आतंकी अब्दुल करीम टुंडा को 6 दिसम्बर, 1993 को हुए धमाकों के मामले में बरी कर दिया गया है। टुंडा को अजमेर की एक TADA कोर्ट ने बरी किया है। कोर्ट ने उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत ना होने की बात कही है। वह वर्तमान में अपने खिलाफ चल रहे अन्य मामलों में सजा काट रहा है।
टुंडा पर 5-6 दिसम्बर, 1993 यानी बाबरी मस्जिद विध्वंस के एक वर्ष पूरे होने पर कोटा, लखनऊ, मुंबई, कानपुर, हैदराबाद और सूरत की ट्रेनों में सीरियल धमाके करने का आरोप था। इस मामले में टुंडा पर सारी प्लानिंग करने आरोप था। हालाँकि, उसे आज महावीर प्रसाद गुप्ता की एक अदालत ने बरी कर दिया। यह धमाके राजधानी एक्सप्रेस और अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों में हुए थे। इसी मामले में आतंकी इरफ़ान और हमीदुद्दीन को दोषी करार दिया गया है।
सरकारी वकील ने बताया है कि फैसला पढ़ने के बाद यह स्पष्ट रूप से जाना जा सकेगा कि टुंडा को क्यों बरी किया गया है। टुंडा 2013 में नेपाल सीमा से गिरफ्तार किया गया था और वह तब से अलग अलग मामलों में जेल में बंद है। उस पर 40 से अधिक धमाकों में शामिल होने का आरोप है। वह लश्कर ए तैयबा और आतंकी दाऊद इब्राहिम से भी जुड़ा रहा है।
टुंडा की उम्र वर्तमान में 80 साल है। टुंडा गाजियाबाद के पिलखुवा का रहने वाला है। टुंडा इससे पहले कई काम कर चुका है। वह होम्योपैथिक दवाई से लेकर कबाड़ बेचने और कपड़े बेचने तक धंधा कर चुका है। बताया जाता है कि 1980 के बाद वह आतंकी सगठनों के सम्पर्क में आया। टुंडा 1993 में पाकिस्तान में ISI की ट्रेनिंग लेने भी जा चुका है।
टुंडा के हाफिज सईद से भी लिंक बताए जाते हैं। टुंडा कुछ सालों तक पाकिस्तान में भी रहा है। टुंडा को कई मामलों में छोड़ा जा चुका है। हालाँकि, उसे 2017 में सोनीपत की एक अदालत ने एक धमाके के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। टुंडा कई मामलों में बरी किया जा चुका है।
अब्दुल करीम टुंडा देश के कई इलाकों में धमाकों में आरोपित है। वह वर्तमान में गाजियाबाद जेल में सजा काट रहा है। उसके नाम के पीछे की भी एक कहानी है। उसका असल नाम सैयद अब्दुल करीम टुंडा ही है। बताया जाता है कि एक बार बम बनाते हुए वह उसके हाथ में ही फट गया था। इस धमाके में उसका हाथ उड़ गया था और वह एक हाथ का ही रह गया। इसके बाद उसका नाम टुंडा ही पड़ गया और वह इसी नाम से जाना जाने लगा।
संदेशखाली की महिलाओं से यौन उत्पीड़न करने के आरोपित शाहजहाँ शेख के मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की फजीहत हो रही है। अब इस फजीहत से बचने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने शाहजहाँ शेख को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। इसके साथ उसके मामले की जाँच बंगाल पुलिस की CID ब्रांच को सौंप दिया है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को कोलकाता में कहा, “टीएमसी ने शेख शाहजहाँ को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित करने का फैसला किया है।” इस दौरान उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा और कहा कि एक पार्टी है जो सिर्फ बातें करती है, जबकि टीएमसी कार्रवाई करती है।
#WATCH | TMC leader Derek O'Brien in Kolkata announces, "TMC has decided to suspend Sheikh Shahjahan from the party for six years." pic.twitter.com/AYq3wtktBR
बता दें कि शाहजहाँ शेख को बंगाल पुलिस ने गुरुवार (29 फरवरी) की सुबह नॉर्थ 24 परगना के मीनाखान इलाके से उसे गिरफ्तार किया था। लगभग 55 दिन से फरार शेख को बशीरहाट कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसियों की गिरफ्तारी से बचाने के लिए बंगाल पुलिस ने हिरासत में लिया और उसे हर तरह की सुख-सुविधा उपलब्ध करा रही है।
वहीं, कलकत्ता हाईकोर्ट सोमवार (4 मार्च 2024) को संदेशखाली मामले की जाँच CBI को सौंपे जाने की याचिका पर सुनवाई करेगा। साउथ बंगाल के ADG सुप्रतिम सरकार ने बताया कि इस गिरफ्तारी में सेक्शुअल असॉल्ट का कोई मामला नहीं है। शाहजहाँ के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। हाल ही में दर्ज हुए मामले 2-3 साल पहले की घटनाओं के हैं और इनकी जाँच-पड़ताल में समय लगेगा।
इस बीच शेख शाहजहाँ के खिलाफ दर्ज मामलों की जाँच पश्चिम बंगाल आपराधिक जाँच विभाग (सीआईडी) को सौंपी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम उनके (शाहजहाँ शेख के) खिलाफ मामलों की जाँच करेंगे। उन्हें पूछताछ के लिए भवानी भवन (बंगाल पुलिस मुख्यालय) लाया गया है।”
शाहजहाँ को 5 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों पर हमले से संबंधित दो मामलों में गिरफ्तार किया गया है। ये अधिकारी राशन घोटाले के संबंध जाँच के लिए उसके आवास पर गए थे। इसी दौरान उन पर हमला हुआ था। अधिकारियों ने बताया, “उस पर 147 (दंगा) और 307 (हत्या का प्रयास) सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।”
बता दें कि राज्य की सीआईडी रिपब्लिक बांग्ला के पत्रकार संटू पान के खिलाफ भी एक मामले की जाँच कर रही है। उन्हें 19 फरवरी को शाहजहाँ शेख के खिलाफ रिपोर्टिंग के लिए गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, 22 फरवरी को कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। हाई कोर्ट के अनुसार, रिपोर्टर संटू पान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
कोर्ट ने ममता बनर्जी की सरकार की कड़ी आलोचना की और पूछा, “इस एफआईआर को रद्द क्यों नहीं किया जाना चाहिए?” इसमें कहा गया, “पुलिस अधिकारियों के लिए खेद है। आप असली दोषियों को नहीं पकड़ पाए हैं। आप एक निर्दोष पत्रकार के पीछे पड़े हैं, जबकि जो लोग पकड़े नहीं गए वे कानून का मखौल उड़ा रहे हैं। आप अपनी सारी ऊर्जा इस निर्दोष पत्रकार के पीछे लगाना चाहते हैं।”
इसके अलावा, एबीपी आनंद के कार्यकारी उपाध्यक्ष सुमन डे को भी राज्य की सीआईडी ने कथित तौर पर आम ग्रामीणों को भड़काने के लिए तलब किया था। हालाँकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 फरवरी 2024 को इस पत्रकार के खिलाफ एफआईआर और सभी कार्रवाई पर रोक लगा दी और कहा कि रिपोर्टिंग की गलती में वास्तविक अपराध नहीं बनता।
केरल के वायनाड में एक 20 वर्षीय छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में वामपंथी छात्र नेताओं पर मृतक को नग्न घुमाने, मारने पीटने, बेइज्जत करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने इस मामले में 6 छात्रों को गिरफ्तार किया है। छात्र के पिता ने स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) के छात्र नेताओं पर हत्या के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार, 18 जनवरी, 2024 को वायनाड के एक कॉलेज में पशु विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी। सिद्धार्थ को कॉलेज हॉस्टल के एक टॉयलेट में लटकता पाया गया था। इसके बाद सिद्धार्थ की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में कई खुलासे हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि मौत से पहले सिद्धार्थ को बुरी तरीके से मारा पीटा गया था। उसका पेट खाली था और शरीर पर घाव थे।
इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया। इस मामले में 12 छात्रों को कॉलेज से निलंबित भी कर दिया गया। निलंबित किए जाने वालों में SFI के वामपंथी छात्र नेता भी हैं। सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने बताया है कि उनके बेटे को वामपंथी छात्रों ने काफी प्रताड़ित किया।
उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ ने 14 फरवरी (वैलेंटाइन डे) के दिन एक छात्रा के साथ डांस किया था। वामपंथी छात्र इससे खीझ गए थे। वह अगले दिन घर लौटने वाला था। लेकिन इन SFI नेताओं ने बेटे को हॉस्टल में बुलाकर प्रताड़ित करना चालू किया। तीन दिनों तक लगातार उसे प्रताड़ित किया गया। उसे खाना पीना नहीं दिया गया। उसे रॉड से पीटा गया। उसको नंगा करके हॉस्टल में घुमाया गया और बेइज्जत किया गया। इसके बाद सिद्धार्थ के आत्महत्या की खबर आई।
सिद्धार्थ के पिता ने आरोप लगाया कि उसकी मौत की खबर से दो घंटे पहले उसने फ़ोन किया था। उसने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसे मार कर लटकाया गया है। पुलिस ने इस मामले में 6 छात्रों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए छात्रों के नाम बिलगेट जोशुआ, एस अभिषेक, दोंस्दाई, रहना बिनॉय, एसडी आकाश और आरडी श्रीहरी हैं। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज करते हुए 12 छात्रों को मुख्य आरोपित बनाया हैं। कई आरोपित अभी भी फरार हैं जिनमें SFI के छात्रनेता शामिल हैं।
मृतक सिद्धार्थ के पिता का कहना है कि आरोपित छात्र सत्ताधारी वामपंथी संगठनों से जुड़े हुए हैं इसलिए इस मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही। आज (29 फरवरी, 2024) को इस मामले के एक मुख्य आरोपित अखिल को आज पलक्कड से गिरफ्तार किया है। इस मामले में केरल में विपक्षी दलों ने भी सरकार पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के बड़े चेहरों में से एक अब्दुल मलिक की गिरफ्तारी के बाद अब उसके बेटे अब्दुल मोईद को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उत्तराखंड की पुलिस ने मोईद को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उसकी लोकेशन के बारे में जानकारी अब्दुल मलिक से पूछताछ के दौरान मिली थी, जिसके बाद उत्तराखंड पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही थी। सटीक सूचना के आधार पर मोईद को दिल्ली से पकड़ा गया। वो बनभूलपुरा हिंसा के टॉप 8 वांटेड में था। अब पुलिस इस हिंसा से जुड़े तमाम बड़े चेहरों को गिरफ्तार कर चुकी है।
नैनीताल के एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने बताया कि बनभूलपुरा हिंसा से जुड़े उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए छह पुलिस टीमें गठित की गई, जो देश के अलग-अलग राज्यों- गुजरात, दिल्ली, मुंबई-महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि सभी संभावित स्थानों पर लगातार दबिश दे रही है। उक्त गठित टीमों में से एक टीम को बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस टीम ने हल्द्वानी दंगे में वांछित अभियुक्त अब्दुल मोईद को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। अब्दुल मोईद लगातार 21 दिनों तक पुलिस को चकमा देता रहा था, लेकिन अब वो पुलिस की गिरफ्त में है।
हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक को 24 फरवरी 2024 को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। नैनीताल पुलिस की टीम ने सूचना के आधार पर उसकी गिरफ्तारी की थी। अब्दुल मलिक की गिरफ्तारी के बाद उसे हल्द्वानी लाया गया था। वहाँ उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। उसे कोर्ट ने पुलिस हिरासत में भेजा है, जिसके बाद से उससे जानकारियाँ निकाली जा रही है। बताया जा रहा है कि अब्दुल मलिक से 150 से अधिक सवाल पूछे जा चुके हैं।
6 की मौत, 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल
बता दें कि 8 फरवरी हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध मस्जिद-मदरसे को हटाने पहुँची नगर निगम की टीम और पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ था। इसमें अब्दुल मलिक और अब्दुल मोईद की भूमिका सामने आई। उसे पर उपद्रवियों को भड़काने का आरोप है। मलिक का बगीचा इलाके से शुरु हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, पथराव में सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, रामनगर कोतवाल समेत 300 से अधिक पुलिसकर्मी और निगमकर्मी घायल हो गए। उपद्रवियों ने बनभूलपुरा थाना भी फूँक दिया। पुलिस की जीप, जेसीबी, दमकल की गाड़ी दोपहिया समेत 70 से अधिक वाहन फूँक दिए गए। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया था। हल्द्वानी में कर्फ्यू लगाकर हिंसा की घटना को काबू में लाया जा सका था।
अब तक 85 से अधिक आरोपित गिरफ्तार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हल्द्वानी हिंसा मामले में पुलिस की ओर से दर्ज किए गए केस में अब तक करीब 85 से अधिक आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। हल्द्वानी हिंसा मामले के बाद से पुलिस और प्रशासन की टीम के स्तर पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में सभी नामजद आरोपित पकड़े जा चुके हैं।
कर्नाटक विधानसभा में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी नासिर हुसैन की जीत के बाद एक वीडियो शेयर करके दावा किया गया था कि इसमें कॉन्ग्रेस समर्थक ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोल रहे हैं। बाद में इस वीडियो पर बेंगलुरु पुलिस ने संज्ञान लिया और जाँच शुरू की। अब खबर ये है कि पुलिस ने जाँच को आ़गे बढ़ाते हुए एक शख्स को अपनी हिरासत में लिया है और उसकी आवाज के सैंपल जाँच के लिए भेजे हैं।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, ब्यादगी पुलिस ने इस मामले में जानकारी दी कि उन्होंने ब्यादगी शहर से शफी नशीपुड़ी को हिरासत में लिया है। वह सैयद नसीर का हुसैन का समर्थक है। पुलिस ने उसकी आवाज का सैंपल लिया और उसे जाँच के लिए भेजा है। वह घटना वाले दिन सैयद नसीर हुसैन के साथ मौजूद था।
Karnataka | "A trader and supporter of Syed Naseer Hussain, Mohmad Shafi Nashipudi, detained by Byadagi town. Police collected his voice sample and took him to analyse the voice in the alleged pro-Pakistan slogan video. He was present in Vidhana Soudha with Syed Nasser Hussain in…
पुलिस के इस बयान से पता चलता है कि मामले की जाँच अभी चल ही रही है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि कर्नाटक विधानसभा में हुई इस घटना पर कॉन्ग्रेस नेता और मोहम्मद जुबैर पहले ही क्लीन चिट दे चुके हैं।
कल कर्नाटक में कॉन्ग्रेस मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा था- “ये बहुत स्पष्ट है कि ऑडियो में नासिर हुसैन और सैयद साहब जिंदाबाद कहा जा रहा है। ये सिर्फ भाजपा की साजिश है और कुछ नहीं। पार्टी ने ऑडियो की फॉरेंसिंक चेकिंग भी करवाई है। उसमें यही आया है कि ऐसा कुछ नहीं है। सरकारी रिपोर्ट आने वाली है।”
#WATCH | Bengaluru: On BJP's protest outside Vidhana Soudha over alleged slogan raised by Congress MP, former Karnataka CM and BJP leader Basavaraj S Bommai says, "They are allowing pro-Pak (Pakistan) slogans inside Vidhan Sabha. This is a danger to the security and democracy of… pic.twitter.com/7vnGkvs2rO
बता दें कि इस पूरे मामले को पुलिस में दर्ज कराकर भाजपा द्वारा उठाया गया। कर्नाटक के पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई ने इस पर कहा, “विधानसभा के अंदर पाक समर्थक नारे लगाने की अनुमति दे रहे हैं। यह हमारे देश की सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए ख़तरा है। फिर भी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है…।”
बता दें कि कर्नाटक की 4 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में 3 सीटों पर कॉन्ग्रेस की जीत के बाद एक नया बवाल सामने आया था। कॉन्ग्रेस उम्मीदवार नासिर हुसैन की जीत का जश्न मनाते हुए विधानसभा में कुछ नारे लगे, जिसकी वीडियो शेयर करके कहा गया कि ये नारे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे थे। वहीं मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने कहा कि पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं ‘नासिर साहब जिंदाबाद’ कहा जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच बेंगलुरु पुलिस ने मामले में अज्ञातों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी और कहा गया था कि वीडियो की जाँच करके आगे कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ही प्रियांक खड़गे का बयान आया था।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। शेख के वकील जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुँचे और मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने नकार दिया और कहा कि उससे कोई हमदर्दी नहीं है, उसे गिरफ्तार रहने दो। पेशी के दौरान भी शाहजहाँ कोर्ट में अकड़ दिखा रहा था। इससे पहले हाई कोर्ट ने शेख को 7 दिनों में गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
अब शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार और बंगाल पुलिस पर सवाल उठाया। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “आज अचानक शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी हो गई। संदेशखाली की महिलाओं की शिकायत पर शाहजहाँ के खिलाफ बलात्कार या बलात्कार को प्रेरित करने वाली कोई भी धारा नहीं लगाई गई है।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने (बंगाल पुलिस ने) ईडी के विषय में रोक हटने के बाद गिरफ्तार किया। मैं कहना चाहता हूँ कि यदि आपने ईडी के विषय में गिरफ्तार किया है तो पश्चिम बंगाल सरकार उसे ईडी को क्यों नहीं सौंप दे रही है। कहा जा सकता है कि शाहजहाँ शेख महफूज ठिकाने पर ममता सरकार के दामन-ए-रहमत में कहीं महफूज था और अब उसे दोबारा हिफाजत देने के लिए, ताकि वह ईडी और सीबीआई द्वारा दोबारा गिरफ्तार नहीं किया जा सके।”
भाजपा नेता त्रिवेदी ने आगे कहा, “वह पश्चिम बंगाल पुलिस की मेहमानवाजी में चला गया है। ये मेहमानवाजी शब्द इसलिए प्रयोग कर रहा हूँ, क्योंकि उसकी तथाकथित गिरफ्तारी के समय अगर आपने उसकी भाव-भंगिमा देखी हो, उसके चेहरे के भाव और बॉडी लैंग्वेज देखी हो और पुलिस वालों की बॉडी लैंग्वेज देखी हो…. तो आप कह सकते हैं कि जो बॉडी लैंग्वेज शाहजहाँ शेख की थी, वो किसी गुनाहगार की थी?”
#WATCH | On arrested TMC leader Shahjahan Sheikh, BJP MP Dr Sudhanshu Trivedi says, "It can be said that before his arrest he was in a safe house under the protection of Mamata government. Now, he has been put under 'mehman-nawazi' of West Bengal Police to avoid arrest by ED and… pic.twitter.com/vRcnhfuJWh
वहीं, बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा शाहजहाँ शेख गिरफ्तार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, “पिछली रात को 12 बजे वह पुलिस के साथ था। उसको पहले डीआईजी भास्कर मुखर्जी के साथ फलदा भेज दिया। फिर शाम उनको लेकर कुंजीपाड़ा घर में गया और फिर उसे मिनाखा लाकर अरेस्ट शो किया गया। यह ममता सरकार द्वारा सुनिश्चित किया गया कि आपको कुछ होने वाला नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “ममता सरकार ने सुनिश्चित किया कि उसे फाइव स्टार फैसिलिटी मिलेगी, मोबाइल फोन यूज करने का परमिशन है। जब तक ये सेंट्रल एजेंसी के पास नहीं जाता, तब जस्टिस मिलने वाला नहीं है।” उन्होंने कहा कि कोर्ट की फटकार, मीडिया के प्रभाव और भाजपा के लगातार विरोध ने शाहजहाँ को गिरफ्तार करने के लिए बंगाल पुलिस को बाध्य किया।
#WATCH | North 24 Parganas | On TMC leader Sheikh Shahjahan's arrest, West Bengal LoP & BJP leader Suvendu Adhikari says, "This isn't arrest. He (Sheikh Shahjahan) is under their (Govt) protection. He has been assured by the Mamata govt that nothing will happen to you, you'll be… pic.twitter.com/edSwUvIR1t
बता दें कि इससे पहले भी सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि था बंगाल की पुलिस ने शाहजहाँ शेख को बचाने के लिए उसे सेफ कस्टडी में लिया है। सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार (28 फरवरी 2024) को सोशल मीडिया साइट X पर अपने पोस्ट में कहा, “संदेशखाली का बदमाश शेख शाहजहाँ कल रात 12 बजे से ममता पुलिस की सुरक्षित हिरासत में है। प्रभावशाली मध्यस्थों के माध्यम से ममता पुलिस के साथ एक समझौते के बाद, उसे बरमजुर-II ग्राम पंचायत क्षेत्र से दूर ले जाया गया, ताकि पुलिस और न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान उनकी उचित देखभाल की जाएगी।”
अपने ट्वीट में उन्होंने आगे कहा था, “सलाखों के पीछे रहने के दौरान उसे 5 सितारा सुविधाएँ दी जाएँगी और उसके पास एक मोबाइल फोन भी होगी। इसके माध्यम से वह ‘तोलामूल पार्टी’ का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। यहाँ तक कि वुडबर्न वार्ड में एक बिस्तर भी उसके लिए तैयार और खाली रखा जाएगा, ताकि वह चाहे तो वहाँ कुछ समय बिता सके।”
बंगाल पुलिस ने गुरुवार (29 फरवरी 2024) को शाहजहाँ शेख को कोर्ट में पेश किया। इसको लेकर सामने आए वीडियो में वह दबंगों की तरह कोर्ट में एंट्री लेते देखा गया। वहीं पुलिस उसके पीछे चलती दिखी। इस वीडियो को देख लोग कह रहे हैं कि बिलकुल नहीं लग रहा है कि ये गिरफ्तार हुआ है, उलटा ऐसा लग रहा है कि अपनी दबंगई दिखाने को सामने आया है।
हरियाणा की सीमा पर डेरा डाल कर बैठे किसान प्रदर्शनकारी अब अपनी रणनीति बदलेंगे, उन्होंने कहा है कि हरियाणा की सीमा में घुसने के लिए अब गाय को ढाल बनाया जाएगा। इसको लेकर जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। हर किसान गाय को लेकर आगे चलेगा जिससे पुलिस उन पर एक्शन ना ले सके।
जागरण की एक खबर के अनुसार, हरियाणा की सीमा में घुसने में अब तक नाकाम रहा संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) का सिद्धूपुर गुट यह नई रणनीति बना रहा है। उन्होंने सीमा में घुसने के लिए गायों को आगे करके चलने की रणनीति बनाई है।
किसान पुलिस के आंसू गैस के गोलों से बचने के लिए अपनी गाय को आगे लेकर चलेंगे। किसानों ने कह़ा है कि इससे हरियाणा पुलिस ना ही उन पर आसू गैस के गोले चला पाएगी और ना ही उन्हें और भी किसी तरह रोक सकेगी। जागरण की रिपोर्ट में कहा गया है चूंकि हरियाणा सरकार अपने आप को गोरक्षक कहती है इसलिए वह गायों पर कोई भी एक्शन नहीं लेगी और किसान हरियाणा में घुसने में कामयाब हो जाएँगे।
बताया गया है कि एक बार गायों के सहारे हरियाणा में प्रवेश करने में अगर सफलता मिलती है तो दिल्ली जाने के लिए हरियाणा के किसानों को भी शामिल किया जाएगा। वह भी अपनी गायों को लेकर दिल्ली की तरफ चलेंगे। बताया जा रहा है कि स्पष्ट रूप से इस रणनीति की घोषणा नहीं की जा रही है।
As per print media reports now farmers will put "cows" as shield in front, so that forces not able to take action. Isn't seems to be old "izl@mic" tactic to @tt@ck.#FarmerProtest2024#Punjabpic.twitter.com/QiNAF0UjZQ
गौरतलब है कि पंजाब से आए प्रदर्शनकारी किसान हरियाणा के संभु और खन्नौरी बॉर्डर पर डेरा डाल कर बैठे हैं। वह यहाँ से हरियाणा में प्रवेश करना चाहते हैं, जिससे वह आगे जाकर दिल्ली में प्रदर्शन कर सकें। यह प्रदर्शन बीते 13 फरवरी से जारी है। पुलिस ने यहाँ किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए हुए हैं।
इस किसान आंदोलन में कुछ उपद्रवी भी शामिल हैं। उपद्रवी यहाँ बैरिकेड हटा रहे हैं और साथ ही पुलिस के ड्रोन को भी पत्थर मार कर गिरा रहे हैं। हरियाणा पुलिस ने इनकी फोटो और वीडियो निकाल कर कार्रवाई करने की बात कही है। हरियाणा पुलिस ने ऐसे प्रदर्शनकारियों के वीजा पासपोर्ट रद्द करवाने की भी बात कही है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद शेख के वकील जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुँचे और मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने नकार दिया और कहा कि उसे गिरफ्तार रहने दो। ऐसे आदमी से कोई हमदर्दी नहीं है। इससे पहले हाई कोर्ट ने शेख को 7 दिनों में गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
लगभग 55 दिनों से फरार शेख को बंगाल पुलिस ने गुरुवार सुबह नॉर्थ 24 परगना के मीनाखान इलाके से गिरफ्तार किया था। पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण और जमीन कब्जाने के आरोप हैं। हालाँकि, उसकी गिरफ्तारी संदेशखाली में महिलाओं के उत्पीड़न मामले में नहीं, बल्कि जनवरी में उसके समर्थकों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पर किए गए हमले के मामले में हुई है।
जिला परिषद प्रधान शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी की बाद उसकी ओर से पेश वकील ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ से संपर्क किया। वकील ने कहा कि शेख की अग्रिम जमानत के लिए उसकी याचिका का अभी निपटारा किया जाना बाकी है। वकील ने दलील दी कि याचिका बेहद जरूरी है नियमित जमानत के लिए इसे तुरंत सूचीबद्ध किया जाए।
शाहजहाँ के वकील को देखकर बेंच ने कहा, “आइए, आपका इंतजार है।” बेंच ने दलील सुनने के बाद कहा, “उसे गिरफ्तार ही रहने दिया जाए। अगले 10 वर्षों तक यह व्यक्ति आपको बहुत व्यस्त रखेगा। आपके पास किसी और काम के लिए समय नहीं होगा। उसके खिलाफ 42 मामले दर्ज किए गए हैं। वह फरार भी रहा है। आपको जो भी चाहिए, आप सोमवार को आएँ। हमें उस व्यक्ति से कोई सहानुभूति नहीं है।”
साउथ बंगाल के ADG सुप्रतिम सरकार ने कहा कि वह 5 जनवरी को ED अधिकारियों पर हुए हमले के मुख्य आरोपितों में शामिल था। उसे इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस गिरफ्तारी में सेक्शुअल असॉल्ट का कोई मामला नहीं है। उसके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। कुछ दिन पहले दर्ज हुए मामले 2-3 साल पहले की घटनाओं के हैं। उसकी जाँच में समय लगेगा।
इससे पहले भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बंगाल पुलिस ने शाहजहाँ को अपनी सेफ कस्टडी में लिया है। प्रभावशाली मध्यस्थों के माध्यम से पुलिस के साथ समझौते के बाद उसे बरमजुर-2 ग्राम पंचायत से दूर ले जाया गया है। उन्होंने कहा था कि पुलिस ने ऐसा इसलिए किया, ताकि उसकी पुलिस और न्यायिक हिरासत के दौरान उचित देखभाल की जा सके।
अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था, “सलाखों के पीछे रहने के दौरान उसे 5 सितारा सुविधाएँ दी जाएँगी और उसके पास एक मोबाइल फोन भी होगी। इसके माध्यम से वह ‘तोलामूल पार्टी’ का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। यहाँ तक कि वुडबर्न वार्ड में एक बिस्तर भी उसके लिए तैयार और खाली रखा जाएगा, ताकि वह चाहे तो वहाँ कुछ समय बिता सके।”
शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी के बाद संदेशखाली की महिलाएँ जश्न मना रही हैं। वे एक-दूसरे को गुलाल लगा रही हैं और मिठाई खिला रही हैं। दरअसल, सुंदरबन के टापू पर बसे संदेशखाली में महिलाओं ने शेख पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के आरोप लगाए थे। महिलाओं का कहना है कि शाहजहाँ जिस महिला को चाहे उसे अपनी हवस का शिकार बनाता था। इससे पहले शाहजहाँ शेख के घर पर ED ने राशन घोटाला मामले में रेड डाली थी। तब से वह फरार है।
अयोध्या में भगवान राम अपने जन्मस्थान पर विराजमान हो चुके हैं। देश-दुनिया से भारी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या में अपने अराध्य के दर्शन कर रहे हैं, तो कुछ चमत्कारिक क्षण भी सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले ही राम मंदिर के गर्भगृह में एक वानर के दर्शन करने की खबरें सामने आई थी, तो रामलला की भव्य मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने भी ऐसी कहानी बताई थी। अब रामलला के दर्शन करने खुद पक्षीराज गरुड़ पहुँचे हैं। ऐसे में लोग इसे पक्षीराज गरुड़ की भगवान की भक्ति से तो जोड़ ही रहे हैं, साथ ही चमत्कार भी बता रहे हैं।
रामलला मंदिर के गर्भगृह में पक्षीराज गरुड़ के पहुँचने की घटना का लोगों ने वीडियो भी बनाया है, जो वायरल हो रहे हैं। ऐसा ही एक वीडियो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने शेयर किया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि ‘गरुड़ देव प्रभु श्रीरामलला के गर्भगृह की परिक्रमा लगा रहे हैं।’
इस वीडियो पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। कुछ लोग इसे चमत्कार बता रहे हैं, तो कुछ लोग प्रभु की भक्ति। एक यूजर ने लिखा, “भगवान श्री राम के दर्शन करने के लिए पक्षी भी आए हैं।”
कमेंट का स्क्रीनशॉट
हर रोज दर्शन करने आता था बंदर, बदल गईं रामलला की आँखे
रामलला से जुड़े कई चमत्कारों की चर्चा होती रही है। रामलला की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने भी दो दावे किए थे। पहले में उन्होंने कहा कि रामलला की आँखे ही बदल गई, तो उन्होंने रामलला की मूर्ति निर्माण के समय हर रोज एक बंदर के आने का भी जिक्र किया है।
अरुण योगीराज ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि ये कार्य उन्होंने खुद नहीं किया भगवान ने उनसे करवाया है। वह कहते हैं कि जब वो रामलला की मूर्ति को गढ़ रहे थे तो रोज उस मूर्ति से बात करते थे। वह कहा करते थे, “प्रभु बाकी लोगों से पहले मुझे दर्शन दे दो।” योगीराज की मानें तो जब मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हुई तो उन्हें लगा ही नहीं कि वो मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उसके हाव-भाव बदल चुके थे। इस बारे में उन्होंने लोगों से कहा भी कि उन्हें नहीं विश्वास हो रहा मूर्ति उनके द्वारा बनाई गई है। उन्होंने माना कि अगर वो कोशिश भी करें तो दोबारा इस तरह का विग्रह कभी नहीं बना सकते।
उन्होंने कहा, “जब मैंने मूर्ति बनाई तब वो अलग थी। गर्भगृह में जाने के बाद और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद वो अलग हो गई। मैंने 10 दिन गर्भगृह में बिताए। एक दिन जब मैं बैठा था मुझे अंदर से लगा ये तो मेरा काम है ही नहीं। मैं उन्हें पहचान नहीं पाया। अंदर जाते ही उनकी आभा बदल गई। मैं उसे अब दोबारा नहीं बना सकता। जहाँ तक छोटे-छोटे विग्रह बनाने की बात है वो बाद में सोचूँगा।”
रामलला की मूर्ति को लेकर इंटरव्यू देते समय अरुण योगीराज नंगे पाँव बैठे दिखे। उन्होंने कहा कि राम को दुनिया को दिखाने से पहले खुद मानना था कि मूरत में राम हैं। वह बोले, “मैं दुनिया को दिखाने से पहले उनके दर्शन करना चाहता था। मैं उन्हें कहता था-दर्शन दे दीजिए प्रभु। तो, भगवान मेरी जानकारी जुटाने में खुद मदद कर रहे थे। कभी दीपावली के वक्त कोई जानकारी मिल गई। कुछ तस्वीरें मुझे वो मिल गईं जो 400 साल पुरानी थीं। हनुमान जी भी हमारे दरवाजे पर आते थे गेट खटखटाते थे, सब देखते थे, फिर चले जाते थे।” अपने अद्भुत अनुभवों को बताते हुए उन्होंने कहा, “मूर्ति बनाने के दौरान हर रोज एक बंदर शाम में 4 से 5 बजे के बीच उस जगह आता था, वो सब देखकर चला जाता था। ठंड में हम दरवाजे बंद करने लगे। जब उसने ऐसा देखा तो वो तेज की दरवाजा खोलता अंदर आता, देखता और चला जाता। शायद उनका भी देखने का मन होता होगा।”
वानर ने किया गर्भगृह में प्रवेश, दर्शन के बाद चुपचाप वापस लौटे
कुछ ऐसा ही दावा मंदिर ट्रस्ट की तरफ से 23 जनवरी को किया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक्स/ट्विटर पर इसके बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके अगले ही दिन लाखों लोग अपने अराध्य के दर्शन को उमड़ पड़े। इसी दौरान एक बंदर भी गर्भगृह में प्रवेश कर गया। वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों का कहना है, “ये हमारे लिए ऐसा ही है, मानो स्वयं हनुमान जी रामलला के दर्शन करने आए हों।”
यह घटना 23 जनवरी को शाम के करीब 5 बजकर 50 मिनट की है। उस समय तक करीब 3 लाख भक्त रामलला का दर्शन कर चुके थे और करीब दो लाख भक्त बाहर कतार में थे। पहले दिन 5 लाख से अधिक भक्तों ने राम मंदिर में दर्शन किया। ट्रस्ट की ओर से किए गए पोस्ट में बताया गया है, “एक बंदर दक्षिणी द्वार से गूढ़ मंडप से होते हुए गर्भगृह में प्रवेश करके उत्सव मूर्ति के पास तक पहुंचा। बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे देखा। वे बंदर की ओर यह सोच कर भागे कि कहीं वह उत्सव मूर्ति को जमीन पर न गिरा दे। परंतु जैसे ही पुलिसकर्मी बंदर की ओर दौड़े, वैसे ही बंदर शांतभाव से भागते हुए उत्तरी द्वार की ओर गया। द्वार बंद होने के कारण पूर्व दिशा की ओर बढ़ा और दर्शनार्थियों के बीच में से होता हुआ, बिना किसी को कष्ट पहुँचाए पूर्वी द्वार से बाहर निकल गया।”
आज श्री रामजन्मभूमि मंदिर में हुई एक सुंदर घटना का वर्णन:
आज सायंकाल लगभग 5:50 बजे एक बंदर दक्षिणी द्वार से गूढ़ मंडप से होते हुए गर्भगृह में प्रवेश करके उत्सव मूर्ति के पास तक पहुंचा। बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने देखा, वे बन्दर की ओर यह सोच कर भागे कि कहीं यह बन्दर उत्सव…
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) January 23, 2024
कुछ समय पहले खबरें आई थी कि अयोध्या और आसपास के इलाकों से विलुप्त हो चुके गिद्ध भी अब लौट आए हैं। बता दें कि रामायण की कथा में गिद्धराज जटायू का अहम स्थान है, जिन्होंने माता सीता के अपहरण के समय अपने प्राणों की बलि देकर रावण को रोकने की कोशिश की थी।
लोकसभा चुनाव से पहले Zee News के लिए MATRIZE ने ओपिनियन पोल किया है। इस पोल में निकलकर कि इस पूरे लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 5 फीसद बढ़ेगा। वहीं इस समय सबसे ज्यादा चर्चित राज्य का क्या होगा, इसके बारे में भी बताया गया है।
पोल के मुताबिक, अगर चुनाव हो जाएँ तो भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंध 377 सीट के साथ सरकार बनाएगा। वहीं इंडी गठबंध 93 सीट पर। जबकि, 2019 के आम चुनावों में भाजपा ने 351 सीटें जीती थीं और यूपीए गठबंधन को सिर्फ 90 सीट आई थी।
इसके अलावा, 2019 की तुलना में एनडीए का वोट शेयर 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 43.6 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है जबकि 2019 में गठबंधन को 38.4% वोट मिले थे। इस बीच, इंडी गठबंधन को 2024 में 27.7 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। 2019 में यूपीए को 26.6% वोट मिले थे। इसी तरह अन्य दलों के वोट प्रतिशत में भारी गिरावट देखी जा सकती है, जिसके परिणामस्वरूप 2019 में उन्हें जहाँ वोट शेयर 35.2 प्रतिशत मिला था वो शायद 2024 में 24.9 प्रतिशत ही रह जाए।
~ With PM Modi's mesmerizing campaign lined up, ABKI BAR, 400 PAR may come true? pic.twitter.com/bUuGGmA5m1
— The Analyzer (News Updates?️) (@Indian_Analyzer) February 28, 2024
सर्वे इस बात की जानकारी भी देता है कि एनडीए गठबंधन उत्तर, पूर्वी और पश्चिमी भारत में धाक जमाने में कामयाब रहेगा लेकिन हो सकता है दक्षिण में इंडी गठबंधन की तरफ झुकाव देखा जाए। बंगाल की यदि अलग से बात करें तो बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में 27 पर टीएमसी को जीतते इसमें दिखाया गया है और भाजपा को 17 सीटें आते। वहीं इंडी गठबंधन के पास शायद एक सीट आए।
इसके अलावा दिल्ली में अनुमान निकलकर आया है कि भाजपा 7 की 7 सीटें जीत सकती है। ऐसे ही उत्तर प्रदेश में एनडीए को 78 सीटें मिल सकती है वहीं एनडीए को सिर्फ 2 सीट मिलेंगी। राजस्थान में भी सारी 25 सीटें भाजपा के खाते में आती दिखाई जा रही हैं। बिहार में 37 सीट भाजपा को मिल सकती है। इसके अलावा गुजरात, उत्तराखंड गोवा, लद्दाख, चंडीगढ़, अंडमान जैसी जगहों पर भी भाजपा की जीत पक्की दिखाई गई है।
जी न्यूज के मुताबिक, ये पोल 5 फरवरी 2024 से 27 फरवरी 2024 के बीच किया गया। इस ओपिनियन पोल में लोकसभा की 543 सीटों पर 1 लाख 67 हज़ार 843 लोगों की राय ली गई है। इनमें 87 हज़ार पुरुष और 54 हज़ार महिलाएँ शामिल हैं। साथ ही इस ओपिनियन पोल में 27 हज़ार फ़र्स्ट टाइम वोटर्स की राय भी शामिल है।
2019 में किस पार्टी को मिली थी कितनी सीट
बता दें कि साल 2019 में 543 लोकसभा सीटों में से एनडीए ने 352 जीती थीं। इनमें अकेले भाजपा को 303 सीट आई थीं, जबकि शिवसेना को 18, जेडीयू को 16, एलजेपी को 6, अपना दल को 2, अकाली दल को 2 AIDMK को 1 और अन्य को 4 सीट मिली थी। वहीं यूपीए को 91 सीट मिली थी जिसमें से कॉन्ग्रेस को 52 सीट आई थी, डीएमके को 23, एनसीपी को 5, IUML की 3, जेकेएनसी 3, शेष को 5 मिली थी। इसके अलावा गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने वाली पार्टियों में टीएमसी को 99, वाईएसआरसीपी को 22, बीजेडी को 12, बीएसपी को 10, टीआरएस 9, एसपी को 5, निर्दलीय को 3 और बाकी को 16 सीट आई थी।