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UIDAI ने कहा दुरुस्त होगी ‘तकनीकी गलती’, फिर भी आधार पर रार ठान रही ममता बनर्जी: नया कार्ड देगी बंगाल की TMC सरकार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने उन सभी को ‘नया आधार’ देने का ऐलान किया है, जिनके आधार कार्ड तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से बंद हुए। ममता बनर्जी ने इसकी शिकायत केंद्र सरकार से भी की है, साथ ही पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए नया ‘पोर्टल’ लॉन्च कर दिया गया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य के लोगों को सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसका भी आधार कार्ड बंद किया गया हो, वो तुरंत उस पोर्टल पर जाकर अपनी डिटेल्स दे दें, इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार उन्हें अपनी (राज्य) तरफ से ‘आधार’ जैसा कार्ड देगी। हालाँकि यूआईएडीआई ने कहा है कि तकनीकी खामियों की वजह से कुछ आधार बंद हुए थे, लेकिन सभी फिर से चालू किए जा चुके हैं।

ममता बनर्जी ने सोमवार (19 फरवरी 2024) को सचिवालय में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से पोर्टल को सूचित करने के लिए कहूँगा कि क्या उनका आधार कार्ड निष्क्रिय कर दिया गया है। उन्हें एक वैकल्पिक पहचान पत्र देंगे, उनकी तस्वीरें लेंगे और उसे जारी करेंगे ताकि बंगाल के लोग उन्हें मिलने वाले लाभों से वंचित न रहें। अगर आधार कार्ड नहीं है तो चिंता न करें। हम दूसरा कार्ड जारी करेंगे। हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो हम एक अलग कार्ड जारी करेंगे ताकि कोई भी हमारी सामाजिक कल्याण योजनाओं से वंचित न रहे।”

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले कार्ड बंद करना, किस तरह की राजनीति है? उन्होंने कहा कि वह आधार कार्ड को निष्क्रिय करने पर कानूनी सलाह ले रही हैं और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रधानमंत्री को भी लिखेंगी।

पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड के डिएक्टिवेशन का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा, “यह पता चला है कि नई दिल्ली में यूआईडीएआई का प्रधान कार्यालय बिना किसी जाँच या व्यक्तियों को सुने और राज्य सरकार को विश्वास में लिए, सीधे व्यक्तियों और परिवार के सदस्यों को पत्र जारी कर उनके आधार कार्ड को बंद करने के बारे में सूचित कर रहा है, इसके पीछे आधार (नामांकन और अद्यतन) विनियम, 2016 के नियन 28ए का हवाला दिया जा रहा है। यह आश्चर्य की बात है कि बिना किसी पूर्व सूचना के और कार्ड धारकों को सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की ऐसी प्रक्रिया घोर उल्लंघन है। आधार (नामांकन और अद्यतन) विनियम, 2016 के विनियम 29(1) और प्राकृतिक न्याय का भी घोर उल्लंघन है।”

ममता बनर्जी ने पत्र में आगे लिखा, “मैं आपसे बिना कारण बताए आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की ऐसी अचानक कार्रवाई के कारणों के बारे में जानना चाहती हूँ। क्या यह सिर्फ पात्र लाभार्थियों को लाभ से वंचित करने के लिए है या आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बड़े पैमाने पर लोगों के बीच दहशत की स्थिति पैदा करने के लिए है?” पत्र में उन्होंने आगे लिखा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और समाज के गरीब वर्ग के हितों के खिलाफ राज्य में आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की ऐसी कार्रवाई देखकर मैं वास्तव में स्तब्ध हूँ।

तकनीकी खराबी की वजह से दिक्कतें?

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि जिन लोगों के आधार कार्ड “निष्क्रिय” हो गए हैं, उन्हें वापस मिलेगा। उन्होंने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि आधार को बंद करने की प्रक्रिया रोक दी गई है और जिनके कार्ड पहले ही बंद हो चुके हैं, उन्हें वापस मिल जाएगा। मुझे उन लोगों से आवेदन लेने की जिम्मेदारी दी गयी है। आपको बस अपना नाम, फोन नंबर और आधार नंबर लिखना होगा और लिखना होगा कि इसे बंद कर दिया गया है। मैं इसे गृह मंत्रालय को सौंप दूँगा और समस्या का समाधान हो जाएगा।”

शांतनु ठाकुर ने कहा, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि यह कुछ तकनीकी खराबी के कारण हुआ।” उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूँ कि क्या यह (आधार) राज्य का मुद्दा है? यह विभाग सीधे केंद्र सरकार के अधीन है। आप ऐसे दावे (आधार बंद किए जा रहे) करके लोगों को गुमराह कर रही हैं। बता दें कि आधार एजेंसी ने पश्चिम बंगाल में आधार को लेकर फैली बातों को अफवाह करार दिया है और कहा है कि किसी का भी आधार ‘डिएक्टिवेट’ नहीं हुआ है। कुछ तकनीकी खामियों की वजह से ये दिक्कत आई थी।

Mamata Banerjee announces alternate AADHAR Card for minorities in West Bengal after mass deactivation by centre

केरल से ₹45 लाख चुरा कर अजमेर के दरगाह क्षेत्र में छिपे दानिश-शहजाद, पकड़ने आई पुलिस टीम पर की फायरिंग-मारा पेचकस: IPS अधिकारी घायल

राजस्थान के अजमेर में अपराधियों को पकड़ने गई केरल और अजमेर की पुलिस संयुक्त टीम पर हमले की खबर है। इस हमले में एक IPS अधकारी घायल हो गया है। हालाँकि, अधिकारी के साथ मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने दानिश और शहजाद को दबोच लिया। मूलतः उत्तराखंड निवासी इन दोनों आरोपितों के पास से हथियार और गोलियाँ बरामद हुई हैं। घटना मंगलवार (20 फरवरी 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अजमेर के दरगाह थाना क्षेत्र का है। मंगलवार को यहाँ केरल पुलिस अपने राज्य में हुई 45 लाख रुपए की चोरी की जाँच करने पहुँची थी। सहयोग के लिए केरल पुलिस ने अजमेर पुलिस को भी साथ लिया था। टीम का नेतृत्व आईपीएस अधिकारी शरण कांवले गोपीनाथ कर रहे थे। चोरी में उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र निवासी दानिश और शहज़ाद थे।

पुलिस को पता यह भी चला कि दोनों आरोपित दरगाह थाना क्षेत्र में फरारी काटने का इंतज़ाम बना रहे थे। सूचना सही पाई गई थी और दानिश व शहजाद पुलिस को दरगाह थाना क्षेत्र में ही मिल गए। पुलिस का दोनों से आमना-सामना शाम को हुआ। जैसे ही सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों ने दोनों आरोपितों को दबोचा, वो पुलिस बल से उलझ गए। दोनों छुड़ा कर भागने की कोशिश करने लगे।

इसी दौरान एक आरोपित ने पुलिस पर गोली चला दी। इतना ही नहीं, पेचकस से हमला करने की कोसिश हुई। इस संघर्ष में IPS शरण कांवले घायल हो गए। हालाँकि, अन्य पुलिसकर्मियों ने दानिश और शहजाद को भागने नहीं दिया और आखिरकार उन्हें दबोच लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस मामले में अब दोनों पर फायरिंग का भी मामला दर्ज किया गया है।

जब दोनों की तलाशी हुई तो उनके पास से 2 पिस्टल और 7 गोलियों के साथ एक पेचकस भी बरामद हुआ। इस पेचकस का इस्तेमाल हमले में भी हुआ था। दोनों के पास से कुछ नकदी भी मिली है, जिसे सील कर दिया गया है। घायल अंडर ट्रेनी IPS की हालात फ़िलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। केरल पुलिस दानिश और शहजाद को कानूनी प्रकियाएँ पूरी करके अपने साथ केरल ले गई।

‘हम प्राचीन एवं महान सभ्यताएँ, अब संबंधों को देंगे आधुनिक स्वरूप’: ग्रीस के प्रधानमंत्री से मिले PM मोदी, कृषि से लेकर डिफेन्स तक में साथी होगा यूनान

यूनान (Greece) के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस भारत पहुँचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद दोनों राजनेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। पीएम मोदी ने ग्रीक प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए याद किया कि पिछले वर्ष वो भी ग्रीस गए थे। उन्होंने बताया कि ये यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का संकेत है। पीएम मोदी ने कहा कि 16 वर्षों के बाद ग्रीस के प्रधानमंत्री का भारत आना अपने-आप में एक ऐतिहासिक अवसर है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी आज की चर्चाएँ बहुत ही सार्थक और उपयोगी रहीं, ये प्रशंसा का विषय है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की ओर अग्रसर हैं। सहयोग को नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए नए अवसरों की पहचान की गई। पीएम मोदी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की अनेक संभावनाएँ हैं, पिछले वर्ष इस क्षेत्र में किए गए समझौते के कार्यान्वयन के लिए दोनों देश कदम उठा रहे हैं। पीएम मोदी ने बताया कि फार्मा, मेडिकल उपकरण, तकनीक, खोज, स्किल डेवलपमेंट और स्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “दोनों देशों के स्टार्टअप्स को आपस में जोड़ने पर चर्चा हुई। शिपिंग और कनेक्टिविटी दोनों देशों के लिए उच्च प्राथमिकता के विषय हैं, इनमें भी सहयोग को बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। डिफेंस और सिक्योरिटी में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। इस क्षेत्र में वर्किंग ग्रुप के गठन से हम डिफेन्स, साइबर सिक्योरिटी, आतंकवाद निरोध और समुद्री सुरक्षा जैसी साझा चुनौतियों पर आपसी समन्वय बढ़ा सकेंगे। भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग के लिए नए अवसर बन रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ग्रीस की चिंताएँ एवं प्राथमिकताएँ समान हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन और महान सभ्यताओं के रूप में भारत और ग्रीस के बीच गहरे सांस्कृतिक और पीपल-टू-पीपल संबंधों का लंबा इतिहास है, विचारों का आदान-प्रदान होता रहा है। इन संबंधों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए कई आधुनिक अवसरों की पहचान हुई। 2025 में भारत-ग्रीस के कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ मनाई जाएगी, इसके लिए एक्शन प्लान बना है।

इसका तहत दोनों देशों के साझा धरोहर और अन्य उपलब्धियों को वैश्विक मंचों पर दर्शाया जाएगा। दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस पर सहमति जताई गई कि कूटनीतिक तरीकों से ही मसलों का हल संभव है। इंडो-पैसिफिक में ग्रीस की भूमिका का भारत ने स्वागत किया। UN व अन्य वैश्विक संस्थानों में सुधार कर के उन्हें समकालिक बनाए जाने पर भी बल दिया गया। ग्रीस और भारत के संबंध कई ईसापूर्व पहले तक जाते हैं।

जिस हिरोइन से ‘रेप’ करना चाहता था मंसूर अली खान, उस पर अब तमिलनाडु के नेता ने की गंदी बात: कहा- ₹25 लाख में आई… चेतावनी के बाद माँगी माफी

तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक (AIADMK) पार्टी के पूर्व नेता एवी राजू ने दक्षिण फिल्मों की हिरोइन तृषा कृष्णन पर एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया, जिसे सुन अभिनेत्री भड़क गईं हैं। एक्ट्रेस ने पूर्व नेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं। अभिनेत्री ने भी उनकी आलोचना की है।

जानकारी के अनुसार, सालेम के नेता एवी राजू को AIADMK से 17 फरवरी को निकाल दिया गया था। इसके बाद पार्टी के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेत्री तृषा पर काफी आपत्तिजनक बयान दिया। राजू ने कहा कि जब 2017 में उनकी पार्टी के भीतर विधायकों ने बगावत की थी तो इन विधायकों को कूवाथुर में स्थित गोल्डन बे रिजॉर्ट में ठहराया गया था। यहाँ पर पार्टी के विधायकों के मनोरंजन के इंतजाम हुए थे।

उन्होंने इसी बयान में आगे कहा कि इस रिजॉर्ट में अभिनेत्री तृषा को भी बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री तृषा को एक विधायक के कहने पर बुलाया गया था और उन्हें इसके लिए ₹25 लाख दिए गए थे। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एवी राजू के यह आरोप AIADMK के पूर्व विधायक वेंकटचालम पर हैं। उन्होंने तृषा को बुलाने के सम्बन्ध में कहा कि वेंकटचालम कोई युवा लड़की चाहते थे। एवी राजू ने यह सब इंतजाम करने के आरोप एक अन्य अभिनेता पर लगाए हैं। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर खलबली मच गई और उनकी आलोचना हुई।

तृषा ने अपने ऊपर दिए गए बयान पर एक्स पर ट्वीट कर जवाब दिया, “मुझे यह देख कर बहुत पीड़ा होती है कि निचले और तुच्छ लोग ध्यानाकर्षण के किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। तुम चिंता ना करो, इस पर मैं कड़ी कार्रवाई करूँगी। जो भी कहा जाना था इस मामले में कहा जा चुका है, और अब मामला कानूनी रूप से देखा जाएगा।”

तृषा के इस जवाब के बाद एवी राजू ने तृषा से माफ़ी माँग ली। राजू ने कहा कि उन्होंने सिर्फ वह बताया जो उन्हें वेंकटचालम से पता चला था। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीक से पेश किया गया और अगर इससे किसी को दुख हुआ है तो वह इसके लिए माफ़ी माँगते हैं।

हालाँकि, अभी यह नहीं स्पष्ट हुआ है कि माफ़ी के बाद आगे तृषा की रणनीति क्या होगी। यह स्पष्ट है कि तृषा को इस मामले में बड़े स्तर पर समर्थन हासिल हुआ है। तृषा के समर्थन में FEFSI (फिल्म एम्प्लोयी फेडरेशन ऑफ साउथ इंडिया) ने भी एक आधिकारिक बयान जारी करके एवी राजू के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

तृषा पर मंसूर अली खान का विवादित बयान

इससे पहले तृषा को लेकर दक्षिणी फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता मंसूर अली खान ने भी विवादित बयान दिया था। मंसूर अली खान ने कहा था, “मुझे जब मालूम हुआ कि मैं तृषा के साथ काम कर रहा हूँ तो मुझे लगा कि यह एक बेडरूम सीन होगा। मुझे लगा कि मैं फिल्म में तृषा को उठाकर बेडरूम में ले जाऊँगा जैसा मैंने और भी कई अभिनेत्रियों के साथ पहले फिल्मों में किया है। मैंने पहले भी कई रेप सीन किए हैं और मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन, इन लोगों ने कश्मीर में शूटिंग के दौरान मुझे तृषा को देखने तक नहीं दिया।”

मंसूर ने यह बयान फिल्म विजय को लेकर दिया था, जिसमें वह और तृषा तथा विजय साथ में काम कर रहे थे। इसके बाद तृषा ने उन्हें करारा जवाब दिया था। तृषा ने ट्विटर पर लिखा था, “मेरी जानकारी में एक वीडियो आया है, जिसमें मंसूर अली खान मेरे बारे में उल्टी सीधी बातें कर रहे हैं। मुझे यह बयान स्त्री-विरोधी, रूढ़िवादी, अश्लील और भद्दा लगा। मैं इसकी निंदा करती हूँ। वो मेरे साथ काम करने की उम्मीद करते रह सकते हैं, लेकिन यह मेरी खुशकिस्मती रही है कि मैंने उनके जैसे नीच आदमी के साथ कभी काम नहीं किया है और कोशिश करूँँगी कि भविष्य में भी ना करूँ। उनके जैसे लोग मानवता पर दाग हैं।” इसके बाद इस मामले ने कानूनी रूप ले लिया था लेकिन उन पर एक अदालत ने ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया था।

सहेली गुड्डी के साथ हमबिस्तर थी इशरत परवीन, 10 साल के श्रेयांशु ने आपत्तिजनक हालत में देखा: चाकुओं से गोदकर कर दी हत्या

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में रविवार (18 फरवरी 2024) को एक 10 वर्षीय मासूम की उसके ही घर में निर्ममता से हत्या कर दी गई। मृतक श्रेयांशु शर्मा को चाकू घोंपे गए थे और सिर पर किसी बड़ी चीज से वार किया गया था। इतना ही नहीं, बच्चे के हाथों की नसें भी काट दी गई थी। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए मंगलवार (20 फरवरी 2024) को मृतक की माँ सहित 2 महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।

मृतक श्रेयांशु की माँ शांता शर्मा उर्फ गुड्डी का इशरत परवीन नाम की एक महिला महिला के साथ समलैंगिक यानी लेस्बियन संबंध थे। श्रेयांशु ने अपनी माँ को इशरत के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद दोनों का डर सताने लगा कि यह बात वह किसी और को ना बता दे। बदनामी से बचने के लिए शांता ने अपनी पार्टनर इशरत परवीन के साथ मिलकर अपने बेटे की हत्या कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला हुगली जिले के कौननगर क्षेत्र का है। यहाँ 18 फरवरी को 10 साल के मासूम श्रेयांशु की उनके ही घर में लाश मिली थी। हत्या से पहले टीवी की आवाज बढ़ा दी गई थी और पालतू कुत्ते को बाँध कर उसके मुँह को बंद कर दिया गया था। कक्षा 4 में पढ़ने वाले श्रेयांशु के दोनों हाथों की नसों को काट दिया गया था और सिर पर गणेश जी की मूर्ति से वार कर दिया था।

हत्या के लिए सब्ज़ी काटने वाली छुरी का प्रयोग किया गया था। श्रेयांशु के पिता पंकज शर्मा ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पंकज कोलकाता के एक निजी कंपनी में काम करते थे। वहीं, शांता एक कॉस्मेटिक की दुकान पर काम करती थी। इशरत परवीन और शांता शादी के पहले से सहेली थी। शादी के पहले से ही दोनों के समलैंगिक संबंध थे।

शांता की शादी 2012 में पंकज शर्मा हुई थी। वहीं, इशरत परवीन की शादी 2018 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही इशरत परवीन ने अपने पति का घर छोड़ दिया। इधर शांता के भी अपने पति से अच्छे रिश्ते नहीं थे। पंकज अपने घर से दूर कोलकाता में रहकर नौकरी किया करते थे। इस बीच शांता और इशरत के रिश्ते बदस्तूर जारी रहे। शादी के बाद भी दोनों अक्सर मिला करते थे।

पुलिस ने जब इस मामले की जाँच शुरू की तो शांता के घर एक टेढ़ा-मेढ़ा चाकू बरामद हुआ। इसी से श्रेयांशु के शरीर पर अनगिनत वार किए गए थे। पंकज ने पुलिस से बताया कि उनका किसी के साथ कोई झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी। हालाँकि, श्रेयांशु का कुछ दिन पहले एक सीनियर छात्र से झगड़ा हुआ था, लेकिन पुलिस यह बात गले नहीं उतरी कि मामूली झगड़े में इस तरह हत्या को अंजाम दिया गया।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जाँच की तो श्रेयांशु के घर से दो महिलाएँ निकलते हुए नजर आईं। इनमें से एक श्रेयांशु की माँ थी और दूसरी उसकी सहेली इशरत परवीन। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की तो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। घटना के दिन भी शांता ने इशरत से फोन पर बात की थी। दोनों का मोबाइल टावर भी घटनास्थल पर दिखा रहा था।

श्रीरामपुर के डीसीपी अर्णब विश्वास के अनुसार, कुछ ही दिनों पहले शांता के बेटे श्रेयांशु ने दोनों सहेलियों को एक ही बिस्तर पर हमबिस्तरी करते देख लिया था। शांता को डर था कि उनका बेटा किसी के आगे भेद न खोल दे। आखिरकार राज को राज ही रखने के लिए शांता ने अपनी सहली इशरत के साथ मिल कर अपने ही बेटे की हत्या की साजिश रच डाली।

18 फरवरी को जब शांता के पति घर से बाहर थे तब उसने अपनी सहली इशरत के साथ मिल कर श्रेयांशु को चाकुओं से गोद कर मार डाला। पुलिस ने शांता और उनकी लेस्बियन साथी इशरत परवीन को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया है। इस मामले में यह पता चला है कि पंकज को अपनी पत्नी के समलैंगिक होने की जानकारी पहले से ही थी।

’18 की हो या 40 साल की, जो अच्छी लगती उसे उठा लेते थे शाहजहाँ शेख के लोग’: मीडिया को पीड़िताओं ने बताया दर्द, बंगाल के CS-DGP को ST आयोग का नोटिस

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण को लेकर विरोध प्रदर्शन के स्वर और आक्रामक होते जा रहे हैं। अब इस मामले में ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)’ ने भी पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। साथ ही संस्था के उपाध्यक्ष अपनी टीम के साथ क्षेत्र का दौरा करेंगे। NCST ने स्पष्ट किया है कि आयोग इस मामले की जाँच करेगा। साथ ही CS और DGP से जवाब माँगा गया है कि इस मामले में की गई कार्रवाइयों से वो अवगत कराएँ।

इन दोनों ही अधिकारियों से कहा गया है कि अगर उन्होंने तय समयसीमा में जवाब नहीं दिया तो उन्हें तलब किया जा सकता है। ये नोटिस मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को जारी किया गया। संदेशखाली मामले में मुख्य अभियुक्त TMC नेता शाहजहाँ शेख है, जो फ़िलहाल फरार है। ‘दैनिक भास्कर’ की ग्राउंड रिपोर्ट में एक महिला ने बताया कि ये सब 13 साल से चल रहा था। जो भी महिला उन्हें सुंदर लगती, उसे उठा लिया जाता था और जितने दिन मन हो उतने दिन अपने पास रखते थे।

एक महिला ने बताया कि वो नहीं गई तो उसके पति को उठा लिया गया और मारा-पीटा गया। ये इलाका बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ से अभिनेत्री नुसरत जहाँ सांसद हैं। इलाके में ऐसे संवेदनशील और गंभीर माहौल होने के बावजूद वो यॉट पर वैलेंटाइन्स डे मनाती हुई देखी गईं। वहीं TMC के ही सुकुमार महतो यहाँ से विधायक हैं। शाहजहाँ शेख के दोनों शागिर्द शिबू हाजरा और उत्तम सरदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं। संदेशखाली के पात्रोपाड़ा में महिलाओं का प्रदर्शन जारी है।

शाहजहाँ शेख राशन घोटाले में भी आरोपित है। इसी मामले में ED उसे गिरफ्तार करने पहुँची थी, लेकिन उसके समर्थकों ने प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हमला बोल दिया। एक महिला ने बताया कि TMC के दफ्तर में बैठक होती थी और उसमें जो नहीं जाता था उससे मारपीट की जाती थी। बैठक के बाद मर्दों को घर भेज दिया जाता था, महिलाओं को रख लिया जाता था और उनके साथ गलत हरकतें की जाती थीं। 18-40 साल तक की उम्र की महिलाओं को शिकार बनाया जाता था।

महिलाओं का सीधा कहना है कि शाहजहाँ शेख, उत्तम सरकार और शिबू हाजरा मिल कर ये सब करते थे। एक महिला ने बताया कि वो कई बार थाने गई लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी। महिलाएँ अपने बच्चों का वास्ता देती थी, लेकिन उन्हें नहीं छोड़ा जाता था। एक महिला ने बताया कि उसकी डेढ़ बीघा जमीन कब्जा ली गई है। महिलाओं ने कहा कि वो गरीब परिवार से आती हैं, उन्होंने कुछ कहा तो मारी जाएँगी। महिलाओं ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित SIT भी उनसे उलटे-सीधे सवाल करती है, बातों में उलझा कर रखती है।

यौन शोषण की लगभग 30 शिकायतें हैं, जिसमें एक FIR ही दर्ज की गई थी। सामाजिक कार्यकर्ता पियाली दास केस दर्ज कराने में इन महिलाओं की मदद कर रही हैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को इलाके में जाने से पुलिस रोक रही थी, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद वो यहाँ पहुँचे। उन्होंने महिलाओं से बात कर के कहा कि उनके अनुभव रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कह रही हैं कि सब भाजपा का किया-धरा है। सरकार मामले को रफा-दफा करने का प्रयास कर रही है।

अब्दुल्ला बने शिव, फातिमा बनी कविता: 25 साल पहले मकान मालिक ने बनाया था मुस्लिम, फिर से सनातनी हुए पति-पत्नी

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक मुस्लिम दम्पति ने घर वापसी की है। अब अब्दुल्ला शिव प्रसाद बन चुके हैं, जबकि उनकी बीवी फातिमा अब कविता के नाम से जानी जाएँगी। मंगलवार (20 फरवरी 2024) को इस परिवार ने विधि-विधान से सुंदरकांड का पाठ और हवन आदि कर घरवापसी की। 25 साल पहले इस्लाम कबूल करने वाले इस दम्पति ने अपना जीवन सनातनी के रूप में बिताने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिव प्रसाद मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले हैं। लगभग 25 साल पहले वो रोजी-रोटी के मकसद से फतेहपुर के थाना क्षेत्र हथगाम आए थे। यहाँ वो अधारी गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति के घर में किराए पर रहने लगे। मकान मालिक अक्सर उनसे इस्लाम कबूलने के लिए कहा करता था। एक दिन उसके प्रभाव में आकर पति-पत्नी ने इस्लाम कबूल कर लिया। शिव प्रसाद ने अपना नाम अब्दुल्ला और पत्नी कविता का नाम फातिमा कर दिया।

लगभग 6 महीने पहले शिव प्रसाद ने गाँव अधारी में अपना मकान भी बनवा लिया है। उनका कहना है कि वो सनातनी थे और भविष्य में भी वही रहेंगे। इस्लाम कबूलने की वजह उन्होंने आसपास के लोग और वैसा ही माहौल बताया। लगभग 20 दिन पहले शिव प्रसाद ने एक स्थानीय हिन्दू संगठन राम दल के अध्यक्ष अगेन्द्र साहू से सम्पर्क किया और फिर से सनातन में आने की इच्छा जताई। अगेन्द्र साहू के मुताबिक उन्होंने धर्मान्तरित दम्पति को सुरक्षा का भरोसा दिया। आखिरकार मंगलवार को पति-पत्नी ने घर वापसी कर ली।

इस मौके पर शिव प्रसाद के घर में सुंदर काण्ड का पाठ हुआ, जिसमें स्थानीय हिन्दू संगठन के सदस्यों ने भी भागीदारी की। बाद में हवन हुआ जिसमें सनातनी परिधान में पति-पत्नी शामिल हुए। दोनों ने फिर से सनातनी बनने पर बेहद ख़ुशी जताई है। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी सनातनी ही रहने का संकल्प लिया।

Shiv Prasad and Fatima become Abdullah after returning home in Fatehpur

बंगाल पुलिस के गले पड़ा ‘खालिस्तानी’ दाँव, बोले BJP नेता सुवेंदु अधिकारी- साबित करो, नहीं तो लेंगे लीगल एक्शन

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी को पीड़ितों से मिल उनका हाल जानने की अनुमति मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया बवाल सामने आया। बंगाल पुलिस ने एक वीडियो शेयर किया और दावा किया कि सुवेंदु अधिकारी ने उनके सिख पुलिस अधिकारी को ‘खालिस्तानी’ कहा जो कि किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

अजीब बात ये है कि पुलिस ने अपने ट्वीट के नीचे आए रिप्लाई को हाइड किया हुआ है जिससे पता नहीं चल पा रहा कि जनता का इस पर क्या रिएक्शन है। हालाँकि उनके इस ट्वीट के बाद सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा है कि बंगाल पुलिस जो इल्जाम लगा रही है वो साबित करे वरना वो लीगल एक्शन लेंगे

बंगाल पुलिस ने शेयर की वीडियो

बंगाल पुलिस ने अपने लिखा था- “इस घटना क्रम से नाराज हम, पश्चिम बंगाल पुलिस बिरादरी, इस वीडियो को साझा कर रहे हैं जिसमें हमारे ही एक अधिकारी को राज्य के विपक्ष के नेता द्वारा ‘खालिस्तानी’ कहा गया। उनका ‘दोष’ यह है कि वह एक गौरवान्वित सिख हैं और एक सक्षम पुलिस अधिकारी भी हैं जो कानून लागू करने की कोशिश कर रहे थे।”

पुलिस ने लिखा, “यह टिप्पणी जितनी दुर्भावनापूर्ण और नस्लीय है, उतनी ही सांप्रदायिक रूप से भड़काने वाली भी है। यह एक आपराधिक कृत्य है। हम स्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान और विश्वास पर अकारण, अस्वीकार्य हमले की निंदा करते हैं जिसका उद्देश्य लोगों को हिंसा करने और कानून तोड़ने के लिए उकसाना है। हम इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

क्या है वीडियो में

वीडियो में एक सिख पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं, जिनका नाम जसप्रीत सिंह है। वह बंगाल पुलिस में एएएसपी के पद पर तैनात हैं। वीडियो में दिखता है कि संदेशखाली के रास्ते में कुछ लोग पुलिस से भिड़ रहे हैं। इस बीच एक आवाज आती है- ये एक खालिस्तानी है।

अब इस क्लिप से ये स्पष्ट नहीं है कि खालिस्तानी बोला किसने, लेकिन वीडियो की अगली क्लिप में उन्हें एक भाजपा महिला नेता से पूछते देखा जा सकता है कि आखिर कैसे उन्हें खालिस्तानी कहा गया, उनके धर्म पर बात उठाई गई। वह कहते हैं- “सिर्फ इसलिए कि मैंने पगड़ी पहनी है, आप लोग मुझे खालिस्तानी कह रहे हैं? क्या आपने यही सीखा है? यदि कोई पुलिस अधिकारी पगड़ी पहनता है और अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाता है, तो वह आपके लिए खालिस्तानी बन जाता है? आपको शर्म आनी चाहिए।”

इस मामले पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ मौजूद भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा है कि ये खालिस्तानी शब्द उन लोगों ओर से बिलकुल नहीं बोला गया। वहीं सुवेंदु अधिकारी ने कहा है- “मैं बंगाल की एडीजी सुप्रतीम सरकार से कहूँगा कि वो या तो 24 घंटों के अंदर सारे आरोपों को साबित करें वरना वो उनके खिलाफ एक्शन लेंगे।”

वहीं मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा कि उन्होंने सुवेंदु अधिकारी से बात की है। उन्होंने कहा है कि उन्होने ऐसे शब्द नहीं कहे। सिरसा कहते हैं कि अधिकारी तो सिख समुदाय और समुदाय परंपरा का सम्मान करते हैं। सिखों को टीएमसी का राजनीतिक मोहरा नहीं बनाया जाएगा। मैं पश्चिम बंगाल पुलिस से फिर आग्रह करूँगा कि वह संदेशखाली के लुटेरों और बलात्कारियों को खोजने पर ध्यान केंद्रित करे।

किसान आंदोलन 2.0: केंद्र सरकार ने पाँचवें दौर की वार्ता के लिए बुलाया, अब तक कोई जवाब नहीं आया, चौथे दौर के प्रस्ताव को आंदोलनकारियों ने ठुकराया

दिल्ली को घेरने के लिए पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर डटे किसान आंदोलन कारियों को केंद्र सरकार ने पाँचवें दौर की वार्ता के लिए बुलाया है। केंद्र सरकार की तरफ से कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि सरकार इस समस्या का हल चाहती है, इसके लिए वो बातचीत कर रास्ता निकाल रही है। सरकार ने किसानों की सभी बातों को सुना है और चौथे दौर की बातचीत के बाद किसानों की तरफ से जो प्रतिक्रिया आई, सरकार ने उसका भी संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसानों ने सरकार के सामने 13 सूत्रीय मांगें रखी थीं, इनमें 10 पर सहमति बन गई है। तीन माँगें पूरी किए जाने पर को लेकर पेच फंसा है। सरकार का कहना है कि इन मांगों को पूरा करने के लिए वक्त की जरूरत है। हालाँकि, सरकार ने एमएसपी गारंटी को लेकर किसानों के सामने चौथे दौर की वार्ता के दौरान एक फॉर्मूला भी सामने रखा था, जिसे किसानों ने खारिज कर दिया है। इसके बाद सरकार ने अब पाँचवें दौर की वार्ता की पेशकश की है। वहीं, सरकार से बातचीत को लेकर किसान आपस में चर्चा कर रहे हैं और एक बैठक कर रहे हैं, जिसके बाद पाँचवें दौर की बातचीत के लिए मुद्दे तय किए जाएँगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कही ये बात

किसानों से पाँचवें दौर की वार्ता को लेकर कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। सरकार सभी समस्याओं का समाधान ढूँढ रही है। उन्होंने कहा, “चौथे दौर तक की बातचीत होने के बाद किसान संगठनों के माध्यम से जो प्रतिक्रिया आई, हम उसे संज्ञान में लेते हुए पुन: पाँचवें दौर की बैठक और उस बैठक में ऐसे सभी मुद्दे, जिन मुद्दों पर हम सभी मिलकर समाधान निकाल सकते हैं, हम वार्ता के लिए तैयार हैं। चाहे वो एमएसपी का मुद्दा हो, चाहे पराली का मुद्दा हो, चाहे एफआईआर का हो या क्रॉप डायवर्सिफिकेशन का हो। ऐसे सभी मुद्दे पर बातचीत के लिए हम तैयार हैं। मैं यही निवेदन करूँगा कि सबको शांति के साथ ऐसे विषयों पर बातचीत करते हुए समाधान ढूँढने की जरूरत है। ये अपील है कि वो शांति बनाए रखें। और बातचीत के लिए मैं हमेशा से कोशिश यही करता हूँ कि हम सब मिलकर समाधान ढूँढे। बातचीत करें, वार्ता जारी रहनी चाहिए। कई चीजें सहमति बनती हैं, कई नहीं बनती हैं। कई विषय आते हैं। हम जब बातचीत करेंगे तो आपसी सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाधान के रास्ते निकलते हैं।”

केंद्रीय कृषि मंत्रि अर्जुन मुंडा ने पाँचवें दौर की वार्ता के लिए किसान संगठनों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अभी तक किसानों की तरफ से कोई जानकारी नहीं आई है। सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है। उन्होंने कहा, “अभी तक किसानों की तरफ से पाँचवें दौर की वार्ता की कोई सूचना आई नहीं है। हम यही अपील करेंगे कि पाँचवें दौर की वार्ता के लिए हम सबको बातचीत के लिए आगे आना चाहिए। ऐसे मुद्दे पर संवेदनशील होकर हम अपना पक्ष रखें, क्योंकि सरकार भी यही चाहती है कि इसका समाधान हो। तत्कालीन दृष्टि से भी, दीर्घकालीन दृष्टि से भी। हमें समस्या के समाधान की दिशा में वार्ता के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए।”

बता दें कि किसानों के साथ चौथे दौर की वार्ता में केंद्र सरकार ने रविवार (18 फरवरी 2024) को नए प्रस्ताव दिए थे, जिसके बाद किसानों ने कहा था कि वो बातचीत करके सरकार को सूचित कर देंगे। सरकार ने अपनी तरफ से चौथे दौर की वार्ता के दौरान जो प्रस्ताव दिया था, उसमें एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट की बात कही थी। जिसमें ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होनी थी। इसमें खरीद की लिमिट भी नहीं रहेगी। सरकार ने इसमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास को जोड़ने और खरीद के लिए पाँच साल की गारंटी की बात कही थी।

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। हालाँकि बाद में किसानों ने कहा था कि उन्हें एमएसपी से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है।

हाईकोर्ट का आदेश भी किसानों के ठेंगे पर, ट्रैक्टर-ट्रॉली के इस्तेमाल से रोका तो JCB और मिट्टी खोदने वाली मशीनें लेकर पहुँचे

किसानों का दूसरा आंदोलन और उग्र होता जा रहा है। वो मिट्टी खोदने वाली मशीनें लेकर पंजाब-हरियाणा की सीमाओं पर पहुँच गए हैं। हरियाणा पुलिस ने कहा है कि ये मशीनें किसान हटाएँ, वरना कार्रवाई की जाएगी। किसानों ने अपना ‘दिल्ली चलो’ मार्च एक बार फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। बता दें कि इन मशीनों के इस्तेमाल से पंजाब-हरियाणा सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को नुकसान पहुँच सकता है। किसान पोकलेन और JCB लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं।

इन मशीनों के मालिकों से पुलिस ने कहा है कि वो ये मशीनें किसान प्रदर्शनकारियों को उपलब्ध न कराएँ। साथ ही उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने के लिए भी कहा गया है। इसे गैर-जमानती अपराध बताते हुए कहा गया है कि इन मशीनों का इस्तेमाल कर के सुरक्षा बलों को नुकसान पहुँचाए जाने की आशंका है, ऐसे में इनके मालिक आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं। MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार का प्रस्ताव भी ख़ारिज कर दिया है।

बात न माने जाने पर हरियाणा पुलिस इन बुलडोजरों और मिट्टी खोदने वाली मशीनों को जब्त करेगी। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर ने कहा कि ऐसे उपकरण सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। 13 फरवरी को ‘किसान आंदोलन 2.0’ शुरू हुआ था। पंजाब-हरियाणा के शम्भू एवं खनौरी बॉर्डर पर ये किसान डटे हुए हैं। हरियाणा सीमा पर ही उन्हें रोक कर रखा गया है। 3 केंद्रीय मंत्रियों की समिति 4 दौर की बातचीत किसान संगठनों के साथ कर चुकी है।

उधर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि हाइवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसान अमृतसर से दिल्ली ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर निकले हुए हैं, जो गैर-कानूनी है। मुख्य न्यायाधीश GS संधावालिया और जस्टिस लपिता बनर्जी की पीठ ने कहा कि सबको अपने अधिकार पता हैं, लेकिन कुछ संवैधानिक कर्तव्य भी होते हैं। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि उसने किसानों के इतने बड़े विरोध प्रदर्शन को अनुमति कैसे दी।

पंचकूला स्थित ‘अमरावती एन्क्लेव’ के रहने वाले अधिवक्ता उदय प्रताप सिंह ने इस संबंध में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे किसानों द्वारा सड़क जाम करने से एम्बुलेंसों, स्कूली बसों और रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहाँ एक तरफ किसान उग्र रूप अख्तियार किए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ मीडिया में उनके नेता शांति की बातें कर रहे हैं। ‘पंजाब हरियाणा किसान मजदूर संघ’ के अध्यक्ष सरवन सिंह पंधेर ने किसानों से कहा कि वो शांतिपूर्वक दिल्ली कूच करें।

शम्भू बॉर्डर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्रधानमंत्री की भी जिम्मेदारी है कि वो हमें सुनें। उन्होंने दावा किया कि उनलोगों ने भी देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट दिया है, देश सबका है और पीएम सबके हैं, ऐसे में उन्हें आकर स्थिति को सँभालना चाहिए और उनकी माँगों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेढ़-दो लाख करोड़ रुपए बड़ी रकम नहीं है, फैसला केंद्र को लेना है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वो इस गतिरोध को खत्म करें और लोकतान्त्रिक तरीके से प्रदर्शन करने दें।