक खुराना उर्फ दीपू और अवतार सिंह उर्फ सनी के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक कुल पाँच आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जाँच से पता चला है कि दीपक खुराना न केवल एक ड्रग डीलर और ड्रग क्वालिटी टेस्टर था, बल्कि ‘ड्रग्स की आय’ का हैंडलर भी था। वहीं अवतार ड्रग्स की बिक्री, कैश मैनेजमेंट, बैंकिंग और हवाला के जरिए ड्रग्स से पैसे बनाता था।

दीपक और अवतार इस केस के मुख्य आरोपित रजी हैदर जैदी और शाहिद अहमद उर्फ काजी अब्दुल वदूद के पुराने साथी हैं। एनआईए ने बताया है कि दीपक और अवतार भारत में ड्रग्स की बिक्री और उसके पैसों को इंटरनेशनल ड्रग कार्टेल तक पहुँचाने के बड़े खिलाड़ी हैं।

इस मामले में नशीली दवाओं की जब्ती दो किस्तों में 24 और 26 अप्रैल 2022 को भारतीय सीमा शुल्क विभाग द्वारा की गई थी, जब नशीले पदार्थ आईसीपी अटारी, अमृतसर के माध्यम से अफगानिस्तान से देश में पहुँचे थे। नशीले पदार्थों की कुल कीमत लगभग 700 करोड़ रुपये थी।

एनआईए की जांच के अनुसार, यह खेप अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ के निवासी फरार आरोपी नजीर अहमद कानी द्वारा भारत में भेजी गई थी, जिसे दुबई स्थित फरार आरोपी शाहिद अहमद उर्फ काजी अब्दुल वदूद के निर्देश पर पहुँचाया जाना था। इसे रज़ी हैदर ज़ैदी देश के अन्य हिस्सों में पहुँचाता।

इस मामले में एनआईए16 दिसंबर 2022 को शाहिद अहमद और नजीर अहमद कानी के साथ-साथ दो अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, रजी हैदर जैदी और विपिन मित्तल पहले गिरफ्तार हुए थे, जबकि अमृतपाल सिंह को 15 दिसंबर 2023 को देश से भागने की कोशिश के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से 1.34 करोड़ रुपए बरामद हुए थे, जो ड्रग्स से कमाए गए थे।

IPL की ओपनिंग में मुनव्वर फारूकी को देख आक्रोशित हुए लोग, JioCinema से पूछा सवाल – हिन्दू विरोधी को क्यों दिया मंच?

IPL 2024 का शुक्रवार (22 मार्च, 2024) को आगाज़ हुआ। पहले मैच चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बीच खेला गया। चेन्नई में AR रहमान, सोनू निगम और मोहित चौहान जैसे संगीत की दुनिया के सितारों ने परफॉर्मेंस दिया। हालाँकि, इस दौरान फैंस को सबसे ज्यादा खटका हिन्दू विरोधी मुनव्वर फारूकी का दिखना। JioCinema आईपीएल-2024 को OTT पर दिखा रहा है। वहीं मुनव्वर फारूकी को एक गेस्ट के रूप में देखा गया।

JioCinema को कई लोग अनइंस्टॉल करने का अभियान भी चला रहे हैं। मुनव्वर फारूकी को मैच को लेकर राय देते हुए देखा गया। उनके साथ रैपर बादशाह भी बैठे हुए थे। साथ ही अन्य गेस्ट्स भी चर्चा करते हुए दिखे। ‘नेशनलिस्ट श्रेया’ ने लिखा, “हिन्दू विरोधी मुनव्वर फारूकी को कमेंट्री बॉक्स में क्यों बुलाया गया है? IPL के 80% दर्शक हिन्दू हैं और आप एक हिन्दू विरोधी को बुला रहे हैं? आपको शर्म आनी चाहिए। सब कोई JioCinema को अनइंस्टॉल करें।”

कुछ यूजर्स ने लिखा कि IPL एक बार फिर नीचे गिर रहा है, उसने हिन्दू देवी-देवताओं पर चुटकुले सुना कर कमाई करने वाले को गेस्ट के रूप में बुलाया है। मुनव्वर फारूकी को पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज ज़हीर खान के साथ भी चर्चा करते हुए देखा गया। वहीं इस दौरान ‘बिग बॉस OTT’ और ‘लॉक अप’ रियलिटी शो के विजेता मुनव्वर फारूकी के फैंस खासे खुश नज़र आए और वो उनके क्लिप्स शेयर करते व साथ ही लुक्स की भी तारीफ़ की।

हाल ही में मुनव्वर फारूकी के कारण 2 हिन्दू यूट्यूबर्स में मारपीट भी हो गई। यूट्यूबर मैक्सटर्न ने आरोप लगाए हैं कि एल्विश यादव और उनके 8 साथियों ने उसके साथ मारपीट की। एल्विश यादव और मुनव्वर फारूकी एक साथ मैदान पर क्रिकेट खेलने उतरे। इस दौरान दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं और मैक्सटर्न (सागर ठाकुर) ने एल्विश यादव की आलोचना की थी। हालाँकि, बाद में दोनों ने आपसी मनमुटाव भुला कर झगड़े को खत्म कर लिया था।

‘शुरू से अंत तक घोटाले में सक्रिय हिस्सेदारी’: कोर्ट ने CM अरविंद केजरीवाल को 28 मार्च तक ED की रिमांड में भेजा, अन्य आरोपितों संग बिठा कर होगी पूछताछ

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में 10 दिनों के लिए ED (प्रवर्तन निदेशालय) की रिमांड में भेज दिया है। जाँच एजेंसी ने उन्हें इस घोटाले का मुख्य सरगना बताया था। दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस मामले में पहले से ही जेल में हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रहे सत्येंद्र जैन भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में ही हैं। शराब घोटाले का दलाल विजय नायर AAP (आम आदमी पार्टी) का कम्युनिकेशन सेल का इंचार्ज था। AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी जेल में हैं।

ED का कहना है कि पूरी की पूरी आम आदमी पार्टी इस शराब घोटाले में शामिल थी। रिमांड एप्लिकेशन में साफ़ लिखा है कि घूस लेन-देन वाली पूरी साजिश को रचने वाले अरविंद केजरीवाल ही थे और इस अपराध शराब नीति निर्माण से लेकर इस अपराध से होने वाले फायदे का इस्तेमाल करने तक में उनकी सक्रिय हिस्सेदारी थी। ED का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में जिस ‘कंपनी’ (संस्था) को फायदा पहुँचा वो AAP ही है, इसीलिए पूरी पार्टी इसमें शामिल थी।

रिमांड एप्लिकेशन में कहा गया है कि अन्य लोगों के साथ मिल कर अरविंद केजरीवाल ने पूरी साजिश रची। 9 बार समन दिए जाने के बावजूद वो जाँच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए, जबकि उन्हें जाँच में सहयोग का पूरा मौका दिया गया। इस संबंध में अदालत में एक अलग शिकायत दायर की गई है। ED का कहना है कि बार-बार समन को धता बताना भी घोटाले में उनकी हिस्सेदारी की तरफ इशारा करता है। उनका जो बयान रिकॉर्ड किया गया, उसमें भी उन्होंने न सच बोला न ठीक तथ्य बताए।

जाँच एजेंसी ने दिल्ली के CM को PMLA, 2002 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी बताया है। उन्हें BRS नेता और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी K कविता समेत अन्य आरोपितों के सामने बिठा कर पूछताछ की जाएगी। जाँच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए उनसे पूछताछ आवश्यक है। अब अटकलें लग रही हैं कि क्या अरविंद केजरीवाल इस्तीफा देंगे या जेल से ही सरकार चलाएँगे? उनकी पत्नी सुनीता के सीएम बनने के कयास भी लंबे समय से लग रहे हैं।

हिस्ट्रीशीटर बना कलियुग का श्रवण कुमार, खुद के चमड़े से बनवाई माँ के लिए चप्पल: रामायण का नाम लेकर खुद को महात्मा साबित करने चला!

रामायण पढ़कर एक बदमाश का ऐसा हृदय परिवर्तन हुआ कि उसने अपने शरीर के चमड़े से माँ के लिए खड़ाऊँ बनवा डाला। यही नहीं, उसने खुद को कलियुग का श्रवण कुमार साबित करने के लिए अपने घर पर भागवत कथा का आयोजन किया और फिर अपनी माँ को उसने खुद के शरीर के निकवाए गए चपड़े से बना चप्पल भेंट किया। बस, फिर क्या था, माँ के साथ ही वहाँ मौजूद हर कोई इमोशनल हो गया और मीडिया भी उसे कलियुग का दूसरा श्रवण कुमार बताने लगा। हाँ, ये जरूर है कि मीडिया को हर साल ऐसे कई कई श्रवण कुमार मिल ही जाया करते हैं। न यकीन हो तो गूगल पर ‘कलियुग का श्रवण कुमार’ लिखकर सर्च कर लीजिए।

बाकी ये मामला है महाकाल की नगरी उज्जैन के ढांचा भवन इलाके का। जहाँ के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर रौनक गुर्जर का रामायण पढ़ते-पढ़ते ऐसा हृदय परिवर्तन हुआ, कि अंगुलिमाल की तर्ज पर महर्षि वाल्मीकि बनने का ख्याल आ गया। वैसे तो रौनक गुर्जर कुख्यात हिस्ट्रीशीटर रह चुका है। एनकाउंटर के दौरान पैर में गोली भी खा चुका है, लेकिन अब वो नियमित तौर पर रामायण का पाठ करता है और धार्मिक गतिविधियों में लीन रहने की कोशिश करता है।

इसी तरह दिन गुजर ही रहे थे कि रौनक गुर्जर को रामायण पढ़ते हुए श्रवण कुमार से प्रेरणा मिल गई। ऐसे में उन्होंने संकल्प ले लिया कि वे अपनी चमड़ी से माँ के लिए चप्पलें बनवाएंगे। रौनक गुर्जर ने इस संकल्प को किसी को भी नहीं बताया, लेकिन गत दिनों उन्होंने एक सर्जरी के बाद अपनी जाँघ से चमड़ी निकलवाकर माँ के लिए चरण पादुका बनवाई और उन्हें भेंट कर दी। जब बेटे रौनक गुर्जर ने माँ निरूला गुर्जर को या चरण पादुका पहनाई तो माँ बेटे का यह अगाध प्रेम देखकर लोगों की आँखों से आँसू बहने लगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांदीपनि नगर ढांचा भवन पुरानी टंकी के पास अखाड़ा ग्राउंड परिसर में सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन हो रहा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु और कथावाचक जितेंद्र महाराज कथा सुना रहे हैं। इस भागवत कथा का आयोजन करा रहा है रौनक गुर्जर नाम का व्यक्ति, जो कभी अपराधों के चलते हिस्ट्रीशीटर की मुहर लेकर घूम रहा है। और यहीं पर सेंटी करने वाला ये सारा कार्यक्रम किया गया। बाकी, रौनक के मन में कब ये सब करने का ख्याल आया, किस डॉक्टर ने उसकी चमड़ी निकाली, कितनी चमड़ी निकाल कर चप्पल बना, ये सब जानकारी बाकी के कथित मेनस्ट्रीम मुर्गा नाच कराने वाले मीडिया हाउस बता ही चुके हैं, जिसकी वजह से पूरे देश के लोगों की आँखों से आँसुओं की धारा बह रही है।

वैसे, भले ही ये समाचार पढ़ कर सभी के आँखों में आँसू आ रहे हों, लेकिन ऐसा कभी हो सकता है कि क्या कोई माँ अपने ही बेटे के शरीर से निकले चमड़े का बना चप्पल पहन पाए? तो भईया, सेंटी होने की जगह सीधी सी बात है कि जनता को मन को लुभाने वाली खबरें पढ़नी होती है और मीडिया को ऐसी ही खबरें दिखाकर टीआरपी और हिट्स बटोरनी होती है… बाकी जन भावनाओं से खेलने वाले अपना काम कर निकलते हैं। ये तो रामायण के नायक भगवान राम भी नहीं जानते होंगे कि रौनक ने अपने ही चमड़े की चप्पलें बनवाकर माँ को कितनी खुशी दी होगी, बाकी उसे महात्मा बनना था, और मीडिया वालों को नया त्यागी (त्याग करने वाला) चाहिए था, तो वो मिल गया। बाकी जपो, हरि का नाम… कलियुग का दूसरा श्रवण कुमार।

‘सनातन धर्म के अपमान के खिलाफ बोलने से रोका गया, 2 साल से किया जा रहा प्रताड़ित’: गुजरात में कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता ने छोड़ी पार्टी, टिकट मिला फिर भी नहीं लड़ेंगे चुनाव

गुजरात में कॉन्ग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक रोहन गुप्ता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे का पत्र और अपने व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कड़वे अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले 3 दिनों से उनके पिता अस्पताल में हैं और इस दौरान उन्हें उनके दृष्टिकोण को समझने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने पिछले 40 वर्षों में नेताओं के धोखों और काले कारनामों के बारे में बताया और ये भी कि कैसे ये लोग ये सब कर के भी सुरक्षित निकल गए।

रोहन गुप्ता ने कहा कि इन घावों की निशानियाँ आज भी मौजूद हैं और इन्हें वो अपने पिता की आँखों में देख सकते हैं। रोहन गुप्ता ने कॉन्ग्रेस के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के एक नेता द्वारा प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पिता नहीं चाहते हैं कि पिछले 2 वर्षों में वो जिस मानसिक आघात से गुजरे हैं उसके बाद वो भी वही कीमत चुकाएँ जो उनके पिता ने सहा। उन्होंने बताया कि उनके पिता उनके साथ वही चीजें होने की कल्पना कर सकते थे, लेकिन वो ये सब नहीं देख पाए।

रोहन गुप्ता ने लिखा, “उन्होंने ये सब बर्दाश्त किया और अपना स्वास्थ्य खराब कर लिया, अंत में उन्हें बायपास सर्जरी करानी पड़ी। वो नहीं चाहते थे कि मुझे इससे गुजरना पड़े। हम दोनों योद्धा हैं, पिछले 40 वर्षों से पार्टी के लिए अपनी-अपनी भूमिका में लड़ रहे हैं। मैं किसी चीज से डरता नहीं हूँ, लेकिन जब मुझे धोखा देने की व्यवस्थित साजिश हो तो मैं आवाज़ उठाऊँगा। मेरी विनम्रता को मेरी कमजोरी न समझा जाए, मैंने अपना सबक सीख लिया है।”

हाल ही में रोहन गुप्ता ने अहमदाबाद पूर्व लोकसभा क्षेत्र से बतौर कॉन्ग्रेस उम्मीदवार अपना नाम वापस ले लिया था। अब उन्होंने इसे कठिन निर्णय बताया है। उन्होंने पार्टी के संचार विभाग के नेता द्वारा लगातार चरित्र हनन और अपमानित किए जाने के कारण पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उक्त नेता पिछले 2 वर्षों से ऐसा कर रहा है, पिछले 3 दिनों में भी वो अपनी हरकत से बाज नहीं आया और आगे भी वो अअपनी करतूतें जारी रखेगा, उसे कोई रोक भी नहीं पाएगा।

निराश रोहन गुप्ता ने कहा कि वो अपने आत्म-सम्मान पर और चोट रहने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने घोषणा की कि उनकी नैतिकता उन्हें अब पार्टी में नहीं रहने दे सकती है। बकौल रोहन गुप्ता, जिस नेता की वो बात कर रहे हैं उसने अपने अहंकारी और असभ्य व्यवहार से पार्टी को भी काफी नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी नेता ने कट्टरपंथी मानसिकता का परिचय देते हुए सनातन धर्म के अपमान पर पार्टी में चुप्पी बनाए रखी, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से ठेस पहुँचा है।

रोहन गुप्ता के अनुसार, उन्हें भी विपक्षी नेताओं द्वारा सनातन धर्म का लगातार अपमान किए जाने के खिलाफ टीवी पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि इससे कॉन्ग्रेस की छवि और नेताओं के मनोबल को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं के कारण ईमानदार कार्यकर्ता पार्टी छोड़ते हैं। अपना इस्तीफा-पत्र में रोहन गुप्ता ने लिखा कि राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने पिछले 13 वर्षों से पार्टी द्वारा दी गई जिम्मेदारियाँ अच्छी तरह निभाई हैं। उन्होंने अपने खिलाफ अपमानजनक अभियान चलाए जाने का भी आरोप लगाया।

घर पर मनेगी एल्विश यादव की होली, नोएडा के कोर्ट ने दी जमानत: साँपों का जहर सप्लाई करने के मामले में 5 दिन से जेल थे बंद

यूट्यूबर और बिग बॉस OTT के विजेता एल्विश यादव को साँपों के जहर मामले में जमानत मिल गई है। उन्हें नोएडा के कोर्ट ने शुक्रवार (22 मार्च, 2024) को जमानत दे दी है। उन्हें नोएडा पुलिस ने साँपों का जहर सप्लाई करने के आरोप पर गिरफ्तार किया था।

नोएडा की अदालत ने उन्हें ₹50,000-₹50,000 के दो मुचलकों पर जमानत दी। नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव को 17 मार्च को गिरफ्तार किया था। उनके जमानत के पहले भी प्रयास हुए थे लेकिन नोएडा में वकीलों की हड़ताल हो रही थी, इसकी वजह से उनकी जमानत नहीं हो पा रही थी।

एल्विश के वकील प्रशांत राठी ने जमानत मिलने पर कहा, “सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने उन्हें ₹50,000 के दो मुचलकों पर जमानत दे दिया। हमने कोर्ट से कहा कि एल्विश यादव निर्दोष है। एल्विश के दो दोस्तों की भी बेल हो गई है।” एल्विश के खिलाफ दर्ज मामले में NDPS धारा भी जोड़ी गई थी। हालाँकि बाद में यह सामने आया था कि कोर्ट ने उन पर लगी 6 NDPS धाराओं में से 2 धाराएँ हटा दी थी। उन पर से मामला अब भी खत्म नहीं हुआ है, मुकदमा अभी चलता रहेगा।

एल्विश के विषय में यह भी जानकारी सामने आई थी कि उन्होंने साँपों का जहर सप्लाई करने की बात कबूली थी। हालाँकि, इस बात को एल्विश के माता पिता ने नकारा था। एल्विश के माता पिता उनसे जेल में मिलने भी गए थे। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात की थी।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, एल्विश यादव के माता सुषमा यादव और पिता राम अवतार यादव ने बताया था कि वो लोग अपने बेटे से मिलकर आए हैं और उनके बेटे ने कोई गुनाह नहीं कबूला है। ऐसी खबर न चलाई जाए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बिलकुल निर्दोष है और साफ सुथरा है। उसने कुछ गलत नहीं किया।

उनसे जब एल्विश यादव के लग्जरी लाइफस्टाइल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा अगर उनका बेटा लग्जरी लाइफस्टाइल जीता है तो इसका मतलब ये नहीं कि उसपर संदेह किया जाए। एल्विश के पिता ने बताया कि उनके बेटे के पास कोई लग्जरी गाड़ी नहीं है। दो गाड़ियाँ हैं- फॉर्च्यूनर और वैगनआर। उन्होंने बताया कि एल्विश की वीडियो में जो दिखती हैं वो लोन पर ले रखी हैं। इसके अलावा कुछ गाड़ियाँ वो दोस्तों से लेता है।

एबीपी से बात करते हुए, एल्विश यादव के माता-पिता ने मेनका गाँधी से कहा था कि वो उस संस्था की अध्यक्ष हैं जिसने एल्विश पर केस किया है। अगर एल्विश की गिरफ्तारी के बाद उन्हें खुशी मिल गई हो तो वो उनके बेटे पर थोड़ी सी दया दिखाएँ। अपनी बात कहते हुए एल्विश के माता-पिता कई बार भावुक हुए। उन्होंने कहा कि तीन दिन से उन दोनों के पेट में अन्न का दाना तक नहीं गया। पता नहीं लोग क्यों उनके बच्चे को परेशान कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चूँकि उनका बेटा कम उम्र में इतना मशहूर हो गया इसलिए लोगों को उससे जलन होने लगी। पिता बोले कि वो खुद एक टीचर हैं। जब वो दूसरों के बच्चों को पढ़ाते हैं तो क्या अपने बच्चे को नहीं पढ़ाया होगा। उन्होंने कहा- “मुझे अपनी परवरिश पर गर्व है और मैं हर जन्म में उसका पिता बनना चाहूँगा।”

एल्विश पर मुकदमा ‘पीपुल्‍स फार एनिमल संस्‍थान’ के पदाधिकारी गौरव गुप्‍ता ने दर्ज कराया था। एफआईआर छह लोगों के खिलाफ थी। इसमें आरोप था कि रेव पार्टियों में साँपों का जहर सप्लाई करने में एल्विश भी जुड़े हैं। इसके बाद नोएडा पुलिस ने जाँच शुरू की और पार्टी से मिले सैंपल चेक कराए। रिपोर्ट में सामने आया कि वो सैंपल कोबरा-करैत प्रजाति के थे। इस रिपोर्ट के आने के एक माह बाद ही एल्विश की गिरफ्तारी हुई थी।

₹520 करोड़ की कमाई छिपाई, ₹135 करोड़ बकाया: हाईकोर्ट में आयकर पर कॉन्ग्रेस के झूठ की खुली पोल, याचिका रद्द

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (22 मार्च, 2024) को कॉन्ग्रेस की वो याचिका ठुकरा दी, जिसमें 3 वर्षों (2014-17) की आयकर की कार्यवाही की पुनः समीक्षा को चुनौती दी गई थी। बता दें कि इनकम टैक्स विभाग ने ये जाँच शुरू की है। जस्टिस यशवंत वर्मा और पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने की पीठ ने ये फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने इस मामले में 20 मार्च को ही फैसला सुरक्षित रख लिया था। कॉन्ग्रेस की तरफ से पार्टी नेता अभिषेक मनु सिंघवी बतौर वकील पेश हुए।

वहीं IT विभाग की तरफ से वकील ज़ोहेब हुसैन ने दलीलें पेश की। कॉन्ग्रेस ने पार्टी की आयकर प्रक्रियाओं की पुनः समीक्षा के खिलाफ रुख अपनाया है। पार्टी की दलील है कि आयकर विभाग बाध्य है कि वो 6 वर्ष की सीमा से पहले की कार्यवाही का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, इनकम टैक्स विभाग का कहना है कि उसने अपने अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं किया है। IT विभाग का कहना है कि जो दस्तावेज जब्त हुए हैं, उससे पता चलता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने 520 करोड़ रुपए की कमाई छिपाई।

वहीं इस महीने की शुरुआत में दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘आयकर अपीलीय अधिनियम (ITAT)’ के आदेश को सही ठहराया था और कॉन्ग्रेस पार्टी की ये माँग रद्द कर दी थी कि 100 करोड़ रुपए से भी अधिक के बकाए की रिकवरी वाली नोटिस पर रोक लगाई जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि आईटी डिपार्टमेंट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार उन्हें नज़र नहीं आता है। हालाँकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉन्ग्रेस को ये छूट दी है कि परिस्थितियों के बदलने की स्थिति में वो पुनः फिर ITAT के पास जाए।

आयकर विभाग ने टैक्स ट्रिब्यूनल को बताया है कि बीते वित्तीय वर्ष में कॉन्ग्रेस ने 1000 करोड़ रुपए का कैश होने की घोषणा की थी। इसके अलावा पार्टी ने अपने पास 340 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति होने की बात भी बताई थी। देश भर में कॉन्ग्रेस पार्टी के कई बैंक खाते हैं। वहीं पार्टी आरोप लगा रही है कि उसके बैंक एकाउंट्स फ्रीज कर लिए गए हैं, ऐसे में उसके पास चुनाव लड़ने के लिए फंड ही नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी को आयकर विभाग को ब्याज समेत 135 करोड़ रुपए बकाए का भुगतान करना है।