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हल्द्वानी दंगा: मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक का बेटा भी गिरफ्तार, दिल्ली से उत्तराखंड पुलिस ने पकड़ा; पुलिस पर हमलों के बाद से था फरार

हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के बड़े चेहरों में से एक अब्दुल मलिक की गिरफ्तारी के बाद अब उसके बेटे अब्दुल मोईद को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तराखंड की पुलिस ने मोईद को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उसकी लोकेशन के बारे में जानकारी अब्दुल मलिक से पूछताछ के दौरान मिली थी, जिसके बाद उत्तराखंड पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही थी। सटीक सूचना के आधार पर मोईद को दिल्ली से पकड़ा गया। वो बनभूलपुरा हिंसा के टॉप 8 वांटेड में था। अब पुलिस इस हिंसा से जुड़े तमाम बड़े चेहरों को गिरफ्तार कर चुकी है।

नैनीताल के एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने बताया कि बनभूलपुरा हिंसा से जुड़े उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए छह पुलिस टीमें गठित की गई, जो देश के अलग-अलग राज्यों- गुजरात, दिल्ली, मुंबई-महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि सभी संभावित स्थानों पर लगातार दबिश दे रही है। उक्त गठित टीमों में से एक टीम को बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस टीम ने हल्द्वानी दंगे में वांछित अभियुक्त अब्दुल मोईद को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। अब्दुल मोईद लगातार 21 दिनों तक पुलिस को चकमा देता रहा था, लेकिन अब वो पुलिस की गिरफ्त में है।

हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक को 24 फरवरी 2024 को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। नैनीताल पुलिस की टीम ने सूचना के आधार पर उसकी गिरफ्तारी की थी। अब्दुल मलिक की गिरफ्तारी के बाद उसे हल्द्वानी लाया गया था। वहाँ उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। उसे कोर्ट ने पुलिस हिरासत में भेजा है, जिसके बाद से उससे जानकारियाँ निकाली जा रही है। बताया जा रहा है कि अब्दुल मलिक से 150 से अधिक सवाल पूछे जा चुके हैं।

6 की मौत, 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल

बता दें कि 8 फरवरी हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध मस्जिद-मदरसे को हटाने पहुँची नगर निगम की टीम और पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ था। इसमें अब्दुल मलिक और अब्दुल मोईद की भूमिका सामने आई। उसे पर उपद्रवियों को भड़काने का आरोप है। मलिक का बगीचा इलाके से शुरु हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, पथराव में सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, रामनगर कोतवाल समेत 300 से अधिक पुलिसकर्मी और निगमकर्मी घायल हो गए। उपद्रवियों ने बनभूलपुरा थाना भी फूँक दिया। पुलिस की जीप, जेसीबी, दमकल की गाड़ी दोपहिया समेत 70 से अधिक वाहन फूँक दिए गए। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया था। हल्द्वानी में कर्फ्यू लगाकर हिंसा की घटना को काबू में लाया जा सका था।

अब तक 85 से अधिक आरोपित गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हल्द्वानी हिंसा मामले में पुलिस की ओर से दर्ज किए गए केस में अब तक करीब 85 से अधिक आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। हल्द्वानी हिंसा मामले के बाद से पुलिस और प्रशासन की टीम के स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में सभी नामजद आरोपित पकड़े जा चुके हैं।

कर्नाटक के कॉन्ग्रेसी मंत्री ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों को झुठलाया, अब उसी मामले में बेंगलुरु पुलिस ने मोहम्मद शफी को उठाया: आवाज की होगी जाँच

कर्नाटक विधानसभा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नासिर हुसैन की जीत के बाद एक वीडियो शेयर करके दावा किया गया था कि इसमें कॉन्ग्रेस समर्थक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोल रहे हैं। बाद में इस वीडियो पर बेंगलुरु पुलिस ने संज्ञान लिया और जाँच शुरू की। अब खबर ये है कि पुलिस ने जाँच को आ़गे बढ़ाते हुए एक शख्स को अपनी हिरासत में लिया है और उसकी आवाज के सैंपल जाँच के लिए भेजे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ब्यादगी पुलिस ने इस मामले में जानकारी दी कि उन्होंने ब्यादगी शहर से शफी नशीपुड़ी को हिरासत में लिया है। वह सैयद नसीर का हुसैन का समर्थक है। पुलिस ने उसकी आवाज का सैंपल लिया और उसे जाँच के लिए भेजा है। वह घटना वाले दिन सैयद नसीर हुसैन के साथ मौजूद था।

पुलिस के इस बयान से पता चलता है कि मामले की जाँच अभी चल ही रही है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि कर्नाटक विधानसभा में हुई इस घटना पर कॉन्ग्रेस नेता और मोहम्मद जुबैर पहले ही क्लीन चिट दे चुके हैं।

कल कर्नाटक में कॉन्ग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा था- “ये बहुत स्पष्ट है कि ऑडियो में नासिर हुसैन और सैयद साहब जिंदाबाद कहा जा रहा है। ये सिर्फ भाजपा की साजिश है और कुछ नहीं। पार्टी ने ऑडियो की फॉरेंसिंक चेकिंग भी करवाई है। उसमें यही आया है कि ऐसा कुछ नहीं है। सरकारी रिपोर्ट आने वाली है।”

बता दें कि इस पूरे मामले को पुलिस में दर्ज कराकर भाजपा द्वारा उठाया गया। कर्नाटक के पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई ने इस पर कहा, “विधानसभा के अंदर पाक समर्थक नारे लगाने की अनुमति दे रहे हैं। यह हमारे देश की सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए ख़तरा है। फिर भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है…।”

बता दें कि कर्नाटक की 4 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में 3 सीटों पर कॉन्ग्रेस की जीत के बाद एक नया बवाल सामने आया था। कॉन्ग्रेस उम्मीदवार नासिर हुसैन की जीत का जश्न मनाते हुए विधानसभा में कुछ नारे लगे, जिसकी वीडियो शेयर करके कहा गया कि ये नारे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे थे। वहीं मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने कहा कि पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं ‘नासिर साहब जिंदाबाद’ कहा जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच बेंगलुरु पुलिस ने मामले में अज्ञातों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और कहा गया था कि वीडियो की जाँच करके आगे कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ही प्रियांक खड़गे का बयान आया था।

‘ED-CBI से बचाने के लिए शेख शाहजहाँ को बंगाल पुलिस की मेहमाननवाजी में भेजा’: गिरफ्तारी के बाद TMC नेता की ‘अकड़’ पर BJP ने उठाए सवाल

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। शेख के वकील जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुँचे और मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने नकार दिया और कहा कि उससे कोई हमदर्दी नहीं है, उसे गिरफ्तार रहने दो। पेशी के दौरान भी शाहजहाँ कोर्ट में अकड़ दिखा रहा था। इससे पहले हाई कोर्ट ने शेख को 7 दिनों में गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।

अब शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार और बंगाल पुलिस पर सवाल उठाया। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “आज अचानक शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी हो गई। संदेशखाली की महिलाओं की शिकायत पर शाहजहाँ के खिलाफ बलात्कार या बलात्कार को प्रेरित करने वाली कोई भी धारा नहीं लगाई गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने (बंगाल पुलिस ने) ईडी के विषय में रोक हटने के बाद गिरफ्तार किया। मैं कहना चाहता हूँ कि यदि आपने ईडी के विषय में गिरफ्तार किया है तो पश्चिम बंगाल सरकार उसे ईडी को क्यों नहीं सौंप दे रही है। कहा जा सकता है कि शाहजहाँ शेख महफूज ठिकाने पर ममता सरकार के दामन-ए-रहमत में कहीं महफूज था और अब उसे दोबारा हिफाजत देने के लिए, ताकि वह ईडी और सीबीआई द्वारा दोबारा गिरफ्तार नहीं किया जा सके।”

भाजपा नेता त्रिवेदी ने आगे कहा, “वह पश्चिम बंगाल पुलिस की मेहमानवाजी में चला गया है। ये मेहमानवाजी शब्द इसलिए प्रयोग कर रहा हूँ, क्योंकि उसकी तथाकथित गिरफ्तारी के समय अगर आपने उसकी भाव-भंगिमा देखी हो, उसके चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज देखी हो और पुलिस वालों की बॉडी लैंग्वेज देखी हो…. तो आप कह सकते हैं कि जो बॉडी लैंग्वेज शाहजहाँ शेख की थी, वो किसी गुनाहगार की थी?”

वहीं, बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा शाहजहाँ शेख गिरफ्तार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “पिछली रात को 12 बजे वह पुलिस के साथ था। उसको पहले डीआईजी भास्कर मुखर्जी के साथ फलदा भेज दिया। फिर शाम उनको लेकर कुंजीपाड़ा घर में गया और फिर उसे मिनाखा लाकर अरेस्ट शो किया गया। यह ममता सरकार द्वारा सुनिश्चित किया गया कि आपको कुछ होने वाला नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “ममता सरकार ने सुनिश्चित किया कि उसे फाइव स्टार फैसिलिटी मिलेगी, मोबाइल फोन यूज करने का परमिशन है। जब तक ये सेंट्रल एजेंसी के पास नहीं जाता, तब जस्टिस मिलने वाला नहीं है।” उन्होंने कहा कि कोर्ट की फटकार, मीडिया के प्रभाव और भाजपा के लगातार विरोध ने शाहजहाँ को गिरफ्तार करने के लिए बंगाल पुलिस को बाध्य किया।

बता दें कि इससे पहले भी सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि था बंगाल की पुलिस ने शाहजहाँ शेख को बचाने के लिए उसे सेफ कस्टडी में लिया है। सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार (28 फरवरी 2024) को सोशल मीडिया साइट X पर अपने पोस्ट में कहा, “संदेशखाली का बदमाश शेख शाहजहाँ कल रात 12 बजे से ममता पुलिस की सुरक्षित हिरासत में है। प्रभावशाली मध्यस्थों के माध्यम से ममता पुलिस के साथ एक समझौते के बाद, उसे बरमजुर-II ग्राम पंचायत क्षेत्र से दूर ले जाया गया, ताकि पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान उनकी उचित देखभाल की जाएगी।”

अपने ट्वीट में उन्होंने आगे कहा था, “सलाखों के पीछे रहने के दौरान उसे 5 सितारा सुविधाएँ दी जाएँगी और उसके पास एक मोबाइल फोन भी होगी। इसके माध्यम से वह ‘तोलामूल पार्टी’ का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। यहाँ तक कि वुडबर्न वार्ड में एक बिस्तर भी उसके लिए तैयार और खाली रखा जाएगा, ताकि वह चाहे तो वहाँ कुछ समय बिता सके।”

बंगाल पुलिस ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को शाहजहाँ शेख को कोर्ट में पेश किया। इसको लेकर सामने आए वीडियो में वह दबंगों की तरह कोर्ट में एंट्री लेते देखा गया। वहीं पुलिस उसके पीछे चलती दिखी। इस वीडियो को देख लोग कह रहे हैं कि बिलकुल नहीं लग रहा है कि ये गिरफ्तार हुआ है, उलटा ऐसा लग रहा है कि अपनी दबंगई दिखाने को सामने आया है।

‘क्या गाय पर भी गोली चलाएगी सरकार’: गोधन को ढाल बनाकर हरियाणा में घुसने का प्लान बना रहे ‘किसान’, रिपोर्ट में दावा

हरियाणा की सीमा पर डेरा डाल कर बैठे किसान प्रदर्शनकारी अब अपनी रणनीति बदलेंगे, उन्होंने कहा है कि हरियाणा की सीमा में घुसने के लिए अब गाय को ढाल बनाया जाएगा। इसको लेकर जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। हर किसान गाय को लेकर आगे चलेगा जिससे पुलिस उन पर एक्शन ना ले सके।

जागरण की एक खबर के अनुसार, हरियाणा की सीमा में घुसने में अब तक नाकाम रहा संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) का सिद्धूपुर गुट यह नई रणनीति बना रहा है। उन्होंने सीमा में घुसने के लिए गायों को आगे करके चलने की रणनीति बनाई है।

किसान पुलिस के आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए अपनी गाय को आगे लेकर चलेंगे। किसानों ने कह़ा है कि इससे हरियाणा पुलिस ना ही उन पर आसू गैस के गोले चला पाएगी और ना ही उन्हें और भी किसी तरह रोक सकेगी। जागरण की रिपोर्ट में कहा गया है चूंकि हरियाणा सरकार अपने आप को गोरक्षक कहती है इसलिए वह गायों पर कोई भी एक्शन नहीं लेगी और किसान हरियाणा में घुसने में कामयाब हो जाएँगे।

बताया गया है कि एक बार गायों के सहारे हरियाणा में प्रवेश करने में अगर सफलता मिलती है तो दिल्ली जाने के लिए हरियाणा के किसानों को भी शामिल किया जाएगा। वह भी अपनी गायों को लेकर दिल्ली की तरफ चलेंगे। बताया जा रहा है कि स्पष्ट रूप से इस रणनीति की घोषणा नहीं की जा रही है।

गौरतलब है कि पंजाब से आए प्रदर्शनकारी किसान हरियाणा के संभु और खन्नौरी बॉर्डर पर डेरा डाल कर बैठे हैं। वह यहाँ से हरियाणा में प्रवेश करना चाहते हैं, जिससे वह आगे जाकर दिल्ली में प्रदर्शन कर सकें। यह प्रदर्शन बीते 13 फरवरी से जारी है। पुलिस ने यहाँ किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए हुए हैं।

इस किसान आंदोलन में कुछ उपद्रवी भी शामिल हैं। उपद्रवी यहाँ बैरिकेड हटा रहे हैं और साथ ही पुलिस के ड्रोन को भी पत्थर मार कर गिरा रहे हैं। हरियाणा पुलिस ने इनकी फोटो और वीडियो निकाल कर कार्रवाई करने की बात कही है। हरियाणा पुलिस ने ऐसे प्रदर्शनकारियों के वीजा पासपोर्ट रद्द करवाने की भी बात कही है।

‘आइए आपका ही इंतजार था… हमें इससे (शाहजहाँ शेख) हमदर्दी नहीं’: TMC नेता के वकीलों को हाई कोर्ट ने सुनाया, गिरफ्तारी के बाद महिलाओं ने उड़ाए गुलाल

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद शेख के वकील जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुँचे और मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने नकार दिया और कहा कि उसे गिरफ्तार रहने दो। ऐसे आदमी से कोई हमदर्दी नहीं है। इससे पहले हाई कोर्ट ने शेख को 7 दिनों में गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।

लगभग 55 दिनों से फरार शेख को बंगाल पुलिस ने गुरुवार सुबह नॉर्थ 24 परगना के मीनाखान इलाके से गिरफ्तार किया था। पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण और जमीन कब्जाने के आरोप हैं। हालाँकि, उसकी गिरफ्तारी संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न मामले में नहीं, बल्कि जनवरी में उसके समर्थकों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर किए गए हमले के मामले में हुई है।

जिला परिषद प्रधान शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी की बाद उसकी ओर से पेश वकील ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ से संपर्क किया। वकील ने कहा कि शेख की अग्रिम जमानत के लिए उसकी याचिका का अभी निपटारा किया जाना बाकी है। वकील ने दलील दी कि याचिका बेहद जरूरी है नियमित जमानत के लिए इसे तुरंत सूचीबद्ध किया जाए।

शाहजहाँ के वकील को देखकर बेंच ने कहा, “आइए, आपका इंतजार है।” बेंच ने दलील सुनने के बाद कहा, “उसे गिरफ्तार ही रहने दिया जाए। अगले 10 वर्षों तक यह व्यक्ति आपको बहुत व्यस्त रखेगा। आपके पास किसी और काम के लिए समय नहीं होगा। उसके खिलाफ 42 मामले दर्ज किए गए हैं। वह फरार भी रहा है। आपको जो भी चाहिए, आप सोमवार को आएँ। हमें उस व्यक्ति से कोई सहानुभूति नहीं है।”

साउथ बंगाल के ADG सुप्रतिम सरकार ने कहा कि वह 5 जनवरी को ED अधिकारियों पर हुए हमले के मुख्य आरोपितों में शामिल था। उसे इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस गिरफ्तारी में सेक्शुअल असॉल्ट का कोई मामला नहीं है। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। कुछ दिन पहले दर्ज हुए मामले 2-3 साल पहले की घटनाओं के हैं। उसकी जाँच में समय लगेगा।

इससे पहले भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ को अपनी सेफ कस्टडी में लिया है। प्रभावशाली मध्यस्थों के माध्यम से पुलिस के साथ समझौते के बाद उसे बरमजुर-2 ग्राम पंचायत से दूर ले जाया गया है। उन्होंने कहा था कि पुलिस ने ऐसा इसलिए किया, ताकि उसकी पुलिस और न्यायिक हिरासत के दौरान उचित देखभाल की जा सके।

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था, “सलाखों के पीछे रहने के दौरान उसे 5 सितारा सुविधाएँ दी जाएँगी और उसके पास एक मोबाइल फोन भी होगी। इसके माध्यम से वह ‘तोलामूल पार्टी’ का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। यहाँ तक कि वुडबर्न वार्ड में एक बिस्तर भी उसके लिए तैयार और खाली रखा जाएगा, ताकि वह चाहे तो वहाँ कुछ समय बिता सके।”

शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी के बाद संदेशखाली की महिलाएँ जश्न मना रही हैं। वे एक-दूसरे को गुलाल लगा रही हैं और मिठाई खिला रही हैं। दरअसल, सुंदरबन के टापू पर बसे संदेशखाली में महिलाओं ने शेख पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के आरोप लगाए थे। महिलाओं का कहना है कि शाहजहाँ जिस महिला को चाहे उसे अपनी हवस का शिकार बनाता था। इससे पहले शाहजहाँ शेख के घर पर ED ने राशन घोटाला मामले में रेड डाली थी। तब से वह फरार है।

अब रामलला के गर्भगृह में पहुँचे पक्षीराज गरुड़, परिक्रमा करते Video वायरल: अरुण योगीराज ने बताया था- हर रोज दर्शन करने आते थे बंदर

अयोध्या में भगवान राम अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो चुके हैं। देश-दुनिया से भारी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या में अपने अराध्य के दर्शन कर रहे हैं, तो कुछ चमत्कारिक क्षण भी सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले ही राम मंदिर के गर्भगृह में एक वानर के दर्शन करने की खबरें सामने आई थी, तो रामलला की भव्य मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने भी ऐसी कहानी बताई थी। अब रामलला के दर्शन करने खुद पक्षीराज गरुड़ पहुँचे हैं। ऐसे में लोग इसे पक्षीराज गरुड़ की भगवान की भक्ति से तो जोड़ ही रहे हैं, साथ ही चमत्कार भी बता रहे हैं।

रामलला मंदिर के गर्भगृह में पक्षीराज गरुड़ के पहुँचने की घटना का लोगों ने वीडियो भी बनाया है, जो वायरल हो रहे हैं। ऐसा ही एक वीडियो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने शेयर किया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि ‘गरुड़ देव प्रभु श्रीरामलला के गर्भगृह की परिक्रमा लगा रहे हैं।’

इस वीडियो पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। कुछ लोग इसे चमत्कार बता रहे हैं, तो कुछ लोग प्रभु की भक्ति। एक यूजर ने लिखा, “भगवान श्री राम के दर्शन करने के लिए पक्षी भी आए हैं।”

कमेंट का स्क्रीनशॉट

हर रोज दर्शन करने आता था बंदर, बदल गईं रामलला की आँखे

रामलला से जुड़े कई चमत्कारों की चर्चा होती रही है। रामलला की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने भी दो दावे किए थे। पहले में उन्होंने कहा कि रामलला की आँखे ही बदल गई, तो उन्होंने रामलला की मूर्ति निर्माण के समय हर रोज एक बंदर के आने का भी जिक्र किया है।

अरुण योगीराज ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि ये कार्य उन्होंने खुद नहीं किया भगवान ने उनसे करवाया है। वह कहते हैं कि जब वो रामलला की मूर्ति को गढ़ रहे थे तो रोज उस मूर्ति से बात करते थे। वह कहा करते थे, “प्रभु बाकी लोगों से पहले मुझे दर्शन दे दो।” योगीराज की मानें तो जब मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई तो उन्हें लगा ही नहीं कि वो मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उसके हाव-भाव बदल चुके थे। इस बारे में उन्होंने लोगों से कहा भी कि उन्हें नहीं विश्वास हो रहा मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उन्होंने माना कि अगर वो कोशिश भी करें तो दोबारा इस तरह का विग्रह कभी नहीं बना सकते।

उन्होंने कहा, “जब मैंने मूर्ति बनाई तब वो अलग थी। गर्भगृह में जाने के बाद और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद वो अलग हो गई। मैंने 10 दिन गर्भगृह में बिताए। एक दिन जब मैं बैठा था मुझे अंदर से लगा ये तो मेरा काम है ही नहीं। मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। अंदर जाते ही उनकी आभा बदल गई। मैं उसे अब दोबारा नहीं बना सकता। जहाँ तक छोटे-छोटे विग्रह बनाने की बात है वो बाद में सोचूँगा।”

रामलला की मूर्ति को लेकर इंटरव्यू देते समय अरुण योगीराज नंगे पाँव बैठे दिखे। उन्होंने कहा कि राम को दुनिया को दिखाने से पहले खुद मानना था कि मूरत में राम हैं। वह बोले, “मैं दुनिया को दिखाने से पहले उनके दर्शन करना चाहता था। मैं उन्हें कहता था-दर्शन दे दीजिए प्रभु। तो, भगवान मेरी जानकारी जुटाने में खुद मदद कर रहे थे। कभी दीपावली के वक्त कोई जानकारी मिल गई। कुछ तस्वीरें मुझे वो मिल गईं जो 400 साल पुरानी थीं। हनुमान जी भी हमारे दरवाजे पर आते थे गेट खटखटाते थे, सब देखते थे, फिर चले जाते थे।” अपने अद्भुत अनुभवों को बताते हुए उन्होंने कहा, “मूर्ति बनाने के दौरान हर रोज एक बंदर शाम में 4 से 5 बजे के बीच उस जगह आता था, वो सब देखकर चला जाता था। ठंड में हम दरवाजे बंद करने लगे। जब उसने ऐसा देखा तो वो तेज की दरवाजा खोलता अंदर आता, देखता और चला जाता। शायद उनका भी देखने का मन होता होगा।”

वानर ने किया गर्भगृह में प्रवेश, दर्शन के बाद चुपचाप वापस लौटे

कुछ ऐसा ही दावा मंदिर ट्रस्ट की तरफ से 23 जनवरी को किया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक्स/ट्विटर पर इसके बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके अगले ही दिन लाखों लोग अपने अराध्य के दर्शन को उमड़ पड़े। इसी दौरान एक बंदर भी गर्भगृह में प्रवेश कर गया। वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों का कहना है, “ये हमारे लिए ऐसा ही है, मानो स्वयं हनुमान जी रामलला के दर्शन करने आए हों।”

यह घटना 23 जनवरी को शाम के करीब 5 बजकर 50 मिनट की है। उस समय तक करीब 3 लाख भक्त रामलला का दर्शन कर चुके थे और करीब दो लाख भक्त बाहर कतार में थे। पहले दिन 5 लाख से अधिक भक्तों ने राम मंदिर में दर्शन किया। ट्रस्ट की ओर से किए गए पोस्ट में बताया गया है, “एक बंदर दक्षिणी द्वार से गूढ़ मंडप से होते हुए गर्भगृह में प्रवेश करके उत्सव मूर्ति के पास तक पहुंचा। बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे देखा। वे बंदर की ओर यह सोच कर भागे कि कहीं वह उत्सव मूर्ति को जमीन पर न गिरा दे। परंतु जैसे ही पुलिसकर्मी बंदर की ओर दौड़े, वैसे ही बंदर शांतभाव से भागते हुए उत्तरी द्वार की ओर गया। द्वार बंद होने के कारण पूर्व दिशा की ओर बढ़ा और दर्शनार्थियों के बीच में से होता हुआ, बिना किसी को कष्ट पहुँचाए पूर्वी द्वार से बाहर निकल गया।”

कुछ समय पहले खबरें आई थी कि अयोध्या और आसपास के इलाकों से विलुप्त हो चुके गिद्ध भी अब लौट आए हैं। बता दें कि रामायण की कथा में गिद्धराज जटायू का अहम स्थान है, जिन्होंने माता सीता के अपहरण के समय अपने प्राणों की बलि देकर रावण को रोकने की कोशिश की थी।

कई राज्यों में क्लीन स्वीप, बंगाल में TMC से टाइट फाइट: एक और सर्वे में BJP की बड़ी जीत, 2019 के मुकाबले 5% वोट शेयर बढ़ने का अनुमान

लोकसभा चुनाव से पहले Zee News के लिए MATRIZE ने ओपिनियन पोल किया है। इस पोल में निकलकर कि इस पूरे लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 5 फीसद बढ़ेगा। वहीं इस समय सबसे ज्यादा चर्चित राज्य का क्या होगा, इसके बारे में भी बताया गया है।

पोल के मुताबिक, अगर चुनाव हो जाएँ तो भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंध 377 सीट के साथ सरकार बनाएगा। वहीं इंडी गठबंध 93 सीट पर। जबकि, 2019 के आम चुनावों में भाजपा ने 351 सीटें जीती थीं और यूपीए गठबंधन को सिर्फ 90 सीट आई थी।

इसके अलावा, 2019 की तुलना में एनडीए का वोट शेयर 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 43.6 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है जबकि 2019 में गठबंधन को 38.4% वोट मिले थे। इस बीच, इंडी गठबंधन को 2024 में 27.7 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। 2019 में यूपीए को 26.6% वोट मिले थे। इसी तरह अन्य दलों के वोट प्रतिशत में भारी गिरावट देखी जा सकती है, जिसके परिणामस्वरूप 2019 में उन्हें जहाँ वोट शेयर 35.2 प्रतिशत मिला था वो शायद 2024 में 24.9 प्रतिशत ही रह जाए।

सर्वे इस बात की जानकारी भी देता है कि एनडीए गठबंधन उत्तर, पूर्वी और पश्चिमी भारत में धाक जमाने में कामयाब रहेगा लेकिन हो सकता है दक्षिण में इंडी गठबंधन की तरफ झुकाव देखा जाए। बंगाल की यदि अलग से बात करें तो बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में 27 पर टीएमसी को जीतते इसमें दिखाया गया है और भाजपा को 17 सीटें आते। वहीं इंडी गठबंधन के पास शायद एक सीट आए।

इसके अलावा दिल्ली में अनुमान निकलकर आया है कि भाजपा 7 की 7 सीटें जीत सकती है। ऐसे ही उत्तर प्रदेश में एनडीए को 78 सीटें मिल सकती है वहीं एनडीए को सिर्फ 2 सीट मिलेंगी। राजस्थान में भी सारी 25 सीटें भाजपा के खाते में आती दिखाई जा रही हैं। बिहार में 37 सीट भाजपा को मिल सकती है। इसके अलावा गुजरात, उत्तराखंड गोवा, लद्दाख, चंडीगढ़, अंडमान जैसी जगहों पर भी भाजपा की जीत पक्की दिखाई गई है।

जी न्यूज के मुताबिक, ये पोल 5 फरवरी 2024 से 27 फरवरी 2024 के बीच किया गया। इस ओपिनियन पोल में लोकसभा की 543 सीटों पर 1 लाख 67 हज़ार 843 लोगों की राय ली गई है। इनमें 87 हज़ार पुरुष और 54 हज़ार महिलाएँ शामिल हैं। साथ ही इस ओपिनियन पोल में 27 हज़ार फ़र्स्ट टाइम वोटर्स की राय भी शामिल है।

2019 में किस पार्टी को मिली थी कितनी सीट

बता दें कि साल 2019 में 543 लोकसभा सीटों में से एनडीए ने 352 जीती थीं। इनमें अकेले भाजपा को 303 सीट आई थीं, जबकि शिवसेना को 18, जेडीयू को 16, एलजेपी को 6, अपना दल को 2, अकाली दल को 2 AIDMK को 1 और अन्य को 4 सीट मिली थी। वहीं यूपीए को 91 सीट मिली थी जिसमें से कॉन्ग्रेस को 52 सीट आई थी, डीएमके को 23, एनसीपी को 5, IUML की 3, जेकेएनसी 3, शेष को 5 मिली थी। इसके अलावा गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने वाली पार्टियों में टीएमसी को 99, वाईएसआरसीपी को 22, बीजेडी को 12, बीएसपी को 10, टीआरएस 9, एसपी को 5, निर्दलीय को 3 और बाकी को 16 सीट आई थी।

हिमाचल में कॉन्ग्रेस के 6 विधायकों की सदस्यता रद्द, राज्यसभा चुनावों में BJP को किया था वोट: शह-मात का खेल जारी, विक्रमादित्य सिंह ने CM के ब्रेकफास्ट में नहीं पहुँचे

हिमाचल प्रदेश में एक सीट पर हुए राज्यसभा चुनावों में विपक्षी दल भाजपा के उम्मीदवार के पक्ष मतदान करने वाले कॉन्ग्रेस के 6 विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को इस मामले में अपना फैसला सुनाया।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया का कहना है, “कॉन्ग्रेस के निशान पर चुनाव लड़ने वाले छह विधायकों ने अपने खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। मैं घोषणा करता हूँ कि छह लोग तत्काल प्रभाव से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदस्य नहीं रहेंगे।”

जिन विधायकों की सदस्यता रद्द की गई है, उनमें धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, गगरेट के विधायक चैतन्य शर्मा, कुटलैहड़ के विधायक देवेंद्र भुट्टो, बड़सर के विधायक इंद्र दत्त लखनपाल, सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा और लाहौल स्पीति के विधायक रवि ठाकुर शामिल हैं। इन विधायकों के पास अब हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है।

हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के तौर पर पिटीशन की सुनवाई की और 30 पन्नों का फैसला दिया। बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने छह बागी विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की थी। व्हिप के मुताबिक बजट पास करने के वक्त बागी विधायक सदन में मौजूद नहीं रहे। 

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के 48 घंटे के भीतर ही विधानसभा अध्यक्ष ने 6 बागी विधायकों के खिलाफ एक्शन लिया है। स्पीकर द्वारा इन विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के बाद सदन की कुल संख्या 68 से घटकर 62 हो गई है। इसके साथ ही बहुमत का आँकड़ा 32 पर आ गया है।

वहीं, 6 विधायकों को निलंबित करने के बाद कॉन्ग्रेस के पास अब कुल 34 विधायक बचे हैं। प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को दो निर्दलीय और एक अन्य विधायक। समर्थन दे रहे हैं। इस तरह सरकार को कुल 37 विधायकों का समर्थन है। वहीं, विधानसभा में भाजपा के कुल 25 विधायक हैं।

इधर, कॉन्ग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भले इस्तीफा वापस ले लिया हो, लेकिन माना जा रहा है कि उनकी नाराजगी कम नहीं हुई है। सरकार को बचाने के लिए सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार की सुबह सभी विधायकों को ब्रेकफास्ट के लिए सीएम हाउस बुलाया। हालाँकि, इससे विक्रमादित्य समेत चार विधायकों ने किनारा कर लिया है।

बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस के चार विधायक- विक्रमादित्य सिंह, मोहन लाल, नंद लाल और धनीराम ने सीएम हाउस में आयोजित नाश्ते में नहीं पहुँचे। वहीं, कॉन्ग्रेस सरकार में कई ऐसे विधायक हैं, जिनकी निष्ठा वीरभद्र सिंह राजपरिवार की ओर है। भले ही इन लोगों ने क्रॉस वोटिंग ना की हो। इस तरह सुक्खू सरकार को लेकर असमंजस की स्थिति अभी भी बरकरार है।

₹100 की गोली, 30% घटाएगी कैंसर का खतरा: TATA इंस्टीट्यूट का दावा, बताया- 10 साल से चला शोध, चूहों पर खरा उतरा-इंसानों पर परीक्षण बाकी

देश में कैंसर के इलाज में अगुवा मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर ने इस बीमारी के लिए एक दवा विकसित की है। यह दवा ₹100/टैबलेट होगी और रेडियोलॉजी अथवा कीमोथैरेपी से सही हुए रोगियों में कैंसर का खतरा कम करेगी। इसके लिए बीते 10 वर्षों से शोध चल रहा था।

NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान के शोधकर्ताओं और डॉक्टरों ने दस वर्षों की मेहनत के बाद यह दवा बनाने में सफलता पाई है। इससे कैंसर का इलाज करवा चुके रोगियों में दोबारा कैंसर की संभावना भी कम करेगी और कीमोथैरेपी या रेडियोथैरेपी से होने वाले साइड इफेक्ट भी 50% कम करेगी।

इस विषय में NDTV से बात करते हुए वरिष्ठ सर्जन राजेन्द्र बडवे ने इस दवा के विकास के विषय में बताया, ” इसशोध के लिए चूहों में मानवों कैंसर कोशिकाएँ डाली गईं, जिससे उन्हें कैंसर हुआ। इसके बाद चूहों का रेडियोलॉजी, कीमोथेरेपी और सर्जरी के द्वारा गया। इसमें यह सामने आया कि मरने के बाद कैंसर की कोशिकाएँ टूट जाती हैं, जिन्हें क्रोमैटिन कण कहा जाता है। ये कण खून के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में जा सकते हैं और जब वे सामान्य कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें कैंसर से संक्रमित कर सकते हैं।”

इस समस्या के निदान के लिए शोधकर्ताओं ने इलाज से सही चूहों को रेस्वेराट्रोल और कॉपर (तांबा) मिश्रित दवा की गोलियाँ दी। यह दवा जल्दी ऑक्सीजन रिलीज करती हैं। इससे क्रोमैटीन कण मर जाते हैं। यह दवा दोबारा कैंसर होने से 50% और पहली बार कैंसर होने से 30% तक बचाव करेगी। इससे मुँह और गले के कैंसर के इलाज भी हो सकेगा।

डॉक्टर बडवे ने बताया, “टाटा संस्थान के डॉक्टर लगभग एक दशक से इस दवा पर काम कर रहे थे। इस दवा के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) से अनुमतिली जा रही है। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के वैज्ञानिकों ने इसके लिए आवेदन किया है। अनुमति मिलने के बाद यह जून-जुलाई से बाजार में उपलब्ध हो सकती है। यह दवा कैंसर के इलाज आसान करने में काफी हद तक मदद करेगी।”

उन्होंने बताया है कि जहाँ आज के समय में कैंसर के इलाज में लाखों-करोड़ों रुपए लगते हैं, इस दवा का मूल्य मात्र ₹100/टैबलेट होगा। उन्होंने कहा है कि इसे अभी चूहों पर आजमाया गया है और मानवों पर इसका असर अगले पाँच सालों तक देखा जाएगा।

आगे-आगे शाहजहाँ शेख, पीछे-पीछे बंगाल पुलिस: ED पर हमले मामले में गिरफ्तारी के बाद भी टशन में दिखा TMC नेता, 10 दिन की रिमांड पर भेजा गया

तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी के बाद उसे 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। यह जानकारी टीएमसी नेता के वकील राजा भौमिक ने खुद दी। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन हिरासत की माँग की थी लेकिन कोर्ट ने 10 दिन कस्टडी में रखने की मंजूरी दी। अब 10 मार्च को शेख शाहजहाँ को कोर्ट में फिर से पेश किया जाएगा।

बता दें कि शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न मामले में नहीं हुई, बल्कि जनवरी महीने में जो उसके समर्थकों ने जो प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हमला किया था, उस मामले में हुई है।

साउथ बंगाल के एडीजी सुप्रतीम सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 5 जनवरी को जब ईडी संदेशखाली में रेड मारने आई थी, तो उन पर हमला हुआ था। इसी मामले में शेख शाहजहाँ मुख्य आरोपित था जिसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है। ये गिरफ्तारी आईपीसी की धारा 354 के तहत दर्ज शिकायतों के बाद हुई है।

उनसे जब पूछा गया कि यौन उत्पीड़न के मामलों का क्या हुआ तो इस पर एडीजी ने कहा कि इस मामले में कई केस दर्ज हुए है। कई दो-दो साल पुराने हैं। उनकी जाँच में समय लगेगा। इस बीच उसे बशीरहाट कोर्ट में पेश किए जाने का एक वीडियो सामने आया है।

इस वीडियो में शेख शाहजहाँ को दबंगों की तरह कोर्ट में एंट्री लेते देखा गया। वहीं पुलिस उसके पीछे चलती दिखी। इस वीडियो को देख लोग कह रहे हैं कि बिलकुल नहीं लग रहा है कि ये गिरफ्तार हुआ है उलटा ऐसा लग रहा है कि अपनी दबंगई दिखाने को सामने आया है।