लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट-शेयरिंग पर बात बन गई है। दोनों पार्टियाँ अब साथ चुनाव लड़ेंगी। कॉन्ग्रेस पार्टी 17 सीटों पर चुनाव लड़ने को राजी हो गई है। बाकी की 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी और उसकी सहयोगी पार्टियाँ चुनाव लड़ेंगी। कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर कुछ सीटों पर पेंच फंसा था, लेकिन दोनों पार्टियों ने इस पेंच को सुलझा लिया है। सपा को मध्य प्रदेश में भी एक लोकसभा सीट दी गई है। उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के इन्चार्ज अविनाश पांडे ने इस बात की घोषणा की।
कॉन्ग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा, “मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यह निर्णय लिया गया है कि कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और इस गठबंधन के तहत जो अन्य बची हुई 63 सीटे हैं, इन पर इंडी गठबंधन के अन्य उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। हम डटकर मुकाबला करेंगे और बीजेपी को शिकस्त देंगे।”
#WATCH | Congress Uttar Pradesh in-charge Avinash Pande says, "I am delighted to tell you that it has been decided that in Uttar Pradesh the INC will contest on 17 seats and the remaining 63 seats will have candidates of INDIA Alliance – from SP and other parties." pic.twitter.com/mRBa3ErTqQ
समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच गठबंधन के बाद जो 17 सीटें कॉन्ग्रेस को दी गई हैं, उनमें रायबरेली, अमेठी, कानपुर नगर, फतेहपुर सीकरी, बाँसगाँव, सहारनपुर, प्रयागराज, महाराजगंज, वाराणसी, अमरोहा, झाँसी, बुलंद शहर, गाजियाबाद, मथुरा, सीतापुर, बाराबंकी और देवरिया लोकसभा सीटें हैं। इनमें से वाराणसी सीट पर समाजवादी पार्टी ने पहले ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी, अब उन्हें शायद मैदान से हटना पड़े।
यह घोषणा समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी और कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और कॉन्ग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की। पांडे ने कहा कि कॉन्ग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि राज्य की बाकी 63 सीटों पर सपा और गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। इस दौरान समाजवादी पार्टी के नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ये भारत को बचाने का संदेश है जो पूरे देश में जा रहा है।
सपा को मध्य प्रदेश में भी मिली एक सीट
इंडी गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश की एक लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी। सपा प्रदेश अध्यक्ष पटेल ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने का इरादा जाहिर किया था जिसे कॉन्ग्रेस ने स्वीकार कर लिया है। कॉन्ग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने इस गठबंधन को अंजाम तक पहुँचने में बहुत अहम भूमिका अदा की है। वह उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने के लिए सभी पार्टियों को एक साथ लाने का जो प्रयास कर रही हैं, इसके लिए वह उनका आभार प्रकट करते हैं।
डिंपल यादव ने कही ये बात
कॉन्ग्रेस के साथ सीट बंटवारे के एलान के बाद समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी शुरू से ही गठबंधन चाह रही थी लेकिन थोड़ी देरी इसलिए हुई क्योंकि सामने बीजेपी है।
डिंपल यादव ने कहा, “समाजवादी पार्टी शुरू से ही चाह रही थी कि गठबंधन हो लेकिन थोड़ी देरी हुई क्योंकि बीजेपी हमारे सामने खड़ी हुई है। मैं समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस को बधाई देना चाहती हूँ कि गठबंधन आखिरकार अपनी मंज़िल तक पहुँच गया है। इसके परिणाम बहुत अच्छे होंगे और लोग हमारा समर्थन मिलेगा क्योंकि युवा, महिलाएँ, किसान और जवान रूपी हमारे चार स्तंभ आक्रोशित हैं और दुखी भी हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले चुनाव में लोग आपको भाजपा के साथ दिखाई देंगे लेकिन वोट वो गठबंधन को ही करने जा रहे हैं।”
#WATCH | Mainpuri, UP: Samajwadi Party MP Dimple Yadav says, " From the starting itself Samajwadi Party wanted the alliance, there was a little bit of delay because BJP is in front of us. I want to congratulate Samajwadi Party and Congress as the alliance has reached its… pic.twitter.com/0QTSHhutZ1
महाराष्ट्र के ठाणे में एक स्कूल के टूर पर गई लड़कियों से छेड़खानी का मामला सामने आया है। यह आरोप जावेद खान नाम के युवक पर लगा है। जावेद बस में छात्राओं को खाने-पीने का सामान देने के लिए रखा गया था। पीड़ित छात्राओं ने इस घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर बुधवार (21 फरवरी 2024) को जावेद खान को गिरफ्तार कर लिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला ठाणे के कपूरबावड़ी क्षेत्र का है। यहाँ के सीपी गोयनका स्कूल की छात्राएँ कुछ दिन पहले अपने अध्यापकों के साथ टूर पर गई थीं। टूर के लिए बस बुक की गई थी, जिसमें खाने-पीने का सामान बाँटने के लिए जावेद खान को रखा गया था। आरोप है कि जावेद ने लड़कियों को खाने का सामान देने के दौरान उनसे छेड़खानी की। इस हरकत पर लड़कियाँ परेशान हो गईं, लेकिन उस समय खामोश रहीं।
हालाँकि, घर लौटकर कई छात्राओं ने अपने परिजनों को 27 साल के जावेद खान की करतूत के बारे में बताया। छात्राओं के परिजन जावेद की इस हरकत से काफी नाराज हुए। उन्होंने सबसे पहले स्कूल प्रशासन को इसकी सूचना दी। बाद में उन्होंने स्थानीय कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपित पर सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर ली।
बाद में दबिश देकर पुलिस ने जावेद खान को गिरफ्तार कर लिया। इस गंभीर घटना पर लचीला रुख अपनाने का आरोप लगाकर कई छात्राओं के अभिभावकों ने सीपी गोयनका स्कूल प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी किया। पीड़ित छात्राओं के परिजनों ने इस मामले की गहनता से जाँच करवाने की माँग की है। मामले की नजाकत को देखते हुए पुलिस केस की जाँच में जुटी हुई है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अविनाश जाधव और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता एवं ठाणे के पूर्व नगरसेवक संजय भोईर ने इस इस घटना पर नाराजगी जताई है। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में वे भी शामिल हुए। छात्राओं के परिजनों ने जावेद को को जिम्मेदारी देने वाले प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। अभिभावकों कहना है कि जब तक प्रिंसिपल पर कार्रवाई नहीं होगी, वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में एक इस्लामी संस्था से जुड़े कुछ शख्स मुस्लिम परिवारों को कथित रूप से नोटों की गड्डियाँ बाँट रहे हैं। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिन परिवारों को नोटों की गड्डियाँ दी जा रही हैं, उनके घर के लोगों को पुलिस ने दंगे के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह संस्था के सोशल मीडिया पर कई भड़काऊ वीडियो भी हैं।
नोटों की गड्डियाँ बाँटने वाले संगठन का नाम हैदराबाद यूथ करेज (Hyderabad Youth Courage) है। इसका इसी नाम से एक फेसबुक पेज भी है, जिसके लाखों फॉलोवर हैं। HYC बताता है कि यह लोगों से पैसे इकट्ठा करके लोगों की मदद करता है। हालाँकि, इसकी सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है कि यह कट्टरपंथी संगठन है। इसके मुखिया सलमान का इन्स्टाग्राम पर 13+ लाख फॉलोवर हैं।
सलमान नाम का यह शख्स एक अन्य व्यक्ति के साथ 10 फरवरी 2024 को हल्द्वानी पहुँचा था। इसके बाद से लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें वह लोगों को रुपयों की गड्डियाँ बाँटते हुए दिखता है। फेसबुक और इन्स्टाग्राम पर साझा किए गए ऐसे ही एक वीडियो में एक बच्चे के साथ यह पैसे से भरे हुए बैग के साथ दिखता है। इसमें एक बच्चा भी साथ में दिख रहा है।
नीचे लगे ट्वीट में इस वीडियो का एक हिस्सा देखा जा सकता है। असल में यह वीडियो 11 मिनट का है, जो कि ऑपइंडिया के पास मौजूद है। HYC के पेज पर से इस वीडियो की सेटिंग्स में बदलाव कर दिया गया है, जिसके कारण इसे यहाँ नहीं देखा जा सकता है।
#Haldwani का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें हैदराबाद की एक संस्था बनभूलपुरा इलाके में जाकर कैश में रुपए बांट रही है
वीडियो में सलमान एक युवक से मिलता दिख रहा है, जो बताता है कि उसके छोटे भाई को पुलिस दंगा करने के आरोप में ले गई है। उसे सलमान बच्चे के हाथ नोटों की गड्डियाँ दिलवाता है। इसके बाद वहाँ कई महिलाएँ इकट्ठा हो जाती हैं, जो बताती हैं कि उनका नुकसान हुआ है। उनको भी पैसे दिए जाते हैं। सलमान यह कहता है कि ये पैसे अल्लाह की तरफ से है।
आगे चलकर एक अन्य महिला बताती है कि उसके पति की मौत हो गई है। इस पर बैग से नोटों की कई गड्डियाँ निकालकर उसे भी देता है। यह इसी तरह कई लोगों को पैसा बाँटता है। इस दौरान बीच-बीच में यह हल्द्वानी प्रशासन की आलोचना भी करता है और अतिक्रमण हटाने को जुल्म बताता है।
इस वीडियो में ये बताने की कोशिश की गई है कि हल्द्वानी में मुस्लिमों को ही टारगेट किया गया है। इस वीडियो में प्रशासन की आलोचना की गई है। सलमान नाम का यह व्यक्ति जहाँ वर्तमान में लोगों को पीड़ित दिखाकर उनको पैसे बाँट रहा है और प्रशासन की आलोचना कर रहा है।
जब हल्द्वानी में दंगाइयों ने पुलिस और प्रशासन पर हमला करके उनकी गाड़ियाँ, ट्रेक्टर और जेसीबी जलाई थीं तब यह इसे मस्जिद शहीद करने का परिणाम बता रहा था। यहाँ यह भी बात देने वाली है कि जिस मस्जिद और मदरसे को गिराने पर दंगा भड़का वह पूर्ण रूप से अवैध था और उसको गिराने के लिए उसके पास न्यायालय की अनुमति थी।
इसमें दंगे को मस्जिद पर सरकार के एक्शन का रिएक्शन बताया जा रहा था। इस पोस्ट के कमेंट्स में कट्टरपंथी मुस्लिम इस दंगे का समर्थन कर रहे हैं। एक अन्य वीडियो में सलमान पुलिस पर आरोप लगाता दिखता है कि हल्द्वानी में लोगों पर मशीनगन से गोलियाँ चलाई गई थीं। वह दावा करता है कि यह बात मीडिया छुपा रहा है।
हल्द्वानी दंगे से इतर भी इसकी कट्टरता की पोस्ट सामने आई हैं। एक वीडियो में वह हाल ही में गिरफ्तार किए गए जहरीले भाषण वाले मौलाना सलमान अजहरी का समर्थन करता है और उसका भड़काऊ भाषण दोहराता है। यह इस वीडियो में वह कई भड़काऊ बाते करता है और कहा कि ‘अभी कुत्तों का वक्त है, हमारा दौर आएगा।’
सलमान की सोशल मीडिया देखने से पता चलता है कि यह हैदराबाद में रहता है और वहीं से अपना काम करता है। इसकी फोटो और वीडियो AIMIM के मुखिया एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी और हिन्दूविरोधी भड़काऊ भाषण देने अकबरुद्दीन ओवैसी के साथ भी हैं। तेलंगाना विधानसभा चुनाव का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यह AIMIM के समर्थन की बात करते दिखता है।
ओवैसी बंधुओं के साथ सलमान और साथी
इसके सोशल मीडिया पोस्ट देखने पर पता चला है कि यह 10 फरवरी 2024 यानी हल्द्वानी में दंगे के दो दिन बाद यहाँ पहुँचा था। एक वीडियो में सलमान बताता है कि वह पिछले 4 दिनों से हल्द्वानी में है और दंगों के बीच अपना काम कर रहा है। इसके विषय सोशल मीडिया पर उत्तराखंड पुलिस से शिकायत भी की गई थी।
इसके बाद यह दावा किया गया था कि इसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, इसने खुद ही बुधवार (21 फरवरी 2024) को एक वीडियो डाल कर कहा है कि उसे कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसे फिर छोड़ दिया गया। इस वीडियो में उसने कहा है कि अब हालत सामान्य हैं।
गौरतलब है कि सलमान और उसका साथी सैयद अयूब पहले भी पैसा इकट्ठा करके गड़बड़ी करने के मामले में पकड़े जा चुके हैं। वह इससे पहले 2020 में सोशल मीडिया पर पैसे माँगने के आरोप में पकड़े गए थे। उन्होंने जरूरतमंदों के नाम से पैसा इकट्ठा किया था। इसको लेकर उनके खिलाफ हैदराबाद के चंद्रयानगुट्टा थाने में FIR दर्ज की गई थी। उनको गिरफ्तार भी कर लिया गया था।
हल्द्वानी दंगा
बता दें कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस की टीम एक अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद और मदरसे को गिराने गए थे। इस कार्रवाई को रोकने के लिए यहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने पुलिस प्रशासन पर हमला कर दिया। यहाँ मौजूद पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर बरसाए गए और उन्हें जलाकर मारने की कोशिश की गई।
मुस्लिम भीड़ ने यहाँ नगर निगम समेत कई गाड़ियों में आग लगा दी और कई घंटे तक हिंसा की। प्रशासन ने इसके बाद यहाँ कर्फ्यू लगा दिया था। अब पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 68 दंगाई गिरफ्तार किए हैं। दंगे का मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक अब भी फरार है जिसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।
वहीं इस दंगाइयों के पोस्टर भी शहर भर में लगाए गए हैं। इस दंगे के सरगना अब्दुल मलिक और उसके बेटे के घर को पुलिस ने कुर्क कर लिया है। ऑपइंडिया ने इस दंगे के दौरान ग्राउंड पर जाकर बताया था कि यहाँ असल में क्या हुआ था और इस्लामी भीड़ ने कैसे यहाँ हिंसा की थी।
देश में ‘किसान आंदोलन 2.0’ शुरू हो चुका है। पंजाब से निकले किसानों को हरियाणा की सीमा पर ओका गया है। ये किसान दिल्ली आना चाहते हैं। किसानों ने JCB से लेकर मिट्टी खोदने वाली मशीनें तक अपने पास रखी हैं। अब तक 3 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है। हरियाणा का शम्भू बॉर्डर और दाता सिंह-खनौरी बॉर्डर को किसानों ने अड्डा बना रखा है। अब धारदार हथियारों से इन किसानों द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमले की भी खबर है।
खुद हरियाणा पुलिस ने इस संबंध में जानकारी दी है। एक वरिष्ठ महिला अधिकारी ने बताया, “किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा बुधवार (21 फरवरी, 2024) को दाता सिंह-खनौरी बॉर्डर पर पुलिसकर्मियों को घेर कर पुलिस नाके के आसपास भारी मात्रा में मिर्च पाउडर डाल कर आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा न सिर्फ भारी पत्थरबाजी की गई, बल्कि लाठी और गँड़ासा लेकर हमला भी किया गया। इस हमले में लगभग 12 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।”
हरियाणा पुलिस ने ये भी बताया है कि ज़हरीले धुएँ के कारण नाके के आसपास पुलिसकर्मियों को न सिर्फ साँस लेने में तकलीफ हुई, बल्कि उन्हें देखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों से हरियाणा पुलिस ने ऐसा न करने की अपील करते हुए कहा कि ज़हरीले धुएँ से विजिबिलिटी कम हो जाती है और पुलिसकर्मियों द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास बाधित होता है। पुलिस ने कहा कि ऐसा करने से दोनों पक्षों के लिए जोखिम बढ़ जाता है और किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है।
#WATCH | At the Data Singh-Khanori border, the protesters surrounded the police personnel from all sides and burned stubble by pouring chilli powder in it, attacked the policemen using sticks and maces along and also pelted stones. About 12 policemen were seriously injured. We… pic.twitter.com/4q68gfDXQT
हरियाणा पुलिस ने किसानों से कहा है कि वो कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और शांति बनाए रखें। किसान नेताओं ने धमकाया है कि उन्हें दिल्ली नहीं आने दिया गया तो वो चुनाव में भी भाजपा नेताओं को अपने गाँव में नहीं आने देंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसमें राजनीति खेलने उतर गए हैं और कह रहे हैं कि किसानों को दिल्ली आने देना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि SKM (संयुक्त किसान मोर्चा) गुरुवार को बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा।
किसान आंदोलन 2.0 चर्चा में है। दरअसल, साल 2020 से साल 2021 के आखिर तक दिल्ली में देश भर के किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। करीब डेढ़ तक चले प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने तीन कानूनों को वापस ले लिया था। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के किसानों ने दिल्ली को लगभग बंधक लिया था। अब उन प्रदर्शनों को दोहराने की कोशिश में पंजाब के किसान फिर से दिल्ली का रूख कर चुके हैं। हरियाणा के बॉर्डर पर पंजाब से आ रहे किसानों को शंभू प्वॉइंट पर रोक लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली में उनके घुसने की कोशिशों को विफल किया जा रहा है। इस बीच, केंद्र सरकार पूरी तरह से सक्रिय है और किसानों से लगातार बातचीत कर रही है। वहीं, 20 फरवरी 2024 को एक यू-ट्यूब चैनल से हरियाणा के किसानों ने किसान आंदोलन 1.0 को लेकर गहरी नाराजगी जताई है।
यूट्यूब चैनल न्यूज व्यूज से बातचीत में हरियाणा के किसानों ने पंजाब के किसानों को लेकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पंजाब से आए लोगों ने हरियाणा के युवाओं को उनकी राह से भटका दिया। उन्होंने उन्हें बहकाया और नशे का आदी बना दिया। किसानों ने बताया, “किसान आंदोलन 1.0 से पहले हरियाणा के युवाओं में ‘चित्ता’ का कोई नशा नहीं था। वो जानते भी नहीं थे कि ये आखिर है क्या चीज? हमारे बच्चे उन प्रदर्शनों के दौरान नसे के आदी बन गए। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?” जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि हेरोइन के नशे को ‘चित्ता’ कहते हैं, जो पंजाब में काफी गहरे तक जड़ें जमा चुका है।
उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया
मीडिया से बातचीत करते हुए हरियाणा के किसाों ने कहा कि ये प्रदर्शन सिर्फ आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं। उन किसानों में से एक ने कहा, “उन्हें विदेशों से पैसे मिल रहे हैं। देश विरोधी गतिविधियाँ हो रही हैं। लेकिन हम वो सब फिर से नहीं (जो पिछली बार हुआ-नशे का फैलाव इत्यादि) होने देंगे। उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया। ऐसे में इस बार हम उन्हें समर्थन नहीं दे रहे।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पंजाब में अपने प्रधानमंत्री को खतरे में डाला, लेकिन ऐसा फिर से नहीं होगा।”
हरियाणा के किसानों ने प्रदर्शनकारियों के लगातार दिल्ली जाने की बात पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “सरकार जो कह (सरकार का ऑफर) रही, वो मान नहीं रहे। वो सिर्फ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ की रट लगाए पड़े हैं।” उन्होंने अन्ना आंदोलन के समय को याद करते हुए आगे कहा, “उस समय जो भी प्रदर्शन वाली जगह जा रहे थे, उनकी जाँच हो रही थी। सबकुछ आराम से चल रहा था। मैं गारंटी लेकर कहता हूँ कि शराब और ड्रग्स की सल्पाई रोक दी जाए, फिर देखो 4 दिन में सारे गायब हो जाएँगे।”
इस दौरान जब पत्रकार ने उसके पूछा कि किसान सरकार से भिड़ने की प्लानिंग कर चुके हैं, वो उन्हें रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेटिंग को उखाड़ने की तैयारी कर चुके हैं, इस पर किसान ने कहा, “अगर कोई देश में अव्यवस्था फैलाना चाहता है, तो सरकार भी कुछ सुरक्षा के कदम उठाती है। अगर उनके लिए रोड खोल दिए जाए, तो वो (प्रदर्शनकारी) उस रोड को जाम कर देंगे और अर्थव्यवस्था को ठप कर देंगे। इस क्षेत्र की हजारों कंपनियाँ ने इस इलाके को छोड़ (पहले किसान आंदोलन के समय) दिया। हजारों लोग बेरोजगार हो गए। उन (प्रदर्शनकारियों) ने पूरे इलाके को बर्बाद कर दिया। जो कंपनियाँ वापस नहीं आई, जो यहाँ से चली गई। हरियाणा के लोग एक बार फिर से इसके लिए (इन प्रदर्शनों के लिए, नुकसान के लिए) तैयार नहीं हैं।”
हरियाणा के किसान बोले, देश की अर्थव्यवस्था में सभी भागीदार
पत्रकार ने जब किसानों ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान ‘अन्नदाता’ हैं, तो हरियाणा के किसानों ने जवाब में कहा, ‘हर कोई दाता है। ड्राइवर भी दाता है। घर बनाने वाला मजदूर भी दाता है। अर्थव्यवस्था में सभी लोग अहम किरदार निभाते हैं। हर किसी का रोल अलग-अलग है।’ एक किसान ने इंडी गठबंधन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘विपक्षी गठबंधन और कॉन्ग्रेस ने I.N.D.I.A. नाम रख लिया, इसका मतलब ये नहीं कि वो चुनाव जीत ही जाएँगे।’ किसान ने आगे कहा, “सोचिए, अगर झारखंड देश को कोयला देना बंद कर दे, तो ये तथाकथित ‘पंजाब के अन्नदाता’ अपना कोई काम नहीं कर पाएँगे।”
किसानों ने कहा कि सरकार ने चौथे दौर की वार्ता के बाद एक बेहतरीन प्लान (4 फसलों पर 5 साल के लिए गारंटी) बनाया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उसे नकार दिया। उन्होंने कहा, “वो देश भर में अगले 15 दिनों में अव्यवस्था फैलान चाहते हैं। प्रदर्शन करने वाले लोग पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। वो सिर्फ वोट काटने आए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में जो मजदूर किसानों के खेतों में काम करते हैं, क्या उनके लिए भी इन लोगों (प्रदर्शनकारियों) ने पेंशन की माँग की? ये मामला सिर्फ किसानी का नहीं है। पंजाब में सबसे ज्यादा बंधुआँ मजदूर मिले हैं, उनके लिए क्या माँग कर रहे हैं?”
प्रदर्शन के दौरान किसानों की मौत से जुड़े सवाल पर किसान ने कहा, “हमारे गाँव में भी 4 लोगों की मौत हुई। अगर उनकी जान शराब पीकर या हार्ट अटैक से गई है, तो उन्हें शहीद नहीं कर सकते। एक काम करिए, आप 2 लाख लोगों को इकट्ठा करिए, कम से कम 4 लोग प्राकृतिक तरीके से दम तोड़ देंगे, इसका मतलब ये नहीं है कि उन सभी को शहीद बोला जाए।”
सभी तबकों का ध्यान रखे सरकार
एमएसपी के सवाल पर किसान ने कहा, “सरकार ने फसलों पर एमएसपी दी, जिसकी उसे जरूरत लगी। सरकार को पूरे देश के बारे में सोचना पड़ता है। सरकार को समाज के हर तबके के लिए काम करना पड़ता है। हर सवात किसानों के लिए फायदा चाहता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि समाज के अन्य वर्गों को अनदेखा कर दिया जाए।”
‘प्रधानमंत्री कोई तानाशाह नहीं’
इस दौरान पत्रकार ने जब पूछा कि कॉन्ग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहती है, तो किसानों ने कहा, “अगर किसी तरह की तानाशाही होती, तो किसान साल भर से ज्यादा समय नहीं बैठ पाते। लोगों को चौटाला का राज याद है? 50 गोलियाँ और 100 पुलिस वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन को खत्म कर देती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर पीएम मोदी तानाशाह होते, तो वो उन्हें पंजाब के एक फ्लाइओवर पर नहीं रोक पाते। क्या तुम्हें लगता है कि पीएम मोदी के पास ताकत नहीं है?” किसानों ने आरोप लगाया कि ये प्रदर्शन सिर्फ एक ही परिवार को फायदा पहुँचाने के लिए जुटे हुए हैं, ऐसे लोग भ्रष्टाचारी हैं और भ्रष्टाचार का समर्थन करते हैं।
किसानों ने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में जो जिस लायक है, उसे उस तरह का काम मिल रहा है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक विचारधारा का है। किसानों ने कहा, “कोई काबिल है, तो उसे काम मिल रहा है। ये सरकार ऐसी नहीं है, जिसमें सिर्फ घूसखोरों को नौकरी मिले।”
राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को न मिले अनुमति
एक किसान ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो लोग भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहिए। हमारे सामने कोई खालिस्तानी नारे लगाएगा या हमारे प्रधानमंत्री के लिए अभद्र बातें करेगा, तो हम उसे छोड़ेगे नहीं। राष्ट्र ध्वज और लाल किला हमारे गर्व हैं। हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि कोई लाल किले पर जाए और अपनी पसंद का झंडा फहरा आए।” उन किसानों में से एक ने कहा, “हरियाणा के किसान इस बात को समझ चुके हैं कि पंजाब सरकार हमारे साथ धोखा कर रही है। वो हमारा इस्तेमाल कर रही है। वो हमें सामने रखकर सबकुछ करना चाहती है, पता है क्यों? क्योंकि हम लोग इमोशनल हैं।”
किसान आंदोलन 1.0 के दौरान हरियाणा के युवा हुए बर्बाद
किसान ने आगे कहा, ‘मैंने एक लोकल नेता का इंटरव्यू सुना, उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे नशेड़ी बन गए। पिछले प्रदर्शन से पहले कोई भी लड़का ‘चिट्टा’ का नशेड़ी नहीं था। उन्हें तो पता भी नहीं था कि ये होता क्या है? हमारे बच्चे इन प्रदर्शनों के दौरान नशे में डूब घए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हम उन्हें इसलिए नहीं सपोर्ट कर रहे, क्योंकि हमें अपने बच्चों को नशे से बचाना है। ‘
उन्होंने कहा कि अगर इन प्रदर्शनों के दौरान हरियाणा के किसी युवा की जान जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? “वो लोग तो उसे शहीद बता देंगे, लेकिन किसान घोषित कर देने भर से हम उसे वापस नहीं ला पाएँगे न?” उन्होंने आगे कहा, “प्रदर्शनकारी पेंशन चाहते हैं। वो लोन माफी चाहते हैं। ठीक है, हम ये बात समझते हैं। लेकिन आम नागरिकों पर इसके बदले में जो 14-20 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा, उसका क्या? हमें लिखित में दें कि टैक्स पेयर्स की पैसों से लोनमाफी नहीं दी जाएगी, फिर उन लोगों को एमएसपी दे दें।”
एक किसान ने कहा, “पिछली बार उन लोगों ने (पंजाब के किसानों ने) कहा था कि वो SYL मुद्दे पर भी बातचीत करेंगे, लेकिन उन्होंने नहीं किया। उन्होंने फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। पहले वो पानी समझौते के मुद्दे पर बात करें, फिर हम प्रदर्शनों के बारे में बात करेंगे। “
केंद्र सरकार और किसानों के बीच पाँचवें दौर की वार्ता जल्द
बता दें कि किसानों के साथ चौथे दौर की वार्ता में केंद्र सरकार ने रविवार (18 फरवरी 2024) को नए प्रस्ताव दिए थे, जिसके बाद किसानों ने कहा था कि वो बातचीत करके सरकार को सूचित कर देंगे। सरकार ने अपनी तरफ से चौथे दौर की वार्ता के दौरान जो प्रस्ताव दिया था, उसमें एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट की बात कही थी। जिसमें ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होनी थी। इसमें खरीद की लिमिट भी नहीं रहेगी। सरकार ने इसमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास को जोड़ने और खरीद के लिए पाँच साल की गारंटी की बात कही थी।
इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। हालाँकि बाद में किसानों ने कहा था कि उन्हें एमएसपी से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार ने एक बार फिर से किसानों को वार्ता के लिए बुलाया है।
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राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को न तो कोई खास जन-समर्थन मिल रहा है, न ही मीडिया में कवरेज। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि वो बीच में ही यात्रा छोड़-छाड़ के विदेश यात्रा पर निकल सकते हैं। खबरों में कहा जा रहा है कि राहुल गाँधी अगले हफ्ते ही इंग्लैंड की यात्रा पर निकल सकते हैं। चर्चा है कि इंग्लैंड में वो 10 दिन गुजारेंगे, इसी बीच उनका कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का दौरा भी प्रस्तावित है। बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर राहुल गाँधी की बहन प्रियंका तक उनकी यात्रा में शामिल नहीं हुईं।
‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ ने अपनी खबर में बताया है कि राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को ठंडी प्रतिक्रिया मिलने की वजह से वो विदेश जा रहे हैं। राहुल गाँधी की ये यात्रा शुरू होने के साथ ही विवादों में है। यात्रा शुरू होने ही वाली थी कि उधर मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मिलिंद देवड़ा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। मिलिंद देवड़ा ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का दामन थाम लिया। अब पूर्व CM अशोक चव्हाण भी भाजपा में आ गए हैं। देवड़ा वाले झटके के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया।
इस तरह I.N.D.I. गठबंधन को भी झटका लगता रहा। TMC की सत्ता वाले पश्चिम बंगाल में राहुल गाँधी के पहुँचते ही गठबंधन टूट गया। बिहार में महागठबंधन की एक बड़ी रैली प्रस्तावित थी, लेकिन यहाँ राहुल गाँधी के पहुँचने से पहले ही नीतीश कुमार की जदयू ने पाला बदल लिया और भाजपा के साथ मिल कर सरकार बना ली। राजद विपक्ष में आ गई। गाँधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी में ‘वापस जाओ’ नारे के साथ राहुल गाँधी का स्वागत हुआ, यूपी में उनकी यात्रा में भीड़ नहीं जुटी सो अलग।
चुनावी तैयारी-राहुल के कैंब्रिज में लेक्चर 5 दिनों तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर लगेगा ब्रेक…
ऊपर से राहुल गाँधी के एक के बाद एक विवादित बयानों के कारण कॉन्ग्रेस को लेकर नकारात्मक माहौल ही बना। उन्होंने अभिनेत्री ऐश्वर्या राय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। साथ ही काशी के युवकों को शराबी व नशेड़ी बता दिया। कॉन्ग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ 26 फरवरी से लेकर 1 मार्च तक रुकी रहेगी। उन्होंने बताया है कि इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण चुनावी बैठकें होनी हैं, जिनमें राहुल गाँधी की मौजूदगी ज़रूरी है।
कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी इन दिनों न्याय यात्रा पर हैं और आए दिन उनके भाषणा की कोई न कोई क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है। जनता से मुखातिब होते हुए वह कहीं से भी कोई भी उदाहरण देने लगते हैं जिसके कारण उनका मजाक भी बनता है तो कई बार बवाल भी होता है। हाल की बात करें तो उन्होंने अपने भाषण को दमदार दिखाने के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन जैसी नामी हिरोइन का नाम ले लिया। शायद उन्हें लगा हो कि ऐश्वर्या का नाम लेने से जनता का ध्यान उनकी ओर खिंचेगा। लेकिन उन्हें ये एहसास नहीं हुआ कि इससे ऐश्वर्या राय का कितना अपमान हो रहा है।
अपनी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के लिए राहुल गाँधी ने जनता से कहा कि मीडिया हाउस जनता की आवाज को नहीं सुनाएँगे। उन्होंने कहा, “ये मीडिया हाउस… अडानी जी के अंबानी जी के हैं। ये किसान के बारे में, मजदूर के बारे में, गरीब के बारे में ये कभी नहीं दिखाने वाले। ये कर ही नहीं सकते…इनके मालिक कहते हैं भईया नहीं। हिंदुस्तान के गरीबों के बारे में मीडिया में नहीं दिखाना। मीडिया पूरे दिन नरेंद्र मोदी को दिखाता है और फिर कभी आपको ऐश्वर्या राय नाचती हुई दिखेगी। दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन बल्ले-बल्ले करते हुए निकलेगा।”
राहुल गाँधी ऐसा कहते हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल लोगों के प्रति अपनी घृणा दिखा रहे थे। लेकिन यह समझ नहीं आया कि आखिर उन्होंने ऐश्वर्या का नाम क्यों लिया। ऐश्वर्या तो उस कार्यक्रम में शामिल तक नहीं थीं। अगर उन्हें उदाहरण देना ही था तो कार्यक्रम में शामिल लोगों का भी दिया जा सकता है। मगर, नहीं। राहुल गाँधी के मुँह पर पिछले कुछ दिनों से अपमानित करने के लिए ऐश्वर्या राय का नाम बार-बार आ चुका है।
वैसे वो अकेले नेता नहीं है जो अपने भाषणों और बयानों से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए इस तरह बॉलीवुड की महिला कलाकारों के नाम का इस्तेमाल उनके प्रोफेशन, स्किल या फिर उनकी रंग रूप के कारण करते हों।
25 लाख रुपए में रिजॉर्ट में आई हिरोइन तृषा- तमिलनाडु नेता ने बयान देकर माँगी माफी
सबसे हालिया मुद्दा तो दक्षिण के तमिलनाडु नेता से जुड़ा है। वहाँ की हिरोइन तृषा को लेकर नेता एवी राजू ने कहा कि एक रिजॉर्ट में एंटरटेनमेंट के लिए एक विधायक ने जवान लड़की को मँगाया था। तब तृषा कृष्णन 25 लाख रुपए में वहाँ आई थीं। एवी राजू के इस बयान पर तो एक्ट्रेस ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई की भी बात कही है। वहीं नेता ने ऐसी प्रतिक्रिया देख उनसे माफी माँग ली है।
लेकिन, सवाल है कि क्या ये राजनीति के लिए हिरोइनों को अपमानित करने का कल्चर ऐसे ही चलता रहेगा।
जया प्रदा के अंडरगार्मेंट पर आजम खान का बयान
साल 2019 में समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान ने अभिनेत्री रहीं जया प्रदा की ओर इशारा करते हुए उनके अंडरगार्मेंट्स पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने शाहबाद में आयोजित जनसभा में आजम खान ने भाजपा की प्रत्याशी और पूर्व सांसद जया प्रदा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आजम ने जया प्रदा की तरफ इशारा करते हुए कहा था, “उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लग गए। मैं तो 17 दिन में ही पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है, वो भी खाकी रंग का है।“
‘जया प्रदा का काफिला निकला…रामपुर की शामें रंगीन हो जाएगी’
समाजवादी पार्टी के ही नेता फिरोज खान ने भी जया प्रदा पर मार्च 2019 में अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि एक बार वह बस से कहीं जा रहे थे तो वहाँ से जया का क़ाफ़िला गुज़रा, जिसके कारण जाम लग गया, तो उन्होंने बस से उतर के उन्हें देखने की कोशिश की और ये भी सोचा कि जाम खुलवाने के लिए कहीं वो ठुमके न लगा दें। अपनी ओछी सोच और जया पर ऐसी अभद्र टिप्पणी करने के बाद उन्होंने कहा कि रामपुर की शामें अब रंगीन हो जाएँगी, जब चुनावी माहौल चलेगा।
‘हेमा मालिनी के गाल जैसी सड़क’
इसी तरह कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा ने भी एक बार हेमा मालिनी के गालों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने सड़कों पर गड्ढे देखने के बाद कहा था कि भोपाल की सड़कों में गड्ढे देख उन्होंने कहा था– सड़कें कैलाश विजयवर्गीय के गाल जैसी हो गई हैं। 15-20 दिन में सड़क चकाचक हो जाएगी। हेमा मालिनी के गाल जैसी हो जाएगी।”
फिल्मी हिरोइनें भी हैं किसी की बेटी-बहन
आप देखिए कि ये सारे राजनेताओं ने जो भी बयान दिए वो सम्मान देने के संदर्भ में नहीं हैं। जबकि, चाहे ऐश्वर्या राय हों, हेमा मालिनी हों, जया प्रदा हों या फिर दक्षिण की तृषा कृष्णन हों… ये सारी महिलाएँ अपने क्षेत्र में मेहनत करके नाम कमाकर एक ऐसी ऊँचाई तक पहुँचीं हैं कि देश का बच्चा-बुजुर्ग सब इन्हें जानते हैं। और उनकी इसी उपलब्धि का फायदा उठाकर ये नेता जनता से उनका जिक्र करते हैं ताकि एक संवाद स्थापित हो… अपमान करते समय शायद वो भूल जाते हैं कि वो लोग खुद अपना क्षेत्र को यदि छोड़ दें तो किस स्तर पर आते हैं।
राहुल गाँधी को पूरा देश जानता है कि वो समय-समय पर नारी सम्मान की बातें करते रहते हैं। अगर कोई घटना भाजपा प्रदेश में घटित हुई है तो तुरंत नारी को न्याय दिलाने वो उस प्रदेश में पहुँच जाते हैं, लेकिन जब बात अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्य की आती है तो वही राहुल गाँधी चुप हो जाते हैं।
इसी तरह जब बात राजनीति की आती है तो भी वो भूल जाते हैं कि अपने घोषणा पत्रों में जो वो नारियों के सम्मान की बातें करती हैं उन नारियों में ऐश्वर्या राय से लेकर तृषा कृष्णन भी आती हैं। ये महिलाएँ भी किसी की माँ, बहन और बेटी हैं। इनका नाम भी मेहनत करने से ही ऊँचाई पर पहुँचा है। सार्वजनिक स्थलों से इस तरह उनका नाम अपमानजनक संदर्भों में उछालना आखिर कितना सही है। क्या ऐसी ही बातें ये राजनेता अपने घरों की बेटियों-बहनों के बारे में सुन पाएँगे।
आज जिस तरह से राहुल गाँधी के बयान का विरोध हो रहा है उससे यही पता चलता है कि जिस जनता का प्रतिनिधि करने वो चले हैं वो उनसे ज्यादा समझदार है… जो उन्हें बता रही है कि ऐश्वर्या राय की फिल्म जगत में उपलब्धि उनकी राजनीति क्षेत्र में हासिल उपलब्धि से कहीं ऊपर है। कम से कम उन्हें अपनी बात कहने के लिए इतने नीचे स्तर तक नहीं गिरना पड़ता। लोग उन्हें जानते हैं, उनके काम की सराहना करते हैं, कुछ उन्हें आदर्श मानते हैं और कुछ उनके संघर्ष से सीखते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मदरसा में पढ़ाने वाले एक मौलाना द्वारा अपनी छात्रा से रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र महज 8 वर्ष है। मौलाना आब्दीन के बच्ची की माँ से भी अवैध संबंध बताए जा रहे है। दावा है कि पीड़िता की माँ को भी अपनी बेटी के साथ हो रहे दुष्कर्म की जानकारी थी। इस मामले में पीड़िता के अब्बा ने मौलाना और उसके भाई के खिलाफ शिकायत की है।
इस मामले में पुलिस ने सोमवार (19 फरवरी 2024) को केस दर्ज करके मौलाना आब्दीन और बच्ची की माँ को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, आब्दीन का भाई अरशद फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता बच्ची का अब्बा है, जो इसी थाना क्षेत्र का निवासी है। शिकायतकर्ता ओमान में नौकरी करता है। वह एक बार में 5 माह के लिए ओमान जाता है। इस बार जाने से पहले उसने अपनी बेटी का एडमिशन अपने घर से थोड़ी ही दूर स्थित न्यू हैदरगंज क्षेत्र में बने इस्लामिया शम्सुल उलूम मदरसे में करवा दिया था।
पीड़िता के पिता का आरोप है कि इस मदरसे में मौलाना आब्दीन बच्चों को दीनी (इस्लाम की) तालीम देता था। कुछ समय बाद मौलाना बच्ची के घर भी आने-जाने लगा। कुछ समय बाद मौलाना आब्दीन ने उनकी बीवी को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। थोड़े दिन बाद शिकायतकर्ता की बीवी मौलाना के ही साथ रहने लगी। बाद में महिला ने अपनी बेटी को मदरसे के हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया।
नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना के सम्बन्ध में थाना मलिहाबाद पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत है, 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।
यहाँ पर मौलाना ने 8 साल की इस बच्ची के साथ कई बार बलात्कार किया। जब बच्ची अपनी माँ को ये सारी बातें बताती थी तो वह उलटे उसकी पिटाई कर देती थी। शिकायतकर्ता का तो यहाँ तक आरोप है कि उसकी बीवी ही अपनी बेटी को मौलाना के पास भेजा करती थी। काफी समय बाद जब शिकायतकर्ता ओमान से लौटा तो बेटी ने उसे सारी बात बताई।
इसके बाद पीड़िता के अब्बा ने पुलिस में तहरीर दी और मौलाना आब्दीन के साथ उसके भाई अरशद को भी घिनौने कृत्य में शामिल बताया। शिकायतकर्ता ने अपनी बीवी पर भी रेप में मौलाना का साथ देने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही बच्ची के पिता को जान से मारने की धमकी देने वाले मौलाना के अन्य भाइयों अलीम, शलीम, शमीम, हमीम और शाद को भी पुलिस ने आरोपित बनाया है।
पंजाब से हजारों की संख्या में किसान दिल्ली के लिए मार्च कर गए, जिसे किसान आंदोलन 2.0′ कहा जा रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर चले इन किसानों को हरियाणा के शम्भू और खनौरी बॉर्डर पर रोका गया है, जहाँ प्रदर्शनकारी JCB से लेकर मिट्टी खोदने वाली मशीनें तक लेकर आ गए। अब अफवाह उड़ाई जा रही है कि आंदोलन में 2 किसानों की मौत हो गई है। हालाँकि, हरियाणा पुलिस ने साफ़ कर दिया है कि आंदोलन में किसी किसान की मौत नहीं हुई है।
हरियाणा पुलिस ने कहा, “अभी तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार (21 फरवरी, 2024) को ‘किसान आंदोलन’ में किसी भी किसान की मृत्यु नहीं हुई है। यह मात्र एक अफवाह है। दाता सिंह-खनौरी बॉर्डर पर 2 पुलिसकर्मियों तथा एक प्रदर्शनकारी के घायल होने की सूचना है जिनका उपचार चल रहा है।” किसान नेता किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने दावा किया था कि उनके एक साथी की इस आंदोलन में मौत हो गई है। भारी-भड़कम मशीनों के साथ किसान बॉर्डर पर जमे हुए हैं।
हरियाणा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की भी अपील की है। उधर निहंग किसान भी हरियाणा में बैरिकेडिंग के पास पहुँच कर उसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इधर खबर ये है कि किसान आंदोलन में ड्यूटी पर लगे एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई है। रोहतक के रहने वाले सब-इंस्पेक्टर विजय कुमार को फतेहाबाद टोहाना के पंजाब बॉर्डर क्षेत्र में गश्त की जिम्मेदारी दी गई थी। ड्यूटी के दौरान ही उनके सीने में तेज़ दर्द उठा, जिसके बाद वो घर चले गए।
हरियाणा पुलिस ने ‘किसान आंदोलन’ में किसान की मौत की अफवाहों को नकारा
मंगलवार की शाम को उनकी मौत हो गई। इस आंदोलन में पुलिसकर्मियों की मौत का ये पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी 2 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। रोहतक के अर्बन स्टेट के रहने वाले विजय इससे पहले नूहं में तैनात थे। वहीं हरियाणा की सीमाओं पर पुलिस और किसानों में झड़प जारी है। पुलिस ने रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। किसान नेताओं का कहना है कि 25 किसान घायल भी हुए हैं। हिंसा के बावजूद वो अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बता रहे हैं।
कर्नाटक में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC) के लिए राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने एक फरमान जारी किया है। राज्य में काम करने वाली MNCs को नोटिस बोर्ड पर यह जानकारी देनी होगी कि उनके यहाँ कितने कन्नड़ काम करते हैं। कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं करने वाली MNC कर्नाटक में काम नहीं कर पाएँगी और उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में संस्कृति मंत्री शिवराज तंगादगी ने विधान परिषद में बुधवार (21 फरवरी 2024) को यह ऐलान किया। तंगादगी ने कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने के लिए लाए गए विधेयक पर चर्चा के दौरान यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य में नियम बनाए जाएँगे और इसके लिए कमिटी बनाई जा चुकी है। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें टेक कंपनियों को अभी शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “इस बात पर विचार हुआ है कि यहाँ (कर्नाटक में) काम करने वाली MNC अपने यहाँ काम करने वाले कन्नड़ लोगों की जानकारी नोटिस बोर्ड पर दर्शाएँ। हम इसके लिए नियम बनाएँगे। इसके लिए एक कमिटी बनाई गई है और मैं इसका चेयरमैन हूँ। इसमें कई विभागों के सचिव हैं। वे कई सुझाव दे रहे हैं। हम MNC और बाकी कम्पनियों के लिए कानूनों पर चर्चा करेंगे और फिर नियम बना देंगे।”
तंगादगी ने कहा कि जो कम्पनियाँ इन नियमों को नहीं मानेंगी, उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कन्नड़ भाषा में न्यायिक काम हो, इसके लिए भी सरकार प्रयासरत है। उन्होंने वकीलों से अपील की कि वो कोर्ट में कन्नड़ में बहस करें। साथ ही निर्णय भी कन्नड़ में हों। मंत्री ने यह भी कहा कि एक एप बनाया जा रहा है, जिस पर कन्नड़ भाषा का अपमान होने पर शिकायत की जा सकती है।
गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा इस समय एक ऐसे विधेयक पर चर्चा कर रही है जिसके अंतर्गत कर्नाटक में प्रतिष्ठानों को अपने नाम का 60% हिस्सा कन्नड़ भाषा में रखना होगा। यह विधेयक कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बजट पेश करते हुए सामने रखा था। यह बिल बीते दिनों हुए कुछ प्रदर्शनों के बाद आया है।
बीते दिनों कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए कुछ प्रदर्शनों में कई बड़ी कम्पनियों के साइनबोर्ड तोड़ दिए गए थे क्योंकि उन पर कन्नड़ नहीं लिखी थी। इस प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ करने वाले लोगों पर दर्ज केस रद्द करने की माँग भी की गई है।