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अम्बानी-अडानी का नाम नहीं, इस कंपनी ने खरीद डाले ₹1208 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड्स! EC ने अपलोड किया SBI का डेटा, देखें किस कंपनी ने खर्चे कितने

चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी पारदर्शिता के क्षेत्र में बड़ा कदम बढ़ाते हुए SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सबमिट किए गए इलेक्टोरल बॉन्ड्स के विवरण सार्वजनिक कर दिए हैं। इसमें बताया गया है कि किन कंपनियों ने कितनी बार इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे और उन्हें किन राजनीतिक दलों द्वारा भजाया गया। सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन से एक दिन पहले ही गुरुवार (14 मार्च, 2023) को ये डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। लिस्ट में अम्बानी-अडानी की कंपनियों के नाम नहीं हैं, जिनका नाम लेकर राहुल गाँधी भाजपा पर निशाना साधते रहे हैं।

डेटा को 2 भागों में अपलोड किया गया है। पहले हिस्से और दूसरे हिस्से को इन लिंक्स पर जाकर आप देख सकते हैं। कंपनियों ने 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स खरीदे हैं। 12 अप्रैल, 2019 से लेकर अब तक के डेटा को सार्वजनिक किया गया है। कंपनियों के अलावा कुछ लोगों द्वारा भी इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदे गए हैं। EC की पहली सूची में कंपनियों के डिटेल्स हैं, दूसरी सूची में राजनीतिक दलों के। साथ ही किस तारीख़ को बॉन्ड्स भजाए गए, उसका भी जिक्र किया गया है।

हालाँकि, आप ये नहीं जान पाएँगे कि किस कंपनी/शख्स ने किस राजनीतिक दल के लिए बॉन्ड्स जारी किए हैं। दोनों सूची को देख कर भी इसका अंदाज़ा लगाना कठिन है। कंपनियों में ABC इंडिया लिमिटेड, एक्रोपॉलिस मेंटेनेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अरिहंत इंटरप्राइजेज, एस्सेल माइनिंग एन्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मेघा इंजीनियरिंग एन्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, PHL फिनीवेस्ट, पीरामल कैपिटल एन्ड हाउसिंग फाइनेंस, रेणुका इंवेस्टमेंट्स, टेक्सपोर्ट, गुजरात फ्लुओरो केमिकल्स, PRL डेवेलपर्स, सन फार्मा, केवेंटर फूडपार्कस इत्यादि के नाम हैं।

‘फ्यूचर गेमिंग एन्ड होटल सर्विसेज PR’ ने सबसे ज्यादा 1208 बॉन्ड्स खरीदे, जिनका मूल्य 1208 करोड़ रुपए है। दूसरे स्थान पर ‘मेघा इंजीनियरिंग एन्ड इंफ़्रास्ट्रक्चर्स’ आता है, जिसने 821 करोड़ रुपए के 821 बॉन्ड्स खरीदे। तीसरा स्थान ‘Qwik Supply Chain’ का है, जिसने 410 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स खरीदे। ‘हल्दिया एनर्जी’ ने 377 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स खरीदे। वेदांत ने भी 375.65 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स खरीदे हैं। वहीं एस्सेल ने 224.50, वेस्टर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन ने 220, केवेंटर फूडपार्क इंफ़्रा ने 195 और मदनलाल लिमिटेड ने 185.50 करोड़ रुपए के बॉन्ड्स खरीदे हैं।

तमिलनाडु में बिहारी मजदूर पर हमला, भीड़ ने बुरी तरह पीटा: उत्तर भारतीयों पर हमले की बढ़ रही घटनाओं पर पुलिस बोली – लोग अफवाहों पर ध्यान ना दें

तमिलनाडु में मंगलवार (12 मार्च 2024) को भीड़ द्वारा बिहार के एक प्रवासी श्रमिक पर हमला करने का मामला सामने आया। श्रमिक वीडियो कॉल पर बात करता हुआ सड़क से जा रहा था। इसी दौरान वहाँ के लोगों ने उसे अपहरणकर्ता समझकर पकड़ लिया और जमकर उसकी पिटाई कर दी। यह पाँचवाँ ऐसा मामला है, जहाँ किसी प्रवासी श्रमिक को अपहरणकर्ता के संदेह में भीड़ द्वारा पीटा गया है।

दरअसल, उसे वीडियो कॉ़ल पर बातें करते हुए देख कुछ लोगों ने उसे पकड़ लिया। इसी दौरान आसपास के और भी इकट्ठा हो गए। भीड़ उससे उसके बारे में और उसके ठिकाने के बारे में पूछताछ करने लगी। कहा जा रहा है कि श्रमिक नशे में था। या तो नशे के कारण या फिर भाषा के कारण वह जवाब नहीं दे पा रहा था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान स्थानीय लोगों ने उसका फोन माँगा तो उसने देने से इनकार कर दिया और फोन को स्विच ऑफ कर दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इतने पर ही भीड़ ने उसे अपहरणकर्ता समझ लिया और उसे पीटने लगी। उस मजदूर को जमकर पीटने के बाद भीड़ ने उसे स्थानीय पुलिस को सौंप दिया।

तमिलनाडु पुलिस ने उस व्यक्ति की पहचान एक श्रमिक के रूप में की, जो बिहार से आकर यहाँ काम कर रहा था। जाँच में पता चला कि वह शख्स अपने रिश्तेदार के साथ वीडियो कॉल पर बाते करते हुए जा रहा था। उसने इस डर से अपना मोबाइल फोन ऑफ कर दिया कि भीड़ उसका मोबाइल छिनने की कोशिश कर रही है।

तमिलनाडु पुलिस ने भीड़ के इस दावे को खारिज कर दिया कि वह श्रमिक अपहरणकर्ता है। पुलिस ने आखिरकार उसे रिहा कर दिया। इसके साथ ही पुलिस ने स्थानीय लोगों से अनुरोध किया कि वे उत्तर भारत के लोगों द्वारा राज्य में बच्चों के अपहरण का प्रयास करने की झूठी बातों में विश्वास ना करें।

इससे पहले 6 मार्च 2024 को तमिलनाडु के कृष्णगिरि जिले में एक महिला और उसके बच्चे का अपहरण करने की कोशिश के संदेह के जुटी भीड़ ने पाँच मजदूरों पर हमला कर दिया था। 50 से अधिक लोगों की भीड़ के इस हमले में ये मजदूर बुरी तरह घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ये सभी असम के रहने वाले थे।

ऐसी ही एक घटना को 2 मार्च 2024 को भी सामने आई थी। तमिलनाडु के तिरुवल्लूर के परिकापातु गाँव में भीड़ ने एक प्रवासी श्रमिक को अपहरणकर्ता समझकर उस पर हमला कर दिया था। वह आदमी गाँव से गुजर रहा था और सड़क पर कुछ बच्चों से बात कर रहा था। इसी दौरान उसके अपहरणकर्ता होने की अफवाह पूरे गाँव में फैल गई।

अफवाह फैलते ही भीड़ इकट्ठा हो गई और उसे घेर लिया। इसके बाद भीड़ ने उस पर हमला कर दिया था। इस हमले में उसके चेहरे और कंधे पर चोटें आई थीं। बाद में उसे एक मंदिर के अंदर बंद कर दिया गया था और पुलिस को सूचित कर दिया गया था। जाँच में पता चला कि इलाके में सोशल मीडिया के जरिए अपहरण को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही थीं।

इससे भी पहले 19 फरवरी 2024 को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से ऐसी एक घटना सामने आई थी। आईटी कंपनी में काम करने वाले 25 साल के एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपहरणकर्ता होने के संदेह में भीड़ ने पकड़ लिया था। इसके बाद उसे एक लैंप-पोस्ट से बाँधकर उसके कपड़े उतार दिए थे और पिटाई की थी। वह शख्स शहर के एक भोजनालय से खाना खाकर लौट रहा था।

ललाट से लेकर गले तक कटे का निशान, दिख रहा खून वाला लाल रंग… अचानक घायल हुईं ममता बनर्जी अस्पताल में भर्ती, विधानसभा चुनाव से पहले भी हुई थीं चोटिल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घायल हो गई हैं। उनकी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) ने खुद तस्वीरें ट्वीट कर के ये जानकारी दी है। पार्टी ने इसे एक बड़ी चोट बताते हुए अपील की है कि लोग उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में रखें। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि ममता बनर्जी अस्पताल में बेड पर लेटी हुई हैं। साथ ही उनके ललाट से लेकर गर्दन तक कटे का निशान बना हुआ है। खून के लाल निशान भी देखे जा सकते हैं। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

गुरुवार (14 मार्च, 2024) की शाम ये खबर सामने आई। हालाँकि, उनके घायल होने के कारणों का पता नहीं चल सका है। अभी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए तारीखें भी जारी होने वाली हैं। ऐसे में उससे पहले ममता बनर्जी का चोटिल होना उनकी पार्टी के लिए चिंता का सबब बन सकता है। पश्चिम बंगाल में भाजपा लोकसभा चुनाव 2019 और विधानसभा चुनाव 2022 में एक बड़ी ताकत बन कर उभरी है। हिंसा के बावजूद पार्टी के कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा है।

याद दिला दें कि 2022 में विधानसभा चुनाव से पहले भी ममता बनर्जी चोटिल हो गई थीं और उनके कई कार्यक्रम रद्द करने पड़े थे। तब उनके पाँव में प्लास्टर चढ़ाया गया था और उन्होंने व्हीलचेयर पर ही चुनाव प्रचार पूरा किया था। हालाँकि, TMC के चुनाव जीतने के तुरंत बाद उनका ये प्लास्टर उतर गया था और वो व्हीलचेयर से भी उठ खड़ी हुई थीं। अब दोबारा चुनाव से पहले उनके चोटिल होने को लेकर लोग तरह-तरह के कयास लगाने में जुटे हुए हैं।

TMC में ममता बनर्जी के बाद उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को उनका उत्ताधिकारी माना जाता है, जो डायमंड हार्बर से सांसद हैं। वो स्कूल रिक्रूमेंट घोटाले में ED के रडार पर भी रहे हैं। पश्चिम बंगाल का संदेशखाली इस वक्त पूरे देश में छाया हुआ था, जहाँ की जनजातीय हिन्दू महिलाओं के साथ यौन शोषण के आरोप TMC नेता शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर लगे थे। बंगाल पुलिस पर उसे बचाने के आरोप लगे थे। शाहजहाँ शेख राशन घोटाले में भी नामित है।

33% गिर गई भारतीय पर्यटकों की संख्या, मालदीव को 2 महीने में ही ₹16600 करोड़ का नुकसान: अब उठ रही माँग – अहंकार त्यागो, भारत से संबंध सुधारो

कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव के 3 मंत्रियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की थीं, जिसके बाद उन्हें पद से हाथ भी धोना पड़ा था। मालदीव के बिगड़ते रवैये को देखते हुए भारतीय पर्यटकों ने वहाँ जाना कम कर दिया, जिसके बाद वहाँ का पर्यटन और इस पर आधारित अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है। अब मालदीव में ही पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग माँग कर रहे हैं कि भारत के साथ संबंधों को जल्द सुधारा जाए। उनकी जेब पर बिगड़े हुए संबंधों के कारण मार पड़ रही है।

मालदीव के पर्यटन विभाग द्वारा जारी किए गए आँकड़े के अनुसार, 2023 में 17 लाख पर्यटकों ने द्वीपीय राष्ट्र का दौरा किया, जिनमें से 2,09,198 भारतीय थे। इसके बाद रूस (2,09,196) और चीन (1,87,118) का स्थान आता है। इसी तरह 2022 में 2.40 लाख भारतीय और 2021 में 2.11 लाख भारतीय पर्यटन के लिए मालदीव पहुँचे थे। कोरोना महामारी के दौरान मालदीव में पर्यटन खुला हुआ था और 63,000 भारतीय वहाँ पहुँचे थे, जिनमें कई सेलेब्रिटीज थे।

वहीं 2024 में सब कुछ बदल गया है। वहाँ पर्यटकों के आगमन के मामले में भारतीय छठे स्थान पर हैं। जबकि 2020 से पहले सबसे ज्यादा भारतीय पर्यटक ही होते थे। 2 मार्च, 2024 तक के आँकड़ों को देखें तो 27,224 भारतीय पर्यटक इस साल मालदीव पहुँचे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 33% कम है। 2023 में इसी अवधि तक 41,224 भारतीय पर्यटक मालदीव पहुँचे थे। वहाँ की मीडिया भी कह रही है कि गर्मियों में भारतीय पर्यटकों के कारण ही उनका पर्यटन उद्योग चलता है।

अनुमानों की मानें तो मालदीव को 2 बिलियन डॉलर (16,581.03 करोड़ रुपए) तक का नुकसान हुआ है। ट्रेवल एजेंसियों और भारतीय पर्यटकों पर आधारित ऑपरेटरों के राजस्व में 80% तक की कमी आई है। मालदीव की मीडिया खुद कह रही है कि अहंकार से हमारा फायदा नहीं होगा, देश की संवेदनशील अर्थव्यवस्था को इससे उल्टा नुकसान ही हो रहा है। आगे इससे बचने की सलाह दी गई है। केरल और मालदीव के बीच सीधी उड़ान फिर से शुरू होने से स्थिति थोड़ी सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है।

अल्पमत, त्रिशंकु सदन और सत्ता परिवर्तन: ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ में कैसे तय होगी चुनाव की तारीख, जानिए डिटेल में

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति (हाई लेवल कमेटी) ने वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 18626 पन्नों की अपनी रिपोर्ट सौंप दी। इस रिपोर्ट को अगर नरेंद्र मोदी की सरकार स्वीकार कर लेती है तो देश ‘वन नेशन वन इलेक्शन‘ की दिशा में बढ़ते हुए साल 2029 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव हो सकता है।

कोविंद कमिटी की रिपोर्ट को लागू करने के लिए मोदी सरकार को विधेयक लाकर संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए राज्यों से अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लोकसभा चुनाव के बाद जब संसद की बैठक होगी तो इस कदम को अधिसूचित करने के लिए एक तिथि निर्धारित की जानी चाहिए।

इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नियत तारीख के बाद राज्य चुनाव द्वारा गठित सभी राज्य विधानसभाएँ केवल 2029 के आम चुनाव (संसदीय चुनाव) तक की अवधि के लिए होंगी। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 और 2028 के बीच गठित राज्य सरकारों का कार्यकाल 2029 तक होगा। इस तरह साल 2029 में होने वाले लोकसभा के चुनाव के साथ वहाँ विधानसभा के भी चुनाव होंगे।

ऐसे में कई राज्य सरकारों के कार्यकाल छोटे हो जाएँगे। उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य सरकार का कार्यकाल 2025 में समाप्त होता है तो अगली सरकार के गठन के लिए वहाँ विधानसभा का चुनाव होगा। लेकिन, यह सरकार अगले पाँच साल की ना होकर सिर्फ चार साल की होगी, क्योंकि साल 2029 में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव साथ कराने की सिफारिश की गई है।

इसी तरह जिस राज्य सरकार का कार्यकाल साल 2027 में खत्म होता है और वहाँ विधानसभा का चुनाव होता है वह सरकार साल 2032 तक नहीं चलेगी। उस राज्य सरकार का कार्यकाल भी साल 2029 तक तक ही होगा, यानी सिर्फ दो साल का। इसी तरह 2028 के चुनाव वाले राज्य का कार्यकाल सिर्फ एक साल का होगा।

रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि त्रिशंकु सदन, अविश्वास प्रस्ताव या ऐसी किसी अन्य घटना की स्थिति में नई सरकार के गठन के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं। चाहे वह लोकसभा का मामला हो या विधानसभाओं का। इस प्रकार गठित नई सरकार का कार्यकाल भी लोकसभा की बची हुई अवधि के लिए ही होगा और कार्यकाल समाप्त होने के बाद सदन विघटित हो जाएगी।

इसे इस उदाहरण से समझते हैं कि अगर 2029 में लोकसभा चुनाव और राज्यों की विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं। अगर बिहार में त्रिशंकु सदन बनता है तो फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन उसकी अवधि अगले लोकसभा चुुनाव यानी 2034 तक ही होगी। इसे एक अन्य उदाहरण से समझते हैं।

अगर साल 2029 में बिहार में X की सरकार बनती है, लेकिन 2031 में वह सरकार गिर जाती है तो नए सिरे चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन उस सरकार की अवधि अगले लोकसभा चुनाव यानी साल 2034 तक ही होगी। लोकसभा के मामले में भी यही स्थिति रहेगी। अगर केंद्र सरकार बहुमत खो देती है तो जरूरत पड़ने पर नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं, लेकिन वह 2034 तक के लिए ही होगा।

इसके अलावा, लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और पंचायत चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची और मतदाता फोटो पहचान पत्र तैयार करने की जगह एकल मतदाता सूची और मतदाता फोटो पहचान पत्र बनाने के लिए वर्तमान कानून में संशोधन की सिफारिश की गई है। इसके लिए समिति ने एक कार्यान्वयन समिति के गठन की सिफारिश की है।

रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद अगले चरण में नगरपालिकाओं और पंचायत चुनावों की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि लोकसभा के साथ होने वाले राज्य विधानसभाओं के चुनाव के 100 दिनों के भीतर नगरपालिका एवं पंचायत चुनाव एक साथ कराए जाने चाहिए।

हालाँकि, कई राजनीतिक दलों ने वन नेशन, वन इलेक्शन का विरोध किया है। जिन राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया है उनमें कॉग्रेस, डीएमके, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआई (एम), सीपीआई, तृणमूल कॉन्ग्रेस, एआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी प्रमुख हैं। वहीं, हाई कोर्ट के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीश और एक पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त ने इस पर चिंता जाहिर की है।

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अध्यक्षता में ये कमेटी 2 सितंबर को बनी थी। इसमें गृहमंत्री अमित शाह और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत 8 मेंबर थे। वहीं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को कमेटी का कमेटी का स्पेशल मेंबर बनाया गया था। 23 सितंबर 2023 को पहली बैठक दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन वन इलेक्शन कमेटी की पहली बैठक हुई थी और 14 मार्च को इसे राष्ट्रपति को सौंपा गया था।

इस रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग, विधि आयोग और कानूनी विशेषज्ञों की राय भी शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक साथ चुनाव कराना जनहित में होगा। इससे आर्थिक विकास तेज होगा और महंगाई नियंत्रित होगी। अब आगे इस रिपोर्ट को लोकसभा चुनाव के बाद कैबिनेट के आगे रखा जाएगा। फिर कैबिनेट के फैसले के हिसाब से संविधान में नए खंड जोड़े जाएँगे ताकि चुनाव एक साथ हो सकें।

‘हेवी ड्राइवर, वो तो सीधी जा रही थी घर रास्ते में आ गया’: छत पर चढ़ गई हिजाबधारी लड़कियों की स्कूटी तो लोगों ने लिए मजे, कहा – ‘पापा की परियाँ ‘

इंडोनेशिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है एक स्कूटी एक घर की छत में घुस गई। इससे छत का वो हिस्सा भी टूट गया। स्कूटी पर 2 लड़कियाँ सवार थीं। इसके बाद नीचे से लोगों को छत पर चढ़ कर स्कूटी को किसी तरह वहाँ से उतारा और लड़कियों को बचाया। वीडियो में देखा जा सकता है कि हिजाब में 2 लड़कियाँ छत पर ही स्कूटी के साथ अटकी हुई हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद लोग उन्हें ‘Heavy Driver’ बता रहे हैं।’

वीडियो पर फनी कमेंट्स

हालाँकि, लड़कियाँ इस दुर्घटना में सुरक्षित बच गईं। बताया जा रहा है कि हादसे का कारण ये रहा कि स्कूटी की गति काफी तेज़ थी और साथ ही स्कूटी चला रही लड़की का ब्रेक पर से नियंत्रण छूट गया। लड़कियों को मामूली चोट आई है। एक शख्स ने किसी तरह छत से खपरे हटा कर स्कूटी को वहाँ से निकाला। वीडियो वायरल होने के बाद एक व्यक्ति ने कमेंट करते हुए लिखा, “दीदी की गलती नहीं है, घर रास्ते में आ गया।” एक व्यक्ति ने पूछा कि वो ड्राइव कर रही थीं कि उड़ रही थीं?

वीडियो पर लोगों ने लिए मजे

एक व्यक्ति ने लिखा, “घर रास्ते में आ गया, वरना वो दोनों तो सीधे ही जा रही थीं।” इसी तरह के कई अन्य फनी कमेंट्स भी आए, जैसे – “टॉम क्रूज की फ़िल्में देखने के बाद”, “पापा की परियाँ, डैड्स एंजेल्स।” इसी तरह एक अन्य यूजर ने लिखा, “लगता है हाई हो गया था।” लोगों ने लिखा कि ये तो सचमुच पापा की परियाँ बन गईं, क्योंकि सड़क पर चलने की जगह वो उड़ने लगीं। वहीं कुछ लोगों ने उन लड़कियों का मजाक न बनाने की भी अपील की।

लोगों ने इन लड़कियों को बताया ‘पापा की परियाँ’

अधिकतर लोगों ने अपने कमेंट्स में इन लड़कियों को ‘पापा की परियाँ’ करार दिया, तो कइयों ने हँसने के लिए इमोजी का इस्तेमाल किया। वही एक व्यक्ति ने इस वीडियो पर महिला दिवस की शुभकामना दे दी। हालाँकि, ये सामने नहीं आया है कि ये वीडियो कब का है।

24 साल की मुस्लिम युवती, 23 साल का हिंदू युवक… इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- लिव इन पर भी लागू है UP का धर्मांतरण विरोधी कानून

इलाहबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि बिना धर्म परिवर्तन के कोई महिला और पुरुष लिव इन रिलेशनशिप में भी नहीं रह सकते। यह उत्तर प्रदेश के धर्म परिवर्तन कानून का उल्लंघन होगा। कोर्ट ने इस मामले में अंतर धार्मिक दम्पति को राहत देने से इंकार किया।

यह निर्णय इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस रेनू अग्रवाल ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अलग-अलग धर्मों वाले दम्पति को धर्म परिवर्तन के लिए आवेदन देना ही होगा। यह उन्हें अवैध धर्म परिवर्तन को रोकने वाले कानून के तहत करना होगा।

कोर्ट के सामने यह दम्पति अपनी सुरक्षा सम्बन्धी याचिका लेकर आए थे। याचिकाकर्ता महिला मुस्लिम जबकि युवक हिन्दू है। दोनों ने 1 जनवरी, 2024 आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था। हालाँकि, दोनों में से किसी ने अभी तक अपना धर्म नहीं बदला था।

उनकी सुरक्षा की माँग का उत्तर प्रदेश सरकार ने विरोध किया। सरकार की तरफ से हाजिर वकील ने कहा कि हिन्दू युवक से विवाह करने वाली महिला मुस्लिम है। ऐसे में हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत, आर्य समाज के नियमों के अनुसार, एक मुस्लिम महिला हिन्दू पुरुष से विवाह नहीं कर सकती। कोर्ट ने दोनों के बीच का रिश्ता लिव इन रिलेशनशिप का माना और यह निर्णय दिया।

राज्य सरकार ने उनकी माँग का विरोध करते हुए कहा कि दोनों में से किसी ने अपना धर्म अभी तक नहीं बदला है। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि उत्तर प्रदेश में लाया गया धर्मांतरण कानून मात्र विवाह ही नहीं बल्कि विवाह जैसे किसी भी रिश्ते के लिए धर्मांतरण जरूरी करता है। याचिकाकर्ताओं का रिश्ता लिव इन रिलेशनशिप का है और इन पर भी यह कानून लागू होगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कानून, जबरदस्ती या धोखे में रख कर लोगों का धर्म बदलने से रोकने के लिए 2021 में योगी सरकार द्वारा लाया गया था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला और पुरुष, किसी के भी माता-पिता ने इस सम्बन्ध में पुलिस में शिकायत नहीं दर्ज करवाई है, ऐसे में उनके रिश्ते को कोई समस्या नहीं है। कोर्ट ने दम्पति कि याचिका पर फैसला दिया कि उन्हें सुरक्षा नहीं दी जाएगी।

कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि यदि इस जोड़े में से किसी का पहले विवाह हुआ होता तो इन्हें बिना तलाक के लिव इन में रहने की इजाजत नहीं दी जाती। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस सम्बन्ध में एक निर्णय हाल ही में सुनाया था।

सूर्यवंश की राजधानी देश की पहली Solar City: CM योगी ने अयोध्या को दी ₹1100 करोड़ की सौगात, बोले – वो कहते थे परिंदा पर नहीं मार सकता, आज आते हैं 1 करोड़ लोग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में 1090 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। उन्होंने विराट किसान मेला और कृषि प्रदर्शनी के समापन समारोह में भी हिस्सा लिया। उन्होंने इस दौरान सपा पर निशाना साधते हुए पुराने दिन भी याद दिलाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या का नाम पूरी दुनिया में गूँज रहा है, हर कोई यहाँ आना चाहता है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले लोग बोलते थे कि परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा, आज 1 करोड़ श्रद्धालु ऐसे ही आ जाते हैं।

बता दें कि कारसेवा के दौरान मुलायम सिंह यादव ने ये बयान दिया था, जिनके मुख्यमंत्रित्व काल में रामभक्तों पर गोलियाँ चलीं। सीएम योगी ने पूछा कि क्या क्या अगर समाजवादी पार्टी की सरकार होती तो अयोध्या में एयरपोर्ट बन पाता, चार-छह लेन की सड़कें बन पातीं या ऐसी स्वच्छता देखने को मिलती? उन्होंने कहा कि उद्योगपति से लेकर सैनिक, कर्मचारी और आम लोगों तक गाँव-शहर में हर व्यक्ति अयोध्या का दर्शन करना चाहता है। उन्होंने ये भी कहा कि सूर्यवंश की राजधानी देश की पहली सोलर सिटी बन रही है।

CM योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 54 देशों के राजदूतों ने दीपोत्सव में हिस्सा लिया, राम की पड़ी दिव्य रूप में हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि पेड़ी बाजार से जो फ्लाईओवर बने हैं, कोई नहीं सोचता था कि ऐसा होगा। उन्होंने इस दौरान कहा कि जिन लोगों का पुनर्वास कराया गया, उनका व्यवसाय 50 गुना बढ़ गया। 40 मेगावाट के सोलर प्लांट का शिलान्यास हुआ, और 40 मेगावाट के सोलर प्लांट का उद्घाटन भी हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो लोग (विपक्ष) न आमजनों की आस्था का सम्मान करते हैं, न आजीविका की व्यवस्था कर सकते हैं और न गरीबों को कोई लाभ दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “उनलोगों को न गरीब कल्याण करना है, न गरीबों के लिए आवास-दवा की व्यवस्था करनी है, न विकास करना है, न व्यापारियों को सुरक्षा देनी है और न महिलाओं को सम्मान। इस बोझे को देश से उखाड़ फेंको। देश की आवाज़ है – फिर एक बार मोदी सरकार। तीसरी बार मोदी जब आएँगे, देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा होगा। हर चेहरे पर खुशहाली होगी, हर नौजवान के पास काम होगा, हर गरीब के पास छत और भोजन होगा।”

सीएम योगी ने कहा कि केंद्र में लगातार तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद जिन योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पाया है, फैमिली आईडी के जरिए ट्रैक कर के उन्हें लाभ दिया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि जिला, प्रमंडल और नगर निगम सबका नाम अब अयोध्या ही है। सीएम योगी ने कहा कि देश में अयोध्यावासी जहाँ भी जाएँगे, लोग सिर-आँखों पर बिठा कर सम्मानित करेंगे। उन्होंने इस दौरान लोगों से भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह को वोट देने की अपील की, जो हैट्रिक लगाने के लिए उतर रहे हैं।

खंजर-कुल्हाड़ी-तलवार से किया हमला, VHP नेता और उनके भाई की हत्या कर निकाल ली आँखें: खालिद, सलीम, हकीम सहित 9 को उम्रकैद

गुजरात में अमरेली की अदालत ने बुधवार (13 मार्च 2024) को भाजपा नेता एवं उनके भाई की हत्या के मामले में 9 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा दी है। दरअसल, साल 2013 में पैसे के विवाद में भाजपा नेता अजीत खुमाण (32) और उनके छोटे भाई एवं विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अधिकारी भरत खुमाण (26) की अमरेली जिले के गुंडारन गाँव में हत्या कर दी गई थी।

जिले के सावरकुंडला शहर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र श्रीवास्तव की अदालत ने यह नौ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिन दोषियों को यह सजा मिली है, उनके नाम हैं- मामड डाल, उसके बेटे खालिद डाल, रिश्तेदार सलीम डाल, हकीम डाल, दीनमुहम्मद डाल, सुमर डाल, उस्मान डाल, यूनुस लखापोटा और उसके बेटे इलियास उर्फ मुन्नो लखापोटा शामिल हैं।

इस हत्याकांड में मामड के बड़े बेटे इमरान डाल पर भी हत्या का मुकदमा चल रहा था, लेकिन साल 2017 में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया था। दोनों भाइयों की 30 नवंबर 2013 को आरोपियों ने हत्या कर दी थी। जिस समय यह घटना हुई थी, उस समय दोनों भाई गुंडारन में एक गोदाम के निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे थे।

घटना के समय अजीत भाजपा की लिलिया तालुका इकाई के अध्यक्ष थे। वहीं, उनके छोटे भाई भरत लिलिया तालुका के गुंडारन गाँव के सरपंच और वीएचपी की लिलिया तालुका इकाई के अध्यक्ष थे। कहा जाता है कि भरत और अजीत ने मामड डाल से कुछ रुपए उधार लिए थे। इसी लेकर यह विवाद हुआ था और इसमें दोनों की हत्या कर दी गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, भरत खुमाण का शव गोदाम की नींव में पाया गया था, जबकि अजीत का शव 50-60 फीट दूर बाजार में बरामद किया गया था। घटना के दौरान 10 आरोपितों ने दोनों भाइयों पर खंजर, कुल्हाड़ी और तलवार समेत अनेक घातक हथियारों से हमला किया था। आरोपितों ने पीड़ित की आँखें भी निकाल ली थीं। तनाव को देखते हुए भारी पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस को विशेष लोक अभियोजक अनिल देसाई ने बताया, “चश्मदीदों ने हमारे मामले का समर्थन किया और वैज्ञानिक सबूतों ने भी, जिसमें आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए और बाद में पुलिस द्वारा बरामद किए गए हथियारों पर खून के धब्बे भी शामिल थे। चार आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें मामले में फँसाया जा रहा है।”

देसाई ने आगे बताया, “उनके इनकार करने के बाद अदालत से उनका ब्रेन मैपिंग परीक्षण कराने का अनुरोध किया गया। परीक्षणों से पता चला कि चारों अपराध में अपनी संलिप्तता का विवरण छिपा रहे थे। इस प्रकार हमारा मामला मजबूत हुआ। अदालत ने इन सबको ध्यान में रखा और सभी नौ आरोपियों को दोषी ठहराया।”

देसाई ने कहा कि न्यायिक हिरासत में बंद नौ लोग पहले ही विचाराधीन कैदी के रूप में औसतन 10 साल जेल में काट चुके हैं। उन्हें हत्या, गैरकानूनी सभा, दंगा, सबूतों को नष्ट करने के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम के खिलाफ दोषी ठहराया गया है। अदालत ने प्रत्येक आरोपित पर 21,500 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

दोषी भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत सुनाई गई सजा एक साथ काटेंगे। अदालत ने दोषियों द्वारा जमा किए गए जुर्माने में से अजीत और भरत के परिजनों को 51,000 रुपए का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। मुआवजे की राशि जमा नहीं करने पर तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद काटनी होगी।

‘कॉन्ट्रैक्ट टू किल’ : आतंकी निज्जर की हत्या पर बनी डॉक्यूमेंट्री इंडिया में ब्लॉक, Youtube और X ने मानी भारत सरकार की बात

भारत के खिलाफ झूठ फैलाने वाली डॉक्यूमेंट्री को यूट्यूब द्वारा ब्लॉक कर दिया गया है। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर आधारित यह डॉक्यूमेंट्री भारत सरकार के कहने पर यूट्यूब ने ब्लॉक की। इसे कनाडा सरकार द्वारा फंड पाने वाले ब्रॉडकॉस्टर सीबीसी न्यूज ने रिलीज किया था। इसमें कोलंबिया में 18 जून 2023 को हुई निज्जर की हत्या से जुड़ी जानकारी दिखाई गई थी। डॉक्यूमेंट्री में खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू का भी इंटरव्यू है। इस डॉक्यूमेंट्री का टाइटल रखा गया था ‘कॉन्ट्रैक्ट टू किल।’

सीबीसी न्यूज ने अपनी डॉक्यूमेंट्री हटाए जाने पर कहा कि उन्हें यूट्यूब से पता चला है कि उनको भारत के मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी ने निर्देश दिए थे कि साइट से वो वीडियो ब्लॉक की जाए। इसके बाद ये कंटेंट इंडिया से ब्लॉक कर दिया गया। सीबीसी का दावा है कि उनका कंटेंट हटाने के लिए माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) को भी कहा गया था। कुछ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि एक्स से भी वीडियो को हटा दिया गया है।

सीबीसी ने कहा है कि वो इस कार्रवाई से असंतुष्ट हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए वीडियो भारत में चलनी देनी चाहिए। वह बोले कि वो इस संबंध में वो भारत सरकार से भी बात कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री को वरिष्ठ पत्रकारों और एडिटोरियल समझ रखने वाले नेतृत्व से चर्चा करके और काफी रिसर्च के साथ बनाई है। उनके हिसाब से इसे हटाना सही नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने वीडियो ‘द फिफ्थ एस्टेट’ द्वारा प्राप्त किया था और एक से अधिक स्रोतों द्वारा स्वतंत्र रूप से वेरीफाई भी किया था।

डॉक्यूमेंट्री में आखिर है क्या

डॉक्यूमेंट्री में शामिल वीडियो में दिखाया जा रहा था कि गुरु नानक सिख गुरुद्वारे का अध्यक्ष निज्जर 18 जून 2023 को अपनी गाड़ी में बैठ पार्किंग से निकला। लेकिन बाहर उसे एक सफेद सेडान मिली। गाड़ी रुकते ही दो आदमी दौड़ते हुए आए और निज्जर को गोली मार गए। इसके बाज डॉक्यूमेंट्री में दो चश्मदीदों का भी जिक्र है जो बता रहे हैं कि उन्होंने हत्या करने वालों को भागते देखा। एक ने बताया कि उसने निज्जर को कैसे बचाने के लिए प्रयास किए वहीं दूसरे ने हत्यारों के भागने पर उनपर पीछा किया।

आरोप लगाकर हुई कनाडा की फजीहत

बता दें कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा ने पिछले साल भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन कनाडा के सवालों का जवाब देते हुए भारत ने कहा कि ये दावे बेतुके और प्रेरित थे। विदेश मंत्रालय ने भी कहा था कि कनाडा से हत्या में भारत की संलिप्ता के सबूत माँगने के बावजूद वो कोई सबूत नहीं पेश कर पाए जिसके कारण उन्हें काफी फजीहत भी झेलनी पड़ी। अभी हाल में न्यूजीलैंड के उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स ने खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा के दावे पर संदेह जताया था जबकि कनाडा और न्यूजीलैंड तो फ़ाइव-आइज़ ख़ुफ़िया गठबंधन के सदस्यों में साथ हैं।