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हर महीने काट रहे थे 600 गाय, 50 गाँवों में गोमांस की होम डिलीवरी: बीफ मंडी के खुलासे के बाद पूरा थाना लाइन हाजिर, व्हाट्सएप ग्रुप से चल रहा था धंधा

राजस्थान के अलवर में बीफ मंडी का खुलासा होने के बाद पूरे थाने को लाइन हाजिर कर दिया गया है। भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी की प्रदेश सरकार ने 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया है। जयपुर रेंज के आईजी उमेश चंद्र दत्त ने खुद मौके पर जाकर पड़ताल की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मंडी में हर महीने करीब 600 गाय काटी जाती थी। एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए करीब 50 गाँवों में गोमांस की होम डिलिवरी हो रही थी। करीब 300 दुकानों में भी गोमांस की सप्लाई होती थी।

बीफ मंडी का खुलासा दैनिक भास्कर के पत्रकार राजकुमार जैन और राधेश्याम तिवारी ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए किया था। बताया था कि रोजाना 20 गाय काटकर होम डिलीवरी की जा रही है। इसमें पुलिस की मिलीभगत की बात भी कही गई थी। इस खुलासे के बाद जब पुलिस ने दबिश दी तो गोतस्कर फरार हो गए। उनके वाहनों को जब्त कर लिया गया है। घटनास्थल से कई गायों की खाल और हड्डियाँ बरामद हुई हैं।

दैनिक भास्कर ने रविवार (18 फरवरी 2024) को अलवर के बास थाना क्षेत्र में चल रही इस बीफ मंडी का खुलासा किया था। खुलासे में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें बिरसंगपुर के पास रुंध गिदवडा के बीहड़ों में गायों को बेरहमी से मार कर उनकी खाल उतारी जा रही थी। व्हाट्सएप पर मांस के ऑर्डर लेकर घर तक सप्लाई की जाती थी। इस मंडी में सैकड़ों की तादाद में खरीदार भी आते थे। गोकशी की यह मंडी करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीफ मंडी की जानकारी होने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। खुलासे के बाद भजनलाल सरकार ने संज्ञान लिया। जयपुर रेंज के IG उमेश चंद्र दत्त के नेतृत्व में बास इलाके के उन बीहड़ों में छापेमारी की गई, जहाँ गोकशी होने का दावा किया गया था। सूचना सही पाई गई। पुलिस को देख कर गोतस्कर अपने वाहन छोड़ फरार हो गए।

IG ने ASI ज्ञानचंद, बीट सिपाही स्वयं प्रकाश और रविकांत के साथ हेड कॉन्स्टेबल रघुवीर को सस्पेंड कर दिया गया है। इसी के साथ थाना प्रभारी दिनेश मीणा सहित बास थाने के 38 स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया।है कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अलवर के 60 किलोमीटर के इलाके में कई जगहों पर बीफ बिरयानी बेची जा रही थी। गोतस्कर गायों का माँस, हड्डी और खाल बेच कर हर माह लगभग 4 लाख रुपए तक की कमाई कर रहे थे।

अब बीफ मंडी चलाने वालों को चिन्हित कर कर कार्रवाई की जा रही है। अब तक 25 आरोपितों को गोकशी की FIR में नामजद किया गया है। बीफ मंडी में मिली लगभग 1 दर्जन बाइकों सहित 1 पिकअप जीप को बरामद कर सीज कर दिया गया है।

टाइम बम बनवाने वाली इमराना बेगम TOI के लिए पीड़ित, दिखा ‘मुजफ्फरनगर का घाव’: लादेन को ‘अच्छा पिता और पति’ बनाने वाला मीडिया अब भी एक्टिव

भारत की मीडिया की एक विशेषता है, जब भी किसी आतंकी के बारे में कुछ खबर आती है तो उसके ‘मानवीय पक्ष’ को ज़रूर खँगाला जाता है। बड़े से बड़े आतंकवादी को व्हाइटवॉश करने की कला भारत की मीडिया के पास है। ‘The Quint’ के लिए अलकायदा का संस्थापक ओसामा बिन लादेन ‘एक अच्छा पिता और पति’ बन जाता है, तो वहीं बरखा दत्त के लिए कश्मीर के आतंकी बुरहान वानी ‘प्रधानाध्यापक का बेटा’ हो जाता है। हर आतंकी के इस पक्ष को बेचने की कला भारत की मीडिया के पास है।

वैसे ये ट्रेंड नया नहीं है। हमने फिल्मों में देखा है कि कैसे कोई पुलिस अधिकारी किसी बड़े आतंकी के पीछे लगा रहता है, आतंकी एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देता चला जाता है, फिर उसके इतिहास को सामने लाया जाता है कि आखिर वो आतंकी कैसे बना, इसके लिए सरकार या हिन्दू समाज को दोषी ठहरा दिया जाता है और उन्हें पश्चाताप से भरने की कोशिश की जाती है, फिर वो पुलिस अधिकारी भी ये कहानी सुन कर रोता है – इस तरह आतंकी के व्हाइटवॉश की प्रक्रिया पूरी होती है।

ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश का है और इस बार किसी आतंकी के ‘दर्द’ को दिखाने का बीड़ा देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में से एक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ ने उठाया है। हुआ यूँ कि मुजफ्फरनगर पुलिस ने इमराना बेगम नाम की एक 60 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया। गिरफ़्तारी का कारण – वो पूरे शहर को दहलाना चाहती थी और इसके लिए उसने जावेद नामक एक शख्स के पास कई टाइम बम भी रखे हुए थे। उसने बड़ी मात्रा में टाइम बम का ऑर्डर दिया था। आइए, बताते हैं कि मामला क्या है।

मुजफ्फरनगर: इमराना बेगम ने ऑर्डर किया टाइम बम

इमराना बेगम को रविवार (18 फरवरी, 2024) को गिरफ्तार किया गया था। इमराना बेगम शामली की रहने वाली है। उसने जावेद नामक शख्स को टाइम बम बनाने का टास्क दिया था। जावेद ने यूट्यूब पर वीडियो देख-देख कर टाइम बम बनाना सीखा और फिर उसने कई बम बना डाले। बम के साथ टाइमर भी उसने बनाया था। लेकिन, गुरुवार (15 फरवरी, 2024) को मजफ्फरनगर की काली नदी के पास से यूपी STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स) को उसे दबोचने में कामयाबी मिली।

जावेद इमराना के किसी परिचित का बेटा था और इमराना को पता था कि वो विस्फोटक बना सकता है। जावेद पहले भी ये काम कर चुका था। इमराना का कहना है वो भविष्य में अगर कोई दंगा हो तो अपनी सुरक्षा के लिए ये सब कर रही थी। IED बनाने के लिए उसने जावेद को 10,000 रुपए एडवांस में दिए थे। डिलीवरी के समय 40,000 रुपए और भुगतान करने का वादा किया गया था। हालाँकि, डिलीवरी के दौरान ही वो पकड़ा गया।

इमराना बेगम को IPC की धारा 286 और विस्फोटक अधिनियम की धारा 4/5 के तहत जेल भेज दिया गया है। आगे की पूछताछ के लिए उसे पुलिस की हिरासत में लिया जाएगा। क्योंकि, टाइम बम बनाने के पीछे क्या मकसद था इस संबंध में उसने जो कुछ भी बताया है उसकी पुष्टि करनी आवश्यक है। जावेद और उसका बेटा जरीफ पटाखा बनाने का काम करते थे। उसने 10 बम का ऑर्डर दिया था, लेकिन 5 ही बन सके थे। एक दशक पहले भी इमराना ने बम बनाने का ऑर्डर दिया था।

TOI को दिखा इमराना का ‘घाव’

अब इस घटना पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ की खबर का शीर्षक देखिए, ‘2013 के दंगों से आहत 60 वर्षीय महिला ने टाइम बम का ऑर्डर दिया, गिरफ्तार’। TOI ने अपने शीर्षक में ये बताना ज़रूरी समझा कि उक्त महिला ‘घाव से पीड़ित’ है और वो ‘घाव’ है 2013 के दंगों का। महिला का कहना है कि उन दंगों में उसका घर जला दिया गया था और इसीलिए वो अपनी सुरक्षा के लिए ये बम बनवा रही थी। जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि वो हिन्दुओं से बदला लेना चाहती थी।

जावेद के कुछ रिश्तेदार नेपाल में भी रहते हैं, ऐसे में आतंकनिरोधी दस्ता (ATS) भी इस मामले की जाँच कर रहा है। इसके तार कहाँ से जुड़ेंगे, अभी जाँच में सामने आएगा। लेकिन, मीडिया एक बार फिर से अपने धंधे की विशेषता दिखाने में लग गया है। कहने का तात्पर्य ये है – ‘हिन्दुओं ने महिला का घर जलाया, इसीलिए पीड़ित महिला अपनी सुरक्षा के लिए टाइम बम बनवा रही थी।’ क्या टाइम बम आत्मरक्षा का हथियार है? IED जैसे खतरनाक विस्फोटक का आत्मरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने का कोई उदाहरण है अपने पास?

TOI को दिखा इमराना का ‘घाव’

खासकर के इस खतरनाक विस्फोटक का इस्तेमाल कर के 10 टाइम बम बनाने का ऑर्डर देना, ये तो कहीं से भी आत्मरक्षा के लिए किया गया काम नहीं लगता। जाँच में चीजें सामने आएँगी, लेकिन अभी तो ऐसा ही लगता है कि इमराना बेगम हिन्दुओं से बदला लेना चाहती थी, खुन्नस पाले बैठी थी। हल्द्वानी में हमने देखा कि कैसे मुस्लिमों के छतों से पत्थर चले, पत्थरबाजों में बच्चों से लेकर महिलाएँ तक शामिल थीं। जाँच तो इसकी भी होनी चाहिए कि मुजफ्फरनगर दंगों में इमराना बेगम की क्या भूमिका थी, कहीं उसका घर लॉन्चपैड तो नहीं था?

मुजफ्फरनगर दंगों में क्या हुआ था

अगस्त-सितंबर 2013 में हुए मुजफ्फरनगर के दंगों से उत्तर प्रदेश में हालात ऐसे बिगड़े थे कि भारतीय सेना को तैनात करना पड़ा था। तब राज्य में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, समाजवादी पार्टी की सरकार थी। इस घटना में अधिकतर जाट हिन्दू समाज के लोग ही पीड़ित थे। कवाल गाँव में मुस्लिमों द्वारा जाट लड़कियों से छेड़खानी के बाद ही ये मामला शुरू हुआ था। ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के साथ दंगे भड़के थे, इसमें हिन्दू समाज का क्या दोष था?

क्या आपको पता है कि जहाँ सचिन के शरीर पर पोस्टमॉर्टम के दौरान 17 और गौरव के शरीर पर 15 गहरे घाव मिले थे? उनकी हत्या निर्मम तरीके से की गई थी। गोली या धारदार हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया गया था, बल्कि लाठी-डंडों से पीटा गया था, सिर और मुँह को पत्थरों से कुचला गया था और सरिये से मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया गया था। जाहिर है, फिर दो पक्ष दंगों में भिड़ते हैं तो क्षति हर तरफ से होती है। मुजफ्फरनगर हो, मेवात हो, या हल्द्वानी हो – हर जगह हमने इस्लामी भीड़ को समान पैटर्न पर काम करते देखा है।

90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, उसके बाद उनमें से एक भी आतंकी क्यों नहीं बना? उनकी महिलाओं से बलात्कार हुआ, निर्मम हत्याएँ हुईं और पलायन के बाद वो अपने ही देश में शरणार्थी बन गए, लेकिन उनके पास से टाइम बम क्यों नहीं मिलते? मीडिया आखिर हर आतंकी, पत्थरबाज, बमबाज या अपराधी को व्हाइटवॉश करने के लिए कहानियाँ लेकर क्यों आता है? क्या इसका मकसद होता है कि लोगों में उसके प्रति सहानुभूति पैदा की जाए।

पति की मौत, माँ को हार्ट अटैक, भाई को लकवा… हर किसी की आँख से छलका आँसू जब हल्द्वानी की सोनी बिष्ट ने क्लियर किया SSB इंटरव्यू, अब बनेंगी लेफ्टिनेंट

उत्तराखंड के हल्द्वानी की सोनी बिष्ट हिम्मत हार मान चुकी महिलाओं के लिए मिसाल बनकर उभरी हैं। हाल में हल्द्वानी की सोनी ने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड का साक्षात्कार क्लियर किया और अब वह सेना में लेफ्टिनेंट पोस्ट पर भर्ती होने जा रही हैं। उनका सिलेक्शन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकैडमी में हुआ है।

सोनी बिष्ट की लेफ्टिनेंट बनने की कहानी इसलिए इतनी खास है क्योंकि छोटी उम्र में तमाम दुख देखने के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनके पति नीरज सिंह भंडारी 18 कुमाऊँ रेजीमेंट में तैनात थे। दिसंबर 2022 में उनके पति सिपाही नीरज सिंह भंडारी की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई। सोनी इस दुख से उभरतीं कि इसके बाद उनकी को माँ हार्ट अटैक आ गया। दो झटकों के बाद सोनी के दुख कम नहीं हुए और कुछ समय बाद उनके छोटे भाई को भी लकवा मार गया।

सोनी की पूरी कहानी इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि कैसे तीन घटनाएँ एक के बाद एक होने से सोनी बिष्ट एकदम टूट गई थीं। लेकिन जब वो अपनी डॉक्यूमेंटेशन काम के लिए गईं तो कुछ लोग उन्हें ऐसे मिले जिन्होंने उनकी हिम्मत बढ़ाई और पोस्ट पर अप्लाई करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके पिता सूबेदार कुंदन सिंह ने भी इस संघर्ष में सोनी का बहुत साथ दिया। पिता ने कुछ पूर्व अधिकारियों से बात की और सोनी को तैयारी कराने को कहा। सबसे मिलकर बात करके सोनी की हिम्मत बढी। फिर उनके पति के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें सेना के जवानों की विधवा वाले स्पेशल कोटा से ओटीए चेन्नई में अप्लाई करने को कहा। वहीं रिटायर्ड सेना के अधिकारी मेजर जनरल यश मोर ने उनकी एसएसबी इंटरव्यू की पूरी तैयारी करवाई।

वहीं पिता ने अधिकारियों की टीम के साथ मिलकर उनकी ग्रुप टास्क, साइकोलॉजिकल असेसमेंट और फिजिकल ट्रेनिंग करवाई। सोनी कहती हैं कि ऐसी वैकेंसी के लिए तैयारी करना आसान नहीं था जिसमें हर कोई कोटा से अप्लाई करें। उन्होंने बताया- “इस पोस्ट के लिए इंटरव्यू भी आसान नहीं था। लेकिन मेरी किस्मत थी कि मुझे इतने अच्छे लोगों से गाइडेंस मिली और चयन ओटीए के लिए हो गया।”

बता दें कि अब जल्द ही सोनी की ट्रेनिंग शुरू होगी और वह लेफ्टिनेंट बनकर उन सभी लोगों का सिर गर्व से ऊँचा करेंगी जिन्होंने उनका यहाँ तक पहुँचने में साथ दिया। सोनी कहती हैं कि उनके घरवालों के साथ उनके ससुराल के लोग भी बहुत सपोर्टिव हैं। सिलेक्शन की खबर सुनकर सब लोग रोने लगे थे।

‘एक ओर तीर्थों का विकास, दूसरी ओर हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर’: PM मोदी ने रखी कल्किधाम की आधारशिला, बोले – आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसके लिए पिछली सरकारों से लड़ी लड़ाइयाँ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के संभल में वैदिक पूजन के साथ कल्किधाम की आधारशिला रखी। इस मौके पर यहाँ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कल्किधाम ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद कृष्णम मौजूद रहे। यहाँ बड़ी संख्या में संत-महात्मा भी मौजूद रहे।

ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य प्रमोद ने प्रधानमंत्री को कुछ दिन पहले इस धाम की आधारशिला रखने और भूमिपूजन करने के लिए आमंत्रित किया था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया था। सोमवार (19 फरवरी, 2024) को यह पूजन सम्पन्न हो गया। अब विधिवत तरीके से धाम का निर्माण चालू होगा।

प्रधानमंत्री के भूमिपूजन करने के बाद उन्हें आचर्य प्रमोद कृष्णम और राम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी अवधेशानंद गिरी ने अंगवस्त्र पहना कर सम्मानित किया। पीएम मोदी को इस दौरान कल्किधाम का एक मिनिएचर मॉडल भी दिया गया। इस आयोजन में 11,000 साधु संत शामिल हुए हैं।

संभल में बनाया जा रहा यह कल्किधाम भगवान विष्णु को समर्पित है। यहाँ उनके दशावतारों की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। यहाँ इन दसों अवतारों के लिए दस गर्भगृह का निर्माण होगा। इसका निर्माण उसी गुलाबी पत्थर से हो रहा है, जिसका उपयोग अयोध्या के राम मंदिर और गुजरात के सोमनाथ मंदिर के निर्माण में किया गया है। बताया गया है कि इस मंदिर में कहीं भी लोहे और स्टील का इस्तेमाल नहीं होगा। मंदिर का शिखर 108 फीट ऊँचा होगा। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसके निर्माण को लेकर आई समस्याओं के विषय में भी पहले बात की थी।

इस पूरे कल्किधाम का क्षेत्रफल लगभग 5 एकड़ है। यहाँ पहले से एक कल्कि मंदिर बना हुआ है जहाँ भगवान कल्कि की एक मूर्ति स्थापित है। कहा जाता है कि यहाँ मूर्ति के नीचे जो वाहन के रूप में घोड़ा है, उसका एक पैर हवा में है। बताया जाता है कि समय के हिसाब से यह पैर नीचे झुक रहा है।

कल्किधाम के भूमिपूजन के मौके पर सीएम योगी और पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित भी किया। सीएम योगी ने इस दौरान पीएम के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, UAE में मंदिर के उद्घाटन और अब संभल के इस धाम को लेकर कहा कि यह नया भारत है। उन्होंने कहा कि नए भारत में युवा की आजीविका और आस्था, दोनों की गारंटी है, यही मोदी की गांरटी है।

सीएम योगी ने आरोप लगाया कि इससे पहले ना ही लोग आस्था का सम्मान कर पाए और ना ही आजीविका दे पाए। उन्होंने संभल में किए गए विकास कार्यों की भी चर्चा यहाँ पर की। सीएम योगी ने कहा कि भगवान कल्कि ज़रूर अवतार लेंगे और इस धरती पर सनातन की फिर से स्थापना होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा कि यह मौक़ा 18 वर्षों के बाद आया है, ऐसे में मुझे लगता है कि सारे अच्छे काम मेरे लिए ही छोड़े गए हैं। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती का जिक्र करते हुए वर्तमान समय को सांस्कृतिक उदय का समय बताया।

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान बोले, “अभी जब वह स्वागत प्रवचन के दौरान बोल रहे थे तब उन्होंने कहा कि मेरे पास भावना के अलावा देने के लिए कुछ नहीं है, अच्छा हुआ आचार्य जी आपने कुछ दिया नहीं, अगर आज के समय में भगवान कृष्ण सुदामा को एक पोटली में चावल देते तो फोटो निकल आती की भगवान कृष्ण ने भृष्टाचार किया, सुप्रीम कोर्ट में PIL हो जाती।”

प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर और अबूधाबी में स्वामीनारायण मंदिर को लेकर कहा कि यह सांस्कृतिक गौरव का पल है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान केदारनाथ मंदिर, सोमनाथ, काशी विश्वनाथ में किए गए विकास कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने इसे विकास और विरासत को साथ लेकर चलना बताया और कहा कि समय का चक्र घूम गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आचार्य प्रमोद ने पिछली सरकारों से कल्किधाम के लिए लड़ाई लड़ी है। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के अंतर्गत वह मंदिर का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह राष्ट्ररूपी मंदिर का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने चंद्रयान, नमो भारत, वन्दे भारत और अर्थव्यवस्था को लेकर भी बात की।

संदेशखाली में TMC गुंडों की गिरफ्तारी के बाद पीड़िता के घर पर हमला, बंगाल पुलिस की यूनिफाॅर्म में थे हमलावर: बोलीं CM ममता बनर्जी- तिल का ताड़ बना दिया

बंगाल के उत्तर 24 परगना के संदेशखाली गाँव में महिलाओं के उत्पीड़न मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज (19 फरवरी 2024) सुनवाई होगी। याचिका में माँग की गई है कि मामले की जाँच बंगाल के बाहर हो और पीड़ितों को मुआवजा मिले। इसके साथ ही राज्य पुलिस पर भी कार्रवाई की माँग इस याचिका में है।

इस बीच खबर आई है कि पुलिस ने जहाँ पूरा विवाद बढ़ने पर मामले के आरोपित शिबू हाजरा को गिरफ्तार किया है, वहीं संदेशखाली की जिस पीड़िता ने उसके खिलाफ बयान दिया था उसके घर भी हमला हुआ। हैरानी की बात ये है कि जिन लोगों ने हमला किया उन्हें लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने पुलिस यूनिफॉर्म पहनी हुई थी।

पीड़िता पर यह हमला मजिस्ट्रेट के सामने यौन हमले पर बयान दर्ज कराने के बाद हुआ। उसे अब डर है कि अगर अतिरिक्त पुलिस बल और प्रशासन के लोग क्षेत्र से जाएँगे तो उस पर फिर जानलेवा हमला होगा। उसके अनुसार, शनिवार को हमलावर उसकी हत्या के इरादे से आए थे। उन्होंने पीड़िता के ससुर को धमकाया भी था।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार महिला ने कहा, “मैंने अपनी दोनों बेटियों को अपने रिश्तेदार के घर भेज दिया। शाहजहाँ के दो गुर्गों शिबू प्रसाद हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ गवाही देने के बाद हमले के डर से मैं छिपी हुई थी। मेरी सबसे छोटी बेटी मेरे बुजुर्ग ससुर के साथ घर पर थी क्योंकि मेरे पति ने भी एक रिश्तेदार के घर में शरण ली है। पुलिस की वर्दी में आए हमलावरों ने दावा किया कि वो स्पेशल पुलिस फोर्स से हैं। इसके बाद उन्होंने छप्पर की दीवार पर लगातार मार-मार कर एक गड्ढा खोदा और फिर मेरी बेटी और उसके दादा को मारने के लिए उसमें छड़ी डाल दी।”

महिला ने बताया कि उसके साथ उत्पीड़न 5 माह पहले हुआ था। पीड़िता से कहा गया था कि वो रात में मीटिंग अटेंड करने जाए। वहीं उसके साथ ये सब हुआ था। अब शिकायत करने पर उसके घर पर हमला हुआ है। स्थानीय भी भयभीत हैं। उन्हें तसल्ली थी तो सिर्फ इतनी कि TMC गुंडों की गिरफ्तारी हो रही है। इस खबर को सुन वह लोग खुश थे। लेकिन फिर पीड़िता के घर पर यह अटैक हुआ और डर फिर पसर गया।

बता दें कि बशीरहाट सबडिविजन में पीड़िता का बयान दर्ज होने के बाद शिबू हाजरा को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजने की खबर आई थी। उसकी गिरफ्तारी एक दिन पहले ही हुई थी। उस पर यौन उत्पीड़न करने और स्थानीयों की जमीन हड़पने के आरोप हैं। वहीं मामले में दूसरा आरोपित उत्तम सरदार पहले से हिरासत में है।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में कहा है कि तिल को ताड़ बनाया जा रहा है। वह बोलीं कि कुछ समय पहले संदेशखाली में एक घटना घटी। पहले ईडी की टीम को यहाँ भेजा गया। इसके बाद उनके मित्र भाजपा के लोग यहाँ घुसे। फिर तिल का ताड़ बनाया गया। ममता बनर्जी ने कहा, “मैं अफसरों को भेजूँगी, जिनकी जो शिकायत हो बताएँ। अगर किसी ने कुछ लिया है, तो सब कुछ वापस किया जाएगा।”

चंडीगढ़ में मेयर चुनाव से पहले AAP में फूट, BJP में शामिल हुए तीन पार्षद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले मनोज सोनकर का इस्तीफा

चंडीगढ़ के मेयर मनोज सोनकर ने 18 जनवरी 2024 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब फिर से चुनाव होंगे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले इस्तीफा दिया है। नए सिरे से चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) को तगड़ा झटका लगा है। उसके तीन पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए हैं।

AAP के पार्षद नेहा मुसावत, पूनम और गुरचरण काला को बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही नगर निगम में अब बीजेपी का पलड़ा भारी हो गया। बीजेपी के पास अब नगर निगम में 18 पार्षद हो गए हैं। वहीं AAP के पास 10 पार्षद ही रह गए हैं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस के पास 7 और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के पास 1 पार्षद हैं।

भाजपा की सदस्यता लेने वाले पार्षद गुरचरण काला ने कहा कि AAP ने उनके ऊपर दबाव बनाया था। उन्होंने पीएम मोदी के कामों से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता लेने की बात कहीं है। नेहा मुसावत ने भी AAP पर इसी तरह के आरोप लगाए हैं।

चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर पद का चुनाव 36 पार्षद मिलकर करते हैं। सबसे ज्यादा वोट पाने वाला प्रत्याशी चुनाव जाता है। वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से भाजपा के पास 17 पार्षद, 1 सांसद (चंडीगढ़ मेयर चुनाव में सांसद भी वोटिंग करते हैं) और SAD के इकलौते पार्षद का समर्थन है। वहीं आप और कॉन्ग्रेस को मिलाकर भी मात्र 17 ही वोट होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह भी कि नए राजनीतिक समीकरणों के आधार पर AAP को कॉन्ग्रेस का समर्थन मिलना मुश्किल लग रहा है, क्योंकि उसने हाल ही पंजाब-चंडीगढ़ का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है।

इस मामले पर आज (19 फरवरी, 2024) सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई होगी। पिछली बार यहाँ भाजपा के मनोज सोनकर को 30 जनवरी को हुए मतदान में मेयर चुना गया था। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन ने धांधली के आरोप लगाए थे। इसी को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव अधिकारी अनिल मसीह को तलब किया था, जिन पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।

मनोज सोनकर के इस्तीफे पर भाजपा का कहना है कि उनके चुने जाने के बाद से लगातार विपक्ष हो हल्ला कर रहा था और शहर को ठीक से चलने नहीं दे रहा था। मनोज सोनकर ने इसलिए इस्तीफ़ा दे दिया। AAP ने पिछले चुनाव में मनोज सोनकर के सामने कुलदीप ढलोर को उतारा था, जिनको हार का मुँह देखना पड़ा था।

राम मंदिर पर दहशत फैलाने के लिए ISIS स्टाइल में काट दिया गोसेवक का गला, छतीसगढ़ में UAPA के तहत FIR: कश्मीर से लौटा था अयाज खान

गोसेवक साधराम यादव की हत्या के मामले में आरोपितों पर छत्तीसगढ़ में गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कश्मीर से लौटने के बाद अयाज खान ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के स्टाइल में गोसेवक का गला रेत दिया था। ऐसा अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले दहशत फैलाने के इरादे से किया गया था।

20 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ के कवर्धा में लालपुर गाँव में अयाज, इदरीश, मेहताब और शेख रफीक समेत 6 ने मिलकर गोसेवक साधराम यादव (50) की ISIS आतंकियो की तरह गला रेत कर हत्या कर दी थी। राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हुई थी।

पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपितों पर UAPA की धारा 16 लगाई है। अयाज और इदरीश का आतंकी कनेक्शन भी सामने आया है। अयाज के कश्मीर जाने और इदरीश के संदिग्ध के लोगों से मिलने की जानकारी भी मिली है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है राज्य में नक्सलियों के अलावा किसी मामले में पहली बार UAPA का उपयोग किया गया है।

आरोपितों ने साधराम यादव से पहले भी जान-बूझकर विवाद किया था और ‘सर तन से जुदा’ करके हत्या कर दी। उनकी हत्या के बाद कवर्धा में लोगों का गुस्सा भड़क उठा था। प्रशासन ने आरोपितों को पकड़ने के साथ ही इनके घरों पर बुलडोजर भी चलाया था।

पुलिस ने जाँच के बाद आरोपितों के खिलाफ UAPA की धारा भी जोड़ी है। कवर्धा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया है हत्या करने वाले आरोपितों में से अयाज का कश्मीर आना-जाना लगा रहता था, वहीं इदरीश के संदिग्ध लोगों से बात करने के सबूत मिले हैं।

उन्होंने बताया है कि अयाज खान को गिरफ्तार कर उसके मोबाइल की जाँच की गई तो उसके लगातार कई बार जम्मू-कश्मीर जाने की जानकारी सामने आई। जब छत्तीसगढ़ से टीम जम्मू-कश्मीर भेजी गई तो आतंकवादियों से कनेक्शन सामने आए। एक अन्य आरोपित इदरीश खान के संदिग्धों से बात करने सम्बंधित जानकारी मिली है।

उधर हिन्दू संगठन लगातार इस मामले में जल्दी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। गोसेवक साधराम यादव की पत्नी ने हाल ही में सरकार से मिले ₹5 लाख का चेक भी लौटा दिया था। साधराम यादव की पत्नी ने कहा था कि उन्हें सहायता राशि नहीं, बल्कि हत्यारों पर कड़ी कार्रवाई चाहिए।

‘बेगम हलाला के बाद तुरंत वापस कर दी जाती है’: फिर वायरल हुआ खतना एक्सपर्ट हाजी लल्लू का विजिटिंग कार्ड, जानिए सच

सोशल मीडिया में एक विजटिंग कार्ड वायरल हो रहा है। इस पर लिखा है ‘हमारे यहाँ बेगम हलाला करने के बाद तुरंत वापस कर दी जाती है’। कार्ड पर मोबाइल नंबर के साथ एक तस्वीर भी छपी है। तस्वीर में दिख रहे शख्स कानपुर के रहने वाले हाजी लल्लू हैं जो ‘खतना एक्सपर्ट’ बताए जा रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब सोशल मीडिया में यह विजटिंग कार्ड वायरल हुआ है। हाजी लल्लू ने ऑपइंडिया से बातचीत में इसे किसी की किसी की शरारत करार दिया है। उन्होंने बताया है कि उनके खतने वाले विजिटिंग कार्ड को किसी ने एडिट कर उस पर हलाला वाली लाइन लिख वायरल कर दी है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस से शिकायत करने की बात भी कही है।

हाजी लल्लू ने ऑपइंडिया को बताया कि वे मूल रूप से कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनका खानदानी काम खतना करना है। लगभग 70 साल के हो चुके हाजी लल्लू को खतना करते हुए 50 साल हो चुके हैं। वे अब तक हजारों लोगों का खतना कर चुके हैं। ऐसे लोग भी हैं जिनकी 3 पीढ़ियों का खतना हाजी लल्लू ने किया है। साल 2012 में हाजी लल्लू ने अपना विजिटिंग कार्ड छपवाया था।

खतना स्पेशलिस्ट को बना दिया हलाला एक्सपर्ट

हाजी लल्लू के अनुसार लगभग 1 साल पहले किसी ने उनके विजिटिंग कार्ड को एडिट कर दिया। एडिटेड कार्ड में ऊपर की तरफ एक लाइन बढ़ा दी गई। इस लाइन में ‘हमारे यहाँ बेगम हलाला करने के बाद तुरंत वापस कर दी जाती हैं’ लिख दिया गया। हाजी लल्लू बताया कि यह एडिटेड कार्ड वायरल होने के बाद उन्हें लगातार फोन कॉल देश के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे हैं।

हाजी लल्लू के मुताबिक उनको फोन करने वालों में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग हैं। वो हाजी से हलाला के बावत सवाल भी करते हैं। हाजी लल्लू के मुताबिक जब वो जवाब दे कर थक गए तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि 17 फरवरी 2024 को उन्होंने बाबूपुरवा थाना जाकर SHO से अपना कार्ड एडिट करने वाले पर कार्रवाई की माँग की।

बच्चों से ले कर 75 साल तक के बुजुर्ग का भी खतना

हाजी लल्लू ने हमें बताया कि वो बच्चों से ले कर 75 साल तक के वृद्ध व्यक्ति तक का खतना कर चुके हैं। गरीबों से हाजी लल्लू खतने का 100 रुपए और अमीरों से वो 1500 रुपए तक चार्ज करते हैं। उनका दावा है कि उनकी प्रसिद्धि के चलते शहर में अक्सर लोग उनके यहाँ ही खतना करवाने आते हैं। 18 फरवरी 2024 को भी हाजी ने 4 लोगों का खतना करने का दावा किया। उन्होंने यह भी कहा कि खतने को ले कर उनकी प्रसिद्धि अल्लाह की देन है।

मनमोहन सिंह के मंच से दे चुके हैं सम्बोधन

हाजी लल्लू ने बताया कि वे पार्षदी का चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर लड़ चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि एक बार वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भी मंच साझा कर चुके हैं। तब मनमोहन सिंह चुनाव प्रचार के लिए कानपुर आए थे। हाजी खुद को कानपुर से कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल का करीबी बताते हैं। बकौल हाजी लल्लू उनका दिल्ली भी अक्सर आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके बढ़ते राजनैतिक कद और रसूख से जलन रखने वाले किसी शख्स ने ही उनका कार्ड एडिट कर वायरल किया है।

हाजी पहलवान के नाम से भी जानते हैं लोग

खतने के अलावा हाजी लल्लू जड़ी-बूटी बेचने का भी काम करते हैं। उनको हाजी पहलवान नाम से भी जाना जाता है। हाजी लल्लू का दावा है कि जवानी में उन्होंने खूब कुश्ती लड़ी है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि कई बड़े-बड़े डॉक्टर भी उनसे खतना संबंधी मामलों में सलाह लेते हैं। हालाँकि हाजी लल्लू का कहना है कि बढ़ती उम्र की वजह से वे अब बहुत ज्यादा कहीं आते-जाते नहीं हैं।

5 साल का कॉन्ट्रैक्ट, 4 फसलों पर MSP की गारंटी, बिना किसी लिमिट के खरीद: मोदी सरकार ने पेश किया फॉर्मूला, किसानों ने माँगा समय

केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रस्ताव लाने के बाद किसान प्रदर्शनकारी थोड़े शांत हुए हैं। उन्होंने सरकार से चौथे दौर की बातचीत के बाद अपना प्रदर्शन कुछ समय रोकने का ऐलान किया। ये प्रस्ताव सरकार रविवार (18 फरवरी 2024) को लेकर आई।

इसमें कहा गया कि एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल का कॉन्ट्रैक्ट किया जाएगा। ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होगा। इसमें खरीद की लिमिट नहीं होगी। जिन उपजों को लेकर यह प्रस्ताव दिया दया है उनमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास आदि शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बातचीत को बताया सकारात्मक

बता दें कि केंद्र सरकार और किसानों के बीच रविवार को बातचीत हुई थी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि नए विचारों और सुझावों के साथ हमने भारतीय किसान मजदूर संघ और अन्य किसान नेताओं के साथ सकारात्मक चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के सामने फसलों के विविधीकरण का प्रस्ताव रखा जिसके तहत अलग-अलग फसलें उगाने पर बिन किसी लिमिट के उन्हें एमएसपी पर खरीदा जाएगा।

वह बोले– “नेशनल कोऑपरेटिव कंज़्यूमर्स फ़ेडरेशन (एनसीसीएफ़) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फे़डरेशन ऑफ़ इंडिया (नेफ़ेड) जैसी कोऑपरेटिव सोसाइटियाँ उन किसानों के साथ समझौता करेंगी, जो तूर, उड़द, मसूर दाल या मक्का उगाएँगे और फिर उनसे अगले पाँच साल तक एमएसपी पर फसलें खरीदी जाएँगी। वहीं कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के माध्यम से किसानों से 5 साल तक एमएसपी पर कपास की खरीद की जाएगी। इन खरीद की कोई सीमा नहीं होगी और इन सबके लिए एक पोर्टल तैयार किया जाएगा।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के इस प्रस्वताव से भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा और पहले से खराब हो रही जमीन को बंजर होने से रोका जा सकेगा।

किसान नेताओं ने बैठक के बाद लिया सोचने का फैसला

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा इस बैठक पंजाब के मुख्य मंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। किसान नेताओं ने सरकार के इस प्रस्वात के ऊपर कहा कि वह इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे। उनका यह भी कहना है कि अभी सिर्फ एमएसपी के मुद्दे पर चर्चा हुई है। बाकी माँगे नहीं मानी गई हई हैं।

किसान नेताओं का कहना है कि वो अपने मंचों पर सरकार के प्रस्ताव पर अगले दो दिन तक चर्चा करेंगे और उसके बाद भविष्य की रणनीति तय होगी। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “हम 19-20 फ़रवरी तक इस मामले पर अलग-अलग मंचों पर चर्चा करेंगे और विशेषज्ञों की राय लेंगे। उसके बाद ही इस मामले पर कोई फैसला लिया जाएगा।” किसानों का कहना है कि अगर इन दो दिनों में प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनी तो 21 फरवरी दिल्ली कूच करेंगे।

पंजाब सीएम भी थे बैठक में शामिल

इस बैठक में पंजाब सीएम भगवंत सिंह मान ने भी किसानों के हितों की रक्षा के लिए फसलों के लिए एमएसपी को कानूनी रूप देने की वकालत की। उन्होंने बैठक के दौरान मोजाम्बिक और कोलंबिया से दालों के आयात का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा यह आयात 2 अरब डॉलर से अधिक है, मान ने कहा कि अगर इस फसल के लिए एमएसपी दिया जाता है तो पंजाब दालों के उत्पादन में देश का नेतृत्व कर सकता है और यह दूसरी हरित क्रांति होगी।

बता दें कि किसानों के इस आंदोलन में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने की माँग, किसानों को पेंशन सुनिश्चित करने की माँग और उनकी कर्जमाफी और पिछले किसान आंदोलन के समय जो हिंसा में केस किसानों पर दर्ज हुए थे उन सबको रद्द करने की माँग थी। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार अभी सिर्फ एमएसपी पर ही प्रस्ताव लाई है। वो विचार करके बताएँगे अब आगे क्या होगा।

अखिलेश यादव ने राहुल गाँधी की यात्रा से बनाई दूरी, स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद सलीम शेरवानी ने सपा से दिया इस्तीफा: टुकड़ों में बिखर रहा I.N.D.I. गठबंधन

बिखर रहे INDI गठबंधन को समेटने के प्रयास में जुटी कॉन्ग्रेस को अब नया झटका समाजवादी पार्टी ने दिया है। समाजवादी पार्टी ने कॉन्ग्रेस से पहले सीटों का बँटवारे अंतिम निर्णय लेने के लिए कहा है। इसी के साथ अब इस बात पर भी संशय के बादल छाने लगे हैं कि अखिलेश यादव अपने सहयोगी राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल होंगे भी या नहीं। राहुल गाँधी अपनी यात्रा के साथ सोमवार (19 फरवरी 2024) को अमेठी पहुँच सकते हैं।

इंडिया टीवी ने सूत्रों के हवाले से खबर प्रकाशित की है कि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल नहीं होंगे। समाजवादी पार्टी ने कॉन्ग्रेस से साफ कहा है कि सबसे पहले शीट शेयरिंग पर बात तय हो। सोमवार (19 फरवरी) को राहुल गाँधी की यह यात्रा अमेठी और रायबरेली से निकलेगी। पहले माना जा रहा था कि इस यात्रा में अखिलेश और राहुल गाँधी एक साथ दिखेंगे। अब मिल रही जानकारी के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से भी कहा है कि वो फ़िलहाल इस यात्रा से दूरी बनाएँ।

मिल रही जानकारी के मुताबिक सपा ने अभी तक अमेठी और रायबरेली के अपने जिलाध्यक्षों को अखिलेश यादव के आने का कोई भी कार्यक्रम नहीं भेजा है। साथ ही इन्हें किसी भी प्रकार की तैयारी करते भी नहीं देखा जा रहा है। हालाँकि इन जिलों में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जोर-शोर से राहुल गाँधी के स्वागत की तैयारियाँ कर रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि सोमवार (19 फरवरी) की दोपहर तक दोनों पार्टियों के बीच सीटों का बँटवारा हो जाएगा। हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी भी पार्टी ने नहीं की है।

रिपब्लिक भारत का दावा है कि लखनऊ या रायबरेली में स्वामी प्रसाद मौर्य राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल हो सकते हैं। हाल ही में स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी में अपने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे भी पहली बार न्याय यात्रा में शामिल होंगे। सलीम शेरवानी ने भी सपा के पद से इस्तीफा दे दिया है।

बताते चलें कि आगामी 2024 लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी कॉन्ग्रेस को 15 से 16 सीटें ही देना चाहती है। हालाँकि कॉन्ग्रेस पार्टी कम से कम 21 से 22 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारना चाहती है। इस गतिरोध को दूर करने के लिए कई बार दोनों पार्टियों के नेता आपस में चर्चा कर चुके हैं जिसका अभी तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है। सबसे ज्यादा खींचतान उन सीटों पर बताई जा रही है जो कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हैं।