Home Blog Page 1156

जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का बदल गया नाम, अब ‘मनकामेश्वर’ से होगी पहचान: योगी सरकार के निर्देश पर UPMRC ने बदले बोर्ड

उत्तर प्रदेश के आगरा में जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का नाम ‘उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC)’ ने बदल दिया है। अब आगरा के भूमिगत मेट्रो स्टेशन का नाम मनकामेश्वर मेट्रो स्टेशन हो गया है। इसे लेकर स्टेशन के बाहर बोर्ड भी दिखने लगे हैं।

इंडिया टुडे के अनुसार उनसे बात करते हुए, यूपीएमआरसी के उप महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा ने पुष्टि की कि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार, नाम पहले ही बदल दिया गया था। अब नया नाम स्टेशन पर और उसके आसपास सभी साइनेज पर दिखाई देता है।

पुरानी खबरों में बताया गया है कि पहले इस स्टेशन का नाम डॉक्टर भीम राव अंबेडकर के नाम पर रखने की भी चर्चा हुई थी। लेकिन बाद में मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर मनकामेश्वर मेट्रो रखा गया। दरअसल, पिछले पिछले वर्ष में सीएम योगी मेट्रो के निरीक्षण के दौरे पर आए थे। तब जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का नाम बदलने का जिक्र हुआ था।

सीएम योगी के सामने उस समय कई लोगों ने माँग रखी थी कि मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर मनकामेश्वर मंदिर रखा जाए इसके बाद ही सीएम योगी ने इसपर विचार करके निर्णय लेने को कहा था। बाद में फैसला आया है कि मेट्रो स्टेशन का नाम मनकामेश्वर किया जाए।

आजतक की रिपोर्ट बताती है कि इस फैसले के बाद मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने कहा इस सरकार में कई जगहों के नाम बदले गए। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण मनकामेश्वर मंदिर ही है जिसकी स्थापना द्वापर काल में हुई थी। अकबर-शाहजहाँ तो बाद में आए। ऐसे में सीएम योगी ने मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर मनकामेश्वर किया ये बहुत सराहनीय है।

बता दें कि आगरा में जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन का नाम बदले जाने के बाद ईदगाह स्टेशन का नाम बदलने की बात भी कही जा रही है। इस संबंध में छावनी विधानसभा इलाके के बीजेपी विधायक जीएस धर्मेश ने कहा कि उनकी माँग है कि ईदगाह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रावली महादेव रेलवे स्टेशन हो। ईदगाह नाम से उन्हें गुलामी की याद आती है।

‘सोमनाथ को विवादित बनाया, पावागढ़ में धर्म-ध्वजा नहीं लहराई, मोढेरा को वोट बैंक से जोड़ा’: वालीनाथ मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद कॉन्ग्रेस पर बरसे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (22 जनवरी, 2024) को मेहसाणा के वालीनाथ महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की, मंदिर का उद्घाटन किया, इसके बाद उन्होंने नवसारी में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की। अमृत सिद्धि योग में पीएम मोदी ने सोमनाथ के बाद गुजरात के सबसे बड़े शिव धाम में प्राण-प्रतिष्ठा की। उँझा-विसनगर रोड पर स्थित तारभ गाँव में ये 110 फ़ीट ऊँचा मंदिर बना है। पीएम मोदी ने यहाँ 13,000 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और विशाल जनसभा को ही संबोधित किया।

नवसारी में पीएम मोदी ने कहा कि जब वो गुजरात में थे तो 5F की बात करते थे, जिसका मतलब था – फॉर्म, फॉर्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन, फैशन टू फॉरेन। पीएम मोदी ने समझाया कि किसान कपास उगाएगा, कपास फैक्ट्री में जाएगा, फैक्ट्री में बने धागे से परिधान बनेंगे, यही परिधान विदेशों के लिए निर्यात होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘पीएम मित्र पार्क’ भी इसी अभियान का हिस्सा है, नवसारी में जिस ‘पीएम मित्र पार्क’ का काम शुरू हुआ है, वो टेक्स्टाइल सेक्टर के लिए देश का पहला ऐसा पार्क है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे कपड़ा उद्योग को बल मिलेगा। कपड़ा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सूरत सिल्क सिटी का विस्तार नवसारी तक हो रहा है, इस सेक्टर में दुनिया के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्यातकों को भारत टक्कर देने लगा है और इसमें गुजरात की टेक्स्टाइल इंडस्ट्री का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी वहां से शुरू होती है, जहाँ दूसरों से उम्मीद खत्म होती है। बकौल पीएम मोदी, देश के गरीब को पहली बार ये भरोसा हुआ है कि उसे पक्का घर मिलेगा, क्योंकि मोदी की गारंटी है।

उन्होंने आगे कहा कि देश के गरीब को पहली बार ये भरोसा हुआ है कि उसे कभी भूखा नहीं सोना पड़ेगा, उसे दर्द नहीं सहना पड़ेगा – क्योंकि मोदी की गारंटी है। प्रधानमंत्री ने ध्यान दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस ने लंबे समय तक देश में और गुजरात में सरकार चलाई, लेकिन कभी जनजातीय क्षेत्रों, समंदर के तट पर बस गाँवों की सुध नहीं ली। पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा ने गुजरात में उमरग्राम से लेकर अम्बाजी तक, पूरे आदिवासी पट्टे तक मूल सुविधाएँ पहुँचाने के लिए अविरत काम किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी ने देश के गरीब, किसान, युवा और महिला सभी को सशक्त करने की गारंटी दी है और ये गारंटी सिर्फ योजनाएँ बनाने की नहीं है, बल्कि जो हकदार हैं उन तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने की गारंटी है। 21वीं सदी के भारत में बिजली पैदा करने में हमारे परमाणु बिजली घरों की भूमिका और बढ़ने जा रही है। तापी के काकरापार परमाणु ऊर्जा प्लांट में दो नए रिएक्टर राष्ट्र को समर्पित किए गए हैं और ये दोनों रिएक्टर ‘मेड इन इंडिया’ टेक्नोलॉजी से तैयार किए हैं। ये दिखाता है कि आज भारत कैसे हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है।”

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि सूरत के लोगों के लिए एक और अहम प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा है, 800 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि से बनने वाले तापी रिवर बैराज का आज शिलान्यास हुआ है। उन्होंने बताया कि ये बनने से सूरत में आने वाले कई वर्षों तक वाटर सप्लाई की समस्या का समाधान हो जाएगा। वहीं वालीनाथ मंदिर के उद्घाटन के मौके पर भी पीएम मोदी ने जम कर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और उसके हिन्दू विरोधी रवैये को उजागर किया।

पीएम मोदी ने कहा, “ये वही लोग हैं, जिन्होंने सोमनाथ जैसे पावन स्थल को भी विवाद का कारण बनाया। ये वही लोग हैं, जिन्होंने पावागढ़ में धर्मध्वजा फहराने की इच्छा तक नहीं दिखाई। ये वही लोग हैं, जिन्होंने दशकों तक मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर को भी वोटबैंक की राजनीति से जोड़कर देखा। ये वही लोग हैं, जिन्होंने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए, उनके मंदिर निर्माण को लेकर रोड़े अटकाए। और आज जब जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो चुका है, जब पूरा देश इससे खुश है तो भी नकारात्मकता को जीने वाले लोग नफरत का रास्ता छोड़ नहीं रहे हैं।”

‘मनोरंजन के लिए ₹25 लाख में तृषा कृष्णन को रिजॉर्ट में बुलाया गया था’: AIADMK के पूर्व नेता के बयान पर भड़की अभिनेत्री, मानहानि का भेजा नोटिस

अभिनेत्री तृषा कृष्णन ने AIADMK के पूर्व नेता एवी राजू को मानहानि का नोटिस भेजा है। तृषा ने माँग की है कि उन्हें एक निश्चित धनराशि चार दिनों के भीतर एवी राजू दें, वरना वह उन पर मुकदमा करेंगी। एवी राजू ने अभिनेत्री तृषा को लेकर हाल ही अपमानजनक बयान दिया था, जिसके बाद यह नोटिस भेजा गया है। तृषा ने नोटिस को अपने एक्स (पहले ट्विट्टर) हैंडल पर भी साझा किया है।

तृषा के वकीलों द्वारा भेजी गई नोटिस में कहा गया है कि एक धनराशि (जिसका खुलासा नहीं किया गया) चार दिनों के भीतर अभिनेत्री को दी जाए, क्योंकि राजू के बयान से वह लगातार मानसिक तौर से परेशान हैं। इसके अलावा, माँग की गई है कि नोटिस मिलने के बाद वह आगे से तृषा से सम्बंधित किसी भी प्रकार का कोई बयान ना दें।

लीगल नोटिस में यह भी माँग की गई है कि एवी राजू अपने खर्चे पर तृषा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से हटवाएँ। एवी राजू को आरोप टीवी चैनलों, यूट्यूब तथा ट्विटर से भी हटवाने होंगे। इसके लिए जो भी खर्च आएगा, इसका वहन उन्हें खुद करना होगा। इसके साथ ही नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर तृषा से माफी माँगने की बात कही गई है।

तृषा के वकीलों ने कहा है कि राजू को माफ़ीनामा एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र में भी प्रकाशित करवाना होगा। यह ऐसा समाचार पत्र होना चाहिए, जिसकी रोजाना 5 लाख प्रतियाँ बिकती हों। यही काम उन्हें एक तमिल दैनिक समाचार पत्र में भी करना होगा। यदि एवी राजू ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ आपराधिक एवं दीवानी मुकदमा किया जाएगा और इन सबका का खर्च उन्होंने वहन करना पड़ेगा।

तृषा के अलावा AIADMK के पूर्व विधायक जी वेंकटचलम ने भी ऐसा ही एक नोटिस भेजा है। राजू ने वेंकटचलम के लिए ही तृषा को बुलाए जाने से सम्बंधित बयान दिया था। वेंकटचलम ने अपने कानूनी नोटिस में माँग की है कि 24 घंटे के भीतर राजू को माफ़ी माँगनी होगी, वरना उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एवी राजू ने क्या कहा था?

सालेम के नेता एवी राजू को AIADMK से 17 फरवरी को निकाल दिया गया। इसके बाद पार्टी के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेत्री तृषा पर काफी आपत्तिजनक बयान दिया। राजू ने कहा कि जब 2017 में उनकी पार्टी के भीतर विधायकों ने बगावत की थी तो इन विधायकों को कूवाथुर में स्थित गोल्डन बे रिजॉर्ट में ठहराया गया था।

उन्होंने इसी बयान में आगे कहा कि इस रिसॉर्ट में पार्टी के विधायकों के मनोरंजन के लिए कई इंतजाम हुए थे। यहाँ अभिनेत्री तृषा को भी बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री तृषा को एक विधायक के कहने पर बुलाया गया था और उन्हें इसके लिए ₹25 लाख दिए गए थे। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि राजू के ये आरोप AIADMK के पूर्व विधायक वेंकटचलम पर हैं।

एवी राजू ने तृषा को रिसॉर्ट में बुलाने के सम्बन्ध में कहा कि वेंकटचलम कोई ‘बेहद युवा लड़की’ चाहते थे। एवी राजू ने यह सब इंतजाम करने के आरोप एक अन्य अभिनेता पर लगाए हैं। उन्होंने कहा था कि उस दौरान 100 से अधिक विधायकों के मनोरंजन के लिए कई और अभिनेत्रियों को भी बुलाया गया थआ। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर खलबली मच गई और उनकी आलोचना हो रही है।

तृषा ने अपने ऊपर दिए गए बयान पर एक्स पर ट्वीट कर जवाब दिया था, “मुझे यह देख कर बहुत पीड़ा होती है कि निचले और तुच्छ लोग ध्यानाकर्षण के किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। तुम चिंता ना करो, इस पर मैं कड़ी कार्रवाई करूँगी। जो भी कहा जाना था इस मामले में कहा जा चुका है और अब मामला कानूनी रूप से देखा जाएगा।”

अब कर्नाटक के सभी स्कूलों में गाना होगा ‘राज गान’: कॉन्ग्रेस सरकार का आदेश, प्राइवेट स्कूलों को भी करना होगा पालन

कर्नाटक सरकार ने 16 फरवरी को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सभी सरकारी स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और सरकार द्वारा वित्तपोषित स्कूलों को अपने कामकाज से पहले राज्य के ‘राज गान’ को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन इस मामले में बीजेपी ने हंगामा मचाया, तो सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। अब सरकार ने नया ऑर्डर जारी किया है, जिसमें ‘सभी स्कूलों’ में राज गान को अनिवार्य कर दिया गया है। कर्नाटक सरकार ने पिछले आदेश को ‘प्रिंटिंग की गलती’ कहते हुए पलड़ा झाड़ने की कोशिश की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक सरकार के कन्नड़ और संस्कृति विभाग ने 16 तारीख के आदेश में निजी स्कूलों को ‘राज गान’ के दायरे से बाहर रखा था। जिसमें कर्नाटक सरकार ने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि केवल सरकारी स्कूलों को स्कूल असेंबली के दौरान कुवेम्पु द्वारा लिखित राज्य गान- ‘जया भारत जननिया थानुजथे’ गाने के नियम का पालन करना अनिवार्य होगा।

कर्नाटक सरकार का 16 फरवरी 2024 का आदेश

हालाँकि अब बुधवार (21 फरवरी) को एक नया सरकारी आदेश आया है। इसके बाद कन्नड़ और संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदागी इसे “प्रिंटिंग की गलती” कहा है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों सहित सभी स्कूलों को स्कूल असेंबली के दौरान अनिवार्य रूप से राज्य गान गाने का निर्देश देने के लिए आदेश में सुधार किया जाएगा।

इस मामले में राज्य के कानून मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि जिन लोगों ने आदेश को तैयार करने में गलती की, उन्हें इसकी सजा भुगतनी पड़ेगी। अब सरकार द्वारा जारी किए गए ताजे आदेश में सरकारी, निजी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त समेत सभी स्कूलों को शामिल कर लिया गया है।

सरकार ने ये बदलाव तब किया, जब इस मामले को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष आर अशोक ने उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि 16 फरवरी के पहले सरकारी आदेश में कर्नाटक के राजगान ‘जय भारत जननिया थानुजथे’ जिसे कुवेम्पु ने लिखा है, को निजी स्कूलों में गाने से छूट क्यों दी गई थी? उन्होंने पूछा कि सरकार की इसके पीछे की मंशा क्या थी? क्या ये निजी स्कूल शिक्षा विभाग के दायरे में नहीं आते हैं?” बता दें कि कुवेम्पु को राष्ट्रकवि कहा जाता है और उनका पूरा नाम कुप्पलि वेंकटप्पा पुत्तपा है। साल 2004 में कर्नाचट सरकार ने इस गीत को राजगीत का दर्जा दिया था।

कुवेम्पु के नारे को भी बदलने की कोशिश?

कर्नाटक के सरकारी स्कूलों के द्वार पर लिखा रहता है, “This is a temple of knowledge, come inside with folded hands” लेकिन पिछले कुछ दिनों में इसे बदलकर “This is the temple of knowledge, ask boldly” कर दिया गया है। बीजेपी के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष और शिकारीपुरा से विधायक बी वाई विजयेंद्र ने सरकार पर इस मामले को लेकर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ कर रही है। उन्होंने इसे कवि कुवेम्पु का अपमान बताया है।

इधर संदेशखाली के रण में PM मोदी की एंट्री, उधर ग्रामीणों ने फूँक डाला शाहजहाँ शेख के भाई का ठिकाना: जनजाति आयोग को मिलीं प्रताड़ना-जमीन कब्जे की 23 शिकायतें

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली के रण में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एंट्री हो सकती है। बताया जा रहा है कि वो खुद पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना में स्थित इस इलाके में पहुँच कर पीड़िताओं से मुलाकात कर सकते हैं। बता दें कि संदेशखाली में राज्य की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) नेता शाहजहाँ शेख, उसके शागिर्दों शिबू हाजरा व उत्तम सरकार और इनके गुर्गों द्वारा कई महिलाओं के यौन शोषण के आरोप लगे हैं। ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)’ भी एक्शन में है।

गुरुवार (22 फरवरी, 2024) की सुबह NCST की टीम संदेशखाली पहुँची। जनजाति आयोग के समक्ष 23 महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय लोगों से बात कर के आयोग को प्रताड़ना से लेकर जमीन कब्जाने तक की 23 शिकायतें मिलीं। NCST के कार्यवाहक उपाध्यक्ष अनंता नायक ने कहा कि एक नेता के खिलाफ भी शिकायतें मिली हैं। आयोग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिपोर्ट सौंपेगा। इससे पहले ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ (NCW) और ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (NCSC) भी इलाके का दौरा कर चुका है।

हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के कई मामलों की जाँच चल रही है। शाहजहाँ शेख पिछले एक महीने से फरार है। राशन घोटाले में उसे पकड़ने गई ED की टीम पर हमला हुआ। बता दें कि 6 मार्च, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बारासात में महिला रैली प्रस्तावित है। बता दें कि बारासात भी नॉर्थ 24 परगना जिले में ही स्थित है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष एवं बालुरघाट से सांसद डॉ सुकांता मजूमदार ने कहा कि वो पीड़िताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलवाने में पार्टी मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि अगर संदेशखाली की माँएँ-बहनें पीएम मोदी से मिलना चाहती हैं तो हम इसमें उनकी मदद करेंगे। BJP ने संदेशखाली में यौन शोषण की घटनाओं को उजागर करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री भी जारी की है। 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में पीड़िताओं ने अपने अनुभव साझा किए हैं। इस मामले की रिपोर्टिंग करने पर ‘रिपब्लिक बांग्ला’ के पत्रकार सन्तु पान को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। भाजपा ने कहा कि सच हिला कर रख देने वाला है।

उधर संदेशखाली में स्थानीय लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। आक्रोशित लोगों ने रामपुर में मुख्य आरोपित शाहजहाँ शेख के भाई के मछली पालन वाले ठिकाने पर हमला कर के उसे आग के हवाले कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि TMC नेता शाहजहाँ शेख के भाई सिराजुद्दीन ने ये जमीन जनजातीय समाज से हड़पी है, जबरन कब्ज़ा किया है। शिबू हाजरा जहाँ ब्लॉक प्रमुख है, वहीं उत्तम सरकार टीएमसी का क्षेत्रीय अध्यक्ष था। शाहजहाँ शेख को बचाने के आरोप ममता बनर्जी की सरकार पर लग रहे हैं।

कब पेश होंगे केजरीवाल… ED ने सातवीं बार भेजा समन: AAP नेता बोले- 16 मार्च तक का समय चाहिए

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) मुखिया अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब घोटाला मामले में सातवाँ समन भेजा है। ED ने उनसे 26 फरवरी, 2024 को पेश होने को कहा है। CM केजरीवाल से पूछताछ के लिए ED पूर्व में 6 बार समन भेज चुकी है। लेकिन, केजरीवाल ED के सामने पेश होने से बचते आए हैं।

इससे पहले ED ने 14 फरवरी को समन जारी करके केजरीवाल से 19 फरवरी को पेश होने के लिए कहा था। हालाँकि, केजरीवाल ने ईडी के सामने पेश होने के बजाय दिल्ली विधानसभा में खुद ही विश्वास मत लाकर बहुमत सिद्ध कर दिया था और ED की पूछताछ में नहीं गए थे। उससे पहले भी जाँच एजेंसी कई बार AAP प्रमुख को पेश होने के लिए समन भेज चुकी थी लेकिन वह हर बार इससे बचते रहे। उनके पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने तो इस समन को राजनीतिक समन बता दिया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन को लेकर अदालत का रुख किया था और कहा कि अब अदालत इस पर गौर करेगी। हम अदालत का सम्मान करते हैं। अरविंद केजरीवाल ने बता दिया है कि बजट सत्र चल रहा है और उन्हें 16 मार्च तक का समय चाहिए। अदालत ने भी इसकी अनुमति दे दी। अब फिर से ईडी ने समन जारी किया। अगर एजेंसी को अपनी शर्तों का पालन करना था तो पहले अदालत में क्यों गए? हम अदालत में नहीं गए, लेकिन ईडी गई।”

अब देखना होगा कि दिल्ली सीएम सातवें समन के बाद जाँच एजेंसी के आगे पेश होते हैं या फिर कोई अन्य कारण देकर पेश होने से मना कर देते हैं। पिछली बार जब अरविंद केजरीवाल पेश नहीं हुए तो ईडी ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 17 फरवरी 2024 को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा था।

उससे पहले ED ने 3 फरवरी, 2024 को कोर्ट का रास्ता अरविंद केजरीवाल के कई बार पेश ना होने से आजिज आकर अपनाया था। केंद्रीय एजेंसी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आम जनता के समक्ष गलत उदहारण पेश करने का आरोप लगाया था।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल अलग-अलग समय पर अलग-अलग बहाना ED से बचने के लिए अपनाते आए हैं। ईडी ने नवम्बर 2023 में जब केजरीवाल को समन भेजा गया था तो उन्होंने कहा था कि वह मध्य प्रदेश चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। हालाँकि, उनकी पार्टी मध्य प्रदेश में 90% सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी। इसके बाद दिसम्बर में जब उन्हें जाँच एजेंसी ने बुलाया तो उन्होंने कहा कि वे विपश्यना के लिए पंजाब जा रहे हैं। इसलिए वे नहीं आ सकते।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी द्वारा भेजे गए समन को राजनीतिक साजिश बताते आए हैं। वह यह भी सवाल करते रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री को ईडी किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुला रही है। अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी AAP के लिए चुनाव प्रचार ना कर सकें।

गौरतलब है कि केजरीवाल से पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी ED से बचते आए थे। ED उन्हें 10 बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी। वह भी इन समन के पीछे राजनीतिक साजिश बता रहे थे। हालाँकि, 31 जनवरी को जब उनसे ED ने पूछताछ की तो उन्होंने इसके बाद इस्तीफ़ा दे दिया। ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

‘मर्द पॉलीथिन की तरह’: ट्विंकल खन्ना के ‘फेमिनिज्म’ को कंगना रनौत की लताड़, बोलीं – थाली में मिला करियर फिर भी कुछ नहीं कर पाई

अक्सर अपनी बेबाकी के कारण मीडिया पर चर्चा में रहने वाली बॉलीवुड कंगना रनौत ने इस बार ट्विंकल खन्ना को आड़े हाथों लिया है। कंगना ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर ट्विंकल के पुराने वीडियो साझा किए हैं जिसमें वह नारीवाद पर बात करते हुए कहती हैं कि उन्हें नहीं लगता कि पुरुषों का कोई इस्तेमाल है। ये बिलकुल ऐसा है जैसे आपके पास हैंडबैग या प्लास्टिक बैग है। आप उसमें अपनी चीजें रख रहे हो।

कंगना ने अब ट्विंकल को उनके इस बयान पर खूब सुनाया है। कंगना ने ट्विंकल खन्ना को नेपो किड बताते हुए उनको इस वीडियो पर जवाब दिया। कंगना ने पुरानी ट्विंकल की पुरानी वीडियो की क्लिप को शेयर करते हुए लिखा,

“आखिर ये विशेषाधिकार प्राप्त लोग क्या हैं, जो अपने पतियों को पॉलीथिन बैग कहते हैं। क्या ये कूल दिखने की कोशिश कर रहे हैं? चांदी की चम्मच के साथ पैदा हुए नेपो किड्स को सोने की थाली में फिल्मी करियर दिया गया, लेकिन वो इसके साथ न्याय नहीं कर सके। कम से कम वो मातृत्व की निस्वार्थता में ही कुछ खुशी और पूर्णता तलाश लेते। लेकिन यह भी उनके लिए एक अभिशाप की तरह है। वो सच में क्या बनना चाहते हैं? सब्जियाँ? क्या यह फेमिनिज्म है?”

फोटो साभार: कंगना का इंस्टा अकॉउंट

बता दें कि ट्विंटल खन्ना की यह वीडियो पुरानी है। उन्होंने एल्जेब्रा कन्वर्सेशन से बात करते हुए कहा था कि उनका शादी को लेकर अलग मानना है। लोगों को लगता है कि शादी में दो लोगों को एक तरह से एक दिशा में साथ-साथ रहना होगा। उनकी कहती हैं कि अगर यही सब है तो महिलाओं को फिर वोट देने का अधिकार ही क्यों है।

इसी बातचीत में उनसे सवाल हुआ कि जब वो कहती हैं कि वो नारीवादी हैं तब इससे उनका क्या मतलब होता है। इस पर ट्विंकल ने कहा था कि उन्होंने ये चीज अपनी माँ से सीखी है कि आपको पुरुषों की जरूरत नहीं है।

ट्विंकल ने कहा था,

“मैंने कभी भी फेमिनिज्म या बराबरी या फिर किसी भी चीज के बारे में कभी नहीं बोला। लेकिन यह बिल्कुल क्लियर था कि किसी पुरुष की कोई आवश्यकता नहीं थी। एक पुरुष का होना बहुत अच्छा होगा, जैसे आपके पास एक अच्छा हैंडबैग है। पर, अगर आपके पास एक प्लास्टिक बैग भी हो तो भी यह चलेगा। ये सिर्फ ऐसा है कि आप अपनी चीजें उसमें डालते रहते हैं। इसलिए मैं उस धारणा के साथ बड़ी हुई और लंबे समय तक मुझे लगा कि पुरुषों का कोई खास उपयोग नहीं है।”

‘मेरी संतुष्टि के लिए अपने शरीर को हवाले कर दो’: नाबालिग छात्राओं का यौन शोषण करता था केरल का कराटे शिक्षक सिद्दीकी अली, होठों पर लेता था चुंबन

केरल में यौन शोषण की शिकार एक नाबालिग छात्रा का शव नदी से बरामद हुआ है। सिद्दीकी अली नाम के एक कराटे शिक्षक पर छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप है। सिद्दीकी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि सिद्दीकी छात्राओं को उलटी-सीधी बातें बताकर उनका यौन शोषण करता था। इस पर पहले से ही POCSO के दो मामले दर्ज हैं।

जानकारी के अनुसार, मलप्पुरम के वझक्कड़ थाना इलाके में सोमवार (19 फरवरी 2024) को एक 17 साल की एक नाबालिग लड़की का शव चेलियार नदी में मिला था। छात्रा यहीं एक कराटे शिक्षक के पास पिछले तीन वर्षों से कराटे सीखने जाती थी। शिक्षक का नाम वी सिद्दीकी अली है और वह 43 साल का है। नाबालिग का जब शव मिला तो उसके शरीर से कुछ कपड़े भी गायब भी थे।

नाबालिग के परिजनों ने आरोप लगाया कि लड़की ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसकी हत्या की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना वाले दिन कुछ लोगों ने उस जगह के पास दो अजनबी लोगों को देखा था, जहाँ शव मिला था। पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज की गई शिकायत के अनुसार, जब पड़ोसियों ने उन दोनों से संपर्क करने की कोशिश की तो दोनों ने अपना चेहरा दिखाए बिना वहाँ से चले गए।

परिवार ने कहना है कि इस आधार पर संदेह होता है। परिजनों का कहना है कि जिस हालत में शव मिला था, उससे ऐसा नहीं लग रहा कि उसने आत्महत्या की है। उनका कहना है कि छात्रा पढ़ने में बहुत अच्छी थी और कराटे भी सीखती थी। उसका लंबे समय से यौन शोषण हो रहा था, लेकिन वह इस मामले में लड़ने को लेकर प्रतिबद्ध थी।

मृतक की बहनों ने बताया कि सिद्दीकी अली और भी बच्चों का शोषण कर चुका है और उस पर पहले ही POCSO के दो मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि सिद्दीकी अली ने 15 सितम्बर 2023 को उनकी बहन का यौन शोषण किया था। इसके बाद पता चला कि वह ऐसा तीन वर्ष से कर रहा था। बच्ची ने इसके कारण स्कूल जाना भी छोड़ दिया था, जबकि 10वीं में उसके बहुत अच्छे नम्बर आए थे।

इसके बाद उसने इस मामले में शिकायत भी दर्ज करवाई थी। सिद्दीकी अली और भी लड़कियों के साथ ऐसा करता था। वह कराटे सिखाने के नाम पर लड़कियों के शरीर को गलत तरीके और नीयत से छूता था। वह अपने पास कराटे सीखने आए बच्चों को बताता था कि वह उनका गुरु और भगवान होता है। इसलिए उसकी संतुष्टि के लिए वे सभी अपने आप को उसके हवाले कर दें।

वह कहता था कि वह अपने शिष्यों की छाती छूकर बता सकता है कि वह उसी के जरिए सफल होंगे। वह बड़े बच्चों के ऊपर लेटकर आराम करता था और साथ ही कुछ लड़कियों के होठों पर चुम्बन भी लेता था। उसकी इन हरकतों से ही नाबालिग परेशान थी। बाद में नदी में उसका शव मिला। इस मामले में सिद्दीकी पर POCSO के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया गया है।

ऐतिहासिक ‘बागपत चाट युद्ध’ के 3 साल पूरे: ‘आइंस्टीन चचा’ के व्यापार बदलने से भी दुखी हैं लोग, सोशल मीडिया पर ‘योद्धाओं’ को किया जा रहा नमन

ऐतिहासिक ‘बागपत चाट युद्ध’ के 3 साल पूरे हो गए हैं, जिसके बाद लोग एक बार फिर से उसके वीडियो शेयर कर रहे हैं। खासकर के ‘आइंस्टीन चाचा’ को लोग जम कर याद कर रहे हैं। बता दें कि इस युद्ध में किसी की हार-जीत नहीं हुई थी, बल्कि लोगों का मनोरंजन हुआ था। बाद में सभी ‘योद्धाओं’ को पकड़ कर पुलिस ने लॉकअप में डाला था, जिसके बाद उनकी तस्वीरें सामने आई थीं। 22 फरवरी, 2021 को चाट के ठेलों को लेकर हुई इस मारपीट में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे।

वायरल वीडियो के साथ लोग करामात भी कर रहे हैं। एक शख्स ने वीडियो में लाठी-डंडों को चमकते हुए दिव्यास्त्रों की तरह दिखा दिया। बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के मेन बाजार में ये मारपीट इसीलिए हुई थी, क्योंकि एक चाट दुकानदार के ग्राहक को दूसरे ने अपने पास बुला लिया था। अब आइंस्टीन हेयरस्टाइल वाले चाचा ने अपने बाल कटा लिए हैं और कपड़ों की दुकान भी खोल ली है। लोग न सिर्फ उनकी दुकान से शॉपिंग करते हैं, बल्कि उनके साथ सेल्फी भी लेते हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे दोनों पक्ष एक-दूसरे के लोगों को जमीन पर गिरा-गिरा कर पीट रहे हैं। पुलिस ने करीब दर्जन भर लोगों को हिरासत में भी लिया था। आइंस्टीन चाचा की फूली हुई आँख और बिखरे हुए लाल बालों को भला कौन भूल सकता है। उनका असली नाम हरेंद्र सिंह है। लड़के-लड़कियाँ इतनी सेल्फी लेते थे और दुकान में भीड़ जुट जाती थी कि उन्होंने अपने बाल अब छोटे-छोटे बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के मेन बाजार में बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के मेन बाजार में करा लिए हैं। लोग अब इसे ‘मानव जाति के इतिहास की पौराणिक लड़ाई’ बता कर तीसरी बरसी पर शुभकामनाएँ दे रहे हैं, तो कोई दुःख व्यक्त कर रहा है।

कुछ लोगों ने यहाँ तक लिखा कि आने वाली पीढ़ियाँ भी ‘बागपत के ऐतिहासिक चाट युद्ध’ से प्रेरणा लेगी। ‘आइंस्टीन चाचा’ हरेंद्र सिंह ने चाट के ठेले में नुकसान के बाद अपना व्यापार बदलने का फैसला लिया था। मीडिया वाले हरेंद्र सिंह का इंटरव्यू लेने पहुँचते थे और वो बागपत में किसी सेलेब्रिटी की तरह फेमस हो गए थे। लोगों ने इस पर भी अफ़सोस जताया कि अब ‘आइंस्टीन चाचा’ चाट के बिजनेस में नहीं रहे, इसीलिए अब वहाँ कोई ‘चाट युद्ध’ नहीं होगा।

आंध्र प्रदेश में अजब-गजब चुनाव प्रचार: कंडोम के पैकेट पर पार्टी निशान छापकर बाँट रही TDP-YSRCP, एक-दूसरे से लड़ाई भी कर रहीं

चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक पार्टियाँ बड़े-बड़े वादे करती हैं। कोई साइकिल देने की बात करती है, तो कोई सिलाई मशीन। कोई मोटरसाइकिल का वादा करता है, तो कोई हर महीने हजारों रुपए का। लेकिन आंध्र प्रदेश में चुनाव प्रचार से जुड़ी एक अनोखी खबर सामने आई है। आंध्र प्रदेश में YSR कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) दोनों ही कंडोम पैकेट पर अपने पार्टी चिह्न छापकर बाँट रही हैं। खास बात ये है कि दोनों पार्टियाँ ट्विटर पर इस मुद्दे पर लड़ भी रही हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक व्यक्ति कंडोम बाँट रहा है। जिस पर वाईएसआरसीपी पार्टी का चुनाव निशान छपा है। यही नहीं, इन कंडोम पैकेट पर मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की तस्वीर और पार्टी का चुनावी नारा “नवरात्नालु – आपके कल्याण के लिए” छपा है। पार्टी का दावा है कि यह पहल जनसंख्या नियंत्रण और सुरक्षित यौन संबंधों को बढ़ावा देने के लिए है।

खास बात ये है कि जगन मोहन रेड्डी की पार्टी तो खुद कंडोम बाँट रही है, तो दूसरी तरफ वो टीडीपी पर भी आरोप लगा रही है। इस बारे में वाईएसआरसीपी पार्टी ने पोस्ट भी किया है। उसने एक वीडियो शेयर कर टीडीपी पर हमला बोला है। जगन मोहन रेड्डी की पार्टी ने अपने कैप्शन में लिखा है, “क्या ये काम कंडोम बाँटने के साथ बंद हो जाएगा या पार्टी जनता के बीच वियाग्रा भी बाँटना शुरू कर देगी?”

वहीं, इसके पलटवार में टीडीपी ने भी वाईएसआरसीपी पर निशाना साधा है और अपने एक्स हैंडल पर वीडियो भी पोस्ट किया है। टीडीपी ने लिखा, “क्या जगन मोहन रेड्डी इसके बारे में बात कर रही है?” टीडीपी द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में वाईएसआरसीपी के चुनाव निशान छपा कंडोम बाँटा जाता दिख रहा है।

इन दोनों पार्टियों की इस पहल पर विवाद भी हो रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह चुनाव प्रचार का एक अनैतिक तरीका है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यह महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें वस्तु मानने जैसा है। चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह देखना होगा कि आयोग इस मामले पर क्या कार्रवाई करता है।

वैसे, यह निश्चित रूप से एक अनोखी पहल है, जिसके राजनीतिक और सामाजिक परिणाम देखने लायक होंगे। यह चुनाव प्रचार में एक नया मोड़ ला सकता है और लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में भी मदद कर सकता है।