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पाकिस्तानी, हुडदंगी, घुसपैठिए, इनको जेल में डालो… केजरीवाल ने ‘पीड़ितों’ के जख्मों पर फिर रगड़ा नमक, शरणार्थियों ने INDI गठबंधन के खिलाफ किया प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वाली आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के खिलाफ आज (15 मार्च 2024) फिर पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी शरणार्थी सड़कों पर उतरे। उन्होंने हाथ में पोस्टर और तिरंगा लेकर AAP और कॉन्ग्रेस का विरोध किया। इसे देखते हुए अरविंद केजरीवाल की एक और बार सख्त टिप्पणी आई है।

अरविंद केजरीवाल ने सड़कों पर प्रदर्शन करते शरणार्थियों को देख अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “इन पाकिस्तानियों की हिम्मत? पहले हमारे देश में गैर कानूनी तरीके से घुसपैठ की, हमारे देश का क़ानून तोड़ा। इन्हें जेल में होना चाहिए था। इनकी इतनी हिम्मत हो गई कि हमारे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, हुडदंग कर रहे हैं? CAA आने के बाद पूरे देश में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी फैल जाएँगे और लोगों को परेशान करेंगे। बीजेपी इन्हें अपना वोट बैंक बनाने के स्वार्थ में पूरे देश को परेशानी में धकेल रही है।”

केजरीवाल ने यह टिप्पणी पीटीआई द्वारा साझा की गई वीडियो पर की। इसमें सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को विरोध करते देखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास करती दिख रही है। सामने आई वीडियो कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर के पास की है। यहाँ प्रदर्शन करने आई एक महिला को कहते सुना जा सकता है- “हम अरविंद केजरीवाल, राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, ये लोग क्यों हमारे अधिकार छीनना चाहते हैं जब पीएम हमें दे रहे हैं।”

विपक्षी नेताओं का विरोध

बता दें कि जब से मोदी सरकार ने सीएए को लेकर अधिसूचना जारी की है उसके बाद से कॉन्ग्रेस नेता और आप नेता समेत बाकी विपक्षी दल भी इसके विरोध में टिप्पणियाँ कर रहे हैं। हाल में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CAA को भेदभावपूर्ण था। उन्होंने कहा था कि सीएए भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों और भावना के खिलाफ है। चुनाव से ठीक पहले अधिसूचित CAA नियम दर्शाता है कि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति को लेकर कितनी सजग है।

वहीं AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर सीएए लागू होगा तो देश में अंधाधुंध लोग आएँगे, जैसा कि स्वतंत्रता के बाद हुआ था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और चोरियाँ, डकैतियाँ और बलात्कार आदि होंगे।

इन्हीं बयानों के बाद कल भी पाकिस्तान से आए शरणार्थी सड़कों पर उनके विरोध में उतरे थे। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के समर्थन में नारे लगाए थे और सीएम केजरीवाल को कहा था कि वह सीएए पर भ्रम न फैलाएँ, जनता को सच बताएँ। केजरीवाल के इसी बयान के विरोध में गृहमंत्री अमित शाह ने भी उनसे कहा था कि वो हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध के खिलाफ बोलते हैं मगर कभी रोहिंग्याओं के खिलाफ नहीं कहा।

चुनावी बॉन्ड के नंबर भी बताओ: सुप्रीम कोर्ट ने SBI से माँगे सारे डिटेल, ECI ने 14 मार्च को सार्वजानिक किए थे दस्तावेज

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मार्च 2024) को चुनावी बांड मामले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से चुनावी बॉन्ड की संख्या का खुलासा न करने पर प्रतिक्रिया माँगी। इसके साथ इससे संबंधित सारे विवरण क्यों नहीं सामने लाए गए, इसको लेकर भी पूछा है। कोर्ट ने कहा कि चुनावी बॉन्ड की संख्या से पहचान करने में मदद मिलेगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पाँच सदस्यीय पीठ ने इस पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि एसबीआई ने 11 मार्च 2024 के कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। इस आदेश में कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड से संंबंधित सभी विवरणों का खुलासा करने के लिए बैंक को कहा था।

कोर्ट ने कहा, “संविधान पीठ के फैसले ने स्पष्ट किया कि चुनावी बॉन्ड के सभी विवरण खरीद की तारीख, खरीदार का नाम, मूल्यवर्ग सहित उपलब्ध कराए जाएँगे। एसबीआई ने चुनावी बॉन्ड संख्या (अल्फा न्यूमेरिक नंबर) का खुलासा नहीं किया है। हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह एसबीआई को सोमवार को पेश होने के लिए नोटिस जारी करे।”

इस पीठ ने फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा था कि एसबीआई 12 अप्रैल 2019 से लेकर अभी तक का चुनावी बॉन्ड के माध्यम से पैसे हासिल करने वाले राजनीतिक दलों का विवरण भारत के चुनाव आयोग को सौंपे। यह काम 6 मार्च तक किया जाना था, लेकिन एसबीआई ने समय सीमा बढ़ाने की माँग की।

एसबीआई ने कहा कि पूरे डेटा को निकालने के लिए उसे जून 2024 तक का समय दिया जाए। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि 11 मार्च 2024 खरीदे गए प्रत्येक चुनावी बॉन्ड का विवरण भारतीय निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। साथ ही इस पूरे डिटेल को आयोग की वेबसाइट पर भी दिखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने एसबीआई से कहा था कि चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले का नाम, चुनावी बॉन्ड की कीमत और उसका नकदीकरण करने की तारीख से लेकर राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक बॉन्ड का विवरण उपलब्ध कराए। आखिरकार एसबीआई ने 12 मार्च 2024 को चुनाव आयोग को यह विवरण भेजा और 14 मार्च को चुनाव आयोग ने इसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया।

इसके बाद चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया कि मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को सीलबंद लिफाफे/बक्से में सौंपे गए चुनावी बॉन्ड के दस्तावेज उसे वापस कर दिए जाएँ। आयोग का कहना था कि उसके पास इसकी कोई अन्य प्रति नहीं है। आयोग ने कहा कि कोर्ट द्वारा लौटाए जाने के बाद वह उन दस्तावेजों को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर सकता है।

चुनाव आयोग की इस माँग को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्वीकार कर लिया और यह सुनिश्चित किया कि न्यायालय द्वारा स्कैन और डिजिटलीकरण के बाद मूल प्रतियाँ चुनाव आयोग को वापस कर दी जाएँ। 17 मार्च को या उससे पहले वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।

दरअसल, चुनावी बॉन्ड को वित्त अधिनियम 2017 के माध्यम से पेश किया गया था। इसके कारण तीन अन्य क़ानूनों – भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, आयकर अधिनियम और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में कम से कम पाँच संशोधन किए गए थे। इन संशोधनों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गईं।

इन याचिकाओं में कहा गया है कि चुनावी बॉन्ड ने राजनीतिक दलों के लिए असीमित एवं अनियंत्रित फंडिंग के दरवाजे खोल दिए हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई शुरू की और लगभग सात साल बाद केंद्र सरकार के इस रुख को खारिज कर दिया कि चुनावी बॉन्ड वाली यह योजना पारदर्शी थी।

ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने सँभाला चुनाव आयुक्त का कामकाज, 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा आयोग

देश के चुनाव आयोग में नियुक्त किए गए दो नए चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्हें कल (14 मार्च, 2024) चुनाव आयोग में दो खाली पदों पर नियुक्त किया गया था। चुनाव आयोग ने इसी के साथ लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के लिए 16 मार्च, 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है।

ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने आज (15 मार्च, 2024) को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर में अपना कार्यभार ग्रहण किया है। अब तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में कोई भी रिक्ति नहीं रह गई है। दोनों नवनियुक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के समय देश के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार भी मौजूद रहे।

इन चुनाव आयुक्तों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री अमित शाह और लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी वाली समिति ने की थी। इनके नाम पर कल राष्ट्रपति भवन ने मुहर लगा दी थी। इनकी नियुक्ति नए कानून के तहत हुई है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाल ही में पास किया गया था।

चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने वाले ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू, दोनों ही पूर्व IAS अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार केरल काडर के IAS अधिकारी रहे हैं और वह कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय केन्द्रीय गृह मंत्रालय में थे। वह IIT कानपुर और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पढ़े हुए हैं।

वहीं दूसरे चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, हाल ही में IAS से रिटायर हुए थे। वह उत्तराखंड सरकार में मुख्य सचिव थे। वह उत्तराखंड बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। वह इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वह हाल ही में लोकपाल के सचिव के रूप में नियुक्त हुए थे।

चुनाव आयोग करेगा लोकसभा चुनाव का ऐलान

चुनाव आयोग ने कल (16 जनवरी, 2024) को 2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और बाकी दो आयुक्त करेंगे। इसमें लोकसभा चुनाव के चरणों और साथ ही कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का भी ऐलान किया जाएगा।

इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार चुनाव अप्रैल-मई में होंगे और मई के अंत तक नई सरकार का गठन हो जाएगा। पिछली बार 10 मार्च, 2019 को लोकसभा चुनाव का ऐलान किया गया था। इस बार देश के 96.88 करोड़ मतदाता देश की सरकार तय करेंगे।

सैफई मेडिकल कॉलेज की 18 साल की छात्रा का शव सड़क किनारे मिला, शादीशुदा महेंद्र बाथम गिरफ्तार: 4 साल से पड़ा था पीछे, रेप की जताई जा रही आशंका

इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज में एएनएम की छात्रा की हत्या कर शव को हाईवे पर फेंक दिया गया, जिसके बाद मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने जमकर हंगामा मचाया। इस बीच, पुलिस ने हत्यारोपी महेंद्र बाथम को गिरफ्तार कर लिया है। वो छात्रा के गाँव का पड़ोसी है और शादीशुदा है। इसके बावजूद वो छात्रा से प्रेम-संबंध बनाना चाहता था। छात्रा ने मना किया, तो उसने छात्रा की हत्या कर दी।

ये वारदात सैफई मेडिकल कॉलेज से जुड़ी है। सैफई के वैदपुरा थाना इलाके में गुरुवार (15 मार्च 2024) को सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी की छात्रा का संदिग्ध हालत में शव मिलने से हड़कंप मच गया। छात्रा का शव वैदपुरा इलाक़े में सोनई पुल के पास से बरामद हुआ, जिसके बाद छात्र भड़क उठे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक छात्रा सैफई मेडिकल कॉलेज में एएनएम फ़र्स्ट ईयर की स्टूडेंट थी। वो दोपहर के समय अपनी सहेली को मोबाइल देकर चली गई, लेकिन शाम के समय उसका शव वैदपुरा में मदर डेरी के पास से बरामद हुआ। छात्रा के साथ दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही है, हालाँकि अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है।

इस मामले में मुख्य आरोपित महेद्र बाथम गिरफ्तार हो गया है। वो शादीशुदा है, इसके बावजूद वो लड़की पर प्रेम-प्रसंद के लिए दबाव बना रहा था। वो मेडिकल कॉलेज से ही लड़की को लेकर गया था, लेकिन उसने छात्रा की हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की के शव पर गोली का निशाना भी मिला है। शव जहाँ मिला है, वो स्थान मेडिकल कॉलेज से 8 किमी दूर बताया जा रहा है। इस हत्याकांड की जानकारी मिलते ही छात्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने सैफई मेडिकल कॉलेज में कामकाज ठप कर दिया। घटना की जानकारी पर एसएसपी समेत पुलिस अधिकारी पोस्टमार्टम हाउस पर पहुँचे और छात्रों को कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं, छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया।

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि मुख्य नामजद आरोपित महेंद्र बाथम को गिरफ्तार कर लिया गया है। महेंद्र बाथम औरैया का रहने वाला है। वह लड़की को पहले से जानता था। वहीं, उसके मददगारों को भी हिरासत में ले लिया गया है। एसएसपी ने बताया कि हत्या में प्रयुक्त वाहन और हथियार को भी बरामद कर लिया गया है। अब इटावा पुलिस महेंद्र बाथम के खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई कर रही है।

इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्रा की हत्या को गंभीर मामला बताया और इस मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है। उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। हालाँकि पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया है, बल्कि उसके सहयोगियों को भी पकड़ा है। अब पुलिस इस मामले में एनएसए के तहत भी कार्रवाई कर रही है।

जिस ‘पत्रकार’ के लिए PM मोदी की हत्या की साजिश ‘छोटे-मोटे बम धमाके’ की कोशिश, उसने ज्वाइन किया अलजजीरा: पहले ही एपिसोड में परोसी हिंदू घृणा

NDTV के विवादित न्यूज एंकर श्रीनिवासन जैन ने कतर के मीडिया संस्थान अलजजीरा को ज्वाइन कर लिया है। कल यानी 14 मार्च को उन्होंने अपने एक्स पर एक ट्वीट शेयर करके इसकी जानकारी दी। इस ट्वीट में उन्होंने उस रिपोर्ट की क्लिप लगाई हुई थी जो उन्होंने अलजजीरा के लिए की। ये रिपोर्ट उन्होंने अयोध्या में रामजन्मभूमि के वक्त की थी।

श्रीनिवासन जैन ने इस रिपोर्ट में पूर्ण रूप से अलजजीरा को वही बिंदु निकालकर दिए जो अलजजीरा चाहता था। उन्होंने भारत में हिंदुत्व के प्रति जागृत होते लोगों को नकारात्मक रूप से पेश करने का प्रयास किया है। साथ ही ये दिखाया कि भारत अब सेकुलर राष्ट्र के अलावा बहुसंख्यक आबादी का राष्ट्र हो गया है। यहाँ एक बड़ा धार्मिक इवेंट, जो कि पॉलिटिकल भी है क्योंकि यहाँ देश के प्रधानमंत्री आ रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर भी गौर करवाया कि ये मंदिर एक मजहबी ढाँचे को तोड़कर बना है जिसे हिंदू कार्यकर्ताओं ने तोड़ा था। इसके अलावा श्रीनिवासन ने मीडिया को भी दिखाया कि जो मीडिया 1990 में हिंदू कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़े गए ढाँचे पर रिपोर्ट दिखा रही था वो अब उसी जगह खड़े हुए मंदिर के बनने से खुश है और उसे उत्साह के साथ दिखा भी रहा है।

2023 में दिया था NDTV से इस्तीफा

गौरतलब है कि अलजजीरा ज्वाइन करने वाले श्रीनिवासन ने पिछले साल जनवरी में एनडीटीवी से अपना इस्तीफा दिया था। श्रीनिवासन लगभग 30 सालों से कथित पत्रकारिता संस्थान एनडीटीवी के लिए सेवाएँ दे रहे थे। इस्तीफे से पहले वह एनडीटीवी 24×7 चैनल में ग्रुप एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे।

श्रीनिवासन जैन ने एक ट्वीट के जरिए अपने फैसले का ऐलान किया था। उन्होंने लिखा था, “एनडीटीवी पर लगभग तीन दशक से चला आ रहा सिलसिला आज समाप्त हो गया। इस्तीफा देने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन… जो है यही है। बाकी बातें बाद में।”

विवादों से घिरी श्रीनिवासन की पत्रकारिता

बता दें कि वर्ष 1995 से NDTV के साथ काम कर रहे श्रीनिवासन जैन अपने करियर के दौरान लगातार विवादों में घिरे रहे। जुलाई 2022 में उन्होंने तथाकथित फैक्ट-चेकर मोहम्मद ज़ुबैर को अपना मित्र बताते हुए उसके जमानत के लिए ₹50,000 का मुचलका भरा था। कोरोना काल में उन्होंने कोवैक्सीन को लेकर झूठ फैलाया था। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश करने वाली लश्कर-ए-तैयबा की आतंकवादी इशरत जहाँ के जुर्म को कमतर बतलाने का प्रयास किया था। उन्होंने दावा किया था कि इशरत जहाँ गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को मारने नहीं आई थी बल्कि छोटा-मोटा बम धमाका करने आई थी।

‘BJP स्कीम लाती है तो कॉन्ग्रेस-डीएमके स्कैम करते हैं’: पीएम मोदी कन्याकुमारी में बोले- तमिलनाडु से उठी लहर INDI गठबंधन की घमंड तोड़ेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (15 मार्च 2024) को तमिलनाडु के कन्‍याकुमारी पहुँचे और एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि INDI गठबंधन तमिलनाडु का कभी विकास नहीं कर सकता। डीएमके और कॉन्ग्रेस का गठबंधन नहीं चाहता कि तमिलनाडु कभी विकसित बने। पीएम ने कहा कि इनका घोटालों और भ्रष्‍टाचार का इतिहास रहा है।

पीएम मोदी ने कहा, “DMK और कॉन्ग्रेस का इंडी अलायंस कभी भी तमिलनाडु को विकसित नहीं बना सकता। इन लोगों की हिस्ट्री घोटालों की है। इन लोगों की राजनीति का आधार लोगों को लूटने के लिए सत्ता में आना है। एक बीजेपी की कल्याणकारी स्कीम होती है और दूसरी ओर इनके करोड़ों के स्कैम होते हैं।”

उन्होंने कहा, “हमने ऑप्टिकल फाइबर और 5जी दिया। हमारे नाम पर डिजिटल इंडिया स्कीम है। इंडी अलायंस के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए का 2जी का स्कैम है। DMK उस लूट की सबसे बड़ी हिस्सेदार थी। बीजेपी ने बड़ी संख्या में एयरपोर्ट बनाए। हमारे नाम पर उड़ान स्कीम है। इंडी अलायंस के नाम देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले हेलीकॉप्टर स्कैम है।”

प्रधानमंत्री ने कन्याकुमारी में कहा, “हमारी खेलो इंडिया और टॉप स्कीम से देश ने खेलों में ऊँचा मुकाम हासिल किया, लेकिन उनके नाम पर सीडब्ल्यूजी स्कैम का दाग है। हमने खनिज सेक्टर में रिफॉर्म को लागू किया। इंडी गठबंधन के नाम पर स्कैम की कालिख लगी है। ये लिस्ट बहुत लंबी है और यही इंडी अलायंस की सच्चाई है।”

मछुआरों का मुद्दा उठाते हुए पीएम ने कहा, “इंडी अलायंस के ये लोग तमिलनाडु के लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ के भी जिम्मेदार हैं। श्रीलंका में हमारे मछुआरे भाइयों को फाँसी की सजा दी गई थी, ये मोदी चुप नहीं बैठा। हर रास्ते का इस्तेमाल किया और हर प्रकार का दबाव बनाया। मैं उन सभी मछुआरों को श्रीलंका से फाँसी के फंदे से उतारकर वापस लाया।”

डीएमके और कॉन्ग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस और डीएमके केवल महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करना जानते हैं… डीएमके नेताओं ने जयललिता जी के साथ जो किया वह सभी को याद है। महिलाओं के प्रति उनका नजरिया आज भी वैसा ही है. तमिलनाडु में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भाजपा की सरकार संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण बिल लाई तो कॉन्ग्रेस और डीएमके ने इसका नहीं समर्थन किया। पीएम मोदी ने कहा, “मैं 1991 में एकता यात्रा लेकर कन्याकुमारी से कश्मीर गया था, इस बार मैं कश्मीर से कन्याकुमारी आया हूँ। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने देश को तोड़ने का सपना देखने वालों को नकार दिया है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “अब तमिलनाडू के लोग भी ऐसे लोगों को नकारने जा रहे हैं। आज कन्याकुमारी से देश के इस दक्षिणी छोर से जो लहर उठी है, वो लहर बहुत दूर तक जाने वाली है। मैं तमिलनाडू की धरती पर बहुत बड़े परिवर्तन की आहट देख रहा हूँ। तमिलनाडू में भाजपा का प्रदर्शन इस बार DMK और कॉन्ग्रेस के INDI गठबंधन का सारा घमंड तोड़कर रख देगा।”

सैंटियागो मार्टिन ने दिए ₹1368 करोड़, कॉन्ग्रेस-TMC-लेफ्ट-DMK से लिंक: सबसे ज्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली ‘फ्यूचर गेमिंग’ के बारे में जानिए सब कुछ

कल (14 मार्च, 2024) देश के चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए चुनावी बॉन्ड खरीदने वाली कम्पनियों के विषय में जानकारी प्रकाशित की। सबसे अधिक बॉन्ड खरीदने वाली फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज कम्पनी है, इसका मालिक घोटाले का आरोपित सैंटियागो मार्टिन है।

इस जानकारी से सामने आया है कि सैंटियागो मार्टिन की कम्पनी ने 12 अप्रैल, 2019 से 24 जनवरी, 2024 के बीच ₹1,368 करोड़ का राजनीतिक चंदा दिया है। ‘लॉटरी किंग’ के रूप में भी जाने जाना वाला, सैंटियागो मार्टिन का केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPIM), तमिलनाडु में सत्ताधारी द्रविड़ मुन्नेत्र कजघम (DMK), पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ काफी करीबी रिश्ता है।

CPI(M) से सैंटियागो मार्टिन का गठजोड़

सैंटियागो मार्टिन ने वर्ष 2007 में कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र देशाभिमानी को ₹50 लाख के चार चुनावी बॉन्ड के माध्यम से ₹2 करोड़ का चंदा दिया था। जब यह मामला खुला तो पार्टी लोगों के निशाने पर आ गई। पार्टी की छवि बचाने के लिए महासचिव प्रकाश करात ने पैसा स्वीकार करने के बाद उसे लौटाने का निर्णय लिया था।

वर्ष 2016 में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के करीबी माने जाने वाले एक वरिष्ठ वकील एमके दामोदरन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर एक मामले में सैंटियागो मार्टिन की तरफ से केस लड़ा था। मुख्यमंत्री विजयन के कानूनी सलाहकार एमके दामोदरन लॉटरी घोटाले के सिलसिले में मार्च 2018 में सैंटियागो मार्टिन के लिए कोर्ट गए थे।

DMK से भी संबंध

अक्टूबर 2010 में, तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल पी.एस. रमन ने केरल हाई कोर्ट में सैंटियागो मार्टिन का केस लड़ा था। जब इस पर केरल सरकार ने ऐतराज किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री करूणानिधि ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और रमन को इस मामले की पैरवी छोड़नी पड़ी थी।

फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज के मालिक सैंटियागो मार्टिन ने ₹50 करोड़ रुपये खर्च करके करुणानिधि की 75वीं फिल्म के निर्माण में मदद की। उसने इसमें स्क्रिप्ट भी लिखी थी। यह भी कहा जाता है कि ‘इलैगनन‘ नाम की एक फिल्म 3 साल तक अधर में लटकी रही, इसके बाद मार्टिन ने इसे पुनः चालू किया। इस फिल्म की कहानी लिखने के लिए करूणानिधि को ₹45 लाख का भुगतान किया गया था।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, “सिनेमा के बड़े नामों का कहना है कि इसके बदले में उसे (सेंटिआगो) को बिना कोई समस्या के अपना लॉटरी का धंधा चलाने दिया जाता है।” जनवरी 2023 में यह रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सैंटियागो मार्टिन के दामाद आधव अर्जुन को DMK ने 2024 लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी चुनावी रणनीतिकार की भूमिका में नियुक्त किया था।यह भी बताया जाता है कि अर्जुन के तमिलनाडु के मुख्यमंत्री दामाद सबरीसन के साथ अच्छे सबंध हैं।

कॉन्ग्रेस और TMC से भी जुड़े हैं तार

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी सितंबर 2010 में केरल हाई कोर्ट में घोटाले के दागी सैंटियागो मार्टिन का केस लड़ा था। हालाँकि, उन्हें कम्युनिस्टों के विरोध के चलते मामले से नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। तक कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख जनार्दन द्विवेदी ने कहा था, “पार्टी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, भले ही सिंघवी इस मामले से हटने की घोषणा की है।”

‘पत्रकार’ रोहिणी सिंह ने सितम्बर 2021 में एक ‘क्षेत्रीय दल’ और एक लॉटरी माफिया के बीच एक गठजोड़ की तरफ इशारा किया था।

इसके बाद दिसंबर, 2021 में उन्होंने ट्वीट किया, ”अडानी और अम्बानी को भूल जाओ। लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन पर नजर रखो और उस पार्टी पर नजर रखो जिसे वह फंड करता है। देश की राजनीति में आगे का समय बड़ा दिलचस्प है।’

G2G न्यूज की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि सैंटियागो की कम्पनी फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज ने वर्ष 2017 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल में ₹12000 करोड़ GST दिया था। इस न्यूज रिपोर्ट में कम्पनी की वेबसाइट को आधार बनाते हुए लिखा गया था, “फ्यूचर गेमिंग देश के बड़े करदाताओं में से एक है। हर बार समय पर बड़ी मात्रा में करों का भुगतान करके, एक मजबूत देश के निर्माण में इसका योगदान प्रशंसनीय है।” सैंटियागो मार्टिन की कंपनी कंपनी लम्बे समय से पश्चिम बंगाल में ‘डियर लॉटरी’ चला रही है।

नवंबर 2022 में, सीबीआई ने बताया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के मंत्री अनुब्रत मंडल और उनकी बेटी ने तीन साल में 5 बार यह लॉटरी जीती है।

क्या करती है फ्यूचर गेमिंग एंड होटल्स?

हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज की स्थापना वर्ष 1991 में सैंटियागो मार्टिन ने की थी। यह कम्पनी तमिलनाडु में शुरू हुई थी, लेकिन जब यहाँ लॉटरी बंद हो गई तो मार्टिन ने अपना अधिकांश धंधा केरल और कर्नाटक में चालू कर दिया।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में रहने वाला सैंटियागो मार्टिन ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ लॉटरी ट्रेड एंड अलाइड इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष हैं। उसकी इस कम्पनी में 1000 से अधिक लोग काम करते हैं। फ्यूचर गेमिंग वर्तमान में 13 राज्यों में लॉटरी चलाती है, इन राज्यों में अभी भी लॉटरी को कानूनी मान्यता है। यह राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, नागालैंड और सिक्किम हैं।

मार्टिन की यह कम्पनी ‘डियर लॉटरी’ नाम से लॉटरी चलाती है। उसकी कम्पनी फ्यूचर गेमिंग दक्षिण भारत में अपनी एक अन्य कम्पनी मार्टिन कर्नाटक और पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी एक अन्य कम्पनी सिक्किम लॉटरी के माध्यम से धंधा करती है।

सैंटियागो मार्टिन का ‘लॉटरी घोटाला’

सैंटियागो मार्टिन पर 1 अप्रैल, 2009 से 31 अगस्त, 2010 के बीच में केरल में लॉटरी टिकटों की फर्जी बिक्री के माध्यम से सिक्किम सरकार को (₹910.29 करोड़) का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। ED ने इस विषय में बताया था, “मार्टिन और उसकी सहयोगी कंपनियों और संस्थाओं ने अप्रैल 2009 से अगस्त 2010 के बीच जीतने वाले लॉटरी टिकटों के पैसो को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया जिससे सिक्किम सरकार को 910 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।”

तब इस मामले में एजेंसी ने उनकी ₹157.7 करोड़ की चल संपत्ति (म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट) और ₹299.16 करोड़ की अचल सम्पत्ति जब्त कर ली थी। दिसंबर 2021 में, ED ने मनी लांड्रीग के चलते उसकी ₹19.59 करोड़ की संपत्ति कुर्क की थी। वर्ष 2019 में आयकर विभाग ने देश भर में ‘लॉटरी मार्टिन’ के 70 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

म्यांमार के शहर यंगून में कभी मजदूरी करने वाला सैंटियागो मार्टिन ₹7000 करोड़ का ‘लॉटरी’ का धंधा खड़ा कर चुका है। वह लगातार पैसों की गड़बड़ी और धोखाधड़ी समेत मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में 2011 से जाँच एजेंसियों के राडार पर हैं।

उत्तर की तरह दक्षिण में भी चल रहा हिंदुओं का संघर्ष, केरल की 100+ मंदिरों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे कृष्णा राज और उनके साथी: जानिए क्या है ‘Save Deities’

हिंदू मंदिरों को वापस से उनकी सही पहचान दिलाने के लिए आज जहाँ उत्तर भारत में वरिष्ठ वकील हरी शंकर जैन और उनके बेटे विष्णु जैन ने अपनी जी जान लगाई हुई है, तो वहीं दक्षिण में भी हिंदू मंदिरों और देवी-देवताओं की ओर से लड़ाई लड़ने के लिए वकीलों का एक समूह आ खड़ा हुआ है। अयोध्या-काशी के कारण हम पिता-पुत्र की जोड़ी को तो जान गए लेकिन केरल के इन वकीलों को अभी जानना हमारे लिए बाकी है।

हाल में केरल की विभिन्न अदालतों में हिंदू मंदिरों की खोई संपत्ति वापस दिलाने के लिए सैंकड़ों याचिकाएँ दायर की गई। ये याचिका इन्हीं वकीलों की मेहनत का परिणाम है। यही वकील एकजुट होकर हिंदू मंदिरों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं जिसकी वजह से आज इनकी चर्चा है। द न्यूज मिनट पर तो इन्हें लेकर विस्तार से खबर भी प्रकाशित हुई है।

इस समूह में एक वकील कृष्णा राज भी हैं। उन्हीं के नेतृत्व में हिंदू मंदिरों की जमीन पर अतिक्रण करने वाले लोगों, ट्रस्टों और संगठनों को लक्षित करते हुए 100 केसों को उठाया गया है। इस समूह के प्रयास के चलते ही ईसाई मिशनरी नेटवर्क सेंट फिलोमेना साधु जन संगम को अदालत में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने खुद धोखाधड़ी से कोन्नमकुलंगरा भगवती मंदिर की जमीन खरीदी थी और अब इस समूह के प्रयास ने उन्हें कोर्ट में लाकर खड़ा कर दिया है।

बता दें कि केरल के वकीलों के इस समूह का नेतृत्व करने वाले कृष्णा राज अपने हिंदुत्व विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उनकी टीम में प्रथीश विश्वनाथ जैसे साथी वकील हैं और कुछ अन्य दक्षिणपंथी कार्यकर्ता हैं। इन लोगों ने अपने इस अभियान के लिए SaveDeities नाम का संगठन भी खोला हुआ जिसमें 7 वकीलों का समूह है।

इस संगठन की शुरुआत साल 2018 में की गई थी। इस टीम का हिस्सा- सुप्रीम कोर्ट और केरल हाईकोर्ट के वकील आर कृष्णा राज तो हैं हीं, इनके अलावा केरल हाई कोर्ट के बीएन शिवशंकर, प्रथीस विश्वनाथन, के ए बालन, वकील ई एस सोनी, कुमारी संगीता एस नायर और राजेश वीआर भी हैं। ये सारे वकील इस संगठन से जुड़कर और मिलकर हिंदू मंदिरों को पहचान दिलाने के लिए काम कर रहे हैं।

SaveDeities पर इस बात को भी विस्तार से बताया गया है कि इस समूह ने किन केसों को अदालतों में उठाया है। कहाँ-कहाँ मंदिरों की जमीन पर अवैध अतिक्रमण हो रखा है और कैसे केरल में स्थिति यह है कि सरकार के हस्तक्षेप से राजस्व विभाग के माध्यम से अतिक्रमणकारियों को पट्टायम (खरीद प्रमाण पत्र) और अन्य कानूनी कब्ज़ा/स्वामित्व प्रमाण पत्र जारी करके मंदिर संपत्तियों के अतिक्रमण को वैध बनाया जा रहा है।

यही साइट ये भी बताती है कि इन वकीलों ने इस काम की शुरुआत इसलिए की थी क्योंकि ये केरल राज्य में किसी ने भी अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने और मंदिर की संपत्तियों को देवताओं, असली मालिकों को वापस करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया है। ऐसी परिस्थितियों में, ये समूह कब्जे वाले क्षेत्रों से मंदिरों की खोई संपत्ति को बचाने के लिए ऐसे प्रयास कर रहे हैं।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, वकील कृष्ण राज कहते हैं, “मैं किसी संघ परिवार से जुड़ा नहीं हूँ। कानूनी मामलों में मैं बस उनकी सहायता करता हूँ। मैं गौरवान्वित हिंदू हूँ पर क्षमाप्रार्थी नहीं। मेरा उद्देश्य भगवान की खोई संपत्तियों को पुन: प्राप्त करना है। अकेले मैं इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा हूँ।” बता दें कि भले ही कृष्ण राज ने अपने संबंध संघ से जुड़े नहीं बताए, लेकिन आरएसएस के पूर्व प्रचारक और हिंदू सेवा केंद्रम के संस्थापक प्रतीश विश्वनाथ उनकी टीम का हिस्सा हैं जो वकील आर कृष्ण राज के साथ मिलकर मंदिरों की भूमि को पुन: प्राप्त करने के प्रयासों में जुड़े हैं।

घर में घुस सिर पर तानी पिस्टल, बैट से पीटा, परिवार को बंधक बना ₹3 करोड़ की डकैती: दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी डकैत मिराज का किया एनकाउंटर, शाहिद को भी दबोचा

दिल्ली पुलिस के एक एनकाउंटर में एक बांग्लादेशी डकैत मेहराज को गिरफ्तार किया गया है। यह डकैत कई मामलों में वाँछित था। इसने पिछले वर्ष दिल्ली में एक बड़ी डकैती डाली थी। इस बांग्लादेशी डकैत के साथ एक और बदमाश की भी गिरफ्तारी हुई है।

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार (15 मार्च, 2024) को दिल्ली पुलिस के साथ द्वारका के धुलसिरास इलाके में बदमाशों का एनकाउंटर हुआ। पुलिस ने यहाँ इन बदमाशों को पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया था। जब बदमाशों ने पुलिस को देखा तो उन्होंने गोलियाँ चलाना चालू कर दिया।

इसके जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। पुलिस की फायरिंग में एक बांग्लादेशी बदमाश मेहराज उर्फ़ मेराज को पैर में गोली लगी। उसके साथ एक और बदमाश शाहिद को भी पकड़ लिया गया। पुलिस ने बताया कि दोनों तरफ से तीन-तीन गोलियाँ चलाई गईं।

पुलिस ने बताया कि मेहराज द्वारा चलाई गई गोली एक पुलिस इंस्पेक्टर अक्षय को लगी। हालाँकि, इंस्पेक्टर अक्षय को कोई नुकसान नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकट पहन रखी थी। एक और कॉन्स्टेबल को गोली छूते हुए निकली।

पुलिस ने बताया है कि मेहराज को पुलिस की गाड़ी में अस्पताल भेजा गया था जहाँ उसका इलाज चल रहा था। मेहराज बांग्लादेश का निवासी है और पाँच अपराधों में आरोपित है। वह डकैती और अवैध हथियार रखने के कई अपराध कर चुका है।

उसने पिछले साल दिल्ली के अशोक विहार में एक कारोबारी परिवार को निशाना बना कर डकैती डाली थी। उसने एक परिवार को बंदूक की नोक पर लेकर ₹3 करोड़ की लूट की थी। उसने परिवार के साथ बीत से मारपीट की थी और एक कमरे में बंद कर दिया था। उसने इस परिवार से ₹1.38 करोड़ नकद और ₹1.50 करोड़ के गहने लूट लिए थे और फरार हो गया था। उसके खिलाफ पुलिस ने अशोक नगर थाने में कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने उसके ऊपर ₹2 लाख का इनाम घोषित किया गया था। माना जा रहा था कि वह यहाँ अपराध करके बांग्लादेश चला गया है। हालाँकि, अब उसे पकड़ लिया गया है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

शादी के रिश्तों में अड़ंगा डाल रहा था चर्च, बाइक से आया और एक के बाद एक 8 चर्चों पर की पत्थरबाजी: केरल की घटना

केरल के इडुक्की में एक शख्स को कई चर्च पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसने रोड किनारे बने कई चर्च पर पत्थर फेंके और उन्हें क्षतिग्रस्त किया। वह चर्च से गुस्सा था इसीलिए पत्थर फेंक रहा था। उसे आगे की पूछताछ चल रही है।

जानकारी के अनुसार, इडुक्की के पुलियानमला का रहने वाला जुबिन जोस चर्च से गुस्सा था। उसने अपनी गुस्सा उतारने के लिए चर्च पर हमला करने की ठानी थी। उसके गुस्से का कारण यह था कि चर्च उसकी शादी के लिए आने वाले रिश्तों को रोक रहा था। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि जुबिन जोस का पहले भी विवाह हो चुका था, हालाँकि उसका तलाक हो गया था। वह अब दोबारा विवाह करने का प्रयास कर रहा था लेकिन चर्च इसमें अडंगा लगा रहा था। इसके कारण वह चर्च पर खीझ गया था।

चर्च से शादी ना होने देने का बदला लेने के लिए जुबिन जोस ने मंगलवार (12 मार्च, 2024) को चर्च पर हमले की योजना बनाई थी। इसके बाद वह कट्टप्पन्ना, चेट्टूकुझी समेत आसपास के स्थानों पर बने हुए चर्च पर पत्थर फेंकने और हमला करने के लिए निकल पड़ा। उसने रास्ते में आने वाले कई चर्च पर पत्थरबाजी की। वह अपनी मोटरसाइकिल से 20 किलोमीटर दूर तक चर्च पर हमला करने के लिए गया। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उसने इस दौरान कुल आठ चर्च पर हमला किया।

जुबिन ने इन सभी चर्च में लगे शीशों पर पत्थर फेंके। चर्च पर हुए हमलों के बाद केरल पुलिस हरकत में आई और उसकी तलाश चालू की गई। पुलिस ने इन सभी स्थानों से CCTV फुटेज निकलवा कर जुबिन की पहचान की। इसके बाद उसके घर पर दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके बाद उससे पूछताछ की गई तो खुलासा हुआ कि उसने अपनी शादी रोकने के कारण बदला लेने के लिए इन पर हमला किया। इससे पहले हमले के बाद अंदाजा लगाया गया था कि यह काम समाज में तनाव उत्पन्न करने के लिए किया गया है। हालाँकि, मामले की जाँच के बाद सच्चाई कुछ और ही निकली।