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टॉयलेट में हिंदू छात्रा का Video बनाने के केस में 3 मुस्लिम लड़कियों के खिलाफ चार्जशीट, सबूत मिटाने के लिए वीडियो किए थे डिलीट: उडुपी के कॉलेज का है मामला

कर्नाटक के उडुपी जिले में पिछले साल एक मामला सामने आया था, जहाँ की तीन मुस्लिम लड़कियों पर हिंदू छात्राओं की वीडियो रिकॉर्डिंग का आरोप लगा था। इस मामले के आठ माह बीत जाने के बाद अब कर्नाटक की सीआईडी ने चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें नेत्र ज्योति कॉलेज के प्रिंसिपल और तीनों मुस्लिम छात्राओं शबानाज, अल्फिया और अलीमथ उल सफा के नाम हैं।

सीआईडी अधिकारी ने बताया कि हमने फोन से अन्य फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए और जाँच के दौरान लड़कियों ने भी अपराध कबूल कर लिया। इनके आधार पर हमने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर किया। सीआईडी की जाँच में ये बात साबित हुई है कि शबानाज, अल्फिया और अलीमथ उल सफा ने हिंदू सहपाठी का वीडियो बनाने के लिए मोबाइल फोन को शौचालय में रखा था, लेकिन मामला बढ़ जाने के बाद उन्होंने सबूत मिटाने के लिए वो वीडियो डिलीट कर दिया। ये चार्जशीट सीआईडी की डिप्टी एसपी अंजू माला की तरफ से दाखिल की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में तीनों लड़कियों ने माफीनामा भी लिखा था। उन्होंने कथित तौर पर बताया था कि वो किसी और का वीडियो बनाना चाहती थी, लेकिन किसी और का बन गया। इस मामले में माफीनामे की भी जाँच की गई है, जिसकी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने पुष्टि की और बताया कि पत्र की लिखावट आरोपितों की लिखावट से ही मिलता है। हालाँकि सीआईडी ने कहा कि इस मामले में कोई ‘सांप्रदायिक’ एंगल नहीं था।

इस मामले में इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सीआईडी ​​अधिकारी ने बताया , “हमने फोन से अन्य फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए और जाँच के दौरान लड़कियों ने भी अपराध कबूल कर लिया। इनके आधार पर हमने उनके खिलाफ चार्जशीट दायर किया।” एक अन्य अधिकारी ने न्यूज18 से कहा, “लड़कियों ने दावा किया कि उन्होंने मनोरंजन के लिए ऐसा किया, लेकिन यह एक दंडनीय अपराध है।”

एक अन्य अधिकारी ने बताया है कि ये वीडियो किसी के पास भेजा नहीं जा सका, क्योंकि बवाल होते ही उन्होंने तुरंत वीडियो को डिलीट कर दिया। अभी उस वीडियो को रिकवर भी नहीं किया जा सका है। इस मामले में अब सीआईडी ने शबनाज, अल्फिया और अलीमथ उल सफा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 204 (गुप्त रूप से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करना), 509 (किसी भी महिला की गरिमा का अपमान करने का इरादा) और सूचना की धारा 66 ई के तहत चार्जशीट दाखिल कर दी है। बता दें कि इस मामले में सभी को पिछले साल ही जमानत मिल गई थी।

जिसने 2 हिंदू बच्चों को रेता वह साजिद गाँव के मुस्लिमों के लिए- ‘सीधा, नेक, शरीफ’… दादी बोली- जावेद बेकसूर, वह तो घर के पास मिट्टी खोद रहा था

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में गुरुवार (19 मार्च 2024) को 2 हिन्दू बच्चों की गला रेत कर निर्ममता से हत्या कर दी गई थी। इस हमले में तीसरा बच्चा घायल हो गया था। पुलिस ने इस मामले में 20 मार्च को आरोपित साजिद को एनकाउंटर में ढेर कर दिया था वहीं फरार चल रहे 25 हजार के इनामी जावेद को इसी दिन बरेली से दबोच लिया गया था। दोनों हमलावर सगे भाई ही हैं। ऑपइंडिया इनके बारे में जानकारी जुटाने इनके गाँव तक गया जहाँ बातचीत के दौरान जावेद-साजिद के परिवार वालों ने और आसपास वाले लोगों ने पत्रकारों और आम लोगों को भ्रमित करने की हर सम्भव कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 मार्च 2024 को जावेद को बदायूँ के चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। यहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब पुलिस उससे और अन्य लोगों से पूछताछ के जरिए ये जानने में जुटी है कि आखिर दोनों हिंदू बच्चों की इतनी निर्ममता से की गई हत्या के पीछे मुख्य कारण क्या था। घटना के 4 दिन बीत जाने के बाद भी इस सवाल का जवाब इसलिए नहीं मिल पाया है क्योंकि जावेद और उसके परिजन लगातार अपने अलग-अलग बयान देकर पुलिस, मीडिया और आमजन को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

बुजुर्ग दादी तक के दावे पुलिस के बयान से अलग

ऑपइंडिया की टीम 21 मार्च को साजिद के गाँव में पहुँची थी। यहाँ हमें साजिद की दादी मिलीं जिनकी उम्र लगभग 70 साल है। साजिद की दादी ने हमें देखते ही खुद के खानदानी परिवार से होने और जावेद की बेगुनाही की बातें करनी शुरू कर दीं। उन्होंने दावा किया कि घटना के समय जावेद मौके पर था ही नहीं और वो घर के पास मिट्टी खोद रहा था। हमें घर से सटी वो जगह भी दिखाई गई जहाँ मिट्टी खुदी हुई थी। जावेद की दादी के अलावा गाँव मुज़फ्फर ने भी यही बात दोहराई। रुखसाना ने तो जावेद और यहाँ तक कि साजिद की शान में कसीदे तक गढ़ने शुरू कर दिए। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि बच्चों की हत्या होने के बाद घर पर फोन आया। तब जावेद अपने भाई साजिद की खोज-खबर लेने गाँव से बदायूँ शहर गया था।

हालाँकि FIR की कॉपी और IG राकेश कुमार सिंह के बयान से साजिद की कथित खानदानी दादी, मुज़फ्फर और रुखसाना की पोल खुल गई। FIR कॉपी, मृतक बच्चों की माँ और पुलिस के बयान में यह दावा किया गया है कि घटना के समय जावेद घर के नीचे मौजूद था। ऑपइंडिया ने मृतकों के मोहल्ले में भी स्थानीय लोगों से बातें की तो उन्होंने बताया कि दोनों साजिद और जावेद दोनों ही कत्ल से पहले और बाद में एक साथ देखे गए थे। इसमें सबसे सनसनीखेज दावा यह था कि रात 10 बजे तक दुकान खोल कर रखने वाले और जावेद ने घटना के दिन लगभग 1 बजे ही शटर गिरा दिए थे।

रोजा था तो रोटी क्यों माँगी ?

इसके बाद दादी ने दावा किया कि साजिद ने 5 बजे के करीब अपनी बीवी से रोटी माँगी थी जबकि जावेद ने पुलिस को दी जानकारी में खुद बताया कि वो दोनों रोजा रखे हुए थे। इसके अलावा जैसा कि साजिद की दादी दावा करती है कि उसकी बीवी घर पर थी और कहीं से फोन आने के बाद साजिद ने उससे खाना माँगा था, वो दावा भी झूठा लगता है क्योंकि आज तक ने एक रिपोर्ट में साजिद की बीवी तक पहुँचकर उनसे बात की थी।

उस रिपोर्ट में सना और उसकी अम्मी ने दावा किया था कि वो घटना से 15 दिन पहले से अपने मायके में है। ऐसे में न तो बदायूँ में और न साजिद के गाँव सखानू में सना और साजिद के साथ होने की बात साबित होती है… तो फिर सोचने की बात है कि दादी ने ऐसा क्यों कहा? क्या ये सारे बयान बनावटी हैं?

तुरंत घटनास्थल पर कैसे पहुँच गया जावेद

जावेद और उसके घर वालों का दावा है कि मिट्टी खोदने के दौरान उसे अपने भाई के झगड़े की सूचना मिली तो वो बाइक से भाग कर गाँव से बदायूँ शहर गया। मगर, ऑपइंडिया ने पाया कि जावेद के गाँव से घटनास्थल तक पहुँचने में लगभग 35-40 मिनट का समय लगता है। अगर परिवार की बातें सहीं हैं तो फिर जावेद फौरन कैसे अपने गाँव से बदायूँ घटनास्थल पर पहुँच गया जैसा कि उसने खुद बताया है।

खुद जावेद ने कहा है कि उसने अपने भाई को जब छत से खून से सने हाथ लेकर उतरते देखा तो वो वहाँ से भाग गया। इसके अलावा कहीं कहीं मौजूद जानकारी के अनुसार उसने ये भी कहा है कि वो घटना की जानकारी होने पर तुरंत घटनास्थल पर आया था और फिर भीड़ जमा देखकर वहाँ से भागा था।

जो कभी मिले नहीं वो भी ले रहे अच्छाई की गारंटी

परिजनों के अलावा साजिद के गाँव सखानू में एक शाहनवाज नाम का शख्स मिला। शाहजवाज से जब दोनों लड़कों की जानकारी हमने माँगी तो उन्होंने जावेद और साजिद को निहायत नेक और शरीफ बताया। हमने पूछा कि वो कितनी बार इन दोनों से मिल चुके हैं। जवाब में उन्होंने कहा, “एक बार भी नहीं।” हालाँकि शाहनवाज हमें यह नहीं बता पाए कि उनके द्वारा किस आधार पर साजिद और जावेद को शरीफ बोला जा रहा है। सिर्फ उन्होंने उनको शरीफ बताया और अपनी बात वही बात कहते रहे। इसी तरह मुजफ्फर ने साजिद को सीधा-सादा बताया और रुखसाना ने तो दो कदम आगे बढकर यह भी कहा कि वह औरतों और बच्चों की कदर करता था।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे के आतंकियों की पहचान: ISIS के शिवमोगा मॉड्यूल से जुड़े हैं मुसाविर हुसैन शाज़िब और अब्दुल माथेरन ताहा, दोनों पर पहले से ₹3-3 लाख का इनाम

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के रामेश्वर कैफे में हुए ब्लास्ट के आरोपित की पहचान कर ली गई है। इसकी पहचान मुसाविर हुसैन शाज़िब के रूप में हुई है और इसी कैफे में IED रखा था। इतना ही नहीं, शाजिब के साथ देने वाले आतंकी की भी पहचान कर ली गई है। उसका नाम अब्दुल माथेरन ताहा है। दोनों कर्नाटक के शिवमोगा जिले के तीर्थहल्ली के निवासी हैं और ISIS के शिवमोगा मॉड्यूल से जुड़े हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दोनों के ऊपर 3-3 लाख रुपए का इनाम रखा है। दोनों कर्नाटक में साल 2020 में हुई एक आतंकी घटना में वॉन्टेड हैं। दोनों ने 1 मार्च 2024 को बेंगलुरु के रामेश्वर कैफे में IED ब्लास्ट किया था, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे। हालाँकि, यह ब्लास्ट बहुत शक्तिशाली नहीं था, लेकिन इसके कारण अफरा-तफरी मच गई थी।

आरोपितों की पहचान के लिए NIA ने सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले थे। इन सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध अलग-अलग वेश-भूषा में नजर आए थे। तस्वीरों में आतंकी कभी टोपी पहने तो कभी मास्क लगाए नजर आया था। उसकी बस में यात्रा की तस्वीरें भी सामने आई थीं। NIA ने संदिग्ध की एक तस्वीर जारी करते हुए जानकारी देने वाले को 10 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी।

एनआईए के सूत्रों ने विस्फोट से पहले उनके मूवमेंट की जाँच की और पाया कि दोनों चेन्नई के ट्रिप्लीकेन में एक लॉज में रुके थे और विस्फोट के बाद फिर से चेन्नई लौट आए थे। आरोपितों का आखिरी ठिकाना आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में पाया गया है, जिसकी सीमा तमिलनाडु राज्य से लगती है। शाजिब की पहचान उसकी टोपी से की गई है।

जाँच से पता चला कि शाजिब और ताहा ने चेन्नई के मायलापुर के एक मॉल से टोपी हासिल की थी और ट्रिप्लिकेन में ठहरे थे। इससे पहले, जाँचकर्ताओं ने संदिग्ध के कई सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए थे, लेकिन टोपी के कारण उसकी पहचान छिपी रही। हालाँकि, टोपी पर अंकित नंबर के आधार पर NIA ने इसकी जानकारी हासिल की और पता चला कि इसे जनवरी में एक मॉल से खऱीदा गया था।

जाँच के दौरान पता चला कि यह टोपी सीमित संस्करण की थी और इसे दक्षिणी राज्यों में लगभग 400 लोगों को बेचा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, “खरीदारी के दिन मॉल के सीसीटीवी फुटेज में कर्नाटक के तीर्थहल्ली के निवासी शाजिब और ताहा दिखे। दोनों आंध्र प्रदेश जाने से पहले फर्जी आईडी का उपयोग करके जनवरी और फरवरी में ट्रिप्लिकेन में एक लॉज में रुके थे।”

एनआईए के अधिकारियों ने इस टोपी को बेंगलुरु में घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर एक शौचालय से बरामद किया था। इस टोपी पर मिले बालों के नमूने इकट्ठे किए गए और उसकी फोरेंसिक जाँच के लिए भेज दिया गया था। इसके बाद एनआईए ने शाजिब के निकटतम परिवार के सदस्यों के डीएनए से बाल के डीएनए का मिलान किया तो मिल गया। इसके बाद उसकी पहचान हुई।

शिक्षक भर्ती घोटाला केस में ममता बनर्जी के मंत्री के घर ED का छापा, ₹40 लाख की नकदी बरामद: दावा- नहीं बता पाए इतना रुपया कहाँ से आया

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के कैबिनेट मंत्री चंद्र नाथ सिन्हा के घर पर ईडी की छापेमारी हुई है, जिसमें 40 लाख की रकम बरामद हुई है। चंद्र नाथ सिन्हा का नाम एक आरोपित की डायरी से मिला था, जिसके बाद ये छापेमारी की गई। मंत्री इस 40 लाख की रकम का स्रोत नहीं बता पाए। ईडी ने ये छापेमारी शुक्रवार (22 मार्च 2024) को की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार टीएमसी यूथ विंग के नेता कुंतल घोष के पास से एक रजिस्टर मिला था, उस रजिस्टर में चंद्र नाथ सिन्हा का नाम मिला था। कुंतल घोष को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

ईडी सूत्रों के हवाले से पता चला है कि चंद्र नाथ सिन्हा के बीरभूम जिले में स्थित बोलपुर के घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। ये छापेमारी शुक्रवार को सुबह से लेकर रात करीब 10.30 बजे तक चली। ईडी की टीम सुबह 9 बजे ही चंद्र नाथ सिन्हा के ठिकाने पर पहुँच गई थी। बताया जा रहा है कि चंद्र नाथ सिन्हा का मोबाइल फोन भी ईडी ने जब्त कर लिया है। इस छापेमारी के दौरान ही ईडी को 40 लाख की रकम भी मिली, जिसके स्रोत के बारे में सिन्हा कोई जानकारी नहीं दे पाए।

व्यापारी प्रसन्ना रॉय भी गिरफ्तार

इससे पहले, बुधवार (20 मार्च 2024) को टीएमसी से जुड़े बिजनेसमैन प्रसन्ना रॉय को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। प्रसन्ना से ईडी की टीम ने करीब 11 घंटों तक कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पूछताछ की थी और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया। प्रसन्ना पिछले साल भी गिरफ्तार हुए थे। तब सीबीआई ने प्रसन्ना की गिरफ्तारी की थी, जिसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। हालाँकि अब वो एक बार फिर से गिरफ्तार हो चुके हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई जाँच

बता दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये जाँच शुरू हुई थी, जिसकी कमान ईडी और सीबीआई दोनों ही संभाल रही हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में अब तक कई नामी लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी शामिल हैं।

‘…जेल से चलाऊँगा अपनी सरकार’: CM केजरीवाल के खिलाफ HC में याचिका दायर, AAP के एक और MLA के घर ED ने छापा मारा

शराब घोटाले में दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को राउज एवेन्‍यू कोर्ट ने शुक्रवार (22 मार्च 2024) को 7 दिन की रिमांड पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के हवाले कर दिया। इस कोर्ट में पेशी के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जरूरी हुआ तो वे जेल से सरकार चलाएँगे। वहीं, उन्हें पद से हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “जब प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी मेरे आवास पर आए तो मैं अपने माता-पिता के साथ बैठा था। दुर्भाग्य से मुझे ले जाने से पहले मैं उनका आशीर्वाद नहीं ले सके, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने मेरे साथ सम्मानजनक व्यवहार किया। अगर जरूरत पड़ी तो मैं जेल से भी दिल्ली सरकार चलाऊँगा।”

हालाँकि, केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस का यह अधिकारी आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को भी गिरफ्तार करने में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें अदालत में सुनवाई के लिए लाया जा रहा था, तब दिल्ली पुलिस के ACP रैंक के एक अधिकारी ने उनके साथ दर्रव्यवहार किया।

वहीं, आम आदमी पार्टी के एक और विधायक गुलाब सिंह यादव के आवास पर शनिवार (23 मार्च 2024) को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने छापा मारा। हालाँकि, केंद्रीय जाँच एजेंसी ने ये स्पष्ट नहीं किया कि दिल्ली विधायक के घर पर छापेमारी का आबकारी नीति मामले से संबंधित है या नहीं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा जेल से सरकार चलाने की बात कहने के बाद इस पर राजनीति तेज हो गई है। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट में उनके खिलाफ याचिका भी दाखिल की गई है। खुद को किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता कहने वाले सुरजीत सिंह यादव ने अपनी जनहित याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल की गिरफ्तारी उन्हें सार्वजनिक पद पर बने रहने के अयोग्य बनाती है।

उन्होंने दावा किया है कि घोटाले में फँसे मुख्यमंत्री को पद बने रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी कानून की उचित प्रक्रिया में बाधा डालती है, बल्कि राज्य की संवैधानिक मशीनरी को भी कमजोर करती है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 का भी हवाला दिया गया है।

दूसरी तरफ, जेल से सरकार चलाने के बयान पर भाजपा ने केजरीवाल पर हमला बोला है। दिल्ली भाजपा ने शनिवार (23 मार्च 2024) को कहा कि जेल के अंदर से सरकार नहीं चलाई जाती है। जेल से अंदर से सिर्फ ‘गिरोह’ चलते हैं। मनोज तिवारी ने कहा कि दिल्ली के लोग केजरीवाल की गिरफ्तारी का जश्न मना रहे हैं और मिठाइयाँ बाँट रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने दिल्ली को बदहाली के कगार पर पहुँचाने के लिए अपनी जान दे दी है। दिल्ली के लोग उनसे बहुत नाराज हैं और इसीलिए उनकी गिरफ्तारी के बाद मिठाइयाँ बाँटी गईं। उनकी सरकार ने दिल्ली में कोई काम नहीं किया है और केवल लूट कर अपनी जेबें भरी हैं। केजरीवाल ने दिल्ली को लूट लिया है।” उन्होंने केजरीवाल से इस्तीफे की माँग की है।

भारत को ₹3352 करोड़ लौटाने की बारी आई तो टूटी मालदीव की हेकड़ी, माँगी मोहलत: राष्ट्रपति मुइज्जु बोले- न छोड़ें साथ, हमारी मुश्किल बढ़ जाएगी

चीन के मानसिक गुलाम मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अब कहा है कि देश में विकास कार्यों के लिए निकटतम सहयोगी भारत से उन्हें काफी उम्मीदें हैं। कुछ समय पहले यही मुइज्जू मालदीव से भारतीय सेना को हटाने पर अड़ा हुआ था। भारत को भी अपनी सेना हटानी पड़ी और उन्हें गैर-सैनिक कर्मियों से बदलना पड़ा था। बता दें कि पिछले साल के आखिर तक मालदीव पर भारत का लगभग 400.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 35 अरब रुपये) बकाया था। इसे चुकाने के लिए मुइज्जू ने भारत से समय माँगा है।

मालदीव के राष्ट्रपति पद को संभालने के कुछ समय बाद ही उसे अपने देश की हैसियत का अंदाजा लग गया। चीन ने उसे आर्थिक मदद तो दी, लेकिन कर्ज के जाल में भी फँसा दिया। ऐसे में अब मालदीव्स घुटने पर आ गया है। मालदीव के राष्ट्रपति ने लोकल मीडिया से बातचीत में कहा है कि भारत मालदीव को सहायता प्रदान करने में अग्रणी देश रहा है। इसके साथ ही मालदीव पर भारतीय कर्जे को चुकाने के लिए भी उसने मोहलत माँगी है। बता दें कि मालदीव पर भारत का भी काफी कर्ज है, जिसकी किश्त उसे पिछले साल के आखिर तक चुकाया था। इस किस्त की रकम 400 मिलियन डॉलर से ज्यादा की है, जिसके लिए वो अब भारत से समय माँग रहा है और राहत देने की गुजारिश कर रहा है।

मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि मालदीव पर जो कर्ज है, वो काफी ज्यादा है। हम भारत से कर्जों को चुकाने के लिए राहत देने की माँग करने वाले हैं। भारत जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, वो रुकनी नहीं चाहिए, वर्ना देश की दिक्कतें बढ़ जाएँगी। मुइज्जूों ने कहा, “हमें जो परिस्थितियाँ विरासत में मिली हैं, उसमें लोन की रकम काफी ज्यादा है। इतना कि मालदीव की कुल अर्थव्यवस्था से भी अधिक। भारत के लोन को चुकाने के लिए हमें और अधिक समय लगेगा।”

गौरतलब है कि मोहम्मद मुइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है। उसने अपने चुनावी अभियान के दौरान ‘इंडिया आउट’ का नारा दिया था। उसने राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के प्रति सख्त रुख अपनाया और भारत को मालदीव से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की माँग की थी। हालाँकि बाद में सैनिकों की जगह असैनिक कर्मचारियों को भेजने पर सहमति बन गई।

मालदीव से जुड़ा एक और विवाद सामने आया था, जिसमें मुइज्जू की चीन यात्रा के समय मालदीव्स के मंत्रियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थी, जिसके बाद भारतीय नागरिकों ने मालदीव्स का बहिष्कार कर दिया था। इस अभियान की वजह से मालदीव की अर्थव्यवस्था को भी झटका लगा, जिसकी वजह से भारतीय पर्यटकों ने मालदीव की बुकिंग्स तक कैंसिल करा दी। इसके बाद मालदीव्स की सरकार को भारतीयों से माफी माँगनी पड़ी थी।

TMC की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा के कई ठिकानों पर CBI की छापेमारी, उनके पिता के आवास पर भी पहुँची जाँच एजेंसी: पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में कार्रवाई

तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शनिवार (23 मार्च 2024) को उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की। CBI ने ये कार्रवाई भ्रष्टाचार रोधी संस्था लोकपाल के निर्देशों पर की है। इससे पहले सीबीआई ने गुरुवार (21 मार्च 2024) को महुआ पर केस दर्ज किया था।

सीबीआई की यह कार्रवाई कैश फॉर क्वेरी मामले से जुड़ा है। एजेंसी महुआ मोइत्रा के कोलकाता समेत कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। दिल्ली से गई सीबीआई की एक टीम महुआ मोइत्रा के पिता के दक्षिण कोलकाता के अलीपुर इलाके में स्थित उनके फ्लैट पर पहुँची है और उसकी तलाशी ले रही है।

महुआ के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाए थे। इसकी प्रारंभिक जाँच के बाद लोकपाल ने सीबीआई को निर्देश जारी किए। लोकपाल ने CBI को इस मामले के सभी पहलुओं की जाँच करके 6 महीने में रिपोर्ट देने को कहा है। दुबे ने आरोप लगाया था कि महुआ ने उद्योगपति गौतम अडानी पर हमला करने के लिए व्यवासायी दर्शन हीरानंदानी के कहने पर लोकसभा में सवाल पूछे थे।

न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी, सदस्य अर्चना रामसुंदरम और महेंद्र सिंह की लोकपाल पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एक सांसद के रूप में महुआ मोइत्रा के खिलाफ लगाए गए आरोप ठोस सबूत पर आधारित हैं और ये आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। लोकपाल की पीठ ने कहा कि इस बारे में सच का पता लगाने के लिए गहन जाँच की आवश्यकता है।

बता दें कि महुआ ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। पिछले साल दिसंबर में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने अपने निष्कासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हालाँकि, उन्हें राहत नहीं मिली। वहीं, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है।

भूटान में PM मोदी ने किया ‘माताओं और बच्चों’ के लिए अस्पताल का उद्घाटन, भारत सरकार ने दिया निर्माण का पूरा फंड: शिलापट पर दिखेगा तिरंगा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान की 2 दिवसीय यात्रा यादगार रहेगी। शुक्रवार (22 मार्च 2024) को पीएम थिम्पू के पारो एयरपोर्ट पहुँचे थे। यहाँ भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने ‘बड़ा भाई’ कहकर उनकी अगुवानी की। हवाई अड्डे से थिम्पू के 45 किलोमीटर लम्बे मार्ग को भारत और भूटान के झंडों से सजाया गया था। वहीं सड़क के दोनों तरफ भूटानी लोग भी खड़े थे जो पीएम का अभिवादन कर रहे थे।

इस यात्रा के दौरान PM मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुआ और पीएम मोदी ने थिम्पू में ग्यालत्सुएन जेत्सुन पेमा वांगचुक मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का उद्घाटन किया। खास बात यह है कि इस अस्पताल को बनाने में पूरा पैसा भारत द्वारा लगाया है। पीएम मोदी ने ‘ग्यालत्सुएन जेत्सुन पेमा वांगचुक मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल’ का उद्घाटन करके अस्पताल का दौरा भी किया। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने PM मोदी को वहाँ के स्ट्रक्चर और सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। अस्पताल के शिलापट पर एक तरफ भारत और दूसरी तरफ भूटान का झंडा लगा हुआ है।

इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने नरेंद्र मोदी को ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित किया। PM मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष हैं। यह सम्मान मिलने पर ख़ुशी जताते हुए मोदी ने भूटान नरेश को धन्यवाद किया है। खुद को मिले इस सम्मान को प्रधानमंत्री मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया है।

बता दें कि मुताबिक भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को ‘प्रथम पड़ोसी की नीति’ करार दिया है। मंत्रालय ने इसे दोनों देशों के बीच नियमित और हाई लेवल वैचारिक आदान-प्रदान की परम्परा बताया। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भी नरेंद्र मोदी की यात्रा पर बेहद उत्साह दिखाया है। अपने X हैंडल पर उन्होंने PM मोदी को ‘बड़े भाई’ कह कर लिखा, “आपका स्वागत है।” वहीं PM मोदी भी इस यात्रा के दौरान बेहद खुश दिखे। इस अवसर पर उन्होंने दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद जताई।

इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भूटान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया है। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने नरेंद्र मोदी को ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो से सम्मानित किया। PM मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष हैं। यह सम्मान मिलने पर ख़ुशी जताते हुए मोदी ने भूटान नरेश को धन्यवाद किया है। खुद को मिले इस सम्मान को प्रधानमंत्री मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया है। बताते चलें कि पहले यह यात्रा 21 और 22 मार्च को होनी थी लेकिन भूटान में खराब मौसम के चलते समय में थोड़ा बदलाव करना पड़ा था।

‘बहरों को सुनाने के लिए ऊँची आवाज़ की ज़रूरत’: ब्रिटिश सरकार को नाकों चने चबवा दिए थे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु, शहीद दिवस पर देश कर रहा नमन

भारत को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के दो मुखर स्वर थे, एक अहिंसक आंदोलन तो दूसरा सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन। सन् 1857 से लेकर 1947 तक भारतीय स्वतंत्रता हेतु जितने भी प्रयत्न हुए, उनमें क्रांतिकारियों का आंदोलन सर्वाधिक प्रेरणादायक रहा।

भारत को मुक्त कराने के लिए सशस्त्र विद्रोह की एक अखण्ड परम्परा रही है। भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना के साथ ही सशस्त्र विद्रोह का आरम्भ हो गया था। वस्तुतः क्रांतिकारी आंदोलन भारतीय इतिहास का गौरवशाली स्वर्ण युग ही था। अपनी मातृभूमि की सेवा, उसके लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने की जो भावना उस दौर में प्रस्फुटित हुई, आज उसका नितांत अभाव हो गया है।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात आधुनिक नेताओं ने भारत के सशस्त्र क्रांतिकारी आंदोलन को प्रायः दबाते हुए उसे इतिहास में कम महत्व दिया और कई स्थानों पर उसे विकृत भी किया गया। स्वराज्य उपरान्त यह सिद्ध करने की चेष्टा की गई कि हमें स्वतंत्रता केवल कॉन्ग्रेस के अहिंसात्मक आंदोलन के माध्यम से मिली है। इस नए विकृत इतिहास में स्वाधीनता के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले, सर्वस्व समर्पित करने वाले असंख्य क्रांतिकारियों, अमर हुतात्माओं की पूर्ण रूप से उपेक्षा की गई।

23 मार्च 1931 का दिन भारतीय इतिहास में अत्यन्त ही हृदयविदारक घटना के रुप में याद किया जाता है। ये वही काला दिन है, जब क्रूर अंग्रेज़ी हुक़ूमत ने मात्र 23 वर्षीय भगत सिंह और सुखदेव थापर तथा 22 वर्षीय शिवराम हरि राजगुरु को राष्ट्रप्रेम के अपराध में फाँसी दे दी और आज़ादी के ये मतवाले सदा के लिए अमर हो गए।

लाला लाजपत राय की हत्या का प्रतिशोध

सन् 1927 में काकोरी कांड के सिलसिले में भगत सिंह ने अपना नाम बदलकर ‘विद्रोही’ नाम से एक लेख लिखा था, जिसके कारण उन्हें पहली बार गिरफ़्तार किया गया था। लाहौर में दशहरे के मेले में बम विस्फोट का आरोप भी उन पर लगाया गया था। बाद में अच्छे व्यवहार के कारण उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था।

उसी वर्ष जब साइमन कमीशन भारत आया तो लाला लाजपत राय ने उसका पुरजोर विरोध किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एसपी जेए स्कॉट ने निर्दोष भीड़ पर लाठीचार्ज करने का आदेश दे दिया। उसने दूर से ही लाला लाजपत राय को देख लिया। उसने उन पर बेंत बरसाना शुरू कर दिया और तब तक बेंत चलाता रहा, जब तक वो लहूलुहान होकर ज़मीन पर नहीं गिर गए। लाला जी ने घोर पीड़ा में भी दहाड़ते हुए कहा था:

“हमारे ऊपर चलाई गई हर लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में ठोकी गई कील साबित होगी।”

उनकी शहादत से समूचा भारतवर्ष आहत और आक्रोशित था। भगत सिंह जैसे तमाम क्रांतिकारी लाला जी को अपना आदर्श मानते थे और वे चुप नहीं बैठने वाले थे। 10 दिसंबर 1928 को भगवती चरण वोहरा की पत्नी दुर्गा देवी की अध्यक्षता में देश भर के क्रांतिकारियों की लाहौर में एक बैठक हुई। इसमें यह तय हुआ कि लाला जी की मौत का बदला लिया जाएगा।

सैंडर्स की हत्या

योजना अनुसार भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद और जयगोपाल स्कॉट को मारने के अभियान में निकल पड़े। स्कॉट की कार का नंबर 6728 था। उसके थाने पहुँचने की सूचना देने की ज़िम्मेदारी जय गोपाल को सौंपी गई। उन्होंने स्कॉट को पहले कभी नहीं देखा था। उस दिन स्कॉट छुट्टी पर था। थाने से बाहर आ रहे असिस्टेंट एसपी जेपी सैंडर्स को उन्होंने स्कॉट समझ लिया।

इसके बाद जय गोपाल ने अपने साथियों को हमले का संकेत दे दिया। राजगुरू ने अपनी जर्मन माउज़र पिस्टल से असिस्टेंट एसपी जेपी सैंडर्स पर गोली चला दी। भगत सिंह चिल्लाते ही रह गए, ‘नहीं, नहीं, नहीं… ये स्कॉट नहीं हैं’, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। जब सैंडर्स गिरा तो भगत सिंह ने भी उस पर कुछ गोलियाँ दाग दीं।

स्वतंत्रता सेनानी शिव वर्मा अपनी किताब ‘रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ फ़ेलो रिवोल्यूशनरीज़’ में लिखते हैं, “जब भगत सिंह और राजगुरू सैंडर्स को मारने के बाद भाग रहे थे तो एक हेड कॉन्सटेबल चानन सिंह उनका पीछा करने लगा। जब आज़ाद के चिल्लाने पर भी वो नहीं रुका तो राजगुरु ने उसे भी गोली मार दी।”

अगले दिन शहर की दीवारों पर लाल स्याही से बने पोस्टर चिपके पाए गए, जिन पर लिखा था, “सैंडर्स इज़ डेड। लाला लाजपत राय इज़ एवेंज्ड।”

बहरों को सुनाने के लिए सेंट्रल असेंबली में धमाका

आगरा में ही भगत सिंह और उनके साथियों की एक बैठक हुई, जिसमें सैंडर्स को मारे जाने के परिणाम पर बड़ी बहस हुई। सबका मानना था कि इस हत्या का वो असर नहीं हुआ, जिसकी वो सब उम्मीद कर रहे थे। उनको उम्मीद थी कि इससे डरकर बड़ी संख्या में अंग्रेज़ भारत छोड़ देंगे।

उन्हीं दिनों असेंबली में दो बिलों पर विचार किया जाना था। एक था ‘पब्लिक सेफ़्टी बिल’, जिसमें सरकार को बिना मुक़दमा चलाए किसी को भी गिरफ़्तार करने का अधिकार दिया गया था। दूसरा था ‘ट्रेड डिस्प्युट बिल’, जिसमें श्रमिक संगठनों को हड़ताल करने की मनाही हो गई थी।

जिस दिन ये बिल पेश किए जाने थे यानी 8 अप्रैल को, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ख़ाकी कमीज़ और शॉर्ट्स पहने हुए सेंट्रल असेंबली की दर्शक दीर्घा में पहुँच गए। उस समय असेंबली में कई बड़े नेता- जैसे कि विट्ठलभाई पटेल, मोहम्मद अली जिन्ना और मोतीलाल नेहरू मौजूद थे।

भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास

कुलदीप नैयर लिखते हैं, भगत सिंह ने बहुत सावधानी से उस जगह बम लुढ़काया जहाँ एसेंबली का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। जैसे ही बम फटा पूरे हॉल में अँधेरा छा गया। बटुकेश्वर दत्त ने दूसरा बम फेंका। तभी दर्शक दीर्घे से असेंबली में कागज़ के पैम्फ़लेट उड़ने लगे। उन पैम्फ़लेटों पर लिखा था, “बहरों को सुनाने के लिए ऊँची आवाज़ की ज़रूरत होती है।”

इस दौरान असेंबली के सदस्यों को ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ और ‘लॉन्ग लिव प्रोलिटेरियट’ के नारे सुनाई दिए। बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने वहाँ से भागने की कोशिश नहीं की, जैसा कि पहले से तय था, उन्होंने अपने-आप को गिरफ़्तार करवाया। वहीं पर भगत सिंह ने अपनी वो पिस्टल सरेंडर की, जिससे उन्होंने सैंडर्स की हत्या की थी।

भगत सिंह को पता था कि ये पिस्टल सैंडर्स की हत्या में उनके शामिल होने की सबसे बड़ी सबूत होगी। दोनों को अलग-अलग थानों में ले जाया गया। भगत सिंह को मुख्य थाने और बटुकेश्वर दत्ते को चाँदनी चौक के थाने पर लाया गया। इसका उद्देश्य था कि दोनों से अलग-अलग पूछताछ की जाए, ताकि सच का पता लगाया जा सके।

एसेंबली में बम फेंकने के लिए भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सज़ा मिली। वहीं, सैंडर्स की हत्या के लिए भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को फाँसी की सज़ा सुनाई गई। इन तीनों क्रांतिकारियों को 23 मार्च 1931 को वर्तमान में पाकिस्तान स्थित लाहौर सेंट्रल जेल में शाम 7 बजकर 33 मिनट पर फाँसी दे दी गई। इसके साथ ही ये क्रांतिकारी सदा के लिए अमर हो गए।

‘ईसाइयों की सभा में हमने किया हमला, सैंकड़ों मार दिए’: मॉस्को में हुए आतंकी अटैक की इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली जिम्मेदारी, 62 मरे, 145 घायल

मॉस्को में इस्लामिक स्टेट के आतंकी हमले में अब तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 145 लोग बुरी तरह से घायल बताए जा रहे हैं। इस आतंकी हमले के समय हाल में करीब 6200 लोग मौजूद थे। ये हमला रूस के मशहूर रॉक बैंक ‘पिकनिक’ की प्रस्तुति के समय हुआ, जब हाल खचाखच भरा हुआ था। रूस की राजधानी में हुए आतंकी हमले की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निंदा की है।

रॉक बैंड प्रोग्राम में जुटे थे लोग, आतंकियों ने बरसाई अंधाधुँध गोलियाँ

रूसी समाचार सेवा TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आतंकी हमला मॉस्को ओ-ब्लास्ट के क्रास्नोगोर्स्क (Krasnogorsk) में स्थित क्रॉकस सिटी हाल (Crocus City Hall) में हुआ। उस समय सोवियत रूस के जमाने के फेमस म्यूजिक बैंड ‘पिकनिक’ का कार्यक्रम चल रहा था। मौके पर 6200 से अधिक लोग मौजूद थे। ये बैंड मंच पर प्रस्तुति देने के लिए पहुँच ही रहा था कि हाल में चारों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। रूसी सेना की ड्रेस में आए हमलावरों ने हर तरफ गोलीबारी की।

इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आतंकी हमले से हर तरफ चीख पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। गोलीबारी के समय बच्चों का एक बड़ा ग्रुप भी वहाँ मौजूद था। बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में अब तक 62 लोगों की मौत हो गई है, तो 145 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इस हमले की वजह से हाल में आग भी लग गई, जिसे बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है। हालाँकि अब रूस के सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को कंट्रोल में ले लिया है।

आईएस ने ली हमले की जिम्मेदारी

आतंकी संगठन आईएसआईएस ने हमले की जिम्मेदारी ली है कहा है कि उसके लड़ाकों ने ईसाइयों की भारी भीड़ पर हमला किया। आईएसआईएस से जुड़ी समाचार एजेंसी अमाक की ओर से टेलीग्राम पर जारी किए बयान में बताया गया, “हमारे लड़ाकों ने रूस की राजधानी मॉस्को के बाहरी इलाके में ईसाइयों की बड़ी सभा पर हमला बोला था, जिसमें कई लोग मारे गए, कई जख्मी हुए और उस जगह भारी विनाश भी हुआ.” हालाँकि, आईएसआईएस की ओर से इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है।

रूस के साथ खड़ा है भारत

मॉस्को में हुए आतंकी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निंदा की है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “हम मास्को में हुए जघन्य आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं। हमारी संवेदनाएँ और प्रार्थनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। दुख की इस घड़ी में भारत रूसी संघ की सरकार और लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंसर्ट पर हमले के दौरान आतंकियों ने रूसी सेना की वर्दी पहन रखी थी। उन्होंने हॉल में धमाका भी किया, जिसकी वजह से हाल के अंदर एक छत भी टूट गई। इस हमले के दौरान कई तरफ से आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। ये आतंकी हमला ऐसे समय में हुआ है जब व्लादिमीर पुतिन ने हाल में हुए राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है और रूस के राष्ट्रपति के रूप में लगातार 5वाँ कार्यकाल संभालने जा रहे हैं। वहीं, वो यूक्रेन के साथ भी लंबे समय से युद्ध में है।