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‘108 अवैध मजारें जमींदोज, बाकी के लिए बुलडोजर तैयार’: गुजरात के गृह मंत्री ने याद दिलाया- कॉन्ग्रेस ने कैसे मंदिर से हटवाई थी मूर्तियाँ

गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा है कि उनके राज्य में अब तक 108 अवैध मजार जमींदोज कर गई हैं। उन्होंने जूनागढ़ के ऊपरकोट में बनाई गई अवैध मजारों के गिराए जाने की बात बताते हुए कहा- “हमारा बुलडोजर हर उस इमारत को गिराने के लिए तैयार है जो कि साजिशन बनाई गई है।”

गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने बुधवार (21 फरवरी, 2024) को गुजरात विधानसभा में यह बातें कही। वह गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए बजट को लेकर गुजरात विधानसभा में हो रही चर्चा में हिस्सा ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला भी बोला और अपनी सरकार के कामकाज के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, “जो बिंदु MLA अमित शाह भाई के द्वारा यहाँ उठाया गया कि कॉन्ग्रेस के राज के दौरान अहमदाबाद के जमालपुर में एक जैन मंदिर से मूर्तियों को हटाया गया था। अब दादा (सीएम भूपेन्द्र पटेल) का बुलडोजर राज्य के हर कोने में घूम रहा है जिससे कोई भी मंदिर या देवस्थान साजिशन किसी जगह से हटाया ना सके। अब किसी को नहीं मालूम कि यह बुलडोजर कहाँ जाएगा।”

इसके बाद उन्होंने बताया कि राज्य में 108 अवैध मजार को ढहाया गया है जो कि अतिक्रमण करके बनाई गई थीं। मंत्री हर्ष सांघवी ने बताया, “अब तक 108 मजार राज्य में गिराई गई हैं और राज्य की संपत्तियों को मुक्त कराया गया है। सोमनाथ के पास किया गया अवैध कब्जा भी हटाया गया है। दादा का बुलडोजर 20 फीट चौड़ी गली और 80 मीटर चौड़ी रोड में घुस सकता है।”

उन्होंने इस दौरान जूनागढ़ के ऊपरकोट किले में बनाई गई अवैध मजारों के गिराए जाने की बात भी की। मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा, “कोई नहीं जानता कि ऊपरकोट में इतनी मजारें कहाँ से आ गईं। इतनी जल्दी यहाँ मजार कैसे बन सकती हैं।”

जूनागढ़ किले के पास से हटवाई गई थी अवैध मजारें

गौरतलब है कि मई 2023 में राज्य सरकार जूनागढ़ के इस किले में सैकड़ों अवैध मजारों को जमींदोज कर दिया था। इस दौरान कुछ और इमारतें भी यहाँ गिराई गईं थीं। इस किले की सरकार ने ₹74 करोड़ की लागत से मरम्मत भी करवाई थी। यहाँ मजारें गिराए जाने के दौरान मुस्लिमों ने प्रदर्शन भी किया था।

हर्ष सांघवी ने सदन को बताया कि राज्य में तेजी से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह अभियान द्वारका से प्रारम्भ हुआ था और अब यह सूरत, जामनगर, पोरबंदर, सूरत, पावागढ़ और अहमदाबाद तक पहुँच चुका है। उन्होंने अपने भाषण के दौरान राज्य में नवरात्रि के दौरान रात भर गरबा को अनुमति दिए जाने की बात की और कहा- “अगर मेरे राज्य में लोग गरबा नहीं करेंगे तो क्या पाकिस्तान में करेंगे।”

आक्रांताओं की हिंसा से बचाने के लिए देवी-देवताओं, महिलाओं को घर में लाया गया… राम मंदिर से महिलाएँ फिर होंगी स्वतंत्र-सुरक्षित

22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर पूरे देश का उत्साह अभूतपूर्व था। इस आयोजन के लिए जिस तरह से भारतवर्ष के सभी भागों के लोग एक साथ आए, वह उन लोगों के लिए एक मजबूत खंडन के रूप में काम कर रहा है, जो संशयवादी थे और मंदिरों के स्थान पर अस्पतालों या विश्वविद्यालयों के निर्माण को प्राथमिकता देते थे या दे रहे हैं।

अयोध्या शहर में तेजी से होती हुई प्रगति और विकास श्री राम लला मंदिर के परिवर्तनकारी प्रभाव को प्रकट करता है। यह सांस्कृतिक पुनुरुत्थान, अयोध्या से भी आगे चारों ओर विस्तृत रूप में फैला हुआ है, जो सम्पूर्ण भारतवर्ष में सनातन धर्म के पुनर्जागरण में अतुलनीय योगदान दे रहा है। यह उद्घाटन और इसका प्रभाव पहले से ही ध्यान देने योग्य है, जो एक बड़े आंदोलन का संकेत है, जो श्री राम मंदिर के पुनःस्थापन के साथ तेजी से गति पकड़ रहा है।

इस सांस्कृतिक और धार्मिक पुनर्जागरण से प्राप्त होने वाले विभिन्न परिणामों का विश्लेषण और उनका अनुमान लगाना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। यद्यपि, इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे सनातन सभ्यता का आर्थिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान होगा, लेकिन इस बात पर चर्चा नहीं हो रही है कि भारतवर्ष में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के लिए इसका क्या अर्थ हो सकता है। यह एक ऐसा विषय रहा है, जिसके लिए भारतवर्ष को अतीत में अत्यंत बुरी प्रतिष्ठा का तथाकथित ठप्पा लगाया गया है।

यहाँ तक की नारीवादी, वामपंथी समूह और स्वघोषित उदारवादी भी इसे महिलाओं से नहीं जोड़ रहे हैं। वे इस विकास का विश्लेषण एक स्पष्ट चिंता, हताशा, क्रोध और निराशा की भावना के साथ कर रहे हैं। ये सारे नारीवादी, वामपंथी समूह और स्वघोषित उदारवादी इसे बहुसंख्यकवाद के उदय, फासीवादी राज्य के पुनरुत्थान, लोकतंत्र में गिरावट, धर्मनिरपेक्षता की हानि, महिलाओं की स्थिति में गिरावट और अल्पसंख्यक अधिकारों के दमन के रूप में देखते हैं। वे शायद ही अयोध्या में मंदिर को महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दों के संभावित समाधान के रूप में जोड़ेंगे।

पिछले 20 वर्षों से महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के रूप में, मैं भारतवर्ष में इस कार्यक्रम की क्षमता को देख सकती हूँ और मैं यह कह सकती हूँ कि यह घटना, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम के लिए; समाधान खोजने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

वैश्विक स्तर पर नारीवादी, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा (जिसमें घरेलू हिंसा के साथ-साथ यौन हिंसा भी सम्मिलित है), से निपटने के लिए समाधान की तलाश में व्यस्त हैं। दुर्भाग्य से, प्रत्येक गुजरते हुए वर्ष में, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा का भयावह खतरा बना रहता है, क्योंकि विभिन्न सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों के अभिलेखों में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से सम्बंधित आंकड़े या तो स्थिर रहते हैं या फिर बढ़ते रहते हैं।

उपनिवेशीकरण, मंदिर और महिलाएँ

अयोध्या का राम मंदिर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने में कैसे सहायता कर सकता है, यह समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि उपनिवेशीकरण, मंदिर और महिलाएँ आपस में एक दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं।

विश्व के अधिकांश भागों में उपनिवेशीकरण या आक्रमण का एक पैटर्न, एक तरीका रहा है। जहाँ भी ऐसा हुआ, इसने मूल आबादी की अपनी संस्कृति और धार्मिक प्रथाओं से जुड़ाव को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया। इसे उपनिवेशवादी के मूल्यों, विश्वासों और धर्म से बदल दिया गया या ये कह लीजिए कि उपनिवेशवादियों या आक्रमणकारियों ने अपने मूल्यों, विश्वासों और धर्म को जबरन स्थापित किया। उदाहरण के लिए, ईरान से पारसी धर्म और अफगानिस्तान से बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म का सफाया किया गया।

यद्यपि इस सन्दर्भ में, भारतवर्ष एक अपवाद रहा है क्योंकि एक हजार साल से भी अधिक समय तक उपनिवेशीकरण और तमाम आक्रमणों के बाद भी यहाँ की सनातन संस्कृति नष्ट नहीं हुई। तुर्की, मंगोल, फ़ारसी, ब्रिटिश, पुर्तगाली, डेनिश, डच, फ्रांसीसी आदि सभी लोगों ने चरणबद्ध तरीके से, एक हजार साल से भी अधिक की लंबी अवधि में मजबूत प्रतिरोध का सामना करते हुए भारतवर्ष पर आक्रमण किए और अपने-अपने उपनिवेश बनाए। इस सभी आक्रमणों और प्रतिरोधों के बावजूद सनातन धर्म बच तो गया, परंतु यह काफ़ी कमज़ोर रह गया और इसका सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

भारतवर्ष के उत्तरी क्षेत्र (जिसे आज उत्तरी भारत कहा जाता है) में मंदिरों का बड़े पैमाने पर अपवित्रीकरण, विनाश और लूटपाट का मुख्य उद्देश्य भारत की सभ्यतागत विरासत की जड़ों को हिलाना था। यह एक सर्वविदित और स्थापित तथ्य है कि लगभग आठ सौ वर्षों तक, दिल्ली में इस्लामी और मुगल शासन के समय, कोई भी मंदिर आक्रमणकारियों से बचा ही नहीं था और 1939 में बिड़ला के लक्ष्मीनारायण मंदिर के निर्माण तक नए मंदिरों के जीर्णोद्धार या निर्माण का कोई प्रयास संभव नहीं हो सका था।

दूसरा प्रभाव महिलाओं की स्थिति और उनके हिंसा के अनुभव को लेकर था। इस कथन को संदर्भ देने के लिए अमेरिकी इतिहासकार विल दुरान्ट ने भारत पर इस्लामी आक्रमण को मानव इतिहास की सबसे खूनी घटनाओं में से एक बताया है। यह स्पष्ट है कि उस समय भारत में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और उनकी दुर्दशा अकल्पनीय स्तर पर थी। बलात्कार, अपहरण, यौन गुलामी, जबरन धर्म परिवर्तन जैसी घटनाएँ बड़े पैमाने पर थीं। ऐसा कहा जाता है कि दुनिया भर में लाखों महिलाओं का अपहरण कर उन्हें बाजारों में बेच दिया गया था।

उपनिवेशीकरण का प्रत्यक्ष रूप में और अप्रत्यक्ष रूप में दोतरफा प्रभाव पड़ता है। उपनिवेशीकरण न मात्र महिलाओं के विरुद्ध गंभीर हिंसा सहित स्वदेशी समुदायों के विरुद्ध सीधे तौर पर हिंसा करता है, बल्कि यह उन सुरक्षात्मक कारकों को भी नष्ट करता है, जो महिलाओं की स्वतंत्रता की रक्षा और समर्थन करने वाली स्वदेशी सांस्कृतिक प्रथाओं में विद्यमान हैं। आक्रमणों और उपनिवेशीकरण से उत्पन्न आघातों से हैरान, परेशान और असहाय पीड़ित स्वदेशी समुदाय अक्सर अपनी महिलाओं की स्वतंत्रता पर रोक लगाकर उनको सुरक्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयत्न करते हैं और महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करना अपने आप में हिंसा का कारण बन जाता है, एक ऐसी हिंसा जो आक्रमणकारियों या उपनिवेशवादियों द्वारा नहीं, बल्कि उनके अपने स्वदेशी समुदाय द्वारा की जाती है।

समय की गति के साथ यह प्रवृति समाज में इस तरह व्याप्त हो जाती है कि हिंसा के अंतर्निहित कारणों को भुला दिया जाता है। ऐसा प्रतीत होने लगता है कि स्वदेशी संस्कृति स्वयं हिंसा को स्वीकृति देती है। भारतवर्ष में इसके अनेकों उदाहरण हैं जैसे बेटे को प्राथमिकता देना, बेटी की अपेक्षा बेटे के जन्म पर अधिक जश्न मनाना, प्रौद्योगिकी के आगमन के साथ कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, महिलाओं का पर्दा करना, महिलाओं और लड़कियों की गतिशीलता और शिक्षा पर प्रतिबंध इत्यादि।

अतः यहाँ इस बात पर चर्चा हो रही है कि मंदिर और महिलाएँ कैसे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। आक्रमण और उपनिवेशीकरण के समय मंदिर और महिलाएँ दोनों ही सार्वजनिक रूप से असुरक्षित रहे, लूट, डकैती और बलात्कार जैसे घृणित अपराधों के प्रति संवेदनशील रहे। परिणामस्वरूप आक्रमण, जबरदस्ती और विनाश के बहुत सारे हिंसक चरणों के समय, सनातन संस्कृति की प्रथाओं और धर्म को बचाने के लिए, हमारे पूजनीय देवताओं के साथ हमारे संबंधों को सुरक्षित रखने के लिए, हमारे मंदिरों और महिलाओं को घर के अंदर लाया गया।

सनातन धर्म का पुनरुत्थान और महिलाओं की स्थिति का पुनर्स्थापन

उपनिवेशीकरण का उद्देश्य स्वदेशी संस्कृति, स्वदेशी महिलाओं और स्वदेशी ज्ञान की रक्षा करना बिलकुल भी नहीं रहा है। यदि हम इतिहास को देखें तो पाएँगे कि ऐसा अफ़्रीका, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी हुआ है। उपनिवेशवादी राज्य कभी भी एक रक्षक के रूप में कार्य नहीं करता है, इसलिए उपनिवेशवादियों की प्रणालियाँ और संरचनाएँ उपनिवेशित आबादी की सुरक्षा और भलाई के लिए नहीं बनी हैं।

यदि हम ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण लें तो पाएँगे कि उपनिवेशीकरण के दो सौ वर्षों के अंदर, ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी/मूल निवासी हजारों वर्षों की अपनी संस्कृति से पूरी तरह से बेदख़ल कर दिए गए। वर्तमान समय में ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी महिलाएँ तुलनात्मक रूप में वहाँ की गैर-स्वदेशी आबादी से अधिक हिंसा का अनुभव करती हैं। सुलह, सामंजस्य और उपचार की प्रक्रिया में, ऑस्ट्रेलिया इस बात को स्वीकार करता है कि आदिवासी/मूलनिवासी समुदायों की महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उपनिवेशीकरण और उनकी संस्कृति से टूटे हुए संबंधों का ही परिणाम है। सभी उपलब्ध अभिलेख और साक्ष्य बताते हैं कि उपनिवेशीकरण से पूर्व ऑस्ट्रलियाई आदिवासी/मूलनिवासी समुदायों में हिंसा उनकी संस्कृति का हिस्सा कभी नहीं थी। इस हिंसा को संबोधित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका यह है कि आदिवासी समुदाय अपनी संस्कृति से टूटे हुए संबंधों को पुनर्स्थापित करे।

पूर्वजों की संस्कृति से जुड़ना और इस बात को प्रकाश में लाना कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को संस्कृति द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया था – यह बात महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के समाधान खोजने के हिस्से के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सभ्यता और संस्कृति के साथ वापस जुड़ना वर्तमान में भारतवर्ष में हो रहा है, व्युपनिवेशीकरण प्रक्रिया जिसके परिणामस्वरूप भारतवर्ष में पुनः सनातन धर्म का पुनरुत्थान हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता के सौ साल पूरे होने तक पच्चीस साल के लिए पाँच संकल्प किए हैं।

दूसरे संकल्प में औपनिवेशिक मानसिकता के किसी भी निशान को जड़ से मिटाना है और तीसरे संकल्प में, अपनी मूल जड़ों पर गर्व करने की बात कही गई है। इस तरह, पहली बार, भारतवर्ष में सरकार द्वारा उपनिवेशवाद से मुक्ति पाने की प्रक्रिया की रूपरेखा को प्रस्तावित किया गया है। हमारे मंदिरों, पूजाघरों का पुनर्स्थापन व्युपनिवेशीकरण की प्रक्रिया में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। उपनिवेशवाद से मुक्ति के साथ महिलाओं के विरुद्ध हिंसा के साथ-साथ ऐसे अनेकों समाधान भी आएँगे, जो केवल भारतवर्ष ही पूरी दुनिया को दे सकता है।

श्री राम और अयोध्या मंदिर की महत्ता

महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा को रोकने के लिए जन-जन तक पहुँचने और उनसे जुड़ने की आवश्यकता है। लोगों से जुड़ाव को अत्यंत मजबूत बनाने की आवश्यकता है, लोगों से अपील करने की आवश्यकता है और विशेष रूप से महिलाओं के संबंध में उनके मूल्यों पर विचार करने की आवश्यकता है। यही वे मूल्य हैं, जिनके लिए पूरी दुनिया संघर्ष कर रही है, और इनकी रोकथाम के लिए विकसित किए गए विभिन्न कार्यक्रम अभी तक आशाजनक परिणाम नहीं दे रहे पा रहे हैं।

ये सारे कार्यक्रम महिलाओं के प्रति सम्मान की संस्कृति निर्माण पर केंद्रित हैं। मात्र ये कहने से की महिलाओं का सम्मान किया जाए, इससे काम नहीं चलता। ऐसे सामाजिक मूल्य जो जन मानस में गहरे हों व उनकी प्राचीन समय से मान्यता हो, यह अत्यंत जरूरी है। किन्तु संस्कृति में गहराई से अपनी जड़ें जमाए इन मूल्य प्रणालियाँ को मात्र कुछ ही वर्षों में दोबारा नहीं बनाया जा सकता। इनको प्रगाढ़ होने में कई सौ वर्ष लग जाते हैं।

और इसी कारण से श्री राम और श्री राम लला मंदिर का बहुत बड़ा महत्व है। श्री राम और राम राज्य इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि हजारों वर्षों से हिंसा कभी भी सनातन संस्कृति का हिस्सा नहीं थी, हालाँकि अतीत में श्री राम और रामायण के प्रतीकों को धूमिल करने के अनेकों प्रयास लोगों द्वारा किए गए हैं। अनेकों वामपंथी इतिहासकारों, तथाकथित नारीवादियों और कुछ राजनीतिक समूहों ने श्री राम को स्त्रीद्वेषी और जय श्री राम के नारे को आक्रामकता और हिंसा की अभिव्यक्ति के रूप में स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

यद्यपि, अयोध्या में संपन्न हुई प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की सहज और झूठी प्रतिक्रिया से पता चलता है कि ये वामपंथी इतिहासकारों, तथाकथित नारीवादियों और कुछ राजनीतिक पार्टियों के समूह अपने उद्देश्यों और लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। पूरे भारतवर्ष और दुनिया भर में सनातनियों द्वारा अपनी सभ्यता और संस्कृति से जो गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाया जा रहा है, वह आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित है। इससे पता चलता है कि इस घटना के विषय में हम जितना सोच सकते हैं, उससे कहीं अधिक बड़े निहितार्थ होंगे।

जब अधिक से अधिक लोग श्री राम से जुड़ेंगे, जो मात्र श्री राम नहीं बल्कि मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम हैं, एक ऐसे भगवान जो शुद्ध चरित्र, अनुशासन, निष्पक्षता और न्याय के अवतार हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव आना निश्चित है। यह सर्वविदित है कि श्री राम महिलाओं की गरिमा के लिए सदैव खड़े रहे और अपनी पत्नी सीता के प्रति अपमान का बदला लेने के लिए पहाड़ों और समुद्रों को पार किया, उन पर विजय प्राप्त की। यदि भारतवर्ष में पुरुष श्री राम से प्रेरणा लें तो समय के साथ इसका सीधा परिणाम महिलाओं के विरुद्ध हिंसा में कमी के रूप में सामने आएगा। इसके अलावा, राम राज्य एक आदर्श शासन का प्रतीक है, जहाँ कानून और नियम का शासन है। जब कानून-व्यवस्था सुदृढ़ रहती है तो महिलाओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

हालाँकि सम्पूर्ण विश्व में भारतवर्ष को महिलाओं के विरुद्ध हिंसा में अग्रणी देश के रूप में प्रचारित किया गया है, लेकिन विभिन्न कुप्रथाओं को सफलतापूर्वक संबोधित करने का अपना एक लम्बा अनुभव रहा है। उदाहरण के लिए सती-प्रथा, बाल विवाह, दहेज, कन्या भ्रूण हत्या। भारत में बलात्कार के लिए कड़े कानून हैं और महिलाओं को घरेलू हिंसा के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की जाती है। भारतवर्ष में सकारात्मक कार्रवाई के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि महिलाएँ सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में स्थानीय शासन और संसद में सार्थक रूप से प्रतिभाग करें।

संसद द्वारा पास नवीनतम महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिला नेतृत्व को सबसे आगे रखने में एक प्रभावी भूमिका निभाएगा। भारतवर्ष में जो भी प्रयास किए जा रहे हैं, वे मात्र अलंकरण नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे हजारों वर्षों की सभ्यतागत पृष्ठभूमि है, जहाँ स्त्री देवत्व को सदैव प्रकृति, शक्ति, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा, काली और देवी के रूप में सम्मान दिया गया है।

अंततः संक्षेप में, जब एक सुंदर चित्रकारी पर वर्षों-वर्ष के दुर्व्यवहार और लापरवाही के कारण धूल की मोटी परतें जमा हो जाती हैं, तो वह बदसूरत लगने लगती है। हमारी सुंदर सनातन सभ्यता पर बाह्य आक्रमणों और उपनिवेशीकरण ने यही काम किया है। परन्तु यदि ठोस प्रयास करते हुए इस धूल को मिटा दिया जाए और उपनिवेशवाद के निशानों को मिटा दिया जाय, तो पुनः वही खूबसूरत चित्रकारी (पेंटिंग) फिर से सामने उभरकर आ जाएगी। एक ऐसी चित्रकारी (पेंटिंग) जिसमें महिलाओं का सम्मान किया गया है और उन्हें हिंसा और किसी भी प्रकार के भेद-भाव से मुक्त रखा गया है।

मंदिर को अगर दान-चढ़ावे में मिले ₹1 करोड़ तो सरकार को देना होगा ₹10 लाख: कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने किया बिल पास, BJP ने पूछा- निशाने पर सिर्फ हिंदू धर्म क्यों?

कर्नाटक सरकार ने हाल में ‘कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024’ पारित किया है। यह विधेयक सरकार को अधिकार देता है कि वह मंदिरों से टैक्स वसूल सकें।

इस बिल के अनुसार अगर किसी हिंदू मंदिर का राजस्व 1 करोड़ है तो सरकार उनसे 10 फीसद टैक्स ले सकती है और जिनका राजस्व 1 करोड़ से कम है लेकिन 10 लाख रुपए से ज्यादा है तो उनसे सरकार 5 प्रतिशत कर ले सकती है।

बताया जा रहा है कि इस बिल में ये भी कहा गया है कि एक निगमित निकाय के मामले में सदस्यों को हिंदू और अन्य धर्मों दोनों से नियुक्त किया जा सकता है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद प्रदेश के भाजपा नेताओं ने इसका जमकर विरोध किया। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार हिंदू विरोधी नीतियाँ अपनाकर अपना खाली खजाना भरना चाहती है।

उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में लगातार हिंदू विरोधी नीतियाँ अपना रही है। अब उसकी हिंदू मंदिरों के राजस्व पर टेढ़ी नजर है। सरकार ने अपने खाली खजाने को भरने के लिए हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक पारित किया है। सरकार हिंदू मंदिरों से धन जुटाकर अपने दूसरे उद्देश्य पूरा करेगी।

विजयेंद्र ने कहा कि सरकार 1 करोड़ से अधिक कमाई वाले मंदिरों से आय का 10% टैक्स लेगी। भक्तों द्वारा भगवान को चढ़ाए गए धन का इस्तेमाल मंदिर और भक्तों की सुविधा के लिए होना चाहिए। यदि इसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित किया जाता है, तो यह लोगों के साथ हिंसा और धोखाधड़ी होगी। येदियुरप्पा ने आश्चर्य जताया कि कर्नाटक सरकार केवल हिंदू मंदिरों को ही क्यों निशाना बना रही है। अन्य धर्मों को क्यों नहीं?

बीजेपी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विजयेंद्र पर पलटवार किया। उन्होंने भाजपा पर धर्म को राजनीति में लाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा- “हिंदुत्व की सच्ची समर्थक तो कॉन्ग्रेस है। लेकिन भाजपा हमेशा कॉन्ग्रेस को हिंदू विरोधी दिखाकर लाभ लेती है। पर, हिंदू धर्म के सच्चे समर्थक हम हैं, क्योंकि वर्षों से कॉन्ग्रेस ने मंदिर और हिंदू हितों की रक्षा की है।”

गन्ने की MSP 8% बढ़ाई गई, सैटेलाइट के कलपुर्जों की मैन्युफैक्चरिंग में 100% FDI, पशुधन उद्यमिता में 50% सब्सिडी: मोदी कैबिनेट ने लिए बड़े फैसले

मोदी सरकार ने बुधवार (21 फरवरी, 2024) की रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कैबिनेट द्वारा लिए गए कई अहम फैसलों की जानकारी दी। ‘किसान आंदोलन 2.0’ के बीच मोदी सरकार ने गन्ने की खरीद की किम्मत बढ़ा दी है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट ने बैठक में फैसला लिया कि 2024-25 के लिए गन्ने की कीमत 8% बढ़ाते हुए 340 रुपए प्रति क्विंटल कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत देश भर के 5 करोड़ किसानों को इसका सीधा फायदा होगा।

फ़िलहाल गन्ने का MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) 315.10 रुपए प्रति क्विंटल है। 1 अक्टूबर, 2024 से नई बढ़ी हुई कीमतें लागू होंगी। बैठक के बाद बताया गया कि पहले से ही भारत गन्ने के लिए दुनिया में सबसे अधिक कीमत चुकाने वाला देश है। भाजपा ने इसे किसानों की आय दोगुनी करने की ‘मोदी की गारंटी’ की दिशा में कदम उठाया है। इसके अलावा महिला सुरक्षा के लिए चल रही योजना को भी 2024-26 तक जारी रखने का फैसला लिया गया है।

इस परियोजना पर कुल 1179.72 करोड़ रुपए का व्यय होगा, जिसमें से 885.49 रुपए केंद्रीय गृह मंत्रालय खर्च करेगा। बाकी के 294.23 करोड़ रुपए ‘निर्भया फंड’ से दिए जाएँगे। ये योजना 2021-22 ही चल रहा है। महिला सुरक्षा की दिशा में सख्त कानून से लेकर तुरंत न्याय तक के प्रावधान किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकारों के साथ सहयोग करते हुए इस योजना को चलाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बाढ़ प्रबंधन और सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (FMBAP) को जारी रखने की मंजूरी भी प्रदान की।

बाढ़ नियंत्रण और कटाव-रोधी उपायों को इस परियोजना के जरिए अमल में लाया जाता है। इसमें अगले 5 वर्षों के लिए 4100 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है। विशेष श्रेणी के राज्यों (उत्तर-पूर्व के 8 राज्य और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर) में 90% हिस्सेदारी केंद्र की होगी, बाकी राज्यों में 60% बजट केंद्र सरकार देगा। केंद्र सरकार ने सैटेलाइट्स के लिए पुर्जे बनाने में 100% FDI, अर्थात विदेशी निवेश की अनुमति दे दी है।

सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग, संचालन, डेटा उत्पादों, जमीन और उपयोगकर्ता क्षेत्रों में 74% FDI की अनुमति दी गई है। चाणक्यपुरी के राजनयिक एन्क्लेव स्थित सुषमा स्वराज भवन में 3 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। देश में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। पशुधन उद्यमिता को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। घोड़े, गधे, खच्चर और ऊँट जैसे जानवरों से संबंधित उद्यमिता में 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी (50%) मिलेगी, जबकि वीर्य केंद्र और न्यूक्लियस ब्रीडिंग फार्म्स की स्थापना के लिए 10 करोड़ रुपए प्रदान किए जाएँगे।

गर्भवती बीवी को डॉक्टरों से रखा दूर; नॉर्मल बच्चे को पैदा करने की जिद में देखा करता था यूट्यूब… जच्चा-बच्चा की मौत के बाद केरल पुलिस की हिरासत में नयाज

केरल के करक्कमंडपम में मंगलवार (20 फरवरी 2024) को प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई है। पुलिस ने इस मामले में महिला के शौहर को गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम नयाज़ है, जिसके खिलाफ आशा वर्करों ने शिकायत दर्ज करवाई है। आरोप है कि नयाज एक्यूपंक्चर विधि से अपनी बीवी समीरा बीवी का इलाज करवा रहा था। वह किसी भी डॉक्टर को अपने घर में घुसने भी नहीं देता था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना करक्कमंडपम के पूनथुरा इलाके की है। यहाँ रहने वाला नयाज साउंड सिस्टम का काम करता है। घर में उसकी 36 वर्षीया बीवी समीरा थी। समीरा 3 बच्चों की माँ थी। उसके तीनों बच्चे सर्जरी से हुए थे। समीरा चौथी बार गर्भवती हुई थी। इलाके की आशा वर्करों का कहना है कि पूरे 9 माह में एक बार भी नयाज ने अपनी बीवी को डॉक्टरों को नहीं दिखाया था।

नया किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को अपने घर में घुसने नहीं देता था। माना जा रहा है कि नयाज किसी भी हाल में अपना चौथा बच्चा सामान्य प्रसव से ही पैदा करना चाहता था। हालाँकि, सामान्य प्रसव की संभावना न के बराबर थी, इसके बावजूद नयाज अपनी जिद पर अड़ा रहा। वह सामान्य प्रसव के तरीके यूट्यूब पर देखा करता था।

नयाज अपने किराए के मकान में सिर्फ एक एक्यूपंचर डॉक्टर को बुलाता था। जैसे-तैसे करके एक बार एक स्वास्थ्यकर्मी नयाज के घर के अंदर पहुँच गई। तब जाकर लोगों को समीरा के प्रेग्नेंट होने की जानकारी हुई थी। हालाँकि, अपने शौहर की ज़िद को देखते हुए समीरा किसी से भी अपनी डिलीवरी के बारे में बात नहीं करती थी।

उसकी बीवी की गर्भावस्था के बारे में जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने नयाज से अपनी बीवी का इलाज करवाने की गुजारिश की। इस गुजारिश पर नयाज ने खुद को अपनी बीवी का ध्यान रखने में सक्षम बताया। आखिरकार 20 फरवरी को प्रसव के दौरान समीरा की मौत हो गई। नवजात बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका।

इस घटना की जानकारी होने पर आशा वर्करों ने पुलिस में नयाज के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने नयाज के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज करके उसे हिरासत में ले लिया है। आरोपित नयाज से पूछताछ की जा रही है।

अलवर में जहाँ कटती थी गाय उस मंडी को चलाता था वारिस, बना रखा था IPS का फर्जी कार्ड: रिपोर्ट में बताया- सप्लाई के लिए चोरी की गाड़ियों का होता था इस्तेमाल

राजस्थान के अलवर में हाल ही में एक गोमांस मंडी का खुलासा हुआ। किशनगढ़बास स्थित रूंध गिदावड़ा के बीहड़ में मेदावास निवासी इकबाल और वारिस पर इसका संचालन करने का आरोप लगा। अब पुलिस की जाँच में सामने आया है कि इसके मुख्य साजिशकर्ता वारिस ने एक फर्जी IPS वाला कार्ड तक बना रखा था। इस बीफ मंडी को चलाने के लिए उसने हरियाणा और राजस्थान की पुलिस से साँठगाँठ कर रखी थी। इन्होने सरकारी जमीन पर कब्ज़ा किया, निगम कर्मियों को अपने साथ मिलाया, फिर बिजली कनेक्शन तक ले लिया।

अभी न सिर्फ ये दोनों फरार हैं, बल्कि हब्बी, मन्नान, शाहरुख, साहुन और सोहिल भी अभी फरार चल रहे हैं। इक़बाल को ये जिम्मेदारी दी गई थी कि वो आरोपितों की जमानत से लेकर बीफ सप्लायर तक उपलब्ध कराए। दोनों आरोपितों ने कई वर्षों तक अवैध कमाई कर के बड़े-बड़े मकान तक बनवा रखे थे। रूंध गिदावड़ा में बीफ मंडी चलाई जाती थी। गायों की तस्करी कर उन्हें राजस्थान से हरियाणा लाया जाता था। फिर गायों का क़त्ल कर के उन्हें बीफ सप्लायरों को बेच दिया जाता है।

सप्लाई के लिए चोरी की गाड़ियों और बाइक का इस्तेमाल किया जाता था। गाँव में ही फिर बीफ बिरयानी बनाई जाती थी। सिवायचक में जमीन कब्जे को लेकर पुलिस की ओर से बुलडोजर चलाने की कार्रवाई भी की गई है। वहाँ पर कुल 3000 बीघा जमीन है, जिसमें से 1200 बीघा जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया गया है। मकानों को ध्वस्त किया गया है, बिजली के पोल गिरा कर ट्रांसफॉर्मर हटाए गए हैं और खेती भी नष्ट की गई है। खुद कलक्टर अर्पिता शुक्ला ने इलाके का दौरा किया।

ADM के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय जाँच समिति गठित की गई है। पुलिस धर-पकड़ के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है। IG उमेश चंद्र दत्ता ने भी इलाके का निरीक्षण किया है और सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं। पुलिस की 9 टीमें दबिश दे रही है, 5 आरोपित गिरफ्तार भी हुए हैं। हिन्दू संगठनों ने किशनगढ़बास के तोप चौराहे पर विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेता ज्ञानदेव आहूजा ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी आरोपित को नहीं छोड़ा जाएगा।

आखिरकार साइकिल को मिल गया हाथ: उत्तर प्रदेश में 17 सीट पर लड़ेगी कॉन्ग्रेस, मध्य प्रदेश की खजुराहो सपा को दिया; 2017 में फ्लॉप रहे थे ‘यूपी के लड़के’

लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट-शेयरिंग पर बात बन गई है। दोनों पार्टियाँ अब साथ चुनाव लड़ेंगी। कॉन्ग्रेस पार्टी 17 सीटों पर चुनाव लड़ने को राजी हो गई है। बाकी की 63 सीटों पर समाजवादी पार्टी और उसकी सहयोगी पार्टियाँ चुनाव लड़ेंगी। कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर कुछ सीटों पर पेंच फंसा था, लेकिन दोनों पार्टियों ने इस पेंच को सुलझा लिया है। सपा को मध्य प्रदेश में भी एक लोकसभा सीट दी गई है। उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के इन्चार्ज अविनाश पांडे ने इस बात की घोषणा की।

कॉन्ग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा, “मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि यह निर्णय लिया गया है कि कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और इस गठबंधन के तहत जो अन्य बची हुई 63 सीटे हैं, इन पर इंडी गठबंधन के अन्य उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। हम डटकर मुकाबला करेंगे और बीजेपी को शिकस्त देंगे।”

इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी कॉन्ग्रेस

समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच गठबंधन के बाद जो 17 सीटें कॉन्ग्रेस को दी गई हैं, उनमें रायबरेली, अमेठी, कानपुर नगर, फतेहपुर सीकरी, बाँसगाँव, सहारनपुर, प्रयागराज, महाराजगंज, वाराणसी, अमरोहा, झाँसी, बुलंद शहर, गाजियाबाद, मथुरा, सीतापुर, बाराबंकी और देवरिया लोकसभा सीटें हैं। इनमें से वाराणसी सीट पर समाजवादी पार्टी ने पहले ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी, अब उन्हें शायद मैदान से हटना पड़े।

यह घोषणा समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी और कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और कॉन्ग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में की। पांडे ने कहा कि कॉन्ग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि राज्य की बाकी 63 सीटों पर सपा और गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। इस दौरान समाजवादी पार्टी के नेता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ये भारत को बचाने का संदेश है जो पूरे देश में जा रहा है।

सपा को मध्य प्रदेश में भी मिली एक सीट

इंडी गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश की एक लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगी। सपा प्रदेश अध्यक्ष पटेल ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने का इरादा जाहिर किया था जिसे कॉन्ग्रेस ने स्वीकार कर लिया है। कॉन्ग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने इस गठबंधन को अंजाम तक पहुँचने में बहुत अहम भूमिका अदा की है। वह उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने के लिए सभी पार्टियों को एक साथ लाने का जो प्रयास कर रही हैं, इसके लिए वह उनका आभार प्रकट करते हैं।

डिंपल यादव ने कही ये बात

कॉन्ग्रेस के साथ सीट बंटवारे के एलान के बाद समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव ने कहा है कि उनकी पार्टी शुरू से ही गठबंधन चाह रही थी लेकिन थोड़ी देरी इसलिए हुई क्योंकि सामने बीजेपी है।

डिंपल यादव ने कहा, “समाजवादी पार्टी शुरू से ही चाह रही थी कि गठबंधन हो लेकिन थोड़ी देरी हुई क्योंकि बीजेपी हमारे सामने खड़ी हुई है। मैं समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस को बधाई देना चाहती हूँ कि गठबंधन आखिरकार अपनी मंज़िल तक पहुँच गया है। इसके परिणाम बहुत अच्छे होंगे और लोग हमारा समर्थन मिलेगा क्योंकि युवा, महिलाएँ, किसान और जवान रूपी हमारे चार स्तंभ आक्रोशित हैं और दुखी भी हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले चुनाव में लोग आपको भाजपा के साथ दिखाई देंगे लेकिन वोट वो गठबंधन को ही करने जा रहे हैं।”

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की तीन सूचियाँ जारी कर दी हैं, जिसमें डिंपल यादव को मैनपुरी से टिकट दिया गया है।

स्कूल की टूर बस में खाने-पीने का सामान बाँट रहा था जावेद खान, छात्राओं का किया यौन शोषण: भड़के अभिभावक, प्रिंसिपल पर भी कार्रवाई की माँग

महाराष्ट्र के ठाणे में एक स्कूल के टूर पर गई लड़कियों से छेड़खानी का मामला सामने आया है। यह आरोप जावेद खान नाम के युवक पर लगा है। जावेद बस में छात्राओं को खाने-पीने का सामान देने के लिए रखा गया था। पीड़ित छात्राओं ने इस घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर बुधवार (21 फरवरी 2024) को जावेद खान को गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला ठाणे के कपूरबावड़ी क्षेत्र का है। यहाँ के सीपी गोयनका स्कूल की छात्राएँ कुछ दिन पहले अपने अध्यापकों के साथ टूर पर गई थीं। टूर के लिए बस बुक की गई थी, जिसमें खाने-पीने का सामान बाँटने के लिए जावेद खान को रखा गया था। आरोप है कि जावेद ने लड़कियों को खाने का सामान देने के दौरान उनसे छेड़खानी की। इस हरकत पर लड़कियाँ परेशान हो गईं, लेकिन उस समय खामोश रहीं।

हालाँकि, घर लौटकर कई छात्राओं ने अपने परिजनों को 27 साल के जावेद खान की करतूत के बारे में बताया। छात्राओं के परिजन जावेद की इस हरकत से काफी नाराज हुए। उन्होंने सबसे पहले स्कूल प्रशासन को इसकी सूचना दी। बाद में उन्होंने स्थानीय कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपित पर सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज कर ली।

बाद में दबिश देकर पुलिस ने जावेद खान को गिरफ्तार कर लिया। इस गंभीर घटना पर लचीला रुख अपनाने का आरोप लगाकर कई छात्राओं के अभिभावकों ने सीपी गोयनका स्कूल प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी किया। पीड़ित छात्राओं के परिजनों ने इस मामले की गहनता से जाँच करवाने की माँग की है। मामले की नजाकत को देखते हुए पुलिस केस की जाँच में जुटी हुई है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता अविनाश जाधव और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता एवं ठाणे के पूर्व नगरसेवक संजय भोईर ने इस इस घटना पर नाराजगी जताई है। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में वे भी शामिल हुए। छात्राओं के परिजनों ने जावेद को को जिम्मेदारी देने वाले प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। अभिभावकों कहना है कि जब तक प्रिंसिपल पर कार्रवाई नहीं होगी, वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।

हल्द्वानी में जहाँ हुआ पुलिस पर हमला, वहाँ के मुस्लिमों को पैसे बाँट रहा है इस्लामी संगठन ‘हैदराबाद यूथ करेज’: जहरीले भाषण वाले मौलाना अजहरी का भी फैन

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में एक इस्लामी संस्था से जुड़े कुछ शख्स मुस्लिम परिवारों को कथित रूप से नोटों की गड्डियाँ बाँट रहे हैं। इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिन परिवारों को नोटों की गड्डियाँ दी जा रही हैं, उनके घर के लोगों को पुलिस ने दंगे के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह संस्था के सोशल मीडिया पर कई भड़काऊ वीडियो भी हैं।

नोटों की गड्डियाँ बाँटने वाले संगठन का नाम हैदराबाद यूथ करेज (Hyderabad Youth Courage) है। इसका इसी नाम से एक फेसबुक पेज भी है, जिसके लाखों फॉलोवर हैं। HYC बताता है कि यह लोगों से पैसे इकट्ठा करके लोगों की मदद करता है। हालाँकि, इसकी सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है कि यह कट्टरपंथी संगठन है। इसके मुखिया सलमान का इन्स्टाग्राम पर 13+ लाख फॉलोवर हैं।

हल्द्वानी में पैसे बाँटने वाले सलमान और उसके संगठन का पेज

सलमान नाम का यह शख्स एक अन्य व्यक्ति के साथ 10 फरवरी 2024 को हल्द्वानी पहुँचा था। इसके बाद से लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिनमें वह लोगों को रुपयों की गड्डियाँ बाँटते हुए दिखता है। फेसबुक और इन्स्टाग्राम पर साझा किए गए ऐसे ही एक वीडियो में एक बच्चे के साथ यह पैसे से भरे हुए बैग के साथ दिखता है। इसमें एक बच्चा भी साथ में दिख रहा है।

नीचे लगे ट्वीट में इस वीडियो का एक हिस्सा देखा जा सकता है। असल में यह वीडियो 11 मिनट का है, जो कि ऑपइंडिया के पास मौजूद है। HYC के पेज पर से इस वीडियो की सेटिंग्स में बदलाव कर दिया गया है, जिसके कारण इसे यहाँ नहीं देखा जा सकता है।

वीडियो में सलमान एक युवक से मिलता दिख रहा है, जो बताता है कि उसके छोटे भाई को पुलिस दंगा करने के आरोप में ले गई है। उसे सलमान बच्चे के हाथ नोटों की गड्डियाँ दिलवाता है। इसके बाद वहाँ कई महिलाएँ इकट्ठा हो जाती हैं, जो बताती हैं कि उनका नुकसान हुआ है। उनको भी पैसे दिए जाते हैं। सलमान यह कहता है कि ये पैसे अल्लाह की तरफ से है।

आगे चलकर एक अन्य महिला बताती है कि उसके पति की मौत हो गई है। इस पर बैग से नोटों की कई गड्डियाँ निकालकर उसे भी देता है। यह इसी तरह कई लोगों को पैसा बाँटता है। इस दौरान बीच-बीच में यह हल्द्वानी प्रशासन की आलोचना भी करता है और अतिक्रमण हटाने को जुल्म बताता है।

इस वीडियो में ये बताने की कोशिश की गई है कि हल्द्वानी में मुस्लिमों को ही टारगेट किया गया है। इस वीडियो में प्रशासन की आलोचना की गई है। सलमान नाम का यह व्यक्ति जहाँ वर्तमान में लोगों को पीड़ित दिखाकर उनको पैसे बाँट रहा है और प्रशासन की आलोचना कर रहा है।

जब हल्द्वानी में दंगाइयों ने पुलिस और प्रशासन पर हमला करके उनकी गाड़ियाँ, ट्रेक्टर और जेसीबी जलाई थीं तब यह इसे मस्जिद शहीद करने का परिणाम बता रहा था। यहाँ यह भी बात देने वाली है कि जिस मस्जिद और मदरसे को गिराने पर दंगा भड़का वह पूर्ण रूप से अवैध था और उसको गिराने के लिए उसके पास न्यायालय की अनुमति थी।

इसमें दंगे को मस्जिद पर सरकार के एक्शन का रिएक्शन बताया जा रहा था। इस पोस्ट के कमेंट्स में कट्टरपंथी मुस्लिम इस दंगे का समर्थन कर रहे हैं। एक अन्य वीडियो में सलमान पुलिस पर आरोप लगाता दिखता है कि हल्द्वानी में लोगों पर मशीनगन से गोलियाँ चलाई गई थीं। वह दावा करता है कि यह बात मीडिया छुपा रहा है।

हल्द्वानी दंगे से इतर भी इसकी कट्टरता की पोस्ट सामने आई हैं। एक वीडियो में वह हाल ही में गिरफ्तार किए गए जहरीले भाषण वाले मौलाना सलमान अजहरी का समर्थन करता है और उसका भड़काऊ भाषण दोहराता है। यह इस वीडियो में वह कई भड़काऊ बाते करता है और कहा कि ‘अभी कुत्तों का वक्त है, हमारा दौर आएगा।’

सलमान की सोशल मीडिया देखने से पता चलता है कि यह हैदराबाद में रहता है और वहीं से अपना काम करता है। इसकी फोटो और वीडियो AIMIM के मुखिया एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी और हिन्दूविरोधी भड़काऊ भाषण देने अकबरुद्दीन ओवैसी के साथ भी हैं। तेलंगाना विधानसभा चुनाव का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें यह AIMIM के समर्थन की बात करते दिखता है।

ओवैसी बंधुओं के साथ सलमान और साथी
ओवैसी बंधुओं के साथ सलमान और साथी

इसके सोशल मीडिया पोस्ट देखने पर पता चला है कि यह 10 फरवरी 2024 यानी हल्द्वानी में दंगे के दो दिन बाद यहाँ पहुँचा था। एक वीडियो में सलमान बताता है कि वह पिछले 4 दिनों से हल्द्वानी में है और दंगों के बीच अपना काम कर रहा है। इसके विषय सोशल मीडिया पर उत्तराखंड पुलिस से शिकायत भी की गई थी।

इसके बाद यह दावा किया गया था कि इसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, इसने खुद ही बुधवार (21 फरवरी 2024) को एक वीडियो डाल कर कहा है कि उसे कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसे फिर छोड़ दिया गया। इस वीडियो में उसने कहा है कि अब हालत सामान्य हैं।

गौरतलब है कि सलमान और उसका साथी सैयद अयूब पहले भी पैसा इकट्ठा करके गड़बड़ी करने के मामले में पकड़े जा चुके हैं। वह इससे पहले 2020 में सोशल मीडिया पर पैसे माँगने के आरोप में पकड़े गए थे। उन्होंने जरूरतमंदों के नाम से पैसा इकट्ठा किया था। इसको लेकर उनके खिलाफ हैदराबाद के चंद्रयानगुट्टा थाने में FIR दर्ज की गई थी। उनको गिरफ्तार भी कर लिया गया था।

हल्द्वानी दंगा

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में नगर निगम और पुलिस की टीम एक अवैध रूप से बनाए गए मस्जिद और मदरसे को गिराने गए थे। इस कार्रवाई को रोकने के लिए यहाँ मौजूद मुस्लिम भीड़ ने पुलिस प्रशासन पर हमला कर दिया। यहाँ मौजूद पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों पर पत्थर बरसाए गए और उन्हें जलाकर मारने की कोशिश की गई।

मुस्लिम भीड़ ने यहाँ नगर निगम समेत कई गाड़ियों में आग लगा दी और कई घंटे तक हिंसा की। प्रशासन ने इसके बाद यहाँ कर्फ्यू लगा दिया था। अब पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 68 दंगाई गिरफ्तार किए हैं। दंगे का मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक अब भी फरार है जिसे पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

वहीं इस दंगाइयों के पोस्टर भी शहर भर में लगाए गए हैं। इस दंगे के सरगना अब्दुल मलिक और उसके बेटे के घर को पुलिस ने कुर्क कर लिया है। ऑपइंडिया ने इस दंगे के दौरान ग्राउंड पर जाकर बताया था कि यहाँ असल में क्या हुआ था और इस्लामी भीड़ ने कैसे यहाँ हिंसा की थी।

खनौरी बॉर्डर पर पुलिस वालों को घेरा, पराली में भारी मात्रा में मिर्च डाल कर लगा दी आग… किसानों ने लाठी-गँड़ासे किया हमला, जम कर पत्थरबाजी: 12 पुलिसकर्मी घायल

देश में ‘किसान आंदोलन 2.0’ शुरू हो चुका है। पंजाब से निकले किसानों को हरियाणा की सीमा पर ओका गया है। ये किसान दिल्ली आना चाहते हैं। किसानों ने JCB से लेकर मिट्टी खोदने वाली मशीनें तक अपने पास रखी हैं। अब तक 3 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है। हरियाणा का शम्भू बॉर्डर और दाता सिंह-खनौरी बॉर्डर को किसानों ने अड्डा बना रखा है। अब धारदार हथियारों से इन किसानों द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमले की भी खबर है।

खुद हरियाणा पुलिस ने इस संबंध में जानकारी दी है। एक वरिष्ठ महिला अधिकारी ने बताया, “किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा बुधवार (21 फरवरी, 2024) को दाता सिंह-खनौरी बॉर्डर पर पुलिसकर्मियों को घेर कर पुलिस नाके के आसपास भारी मात्रा में मिर्च पाउडर डाल कर आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों द्वारा न सिर्फ भारी पत्थरबाजी की गई, बल्कि लाठी और गँड़ासा लेकर हमला भी किया गया। इस हमले में लगभग 12 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।”

हरियाणा पुलिस ने ये भी बताया है कि ज़हरीले धुएँ के कारण नाके के आसपास पुलिसकर्मियों को न सिर्फ साँस लेने में तकलीफ हुई, बल्कि उन्हें देखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों से हरियाणा पुलिस ने ऐसा न करने की अपील करते हुए कहा कि ज़हरीले धुएँ से विजिबिलिटी कम हो जाती है और पुलिसकर्मियों द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास बाधित होता है। पुलिस ने कहा कि ऐसा करने से दोनों पक्षों के लिए जोखिम बढ़ जाता है और किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है।

हरियाणा पुलिस ने किसानों से कहा है कि वो कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और शांति बनाए रखें। किसान नेताओं ने धमकाया है कि उन्हें दिल्ली नहीं आने दिया गया तो वो चुनाव में भी भाजपा नेताओं को अपने गाँव में नहीं आने देंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इसमें राजनीति खेलने उतर गए हैं और कह रहे हैं कि किसानों को दिल्ली आने देना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि SKM (संयुक्त किसान मोर्चा) गुरुवार को बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा।